बेटी को खोने वालीं मां की चिट्ठी पर आया EY इंडिया के चेयरमैन का जवाब

EY इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी का कहना है कि कंपनी अपने कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोपरि मानती है.

Last Modified:
Friday, 20 September, 2024
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हाल ही में एक खबर आई थी कि EY इंडिया की एक युवा कर्मचारी की मौत के लिए उनकी मां ने कंपनी की नीतियों को कुसूरवार ठहराया था. 26 वर्षीय अन्‍ना सेबेस्टियन पेरयिल की मौत के बाद उनकी मां ने EY इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी को एक पत्र भी लिखा था. पत्र में उन्होंने कंपनी की कार्य संस्कृति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनकी बेटी की मौत ज्‍यादा काम के बोझ के कारण हुई.

हाल ही में हुआ था निधन
अन्ना की मां के पत्र पर अब EY इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी के बयान आया है. मेमानी का कहना है कि उन्हें अन्ना की मौत का गहरा दुख है. एक पिता होने के नाते वह समझ सकते हैं कि उनके परिवार पर क्या बीत रही होगी. अन्‍ना सेबेस्टियन ने मार्च में EY इंडिया का पुणे कार्यालय ज्वाइन किया था. इसके कुछ महीने बाद ही उनका निधन हो गया. उनकी मां अनीता ने अपनी बेटी की मौत के लिए कंपनी की नीतियों को कुसूरवार ठहराया. 

देर रात तक काम
अन्ना की मां ने अपने पत्र में लिखा कि अन्ना EY से जुड़कर बेहद खुश थी, लेकिन कंपनी में काम का बोझ इतना ज्‍यादा था कि वह रोज रात 1 बजे तक काम करती रहती थी. अन्ना को सीने में जकड़न की शिकायत भी थी. बावजूद उसे देर तक काम करना पड़ता था. अनीता ने पत्र में यह भी लिखा कि अन्ना के अंतिम संस्कार में EY का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं हुआ, इससे उन्हें बहुत दुख हुआ. 

आगे ऐसा नहीं होगा
पीड़ित मां के पत्र पर कंपनी के चेयरमैन का बयान आया है. राजीव मेमानी का कहना है कि वह अन्ना के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं. उन्हें इस बात का बहुत दुख है कि अन्ना के अंतिम संस्कार में EY इंडिया का कोई सदस्य शामिल नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति के बिल्कुल विपरीत है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और आगे कभी नहीं होगा. 

मैं चैन से नहीं बैठूंगा
मेनन ने आगे कहा कि कंपनी अपने कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोपरि मानती है. मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमारे कर्मचारियों की भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. मैं व्यक्तिगत रूप से एक सौहार्दपूर्ण कार्यस्थल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं. जब तक यह उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा. बता दें कि इस घटना के बाद से काम के घंटे और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस शुरू हो गई है. 


UPI पर MDR की तारीख बढ़ी आगे, अब 1 जनवरी 2027 से लागू होने की संभावना; छोटे कारोबारियों को छूट संभव

बैठक में 40 लाख रुपये तक सालाना कारोबार वाले व्यवसायों को MDR से छूट देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और कारोबारियों पर डिजिटल भुगतान की लागत का बोझ कम रखना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 08 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 08 October, 2026
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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से आगे बढ़ सकती है. अब इसे 1 जनवरी 2027 से लागू किए जाने की संभावना है. इसका मतलब है कि क्रिसमस तक चलने वाले त्योहारी सीजन में UPI से भुगतान पहले की तरह मुफ्त रह सकते हैं. इसके अलावा, सालाना 40 लाख रुपये तक कारोबार करने वाले छोटे कारोबारियों को MDR से छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है.

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के नेतृत्व वाली UPI और सर्विसेज संचालन समिति की बैठक में बुधवार को MDR लागू करने की तारीख समेत इससे जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक में छोटे कारोबारियों को प्रस्तावित MDR से राहत देने के विकल्प पर भी विचार किया गया.

15 अक्टूबर से लागू होने की थी योजना

UPI लेनदेन पर MDR लागू करने की चर्चा के बीच पहले इसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही थी. हालांकि, अब इसकी समयसीमा बढ़ाकर नए साल से लागू करने पर विचार किया जा रहा है. अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो त्योहारी और साल के अंत के दौरान डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों पर तत्काल कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं आएगा.

छोटे कारोबारियों को मिल सकती है छूट

बैठक में 40 लाख रुपये तक सालाना कारोबार वाले व्यवसायों को MDR से छूट देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और कारोबारियों पर डिजिटल भुगतान की लागत का बोझ कम रखना है.

हालांकि, MDR की नई तारीख और छोटे कारोबारियों के लिए छूट को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इस संबंध में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) को जानकारी के लिए ईमेल भेजा गया था, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था.

क्या है MDR?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी से भुगतान के बदले लिया जाता है. यह शुल्क भुगतान की प्रक्रिया में शामिल बैंक और अन्य पक्षों के बीच बंटता है. फिलहाल UPI के जरिए सामान्य बैंक खाते से किए जाने वाले भुगतान पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता और छोटे कारोबारियों के लिए भी लागत को लेकर अलग व्यवस्था रही है.

UPI देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है. ऐसे में MDR लागू होने की तारीख और इससे छोटे कारोबारियों को मिलने वाली संभावित छूट का असर डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले लाखों व्यापारियों पर पड़ सकता है.

 


HD Fire Protect IPO का प्राइस बैंड ₹258-271 तय, 13 अक्टूबर को खुलेगा ₹712 करोड़ का इश्यू

ऊपरी प्राइस बैंड ₹271 प्रति शेयर के हिसाब से HD Fire Protect का IPO करीब ₹712.13 करोड़ का होगा. यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें प्रमोटर शेयरधारक हरिश नरशी धरमशी और कुसुम धरमशी कुल 2.62 करोड़ शेयर बेचेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 08 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 08 October, 2026
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मुंबई स्थित फायर प्रोटेक्शन उपकरण बनाने वाली कंपनी HD Fire Protect ने अपने IPO के लिए ₹258 से ₹271 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. कंपनी का वैल्यूएशन ऊपरी प्राइस बैंड पर करीब ₹4,749 करोड़ बैठता है. कंपनी का IPO 13 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 15 अक्टूबर को बंद होगा. एंकर निवेशक 12 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे.

₹712 करोड़ का होगा IPO

ऊपरी प्राइस बैंड ₹271 प्रति शेयर के हिसाब से HD Fire Protect का IPO करीब ₹712.13 करोड़ का होगा. यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें प्रमोटर शेयरधारक हरिश नरशी धरमशी और कुसुम धरमशी कुल 2.62 करोड़ शेयर बेचेंगे. चूंकि IPO में कोई फ्रेश इश्यू शामिल नहीं है, इसलिए इससे मिलने वाली पूरी रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी. इश्यू से प्राप्त राशि शेयर बेचने वाले प्रमोटर शेयरधारकों को मिलेगी.

55 शेयरों का होगा लॉट

निवेशक कम से कम 55 शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे. इसके बाद 55 शेयरों के गुणक में बोली लगाई जा सकेगी. इश्यू का 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए, 15 फीसदी हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए और शेष 35 फीसदी हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित है. कंपनी 16 अक्टूबर को शेयरों के अलॉटमेंट का आधार तय करने की उम्मीद है, जबकि इसके शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग 21 अक्टूबर को प्रस्तावित है.

सितंबर 2025 में दाखिल किया था DRHP

HD Fire Protect ने सितंबर 2025 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था. कंपनी को जनवरी 2026 में IPO लाने की मंजूरी मिली थी.

क्या कारोबार करती है कंपनी?

HD Fire Protect फायर प्रोटेक्शन उपकरण और सिस्टम बनाती है. कंपनी पानी, फोम और गैस आधारित फायर सप्रेशन तकनीक से जुड़े उत्पाद तैयार करती है. महाराष्ट्र में कंपनी की दो मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी हैं और यह भारत के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी अपने उत्पाद बेचती है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 2,066 ग्राहकों को सेवाएं दीं. उसके कुल कारोबार में घरेलू बाजार की हिस्सेदारी 65 फीसदी रही, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से 35 फीसदी कारोबार आया.

FY26 में 13 फीसदी बढ़ा राजस्व

वित्त वर्ष 2026 में HD Fire Protect का राजस्व 13 फीसदी बढ़कर ₹489.3 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹433.1 करोड़ था. इस दौरान कंपनी का मुनाफा 6.4 फीसदी बढ़कर ₹116.8 करोड़ रहा. जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी ने ₹109 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जबकि उसका मुनाफा ₹23.8 करोड़ रहा. IPO के लिए अंबित, आनंद राठी एडवाइजर और आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज मर्चेंट बैंकर के तौर पर काम कर रहे हैं.


महंगा कच्चा तेल और RBI की दर बढ़ोतरी से बाजार पर दबाव, गिफ्ट निफ्टी 70 अंक फिसला; इन शेयरों पर रहेगी नजर

बुधवार को 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 फीसदी गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 फीसदी की गिरावट के साथ 22,603.05 पर आ गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 08 October, 2026
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Thursday, 08 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को दो दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया और अब गुरुवार को भी कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 70 अंक फिसलकर 22,560 के आसपास कारोबार कर रहा है. इसके अलावा ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि कमजोर वैश्विक संकेत, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है. इन संकेतों के बीच निवेशकों की नजर आज कंपनियों के तिमाही नतीजों और अन्य कॉरपोरेट अपडेट पर भी रहेगी.

बुधवार को 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 फीसदी गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 फीसदी की गिरावट के साथ 22,603.05 पर आ गया. सेंसेक्स के 30 शेयरों में सिर्फ 4 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 26 में गिरावट रही. यानी बीते कारोबारी सत्र में बाजार ने मंगलवार की तेजी का बड़ा हिस्सा गंवा दिया.

आज कमजोर शुरुआत के संकेत

गुरुवार सुबह गिफ्ट निफ्टी 22,560 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी के पिछले बंद स्तर से करीब 70 अंक नीचे है. इससे घरेलू बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. एशियाई बाजारों में भी दबाव है, जबकि अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में कमजोरी देखने को मिली.

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, बाजार में फिलहाल सतर्कता बनी रह सकती है. निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी.

101 डॉलर के पार ब्रेंट क्रूड

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए बड़ी चिंता है. ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इससे भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. इसका असर रुपये और चालू खाते के घाटे पर भी पड़ सकता है.

वहीं, अमेरिकी 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तरों के करीब बनी हुई है. ऊंची अमेरिकी यील्ड और भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बढ़ रहा है. ऐसे में FII बिकवाली में कमी और अमेरिकी यील्ड में नरमी बाजार के लिए अहम संकेत होंगे.

RBI की दर बढ़ोतरी से भी दबाव

बाजार के लिए बुधवार को RBI का मौद्रिक नीति फैसला भी अहम रहा. भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया. महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दरों में बढ़ोतरी से बाजार की धारणा पर दबाव आया है. रेपो रेट बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज और फंडिंग लागत बढ़ सकती है. ऐसे में निवेशक अब महंगाई के रुख और RBI के आगे के कदमों पर नजर रखेंगे.

कल किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

बुधवार को सेंसेक्स में कोटक महिंद्रा बैंक 2.21 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. भारती एयरटेल 1.33 फीसदी और ICICI बैंक 1.15 फीसदी चढ़े. दूसरी ओर, टाइटन 3.52 फीसदी गिरकर सबसे बड़ा लूजर रहा. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 2.21 फीसदी, एशियन पेंट्स 2.07 फीसदी और इन्फोसिस 2.06 फीसदी नीचे रहे. वहीं, निफ्टी में कोटक महिंद्रा बैंक 1.88 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा, जबकि टाइटन 3.80 फीसदी की गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर रहा. अडानी एंटरप्राइजेज, हिंडाल्को, JSW स्टील और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में भी कमजोरी रही.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजाप विशेषज्ञों के अनुसार, आज TCS, ओला इलेक्ट्रिक, टाटा स्टील, जुबिलेंट फूडवर्क्स, MRF समेत कई शेयर कॉरपोरेट अपडेट के चलते फोकस में रहेंगे. TCS आज सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगी. ओला इलेक्ट्रिक ने ₹27 प्रति शेयर के भाव पर 37.02 करोड़ शेयरों के राइट्स इश्यू के जरिए करीब ₹999.73 करोड़ जुटाने की योजना बनाई है, जिसकी रिकॉर्ड डेट 13 अक्टूबर और इश्यू 22 से 30 अक्टूबर तक रहेगा. टाटा स्टील का भारत में कच्चे इस्पात उत्पादन सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 62.1 लाख टन रहा, जबकि कंपनी ने टी स्टील होल्डिंग्स में इक्विटी शेयर खरीदकर 34 करोड़ डॉलर का निवेश किया है. जुबिलेंट फूडवर्क्स का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दूसरी तिमाही में 11.9 फीसदी बढ़कर ₹2,608.7 करोड़ रहा. MRF के मामले में केरल के राज्य कर विभाग ने टैक्स मांग को ₹91.53 करोड़ से घटाकर ₹36.19 करोड़ कर दिया है. टॉरेंट पावर की सहायक कंपनी ने 300 मेगावाट पवन ऊर्जा के बिजली खरीद समझौते को समाप्त किया है, जबकि IRFC ने अंतरिम डिविडेंड के लिए 23 अक्टूबर को रिकॉर्ड डेट तय की है. टीडी पावर सिस्टम्स ने पात्र संस्थागत निवेशकों के लिए शेयर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है और इससे करीब ₹600 करोड़ जुटाने की योजना है. टाटा पावर ने नॉर्वे की Ocean Sun के साथ भारत में झिल्ली आधारित तैरती सौर ऊर्जा तकनीक लाने के लिए साझेदारी की है. HCL टेक ने दक्षिण अफ्रीका में नया क्षेत्रीय मुख्यालय शुरू किया है. इसके अलावा फिनो पेमेंट्स बैंक, राठी स्टील एंड पावर, सुदर्शन केमिकल, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत फोर्ज और गोदरेज प्रॉपर्टीज से जुड़े अपडेट भी आज संबंधित शेयरों में हलचल बढ़ा सकते हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


फेस्टिव सीजन से पहले अमेजन देशभर में खोलेगा 50 नए आश्रय केंद्र, 2026 के अंत तक 250 का लक्ष्य

त्योहारी सीजन से पहले डिलीवरी नेटवर्क से जुड़े ड्राइवरों के लिए सुविधाओं का विस्तार, बेंगलुरु में दो मोबाइल आश्रय वैन शुरू; कंपनी ने 2026 में ऑपरेशंस नेटवर्क के सहयोगियों के लिए 2,800 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की बात कही

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
BWHindia

अमेजन इंडिया भारत में अपने ऑपरेशंस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 2026 में 2,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश कर रहा है. इस निवेश के तहत कंपनी डिलीवरी नेटवर्क से जुड़े लोगों के लिए सुविधाओं का विस्तार कर रही है. त्योहारी सीजन से पहले अमेजन ने देशभर में 50 नए ‘आश्रय’ रेस्ट सेंटर खोलने की घोषणा की है, जिससे इन केंद्रों की कुल संख्या 200 हो जाएगी. कंपनी की योजना 2026 के अंत तक 250 आश्रय केंद्रों का नेटवर्क तैयार करने की है. इसके साथ ही बेंगलुरु में दो मोबाइल आश्रय वैन भी शुरू की गई हैं.

अमेजन द्वारा बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई समेत विभिन्न शहरों में नए आश्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे. यह पहल केवल अमेजन के लिए डिलीवरी करने वाले ड्राइवरों तक सीमित नहीं है. आश्रय केंद्र ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के सभी डिलीवरी ड्राइवरों के लिए खुले हैं, चाहे वे किसी भी कंपनी के लिए काम करते हों.

बेंगलुरु में शुरू हुईं दो मोबाइल वैन

दिल्ली एनसीआर, मुंबई और हैदराबाद के बाद बेंगलुरु चौथा शहर बन गया है, जहां मोबाइल आश्रय वैन की सुविधा शुरू की गई है. बेंगलुरु में शुरू की गई दोनों वैन को अमेजन के वाइस प्रेसिडेंट, एम्प्लॉयी एक्सपीरियंस एंड रिलेशंस, सैंडी गॉर्डन और नॉर्थ अमेरिका एम्प्लॉयी रिलेशंस के वाइस प्रेसिडेंट ब्रेंडन ब्रैनन की मौजूदगी में रवाना किया गया.

कंपनी के मुताबिक मोबाइल वैन को अधिक आवागमन वाले डिलीवरी मार्गों पर तैनात किया जाएगा. इनमें वातानुकूलित बैठने की व्यवस्था, पेयजल, मुफ्त वाई-फाई और मोबाइल फोन चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. इसका उद्देश्य डिलीवरी ड्राइवरों को उनके मार्ग के दौरान ही कुछ समय आराम करने और जलपान की सुविधा उपलब्ध कराना है.

आश्रय केंद्रों में मिलेंगी ये सुविधाएं

आश्रय केंद्रों में वातानुकूलित बैठने की जगह, पेयजल, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, स्वच्छ शौचालय, प्राथमिक उपचार किट और विश्राम की सुविधा उपलब्ध है. प्रत्येक केंद्र में एक समय में 10 से 15 लोग बैठ सकते हैं. ड्राइवर प्रत्येक विजिट पर 30 मिनट तक इन सुविधाओं का मुफ्त इस्तेमाल कर सकते हैं. यहां पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है.

ये केंद्र पेट्रोल पंपों और व्यावसायिक परिसरों जैसे अधिक आवागमन वाले स्थानों पर पूरे साल सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक संचालित होते हैं. कंपनी के मुताबिक, इनके स्थान गूगल मैप्स पर भी उपलब्ध हैं, ताकि ड्राइवर आसानी से नजदीकी केंद्र का पता लगा सकें.

2024 में शुरू हुआ था आश्रय कार्यक्रम

अमेजन ने 2024 में दिल्ली एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई में आश्रय केंद्रों के पायलट कार्यक्रम के साथ इसकी शुरुआत की थी. इसके बाद इस नेटवर्क का लगातार विस्तार किया गया.

2025 में आश्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 100 की गई और इनका विस्तार 16 शहरों तक किया गया. मई 2026 में 50 नए केंद्र जोड़ने के बाद कुल संख्या 150 हो गई. इसी दौरान दिल्ली एनसीआर में मोबाइल आश्रय वैन की शुरुआत की गई.

सितंबर 2026 में कंपनी ने 50 और केंद्र जोड़ने की घोषणा की है. इसके बाद कुल संख्या 200 हो जाएगी. मोबाइल आश्रय वैन अब दिल्ली एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु में उपलब्ध हैं. कंपनी का लक्ष्य 2026 के अंत तक 250 आश्रय केंद्रों का नेटवर्क तैयार करना है.

अमेजन ने 2,800 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की बात कही

अमेजन इंडिया के निदेशक-ऑपरेशंस सलीम आर. मेमन ने कहा कि त्योहारी सीजन में डिलीवरी में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए पूरे उद्योग के डिलीवरी ड्राइवरों के लिए रास्ते में विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि 200 केंद्रों तक विस्तार और अधिक शहरों में मोबाइल वैन शुरू होने से ज्यादा ड्राइवरों तक सुविधा पहुंच सकेगी. कंपनी के मुताबिक यह विस्तार 2026 में अपने ऑपरेशंस नेटवर्क के सहयोगियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय कल्याण को मजबूत करने के लिए किए जा रहे 2,800 करोड़ रुपये से अधिक के व्यापक निवेश का हिस्सा है.
 


भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर के रिकॉर्ड स्तर से 50 अरब डॉलर घटकर 734.6 अरब डॉलर

लगातार चौथे सप्ताह घटा विदेशी मुद्रा भंडार, रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच RBI का हस्तक्षेप जारी; कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी पूंजी निकासी ने बढ़ाई चिंता

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार चौथे सप्ताह घटकर 734.6 अरब डॉलर रह गया है. सितंबर में 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब इसमें करीब 50 अरब डॉलर की गिरावट आ चुकी है. रुपये पर बढ़ते दबाव को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप बढ़ाए जाने के बीच भंडार में यह कमी आई है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बढ़ती निकासी ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है.

4 सितंबर को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. इसके बाद पांच सप्ताह से भी कम समय में इसमें करीब 51 अरब डॉलर की कमी आई है. यह गिरावट बताती है कि विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रहा है.

रुपये को संभालने के लिए RBI का हस्तक्षेप बढ़ा

विदेशी मुद्रा भंडार में ताजा गिरावट RBI की ओर से स्पॉट मार्केट में डॉलर की बिक्री और डॉलर-रुपये की बिक्री/खरीद वाले विदेशी मुद्रा स्वैप के इस्तेमाल को दर्शाती है. इन कदमों का उद्देश्य रुपये में गिरावट को नियंत्रित करने के साथ बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को भी मैनेज करना है.

हालांकि, RBI के हस्तक्षेप के बावजूद रुपये पर दबाव बना हुआ है. बुधवार को रुपया करीब 0.5 फीसदी कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.8450 पर आ गया. यह 96.96 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है.

कच्चे तेल की ऊंची वैश्विक कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी इक्विटी निवेश की बढ़ती निकासी ने रुपये पर दबाव और बढ़ा दिया है. रुपये में कमजोरी से आयातित महंगाई का जोखिम भी बढ़ता है, खासकर इसलिए क्योंकि भारत कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है.

सितंबर में भी तेजी से घटा था भंडार

ताजा गिरावट सितंबर में विदेशी मुद्रा भंडार में आई तेज कमी के बाद हुई है. 18 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भंडार 14.88 अरब डॉलर घटकर 765.9 अरब डॉलर रह गया था. इसके बाद 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में इसमें 18.34 अरब डॉलर की और कमी आई और यह 747.56 अरब डॉलर पर आ गया.

25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में गिरावट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कमी के कारण हुई. इस दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 15.57 अरब डॉलर घटकर 615.41 अरब डॉलर रह गईं. वहीं, स्वर्ण भंडार 2.59 अरब डॉलर घटकर 108.7 अरब डॉलर हो गया. विशेष आहरण अधिकार (SDR) 97 मिलियन डॉलर घटकर 18.64 अरब डॉलर और IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन 86 मिलियन डॉलर घटकर 4.8 अरब डॉलर रह गई.

ताजा गिरावट से पहले विदेशी मुद्रा के असामान्य रूप से बड़े प्रवाह का दौर भी रहा था. जून से सितंबर के बीच RBI की ओर से उठाए गए कदमों से करीब 143.5 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आया, जिसमें लगभग 133 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा जमा के जरिए आए. इससे सितंबर में भंडार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में मदद मिली थी.

रुपये को समर्थन और नकदी प्रबंधन के बीच संतुलन

RBI की विदेशी मुद्रा संबंधी गतिविधियां घरेलू नकदी प्रबंधन से भी जुड़ी हैं. अगस्त के अंत में केंद्रीय बैंक की फॉरवर्ड बुक में डॉलर की नेट शॉर्ट पोजिशन रिकॉर्ड 200.06 अरब डॉलर पर पहुंच गई, जो जुलाई के अंत में 136.77 अरब डॉलर थी. यह बढ़ोतरी बड़े एकमुश्त डॉलर प्रवाह को सोखने के बाद हुई.

इसके बाद RBI ने अपनी फॉरवर्ड पोजिशन को मैनेज करने और रुपये की अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए खासकर छोटी अवधि के डॉलर-रुपया सेल/बाय स्वैप का इस्तेमाल किया है.

भंडार का स्तर अभी भी मजबूत

हालांकि विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 50 अरब डॉलर की कमी आई है, लेकिन इसका मौजूदा स्तर अभी भी पर्याप्त है. वित्त मंत्रालय की सितंबर की आर्थिक समीक्षा के मुताबिक 18 सितंबर तक 765.9 अरब डॉलर का भंडार मौजूद था, जो करीब 11.1 महीने के वस्तु आयात को कवर करने के बराबर था. हालांकि, समीक्षा में अस्थिर पूंजी प्रवाह, ऊंची ऊर्जा कीमतों और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को रुपये और बाहरी क्षेत्र के लिए जोखिम बताया गया था.

अब बाजार की नजर रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के प्रवाह और RBI के आगे के हस्तक्षेप पर रहेगी. रुपया एक बार फिर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है. ऐसे में आने वाले हफ्तों में रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए RBI कितनी तेजी से विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है, यह बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बना रहेगा.
 


भारतीय कंपनियों के लिए श्रीलंका में कारोबार के नए अवसर, जनवरी 2027 में होगा बड़ा एक्सपो

पोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल सर्विसेज तक कई क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं, श्रीलंका ने भारतीय कारोबारियों और निवेशकों को ‘श्रीलंका एक्सपो 2027’ में शामिल होने का न्योता दिया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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भारत और श्रीलंका के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में श्रीलंका ने भारतीय कारोबारियों और निवेशकों को अपने बाजार में मौजूद अवसर तलाशने का न्योता दिया है. श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिशिनी कोलोन्ने ने भारतीय बिजनेस लीडर्स से जनवरी 2027 में कोलंबो में होने वाले ‘श्रीलंका एक्सपो 2027’ में शामिल होने की अपील की है. 14 से 17 जनवरी तक होने वाले इस एक्सपो में व्यापार, निवेश और विभिन्न उद्योगों में साझेदारी के अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा.

श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिशिनी कोलोन्ने ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच पहले से मजबूत आर्थिक और लोगों के बीच संबंध हैं, लेकिन व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं. श्रीलंका एक्सपो 2027 को इसी दिशा में दोनों देशों के कारोबारियों के बीच नए संपर्क और साझेदारी विकसित करने के मंच के तौर पर देखा जा रहा है.

इन सेक्टरों में कारोबार के अवसर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीलंका ने भारतीय कंपनियों के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग और निवेश की संभावनाएं सामने रखी हैं. इनमें व्यापार और निवेश के अलावा पोर्ट और लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल सर्विसेज शामिल हैं.

हाई कमिश्नर के मुताबिक श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी उसे कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है. ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए श्रीलंका के बाजार में कारोबार बढ़ाने के साथ ही वहां से दूसरे क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने के अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

BIMSTEC देशों में कारोबार बढ़ाने पर जोर

यह बात ‘Business Opportunities in BIMSTEC Countries’ सम्मेलन के दौरान सामने आई. सम्मेलन में BIMSTEC के सभी सात सदस्य देशों के वरिष्ठ राजनयिकों, विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और करीब 80 भारतीय कारोबारी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

विदेश मंत्रालय में Secretary (East) Ambassador Rudrendra Tandon ने BIMSTEC देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को और विस्तार देने की संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने भारतीय कारोबारियों से पड़ोसी देशों में उपलब्ध कारोबारी अवसरों को तलाशने की अपील की.

वहीं BIMSTEC के Secretary-General Ambassador Indra Mani Pandey ने क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी और बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया.

कोलंबो में जुटेंगे एक्सपोर्टर्स और निवेशक

श्रीलंका एक्सपो 2027 में श्रीलंकाई एक्सपोर्टर्स के साथ अंतरराष्ट्रीय खरीदार, निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. श्रीलंका की कोशिश इस मंच के जरिए नए व्यापारिक और निवेश संबंध विकसित करने की है.

श्रीलंका भारत के साथ अपने संबंधों को केवल कूटनीति और पर्यटन तक सीमित रखने के बजाय व्यापार, निवेश और नई औद्योगिक साझेदारियों तक विस्तार देने पर जोर दे रहा है. ऐसे में जनवरी 2027 में होने वाला यह एक्सपो भारतीय कंपनियों के लिए श्रीलंका के बाजार और क्षेत्रीय कारोबार के अवसरों को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है.

 


RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, महंगा होगा कर्ज; रियल एस्टेट से NBFC तक एक्सपर्ट्स ने बताया असर

RBI के 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद इंडस्ट्री की मिली-जुली प्रतिक्रिया, विशेषज्ञों ने महंगे कर्ज के बीच मजबूत मांग और लंबी अवधि के ग्रोथ आउटलुक को बताया अहम

रितु राणा by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है. RBI के सख्त रुख के बाद रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय सेवा क्षेत्र से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. इंडस्ट्री विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ी ब्याज दरों से होम लोन और फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है, लेकिन मजबूत आय वृद्धि, शहरीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और घरों की मांग के चलते रियल एस्टेट पर असर सीमित रह सकता है. वहीं, वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों ने महंगाई, सिस्टम में लिक्विडिटी, क्रेडिट फ्लो और आगे की ब्याज दरों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई है. कुछ विशेषज्ञों ने दिसंबर में एक और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना भी जताई है.

रियल एस्टेट की लंबी अवधि की मांग मजबूत

बीपीटीपी के सीईओ और प्रेसिडेंट मानिक मलिक के मुताबिक, RBI का फैसला अर्थव्यवस्था की मजबूती और उभरते महंगाई दबाव से निपटने की क्षमता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट के लिए लंबे समय में अवसर बरकरार हैं. बढ़ती आय, शहरीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और घर खरीदने की बढ़ती आकांक्षा आवासीय मांग को लगातार समर्थन दे रहे हैं.

उन्होंने कहा कि स्थिर मैक्रोइकोनॉमिक माहौल, नियंत्रित महंगाई और आर्थिक विकास उपभोक्ता भरोसे और निवेश के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं. मलिक ने गुणवत्तापूर्ण रियल एस्टेट को एंड-यूजर्स और निवेशकों दोनों के लिए लंबे समय तक महत्वपूर्ण एसेट बने रहने की उम्मीद जताई.

पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरिवाल ने भी कहा कि 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का रियल एस्टेट पर असर सीमित रह सकता है. उनके मुताबिक, गुरुग्राम के लग्जरी रेजिडेंशियल सेगमेंट में संपन्न खरीदार और वरिष्ठ पेशेवर EMI में मामूली बदलाव की तुलना में जगह, डिजाइन और लाइफस्टाइल को अधिक महत्व देते हैं.

उन्होंने बताया कि कमर्शियल रियल एस्टेट को भी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की बढ़ती मांग और प्रमुख कॉरिडोर में प्रीमियम वर्कस्पेस की जरूरत से समर्थन मिल रहा है. मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के कारण गुरुग्राम के दोनों सेगमेंट में आने वाली तिमाहियों में मांग को लेकर भरोसा बना हुआ है.

एयू रियल एस्टेट के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल ने कहा, "रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से खरीदार फाइनेंसिंग को लेकर थोड़ा सोच-समझकर फैसला ले सकते हैं, लेकिन NCR में घरों की असल मांग अभी भी स्थिर बनी हुई है. आज के खरीदार सिर्फ लोन की लागत पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, बल्कि लोकेशन, कनेक्टिविटी, कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी और लंबे समय में मिलने वाली वैल्यू को भी देख रहे हैं. खुद रहने के लिए घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह फैसला उनकी लाइफस्टाइल और जीवन के अलग-अलग पड़ावों की जरूरतों से भी जुड़ा है. आने वाले समय में खरीदार सोच-समझकर फैसला ले सकते हैं और अच्छी लोकेशन, बेहतर प्लानिंग और अच्छी वैल्यू देने वाले घरों को प्राथमिकता दे सकते हैं."

महंगे कर्ज से कुछ खरीदार कर सकते हैं इंतजार

सिल्वरडोम रियल्टर्स के फाउंडर और सीईओ ऋषि सिंह ने कहा कि रेपो रेट बढ़कर 5.50% होने से अल्पावधि में फाइनेंसिंग लागत पर कुछ दबाव बढ़ सकता है और कुछ खरीदार अपने बजट का दोबारा आकलन करने के लिए समय ले सकते हैं. हालांकि, उनके मुताबिक इससे भारतीय रियल एस्टेट की व्यापक तस्वीर बदलने की संभावना कम है. उन्होंने कहा कि घर खरीदने की इच्छा बनी हुई है और आय में वृद्धि के साथ खरीदार भरोसेमंद डेवलपमेंट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. खासकर अच्छी कनेक्टिविटी और स्थापित माइक्रो-मार्केट्स में वास्तविक जरूरत वाले खरीदार अपनी योजनाओं के साथ आगे बढ़ सकते हैं.

ओमैक्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित गोयल ने कहा कि रेपो रेट को 5.50% तक बढ़ाना महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर RBI के फोकस को दिखाता है. हालांकि, बढ़ी हुई उधारी लागत और खरीदारों के रुख में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है, खासकर ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेगमेंट में.

उनके मुताबिक, बढ़ती आय, बदलती आकांक्षाएं और गुणवत्तापूर्ण प्रोजेक्ट्स की मांग आवासीय बाजार को समर्थन देती रहेगी. ऐसे में डेवलपर्स के लिए खरीदारों को बेहतर वैल्यू देने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना अहम होगा.

टियर-2 और टियर-3 शहरों पर भी नजर

मंगलम ग्रुप की डायरेक्टर अमृता गुप्ता ने कहा कि 5.50% की रेपो रेट से उधारी लागत पर दबाव आएगा, लेकिन रियल एस्टेट बाजार के पास ऐसे बदलावों से निपटने के लिए पहले की तुलना में मजबूत आधार है.

उन्होंने कहा कि महानगरों से आगे बढ़ती मांग एक महत्वपूर्ण ट्रेंड बन रही है. टियर-2 शहरों में खरीदार अब केवल कीमत के आधार पर फैसला नहीं कर रहे, बल्कि विकास की गुणवत्ता, कनेक्टिविटी और लंबी अवधि की संभावनाओं को भी महत्व दे रहे हैं. त्योहारी सीजन में खरीदारों की रुचि बढ़ने के बावजूद ऊंची ब्याज दरें कुछ लोगों को निर्णय लेने में थोड़ा अधिक समय लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं.

एसोटेक रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज गुलाटी ने कहा कि 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है. इससे लोन और फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है, जिसका असर ग्राहकों के फैसलों और भरोसे पर पड़ सकता है.

हालांकि, उन्होंने रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए लंबी अवधि की संभावनाओं को मजबूत बताया. उनके मुताबिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर बढ़ती आवाजाही इन क्षेत्रों में प्रॉपर्टी और हॉस्पिटैलिटी की मांग को सहारा दे रही है.

न्यूमैक्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल ने कहा कि रेपो रेट बढ़ोतरी का असर मुख्य रूप से होम लोन की ब्याज दरों के जरिए दिख सकता है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में खरीदार EMI को लेकर अधिक संवेदनशील होते हैं, इसलिए कुछ समय के लिए निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. हालांकि, किफायती और मिड-सेगमेंट आवास की मजबूत मांग इस असर को सीमित कर सकती है.

महंगाई के दबाव के बावजूद अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत

क्रीवा के सीईओ मयंक जैन ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक महंगाई की स्थिति को देखते हुए 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी समझ में आती है. उन्होंने कहा कि RBI का रुख अब थोड़ा सख्त हुआ है और अगर महंगाई का दबाव बना रहता है तो आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं.

जैन के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था अभी मजबूत है और पहली तिमाही में वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8% रही है. रियल एस्टेट के लिए अहम यह होगा कि ब्याज दरों में बदलाव का लोन की उपलब्धता और बाजार में पैसे की उपलब्धता पर कितना असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि एक बार की रेपो रेट बढ़ोतरी को रियल एस्टेट बाजार में बड़े बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

राइज इंफ्रावेंचर्स लिमिटेड के वाइस प्रेजीडेंट मोहित गवरी ने कहा कि इस समय केवल ब्याज दरों में बदलाव के बजाय बाजार की बुनियादी स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने खरीदारों के लिए लोकेशन, डेवलपर की विश्वसनीयता, लोन की उपलब्धता और निवेश अवधि जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण बताया. उनके मुताबिक, अच्छी लोकेशन और सही कीमत वाले रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में आगे भी रुचि बनी रह सकती है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स से कंस्ट्रक्शन सेक्टर को सहारा

एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विप्मेंट (ACE) के सीएफओ राजन लूथरा ने कहा कि 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोच-समझकर लिया गया कदम है. उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रमुख जोखिम बताया.

उन्होंने कहा कि कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर में बढ़ी हुई फाइनेंसिंग लागत आने वाले समय में निवेश के फैसलों को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, सड़कों, रेलवे और शहरी विकास में सरकारी कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां मांग और सेक्टर की ग्रोथ को समर्थन देती रहेंगी.

महंगा कर्ज, लेकिन मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से निवेश की उम्मीद

रिलायंस मेट सिटी के सीईओ मनीष जायसवाल ने कहा कि करीब चार साल में पहली बार RBI द्वारा दरें बढ़ाने का फैसला महंगाई को लेकर समय रहते कदम उठाने का संकेत है. उनके मुताबिक, आने वाले समय में कर्ज थोड़ा महंगा हो सकता है, लेकिन गंभीर निवेशकों के लिए कुछ तिमाहियों तक सस्ता कर्ज मिलने से अधिक महत्वपूर्ण कीमतों में स्थिरता है.

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के लिए निवेश की रफ्तार बनाए रखना, उत्पादकता बढ़ाना और तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल जरूरी होगा. इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के समय और लागत को कम कर सकती है. ऐसे फायदे महंगी पूंजी के दौर में और महत्वपूर्ण हो जाते हैं.

दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की संभावना?

कोटक महिंद्रा एएमसी के सीआईओ-डेट दीपक अग्रवाल ने कहा कि RBI की MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किया है, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि महंगाई अब पहले की तरह कम नहीं है और पॉलिसी स्टांस को “न्यूट्रल” से “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” में बदलना RBI के अधिक सख्त रुख का संकेत है.

अग्रवाल के मुताबिक, मौजूदा नीति को देखते हुए दिसंबर की पॉलिसी में भी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना है, हालांकि यह अंतर्निहित महंगाई और उसके दूसरे दौर के प्रभावों पर निर्भर करेगी. FY2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% किया गया है, जबकि GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया गया है. उन्होंने बताया कि पॉलिसी के बाद बॉन्ड बाजार में कमजोरी रही और G-Sec यील्ड में करीब 5-6 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई, जिसके बाद यह करीब 7.25% के स्तर पर कारोबार कर रही थी.

NBFCs के लिए महंगाई से ज्यादा जरूरी क्रेडिट फ्लो

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की ग्रुप एग्जीक्यूटिव और सीएफओ अन्नापूर्णा वेंकटरमानन ने कहा कि RBI की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% करना उम्मीद के मुताबिक है. उनके अनुसार 'calibrated tightening' का रुख महंगाई के खिलाफ RBI के निर्णायक कदम को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि जियोपॉलिटिकल संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और प्रतिकूल मानसून जैसे कारणों से महंगाई पर दबाव बढ़ा है.

वेंकटरमानन के मुताबिक अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन 5.8% रह सकती है, जबकि इस वित्त वर्ष में कोर महंगाई 4.4% रहने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि पिछली रेपो रेट पर फॉरवर्ड-लुकिंग महंगाई अनुमान के मुकाबले रियल रेट नकारात्मक थे. ऐसे में अमेरिकी फेड की हालिया दर बढ़ोतरी, 'higher for longer' रुख और रुपये पर लगातार बने दबाव के बीच RBI का यह फैसला बाजार को जरूरी स्पष्टता देता है.

उन्होंने कहा कि सिस्टम में करीब ₹5 लाख करोड़ की लिक्विडिटी मौजूद है और RBI के OMO तथा विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के जरिए इसमें और कमी आ सकती है. इससे निकट अवधि में यील्ड कर्व में फ्लैटनिंग देखने को मिल सकती है. उनके मुताबिक NBFCs को अपनी Asset-Liability Management पर अनुशासन बनाए रखने और अवधि के बेहतर मिलान पर ध्यान देने की जरूरत होगी, ताकि मार्जिन सुरक्षित रहते हुए क्रेडिट फ्लो जारी रह सके.

हालांकि, वेंकटरमानन ने इस टाइटनिंग साइकिल को ग्रोथ के लिए बाधा के तौर पर नहीं देखा है. उन्होंने कहा कि निकट अवधि में क्रेडिट डिमांड पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि त्योहारी सीजन की मजबूत गतिविधि और ब्याज दरों के असर के अर्थव्यवस्था में पहुंचने में लगने वाला समय मांग को सपोर्ट कर सकता है. RBI की ओर से FY2027 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.1% किए जाने से भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक मजबूती भी बनी हुई है.

उनके मुताबिक रिटेल, MSME और कमर्शियल सेक्टर में लंबे समय तक क्रेडिट की मांग मजबूत रह सकती है. ऐसे में जैसे-जैसे यील्ड में उतार-चढ़ाव स्थिर होगा, मजबूत पूंजी वाली NBFCs को अच्छी गुणवत्ता वाले बाजार हिस्सेदारी के अवसर मिल सकते हैं.


पारंपरिक कारोबार से नए ग्रोथ इंजन तक, BW Businessworld के नए अंक में पार्थ जिंदल पर फोकस

नए अंक में अगली पीढ़ी के नेतृत्व, बदलते उपभोक्ता बाजार और कारोबार के विस्तार पर विशेष कवरेज; BW Future of Design Summit and Awards 2026 पर भी विशेष पैकेज

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
BWHindia

BW बिजनेसवर्ल्ड के नए अंक में भारत के स्थापित कारोबारी समूहों के पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर नए कारोबार और ग्रोथ इंजन तैयार करने की रणनीति पर फोकस किया गया है. अंक में अगली पीढ़ी के नेतृत्व, बदलते उपभोक्ता बाजार और उन क्षमताओं को प्रमुखता दी गई है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण को आकार दे सकती हैं.

JSW के विस्तार पर पार्थ जिंदल का कवर फीचर

अंक के कवर पैकेज में पार्थ जिंदल और JSW के बदलते कारोबारी विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई है. इसमें बताया गया है कि समूह अपने पारंपरिक औद्योगिक कारोबार से आगे बढ़कर सीमेंट, पेंट्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी का विस्तार कर रहा है.

कवर स्टोरी और इंटरव्यू में पार्थ जिंदल की इन नए कारोबारों से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग के अनुभव और पूंजी के इस्तेमाल से ऐसे बाजारों में प्रवेश की रणनीति पर चर्चा की गई है, जहां व्यक्तिगत उपभोक्ता की जरूरतों और पसंद को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है.

फीचर में कारोबार खड़ा करने, अधिग्रहण करने और साझेदारी के जरिए विस्तार करने के बीच विकल्पों पर भी चर्चा की गई है. इसके साथ ही नए कारोबारों को सफल बनाने के लिए जरूरी प्रबंधन अनुशासन और मजबूत संस्थागत ढांचे पर जोर दिया गया है.

पार्थ जिंदल ने JSW के नए कारोबारों को उनके व्यावसायिक आधार पर आगे बढ़ाए जाने वाले अवसरों के तौर पर देखा है. कवर पैकेज में अगली पीढ़ी के कारोबारी नेताओं की बढ़ती जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया गया है.

उद्योग से उपभोक्ता बाजार तक बढ़ रहा फोकस

अंक में ‘From Smokestack To Storefront’ शीर्षक से एक विशेष विश्लेषण भी शामिल है. इसमें बताया गया है कि औद्योगिक समूह उपभोक्ता कारोबार की ओर क्यों बढ़ रहे हैं और इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा पर क्या असर पड़ सकता है.

इस हिस्से में रिलायंस और आदित्य बिड़ला ग्रुप के उदाहरणों के जरिए अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणियों में स्थापित कारोबारी समूहों की बढ़ती मौजूदगी का विश्लेषण किया गया है. इसमें पैमाने, पूंजी और वितरण नेटवर्क को विस्तार के महत्वपूर्ण साधनों के रूप में देखा गया है. हालांकि, लंबे समय तक सफलता के लिए उपभोक्ताओं की जरूरत और पसंद को समझना भी अहम बताया गया है.

अंक में यह भी चर्चा की गई है कि स्थापित कारोबारी समूहों के नए क्षेत्रों में विस्तार से प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता विकल्प, नवाचार और रोजगार के अवसरों पर असर पड़ सकता है. साथ ही, लंबे समय तक विकास के लिए मजबूत संस्थानों, दीर्घकालिक निवेश और उपभोक्ता-केंद्रित क्षमताओं को जरूरी बताया गया है.

कारोबार में अगली पीढ़ी की भूमिका पर जोर

BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि बाजार और तकनीक को लेकर लिए जा रहे फैसले भारत को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार कर रहे हैं और इनका असर पारिवारिक कारोबार से आगे उपभोक्ताओं और लोगों की आजीविका तक पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि भारत के पुराने कारोबारी घराने एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां अगली पीढ़ी के नेता कारोबार में क्या बनाया जाए, क्या खरीदा जाए और किन क्षेत्रों को पेशेवर प्रबंधन के लिए छोड़ा जाए, जैसे सवालों पर विचार कर रहे हैं. उनके मुताबिक, इन समूहों की महत्वाकांक्षाओं को लंबे समय के आर्थिक मूल्य में बदलने में उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होगा.

BW बिजनेसवर्ल्ड की ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर नूर फातिमा वारसिया ने कहा कि इस विस्तार के पीछे कारोबारी अनुशासन महत्वपूर्ण है. औद्योगिक क्षमता से उपभोक्ता बाजार में प्रासंगिकता हासिल करने के लिए धैर्य, संस्थागत क्षमता और उपभोक्ताओं का भरोसा हासिल करने की जरूरत होती है.

BW Future of Design Summit and Awards 2026 पर विशेष पैकेज

नए अंक में BW Future of Design Summit and Awards 2026 पर भी विशेष पैकेज शामिल किया गया है. इसमें इस बात पर फोकस किया गया है कि कारोबारी और संस्थान नए विचारों को वास्तविक उत्पादों, सेवाओं और उपयोगी अनुभवों में किस तरह बदल सकते हैं.

‘Designing for a Self-Reliant India’ थीम के तहत आयोजित इस समिट में तेजी से बदलते भारतीय बाजार के लिए बेहतर उत्पाद, सेवाएं और रोजमर्रा के अनुभव तैयार करने में डिजाइन की भूमिका पर चर्चा की गई.

अवार्ड्स में ऐसे प्रोटोटाइप और तैयार डिजाइन को शामिल किया गया, जिनका उद्देश्य केवल बेहतर दिखना नहीं बल्कि वास्तविक समस्याओं का समाधान करना, उपयोगिता बढ़ाना और बेहतर उपभोक्ता अनुभव तैयार करना है.

डिजाइन पैकेज के जरिए भारत की अगली विकास यात्रा में नवाचार, क्षमता निर्माण और नए विचारों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने की भूमिका को रेखांकित किया गया है. BWBusinessworld का यह नया अंक डिजिटल और प्रिंट, दोनों प्रारूपों में उपलब्ध है. 


त्योहारी सीजन में 6% तक पहुंच सकती है महंगाई; कच्चा तेल और अल नीनो बढ़ाएंगे दबाव: RBI

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आने वाले समय में महंगाई पर सप्लाई से जुड़े कई दबाव बने रह सकते हैं. इनमें मानसून की स्थिति, अल नीनो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई को लेकर अपने अनुमान में बढ़ोतरी की है. केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई दर 5.2 फीसदी रह सकती है. सबसे ज्यादा चिंता दिसंबर तिमाही को लेकर है, जब महंगाई दर 6 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. यह वही दौर होगा जब देश में त्योहारी सीजन के बाद मांग बनी रहती है. RBI के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर मानसून, अल नीनो और रुपये में कमजोरी महंगाई का दबाव बढ़ा सकते हैं. ऐसे में आने वाले महीनों में आम लोगों के घरेलू बजट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है.

वित्त वर्ष 2027 में 5.2% रह सकती है महंगाई

RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.7 फीसदी रह सकती है. वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी महंगाई का अनुमान 5.6 फीसदी रखा गया है.

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आने वाले समय में महंगाई पर सप्लाई से जुड़े कई दबाव बने रह सकते हैं. इनमें मानसून की स्थिति, अल नीनो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं.

कच्चा तेल क्यों बढ़ा सकता है महंगाई?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने पर देश में ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ सकती है.

इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता. परिवहन महंगा होने से माल ढुलाई, उत्पादन और रोजमर्रा की कई वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है. कंपनियों की लागत बढ़ने पर उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंच सकता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.

अल नीनो से खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं महंगी

महंगाई के मोर्चे पर दूसरा बड़ा जोखिम अल नीनो और कमजोर या असमान मानसून से जुड़ा है. बारिश कम होने पर फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इसका असर सब्जियों, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की सप्लाई पर पड़ सकता है.

अगर कृषि उत्पादन कम रहता है तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इससे खाद्य महंगाई बढ़ेगी और इसका असर कुल खुदरा महंगाई यानी CPI पर भी दिखाई दे सकता है. यही वजह है कि RBI आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों और मानसून की स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है.

कमजोर रुपया भी बढ़ा सकता है दबाव

महंगाई का एक और जोखिम रुपये की कमजोरी से जुड़ा है. इस साल रुपये में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई है. कमजोर रुपया आयातित वस्तुओं को महंगा कर देता है. कच्चे तेल का भुगतान अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में होता है, इसलिए रुपये की कमजोरी के साथ तेल आयात की लागत और बढ़ सकती है.

इसका असर ईंधन से लेकर परिवहन और उत्पादन लागत तक दिखाई दे सकता है. ऐसे में कच्चे तेल की ऊंची कीमत और कमजोर रुपया मिलकर महंगाई का दबाव बढ़ा सकते हैं.

दिसंबर तिमाही पर सबसे ज्यादा नजर

RBI का 6 फीसदी का अनुमान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिसंबर तिमाही में महंगाई केंद्रीय बैंक की ऊपरी सहनशीलता सीमा के करीब पहुंच सकती है. अर्थशास्त्रियों ने भी पहले से ही इस अवधि में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई थी.

अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है और लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो RBI पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है. बुधवार को RBI MPC ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया है.

दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंक भी महंगाई से चिंतित

महंगाई का दबाव केवल भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका, यूरोप और जापान के केंद्रीय बैंक भी ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से पैदा होने वाले महंगाई जोखिम पर नजर रख रहे हैं.

ऊंची ऊर्जा कीमतें वैश्विक स्तर पर उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ा सकती हैं. ऐसे माहौल में दुनिया के केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है.

फिलहाल RBI के सामने भी यही चुनौती है. एक तरफ अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल, खाद्य कीमतों और मौसम से जुड़े जोखिम महंगाई को फिर से ऊपर धकेल सकते हैं.
 


RBI ने 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाया रेपो रेट, अब महंगे होंगे होम और कार लोन

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने करीब 44 महीने बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है. महंगाई के बढ़ते दबाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का फैसला किया है. इसके साथ ही रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है. ब्याज दर बढ़ने का सीधा असर नए कर्ज की लागत पर पड़ेगा, जबकि फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन की EMI भी बढ़ सकती है.

फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ी ब्याज दर

RBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया था. इसके बाद लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया. वहीं, साल 2025 में RBI ने फरवरी से दिसंबर के बीच रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. अब महंगाई के दबाव के बीच केंद्रीय बैंक ने रुख बदलते हुए रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है.

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते आर्थिक माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. हालांकि, महंगाई को लेकर जोखिम बढ़ा है, जिसके चलते मौद्रिक नीति में सख्ती का फैसला लिया गया.

महंगाई बढ़ने की क्या है वजह?

मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव देखने को मिला है. इसका असर केवल ईंधन की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक गैस, खाद और दूसरी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर भी पड़ा है. इससे महंगाई के मोर्चे पर दबाव बढ़ा है.

इसके अलावा अल नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया है. इससे आने वाले समय में खाद्य कीमतों पर भी दबाव बने रहने की आशंका है. RBI ने अनुमान जताया है कि अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन करीब 5.8 फीसदी रह सकती है.

होम और कार लोन की EMI पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है. इसका असर बैंकिंग सिस्टम की ब्याज दरों पर पड़ सकता है. खास तौर पर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन और अन्य रिटेल लोन की EMI बढ़ सकती है. हालांकि, किसी ग्राहक की EMI में वास्तविक बढ़ोतरी उसके लोन की राशि, बची हुई अवधि, ब्याज दर और बैंक द्वारा दर में किए गए बदलाव पर निर्भर करेगी. यानी रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक की EMI भी ठीक 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ जाएगी. कार लोन समेत अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर भी इसका असर पड़ सकता है. वहीं फिक्स्ड रेट वाले मौजूदा लोन पर तुरंत असर जरूरी नहीं है.

आगे भी बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

RBI के रुख से संकेत मिलता है कि अगर महंगाई का दबाव आगे भी बना रहता है तो दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. केंद्रीय बैंक का फोकस फिलहाल महंगाई को नियंत्रित रखने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने पर है.

7.1 फीसदी रह सकती है GDP ग्रोथ

RBI के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है. पहली तिमाही में वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही. केंद्रीय बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रखा है.

RBI के अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रह सकती है. वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रखा गया है.