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माइक्रोकैप निवेश में बरतें सतर्कता: सेबी अध्यक्ष ने म्युचुअल फंड कंपनियों को दी चेतावनी
सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने म्युचुअल फंड उद्योग को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि निवेश में विविधता जरूरी है, लेकिन माइक्रोकैप और हाई रिस्क क्षेत्रों में सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने म्युचुअल फंड कंपनियों को माइक्रोकैप फर्मों में निवेश करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है. पांडेय ने शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के 30वें स्थापना दिवस पर यह बात कही.
इस मौके पर तुहिन कांत पाडेंय ने कहा, “हालांकि ब्लू चिप से आगे विविधता लाने की जरूरत है, लेकिन म्युचुअल फंड जैसे खुदरा उत्पादों को माइक्रोकैप या हाई रिस्क डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते समय सतर्क रहना चाहिए.”
निवेश जोखिम ही नहीं, संचालन जोखिम पर भी रखें नजर
सेबी प्रमुख ने म्युचुअल फंड हाउसों को संचालन संबंधी जोखिमों के प्रति भी सतर्क रहने को कहा. उनके अनुसार, यदि इन जोखिमों की अनदेखी की गई तो इससे निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है. उन्होंने कहा कि फंड हाउसों को निवेश के हर फैसले को दस्तावेजी प्रक्रिया के जरिए पारदर्शिता से लागू करना चाहिए.
गौरतलब है कि हाल के महीनों में माइक्रोकैप श्रेणी में कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं. माइक्रोकैप कंपनियां वे होती हैं जिनका बाजार पूंजीकरण आमतौर पर ₹1,000 करोड़ से कम होता है.
नवीनतम परामर्श पत्र में सुधारों का सुझाव
पांडेय ने यह भी बताया कि सेबी ने म्युचुअल फंड वर्गीकरण को लेकर एक परामर्श पत्र जारी किया है, जिसमें कुछ श्रेणियों में सीमित निवेश अवसरों पर चिंता जताई गई है और समाधान के सुझाव दिए गए हैं.
रिडम्प्शन फ्रॉड और तकनीकी खामियों पर चेतावनी
सेबी अध्यक्ष ने धोखेबाजों द्वारा किए जा रहे रिडम्प्शन फ्रॉड (धोखाधड़ी से फंड निकालने) की आशंका को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे धोखेबाज तकनीकी रूप से उन्नत हो रहे हैं, हमें भी उतना ही ज्यादा सतर्क होना पड़ेगा. एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.” उन्होंने तकनीकी खामियों की समय पर पहचान और सुधार पर भी जोर दिया और कहा कि सूचना की गति ही इस लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार है.
डेटा सुरक्षा में लापरवाही नहीं चलेगी
सेबी प्रमुख ने निवेशकों की व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा को म्युचुअल फंड कंपनियों की बड़ी जिम्मेदारी बताया. उन्होंने कहा, “डेटा की सुरक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी कि उनके पैसों की. आउटसोर्सिंग से भले ही काम में दक्षता आती हो, लेकिन जवाबदेही नहीं घटती.”
AMC को अपने विक्रेताओं और थर्ड पार्टी पार्टनर्स के साथ हुए समझौतों में यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि डेटा लीक की कोई संभावना न रहे.
छोटी SIP योजनाओं के प्रचार पर सवाल
पांडेय ने छोटी सिप (SIP) योजनाओं, विशेषकर ₹250 की मिनी SIP पर भी बात की और म्युचुअल फंड उद्योग से पूछा कि क्या पहली बार निवेश करने वालों के लिए इन योजनाओं को अधिक आकर्षक बनाने की जरूरत है. हालांकि, उद्योग के सूत्रों का कहना है कि नियामक के प्रयासों के बावजूद छोटी SIP को लेकर रुझान कमजोर है और इस तरह की SIP की संख्या 1,000 से भी कम है.
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