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युद्ध में उलझे हैं रूस-यूक्रेन और धीमी हो गई इंडियन रेलवे की रफ़्तार, जानें कैसे
रेलवे का कहना है कि लंबी दूरी की यात्री रेलगाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले HLB कोच के उत्पादन में भी कमी आई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
रूस-यूक्रेन युद्ध ने भारतीय रेलवे की रफ्तार को प्रभावित किया है. दरअसल, इस युद्ध की वजह से वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में रेलवे की उत्पादन इकाइयां अपने लक्ष्यों को पूरा करने में नाकाम रही हैं. ट्रेन के पहियों से लेकर इंजन तक का निर्माण समय पर नहीं हो पाया है. रेल अधिकारियों का कहना है कि प्रोडक्शन की स्लो रफ्तार के लिए रूस-यूक्रेन संकट जिम्मेदार है. क्योंकि इसकी वजह से सप्लाई चेन बाधित हुई है.
HLB कोच के प्रोडक्शन में कमी
लंबी दूरी की यात्री रेलगाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले HLB कोच के उत्पादन में भी कमी आई है. रेलवे का कहना है कि एलएचबी डिब्बों के निर्माण में कमी पहियों की आपूर्ति बाधित होने की वजह से आई है. क्योंकि अधिकतर पहिए यूक्रेन से आयात होते हैं, जो फरवरी से ही रूस के साथ युद्ध में उलझा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जहाज पर लादे जा चुके पहिए यूक्रेन में फंस हुए हैं. हालांकि, अब इस समस्या का समाधान निकल आया है और उत्पादन में कमी की भरपाई बाकी बचे महीनों में कर ली जाएगी.
730 की जगह केवल 53 डिब्बे
हाल ही में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ वी.के.त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई बैठक में 25 जुलाई तक निर्माण में कमी की जानकारी दी गई. उदाहरण के लिए ईएमयू/मेमू ट्रेन के लिए इस अवधि में महज 53 डिब्बों का निर्माण हुआ. जबकि लक्ष्य 730 डिब्बों के निर्माण का था. इनमें से 28 डिब्बों का निर्माण कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्टरी में, 14 डिब्बे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी और 11 डिब्बे रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्टरी में बनाए गए हैं. बता दें कि मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (मेमू) और ईएमयू ट्रेनों का संचालन छोटी दूरी के मार्गों पर होता है.
इंजन का उत्पादन 28 प्रतिशत कम
जुलाई तक रेल इंजन उत्पादन तय लक्ष्य से 28 प्रतिशत कम रहा. बैठक में मेमू या ईएमयू इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम, 60केवीए ट्रांसफॉरमर और स्वीच कैबिनेट की आपूर्ति में भी कमी पर चिंता जताई गई. रेलवे ने बताया कि मेमू और ईएमयू डिब्बों के उत्पादन में कमी विशेष तौर पर इलेक्ट्रिक पुर्जों की आपूर्ति में कमी की वजह से हुई है. सेमीकंडक्टर को लेकर वैश्विक स्तर पर उत्पन्न संकट के कारण आपूर्ति में कमी की वजह से उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नहीं हुआ. गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा है.
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