मीडिया में खबर चल रही है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) यूपीआई के जरिए किए जाने वाले भुगतान पर चार्ज लगा सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
यूपीआई यानी Unified Payments Interface के जरिए किए जाने वाले भुगतान पर चार्ज की खबरों से लोग परेशान हैं. क्योंकि ये डिजिटल भुगतान का सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं. ज़्यादातर लोग इसी से पेमेंट को तवज्जो देते हैं. ऐसे में यदि UPI से पेमेंट पर शुल्क वसूला जाता है, तो लोगों को जेब ढीली करनी होगी. लेकिन क्या वास्तव में यह होने जा रहा है? वित्त मंत्रालय ने इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की है.
मीडिया में चली खबर
मीडिया में खबर चल रही है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) यूपीआई के जरिए किए जाने वाले भुगतान पर चार्ज लगा सकता है. इस खबर के बाद से UPI इस्तेमाल करने वाले परेशान हैं. अब वित्त मंत्रालय ने लोगों की परेशान दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है. मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार यूपीआई पेमेंट सर्विस पर किसी तरह का चार्ज लगाने पर विचार नहीं कर रही है.
UPI is a digital public good with immense convenience for the public & productivity gains for the economy. There is no consideration in Govt to levy any charges for UPI services. The concerns of the service providers for cost recovery have to be met through other means. (1/2)
— Ministry of Finance (@FinMinIndia) August 21, 2022
ऐसी कोई योजना नहीं
वित्त मंत्रालय ने ट्वीट में कहा है, 'UPI जनता के लिए अत्यधिक सुविधाजनक डिजिटल प्लेटफॉर्म है और अर्थव्यवस्था में इसका बड़ा योगदान है. सरकार यूपीआई पेमेंट सर्विस पर किसी तरह का शुल्क लगाने पर विचार नहीं कर रही है. सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए कॉस्ट रिकवरी के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा. डिजिटल पेमेंट ईको सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार ने पिछले साल आर्थिक मदद का ऐलान किया था, जो इस साल भी जारी रहेगी'.
बढ़ रहा इस्तेमाल
यूपीआई के जरिए होने वाले पेमेंट की बात करें, तो इसमें लगातार इजाफा हुआ है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर महीने UPI पेमेंट इस्तेमाल करने वाले बढ़ रहे हैं. इसके जरिए जुलाई में ही 600 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए हैं. इसमें कुल 10.2 लाख रुपए की रकम का लेन-देन किया गया है. देश में यूपीआई इस्तेमाल करने वालों की दर में 7 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखने को मिली है.
मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में 53.51% की तेज बढ़ोतरी हुई, जिसने वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी. साथ ही, अमेरिकी डॉलर रुपये के मुकाबले 4.26% मजबूत हुआ, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक बाजारों में तेज बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी साफ दिखा. मार्च 2026 के दौरान निवेशकों की जोखिम से दूरी और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार को नीचे खींच दिया. मोतीलाल ओसवाल म्युचुअल फंड (Motilal Oswal Mutual Fund) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजारों में मार्च के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 में 11.31% की गिरावट आई, जबकि निफ्टी नेक्स्ट 50 13.43% लुढ़क गया. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी क्रमशः 11.06% और 10.03% तक गिर गए, जिससे बाजार में व्यापक दबाव देखने को मिला.
वैश्विक बाजारों का भी यही हाल
अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. S&P 500 7.78% गिरा, जबकि Nasdaq 100 में 8.04% की गिरावट आई. Dow Jones Industrial Average भी 7.68% नीचे रहा. विकसित देशों में जर्मनी 13.26% और जापान 12.16% गिरा, जबकि यूनाइटेड किंगडम में अपेक्षाकृत कम 8.64% की गिरावट दर्ज की गई. उभरते बाजारों में चीन और ब्राजील में सीमित गिरावट रही, जबकि दक्षिण अफ्रीका और कोरिया में 20% से अधिक गिरावट आई.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में 53.51% की तेज बढ़ोतरी हुई, जिसने वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी. साथ ही, अमेरिकी डॉलर रुपये के मुकाबले 4.26% मजबूत हुआ, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा.
कीमती धातुओं में गिरावट
जहां तेल की कीमतें बढ़ीं, वहीं सोना और चांदी में गिरावट देखी गई. सोना 13.27% और चांदी 21.37% तक गिर गए, जो कमजोर मांग का संकेत है.
सेक्टोरल स्तर पर भारी नुकसान
भारतीय बाजार में अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे. बैंकिंग सेक्टर 16.94% गिरा, ऑटो 15.59% और रियल एस्टेट 16.58% नीचे आया. एफएमसीजी सेक्टर में भी 10.96% की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहे. आईटी में 5.04% और हेल्थकेयर में 4.51% की सीमित गिरावट रही.
विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी
मार्च में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1,25,736 करोड़ रुपये की भारी निकासी की, जबकि पिछले महीने 37,804 करोड़ रुपये का निवेश आया था. घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी 91,511 करोड़ रुपये की निकासी के साथ बाजार पर दबाव बढ़ाते दिखे.
घरेलू संकेतक मिले-जुले
हालांकि कुछ घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहे. जीएसटी संग्रह 2,00,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो आर्थिक गतिविधि में मजबूती दर्शाता है. वहीं, महंगाई (CPI) 2.75% से बढ़कर 3.21% हो गई. बेरोजगारी दर 6.70% से बढ़कर 7.00% हो गई. कम्पोजिट PMI 59.30 से घटकर 56.50 पर आ गया, जो आर्थिक गति में थोड़ी नरमी का संकेत है.
फिक्स्ड इनकम और क्रिप्टो का प्रदर्शन
इक्विटी के मुकाबले फिक्स्ड इनकम बाजार स्थिर रहे. निफ्टी लिक्विड इंडेक्स ने 0.54% रिटर्न दिया. क्रिप्टो बाजार में अपेक्षाकृत मजबूती दिखी. Bitcoin 0.70% और Ethereum 3.45% तक बढ़े.
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई का दबाव और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार की दिशा तय करेंगे. निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि बाजार में अस्थिरता अभी जारी रह सकती है.
अदालत ने माना कि NDMC द्वारा उठाई गई 1,063 करोड़ रुपये से अधिक की लाइसेंस फीस की मांग वैध है. यह राशि लंबे समय से लंबित बकाया के रूप में मानी जा रही थी, जिसे पहले निचली अदालत ने खारिज कर दिया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित होटलों में से एक और स्वर्गीय उद्योगपति ललित सूरी द्वारा स्थापित नई दिल्ली स्थित द ललित अब गंभीर कानूनी संकट में फंस गया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) की 1,063 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया लाइसेंस फीस की मांग को बहाल करते हुए होटल के संचालन से जुड़े लाइसेंस को रद्द करने के फैसले को भी सही ठहराया है, जिससे इसके भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
हाई कोर्ट का अहम फैसला
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला वाली दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने NDMC की अपील स्वीकार कर ली. अदालत ने 2023 के सिंगल जज के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें लाइसेंस रद्द करने और भारी बकाया मांग को रद्द किया गया था.
1,063 करोड़ की मांग फिर से लागू
अदालत ने माना कि NDMC द्वारा उठाई गई 1,063 करोड़ रुपये से अधिक की लाइसेंस फीस की मांग वैध है. यह राशि लंबे समय से लंबित बकाया के रूप में मानी जा रही थी, जिसे पहले निचली अदालत ने खारिज कर दिया था.
लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन का आरोप
कोर्ट ने पाया कि भारत होटल्स लिमिटिड ने लाइसेंस समझौते का उल्लंघन किया है. आरोप है कि कंपनी ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में वाणिज्यिक स्पेस की बिक्री/हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज तैयार किए, जो नियमों के खिलाफ थे. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी ने इन ट्रांजेक्शंस की जानकारी से इनकार किया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया.
ट्रांसफर डील्स पर भी कोर्ट की टिप्पणी
बेंच ने 26 जून 2018 के कलेक्टर स्टैम्प्स के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि कुछ संपत्तियों का ट्रांसफर कंपनी की जानकारी और सहमति से किया गया था. इससे NDMC के दावे को और मजबूती मिली.
संचालन पर अनिश्चितता
लाइसेंस रद्द किए जाने और भारी बकाया राशि की मांग बहाल होने के बाद द ललित नई दिल्ली के संचालन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. अब सवाल यह है कि क्या NDMC आगे किसी तरह की कार्रवाई, टेकओवर या संचालन पर रोक की दिशा में कदम उठाएगा.
इस फैसले के बाद होटल प्रबंधन के सामने कानूनी विकल्प सीमित नजर आ रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में यह मामला अपील या समझौते की दिशा में जा सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.
क्रिकेट की दुनिया के ब्रांड सचिन तेंदुलकर आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं. क्रिकेट के मैदान पर रिकॉर्ड्स की झड़ी लगाने वाले सचिन तेंदुलकर ने रिटायरमेंट के बाद भी कमाई और प्रभाव के मामले में अपनी बादशाहत कायम रखी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आज सचिन तेंदुलकर अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं, और क्रिकेट के मैदान पर इतिहास रचने वाले ‘मास्टर ब्लास्टर’ की पहचान अब सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रही. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बिजनेस और निवेश की दुनिया में भी मजबूत पकड़ बनाई है, जहां उनकी ब्रांड वैल्यू, निवेश रणनीति और कमर्शियल फैसले उन्हें लगातार करोड़ों कमाने वाले शीर्ष हस्तियों में बनाए रखते हैं.
क्रिकेट में रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त बनाने वाले सचिन ने खेल के बाद भी अपनी आर्थिक सफलता का सिलसिला जारी रखा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 तक उनकी कुल संपत्ति 1400 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, जबकि ब्रांड एंडोर्समेंट, निवेश और अपने बिजनेस वेंचर्स के जरिए उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
रिटायरमेंट के बाद भी बरकरार कमाई का ग्राफ
क्रिकेट को अलविदा कहे एक दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन सचिन की आय में कोई कमी नहीं आई. 2025 में ही उन्होंने अलग-अलग स्रोतों से करीब 50 करोड़ रुपये कमाए. इसके अलावा उन्हें भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से पेंशन भी मिलती है, जो उनकी स्थायी आय का हिस्सा है.
स्टार्टअप्स में निवेश से खड़ा किया मजबूत पोर्टफोलियो
सचिन अब सिर्फ एक सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि एक समझदार निवेशक के रूप में भी पहचाने जाते हैं. उन्होंने 14 से अधिक कंपनियों में निवेश किया है, जिनमें टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर शामिल हैं. उनके प्रमुख निवेशों में Spinny, JetSynthesys और Truezone Solar जैसी कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा Zepto, VAHDAM और PB Fintech जैसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स में भी उनका निवेश है.
अपने ब्रांड्स से बना अलग बिजनेस साम्राज्य
निवेश के साथ-साथ सचिन ने अपने खुद के ब्रांड्स भी खड़े किए हैं, जो उनकी कमाई का बड़ा जरिया बन चुके हैं. उनका स्पोर्ट्सवियर ब्रांड TEN X YOU युवाओं को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है. वहीं True Blue को उन्होंने Arvind Fashion के साथ मिलकर शुरू किया. इसके अलावा SRT Sports Management उनके कमर्शियल प्रोजेक्ट्स और ब्रांड डील्स को संभालती है.
ब्रांड एंडोर्समेंट: भरोसे का चेहरा, बड़ी कमाई
आज भी सचिन देश के सबसे भरोसेमंद ब्रांड एंबेसडर्स में गिने जाते हैं. उनकी लोकप्रियता का असर यह है कि बड़ी कंपनियां उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए मोटी रकम खर्च करती हैं.
वे Apollo Tyres, Bank of Baroda, Tanishq, Gillette और Luminous Power Technologies जैसे बड़े ब्रांड्स से जुड़े रहे हैं
रियल एस्टेट में भी मजबूत निवेश
सचिन की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में निवेशित है. उनके पास Bandra में लग्जरी बंगला, साउथ मुंबई में प्रीमियम फ्लैट और Alibaug में शानदार प्रॉपर्टी है. इन संपत्तियों की कुल कीमत 300 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जाती है.
क्यों खास है सचिन का बिजनेस मॉडल?
सचिन तेंदुलकर की सफलता सिर्फ नाम या पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी स्मार्ट निवेश रणनीति, ब्रांड वैल्यू और सही समय पर लिए गए फैसलों का नतीजा है. उन्होंने क्रिकेट के बाद खुद को एक मजबूत बिजनेस पर्सन के रूप में स्थापित किया है, जो उन्हें आज भी कमाई के मामले में शीर्ष पर बनाए हुए है.
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 852.49 अंक यानी 1.09% टूटकर 77,664 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी50 इंडेक्स भी 205.05 अंक यानी 0.84% गिरकर 24,173.05 पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
लगातार गिरावट के बाद आज भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है. पिछले दो सत्रों की भारी बिकवाली के असर से निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है, जबकि वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं.
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 852.49 अंक यानी 1.09% टूटकर 77,664 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी50 इंडेक्स भी 205.05 अंक यानी 0.84% गिरकर 24,173.05 पर आ गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 900 अंक तक लुढ़क गया था और निफ्टी 24,200 के नीचे फिसल गया. पिछले दो ट्रेडिंग सेशन्स में सेंसेक्स करीब 1,600 अंक टूट चुका है.
रुपये पर भी दबाव
शेयर बाजार की कमजोरी का असर मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिला. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.3% गिरकर 94.11 पर पहुंच गया, जो पिछले सत्र में 93.75 पर बंद हुआ था. यह गिरावट विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता को दर्शाती है.
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में बंद हुए. ट्रेंट में सबसे बड़ी गिरावट (4.36%), टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, इंफोसिस में दबाव, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स भी गिरे, इंडिगो और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर भी कमजोर रहे.
सेक्टरों का हाल: ऑटो और बैंकिंग पर सबसे ज्यादा मार
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो, पीएसयू बैंक और रियल्टी में सबसे ज्यादा गिरावट, आईटी और फाइनेंस सेक्टर भी दबाव में
और फार्मा सेक्टर में हल्की तेजी देखने को मिली. ब्रॉडर मार्केट भी इससे अछूता नहीं रहा, निफ्टी मिडकैप 0.41% गिरा और निफ्टी स्मॉलकैप 0.67% लुढ़ गया.
गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है.
1. ईरान और अमेरिका के बीच हालात फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं
2. सीजफायर की उम्मीदों को झटका लगा है
3. होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा है, जहां जहाजों पर हमले और कब्जे की खबरें हैं
इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. तेल कीमतों में तेजी भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय है, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.
इन शेयरों पर रखें नजर
24 अप्रैल को हफ्ते के आखिरी ट्रेडिंग सेशन में एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार के बढ़त के साथ खुलने के आसार हैं, जहां गिफ्ट निफ्टी करीब 92 अंक चढ़कर 24,250 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जो निफ्टी-50 के पॉजिटिव ओपन का संकेत देता है. आज के कारोबार में Reliance Industries, Infosys, Adani Energy Solutions और Hindustan Zinc समेत कई बड़े स्टॉक्स फोकस में रहेंगे, खासतौर पर तिमाही नतीजों के चलते बाजार में हलचल देखने को मिल सकती है. इन्फोसिस ने मार्च तिमाही में 8,501 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 21% ज्यादा है, जबकि कंपनी की आय भी 13.4% बढ़ी है. वहीं आज अदाणी ग्रीन एनर्जी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान जिंक, इंडसइंड बैंक, एलएंडटी फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, श्रीराम फाइनेंस और अन्य कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी, जिससे निवेशकों को कमाई के मौके मिल सकते हैं, जबकि आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी ने भी अपने मजबूत नतीजों में एयूएम में 17% की बढ़त दर्ज की है, जो कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती देता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में जारी उतार-चढ़ाव से साफ है कि निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है. वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के तिमाही नतीजे आगे बाजार की दिशा तय करेंगे.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
RBI MPC मिनट्स में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता का असर भारतीय वित्तीय परिस्थितियों पर भी पड़ेगा. इससे आर्थिक विकास की संभावनाओं पर दबाव बन सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले वर्ष में चुनौतियां बढ़ सकती हैं. भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स के अनुसार, वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता, ऊंची ऊर्जा कीमतें और कमोडिटी की बढ़ती लागत 2026-27 में घरेलू उत्पादन और विकास दर पर दबाव डाल सकती है.
वैश्विक अस्थिरता से बढ़ेगा जोखिम
MPC मिनट्स में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता का असर भारतीय वित्तीय परिस्थितियों पर भी पड़ेगा. इससे आर्थिक विकास की संभावनाओं पर दबाव बन सकता है. विशेष रूप से यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो इसका असर व्यापार और निवेश दोनों पर देखने को मिल सकता है.
ऊर्जा और कमोडिटी कीमतें बड़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची ऊर्जा कीमतें और अन्य कमोडिटी की बढ़ती लागत घरेलू उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं. साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा से सप्लाई शॉक का खतरा भी बना हुआ है, जिससे उत्पादन और लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है.
निर्यात पर भी दबाव संभव
MPC ने संकेत दिया है कि यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है. शिपिंग रूट्स में बाधा और फ्रेट व इंश्योरेंस लागत बढ़ने से निर्यात महंगा हो सकता है.
घरेलू मांग से मिल रहा सपोर्ट
चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था को कुछ मजबूत कारक समर्थन दे रहे हैं. इनमें सर्विस सेक्टर की मजबूत गति, GST सुधारों का प्रभाव, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ती क्षमता उपयोगिता, कॉरपोरेट और फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत बैलेंस शीट शामिल हैं.
महंगाई का अनुमान और जोखिम
मिनट्स के अनुसार 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4.6% रहने का अनुमान है. तिमाही आधार पर यह इस प्रकार रह सकती है:
- Q1: 4.0%
- Q2: 4.4%
- Q3: 5.2%
- Q4: 4.7%
हालांकि कोर महंगाई 4.4% के आसपास रहने का अनुमान है, जो यह संकेत देता है कि बुनियादी महंगाई दबाव सीमित रह सकते हैं.
गवर्नर का बयान और सतर्कता की जरूरत
संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लगातार निगरानी और सतर्कता की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है, लेकिन बाहरी झटकों का असर फिर भी देखने को मिल सकता है.
RBI के MPC मिनट्स संकेत देते हैं कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी कीमतों में तेजी आने वाले समय में भारत की विकास गति और महंगाई दोनों को प्रभावित कर सकती है. हालांकि मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक बुनियाद इन चुनौतियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है.
Amazon India अपने फुलफिलमेंट सेंटर, सॉर्टेशन हब और डिलीवरी स्टेशनों के विस्तार और अपग्रेड पर फोकस कर रही है. इससे खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिलीवरी तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में ई-कॉमर्स प्रतिस्पर्धा के बीच Amazon India ने बड़ा निवेश ऐलान किया है. कंपनी अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने और कर्मचारियों की सुरक्षा व सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 2,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी. यह निवेश कंपनी के उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसके तहत वह 2030 तक भारत में टेक्नोलॉजी, AI, एक्सपोर्ट और रोजगार के क्षेत्र में भारी निवेश करने की योजना बना रही है.
लॉजिस्टिक्स नेटवर्क होगा और मजबूत
Amazon India अपने फुलफिलमेंट सेंटर, सॉर्टेशन हब और डिलीवरी स्टेशनों के विस्तार और अपग्रेड पर फोकस कर रही है. इससे खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिलीवरी तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी. कंपनी अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon Now का भी विस्तार कर रही है, जो कुछ ही मिनटों से लेकर कुछ दिनों में डिलीवरी की सुविधा देता है.
पहले भी किया था बड़ा निवेश
कंपनी ने 2025 में भी करीब ₹2,000 करोड़ का निवेश किया था, जिसके तहत 17 फुलफिलमेंट सेंटर, 6 सॉर्टेशन सेंटर, 75 डिलीवरी स्टेशन और 300 से ज्यादा माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर स्थापित किए गए थे. इससे भारत में डिलीवरी नेटवर्क को काफी मजबूती मिली थी.
कर्मचारियों की सुरक्षा पर खास ध्यान
Amazon India ने कहा है कि उसके लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत उसके कर्मचारी हैं. इसलिए इस निवेश का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा. वेयरहाउस में बेहतर वेंटिलेशन, तापमान नियंत्रण, आराम क्षेत्र, साफ पानी और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है.
AI और टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल
कंपनी अपने ऑपरेशन्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ा रही है. इससे डिलीवरी रूट प्लानिंग, ड्राइवर सेफ्टी और काम की दक्षता में सुधार होगा. ड्राइवर ऐप को भी अपग्रेड किया जा रहा है ताकि नेविगेशन आसान हो और कमाई की जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाई दे सके.
भारत का ई-कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा है
भारत में Amazon को Flipkart, JioMart और BigBasket जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. साथ ही क्विक कॉमर्स सेक्टर में Blinkit, Instamart और Zepto जैसी कंपनियां भी तेजी से विस्तार कर रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत का ई-कॉमर्स बाजार वर्तमान में 120 से 140 अरब डॉलर का है, जो 2030 तक 280 से 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
Amazon India का यह निवेश न सिर्फ उसके लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करेगा, बल्कि भारत में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स बाजार में उसकी पकड़ को भी और मजबूत बनाएगा. कंपनी का फोकस अब तेजी, टेक्नोलॉजी और बेहतर ग्राहक अनुभव पर साफ दिखाई दे रहा है.
इस बड़े फंडिंग राउंड के साथ LightFury Games ने भारत के गेमिंग स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत पहचान बनाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गेमिंग स्टार्टअप LightFury Games ने प्री-सीरीज़ ए फंडिंग राउंड में 11 मिलियन डॉलर (करीब ₹90 करोड़) जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड में भारत के पूर्व कप्तान एमएस धोनी समेत कई बड़े क्रिकेटरों ने निवेश किया है. कंपनी इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने नए हाई-एंड क्रिकेट गेम “eCricket” के विकास और वैश्विक लॉन्च की तैयारी के लिए करेगी.
धोनी समेत कई क्रिकेटर्स का निवेश
इस फंडिंग राउंड में एमएस धोनी के साथ-साथ मौजूदा भारतीय क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या ने भी बतौर स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर हिस्सा लिया है. इनके अलावा श्रेयस अय्यर, रवींद्र जडेजा, तिलक वर्मा और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ियों ने भी निवेश किया है.
बड़े निवेशकों की भागीदारी
इस राउंड में केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कई बड़े वेंचर कैपिटल और ग्लोबल निवेशक भी शामिल रहे. इनमें Blume Ventures, V3 Ventures, जापान की MIXI और Times Internet जैसे नाम शामिल हैं.
eCricket गेम पर फोकस
LightFury Games एक 100 लोगों की टीम के साथ हाई-एंड “AAA” गेम डेवलपमेंट पर काम कर रही है. कंपनी का प्रमुख प्रोडक्ट “eCricket” होगा, जो एक मोबाइल आधारित क्रिकेट गेम है और इसे 2026 में वैश्विक स्तर पर लॉन्च करने की योजना है. कंपनी इस फंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से गेम के डेवलपमेंट को पूरा करने और लॉन्च के बाद लाइव-ऑपरेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में करेगी.
क्रिकेट फैनबेस को टारगेट करने की रणनीति
कंपनी का फोकस क्रिकेट के वैश्विक फैनबेस पर है, जो 2.5 अरब से अधिक माना जाता है. LightFury का मानना है कि इस बड़े मार्केट में अभी तक तकनीकी रूप से एडवांस्ड गेमिंग प्रोडक्ट्स की कमी है.
टेक्नोलॉजी और फीचर्स
eCricket को Unreal Engine 5 पर विकसित किया जा रहा है. यह एक लाइव-सर्विस गेम होगा, जिसमें फिजिक्स-बेस्ड गेमप्ले और AI आधारित कमेंट्री जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी ने पहले ही 600 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के लाइसेंसिंग अधिकार हासिल करने का दावा किया है.
LightFury Games के को-फाउंडर और CEO करण श्रॉफ ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े गेमिंग बाजारों में से एक है, लेकिन अभी तक कोई विश्वस्तरीय AAA स्पोर्ट्स गेम नहीं बना है. उनका लक्ष्य भारत से एक ग्लोबल लेवल का क्रिकेट गेम तैयार करना है.
अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 55.9 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. वहीं सर्विस PMI भी बढ़कर 57.9 हो गया, जो पहले 57.5 था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत संकेत दिए हैं. अप्रैल 2026 में प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में तेजी दर्ज की गई है और कॉम्पोजिट PMI बढ़कर 58.3 पर पहुंच गया है. बढ़ती मांग, नए ऑर्डर और उत्पादन में इजाफे ने इस ग्रोथ को सपोर्ट किया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में मजबूती साफ दिखाई दे रही है.
प्राइवेट सेक्टर में तेज़ी के संकेत
HSBC फ्लैश इंडिया कॉम्पोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स अप्रैल में 58.3 रहा, जो मार्च में 57.0 था. यह डेटा S&P Global द्वारा जारी किया गया है. PMI का 50 से ऊपर रहना आर्थिक गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है. मौजूदा स्तर लंबे समय के औसत से ऊपर है, जो मजबूत बिजनेस ग्रोथ का संकेत देता है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का इंजन
अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 55.9 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. वहीं सर्विस PMI भी बढ़कर 57.9 हो गया, जो पहले 57.5 था. हालांकि सर्विस सेक्टर में भी बढ़त जारी रही, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार ज्यादा तेज रही, जिसने कुल ग्रोथ को आगे बढ़ाया.
आउटपुट और नए ऑर्डर में उछाल
HSBC की चीफ इंडिया इकॉनमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मार्च में पश्चिम एशिया तनाव से आई रुकावट के बाद अब बिजनेस गतिविधियों में फिर तेजी आई है. कंपनियों को नए ऑर्डर तेजी से मिल रहे हैं और उत्पादन भी बढ़ा है. सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों को देखते हुए कंपनियां कच्चे माल और तैयार उत्पाद का स्टॉक भी बढ़ा रही हैं.
लागत दबाव बरकरार, कीमतों में बढ़ोतरी
हालांकि मांग मजबूत है, लेकिन कंपनियों पर लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है. इस दबाव का कुछ हिस्सा कंपनियों ने कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डाला है.
रोजगार में तेज बढ़त
अप्रैल में प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं. यह पिछले 10 महीनों की सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है. इसका कारण बिजनेस विस्तार योजनाएं, बढ़ती मांग, भविष्य को लेकर सकारात्मक नजरिया है.
आगे का आउटलुक कैसा?
कंपनियां आने वाले 12 महीनों को लेकर आशावादी बनी हुई हैं. हालांकि मार्च के मुकाबले भरोसे में हल्की कमी आई है, लेकिन यह अभी भी पिछले 18 महीनों के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर है.
अप्रैल के PMI आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत मांग और उत्पादन के दम पर नई रफ्तार पकड़ रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती आने वाले महीनों में ग्रोथ को और गति दे सकती है.
नए नियमों के तहत गेम्स का अनिवार्य पूर्व-पंजीकरण समाप्त कर दिया गया है. हालांकि शर्त यह है कि कोई भी गेमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाएं न दे जिससे यूजर्स या बच्चों को किसी तरह का नुकसान हो.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नए कानून के तहत प्रशासनिक नियमों को अधिसूचित कर दिया है. ये नियम 1 मई 2026 से लागू होंगे. इसके तहत अब गेमिंग कंपनियों को यूजर्स की सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदार गेमिंग सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानकों का पालन करना होगा.
सरकार ने जारी किए नए नियम
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब सभी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे जो वित्तीय, मानसिक, सामाजिक और सामग्री संबंधी नुकसान से उपयोगकर्ताओं की रक्षा कर सकें. नए नियमों का उद्देश्य जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देना और यूजर्स, खासकर बच्चों को किसी भी तरह के जोखिम से बचाना है.
ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी का गठन
सरकार ने इस सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण का गठन किया है. इसमें कुल छह सदस्य होंगे.
इसमें शामिल होंगे:
- आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अध्यक्ष)
- गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव
- वित्तीय सेवा विभाग के अधिकारी
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी
- युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधिकारी
- विधि विभाग के अधिकारी
पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव
नए नियमों के तहत गेम्स का अनिवार्य पूर्व-पंजीकरण समाप्त कर दिया गया है. हालांकि शर्त यह है कि कोई भी गेमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाएं न दे जिससे यूजर्स या बच्चों को किसी तरह का नुकसान हो. साथ ही सभी ई-स्पोर्ट्स को अब अनिवार्य रूप से प्राधिकरण में रजिस्टर करना होगा.
शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य
सभी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी, ताकि यूजर्स की समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके.
यह व्यवस्था हर गेमिंग कंपनी के लिए अनिवार्य होगी और इसे सक्रिय रूप से संचालित करना होगा.
सरकार का रुख: सख्ती कम, सुरक्षा ज्यादा
आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि सरकार ऑनलाइन गेमिंग को जरूरत से ज्यादा रेगुलेट नहीं करना चाहती, लेकिन यूजर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.
1 मई से लागू होने वाले ये नए नियम भारत के ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं. इससे जहां इंडस्ट्री को स्पष्ट गाइडलाइन मिलेगी, वहीं यूजर्स की सुरक्षा भी मजबूत होगी.
कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इस प्रस्तावित उद्यम की घोषणा पहली बार जुलाई 2025 में की गई थी. यह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यापक वितरण नेटवर्क को एलियांज की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता के साथ जोड़ेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और जर्मनी की एलियांज ने भारत में 50:50 हिस्सेदारी के साथ एक प्राथमिक बीमा संयुक्त उद्यम बनाने के लिए बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह पहल देश के तेजी से बढ़ते सामान्य और स्वास्थ्य बीमा बाजार को लक्ष्य बनाएगी.
डिजिटल ताकत और वैश्विक विशेषज्ञता का संगम
कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इस प्रस्तावित उद्यम की घोषणा पहली बार जुलाई 2025 में की गई थी. यह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यापक वितरण नेटवर्क को एलियांज की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता के साथ जोड़ेगा. सभी वैधानिक और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद इस संयुक्त उद्यम का संचालन शुरू होगा.
तकनीक आधारित बीमा उत्पादों पर जोर
दोनों साझेदारों ने बताया कि यह उद्यम व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए व्यापक और तकनीक-आधारित बीमा उत्पाद उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखेगा. यह पहल भारत के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के नीति लक्ष्य के अनुरूप होगी.
भारत में बीमा क्षेत्र की बड़ी संभावनाएं
भारत दुनिया की उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जहां बीमा कवरेज अभी भी कम है. हालांकि, बढ़ती आय, डिजिटल अपनाने और सरकारी नीतियों के समर्थन से बीमा की मांग में तेज वृद्धि देखी जा रही है.
जीवन बीमा क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी
कंपनियों ने यह भी संकेत दिया कि वे भारत के जीवन बीमा क्षेत्र में प्रवेश के लिए एक अलग बाध्यकारी समझौते पर काम कर रही हैं. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि यह साझेदारी समूह के उस सिद्धांत को दर्शाती है जिसमें आवश्यक सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि जियो की डिजिटल पहुंच और एलियांज की वैश्विक विशेषज्ञता का संयोजन बेहद प्रभावशाली है और इसका उद्देश्य पूरे देश में सस्ते और आसान बीमा उत्पाद उपलब्ध कराना होगा.
एलियांज की दीर्घकालिक रणनीति
एलियांज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर बाटे ने कहा कि कंपनी, जो वर्ष 2000 से भारत में सक्रिय है, इस साझेदारी को सुरक्षा सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता मजबूत करने के अवसर के रूप में देखती है. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत के लिए एक अधिक सुरक्षित और वित्तीय रूप से मजबूत भविष्य बनाने में मदद करेगी.
वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि
भारत का बीमा क्षेत्र वैश्विक बीमा कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. नियामकीय सुधार और डिजिटल वितरण के विस्तार से दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश में नए विकास अवसर खुल रहे हैं.