डिजिटल इंडिया को मिलेगी रफ्तार, PhonePe को मिला ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर का दर्जा

RBI की यह मंजूरी फोनपे को न केवल एक मजबूत तकनीकी पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेगी, बल्कि देशभर के छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान में सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है.

Last Modified:
Saturday, 20 September, 2025
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भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनियों में से एक फोनपे को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम करने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है. यह निर्णय कंपनी के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे की हिस्सेदारी और मजबूत होगी.  दिवाली से पहले मिली इस सौगात ने डिजिटल इंडिया के सपने को भी और मजबूती प्रदान की है.

क्या है यह मंजूरी और क्या बदलेगा? 

अब तक फोनपे केवल एक ऑनलाइन पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम कर रही थी, लेकिन RBI की इस मंजूरी के बाद कंपनी अब थर्ड पार्टी पेमेंट एग्रीगेटर की भूमिका निभा सकेगी. इसका मतलब है कि वह क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग जैसे माध्यमों से पेमेंट स्वीकार करने और उन्हें व्यापारियों के खातों में सेटल करने की पूरी सुविधा उपलब्ध कराएगी.

SME सेक्टर पर फोकस, मर्चेंट नेटवर्क होगा मजबूत

फोनपे के मर्चेंट बिजनेस के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) युवराज सिंह शेखावत ने कहा कि यह मंजूरी विशेष रूप से छोटे और मध्यम कारोबारियों (SME) को बेहतर सेवाएं देने में मदद करेगी. उन्होंने बताया कि अब कंपनी उन व्यापारियों तक पहुंचेगी जिन्हें अब तक डिजिटल पेमेंट की बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं.

मजबूत होगा पेमेंट गेटवे, मिलेगा स्मूथ चेकआउट एक्सपीरियंस

RBI की मंजूरी के बाद फोनपे अपने पेमेंट गेटवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर कर पाएगा. इससे मर्चेंट्स को त्वरित ऑनबोर्डिंग की सुविधा मिलेगी और डेवलपर्स के लिए आसान इंटीग्रेशन संभव होगा. इसके साथस ही ग्राहकों को बेहतर चेकआउट अनुभव मिलेगा जिससे पेमेंट सक्सेस रेट भी बढ़ेगा.

फोनपे का अब तक का सफर

फोनपे की शुरुआत 2016 में हुई थी और आज यह भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनियों में से एक है. इसके पास 65 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स, 4.5 करोड़ मर्चेंट्स का नेटवर्क और 36 करोड़ से ज्यादा डेली ट्रांजैक्शंस हैं. कंपनी का पोर्टफोलियो अब सिर्फ पेमेंट तक सीमित नहीं है. इसमें लेंडिंग, इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन, वेल्थ प्रोडक्ट्स, हाइपरलोकल ई-कॉमर्स (पिनकोड) और इंडस ऐपस्टोर जैसी सेवाएं भी शामिल हैं.

ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर क्या होता है?

पेमेंट एग्रीगेटर वह सेवा है जो व्यापारियों को अपने ग्राहकों से क्रेडिट/डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, UPI, वॉलेट आदि के जरिए ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा देती है. इसके मुख्य चरण होते हैं:

1. मर्चेंट ऑनबोर्डिंग – व्यापारी KYC और वेरिफिकेशन के बाद प्लेटफॉर्म से जुड़ते हैं.

2. पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन – यह वेबसाइट या ऐप में कैश काउंटर जैसा काम करता है.

3. मल्टीपल पेमेंट ऑप्शन सपोर्ट – ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार भुगतान का विकल्प चुन सकता है.

4. पेमेंट प्रोसेसिंग और सेटलमेंट – पेमेंट सफल होने पर ग्राहक को कन्फर्मेशन मिलता है और पैसे व्यापारी के खाते में पहुंचते हैं.


अगले हफ्ते 7 शेयर होंगे एक्स-डिविडेंड, R Systems देगी ₹8 प्रति शेयर

BSE के आंकड़ों के मुताबिक, 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. इस सूची में Steel Authority of India (SAIL), Indraprastha Gas (IGL) और R Systems International जैसी कंपनियां शामिल हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
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Saturday, 26 September, 2026
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शेयर बाजार में अगले सप्ताह सात कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने वाले हैं. BSE के आंकड़ों के मुताबिक, 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. इस सूची में Steel Authority of India (SAIL), Indraprastha Gas (IGL) और R Systems International जैसी कंपनियां शामिल हैं. इनमें R Systems International ने ₹8 प्रति शेयर का सबसे ज्यादा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है.

29 सितंबर को Leo Dryfruits का शेयर होगा एक्स-डिविडेंड

अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाले शेयरों में सबसे पहले Leo Dryfruits and Spices Trading Limited का नाम है. कंपनी का शेयर 29 सितंबर को एक्स-डिविडेंड होगा. कंपनी ने ₹0.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है. इसके लिए रिकॉर्ड डेट भी 29 सितंबर तय की गई है.

30 सितंबर को SAIL और Saraswati Saree Depot

इसके बाद 30 सितंबर को दो कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. Steel Authority of India Limited (SAIL) ने ₹2.35 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है. कंपनी ने डिविडेंड के लिए 30 सितंबर को रिकॉर्ड डेट तय की है.

इसी दिन Saraswati Saree Depot Limited का शेयर भी एक्स-डिविडेंड होगा. कंपनी अपने शेयरधारकों को ₹3 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड देगी. इसके लिए रिकॉर्ड डेट 30 सितंबर रखी गई है.

1 अक्टूबर को चार कंपनियों के शेयर होंगे एक्स-डिविडेंड

1 अक्टूबर को सबसे ज्यादा चार कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने वाले हैं. इनमें Goenka Business and Finance Limited, Indraprastha Gas Limited (IGL), R Systems International Limited और Sainik Finance and Industries Limited शामिल हैं. Goenka Business and Finance ने ₹0.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है. कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट 1 अक्टूबर है, जबकि रिकॉर्ड डेट 2 अक्टूबर तय की गई है.

Indraprastha Gas Limited (IGL) के शेयर भी 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होंगे. कंपनी ने ₹1.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है. IGL के लिए रिकॉर्ड डेट भी 1 अक्टूबर है. R Systems International ने ₹8 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है. कंपनी के शेयर 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होंगे और रिकॉर्ड डेट भी इसी दिन है. प्रति शेयर घोषित रकम के आधार पर यह अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाली सात कंपनियों में सबसे बड़ा डिविडेंड है.

Sainik Finance and Industries Limited भी 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होगी. कंपनी ने ₹0.50 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है और इसके लिए रिकॉर्ड डेट 1 अक्टूबर निर्धारित की गई है.

चार फाइनल और तीन अंतरिम डिविडेंड

अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाली सात कंपनियों में चार कंपनियों ने फाइनल डिविडेंड और तीन ने अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है. फाइनल डिविडेंड देने वाली कंपनियों में Leo Dryfruits and Spices Trading, SAIL, Goenka Business and Finance और IGL शामिल हैं. वहीं Saraswati Saree Depot, R Systems International और Sainik Finance and Industries ने अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है.

प्रति शेयर डिविडेंड की रकम देखें तो R Systems International ₹8 के साथ सबसे आगे है. इसके बाद Saraswati Saree Depot ₹3 और SAIL ₹2.35 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी. IGL ने ₹1.50 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है, जबकि Leo Dryfruits and Spices Trading, Goenka Business and Finance और Sainik Finance and Industries की ओर से ₹0.50 प्रति शेयर का डिविडेंड दिया जाएगा.

एक्स-डिविडेंड डेट का क्या मतलब है?

एक्स-डिविडेंड डेट वह तारीख होती है जब शेयर खरीदने वाला निवेशक घोषित डिविडेंड का हकदार नहीं होता. डिविडेंड पाने के लिए निवेशक का कंपनी की तय रिकॉर्ड डेट के अनुसार पात्र होना जरूरी होता है. इसलिए डिविडेंड वाले शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए एक्स-डिविडेंड डेट के साथ रिकॉर्ड डेट को समझना भी जरूरी है.
 


शादी अब सिर्फ रस्म नहीं, पूरा एक्सपीरियंस है: VanVivaha 2026 में दिखी बदलती वेडिंग इंडस्ट्री की तस्वीर

फैशन से ज्वेलरी, डेस्टिनेशन वेडिंग से ट्रैवल और डेकोर से टेक्नोलॉजी तक, भारतीय शादियों का कारोबार तेजी से एक बड़े लाइफस्टाइल इकोसिस्टम में बदल रहा है. गुरुग्राम में आयोजित VanVivaha 2026 में इसी बदलती तस्वीर की झलक देखने को मिली

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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भारतीय शादी की तैयारी कभी परिवार और रिश्तेदारों की बैठकों से शुरू होती थी और धीरे-धीरे कपड़े, ज्वेलरी, वेन्यू और कैटरिंग तक पहुंचती थी. अब तस्वीर बदल रही है. शादी सिर्फ एक समारोह नहीं रह गई है, बल्कि यह फैशन, ब्यूटी, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल, डेकोर, एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी और पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस से जुड़ा एक बड़ा बाजार बनती जा रही है.

इसी बदलते वेडिंग इकोसिस्टम को एक मंच पर लाने की कोशिश गुरुग्राम में आयोजित VanVivaha 2026 में नजर आई. 24 और 25 सितंबर को गुरुग्राम में आयोजित इस दो दिवसीय आयोजन में आयोजकों के मुताबिक 6,000 से ज्यादा विजिटर्स पहुंचे. 100 से अधिक प्रदर्शकों ने फैशन, ज्वेलरी, हॉस्पिटैलिटी, डेस्टिनेशन वेडिंग, प्लानिंग, डेकोर, ब्यूटी, ट्रैवल, एंटरटेनमेंट, गिफ्टिंग और वेडिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े विकल्प पेश किए.

एक शादी, कई इंडस्ट्री और एक ही प्लेटफॉर्म

आज एक बड़ी शादी के पीछे सिर्फ दूल्हा-दुल्हन और परिवार नहीं होते. वहां वेडिंग प्लानर, डिजाइनर, ज्वेलर, होटल, डेकोर कंपनी, मेकअप आर्टिस्ट, ट्रैवल एजेंसी, फोटोग्राफर और एंटरटेनमेंट टीम जैसे कई पेशेवर एक साथ काम करते हैं. VanVivaha ने इसी कनेक्शन को एक जगह लाने की कोशिश की. करीब 1.40 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित इस प्रदर्शनी में 70,000 वर्ग फुट से ज्यादा का एग्जिबिशन स्पेस था.

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शादी का फैसला अब केवल कीमत और उपलब्धता पर निर्भर नहीं रहता. परिवारों और कपल्स के लिए थीम, डिजाइन, लोकेशन, सर्विस, सोशल मीडिया प्रेजेंस और पूरे समारोह का अनुभव भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

परंपरा के साथ ग्लोबल प्रभाव

भारतीय शादियों में ग्लोबल वेडिंग ट्रेंड्स की मौजूदगी भी बढ़ रही है. हालांकि, इन ट्रेंड्स को सीधे अपनाने के बजाय भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं के साथ मिलाकर पेश किया जा रहा है. Black Rock Hotels & Resorts के मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव मुडगल के मुताबिक, ग्लोबल प्रभाव भारतीय शादियों में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भारतीय परंपराओं, परिवारों और समारोहों के अनुरूप ढाला जा रहा है. उनके अनुसार, ग्लोबल इंस्पिरेशन और लोकल प्रासंगिकता का यह मेल भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री की दिशा तय करेगा. यानी शादी में विदेशी थीम या इंटरनेशनल स्टाइल अपनाना अब भारतीय पहचान से अलग होने का संकेत नहीं है. इसके बजाय दोनों को मिलाकर एक नया वेडिंग एक्सपीरियंस तैयार किया जा रहा है.

सेलिब्रेशन से आगे बढ़कर बड़ा बिजनेस इकोसिस्टम

VanVivaha में Redico Khaitan, Revlon, BlackRock Hotels & Resorts, Mulecha Jewellers, PNG Jewellers, Karan Moin, Piccadilly और Samharo Events जैसे स्थापित नामों के साथ कई विशेषज्ञ और उभरते कारोबारी भी शामिल हुए.

यह विविधता इस बात की ओर इशारा करती है कि भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री में कारोबार के लिए अवसर केवल पारंपरिक सेवाओं तक सीमित नहीं हैं. टेक्नोलॉजी, ट्रैवल, गिफ्टिंग, एंटरटेनमेंट और नए तरह के एक्सपीरियंस भी इसका हिस्सा बन रहे हैं. VanVivaha के फाउंडर तेजवंत सिंह लांबा के अनुसार, पहले दिन ही करीब 3,500 से ज्यादा विजिटर्स पहुंचे थे और 1,500 से अधिक प्री-रजिस्ट्रेशन हुए थे. आयोजकों का कहना है कि प्रदर्शकों की प्रतिक्रिया को देखते हुए अगले संस्करण में बड़े स्टॉल, बेहतर लोकेशन और अधिक भागीदारी की मांग सामने आई है.

वेडिंग इंडस्ट्री में बढ़ रहा नेटवर्किंग का महत्व

VanVivaha में सिर्फ उत्पादों और सेवाओं की प्रदर्शनी तक सीमित रहने के बजाय नेटवर्किंग पर भी जोर दिया गया. Make My Lagan और Sundowner Networking Party जैसी गतिविधियों के जरिए वेडिंग प्रोफेशनल्स, ब्रांड्स और संभावित ग्राहकों को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश की गई.

यह बदलाव बताता है कि वेडिंग इंडस्ट्री में बिजनेस अब सिर्फ स्टॉल पर उत्पाद दिखाने तक सीमित नहीं है. नए क्लाइंट, नए सहयोग और अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवरों के बीच नेटवर्क भी इस कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं. VanVivaha के को-फाउंडर सार्थक सैनी के मुताबिक, वेन्यू, डेकोर, फैशन, फूड और एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्र अब अलग-अलग खानों में काम नहीं कर रहे हैं. उनके अनुसार, एक शादी को बेहतर अनुभव बनाने के लिए डिजाइन, टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट और स्टोरीटेलिंग जैसे कई क्षेत्रों का एक साथ काम करना जरूरी है.

ब्यूटी से लेकर ज्वेलरी तक, बढ़ रहा अनुभव का दायरा

शादी के बदलते स्वरूप में ब्यूटी और पर्सनल स्टाइलिंग भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. VanVivaha में Revlon जैसे ब्यूटी ब्रांड की मौजूदगी ने इस सेगमेंट की भूमिका को सामने रखा. Revlon India की मैनेजिंग डायरेक्टर मेघना मोदी ने कहा कि कंपनी का VanVivaha के साथ जुड़ाव ब्राइडल और वेडिंग मेकअप के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में है. उन्होंने कहा, ज्वेलरी भी अब सिर्फ पारंपरिक आभूषणों तक सीमित नहीं है. आज दुल्हन और परिवार शादी के अलग-अलग समारोहों के लिए अलग लुक और ज्वेलरी की योजना बनाते हैं. ऐसे में डिजाइन, पर्सनलाइजेशन और पूरे लुक के साथ ज्वेलरी का तालमेल भी बाजार का हिस्सा बन गया है.

अगली मंजिल: 2-3 गुना विस्तार

पहले संस्करण के बाद आयोजकों ने अगले संस्करण को मौजूदा आकार से 2-3 गुना तक बढ़ाने की योजना बताई है. यह विस्तार केवल एक प्रदर्शनी के आकार में बढ़ोतरी नहीं होगा, बल्कि उस बाजार की बढ़ती विविधता को भी दर्शाएगा जिसमें शादी अब एक दिन का आयोजन न रहकर कई दिनों और कई अनुभवों में फैली गतिविधि बन चुकी है.

आज एक भारतीय शादी में मेहंदी, संगीत, कॉकटेल, शादी और रिसेप्शन जैसे कई समारोह हो सकते हैं. हर समारोह के लिए अलग ड्रेस, मेकअप, डेकोर, फूड और एंटरटेनमेंट की जरूरत हो सकती है. डेस्टिनेशन वेडिंग जुड़ने पर होटल, ट्रैवल और लॉजिस्टिक्स भी इसी इकोसिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं.

यही वजह है कि वेडिंग इंडस्ट्री को अब सिर्फ 'शादी का कारोबार' कहकर देखना पर्याप्त नहीं लगता. यह तेजी से एक ऐसे लाइफस्टाइल और एक्सपीरियंस इकोसिस्टम का रूप ले रहा है, जहां परिवार ग्राहक हैं, लेकिन उनके साथ काम करने वाले डिजाइनर, होटल, ज्वेलर, प्लानर, टेक्नोलॉजी कंपनियां और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स भी इस पूरी कहानी के अहम हिस्सेदार हैं.

VanVivaha 2026 इसी बदलाव का एक उदाहरण रहा, जहां शादी की तैयारी से जुड़े अलग-अलग हिस्से एक ही छत के नीचे दिखाई दिए. अब देखना यह होगा कि अगले संस्करण में यह प्लेटफॉर्म इस पूरे इकोसिस्टम को किस तरह और बड़े पैमाने पर जोड़ता है.

 


UPITS 2026: YEIDA में 469 करोड़ रुपये की 5 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित

शुक्रवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 के उद्घाटन के दौरान इन कंपनियों को जमीन आवंटन पत्र सौंपे गए. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पांचों कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदान किए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में परियोजनाओं के लिए पांच कंपनियों को 71,190 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. इन परियोजनाओं में कुल 469 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है और इनके जरिए 4,625 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. शुक्रवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 के उद्घाटन के दौरान इन कंपनियों को जमीन आवंटन पत्र सौंपे गए. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पांचों कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदान किए.

पांच कंपनियों को मिला जमीन आवंटन

C&R Textiles को 16,000 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने परियोजना में 104 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है, जिससे करीब 2,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी की ओर से प्रबंध निदेशक छत्रपति रंजीत राय ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

Perfectpack को 16,200 वर्ग मीटर जमीन मिली है. कंपनी 125 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और इससे करीब 700 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय राजगढ़िया ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

SABS Exports International को 16,180 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने 87 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है और परियोजना से 475 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक चेतन सभरवाल ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

Simplast India को 12,000 वर्ग मीटर जमीन मिली है. कंपनी की प्रस्तावित परियोजना में 78 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इससे 300 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक गौरव चुग ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

Sahu Exports को 10,810 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने 75 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है. परियोजना से 1,150 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक संजीव साहू ने जमीन आवंटन पत्र प्राप्त किया.

अमित शाह ने निवेशकों से की बातचीत

जमीन आवंटन पत्र सौंपने के साथ अमित शाह ने निवेशकों के साथ बातचीत भी की. इस दौरान उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार, निवेश के अवसरों और राज्य में कारोबारी गतिविधियों को तेज करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.

UPITS के जरिए हुए ये जमीन आवंटन निवेश प्रस्तावों को जमीनी स्तर पर वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में एक कदम हैं. पांचों परियोजनाओं से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

इन आवंटनों से YEIDA क्षेत्र की नई औद्योगिक परियोजनाओं को जगह देने में भूमिका भी सामने आती है. उत्तर प्रदेश सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और राज्य के औद्योगिक आधार का विस्तार करने पर जोर दे रही है.
 


JSW One Platforms ने 3,054 करोड़ रुपये के IPO के लिए दाखिल किए ड्राफ्ट पेपर, जानें पूरा प्लान

प्रस्तावित IPO में 1,300 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और मौजूदा निवेशकों की ओर से 1,754 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल शामिल है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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JSW One Platforms ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिए 3,054 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए हैं. कंपनी मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी आधारित B2B प्लेटफॉर्म संचालित करती है.

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, प्रस्तावित IPO में 1,300 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और 1,754.01 करोड़ रुपये तक का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है. OFS के तहत JSW Steel, JSW Cement और Mitsui & Co अपने शेयर बेचेंगे.

IPO से जुटाई रकम का कहां होगा इस्तेमाल

फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम में से 125 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी की सहायक इकाई JSW One Distribution में मार्केटिंग और ब्रांड निर्माण गतिविधियों के लिए किया जाएगा. वहीं, 500 करोड़ रुपये JSW One Finance Ltd में निवेश किए जाएंगे, जिससे कंपनी के पूंजी आधार को मजबूत किया जा सके. इसके अलावा, टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म के विकास पर 350 करोड़ रुपये तक खर्च करने की योजना है. बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा.

MSME को मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सामग्री से जोड़ता है प्लेटफॉर्म

JSW One Platforms एक इंटीग्रेटेड डिजिटल B2B प्लेटफॉर्म संचालित करती है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं से जोड़ता है.

प्लेटफॉर्म पर कॉमर्स के अलावा एम्बेडेड फाइनेंसिंग, लॉजिस्टिक्स, प्रोसेसिंग और कस्टमाइजेशन जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं. कंपनी के पास अपने प्राइवेट ब्रांड भी हैं.

30 जून 2026 तक प्लेटफॉर्म पर 95,611 रजिस्टर्ड ग्राहक और 1,713 विक्रेता थे. इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर कुल 165 ब्रांड मौजूद थे और इसका नेटवर्क 6,963 सर्विसेबल पिन कोड तक फैला था. कंपनी 81 लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स, 12 कॉन्ट्रैक्ट सर्विस सेंटर और 9 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के नेटवर्क के साथ काम करती है.

FY26 में 45 फीसदी बढ़ा राजस्व

कंपनी का परिचालन से राजस्व वित्त वर्ष 2026 में 44.93 फीसदी बढ़कर 5,743.39 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 3,962.81 करोड़ रुपये था. इसी अवधि में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) भी बढ़कर 18,596.91 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 12,564.84 करोड़ रुपये था.

30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का परिचालन से राजस्व 1,642.45 करोड़ रुपये रहा. इस दौरान कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) 14.21 करोड़ रुपये रहा, जबकि तिमाही GMV 5,949.73 करोड़ रुपये था.

260 करोड़ रुपये तक हो सकता है प्री-IPO प्लेसमेंट

DRHP के मुताबिक, कंपनी 260 करोड़ रुपये तक के प्री-IPO प्लेसमेंट पर भी विचार कर सकती है. अगर यह प्लेसमेंट पूरा होता है, तो इससे जुटाई गई रकम को फ्रेश इश्यू के आकार से घटा दिया जाएगा.

DRHP में उद्धृत इंडस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार, भारत का B2B ट्रेड मार्केट करीब 2 ट्रिलियन डॉलर का है. वित्त वर्ष 2026 में मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन B2B कॉमर्स में डिजिटल पैठ करीब 3 फीसदी आंकी गई थी. ऐसे में JSW One Platforms का प्रस्तावित IPO भारत के B2B कारोबार में बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के बीच आया है.
 


सरकार ने FY27 की सकल उधारी घटाई, बॉन्ड बिक्री का लक्ष्य 7.86 लाख करोड़ रुपये

सरकार अक्टूबर-मार्च के दौरान 7.86 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी करेगी. सरकार ने बॉन्ड जारी करने का रुख लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर बढ़ाया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी सकल बाजार उधारी योजना को घटाकर करीब 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. बजट में पहले इसके 17.20 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था. सरकार वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बॉन्ड बिक्री के जरिए 7.86 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है.

अक्टूबर-मार्च के लिए उधारी कार्यक्रम पहले बताए गए 7.96 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है. संशोधित योजना ऐसे समय में आई है जब सरकार बॉन्ड यील्ड पर दबाव को नियंत्रित करने और सरकारी प्रतिभूति बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है.

उधारी योजना में संशोधन

15.995 लाख करोड़ रुपये का नया आंकड़ा उस 16.09 लाख करोड़ रुपये से भी कम है, जिसकी घोषणा पहली समीक्षा के बाद की गई थी. सरकार अप्रैल-सितंबर के दौरान पहले ही 8.135 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस महीने की शुरुआत में हुई एक नीलामी में सरकार ने तय योजना से 6,500 करोड़ रुपये कम उधार लिया था.

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शुरुआत में सकल उधारी 17.20 लाख करोड़ रुपये तय की थी. इसके बाद बॉन्ड स्विच ऑपरेशन के जरिए उधारी की जरूरत कम हुई और यह आंकड़ा पहले 16.09 लाख करोड़ रुपये पर आया. अब इसे और घटाकर 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली शुद्ध बाजार उधारी 11.73 लाख करोड़ रुपये के बजटीय स्तर पर ही बनी हुई है.

लंबी अवधि की प्रतिभूतियों पर जोर

अक्टूबर से मार्च के दौरान सरकार 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की अवधि वाली प्रतिभूतियां जारी करेगी. इनमें 10 साल की अवधि वाले बॉन्ड की उधारी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनी रहेगी. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बाजार प्रतिभागियों के साथ चर्चा के बाद उधारी कार्यक्रम की संरचना को लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर स्थानांतरित किया गया है.

पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी अप्रैल-सितंबर की 15.4 फीसदी से घटकर 12.1 फीसदी रह जाएगी. वहीं, 10 साल की प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 29 फीसदी से घटकर 26.3 फीसदी होगी.

इसके विपरीत, 15 साल और 30 साल की प्रतिभूतियों की संयुक्त हिस्सेदारी दूसरी छमाही की उधारी में 26.8 फीसदी रहेगी, जो पहली छमाही में 21.8 फीसदी थी. सरकार 40 साल और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड भी जारी करेगी.

बॉन्ड बाजार पर नजर

संशोधित उधारी योजना ऐसे समय में आई है जब भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में दबाव बना हुआ है और हाल के कारोबारी सत्रों में यील्ड बढ़ी है. कारोबारियों के अनुसार, कुछ सबसे अधिक कारोबार वाली अवधि के बॉन्ड की आपूर्ति कम होने से हालिया बिकवाली के बाद इन सेगमेंट में मांग को समर्थन मिल सकता है.

उधारी कैलेंडर ऐसे समय में जारी किया गया है जब भारत की बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता ऊंचे स्तर पर है. RBI ने हाल में अतिरिक्त रुपये की नकदी को वित्तीय प्रणाली से सोखने के लिए खुले बाजार में बॉन्ड बिक्री और अन्य लिक्विडिटी मैनेजमेंट उपायों का इस्तेमाल किया है.

नवीनतम संशोधन के बाद सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में डेटेड सिक्योरिटीज के जरिए करीब 16 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी. वहीं, नियोजित शुद्ध बाजार उधारी को बजटीय स्तर पर बनाए रखते हुए वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जारी किए जाने वाले कर्ज की अवधि की संरचना में बदलाव किया गया है.

भारत की FY27 उधारी योजना में कटौती

भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की सकल बाजार उधारी को 17.20 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. दूसरी छमाही यानी अक्टूबर-मार्च में सरकार 7.86 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी करेगी. सरकार ने उधारी की अवधि को भी लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर बढ़ाया है.

अप्रैल-सितंबर में जुटाए 8.135 लाख करोड़ रुपये

सरकार अप्रैल-सितंबर के दौरान अब तक 8.135 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस महीने की शुरुआत में हुई नीलामी में तय योजना से 6,500 करोड़ रुपये कम उधारी की गई थी. बॉन्ड स्विच ऑपरेशन के बाद सकल उधारी का अनुमान पहले 16.09 लाख करोड़ रुपये किया गया था, जिसे अब और घटाया गया है.

15 और 30 साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी बढ़ी

दूसरी छमाही में 15 साल और 30 साल की प्रतिभूतियों की संयुक्त हिस्सेदारी 26.8 फीसदी होगी, जबकि पहली छमाही में यह 21.8 फीसदी थी. वहीं, पांच साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी 15.4 फीसदी से घटकर 12.1 फीसदी और 10 साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी 29 फीसदी से घटकर 26.3 फीसदी होगी. सरकार 40 और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड भी जारी करेगी.

शुद्ध बाजार उधारी में बदलाव नहीं

सरकार की 11.73 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बाजार उधारी का लक्ष्य बरकरार है. इसमें बदलाव मुख्य रूप से सकल उधारी और दूसरी छमाही में जारी किए जाने वाले बॉन्ड की अवधि की संरचना में किया गया है.
 


भारत का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 765.90 अरब डॉलर, जानिए क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट

विदेशी मुद्रा भंडार के साप्ताहिक आंकड़े रुपये और देश के बाहरी क्षेत्र की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 18 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 14.88 अरब डॉलर घटकर 765.90 अरब डॉलर रह गया. इससे पिछले सप्ताह भी भंडार में गिरावट दर्ज की गई थी. सितंबर की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने के बाद अब रिजर्व में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.

विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की बाहरी वित्तीय स्थिति का अहम संकेतक होता है. इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, विशेष आहरण अधिकार (SDR) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में रिजर्व पोजीशन शामिल होते हैं. भंडार में बदलाव का असर देश की बाहरी भुगतान क्षमता और विदेशी मुद्रा बाजार की स्थिति पर पड़ सकता है.

विदेशी मुद्रा भंडार में क्यों आई गिरावट?

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में होता है. इसमें डॉलर के साथ दूसरी विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां भी शामिल हैं. इन परिसंपत्तियों के मूल्य में बदलाव, विभिन्न मुद्राओं की विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से कुल रिजर्व में बदलाव हो सकता है.

इसलिए किसी एक सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था में कमजोरी का संकेत नहीं माना जा सकता. इसके लिए यह देखना जरूरी होता है कि गिरावट किस घटक में हुई है और इसके पीछे क्या वजह रही है.

रुपये पर क्या हो सकता है असर?

विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल देश की बाहरी भुगतान जरूरतों को पूरा करने और विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में किया जाता है. पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से आयात भुगतान और वैश्विक वित्तीय दबावों से निपटने में मदद मिलती है.

हालांकि, सिर्फ एक सप्ताह में रिजर्व घटने के आधार पर रुपये की दिशा को लेकर कोई सीधा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. रुपये की चाल पर कच्चे तेल की कीमत, आयात बिल, विदेशी निवेश का प्रवाह, डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजार की स्थिति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है.

आगे किन आंकड़ों पर रहेगी नजर?

आने वाले सप्ताहों में विदेशी मुद्रा भंडार के साथ विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार में बदलाव पर भी नजर रहेगी. अगर रिजर्व में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो इसके कारणों और इसके अलग-अलग घटकों में हुए बदलाव को समझना महत्वपूर्ण होगा.

भारत की अर्थव्यवस्था ऊर्जा आयात, वैश्विक व्यापार और विदेशी पूंजी प्रवाह से जुड़ी हुई है. ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार के साप्ताहिक आंकड़े रुपये और देश के बाहरी क्षेत्र की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं.


28 से 30 सितंबर तक बैंक हड़ताल, SBI-PNB समेत कई बैंकों ने ग्राहकों को किया अलर्ट

हड़ताल को देखते हुए सरकार ने ग्राहकों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए 27 सितंबर, रविवार को सरकारी बैंकों की शाखाएं खोलने का निर्देश दिया है.

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Published - Saturday, 26 September, 2026
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Saturday, 26 September, 2026
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बैंक कर्मचारियों की 28 सितंबर से प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ इंडिया समेत कई बैंकों ने ग्राहकों को जरूरी बैंकिंग काम पहले ही पूरा करने की सलाह दी है. हड़ताल के दौरान शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है, हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है.

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिन का बैंकिंग सप्ताह लागू करना शामिल है. हड़ताल को देखते हुए सरकार ने ग्राहकों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए 27 सितंबर, रविवार को सरकारी बैंकों की शाखाएं खोलने का निर्देश दिया है.

SBI ने ग्राहकों को दी यह सलाह

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे हड़ताल की प्रस्तावित तारीखों से पहले अपने जरूरी बैंकिंग लेनदेन पूरे कर लें. बैंक ने कहा है कि हड़ताल के दौरान शाखाओं और कार्यालयों में सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. SBI ने ग्राहकों को नकदी की जरूरत के लिए एटीएम और कैश डिपॉजिट-विदड्रॉल मशीनों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. इसके अलावा YONO, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

PNB ने ग्राहकों को भेजा अलर्ट मैसेज

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने हड़ताल को देखते हुए अपने ग्राहकों को पहले ही मैसेज भेजकर जरूरी बैंकिंग काम समय रहते पूरा करने की सलाह दी है. बैंक ने कहा है कि हड़ताल के दौरान एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाओं के साथ बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सेवाएं उपलब्ध रखने का प्रयास किया जाएगा.

बैंक ऑफ इंडिया ने भी जारी की एडवाइजरी

बैंक ऑफ इंडिया ने भी ग्राहकों से 28, 29 और 30 सितंबर को प्रस्तावित हड़ताल के दौरान डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने की अपील की है. बैंक ने मोबाइल बैंकिंग, एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, बैंक प्रतिनिधि (BC) केंद्र और UPI जैसी सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी प्रस्तावित हड़ताल में शामिल होंगे. वहीं, पुराने निजी क्षेत्र के बैंक कर्नाटक बैंक ने भी कहा है कि हड़ताल की स्थिति में उसकी शाखाओं, कार्यालयों और विभागों का सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है. बैंक ने सेवाओं को सामान्य बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है.

इन बैंकों पर नहीं होगा हड़ताल का असर

आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक जैसे नए निजी क्षेत्र के बैंकों के सामान्य रूप से काम करने की उम्मीद है. इन बैंकों के ग्राहक सामान्य बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे.

सरकार ने हड़ताल से बचने की अपील की

हड़ताल से पहले वित्त मंत्रालय ने बैंक कर्मचारी संगठनों से हड़ताल से बचने और लंबित मांगों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की है. मंत्रालय के अनुसार, बैंक कर्मचारी संगठनों की ज्यादातर चिंताओं का काफी हद तक समाधान किया जा चुका है.

ऐसे में 28 से 30 सितंबर के दौरान बैंक शाखा से जुड़े किसी जरूरी काम की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बेहतर होगा कि वे उसे पहले ही पूरा कर लें. वहीं, सामान्य डिजिटल लेनदेन के लिए UPI, मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है.


घर खरीदने या किराये पर लेने से पहले जांच सकेंगे इंटरनेट कनेक्टिविटी, TRAI ने लॉन्च किया रेटिंग प्लेटफॉर्म

इस प्लेटफॉर्म पर घरों, दफ्तरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को एक से पांच स्टार के पैमाने पर रेटिंग दी जाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
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Saturday, 26 September, 2026
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घर या ऑफिस खरीदने और किराये पर लेने से पहले अब वहां मोबाइल नेटवर्क, फाइबर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने शुक्रवार को ‘डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म’ लॉन्च किया है. इस प्लेटफॉर्म पर घरों, दफ्तरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों की डिजिटल कनेक्टिविटी को एक से पांच स्टार के पैमाने पर रेटिंग दी जाएगी.

ट्राई ने इमारतों के भीतर डिजिटल कनेक्टिविटी की जांच के लिए एक मोबाइल ऐप भी शुरू किया है. नियामक के मुताबिक, आज मोबाइल डेटा का करीब 70-80 फीसदी इस्तेमाल घरों और दफ्तरों के अंदर होता है. ऐसे में संपत्ति की डिजिटल कनेक्टिविटी को भी उसकी सुविधाओं का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है.

एक से पांच स्टार तक मिलेगी रेटिंग

ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म संपत्तियों के भीतर कनेक्टिविटी को अधिक मापने योग्य, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक कदम है. इससे बेहतर योजना बनाने, विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल सुधारने और उपभोक्ताओं को संपत्ति की कनेक्टिविटी के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

प्लेटफॉर्म पर संपत्तियों को एक से पांच स्टार तक रेटिंग दी जाएगी. इसमें एक स्टार सबसे कम और पांच स्टार सबसे अधिक रेटिंग को दर्शाएगा. निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए आधे स्टार की रेटिंग का भी प्रावधान किया गया है.

संपत्ति खरीदने और किराये के फैसले में मिलेगी मदद

TRAI के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं के लिए सार्वजनिक रेटिंग सर्च पेज उपलब्ध होगा. यहां किसी संपत्ति का नाम या स्थान डालकर उसकी डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग देखी जा सकेगी. इससे घर खरीदने या किराये पर लेने वाले लोगों को संपत्ति की इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने में मदद मिल सकती है.

मोबाइल ऐप के जरिये किए गए डिजिटल कनेक्टिविटी टेस्ट का विवरण भी प्लेटफॉर्म पर दर्ज हो जाएगा. उपभोक्ता रेटेड संपत्तियों की प्रकाशित रेटिंग के साथ संबंधित प्रमाणपत्रों को भी सत्यापित कर सकेंगे.

डेवलपर और प्रॉपर्टी मैनेजर ऑनलाइन कर सकेंगे आवेदन

प्लेटफॉर्म पर संपत्ति प्रबंधक अपना और संपत्ति का पंजीकरण कर सकेंगे. इसके बाद वे रेटिंग के लिए आवेदन जमा करने, जरूरी दस्तावेज अपलोड करने और पंजीकृत डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसी (DCRA) का चयन करने के साथ आवेदन की स्थिति भी देख सकेंगे.

DCRA के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी. एजेंसियां उन्हें आवंटित संपत्तियों की जानकारी देख सकेंगी, उनका आकलन कर सकेंगी और टेस्ट के नतीजे तथा अपनी टिप्पणियां प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर सकेंगी. इमारत का मौके पर आकलन DCRA के लिए बनाए गए मोबाइल ऐप के जरिए किया जाएगा.

निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध प्रमाणन

प्लेटफॉर्म पर तैयार और निर्माणाधीन, दोनों तरह की संपत्तियों की रेटिंग की जा सकेगी. निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध प्रमाणन की व्यवस्था की गई है. इसमें डिजिटल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर की डिजाइन और योजना, उसकी स्थापना तथा निर्माण पूरा होने के बाद टेस्टिंग के आधार पर अंतिम ग्रेड या रेटिंग प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा.

किन मानकों पर तय होगी रेटिंग?

यह प्लेटफॉर्म 2024 में जारी डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग (DCR) फ्रेमवर्क पर आधारित है. इसके तहत संपत्ति की डिजिटल कनेक्टिविटी का आकलन कई मानकों पर किया जाता है. इनमें फाइबर की उपलब्धता, मोबाइल नेटवर्क, इमारत के भीतर कनेक्टिविटी और वाई-फाई इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.

इसके अलावा डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और डिजिटल सिस्टम के लिए बिजली की उपलब्धता को भी आकलन में शामिल किया जाता है. अलग-अलग तरह की संपत्तियों के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए हैं.

अभी तक सिर्फ सात संपत्तियों को मिली स्टार रेटिंग

TRAI के चेयरमैन के मुताबिक, संपत्ति मालिकों और डेवलपरों के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग लेना अनिवार्य नहीं है. इसी वजह से अब तक इसे अपनाने की गति धीमी रही है और अभी तक सिर्फ सात संपत्तियों को स्टार रेटिंग मिली है.

हालांकि, रेटिंग देने के लिए कई एजेंसियों को सूचीबद्ध किया गया है और कुछ डेवलपरों ने DCR फ्रेमवर्क को अपनाना शुरू कर दिया है. ट्राई का मानना है कि उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ने के साथ रेटिंग की मांग भी बढ़ सकती है. ऐसे में घर खरीदने या किराये पर लेने वाले लोग संपत्ति की डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग की जानकारी मांग सकते हैं, जिससे डेवलपरों को भी रेटिंग हासिल करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है.
 


भारत के रनिंग बाजार में विस्तार की तैयारी, डेकाथलॉन का 2030 तक ₹1,000 करोड़ कारोबार का लक्ष्य

50 लाख सक्रिय रनर्स तक पहुंचने की रणनीति, इस साल KIPRUN के 35 नए प्रोडक्ट होंगे लॉन्च

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 25 September, 2026
Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
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भारत में रनिंग के बढ़ते चलन और रनिंग इवेंट्स की बढ़ती संख्या के बीच डेकाथलॉन स्पोर्ट्स इंडिया ने अपने रनिंग सब-ब्रांड KIPRUN by Decathlon के विस्तार की रणनीति सामने रखी है. कंपनी ने 2030 तक रनिंग सेगमेंट में ₹1,000 करोड़ से अधिक का कारोबार हासिल करने और अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के जरिए 50 लाख से अधिक सक्रिय रनर्स तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. कंपनी का पोर्टफोलियो हाई-परफॉर्मेंस रनिंग शूज, अपैरल, हाइड्रेशन पैक्स, ट्रेल गियर और एक्सेसरीज को कवर करता है.

इस विस्तार को गति देने के लिए KIPRUN इस साल रनिंग सेगमेंट में 35 नए प्रोडक्ट पेश कर रहा है. इनमें 17 हाई-परफॉर्मेंस रनिंग शूज शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, इन उत्पादों को अलग-अलग स्तर के रनर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. इसके साथ ही भविष्य के लिए नए उत्पादों की पाइपलाइन भी तैयार की जा रही है.

रनिंग बाजार में बड़ा बदलाव

डेकाथलॉन स्पोर्ट्स इंडिया के स्पोर्ट्स डायरेक्टर हैंस पीटर जेन्सन ने कहा कि भारत में रनिंग अब सिर्फ फिटनेस गतिविधि नहीं रह गई है, बल्कि इसमें बड़ा सांस्कृतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. उनके मुताबिक, देश में हर साल करीब 2,000 रनिंग इवेंट आयोजित हो रहे हैं, जबकि 2016 में इनकी संख्या करीब 600 थी. यह बदलाव रनिंग के बढ़ते कम्युनिटी बेस और बाजार की संभावनाओं को दिखाता है.

उन्होंने कहा कि आज रनर्स केवल रेस में हिस्सा लेकर फिनिश लाइन पार करने तक सीमित नहीं हैं. वे अपने प्रदर्शन को बेहतर करने और व्यक्तिगत रिकॉर्ड सुधारने पर भी फोकस कर रहे हैं. इसके चलते रनिंग प्रोडक्ट्स में तकनीक और प्रदर्शन की मांग बढ़ रही है. जेन्सन के मुताबिक, ग्राहक अब सिर्फ कम कीमत वाले उत्पाद नहीं चाहते, बल्कि कीमत के साथ बेहतर तकनीक, वास्तविक वैल्यू और उच्च स्तर के प्रदर्शन की भी अपेक्षा कर रहे हैं.

2030 तक 50 लाख रनर्स तक पहुंचने की रणनीति

जेन्सन ने कहा कि KIPRUN डेकाथलॉन की भारत में दीर्घकालिक मल्टी-स्पोर्ट रणनीति का प्रमुख हिस्सा है. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक ₹1,000 करोड़ से अधिक का रनिंग कारोबार और 50 लाख से अधिक सक्रिय रनर्स तक पहुंच बनाना है.

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी केवल उत्पादों के विस्तार पर निर्भर नहीं है, बल्कि परफॉर्मेंस फुटवियर में इनोवेशन के साथ स्टोर्स और डिजिटल चैनलों पर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के जरिए ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दे रही है.

KIPRUN की शुरुआत रनिंग कम्युनिटी से

कंट्री स्पोर्ट्स लीडर-रनिंग, डेकाथलॉन स्पोर्ट्स इंडिया, ब्रूनो अराउजो ने कहा कि KIPRUN की शुरुआत खुद रनिंग कम्युनिटी से हुई है. उन्होंने बताया कि “Keep on Running” के संदेश से KIPRUN नाम सामने आया. ब्रूनो के मुताबिक, ब्रांड का उद्देश्य हर उम्र और स्तर के रनर्स को रनिंग जारी रखने, अपनी क्षमता को पहचानने और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करना है.

उन्होंने कहा कि KIPRUN का लक्ष्य भारत में रनर्स के लिए पहला डेस्टिनेशन बनना है. ब्रांड पहली बार 5 किलोमीटर रनिंग शुरू करने वाले लोगों से लेकर हाफ मैराथन की तैयारी करने वाले और हाई-परफॉर्मेंस रनिंग करने वाले रनर्स की जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान दे रहा है. “More Runs, More Life” की सोच के तहत कंपनी रनर्स की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी स्पोर्ट्स गियर उपलब्ध कराने और रनिंग कम्युनिटी के विकास में योगदान देने पर जोर दे रही है.

बढ़ती रनर डिमांड पर हाई-परफॉर्मेंस फुटवियर का फोकस

ब्रूनो ने कहा कि आज भारतीय रनर्स का लक्ष्य केवल फिनिश लाइन पार करना नहीं है. वे अपनी सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं और व्यक्तिगत रिकॉर्ड बेहतर करने पर ध्यान दे रहे हैं. इसके चलते उन्नत तकनीक वाले रनिंग प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है, लेकिन रनर्स इन उत्पादों के लिए उचित और पारदर्शी कीमत भी चाहते हैं. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए KIPRUN अपने हाई-परफॉर्मेंस रनिंग शूज का विस्तार कर रहा है.

नए टॉप रेसिंग मॉडल को पेश करते हुए उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस लंबे समय की रिसर्च और डेवलपमेंट का परिणाम है. उन्होंने बताया कि इससे पहले KIPRUN KD900X LD Plus को ओलंपिक स्तर के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था. कंपनी के मुताबिक, उसकी एथलीट और एंबेसडर मेलानी रोल ने 2024 में इसी जूते का इस्तेमाल करते हुए फ्रेंच मैराथन रिकॉर्ड तोड़ा और ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था. कंपनी के एक अन्य एथलीट जिमी ग्रासिया ने भी इसी जूते के साथ यूरोपियन हाफ मैराथन खिताब जीता था.

ब्रूनो के मुताबिक, नए जूते को एथलीट टेस्टिंग और बायोमैकेनिकल विश्लेषण के आधार पर विकसित किया गया है. इसका उद्देश्य उन रनर्स को डायनैमिक परफॉर्मेंस देना है जो अपने रिकॉर्ड को बेहतर करना चाहते हैं.

कुशनिंग और एनर्जी रिटर्न में सुधार

ब्रूनो ने बताया कि नए मॉडल में तीन प्रमुख तकनीकी बदलाव किए गए हैं. इनमें FAST-TECH तकनीक शामिल है, जिसमें डुअल-डेंसिटी मिडसोल का इस्तेमाल किया गया है. कंपनी के मुताबिक, इसे रनिंग के दौरान सॉफ्ट और डायनैमिक अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है.

कंपनी ने अपनी पिछली टॉप-रेंज शू KD900X LD Plus की तुलना में नए मॉडल की कुशनिंग में 25 फीसदी और एनर्जी रिटर्न में 21 फीसदी सुधार का दावा किया है. इसमें पेटेंटेड कार्बन प्लेट स्ट्रक्चर भी दिया गया है, जो मेटाटार्सल के फ्लेक्सन को कम करने और रनिंग इकॉनमी को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. रनिंग इकॉनमी का मतलब समान गति और दूरी के लिए कम ऊर्जा खर्च करना है.

इसके अलावा, जूते में रेस रनिंग के लिए प्रीमियम 3D अपर मेश दिया गया है और इसका कुल वजन 216 ग्राम है. इसमें 64 मिलीमीटर का हील भी है, जिसे कंपनी के मुताबिक लैंडिंग को आसान बनाने और पैर को अगले स्टेप में तेजी से ट्रांजिशन करने के लिए डिजाइन किया गया है.

ब्रूनो ने कहा कि किसी भी तकनीक की असली परीक्षा सड़क पर रनिंग के दौरान होती है. इसी वजह से कंपनी ने एलीट टेस्टर्स से पूछा कि क्या वे 2026 में किसी रेस के दौरान इस जूते को भरोसे के साथ पहनेंगे. कंपनी के मुताबिक, 100 फीसदी एलीट टेस्टर्स ने इसका जवाब ‘हां’ में दिया.

उन्होंने कहा कि यह जूता उन रनर्स के लिए तैयार किया गया है जो अपनी सीमाओं को चुनौती देना, रिकॉर्ड बेहतर करना और पर्सनल बेस्ट हासिल करना चाहते हैं. उनके मुताबिक, एलीट स्तर के लिए विकसित तकनीक को अब अधिक रनर्स, खासकर भारत में रनर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है.

2,000 से ज्यादा रनिंग इवेंट्स का बाजार

ब्रूनो ने कहा कि भारत में रनिंग तेजी से एक कम्युनिटी आधारित गतिविधि बन रही है. उनके मुताबिक, 2025 में देश में 2,000 से अधिक रनिंग इवेंट आयोजित हुए, जबकि 2016 में इनकी संख्या करीब 600 थी. उनके अनुसार, यह केवल एक अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि भारत में रनिंग से जुड़ा बड़ा सांस्कृतिक बदलाव है.

उन्होंने कहा कि रनर्स की अपेक्षाएं भी लगातार बढ़ रही हैं. अब लोग केवल इवेंट में हिस्सा लेने या सर्टिफिकेट हासिल करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बेहतर प्रदर्शन, तकनीकी उत्पाद और अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड में सुधार पर भी ध्यान दे रहे हैं. इसी बदलाव को देखते हुए KIPRUN शुरुआती रनर्स से लेकर हाई-परफॉर्मेंस रनिंग करने वालों तक के लिए उत्पाद और समाधान विकसित कर रहा है.

रनिंग गियर बाजार में बढ़ते अवसर

ब्रूनो अराउजो ने भारत में रनिंग से जुड़े उत्पादों के बड़े बाजार की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि रनिंग शूज, अपैरल और एक्सेसरीज को मिलाकर भारतीय बाजार करीब ₹20,000 करोड़ का है, जबकि घड़ियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने 2024 के संदर्भ में करीब ₹40,000 करोड़ के बाजार का भी उल्लेख किया. उनके मुताबिक, रनिंग में बढ़ती भागीदारी और रनर्स की बदलती जरूरतों के साथ इस बाजार में तकनीकी और हाई-परफॉर्मेंस उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है.

वहीं, IMARC Group के अनुसार, भारत का रनिंग गियर बाजार 2025 में 2.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में 2.7 अरब डॉलर हो गया है और 2034 तक इसके 4.9 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. एडवांस्ड कुशनिंग, रिस्पॉन्सिव फोम टेक्नोलॉजी और कार्बन-इन्फ्यूज्ड फुटवियर जैसी तकनीकों की बढ़ती मांग भी इस सेगमेंट के विस्तार को प्रभावित कर रही है.

डेकाथलॉन के मुताबिक, रनिंग बाजार में बढ़ती तकनीकी मांग को देखते हुए KIPRUN अपने हाई-परफॉर्मेंस पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहा है. कंपनी का फोकस पहली बार रनिंग शुरू करने वालों से लेकर व्यक्तिगत रिकॉर्ड बेहतर करने वाले एलीट रनर्स तक अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों की जरूरतों को पूरा करने पर है.

डेकाथलॉन की मल्टी-स्पोर्ट रणनीति में रनिंग अहम

जेन्सन के मुताबिक, डेकाथलॉन की मल्टी-स्पोर्ट रणनीति के तहत कंपनी करीब 60 खेलों को कवर करती है. दुनिया भर में कंपनी के पास करीब 1,400 इंजीनियर और 300 डिजाइनर हैं, जबकि 700 से अधिक पेटेंट उसके तकनीकी उत्पाद विकास का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि भारत में युवा आबादी, बढ़ती खेल सुविधाओं, स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और रनिंग इवेंट्स के विस्तार से स्पोर्ट्स बाजार के लिए नए अवसर बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि रनिंग इस बदलाव का एक प्रमुख हिस्सा है और आने वाले वर्षों में यह डेकाथलॉन के लिए कारोबार की वृद्धि का महत्वपूर्ण सेगमेंट बना रहेगा.

 


मिठाई के डिब्बे से पर्सनलाइज्ड तोहफों तक, बदल रही फेस्टिव गिफ्टिंग की तस्वीर

प्रीमियम चॉकलेट, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, स्मार्ट उपकरण और अनुभव आधारित उपहारों की बढ़ती मांग; छोटे शहरों तक पहुंचा महंगे और व्यक्तिगत उपहारों का चलन

रितु राणा by
Published - Friday, 25 September, 2026
Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
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फेस्टिव सीजन अब करीब है. नवरात्र, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के साथ उपहारों की खरीदारी भी जोर पकड़ने लगी है. भारत में इन त्योहारों पर मिठाई, सूखे मेवे और गिफ्ट देने की परंपरा लंबे समय से रही है, लेकिन बदलती जीवनशैली और उपभोक्ताओं की पसंद ने गिफ्टिंग के बाजार का स्वरूप बदलना शुरू कर दिया है. अब मिठाई और सामान्य ड्राई फ्रूट पैक उपहार के एकमात्र विकल्प नहीं रह गए हैं. उपभोक्ता ऐसे तोहफों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें उपयोगिता, गुणवत्ता, व्यक्तिगत पसंद और भावनात्मक जुड़ाव नजर आए. इसी बदलाव के चलते प्रीमियम चॉकलेट, कारीगरों द्वारा तैयार खाद्य उत्पाद, बेकरी आइटम, स्वास्थ्य एवं सौंदर्य उत्पाद, तकनीकी उपकरण, होम डेकोर और अनुभव आधारित उपहार जैसी श्रेणियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं.

 

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गिफ्टिंग बाजार 2024 में 75.16 अरब डॉलर का था और 2030 तक इसके 92.32 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इस दौरान बाजार की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 3.55 फीसदी रहने का अनुमान है. बाजार के विस्तार के साथ बदलाव सिर्फ खर्च की मात्रा में नहीं, बल्कि उपहार चुनने के तरीके में भी दिखाई दे रहा है. अब ग्राहक गिफ्ट की कीमत के साथ-साथ उसकी प्रासंगिकता, प्रस्तुति, व्यक्तिगत स्पर्श और सामने वाले की पसंद को भी महत्व दे रहे हैं.

मिठाई से आगे बढ़कर व्यक्तिगत पसंद पर जोर

गिफ्टिंग उद्योग के मुताबिक, त्योहारों में मिठाई की पारंपरिक भूमिका अभी भी बनी हुई है, लेकिन उपहार देना अब ज्यादा व्यक्तिगत होता जा रहा है. अवसर और प्राप्तकर्ता के हिसाब से चुने गए उपहारों की मांग में 45 फीसदी की वृद्धि देखी गई है. स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद, फूल, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, जीवनशैली से जुड़े सामान और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार उपहारों में रुचि बढ़ रही है.

Consortium Gifts के संस्थापक और प्रबंध निदेशक गौरव भगत के मुताबिक, इस साल गिफ्टिंग पर खर्च बढ़ रहा है, लेकिन यह केवल अधिक खर्च करने का मामला नहीं है, बल्कि ज्यादा सोच-समझकर खर्च करने का चलन है.

उनके मुताबिक, जिन उपहार बजट में पहले 500-1,500 रुपये के आसपास खर्च होता था, वे अब कई मौकों पर 1,500-4,000 रुपये और 4,500 रुपये तक पहुंच रहे हैं. उनके अनुसार, 1,500-4,000 रुपये का खंड इस साल खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जहां ग्राहक बेहतर गुणवत्ता, व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार उपहार और उपयोगिता तीनों चाहते हैं. करीब 2,500 रुपये के आसपास तैयार किए गए उपहारों में भी अच्छी मांग दिखाई दे रही है.

भगत कहते हैं कि अब गिफ्ट सिर्फ एक वस्तु नहीं रह गया है, बल्कि वह 'अर्थपूर्ण मूल्य' देने का माध्यम बन रहा है. स्वास्थ्य, तकनीक, जीवनशैली और अनुभव आधारित उपहार इसी बदलाव का हिस्सा हैं.

कंपनियों में सामान्य हैम्पर की जगह उपयोगी और व्यक्तिगत उपहार

त्योहारी मौसम में कॉरपोरेट गिफ्टिंग का स्वरूप भी बदल रहा है. कंपनियां कर्मचारियों और ग्राहकों को सिर्फ महंगे या बड़े हैम्पर देने के बजाय उनकी उपयोगिता, प्रासंगिकता और व्यक्तिगत पसंद पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. Consortium Gifts के संस्थापक और प्रबंध निदेशक गौरव भगत के मुताबिक, स्वास्थ्य एवं जीवनशैली, तकनीक, यात्रा, कार्यस्थल पर उपयोग होने वाले सामान और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार उत्पादों की मांग बढ़ रही है. उनके अनुसार, गिफ्टिंग अब कर्मचारी जुड़ाव और कारोबारी संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बनती जा रही है. आने वाले त्योहारी मौसम में 'एक जैसा हैम्पर सभी को देने' की जगह ऐसे चुने हुए उपहारों की भूमिका बढ़ सकती है, जिनमें प्राप्तकर्ता की जीवनशैली, भूमिका और पसंद को ध्यान में रखा जाए. 2025 में स्वास्थ्य केंद्रित छुट्टियां, कौशल सीखने की सदस्यता, यात्रा वाउचर और व्यक्तिगत रूप से तैयार हैम्पर जैसे विकल्पों की ओर भी यह बदलाव दिखाई दिया था.

Quice Marketing Pvt. Ltd. के संस्थापक राजीव चंद्रवंशी भी कॉरपोरेट गिफ्टिंग में इसी बदलाव को रेखांकित करते हैं. उनके मुताबिक, कंपनियां अब ऐसे उपहार चाहती हैं जो उपयोगी होने के साथ बेहतर और व्यक्तिगत भी लगें. कॉरपोरेट और कारोबार से कारोबार वाले खंड में व्यक्तिगत रूप से तैयार प्रचार सामग्री, प्रीमियम हैम्पर, चॉकलेट, स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद, सूखे मेवे, स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, तकनीकी सहायक उपकरण और उपयोगी सामान की मांग बढ़ रही है. चंद्रवंशी कहते हैं कि पहले सवाल होता था कि 'इस बजट में क्या गिफ्ट दिया जा सकता है?', जबकि अब सवाल बदलकर यह हो गया है कि 'जिसे उपहार दे रहे हैं, उसके लिए क्या उपयोगी और प्रासंगिक होगा?' उनके मुताबिक, सोच-समझकर तैयार किया गया 500-1,000 रुपये का उपहार भी मजबूत कारोबारी छाप छोड़ सकता है. वह कहते हैं, 'मेरे लिए अच्छा कॉरपोरेट गिफ्ट वह है जो प्राप्त करने वाले के लिए उपयोगी हो और ब्रांड के लिए यादगार.'

महंगा नहीं, बेहतर और उपयोगी उपहार

गिफ्टिंग बाजार में प्रीमियम उत्पादों का चलन जरूर बढ़ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मतलब केवल महंगे गिफ्ट खरीदना नहीं है. ग्राहक अब 'महंगा' नहीं, बल्कि 'पैसे के अनुरूप बेहतर' उपहार तलाश रहा है.

चंद्रवंशी के मुताबिक, प्रीमियम अनुभव सिर्फ उत्पाद की कीमत से नहीं बनता. उनके अनुसार, 'उत्पाद + व्यक्तिगत पसंद + पैकेजिंग + प्रस्तुति + ब्रांड की कहानी = प्रीमियम अनुभव'.

वहीं Bakingo के सह-संस्थापक हिमांशु चावला के मुताबिक, गिफ्टिंग में प्रीमियम उत्पादों का चलन दिखाई दे रहा है, लेकिन उपभोक्ता केवल महंगे उत्पादों की ओर नहीं जा रहे हैं. अब गिफ्ट की गुणवत्ता, पैकेजिंग, विविधता और व्यक्तिगत स्पर्श अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

Bakingo के लिए करीब 500-1,500 रुपये की कीमत वाली श्रेणी ऐसे ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपेक्षाकृत सुलभ कीमत में बेहतर और आकर्षक गिफ्टिंग अनुभव चाहते हैं. कंपनी की त्योहारी हैम्पर श्रेणी में 599, 899, 1,099 और 1,399 रुपये जैसे अलग-अलग मूल्य बिंदु शामिल हैं.

चावला के मुताबिक, इससे पता चलता है कि प्रीमियम गिफ्टिंग अब केवल महंगे उपहारों के खंड तक सीमित नहीं है. उपभोक्ता अपेक्षाकृत सुलभ कीमत पर बेहतर पैकेजिंग, अच्छी गुणवत्ता और सोच-समझकर तैयार किए गए गिफ्ट के लिए खर्च करने को तैयार हैं.

बेकरी और स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद बने मिठाई के आधुनिक विकल्प

त्योहारी गिफ्टिंग में मिठाई की जगह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन उसके विकल्पों की संख्या जरूर बढ़ गई है. Bakingo के हिमांशु चावला के मुताबिक, प्रीमियम चॉकलेट, बेकरी और स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद, फ्यूजन केक, व्यक्तिगत पसंद के अनुसार तैयार हैम्पर और अनुभव आधारित उपहारों में रुचि बढ़ रही है.

उनके अनुसार, केक, कुकीज, ब्राउनी, चॉकलेट और चुने हुए उत्पादों वाले हैम्पर में उत्सव और उपहार देने, दोनों का अनुभव मिलता है. यही वजह है कि बेकरी आधारित गिफ्टिंग पारंपरिक मिठाई के आधुनिक विकल्प के तौर पर अपनी जगह बना रही है. इस बदलाव का असर उपहार की प्रस्तुति पर भी दिख रहा है. अब केवल उत्पाद नहीं, बल्कि पैकेजिंग, विषय, संदेश और प्रस्तुति भी पूरे उपहार अनुभव का हिस्सा बन गए हैं.

'शुद्धता और सेहत' भी बन रही है उपहार देने की नई भाषा

जहां एक ओर बेकरी, चॉकलेट और तकनीक जैसी श्रेणियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े उत्पाद भी त्योहारी गिफ्टिंग का हिस्सा बन रहे हैं. FreshTerra के संस्थापक अरविंद मेदीरत्ता के मुताबिक, पारंपरिक मिठाइयों और अधिक चीनी वाली चॉकलेट से हटकर मांग स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े उत्पादों की ओर बढ़ रही है. उनके अनुसार, उपभोक्ता अब ऐसा उपहार देना चाहते हैं जो शुद्धता और सेहत से जुड़ा हो. इसी वजह से विदेशी मेवे, सूखे मेवे, कोल्ड-प्रेस्ड तेल, ए2 दूध से बना गिर गाय का घी और एकल स्रोत वाले मसालों से तैयार स्वास्थ्यवर्धक हैम्पर जैसी श्रेणियों पर जोर बढ़ा है.

मेदीरत्ता के मुताबिक, शहरी उपभोक्ता 1,500-3,500 रुपये की कीमत वाली श्रेणी में साफ-सुथरे और प्रीमियम खाद्य हैम्पर पर खर्च करने को तैयार हैं. उनके अनुसार, खरीदार अब दिखावे से ज्यादा इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि उपहार में दिया जा रहा उत्पाद रोजमर्रा की जिंदगी में कितना उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक है.

मेदीरत्ता 2026 के त्योहारी गिफ्टिंग चलन को 'शुद्धता और स्वस्थ जीवनशैली का उपहार' के रूप में देखते हैं. उनके मुताबिक, साफ-सुथरे उत्पाद, पारदर्शिता और उत्पाद कहां से आया है, इसकी जानकारी जैसे पहलू गिफ्टिंग के फैसले में ज्यादा महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं.

छोटे शहरों में भी बढ़ रही प्रीमियम गिफ्टिंग

प्रीमियम गिफ्टिंग का विस्तार अब दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है. डिजिटल कारोबार और घर तक डिलीवरी ने छोटे शहरों के ग्राहकों के लिए भी पहले सीमित रहे गिफ्टिंग विकल्पों को सुलभ बनाया है. गौरव भगत के मुताबिक, दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में प्रीमियम उत्पादों का चलन तेजी से आम हो रहा है. उनके अनुसार, ग्राहक अब केवल ब्रांडेड गिफ्ट नहीं, बल्कि व्यक्तिगत, उपयोगी और आकांक्षी उत्पाद चाहते हैं.

हिमांशु चावला भी इस बदलाव को महत्वपूर्ण मानते हैं. उनके मुताबिक, लखनऊ, इंदौर, जयपुर, चंडीगढ़, कोयंबटूर, कोच्चि और भुवनेश्वर जैसे शहरों में प्रीमियम और बेहतर तरीके से चुने गए गिफ्टिंग विकल्पों की मांग बढ़ रही है. उनके अनुसार, ऑनलाइन गिफ्टिंग ने इस बदलाव को गति दी है. अब उपभोक्ता स्थानीय बाजार में उपलब्ध विकल्पों तक सीमित नहीं हैं और अलग-अलग शहरों में परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के लिए गिफ्ट भेज सकते हैं.

ई-कॉमर्स ने बढ़ाई आखिरी समय की गिफ्टिंग

त्योहारी गिफ्टिंग में सुविधा अब उत्पाद चुनने जितनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है. ई-कॉमर्स ने आखिरी समय की गिफ्टिंग को आसान बनाया है, जहां ग्राहक त्योहार के दिन या कुछ घंटे पहले भी गिफ्ट भेज सकते हैं. हिमांशु चावला के मुताबिक, उपलब्धता और तेज डिलीवरी अब गिफ्टिंग अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं. हालांकि, उनके अनुसार सुविधा केवल ई-कॉमर्स तक सीमित नहीं है. उसी दिन और तय समय पर डिलीवरी भी ग्राहकों को अपनी जरूरत के मुताबिक गिफ्ट भेजने का विकल्प देती है.

राजीव चंद्रवंशी के मुताबिक, ई-कॉमर्स की ताकत गति, सुविधा और उपलब्धता है, जबकि व्यक्तिगत कॉरपोरेट गिफ्टिंग की ताकत ब्रांड पहचान, व्यक्तिगत पसंद, बड़ी संख्या में आपूर्ति और कारोबारी संबंध मजबूत करना है. उनके अनुसार, 'गति गिफ्टिंग की जरूरत को पूरा कर सकती है, लेकिन व्यक्तिगत स्पर्श गिफ्टिंग को अर्थपूर्ण बनाता है.'

FreshTerra के अरविंद मेदीरत्ता के मुताबिक, ई-कॉमर्स ने आखिरी समय की खरीदारी में सुविधा जरूर बढ़ाई है, लेकिन जब ग्राहक किसी खास व्यक्ति को गिफ्ट देना चाहता है तो उत्पाद कहां से आया, उसकी ताजगी और प्रस्तुति जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं.

गिफ्टिंग अब त्योहार के खर्च से ब्रांड अनुभव तक

कॉरपोरेट गिफ्टिंग में आ रहे बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कंपनियां इसे अब सिर्फ त्योहार के दौरान होने वाला खर्च नहीं मान रही हैं. गिफ्ट के जरिए कर्मचारी जुड़ाव, ग्राहक संबंध और ब्रांड पहचान को मजबूत करने की कोशिश भी दिखाई दे रही है.

राजीव चंद्रवंशी के मुताबिक, कॉरपोरेट गिफ्टिंग धीरे-धीरे कारोबारी संबंध बनाने और ब्रांड के बारे में बताने का माध्यम बन रही है. उनके अनुसार, व्यक्तिगत रूप से तैयार करने का मतलब केवल किसी उत्पाद पर लोगो लगा देना नहीं है. 'व्यक्तिगत रूप से तैयार करने का असली मतलब है, उत्पाद को ब्रांड अनुभव में बदलना.'

उनका कहना है कि कंपनियां अब यह सोच रही हैं कि कर्मचारी को क्या पसंद आएगा, ग्राहक के कारोबार के साथ कौन-सा उत्पाद प्रासंगिक है और गिफ्ट ब्रांड की पहचान को किस तरह पेश करेगा. इसी वजह से उपयोगिता, बेहतर प्रस्तुति, पर्यावरण अनुकूलता, तकनीक और अनुभव अब कॉरपोरेट गिफ्टिंग रणनीति का हिस्सा बन रहे हैं.

आगे की तस्वीर: कम, लेकिन बेहतर और अर्थपूर्ण गिफ्ट

गिफ्टिंग बाजार में हो रहे बदलावों को देखें तो एक बात स्पष्ट है कि उपभोक्ता अब केवल मात्रा या कीमत पर निर्णय नहीं ले रहा. वह गिफ्ट की प्रासंगिकता, गुणवत्ता, प्रस्तुति और व्यक्तिगत पसंद को भी महत्व दे रहा है.

गौरव भगत इसे 'कम, लेकिन बेहतर और अधिक अर्थपूर्ण' देने की बदलती सोच से जोड़ते हैं. उनके मुताबिक, प्रीमियम उत्पादों का अगला चरण सिर्फ महंगा गिफ्ट नहीं, बल्कि ऐसा गिफ्ट है जो प्राप्तकर्ता की जीवनशैली और पसंद के अनुरूप हो.

वहीं, राजीव चंद्रवंशी के अनुसार, आने वाले समय में कॉरपोरेट गिफ्टिंग की प्रतिस्पर्धा सिर्फ इस बात पर नहीं होगी कि किस कंपनी ने सबसे महंगा गिफ्ट दिया, बल्कि इस बात पर होगी कि 'किस ब्रांड ने गिफ्ट के जरिए अर्थपूर्ण छाप छोड़ी.'

इस तरह भारत का त्योहारी गिफ्टिंग बाजार अब सिर्फ मिठाई और हैम्पर का बाजार नहीं रह गया है. यह प्रीमियम उत्पादों, व्यक्तिगत पसंद, स्वास्थ्य, तकनीक, सुविधा और अनुभव के मेल से बन रहा एक बड़ा उपभोक्ता और कॉरपोरेट बाजार बनता जा रहा है.