होम / बिजनेस / वेदांता के लिए मुश्किल दौर : डीमर्जर पर विवाद, कोर्ट में हार, शेयरों में गिरावट
वेदांता के लिए मुश्किल दौर : डीमर्जर पर विवाद, कोर्ट में हार, शेयरों में गिरावट
सरकार, सेबी और न्यायपालिका से एक साथ मिली नकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने वेदांता की रणनीतिक योजनाओं को झटका दिया है. शेयर बाजार में इसका सीधा असर देखने को मिला है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के लिए बुधवार का दिन मुश्किलों भरा रहा. कंपनी को एक ही दिन में सरकार, सेबी (SEBI) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) से झटके मिले, जिसके चलते इसके शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. कारोबारी सत्र के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर वेदांता के शेयर 2.56% गिरकर ₹438.55 पर पहुंच गए थे. वहीं खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 1.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 444.90 रुपये पर कारोबार करते दिखे.
सरकार ने डीमर्जर योजना पर खड़े किए सवाल
कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती उसकी डीमर्जर योजना को लेकर सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने वेदांता की डीमर्जर योजना पर सुनवाई 17 सितंबर तक के लिए टाल दी है. यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा योजना पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराने के बाद लिया गया. सरकार का आरोप है कि डीमर्जर प्लान में महत्वपूर्ण जानकारियाँ छिपाई गई हैं. राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और देनदारियों की जानकारी नहीं दी गई. सरकार को आशंका है कि इससे उसके लिए वेदांता से बकाया राशि की वसूली करना कठिन हो सकता है.
सेबी ने भी दी चेतावनी, नियम उल्लंघन का आरोप
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वेदांता को एक प्रशासनिक चेतावनी जारी की है. सेबी का कहना है कि कंपनी ने NOC (नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) मिलने के बाद अपनी डीमर्जर योजना में बदलाव किए, जो कि SEBI के मास्टर सर्कुलर का गंभीर उल्लंघन है. सेबी के अनुसार, इस तरह के बदलावों की जानकारी कंपनी के बोर्ड को देना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इससे पारदर्शिता और नियामक नियमों का उल्लंघन हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली
वेदांता को सुप्रीम कोर्ट से भी करारा झटका लगा है. कंपनी ने पंजाब स्थित तलवंडी साबो पावर प्रोजेक्ट के लिए 'डीम्ड एक्सपोर्ट' लाभ को लेकर अतिरिक्त मुआवजे की मांग की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपील ट्रिब्यूनल (APTEL) के आदेश को बरकरार रखते हुए वेदांता की याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलवंडी साबो इस लाभ की पात्र ही नहीं थी. इसका मतलब है कि अब कंपनी को इस परियोजना से कोई अतिरिक्त वित्तीय राहत नहीं मिलेगी. इससे पहले NCLT ने भी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड के डीमर्जर प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.
क्या है वेदांता की डीमर्जर योजना?
सितंबर 2023 में वेदांता ने अपने व्यवसाय को छह अलग-अलग कंपनियों में विभाजित करने की योजना पेश की थी. इनमें एलुमिनियम, तेल और गैस, बेस मेटल, पावर आदि क्षेत्र शामिल हैं. कंपनी का दावा है कि इससे परिचालन बेहतर होगा, प्रबंधन आसान होगा और निवेशकों के लिए वैल्यू में इजाफा होगा. हालांकि, विभिन्न मंजूरियों में देरी के चलते इस योजना की समयसीमा को बढ़ाकर अब सितंबर 2025 कर दिया गया है.
डिविडेंड पर विचार को लेकर बोर्ड बैठक
इन चुनौतियों के बीच कंपनी ने 21 अगस्त को अपने बोर्ड की बैठक बुलाई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दूसरे अंतरिम डिविडेंड पर विचार किया जाएगा. इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 27 अगस्त तय की गई है.
टैग्स