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जिस कार में सवार थे साइरस मिस्त्री, उसे चला रही थी एक महिला, जानें कौन हैं वो
कार की ड्राइवर सीट पर अनाहिता पंडोले थीं और फ्रंट में को-पैसेंजर सीट पर उनके पति दारियस पंडोले बैठे थे. जबकि साइरस मिस्त्री और दिनशॉ पंडोले पिछली सीट पर थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की मौत के मामले में कुछ नई जानकारी सामने आई हैं. प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि कार की पिछली सीट पर बैठे मिस्त्री ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी. उनकी मौत सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से हुई है. हादसे में मिस्त्री के करीबी दोस्त जहांगीर दिनशॉ पंडोले की भी मौत हो गई है. इस कार को कोई मेल ड्राइवर नहीं बल्कि फीमेल डॉक्टर चला रही थीं.
महिला रोग विशेषज्ञ हैं अनाहिता
साइरस मिस्त्री की मर्सडीज कार (MH 47 AB 6705) गुजरात से मुंबई की ओर जा रही थी. बताया जा रहा है कि कार की स्पीड काफी ज्यादा थी. ओवरटेक करने के चक्कर में बैलेंस बिगड़ गया और वो डिवाइडर से जा टकराई. कार की ड्राइविंग सीट पर अनाहिता पंडोले थीं. अनाहिता और उनके पति दारियस पंडोले भी इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए हैं. अनाहिता पंडोले पेशे से एक डॉक्टर हैं. महिला रोग विशेषज्ञ अनाहिता मुंबई के ब्रीच कैन्डी अस्पताल में काम करती हैं.
नहीं खुले पीछे के एयरबैग
कार की ड्राइवर सीट पर अनाहिता पंडोले थीं और फ्रंट में को-पैसेंजर सीट पर उनके पति दारियस पंडोले बैठे थे. जबकि साइरस मिस्त्री और दिनशॉ पंडोले पिछली सीट पर थे. इन दोनों ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी, इसलिए जब दुर्घटना हुई तो इन्हें सबसे ज्यादा चोटें आई और उनकी मौत हो गई. यह भी सामने आया है कि कार डिवाइडर से टकराने के बाद फ्रंट के दोनों एयरबैग एक्टिव हो गए, लेकिन पीछे के समय पर एक्टिव नहीं हो पाए.
पारसी समुदाय में जाना-पहचाना नाम
डॉ. अनाहिता पंडोले को मेडिकल फील्ड में 32 साल का अनुभव है. वह मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल के साथ-साथ जसलोक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, B.D. Petit Parsee पारसी जनरल अस्पताल और मासीना अस्पताल से भी जुड़ी हुई हैं. अनाहिता पारसी समुदाय में एक जाना-माना नाम हैं. जनवरी 2004 में बॉम्बे पारसी पंचायत के साथ मिलकर उन्होंने पारसी महिलाओं के लिए एक फर्टिलिटी प्रोजेक्ट शुरू किया था. इस प्रोजेक्ट का मकसद पारसी समुदाय की घटती आबादी की समस्या का समाधान खोजना है. बता दें कि इस प्रोजेक्ट के तहत पारसी कपल्स को सब्सिडी पर फर्टिलिटी से जुड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
...तो शायद बच जाती जान
फेमस Gynaecologist अनाहिता पंडोले ने 1990 में टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज और बीवाईएल नायर चैरिटेबल अस्पताल से एमबीबीएस किया था. इसके बाद उन्होंने उसी कॉलेज से 1994 में एमडी-ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी की पढ़ाई पूरी की. बताया जा रहा है कि उन्हें ड्राइविंग में भी अच्छा अनुभव है. गाड़ी अत्यधिक स्पीड में होने की वजह से अनाहिता का स्टीयरिंग पर से नियंत्रण छूट गया और वो सीधे डिवाइडर से जा टकराई. यदि मिस्त्री ने सीट बेल्ट पहनी होती और पीछे से एयरबैग टाइम पर खुल गए होते, तो शायद उनकी जान बच सकती थी.
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