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कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स ने बढ़ाया आयात का बिल, जुलाई में 6 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा व्यापार घाटा
जुलाई में आयात 76.22 अरब डॉलर के 9 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा. कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान की भारी खरीदारी से व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, हालांकि निर्यात में करीब 20% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत के विदेशी व्यापार मोर्चे पर जुलाई में आयात का दबाव बढ़ता नजर आया. कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, उर्वरक और कोयले की खरीद में तेज बढ़ोतरी के चलते देश का व्यापार घाटा बढ़कर छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. जुलाई में भारत का कुल आयात 76.22 अरब डॉलर रहा, जो 9 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. हालांकि राहत की बात यह रही कि वस्तु निर्यात में भी करीब 20% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 44.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
31.98 अरब डॉलर पर पहुंचा व्यापार घाटा
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया. जून में यह 30.42 अरब डॉलर और जुलाई 2025 में 27.88 अरब डॉलर था. इस तरह एक महीने और एक साल, दोनों आधार पर व्यापार घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई में वस्तुओं का आयात सालाना आधार पर करीब 18% बढ़कर 76.22 अरब डॉलर पर पहुंच गया. आयात पर हुआ यह खर्च अक्टूबर 2025 के 76.73 अरब डॉलर के बाद दूसरा सबसे अधिक है.
कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात तेजी से बढ़ा
जुलाई में कच्चे तेल का आयात सालाना आधार पर करीब 18% बढ़कर 18.31 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 46% की तेज वृद्धि के साथ 14.37 अरब डॉलर पहुंच गया. इसके अलावा उर्वरक आयात 55% बढ़कर 2.48 अरब डॉलर और कोयले का आयात 29% बढ़कर 3.05 अरब डॉलर रहा. सोने का आयात भी जुलाई में बढ़कर 4.16 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 5% अधिक है. इन प्रमुख वस्तुओं की आयात मांग बढ़ने से देश का कुल आयात बिल काफी ऊंचा रहा.
निर्यात में करीब 20% की मजबूत बढ़त
आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद जुलाई में वस्तु निर्यात का प्रदर्शन मजबूत रहा. भारत का वस्तु निर्यात करीब 20% बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंच गया. यह मई में दर्ज 45.42 अरब डॉलर के बाद अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है. वाणिज्य विभाग के मुताबिक, निर्यात में वृद्धि के पीछे ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के बाद वहां भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ना प्रमुख कारण रहा. इंजीनियरिंग सामान का निर्यात भी जुलाई में 18% बढ़कर 12.24 अरब डॉलर हो गया.
सेवाओं से मिला सहारा
जुलाई में सेवा निर्यात करीब 6% बढ़कर 35.89 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि सेवा आयात करीब 10% बढ़कर 18.94 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इससे सेवाओं का व्यापार अधिशेष करीब 16.95 अरब डॉलर रहा.
भारतीय रिजर्व बैंक इस महीने के अंत में सेवा व्यापार से जुड़े अंतिम आंकड़े जारी कर सकता है. ऐसे में वस्तुओं के व्यापार घाटे में बढ़ोतरी के बावजूद सेवा क्षेत्र का मजबूत अधिशेष देश के समग्र बाहरी व्यापार संतुलन को कुछ राहत दे सकता है.
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