भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने MakeMyTrip, Goibibo और OYO पर 392 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग फर्म MakeMyTrip, Goibibo के साथ-साथ OYO पर भी भारी भरकम जुर्माना लगाया गया है. इन तीनों फर्म पर गलत ढंग से बिजनेस करने का आरोप है. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) ने तीनों पर 392 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया है. इसमें मेक माई ट्रिप-गोइबिबो को 223.48 करोड़ और ओयो को बतौर जुर्माना 168.88 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा. बता दें कि पिछले कुछ समय में ये तीनों फर्म काफी फेमस हो गई हैं.
जुर्माने की वजह ये समझौता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, MakeMyTrip और Goibibo पर आरोप है कि दोनों ने अपने होटल पार्टनर्स के साथ एक ऐसा समझौता किया है, जिसके तहत होटल भागीदार अपने कमरे किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर या अपने ऑनलाइन पोर्टल पर उस कीमत से कम पर नहीं दे सकते, जो कीमत इन कंपनियों के साथ पहले से तय की गई है. कहने का मतलब है कि इन प्लेटफ़ॉर्म पर जिस रेंट पर कमरे उपलब्ध हैं, उससे कम की पेशकश होटल पार्टनर्स नहीं कर सकते. जुर्माने के अलावा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने दोनों फर्म को होटलों के साथ अपने समझौतों को उचित रूप से संशोधित करने का निर्देश दिया है, ताकि मूल्य और कमरे की उपलब्धता से जुड़े समान दायित्वों को होटल भागीदारों पर लगाया जा सके.
OYO पर इसलिए हुई कार्रवाई
यह भी आरोप था कि MakeMyTrip ने अपने प्लेटफॉर्म पर OYO को तरजीह दी, जिसकी वजह से सेक्टर के अन्य प्लेयर्स को बाजार पहुंच से वंचित कर दिया गया. नियामक ने अक्टूबर 2019 में मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया था. गौरतलब है कि MakeMyTrip ने 2017 में Ibibo Group Holding का अधिग्रहण किया था, तभी से MMT India मेक माय ट्रिप और Ibibo India के ब्रांड के तहत Goibibo के जरिए अपने होटल और पैकेज व्यवसाय का संचालन कर रही है. वहीं, OYO Hotels & Homes की शुरुआत 2013 में हुई थी. कंपनी के फाउंडर और सीईओ रितेश अग्रवाल हैं. सस्ती दरों में रूम उपलब्ध कराने वाली इस कंपनी में कुल 5,130 कर्मचारी काम करते हैं.
नीदरलैंड की कंपनी Evos में 100% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी APSEZ, यूरोप के 5 देशों में 8 पोर्ट टर्मिनल मिलेंगे; सौदे से कंपनी की वैश्विक मौजूदगी 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनल तक पहुंचेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी समूह (Adani) की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने जा रही है. कंपनी ने यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर Evos B.V. में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौता किया है. यह सौदा 2.56 अरब यूरो (करीब 2.56 बिलियन यूरो) के एंटरप्राइज वैल्यू पर ऑल-कैश आधार पर होगा. नीदरलैंड मुख्यालय वाली Evos को खरीदने के बाद APSEZ को यूरोप के पांच देशों में मौजूद आठ पोर्ट टर्मिनल का कारोबार मिलेगा. इस अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक मौजूदगी बढ़कर 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनल तक पहुंच जाएगी.
कंपनी की ओर से 5 नवंबर 2026 को जारी बयान के मुताबिक, Evos की इक्विटी वैल्यू 1.18 अरब यूरो आंकी गई है. यह सौदा वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के आधार पर 11.7 गुना EV/EBITDA मल्टीपल पर किया जा रहा है. Evos ने कैलेंडर वर्ष 2025 में 39.2 करोड़ यूरो का राजस्व और 21.9 करोड़ यूरो का EBITDA दर्ज किया था. कंपनी का EBITDA मार्जिन 56 फीसदी रहा. प्रस्तावित अधिग्रहण नियामकीय मंजूरियों और वर्क्स काउंसिल से परामर्श की प्रक्रिया पूरी होने के अधीन है.
यूरोप के 5 देशों में मिलेगा 8 पोर्ट टर्मिनल का नेटवर्क
Evos के पास कुल 63 लाख क्यूबिक मीटर की लिक्विड स्टोरेज क्षमता है. कंपनी नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा में आठ बंदरगाह आधारित टर्मिनल संचालित करती है. इसके टर्मिनल यूरोप के प्रमुख ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों में स्थित हैं. इनमें एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प (ARA) क्षेत्र, हैम्बर्ग और भूमध्यसागरीय क्षेत्र शामिल हैं.
कंपनी के नेटवर्क में 452 स्टोरेज टैंक और जहाजों व बार्ज के लिए 63 बर्थ शामिल हैं. इसके अलावा कई एकीकृत पाइपलाइन कनेक्टिविटी भी हैं, जिनमें एम्स्टर्डम शिफोल एयरपोर्ट और सेंट्रल यूरोप पाइपलाइन सिस्टम से जुड़ाव शामिल है. Evos ने कैलेंडर वर्ष 2025 में 37 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो का संचालन किया था.
99% कमर्शियल ऑक्यूपेंसी, 56% EBITDA मार्जिन
Evos का कारोबार पारंपरिक ईंधन के साथ ऊर्जा संक्रमण से जुड़े नए ईंधनों के भंडारण और संचालन तक फैला हुआ है. इसके उत्पादों में पेट्रोल, गैस ऑयल, समुद्री ईंधन और जेट फ्यूल शामिल हैं. इसके अलावा कंपनी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), बायोफ्यूल, मेथनॉल और बायोएथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों के कारोबार में भी मौजूद है.
कंपनी का औसत कमर्शियल ऑक्यूपेंसी स्तर 99 फीसदी है. इसके राजस्व का एक बड़ा हिस्सा टेक-ऑर-पे (Take-or-Pay) अनुबंधों और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट के तहत आता है. इस तरह कंपनी को अपेक्षाकृत स्थिर राजस्व और नकदी प्रवाह मिलता है. Evos के ग्राहक आधार में वैश्विक ऊर्जा कंपनियां, प्रमुख औद्योगिक और केमिकल कंपनियां तथा कमोडिटी ट्रेडर्स शामिल हैं.
अडानी पोर्ट्स के कारोबार को मिलेगा विस्तार
APSEZ के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने कहा कि Evos का अधिग्रहण कंपनी की वैश्विक एकीकृत परिवहन प्लेटफॉर्म बनाने की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे कंपनी को दुनिया के प्रमुख लिक्विड स्टोरेज और ऊर्जा केंद्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का मौका मिलेगा. उन्होंने कहा कि कंपनी यूरोप के ऊर्जा बदलाव में भागीदारी करने और दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने की दिशा में काम करेगी.
कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण से उसके लिक्विड कारोबार का विस्तार होगा और भौगोलिक स्तर पर विविधता बढ़ेगी. इसके अलावा यूरोप में नए ऊर्जा ईंधनों की ओर बढ़ते बदलाव से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी. Evos का 56 फीसदी EBITDA मार्जिन APSEZ के अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार के वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही के 44.8 फीसदी मार्जिन से अधिक है. इससे संयुक्त कारोबार के मार्जिन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
कर्ज के जरिए होगा सौदे का वित्तपोषण, FY27 तक घटेगा डेट रेशियो
इस अधिग्रहण के लिए APSEZ कर्ज के जरिए फंडिंग करेगी. कंपनी के मुताबिक, APSEZ और Evos के वित्तीय आंकड़ों के आधार पर संयुक्त इकाई का प्रो-फॉर्मा नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 2.76 गुना रहेगा. वित्त वर्ष 2027 तक इसके करीब 2.5 गुना होने का अनुमान है.
प्रस्तावित सौदे के लिए MUFG ने एकमात्र अंडरराइटर के रूप में 2.8 अरब यूरो तक की फाइनेंसिंग प्रतिबद्धता दी है. APSEZ के लिए Linklaters और Cyril Amarchand Mangaldas ने क्रमशः अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनी सलाहकार के रूप में काम किया है.
अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार में भी बढ़ी कंपनी की गतिविधियां
APSEZ के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 को समाप्त वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही तक कंपनी के पास 12,502 करोड़ रुपये का नकद बैलेंस था. अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में 3,586 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व और 1,608 करोड़ रुपये का EBITDA दर्ज किया. इस दौरान EBITDA मार्जिन भी रिकॉर्ड 44.8 फीसदी रहा.
अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार का वॉल्यूम वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के 17 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में 47 मिलियन मीट्रिक टन हो गया. इसमें कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल, तंजानिया के परिचालन और ऑस्ट्रेलिया के NQXT कारोबार का योगदान रहा.
भारत में 27% पोर्ट कार्गो वॉल्यूम संभालती है APSEZ
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन अडानी समूह का हिस्सा है. कंपनी भारत के पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तट पर 16 बंदरगाह और टर्मिनल संचालित करती है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कोलंबो, इजरायल और तंजानिया में चार अंतरराष्ट्रीय पोर्ट भी हैं.
कंपनी की मौजूदा कार्गो हैंडलिंग क्षमता 671 मिलियन टन सालाना है और भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 तक अपने कार्गो थ्रूपुट को बढ़ाकर 1 अरब टन करने का लक्ष्य रखा है. Evos का अधिग्रहण इसी वैश्विक विस्तार रणनीति का हिस्सा है.
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण बढ़ने से ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत को मिल सकता है बढ़ावा, लेकिन रूसी तेल की खरीद और अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर भारत की चुनौतियां बनी रहेंगी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों से भारत को फिलहाल आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रूस से तेल खरीदने पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापार शुल्क (टैरिफ) को लेकर अनिश्चितता भारत के लिए चुनौती बनी रह सकती है. केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण मजबूत होने से ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर कूटनीतिक बातचीत का दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, इसका भारत के व्यापार और आर्थिक संभावनाओं पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है.
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव के नतीजों का भारत पर असर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी व्यापार नीतियों और विदेशी निवेश के प्रवाह के जरिए देखने को मिल सकता है. जहां कमजोर अमेरिकी डॉलर और विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भारतीय रुपये को कुछ समर्थन मिल सकता है, वहीं रूस से कच्चे तेल की खरीद और अमेरिका की ओर से अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का जोखिम बना रहेगा.
कच्चे तेल और प्रतिबंधों से जुड़ा जोखिम बरकरार
केयरएज रेटिंग्स ने कच्चे तेल की कीमतों को चुनाव के नतीजों का भारत पर पड़ने वाला सबसे तात्कालिक असर बताया है. इसकी वजह यह है कि तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा प्रभाव महंगाई, चालू खाता घाटे, राजकोषीय घाटे और वित्तीय बाजारों पर पड़ता है.
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 8.7 फीसदी की गिरावट आई और यह 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. गुरुवार को रिपोर्ट तैयार किए जाने के समय यह 0.86 फीसदी गिरकर 93.81 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
हालांकि, रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि कच्चे तेल की कीमतें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित रुकावटों के प्रति संवेदनशील बनी रहेंगी. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. इससे भारत की आयात लागत ऊंची बनी रहने का खतरा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सैन्य खर्चों की जांच-पड़ताल भी बढ़ सकती है. जनवरी 2027 में नई कांग्रेस के कामकाज शुरू करने के बाद सांसद सैन्य अभियानों के लिए अतिरिक्त फंडिंग पर शर्तें लगा सकते हैं. इससे ईरान के साथ संघर्ष का कूटनीतिक समाधान निकालने का दबाव बढ़ने की संभावना है. हालांकि, उस समय तक पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का जोखिम बना रहेगा.
भारत को अमेरिकी टैरिफ से जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम
अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदलने के बावजूद भारत को व्यापार शुल्क के मोर्चे पर तत्काल राहत मिलने की संभावना नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति के पास टैरिफ तय करने और उनमें बदलाव करने के व्यापक अधिकार हैं. इसलिए कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण बढ़ने से भारत पर लगाए गए शुल्कों में तुरंत बदलाव होना मुश्किल है.
वित्त वर्ष 2026 में अमेरिका को भारत का वस्तुओं का निर्यात करीब 90 अरब डॉलर रहा था. ऐसे में अमेरिकी व्यापार नीतियों में किसी भी तरह का बदलाव भारतीय निर्यातकों के लिए अहम होगा.
इसके अलावा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का खतरा भी बना हुआ है. अमेरिका के 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं.
केयरएज के मुताबिक, 16 अक्टूबर को जारी की गई छूट की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है और अमेरिकी प्रशासन इसे कभी भी वापस ले सकता है. ऐसे में यदि अमेरिका अपनी मौजूदा नीति में बदलाव करता है, तो भारतीय निर्यातकों पर दोबारा व्यापारिक दबाव बढ़ सकता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई अमेरिकी कांग्रेस भारत की ओर से रूस से कच्चे तेल और रक्षा उपकरणों की खरीद की ज्यादा जांच-पड़ताल कर सकती है. इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में अनिश्चितता बढ़ सकती है.
रुपये को मिल सकता है सहारा, FPI निवेश में बदलाव की संभावना
रिपोर्ट में अमेरिकी चुनाव के नतीजों का भारतीय रुपये और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) पर असर हल्का सकारात्मक बताया गया है. कमजोर अमेरिकी डॉलर से भारतीय मुद्रा को मजबूती मिल सकती है. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने की स्थिति में विदेशी निवेशक अपने निवेश का कुछ हिस्सा भारत जैसे दूसरे बाजारों में लगा सकते हैं.
हालांकि, एच-1बी वीजा नियमों और रणनीतिक संबंधों पर चुनाव के नतीजों का असर लगभग तटस्थ रहने की उम्मीद है. रिपोर्ट के अनुसार, इन मुद्दों पर फैसले मुख्य रूप से अमेरिकी व्हाइट हाउस और वहां की अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.
भारत के लिए जोखिम का संतुलन बदला, चुनौतियां अभी बरकरार
केयरएज रेटिंग्स ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को भारत के लिए किसी बड़े बदलाव के बजाय जोखिमों के संतुलन में बदलाव बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी का दोनों सदनों में नियंत्रण मजबूत होने से कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन इससे भारत को तेल और व्यापार के मोर्चे पर तत्काल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.
आने वाले समय में भारत पर इसका व्यापक आर्थिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन टैरिफ, रूस से तेल खरीद और पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर क्या फैसले लेता है.
BSE का मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार, निफ्टी भी 24,500 के ऊपर बंद; कच्चे तेल में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
धनतेरस से पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. गुरुवार, 5 नवंबर को घरेलू शेयर बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल दर्ज किया गया. सेंसेक्स 2,008.61 अंक यानी 2.60 फीसदी की बढ़त के साथ 79,310.01 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 फीसदी चढ़कर 24,536.60 के स्तर पर पहुंच गया. इस तेजी के साथ निफ्टी ने 7 अगस्त के बाद पहली बार 24,500 के ऊपर क्लोजिंग दी. बाजार में आई तेजी से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और यह पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया.
शेयर बाजार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई. नवंबर 2025 के बाद यह बाजार की सबसे लंबी लगातार तेजी वाली अवधि है. इस दौरान निवेशकों का भरोसा मजबूत होने के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण रहे. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी, अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी और भारतीय रुपये में मजबूती ने बाजार को सहारा दिया. खास बात यह रही कि गुरुवार को तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऑटो, बैंकिंग, रियल एस्टेट और आईटी जैसे कई सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली.
BSE का मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में तेजी का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर दिखाई दिया. बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया. पिछले कारोबारी सत्र में बाजार बंद होने के समय यह करीब 493.44 लाख करोड़ रुपये था. गुरुवार की तेजी के बाद इसमें लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
इस तरह भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर 5 लाख करोड़ डॉलर के बाजार पूंजीकरण का स्तर हासिल कर लिया. बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ा इजाफा किया. हालांकि, मार्केट कैप में बढ़ोतरी को निवेशकों का वास्तविक मुनाफा नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि यह सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बदलाव को दर्शाता है.
ऑटो और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी
गुरुवार को बाजार में तेजी का नेतृत्व ऑटो और बैंकिंग सेक्टर ने किया. सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 4.14 फीसदी उछलकर सबसे आगे रहा. वहीं, निफ्टी बैंक में 3.33 फीसदी, रियल्टी, सरकारी बैंक और निजी बैंक इंडेक्स में करीब 3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर के शेयर भी 2 फीसदी से ज्यादा चढ़े.
निफ्टी 50 में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे. दूसरी ओर, अपोलो हॉस्पिटल्स, ओएनजीसी, एनटीपीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट रही.
हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी रही, लेकिन इनका प्रदर्शन बड़े शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.8 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी चढ़कर बंद हुआ. इस बीच 120 से ज्यादा शेयरों ने अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ.
विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मिला सहारा
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने भी तेजी को मजबूती दी है. विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को करीब 7,284 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी. यह अक्टूबर 2025 के बाद भारत में विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी एकदिवसीय खरीदारी में से एक रही. इसके साथ ही नवंबर में विदेशी निवेशकों का कुल निवेश करीब 1.57 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
विदेशी निवेशकों की वापसी को घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. लंबे समय तक बिकवाली के बाद उनकी खरीदारी से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है. हालांकि, आने वाले सत्रों में इस खरीदारी का जारी रहना बाजार की तेजी के लिए अहम होगा.
ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के नीचे, चार दिन से जारी है गिरावट
भारतीय शेयर बाजार को मजबूती देने वाले सबसे बड़े कारकों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट शामिल रही. ब्रेंट क्रूड की कीमतें पिछले कारोबारी सत्र में करीब 8.7 फीसदी टूटकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थीं. गुरुवार को भी इसमें गिरावट जारी रही और कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं. वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई (WTI) का भाव 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब रहा.
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है और डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत हुई है. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला.
रुपये में भी मजबूती, दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बंद
शेयर बाजार के साथ भारतीय मुद्रा के मोर्चे पर भी राहत देखने को मिली. गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 94.47 पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.64 प्रति डॉलर पर था. Reuters के मुताबिक, रुपया करीब दो सप्ताह के सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गया.
रुपये में मजबूती के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी को अहम कारण माना जा रहा है. तेल की कीमतें कम होने से भारत का आयात बिल घटने की उम्मीद बढ़ती है, जबकि विदेशी पूंजी के प्रवाह से डॉलर की उपलब्धता को भी सहारा मिलता है.
अमेरिकी बाजारों की तेजी और वैश्विक संकेतों ने बढ़ाया भरोसा
भारतीय बाजार को वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले. बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 3 फीसदी चढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.91 फीसदी की बढ़त रही.
इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ा. इन सभी कारकों का असर भारतीय बाजार पर दिखाई दिया. हालांकि, बाजार की मौजूदा तेजी कितनी टिकाऊ रहती है, यह आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू भी 25% बढ़कर ₹57,553 करोड़ पहुंचा. ऑटो कारोबार का मुनाफा 55% बढ़ा, जबकि ट्रैक्टर कारोबार की बिक्री में 6% की गिरावट दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25% बढ़कर 4,588 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 3,673 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 25% बढ़कर 57,553 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 46,106 करोड़ रुपये था.
कंपनी के कुल प्रदर्शन में ऑटो कारोबार की अहम भूमिका रही. इस सेगमेंट में मुनाफा 55% बढ़ा, जबकि वाहनों की बिक्री में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. दूसरी ओर, ट्रैक्टर और कृषि उपकरण कारोबार को त्योहारों के समय में बदलाव और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का दबाव झेलना पड़ा. इसके चलते इस कारोबार की बिक्री और मुनाफे में गिरावट आई. समूह की फाइनेंशियल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी कारोबार ने भी बेहतर प्रदर्शन किया.
ऑटो कारोबार का मुनाफा 55% बढ़ा
महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटो कारोबार ने दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 55% बढ़कर 2,388 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, रेवेन्यू 39% की बढ़ोतरी के साथ 37,756 करोड़ रुपये रहा.
तिमाही के दौरान कंपनी ने अपनी सहायक कंपनियों सहित कुल 3,30,896 वाहन बेचे, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 26% अधिक है. कंपनी की यूटिलिटी व्हीकल बिक्री करीब 1.83 लाख यूनिट रही. एसयूवी की बिक्री में भी सालाना आधार पर 26% की वृद्धि दर्ज की गई.
एसयूवी बाजार में रेवेन्यू के आधार पर कंपनी की हिस्सेदारी 24.3% रही. वहीं, इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी 30.1% पहुंच गई. इसके अलावा 3.5 टन से कम वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों के बाजार में महिंद्रा की हिस्सेदारी 52.3% और इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों में 36.2% रही.
ऑटो कारोबार का स्टैंडअलोन ब्याज और टैक्स से पहले मुनाफा (PBIT) 15% बढ़कर 2,614 करोड़ रुपये रहा. इसका पीबीआईटी मार्जिन 7.7% दर्ज किया गया. इलेक्ट्रिक एसयूवी की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था के प्रभाव को हटाने पर यह मार्जिन 9.1% रहा.
कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ऑटो एवं फार्म सेक्टर के सीईओ राजेश जेजुरिकर ने कहा कि एसयूवी की मजबूत मांग से ऑटो कारोबार को फायदा मिला है. ऑटो कारोबार का कंसॉलिडेटेड पीबीआईटी मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 1.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 8.8% हो गया.
ट्रैक्टर कारोबार पर दबाव, बिक्री 6% घटी
ऑटो कारोबार की मजबूत ग्रोथ के उलट कृषि उपकरण कारोबार का प्रदर्शन कमजोर रहा. दूसरी तिमाही में महिंद्रा ने 1,16,027 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1,22,936 यूनिट था. इस तरह ट्रैक्टर बिक्री में सालाना आधार पर 6% की गिरावट आई.
कृषि उपकरण कारोबार का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू भी 6% घटकर 9,572 करोड़ रुपये रह गया. वहीं, इस सेगमेंट का नेट प्रॉफिट 9% गिरकर 1,053 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, घरेलू ट्रैक्टर बाजार में कंपनी ने 41.5% हिस्सेदारी के साथ अपनी नंबर एक स्थिति बरकरार रखी.
इस कारोबार का स्टैंडअलोन पीबीआईटी 1,441 करोड़ रुपये रहा. वहीं, पीबीआईटी मार्जिन पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत अंक घटकर 16.8% रह गया.
कंपनी के मुताबिक, त्योहारों के समय में बदलाव से ट्रैक्टरों की मांग प्रभावित हुई. इसके अलावा कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी मुनाफे पर दबाव डाला. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले कृषि उपकरण कारोबार के कंसॉलिडेटेड पीबीआईटी मार्जिन में 0.2 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ.
महिंद्रा फाइनेंस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन भी सुधरा
समूह के सर्विसेज कारोबार का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दूसरी तिमाही में 18% बढ़कर 1,147 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, रेवेन्यू भी 18% बढ़कर 11,821 करोड़ रुपये रहा.
महिंद्रा फाइनेंस के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी का ग्रॉस स्टेज-3 एसेट अनुपात 3.42% रहा. वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाला महिंद्रा फाइनेंस का मुनाफा 61% बढ़ा.
टेक महिंद्रा के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ. महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाला टेक महिंद्रा का मुनाफा 33% बढ़ा. कंपनी का एबिट मार्जिन पिछले साल के मुकाबले 2.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 14.8% हो गया.
महिंद्रा लाइफस्पेसेज की प्री-सेल्स 41% बढ़ी
समूह की रियल एस्टेट कंपनी महिंद्रा लाइफस्पेसेज की रेजिडेंशियल प्री-सेल्स दूसरी तिमाही में 41% बढ़कर 1,100 करोड़ रुपये पहुंच गई. कंपनी ने इस दौरान 1,500 करोड़ रुपये की ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू वाले नए प्रोजेक्ट भी जोड़े.
महिंद्रा हॉलिडेज का ऑक्यूपेंसी रेट बढ़कर 76% हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले 2.2 प्रतिशत अंक अधिक है. कंपनी के पास कुल 5,762 कमरों की क्षमता रही.
वहीं, महिंद्रा लॉजिस्टिक्स का रेवेन्यू 24% बढ़कर 2,095 करोड़ रुपये पहुंच गया. महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाले मुनाफे के आधार पर कंपनी घाटे से निकलकर मुनाफे में आ गई. समूह के उभरते कारोबारों, जिन्हें कंपनी 'ग्रोथ जेम्स' कहती है, का कुल मुनाफा तीन गुना हो गया.
मैनेजमेंट ने क्या कहा?
महिंद्रा एंड महिंद्रा के ग्रुप सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर अनीश शाह ने कहा कि दूसरी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफे में 25% की बढ़ोतरी समूह के विभिन्न कारोबारों की मजबूती को दिखाती है. ग्राहकों की मजबूत मांग से ऑटो कारोबार में अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि त्योहारों के समय में बदलाव के कारण कृषि उपकरण कारोबार में गिरावट आई.
उन्होंने कहा कि महिंद्रा फाइनेंस ने अपनी ग्रोथ बरकरार रखी है और टेक महिंद्रा के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है. आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी का ध्यान मुनाफे के साथ कारोबार बढ़ाने पर है.
समूह के मुख्य वित्त अधिकारी अमरज्योति बरुआ ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया है. मजबूत बैलेंस शीट और नकदी की उपलब्धता से समूह को भविष्य में नए कारोबारों में निवेश करने में मदद मिलेगी.
टेलीकॉम रेगुलेटर ने इंटरकनेक्शन नियमों में संशोधन करते हुए जुर्माने का नया ढांचा पेश किया है. रिपोर्टिंग में देरी पर 25 लाख रुपये और इंटरकनेक्शन से जुड़े उल्लंघनों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी और नियमों के उल्लंघन पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है. अब इंटरकनेक्शन की सुविधा देने में देरी करने, अनुरोध ठुकराने या इंटरकनेक्शन समझौता नहीं करने पर टेलीकॉम ऑपरेटरों को प्रति लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. नियामक ने रिपोर्टिंग संबंधी नियमों के उल्लंघन पर भी रोजाना के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान किया है.
ट्राई ने टेलीकम्युनिकेशन इंटरकनेक्शन रेगुलेशंस में तीसरे संशोधन के तहत ये बदलाव किए हैं. इनका उद्देश्य अलग-अलग टेलीकॉम नेटवर्क के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय करना है. संशोधित प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.
15 दिन बाद बढ़ जाएगा रोजाना जुर्माना
नए नियमों के तहत रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पहले 15 दिनों तक रोजाना 50,000 रुपये का वित्तीय जुर्माना लगेगा. यदि देरी 15 दिनों से अधिक जारी रहती है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर प्रतिदिन 1 लाख रुपये हो जाएगी. हालांकि, प्रत्येक उल्लंघन के लिए कुल जुर्माने की अधिकतम सीमा प्रति सेवा क्षेत्र 25 लाख रुपये तय की गई है.
ट्राई के मुताबिक, पहले एक समान जुर्माने की व्यवस्था होने से कम अवधि की देरी और लंबे समय तक नियमों का पालन नहीं करने के बीच अंतर स्पष्ट नहीं हो पाता था. इसलिए अब उल्लंघन की अवधि के आधार पर जुर्माने की अलग-अलग दरें तय की गई हैं. इसका उद्देश्य कंपनियों को जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
इंटरकनेक्शन में देरी पर 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना
इंटरकनेक्शन उपलब्ध कराने में देरी, अनुरोध स्वीकार नहीं करने, इंटरकनेक्शन समझौता नहीं करने या इंटरकनेक्शन प्वाइंट को बंद करने अथवा उसे सरेंडर करने जैसे मामलों में कंपनियों पर ज्यादा जुर्माना लगेगा.
ऐसे उल्लंघनों के लिए पहले 15 दिनों तक रोजाना 1 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. यदि उल्लंघन 15 दिनों से अधिक जारी रहता है, तो यह राशि बढ़कर प्रतिदिन 2 लाख रुपये हो जाएगी. प्रत्येक मामले में जुर्माने की अधिकतम सीमा प्रति लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र 1 करोड़ रुपये होगी.
नियामक की ओर से निर्धारित वित्तीय जुर्माने का भुगतान 21 दिनों के भीतर या प्राधिकरण की ओर से तय समयसीमा में करना होगा.
तीन साल में IP आधारित इंटरकनेक्शन व्यवस्था अपनानी होगी
ट्राई ने इंटरकनेक्शन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) आधारित सिस्टम अपनाना भी अनिवार्य किया है. नए इंटरकनेक्शन समझौते अब IP आधारित सिस्टम के जरिए ही किए जाएंगे.
वहीं, टेलीकॉम कंपनियों को अपने मौजूदा इंटरकनेक्शन सिस्टम को जनवरी 2027 से तीन साल के भीतर IP आधारित व्यवस्था में बदलना होगा. इस बदलाव का उद्देश्य नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना, कॉल की गुणवत्ता सुधारना और कॉल ड्रॉप की समस्या कम करना है.
इसके अलावा, ट्राई ने इंटरकनेक्शन व्यवस्था को मौजूदा लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (LDCA) और शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (SDCA) के ढांचे से धीरे-धीरे लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (LSA) स्तर पर स्थानांतरित करने का भी प्रावधान किया है.
बैंक गारंटी के मौजूदा नियम बरकरार
ट्राई ने इंटरकनेक्शन समझौते के लिए बैंक गारंटी से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके तहत कोई टेलीकॉम सेवा प्रदाता इंटरकनेक्शन समझौते की मांग करता है, तो दूसरा सेवा प्रदाता शुरुआती इंटरकनेक्शन स्थापित होने के बाद छह महीने की अवधि को कवर करने वाली बैंक गारंटी मांग सकता है.
यह शर्त तभी लागू होगी, जब दूसरा सेवा प्रदाता बैंक गारंटी की मांग करेगा. इसकी राशि भी उसी के आधार पर तय की जाएगी. ट्राई के इन संशोधनों से टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंटरकनेक्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के साथ नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है.
कंपनी श्री सिटी स्थित अपनी आगामी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का निर्माण करेगी. विस्तार योजना के लिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (LG Electronics India) अब ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कदम रखने की तैयारी कर रही है. कंपनी आंध्र प्रदेश के श्री सिटी (Sri City) में अपनी आगामी तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में वाहनों से जुड़े कई तकनीकी उपकरणों का निर्माण करेगी. इसके साथ ही कंपनी का कारोबार होम अप्लायंसेज और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से आगे बढ़कर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी विस्तार करेगा.
कंपनी के बोर्ड ने 5 नवंबर को इस नए कारोबार में प्रवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स, व्हीकल कंप्यूटिंग सॉल्यूशंस, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में काम करेगी.
शेयरधारकों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी योजना
इस नए कारोबार के लिए कंपनी ने अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत कंपनी को ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति मिलेगी. इस संशोधन के लिए पोस्टल बैलेट के जरिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मुताबिक, इस कारोबार में निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. निवेश की राशि कारोबार के विस्तार, टेक्नोलॉजी, उपकरणों की जरूरत और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर तय होगी. हालांकि, कंपनी ने फिलहाल इस योजना के लिए कुल निवेश का खुलासा नहीं किया है.
ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कंपनी की एंट्री ऐसे समय में हो रही है, जब वाहनों में कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, डिजिटल डिस्प्ले और एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम की मांग बढ़ रही है. इस विस्तार से कंपनी को वाहन निर्माण से जुड़े तकनीकी उपकरणों और कनेक्टेड मोबिलिटी के बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा.
दूसरी तिमाही में मुनाफा 25.7 फीसदी बढ़ा
इस बीच, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25.7 फीसदी बढ़कर 489 करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 19.5 फीसदी बढ़कर 7,380 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
कंपनी का ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा (EBITDA) 28 फीसदी बढ़कर 701 करोड़ रुपये रहा. वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान तिमाही के 8.9 फीसदी से बढ़कर 9.5 फीसदी हो गया.
होम अप्लायंसेज कारोबार की रेवेन्यू ग्रोथ 20.9 फीसदी
कंपनी के बड़े कारोबार होम अप्लायंसेज एंड एयर सॉल्यूशन सेगमेंट का रेवेन्यू 20.9 फीसदी बढ़कर 4,772 करोड़ रुपये रहा. वहीं, होम एंटरटेनमेंट सेगमेंट का रेवेन्यू 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी ने मिड-टीन्स में रेवेन्यू ग्रोथ और शुरुआती डबल-डिजिट EBITDA मार्जिन का अपना अनुमान बरकरार रखा है.
कंपनी ने यह भी बताया कि श्री सिटी स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में कंप्रेसर का उत्पादन वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है. यह यूनिट भारत में कंपनी की व्यापक विनिर्माण विस्तार योजना का हिस्सा है.
सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने देश में बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage Systems) विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता योजना को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding - VGF) योजना को स्वीकृति दी गई. इसके तहत देशभर में 92 गीगावॉट घंटे (GWh) की नई ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी. इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक होगी.
सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है. इससे देश में ऊर्जा भंडारण से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी.
Store More → Import Less → Power India Round the Clock! The Cabinet has approved a massive Rs 14,500 crore push to develop 92 GWh of energy storage capacity, supporting an estimate of almost 1 lakh crore investment! Unique features are: 60 GWh of pumped hydro storage. 30 GWh of battery energy storage. 2 GWh through emerging technologies. 40% minimum domestic content for battery storage projects. Truly, it is more reliable power, greater renewable energy integration and stronger energy security. https://t.co/uPmfad2lFe
— Narendra Modi (@narendramodi) November 4, 2026
97,600 करोड़ रुपये का होगा कुल निवेश
इस योजना के तहत कुल 97,600 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित की जाएंगी. इसमें 60 GWh क्षमता की हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP), 30 GWh क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और उभरती हुई वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के जरिए 2 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है.
सरकार की ओर से दी जाने वाली 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से इन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी और इनके निर्माण एवं संचालन को गति मिलेगी.
2031-32 तक 411 GWh क्षमता का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031-32 तक देश में 411 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है. इस योजना के तहत तैयार होने वाली 92 GWh की नई क्षमता देश में मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता की तुलना में लगभग 170 फीसदी अतिरिक्त होगी. इससे भविष्य में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलेगी.
बैटरी निर्माण में घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा
योजना का एक अहम उद्देश्य ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है. इसके लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में कम से कम 40 फीसदी घरेलू सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य होगा. इस प्रावधान से देश में बैटरी और उससे जुड़े उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर और रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.
ऊर्जा भंडारण से चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति संभव
जैक्सन ग्रीन (Jakson Green) के मैनेजिंग डायरेक्टर कन्नन कृष्णन ने कहा कि 92 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए 14,500 करोड़ रुपये की VGF योजना को मंजूरी भारत की ऊर्जा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है. भारत अब नवीकरणीय ऊर्जा से आगे बढ़कर भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ऊर्जा भंडारण से सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली को चौबीसों घंटे उपलब्ध कराना संभव होगा.
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था मिलकर स्वच्छ बिजली के पारेषण और उसकी उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेंगे. वहीं, बैटरी परियोजनाओं में 40 फीसदी घरेलू सामग्री की अनिवार्यता और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से घरेलू विनिर्माण मजबूत होगा तथा आयात पर निर्भरता घटेगी. इससे देश की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी.
विदेशी आयात पर निर्भरता होगी कम
सोलरयान (Solaryaan) के फाउंडर, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज पटेल ने कहा, केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 92 GWh की ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) को मंजूरी मिलना, भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में एक मील का पत्थर है. इस योजना के तहत 30 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को मिलने वाला समर्थन और इन परियोजनाओं में न्यूनतम 40% स्वदेशी सामग्री की अनिवार्यता, सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'पीएलआई' जैसी सफल नीतियों का ही अगला मजबूत विस्तार है. यह फैसला भारतीय निर्माताओं को अपना उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय सप्लाई चेन को सशक्त करने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने का एक स्पष्ट और बड़ा अवसर देता है."
भविष्य में जैसे-जैसे ये परियोजनाएं धरातल पर उतरेंगी, प्रतिस्पर्धी टैरिफ और बेहतर प्रदर्शन से बैटरी स्टोरेज तकनीक में पूरे देश और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. बैटरी सिस्टम, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटेलिजेंट एनर्जी मैनेजमेंट के क्षेत्र में भारत जो स्वदेशी क्षमताएं विकसित करेगा, उसका सीधा लाभ हमारे वाणिज्यिक और औद्योगिक (C&I) क्षेत्रों को भी मिलेगाय वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2070 तक 'नेट-जीरो' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में यह कदम निर्णायक साबित होगा.
आवासीय परियोजनाओं में ऊर्जा प्रबंधन होगा बेहतर
संजीविनी ग्रुप के एमडी सुरेश एच. ए ने कहा, सरकार की 14,500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना के तहत 92 GWh ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का फैसला भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए दीर्घकालिक रूप से अहम साबित हो सकता है. खासतौर पर बड़े आवासीय टाउनशिप, कमर्शियल ऑफिस स्पेस और एकीकृत विकास परियोजनाओं को इससे फायदा मिल सकता है. शहरों के विस्तार और रियल एस्टेट परियोजनाओं में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, स्मार्ट बिल्डिंग सिस्टम, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बिजली की निर्बाध आपूर्ति शहरी विकास का महत्वपूर्ण पहलू बनती जा रही है. ग्रिड स्तर पर ऊर्जा भंडारण से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में उतार-चढ़ाव को संभालने, बिजली की अधिकतम मांग को प्रबंधित करने और आपूर्ति को स्थिर बनाने में मदद मिलेगी. इससे डेवलपर्स आवासीय परियोजनाओं में सौर ऊर्जा, बैटरी से संचालित कॉमन एरिया इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा दक्ष प्रणालियों को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं.
बेहतर ऊर्जा प्रबंधन से बड़ी आवासीय सोसायटियों के परिचालन खर्च को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है. कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए भी यह पहल महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), आईटी पार्क, डेटा सेंटर और बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने कारोबारी ठिकाने चुनते समय बिजली की विश्वसनीयता, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दे रही हैं.
प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए होगा परियोजनाओं का आवंटन
ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा. बैटरी ऊर्जा भंडारण और हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां वित्तीय सहायता पाने की पात्र होंगी. वहीं, वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां लागू कर सकेंगी.
सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण सुविधाएं विकसित होने से सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बनने वाली बिजली का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा. इससे बिजली आपूर्ति में स्थिरता आएगी और मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने के लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. यह पहल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगी.
बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी के साथ कारोबार शुरू होने के संकेत हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 340 अंक यानी 1.4 फीसदी उछलकर 24,300 के पार पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट, अमेरिकी बाजारों में तेजी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से घरेलू बाजार को मजबूती मिल सकती है. बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल गया है. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है. वहीं, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.
निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम
तकनीकी संकेतों के मुताबिक, निफ्टी में तेजी का रुझान बना हुआ है. इंडेक्स लगातार पांच सत्रों से बुलिश कैंडल बना रहा है और हायर हाई व हायर लो दर्ज कर रहा है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकता है तो यह 24,400 और फिर 24,700 के स्तर तक पहुंच सकता है. निफ्टी का 200-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज करीब 24,003 है. अगर इंडेक्स 24,000 से 24,150 के ऊपर बना रहता है तो तेजी जारी रह सकती है. वहीं, इस स्तर से नीचे फिसलने पर शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ सकती है.
अमेरिकी बाजारों में तेजी, एशिया में मिला-जुला रुख
बुधवार को अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी रही. डाउ जोंस 3 फीसदी, एसएंडपी 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.91 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. हालांकि, गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा. जापान का निक्केई करीब 1 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहा था.
FIIs ने खरीदे 7,284 करोड़ रुपये के शेयर
विदेशी निवेशकों की वापसी भी घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है. बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है. हालांकि, कारोबारी सत्र के दौरान यह देखना अहम होगा कि बाजार शुरुआती तेजी को बरकरार रख पाता है या नहीं. अगर प्रमुख इंडेक्स ऊपरी स्तरों पर टिके रहते हैं, तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है.
इन शेयरों पर रहेगी नजर
बीएसई, नायका, अरबिंदो फार्मा, अपोलो हॉस्पिटल्स, लेंसकार्ट, डाबर इंडिया और अपोलो टायर्स के शेयर चर्चा में रहेंगे. सितंबर तिमाही में बीएसई का नेट प्रॉफिट 44.9 फीसदी बढ़कर 809.1 करोड़ रुपये, नायका का 206.8 फीसदी बढ़कर 101.2 करोड़ रुपये और अरबिंदो फार्मा का 32.7 फीसदी बढ़कर 1,126.1 करोड़ रुपये रहा. अपोलो हॉस्पिटल्स का मुनाफा 33.5 फीसदी और लेंसकार्ट का 122.1 फीसदी बढ़ा. डाबर और अपोलो टायर्स ने भी मुनाफे में बढ़त दर्ज की.
शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, प्रीमियर एनर्जीज, एक्साइड इंडस्ट्रीज, एनएचपीसी, हुडको, फिजिक्सवाला, टोरेंट पावर और निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के शेयरों पर भी नजर रहेगी. पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, जेके लक्ष्मी सीमेंट और एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के कमजोर नतीजे भी निवेशकों के रडार पर रहेंगे.
अडानी पावर ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के साथ 1,234 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए 25 साल का समझौता किया है. एचडीएफसी बैंक को कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम के तहत जमा स्वीकार करने की मंजूरी मिली है. स्विगी ने इंस्टामार्ट के 25 केंद्रों पर बैटरी स्वैपिंग स्टेशन शुरू किए हैं. क्यूपिड, केएसएच इंटरनेशनल, इंडियन होटल्स, पेट्रोनेट एलएनजी, एक्सिस बैंक और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज भी कारोबारी घोषणाओं के कारण चर्चा में रहेंगे.
अजमेरा रियल्टी में निवेशक मुकुल अग्रवाल ने अपनी पूरी 1.93 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है. वहीं, गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में पीजीआईएम इंडिया फंड ने अतिरिक्त 0.6 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है.
आज इन कंपनियों के आएंगे नतीजे
ओएनजीसी, भारती एयरटेल, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, एलआईसी, भारत फोर्ज, फोर्टिस हेल्थकेयर, ग्लेनमार्क फार्मा, एम्फैसिस और संवर्धन मदरसन समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी. निवेशकों की नजर इनके मुनाफे, रेवेन्यू और मार्जिन पर रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
एडटेक कंपनी मोबावेन्यू ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एडटेक कंपनी मोबावेन्यू (Mobavenue) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 48.6 फीसदी बढ़कर 149.6 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कंपनी के शुद्ध मुनाफे (PAT) में 72.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) बढ़कर करीब 22.9 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह इससे कम था. इस दौरान कंपनी का EBITDA भी 59.6 फीसदी बढ़कर करीब 31.6 करोड़ रुपये हो गया.
कंपनी ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में भी मजबूत प्रदर्शन किया. इस दौरान उसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 41 फीसदी बढ़ा. वहीं, EBITDA में करीब 47 फीसदी और PAT में लगभग 55 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA मार्जिन 20 फीसदी से ऊपर बना रहा.
कंपनी के आउटकम-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल में भी सुधार देखने को मिला. इसके तहत प्रति आउटकम रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 10.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यह कंपनी के विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ सॉल्यूशंस से मिलने वाली वैल्यू में वृद्धि को दर्शाता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बढ़ा योगदान
मोबावेन्यू के कारोबार की वृद्धि में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अहम भूमिका रही. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी के कुल रेवेन्यू में विदेशी बाजारों की हिस्सेदारी 22.3 फीसदी रही. वहीं, दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 23.8 फीसदी हो गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 12.3 फीसदी थी.
फिलहाल कंपनी 13 देशों में अपने ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर को कंपनी ने अपना प्रमुख केंद्र बनाया है. इसके अलावा, अमेरिका समेत उभरते और विकसित बाजारों में अपनी टीम का विस्तार किया जा रहा है.
कंपनी भारत में अपने टेक्नोलॉजी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को भी मजबूत कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बेहतर तकनीकी सहयोग मिल सके.
AI आधारित विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर फोकस
आने वाले समय में मोबावेन्यू का लक्ष्य खुद को वैश्विक स्तर पर AI आधारित विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है. इसके लिए कंपनी प्रति आउटकम रेवेन्यू बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने और मुनाफे के साथ कारोबार की वृद्धि बनाए रखने पर ध्यान दे रही है.
कंपनी का आउटकम-बेस्ड विज्ञापन मॉडल डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री में बदलते रुझानों को भी दर्शाता है. अब विज्ञापनदाता अपने मीडिया निवेश के बदले केवल पहुंच और व्यूज के बजाय मापने योग्य कारोबारी नतीजों को अधिक महत्व दे रहे हैं.
मोबावेन्यू ने कहा है कि वह कारोबार के विस्तार के साथ अनुशासित क्रियान्वयन और शेयरधारकों, ग्राहकों तथा भागीदारों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू तैयार करने पर अपना ध्यान बनाए रखेगी.
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोने की कीमतों में तेजी के बाद अब गिरावट का दौर जारी है. साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी के साथ 5,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार करने वाला सोना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया है. इस साल अब तक सोने की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. बाजार में लगातार हो रही मुनाफावसूली के बीच अब ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने सोने की कीमतों में और गिरावट का अनुमान जताया है.
11% तक और सस्ता हो सकता है सोना
नोमुरा ने अपने ताजा रिसर्च नोट में अनुमान लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है. फिलहाल सोना करीब 3,947 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है. इस लिहाज से मौजूदा स्तर से कीमतों में करीब 11 फीसदी की और गिरावट की संभावना है.
भारतीय बाजार के लिहाज से देखें तो फिलहाल 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.39 लाख रुपये है. अगर नोमुरा का अनुमान सही साबित होता है और कीमतों में 11 फीसदी की गिरावट आती है, तो सोना करीब 15,290 रुपये तक सस्ता हो सकता है. ऐसे में 10 ग्राम सोने का भाव घटकर लगभग 1.23 लाख रुपये के स्तर पर आ सकता है.
मुनाफावसूली से सोने की कीमतों पर दबाव
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे लगातार हो रही मुनाफावसूली को एक बड़ी वजह माना जा रहा है. एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली किए जाने से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. भारी बिकवाली के चलते सोना अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है.
उनका कहना है कि सोने की कीमतों में टिकाऊ रिकवरी के लिए बाजार में नई खरीदारी जरूरी है. इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संकेतों का अनुकूल होना भी अहम रहेगा.
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर
आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय करने में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की अहम भूमिका हो सकती है. जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, बाजार की नजर अमेरिका के चुनाव, बेरोजगारी के आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर रहेगी. इन आंकड़ों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं.
तकनीकी नजरिए से देखें तो भारतीय बाजार में 1,42,000 रुपये का स्तर सोने के लिए अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है. उनके मुताबिक, जब तक सोना इस स्तर के ऊपर टिककर कारोबार नहीं करता, तब तक निकट अवधि में मजबूत तेजी की संभावना सीमित रह सकती है.
अमेरिका और ईरान पर भी रहेगी नजर
कोटक महिंद्रा एएमसी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति का सोने की कीमतों को लेकर कहा, पिछले एक सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में डॉलर के लिहाज से करीब 3 फीसदी की गिरावट आई है. इस दौरान सोना लगभग एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर की कमजोरी से सोने की कीमतों को समर्थन मिलना चाहिए, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका ने कीमतों पर दबाव बना रखा है. वहीं, ईरान में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे हैं. इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और महंगाई बढ़ने की चिंताएं भी गहरा रही हैं.
भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से जुड़े जोखिमों के बावजूद सोने की कीमतों को समर्थन नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि बाजार का पूरा ध्यान फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आगे की रणनीति पर है. हालांकि, कीमतों में आई हालिया गिरावट से सोने में लंबी अवधि के निवेश का आधार नहीं बदलता है. खासकर इसलिए क्योंकि ऊंची ब्याज दरों को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.
निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है और इनमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है. ऐसे में निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर एकमुश्त पूरी रकम निवेश करने से बचना चाहिए. इसके बजाय कीमतों में गिरावट आने पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार करना चाहिए. अनिश्चितता से बचाव और निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिहाज से सोना लंबी अवधि के पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रह सकता है.