होम / बिजनेस / चैरिटेबल ट्रस्ट को सिर्फ इतने प्रतिशत दान पर ही मिलेगी टैक्स छूट, बढ़ेगा रेवेन्यू
चैरिटेबल ट्रस्ट को सिर्फ इतने प्रतिशत दान पर ही मिलेगी टैक्स छूट, बढ़ेगा रेवेन्यू
दरअसल आज तक सरकार चैरिटेबल ट्रस्टों की आय पर कोई टैक्स नहीं लगाती थी, वो जितनी भी आय कमाते थे उस पूरे पर टैक्स रिबेट दे दी जाती थी, लेकिन अब सरकार ने नया नियम बना दिए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
केन्द्र सरकार ने इस बार के बजट में चैरिटेबल ट्रस्ट को लेकर एक नई घोषणा की है, जिसने कई वास्तविक ट्रस्टों की परेशानी को बढ़ा दिया है. सरकार के प्रावधान के अनुसार अब किसी भी ट्रस्ट की 85 प्रतिशत इनकम ही कर छूट के फायदे में आ पाएगी. 15 प्रतिशत पर उसे टैक्स देना ही होगा. दरअसल सरकार ने ये प्रावधान इसलिए किया है क्योंकि कई चैरिटेबल ट्रस्ट सरकार की छूट का गलत फायदा उठा रहे थे, जिससे सरकार को रेवेन्यू का नुकसान हो रहा था.
पहले क्या होता था
सरकार के नियम के अनुसार अगर कोई चैरिटेबल ट्रस्ट 100 रुपये की इनकम करता था और वो 100 रुपये दान कर देता था तो उस पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता था. इसके लिए सरकार ने एक विशेष प्रावधान कर रखा था. लेकिन कई चैरिटेबल ट्रस्ट कर ये रहे थे कि वो अपने कमाए हुए 100 रुपये अपनी ही किसी दूसरी संस्था को दान कर देते थे, जिससे वो टैक्स से भी बच जाते थे. इससे सरकार को रेवेन्यू का नुकसान हो रहा था.
अब सरकार ने क्या किया प्रावधान
इस कर चोरी को रोकने के लिए सरकार की ओर से एक प्रावधान कर दिया गया है. इस प्रावधान के तहत अगर कोई ट्रस्ट 100 रुपये दान में कमाता है और साल के अंत से पहले उसे दान दे भी देता है तो उसे सिर्फ 85 प्रतिशत आय पर ही कर छूट का फायदा मिलेगा. 15 प्रतिशत पर उसे टैक्स देना ही होगा. भले ही वो किसी भी दान दे. इससे सरकार को रेवेन्यू भी मिल जाएगा और धोखाधड़ी भी खत्म हो जाएगी.
सीनियर सीए संजय गुप्ता बताते हैं कि हमारे देश में कई ऐसे वास्तविक ट्रस्ट हैं जो असल में बड़े काम करते हैं. इनमें टाटा ट्रस्ट, सहित कई बड़ी कंपनियों के ट्रस्ट शामिल हैं. टाटा ट्रस्ट की आय टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी में कंपनी के लाभांश से आती है. ये संस्थाए अपनी कमाई से दान लेती और अलग-अलग सामाजिक संगठनों को दान देती हैं, जिससे कई सामाजिक कार्य होते हैं. इस प्रावधान का असर उस पर भी पड़ सकता है. इससे उनके द्वारा सामाजिक कार्यों में खर्च की जाने वाली राशि पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है
सीनियर सीए संजय गुप्ता बताते हैं कि इस समस्या से बचने का एक तरीका जो उनकी समझ में सबसे बेहतर आता है कि इसे पूरी तरह से बंद नहीं किया जाना चाहिए. किसे रिबेट देनी है और किसे नहीं ये सरकार के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए. जो ट्रस्ट समझता है उसने पैसे को वास्तविक तौर पर खर्च किया है तो वो छूट के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है. सरकार एक सप्ताह या एक तय समय में उसकी जांच करके पता लगा ले और अगर वो केस वास्तविक है तो उसे छोड़ दे अन्यथा सरकार उस पर कार्रवाई कर सकती है.
टैग्स