इस 28% GST को लेकर अब तक गेमिंग इंडस्ट्री की ओर से इसका विरोध होता रहा है लेकिन सरकार इसे लागू करने को लेकर पूरी तरह से तैयार हो चुकी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
गेमिंग इंडस्ट्री पर 28 प्रतिशत जीएसटी लागू करने के फैसले को सरकार 1 अक्टूबर से लागू करने जा रही है. CBIC के प्रमुख संजय कुमार की ओर से ये जानकारी दी गई है कि 1 अक्टूबर से 28 प्रतिशत जीएसटी लागू हो जाएगा. उन्होंने हाल ही में जीएसटी विभाग की ओर से कई गेमिंग कंपनियों को भेजे गए नोटिस को लेकर भी अपनी बात कही और कहा कि उन्हें नोटिस सोच समझकर भेजा गया था. दिलचस्प बात ये है कि इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने इन नोटिस को लेकर अपनी आवाज बुलंद की थी.
क्या बोले सीबीआईसी चीफ?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआईसी चीफ संजय कुमार ने कहा है कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक गेमिंग, कैसिनो और हॉर्स रेसिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी लागू करने जा रही है. इससे पहले पिछले साल कई राज्यों के विरोध के बाद सरकार ने इसे जीएसटी काउंसिल से पास करा लिया था. 28 प्रतिशत जीएसटी का विरोध करने वालों में दिल्ली, सिक्किम और गोवा जैसे राज्य थे. बावजूद उसके इसे 1 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी की जा चुकी है.
जीएसटी विभाग ने कई कंपनियों को भेजा था नोटिस
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआईसी प्रमुख ने कई कंपनियों को भेजे गए लीगल नोटिस को लेकर भी अपनी बात कही है. उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को भी नोटिस भेजा गया है उन्हें प्रोसेस के अनुरूप ये दिया गया है. सीबीआईसी की ओर से अब तक जिन कंपनियों को नोटिस भेजा गया है उनमें गेमिंग कंपनी ड्रीम 11 की मूल कंपनी ड्रीम स्पोर्टस शामिल है. इसमें लगाए गए दांव के अंकित मूल्य पर 28 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान को लेकर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का हवाला दिया गया है. इससे पहले इसी तरह का नोटिस गेम्सक्राफ्ट को भी मिल चुका है. गेम्स क्राफ्ट को कर चोरी के लिए कथित तौर पर 21600 करोड़ रुपये का जीएसटी टैक्स डिमांड नोटिस मिल चुका है.
अश्नीर ग्रोवर भी उठा चुके हैं इस मामले को
कल ही अश्नीर ग्रोवर ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. अश्नीर ग्रोवर ने कर जारी करने वाले अधिकारियों की सोच बारे में बताते हुए कहा कि मुझे इस बात की दिलचस्पी है कि आखिर ऐसे नोटिस भेजते वक्त टैक्स वालों के दिमाग में क्या चलता होगा. उन्होंने कहा कि ये सरासर मोनोपॉली है. इसका एकमात्र जवाब है ‘कुछ नहीं’. उन्होंने आगे कहा कि ना तो इस तरह के करों का भुगतान करने के लिए कोई तैयार होगा और ना ही सरकार उन्हें वसूल करने में सक्षम होगी. उन्होंने ये भी कहा कि इससे कानूनी प्रक्रियाओं के कारण वकीलों को फायदा होगा. ये बिजनेसमैन द्वारा सहन किए जाने वाला उत्पीड़न है.
ग्रोवर ने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर कहा कि, ना तो कोई इतना टैक्स देगा और ना ही सरकार को ये टैक्स मिलेगा. मिलेगी सिर्फ वकीलों को फीस जो एसी में इसे लड़ेंगे. उन्होंने मजाकिया अंदाज में अपनी बात कहते हुए कहा था कि इससे फाइव ट्रिलियन इकोनॉमी तक पहुंचने में मदद नहीं मिलेगी. इसके बाद उन्होंने वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि ये हमारे 5 ट्रिलियन तक पहुंचने के लक्ष्य में मदद नहीं कर रहा है.
पंजाब सरकार के खाद्य प्रसंस्करण विभाग की प्रधान सचिव राखी गुप्ता भंडारी ने कहा, खेतों के नजदीक भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी से हर साल करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये की कृषि उपज बर्बाद होती है.
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रितु राणा
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उपज की बर्बादी रोकने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकता है. इसके लिए खेतों के नजदीक पर्याप्त भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ किसानों को बाजार से जोड़ना जरूरी है. पंजाब सरकार के खाद्य प्रसंस्करण विभाग की प्रधान सचिव राखी गुप्ता भंडारी ने केपीएमजी इन इंडिया (KPMG) द्वारा आयोजित ‘अग्रसर भारत: टर्निंग इंडियाज एस्पिरेशंस इंटू एक्शन’ में एक सत्र के दौरान खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए ये बातें कहीं.
उन्होंने कहा कि अब केवल अधिक खाद्यान्न उत्पादन पर ध्यान देने के बजाय कृषि उपज का बेहतर इस्तेमाल और उसमें मूल्य संवर्धन करना जरूरी है. खाद्य प्रसंस्करण से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है. साथ ही, इससे रोजगार बढ़ाने और भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तैयार करने में भी मदद मिलेगी.
हर साल 1.53 लाख करोड़ रुपये की उपज का नुकसान
राखी गुप्ता के अनुसार, कृषि उपज के जल्द खराब होने और पर्याप्त भंडारण, प्रसंस्करण तथा विपणन सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. जब किसी फसल का उत्पादन अधिक होता है, तो किसानों को कई बार कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है. दूसरी ओर, उपभोक्ताओं को पूरे साल उचित कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध नहीं हो पाते.
उन्होंने बताया कि भारत में फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान सालाना करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का है. देश में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता विकसित होने के बावजूद पैक हाउस, रेफ्रिजरेटेड परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की करीब 75 फीसदी कोल्ड स्टोरेज क्षमता केवल आलू के भंडारण के लिए समर्पित है. ऐसे में अन्य कृषि उत्पादों के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए सुविधाओं का विस्तार करना जरूरी है. उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी इस तरह के बुनियादी ढांचे की कमी दिखाई देती है.
2030 तक 600 अरब डॉलर का हो सकता है बाजार
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बढ़ती मांग और निवेश की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राखी गुप्ता ने कहा कि इस क्षेत्र का बाजार मूल्य 382.2 अरब डॉलर आंका गया है, जिसके 2030 तक बढ़कर 600 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
पैकेज्ड फूड, पौष्टिक खाद्य उत्पादों और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले खाद्य विकल्पों की मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े खाद्य उत्पादों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है. इसके अलावा, ऑनलाइन माध्यमों के जरिए बड़े शहरों में खाद्य खुदरा कारोबार तक पहुंच बढ़ने की भी संभावना है.
उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, उपयुक्त बुनियादी ढांचे और राज्यों के स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रमुख प्राथमिकताएं बताया. उनके मुताबिक, केवल सुविधाएं विकसित करना पर्याप्त नहीं है. यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे किसानों के नजदीक हों, उनका सही इस्तेमाल हो और उनका बाजारों से बेहतर संपर्क हो.
पंजाब में 66 हजार से अधिक छोटे खाद्य उद्यम
पंजाब की कृषि क्षमता का उल्लेख करते हुए राखी गुप्ता ने कहा कि राज्य में गेहूं और धान के अलावा किन्नू, बासमती चावल, लाल मिर्च, गुड़ और दूसरे क्षेत्र-विशेष के कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाएं हैं.
उनके अनुसार, पंजाब में 52 खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं और मेगा फूड पार्क हैं. इसके अलावा, राज्य में करीब 66 हजार से अधिक छोटे और सूक्ष्म खाद्य उद्यम मौजूद हैं. बेहतर प्रसंस्करण, उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाकर इन उद्यमों की क्षमता का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है.
उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना छोटे उद्यमियों को कारोबार के औपचारिककरण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन में सहायता देने का महत्वपूर्ण माध्यम है.
उन्होंने बताया कि पंजाब में इस योजना के तहत सब्सिडी वितरण की दर 95 फीसदी रही है. प्रति परियोजना करीब 8.49 लाख रुपये की सब्सिडी का भी उल्लेख किया गया.
फसल विविधीकरण और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग पर जोर
राखी गुप्ता ने कहा कि पंजाब में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए फसल विविधीकरण और नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है. राज्य में किन्नू, गाजर, शकरकंद, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी प्रसंस्करण की संभावनाएं मौजूद हैं.
उन्होंने अमृतसरी कुलचे को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिलाने की संभावना का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय खाद्य उत्पादों को विशिष्ट पहचान देकर उनका मूल्य बढ़ाया जा सकता है. इसके अलावा, खाद्य प्रदर्शनियों और शेफ से जुड़े आयोजनों के जरिए भी नए उत्पादों, तकनीकों और बाजारों को प्रोत्साहित किया जा सकता है.
उन्होंने चंडीगढ़ में आयोजित शेफ एक्स जैसे आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण को पारंपरिक तरीकों तक सीमित रखने के बजाय नए प्रयोगों और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देना चाहिए.
महिला किसानों और उद्यमियों की भागीदारी जरूरी
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में समावेशी विकास की जरूरत पर जोर देते हुए राखी गुप्ता ने कहा कि महिला किसानों और महिला उद्यमियों को भी कृषि कारोबार और बाजारों में अधिक अवसर मिलने चाहिए.
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को पहचानने और उन्हें मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया से जोड़ने की जरूरत है. इसके लिए ऐसे प्रयास होने चाहिए, जिनसे महिला किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन में भी भागीदारी कर सकें.
उन्होंने फाइव रिवर्स और पंजाब मार्ट जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जिनका इस्तेमाल उत्पादों के विपणन के लिए किया जा रहा है. इसके अलावा, मार्कफेड ने सियाल पैलेस में अपने सोना ब्रांड के तहत नमकीन पानी में संरक्षित छोले और राजमा उत्पाद पेश किए हैं.
राखी गुप्ता ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास वास्तविक मांग के आधार पर करना होगा. इसके साथ ही सरकार और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि किसानों की उपज का अधिकतम मूल्य सुनिश्चित किया जा सके और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की विकास क्षमता का लाभ उठाया जा सके.
निफ्टी 50 में 0.39% और सेंसेक्स में 0.17% की गिरावट, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में 20 महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को गिरावट के साथ कारोबार बंद हुआ. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी. इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए. सप्ताह के दौरान कमजोर वैश्विक संकेतों, कंपनियों के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों और आईपीओ में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का भी बाजार की धारणा पर असर पड़ा.
कारोबार के अंत में निफ्टी 50 0.39 फीसदी गिरकर 22,600 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.17 फीसदी टूटकर 73,123.83 अंक पर आ गया. पूरे सप्ताह में निफ्टी में 2.4 फीसदी और सेंसेक्स में 2.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी रही. ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. यमन स्थित हूती बलों की ओर से सऊदी अरब पर हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ीं.
भारत अपनी तेल जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ सकती है. इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ने के साथ महंगाई बढ़ने का जोखिम भी है.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट
बाजार में कमजोरी का असर व्यापक रहा. 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 15 में सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई. मिडकैप शेयरों में 5.6 फीसदी और स्मॉलकैप शेयरों में 7.3 फीसदी की गिरावट आई. दोनों श्रेणियों में यह पिछले 20 महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही.
सेक्टर के लिहाज से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एनर्जी, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखा. सप्ताह के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 6.4 फीसदी, एनर्जी 4.6 फीसदी, एफएमसीजी 4.3 फीसदी और ऑटो इंडेक्स 3.5 फीसदी गिरा. कच्चे तेल और अन्य इनपुट की बढ़ती लागत से इन क्षेत्रों की कंपनियों की कमाई को लेकर चिंताएं बढ़ीं.
HDFC Bank, Axis Bank और Bajaj Finance में गिरावट
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी कमजोरी रही. बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे अधिक वेटेज रखने वाले एचडीएफसी बैंक के शेयर सप्ताह के दौरान 5 फीसदी गिर गए. कंपनी का तिमाही मुनाफा बाजार की उम्मीदों से कम रहने के कारण शेयर पर दबाव आया.
एक्सिस बैंक के शेयरों में 5.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. कंपनी के नतीजे भी बाजार के अनुमान पर खरे नहीं उतरे. वहीं, बजाज फाइनेंस का शेयर 5.4 फीसदी टूट गया. कंपनी के तिमाही मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद कर्ज पर मार्जिन को लेकर चिंताओं ने निवेशकों की धारणा प्रभावित की.
Swiggy के शेयर रिकॉर्ड निचले स्तर पर
शुक्रवार के कारोबार में स्विगी का शेयर 16.8 फीसदी टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. क्विक कॉमर्स कारोबार के प्रदर्शन में सुधार और फूड डिलीवरी बिजनेस के मार्जिन को लेकर चिंताओं ने शेयर पर दबाव बढ़ाया. वहीं, कोलगेट-पामोलिव इंडिया के शेयर में 4.8 फीसदी की गिरावट आई. कंपनी का तिमाही मुनाफा विश्लेषकों के अनुमान से कम रहने के बाद निवेशकों ने शेयर में बिकवाली की.
Jio IPO में निवेश से बाजार की नकदी पर दबाव
विश्लेषकों के मुताबिक, मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को मिली मजबूत मांग का असर भी शेयर बाजार की नकदी पर पड़ा. कारोबार बंद होने तक आईपीओ 13.8 गुना सब्सक्राइब हो चुका था. एसएमसी ग्लोबल और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों के अनुसार, बड़े आकार के इस इश्यू में निवेश के कारण द्वितीयक बाजार यानी पहले से सूचीबद्ध शेयरों में उपलब्ध नकदी पर दबाव पड़ने की आशंका रही.
कुल मिलाकर, महंगा कच्चा तेल, कमजोर वैश्विक संकेत, कंपनियों के उम्मीद से कमजोर नतीजे और प्राथमिक बाजार में निवेश के लिए नकदी की मांग ने पूरे सप्ताह निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया. इसका असर प्रमुख सूचकांकों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी देखने को मिला.
REI एक्सपो और द बैटरी शो इंडिया में 1,080 से अधिक प्रदर्शक और 1,400 वैश्विक ब्रांड शामिल, ऊर्जा भंडारण, घरेलू विनिर्माण और ग्रिड की क्षमता बढ़ाने पर जोर
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रितु राणा
भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस राह में बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार, बैटरी स्टोरेज और घरेलू तकनीक का विकास बड़ी चुनौतियां हैं. सीएसटीईपी इंडिया के कार्यकारी निदेशक डॉ. जय असुंडी ने बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ रिसर्च, तकनीकी विकास और ऊर्जा भंडारण पर भी ध्यान देना जरूरी है.
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में 22 से 24 अक्टूबर तक आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया (REI) एक्सपो, द बैटरी शो इंडिया (TBSI) और एनर्जी स्टोरेज समिट इंडिया में इन्हीं मुद्दों पर चर्चा हो रही है. इन कार्यक्रमों में 1,080 से अधिक प्रदर्शक, 1,400 वैश्विक ब्रांड और 54,000 से अधिक उद्योग पेशेवर हिस्सा ले रहे हैं. भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए अब बड़ी चुनौती केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि इसकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, ऊर्जा का भंडारण करना और बैटरी तकनीक के क्षेत्र में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना भी है.
ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार बड़ी चुनौती
सीएसटीईपी इंडिया के कार्यकारी निदेशक डॉ. जय असुंडी ने बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत में कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना एक बड़ी चुनौती है. पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में बदलाव हुए हैं, लेकिन मौजूदा जरूरतों के मुकाबले ये पर्याप्त नहीं हैं. जिन क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, वहां से बिजली को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार करना जरूरी है.
असुंडी के मुताबिक, मौजूदा बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने में समय लगता है. इसके लिए राइट ऑफ वे (Right of Way) की मंजूरी, पर्याप्त श्रमबल और अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है. ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है, ताकि उत्पादित बिजली को जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके.
भारत में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है. लेकिन इन स्रोतों से बिजली का उत्पादन हर समय एक समान नहीं रहता. ऐसे में मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है.
बैटरी तकनीक में रिसर्च से घटेगी आयात पर निर्भरता
असुंडी ने कहा कि बैटरी तकनीक के क्षेत्र में भारत को रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. इससे बैटरियों की लागत कम करने, उनकी क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है. इसके लिए भारतीय शोधकर्ताओं और कंपनियों को नई बैटरी तकनीकों, वैकल्पिक केमिस्ट्री और स्वदेशी समाधानों के विकास पर काम करना होगा.
भारत अभी भी बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के कच्चे माल के आयात पर निर्भर है. इस निर्भरता को कम करने और घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए नई बैटरी केमिस्ट्री पर शोध महत्वपूर्ण है. सोडियम-आयन बैटरी जैसी वैकल्पिक तकनीकों पर काम करना इस दिशा में एक संभावित रास्ता हो सकता है.
हालांकि, इन तकनीकों को बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से अपनाने के लिए पर्याप्त रिसर्च, तकनीकी विकास और निवेश की जरूरत होगी. घरेलू स्तर पर तकनीक विकसित करने से भारत को बैटरी की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है.
500 गीगावाट के लक्ष्य के लिए मजबूत ऊर्जा ढांचा जरूरी
भारत 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म आधारित स्थापित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर चुका है. अब देश का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता हासिल करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ना है.
डॉ. जय असुंडी के मुताबिक, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए घरेलू विनिर्माण, ऊर्जा भंडारण, ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान में निवेश बढ़ाना होगा. इसके साथ कुशल कार्यबल तैयार करना और उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करना भी जरूरी है.
ऊर्जा संक्रमण की सफलता केवल स्थापित क्षमता के आंकड़ों से तय नहीं होगी. इसके लिए यह भी जरूरी है कि बिजली की आपूर्ति स्थिर रहे और स्वच्छ ऊर्जा का लाभ घरों, किसानों तथा कारोबारों तक पहुंचे. मजबूत ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और तकनीकी नवाचार इस बदलाव के महत्वपूर्ण हिस्से हैं.
ऊर्जा उत्पादन के साथ स्टोरेज का विस्तार जरूरी
इनफॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रस के मुताबिक, भारत के नवीकरणीय ऊर्जा बाजार में 2030 तक 486 गीगावाट के लक्ष्य की दिशा में 15 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) का अनुमान है. वहीं, बैटरी स्टोरेज बाजार के 2031 तक 8.5 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है. इसके लिए 33 फीसदी CAGR का अनुमान जताया गया है.
मुद्रस ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रिड स्टोरेज का विस्तार भी जरूरी है. सौर और पवन ऊर्जा की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव के बीच बैटरी स्टोरेज बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद कर सकता है.
इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से बैटरी निर्माण, ऊर्जा प्रबंधन और ग्रिड से जुड़ी तकनीकों के विकास के अवसर भी बढ़ सकते हैं. हालांकि, इसके लिए उपयुक्त बुनियादी ढांचे और तकनीकी समाधानों को बड़े पैमाने पर अपनाना जरूरी होगा.
घटती लागत से ग्रीन एनर्जी की प्रतिस्पर्धा बढ़ी
मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि लागत में कमी और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण नवीकरणीय ऊर्जा पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन रही है.
उनके मुताबिक, अगले दो से पांच वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा को बड़े पैमाने पर अपनाने के अवसर बढ़ सकते हैं. इससे भारत में निवेश, तकनीक और उद्योग के विस्तार की नई संभावनाएं बनेंगी.
हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा का व्यापक इस्तेमाल बढ़ाने के लिए उत्पादन लागत के साथ बिजली के वितरण, भंडारण और ग्रिड की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा. यही वजह है कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का दायरा अब सौर और पवन परियोजनाओं से आगे बढ़कर बैटरी स्टोरेज और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच रहा है.
बैटरी और महत्वपूर्ण खनिजों पर वैश्विक साझेदारी
एक्सपो में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी प्रमुख मुद्दा है. स्कॉटलैंड के प्रथम मंत्री जॉन स्विनी ने भारत और स्कॉटलैंड के बीच स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि स्कॉटलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता को भारत की विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़कर ऊर्जा संक्रमण को गति दी जा सकती है.
भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने महत्वपूर्ण खनिजों, इंजीनियरिंग और बैटरी विनिर्माण में सहयोग की जरूरत बताई. लिथियम जैसे खनिज बैटरी उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना ऊर्जा भंडारण क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है.
ऑस्ट्रेलिया ने 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन और 2030 तक अपने बिजली ग्रिड में 82 फीसदी नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रखा है. ऐसे में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तकनीक और संसाधनों के आदान-प्रदान की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं.
भारत-जर्मनी सहयोग से तकनीक और विनिर्माण को बढ़ावा
फ्राउनहोफर ऑफिस इंडिया की निदेशक आनंदी अय्यर ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने का विषय नहीं है, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी है.
उनके मुताबिक, 2025 में वैश्विक स्तर पर करीब 800 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जबकि बैटरी स्टोरेज क्षमता 108 गीगावाट तक पहुंच गई. यह पिछले वर्ष के मुकाबले 40 फीसदी की वृद्धि है.
अय्यर ने भारत और जर्मनी के बीच बैटरी अनुसंधान, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत इंजीनियरिंग और औद्योगिक ऑटोमेशन में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया. भारत के बड़े बाजार और विनिर्माण क्षमता को जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता से जोड़ने पर स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
घरेलू विनिर्माण और तकनीकी नवाचार पर जोर
एनर्जी एंड कंस्ट्रक्शन पोर्टफोलियो इंडिया, inD के सीनियर ग्रुप डायरेक्टर रजनीश खट्टर ने भी ऊर्जा क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, बैटरी स्टोरेज, ग्रिड की विश्वसनीयता और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया.
ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक्सपो में प्रदर्शित तकनीकों और उद्योग जगत की चर्चाओं से स्पष्ट है कि भारत के ऊर्जा संक्रमण का अगला चरण कई मोर्चों पर एक साथ काम करने पर निर्भर करेगा. उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार, बैटरी तकनीक में अनुसंधान, कच्चे माल की आपूर्ति और घरेलू विनिर्माण को गति देना जरूरी होगा.
आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा व्यवस्था कितनी मजबूत और भरोसेमंद बनती है, यह केवल नई नवीकरणीय क्षमता जोड़ने पर नहीं, बल्कि ऊर्जा भंडारण, तकनीकी नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की गति पर भी निर्भर करेगा.
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में सबसे ज्यादा मांग क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की ओर से आई. इस श्रेणी में आरक्षित शेयरों के मुकाबले 16.06 गुना बोलियां मिलीं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ (IPO) को एक करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले हैं, जो भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की भागीदारी का नया रिकॉर्ड है. 30,213 करोड़ रुपये का यह इश्यू सब्सक्रिप्शन के आखिरी दिन निवेशकों की मजबूत मांग के बीच देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की ओर बढ़ रहा है. इससे पहले सबसे ज्यादा आवेदन मिलने का रिकॉर्ड वारी एनर्जीज के नाम था.
7.49 गुना सब्सक्राइब हुआ जियो का IPO
रिलायंस ग्रुप की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों की सभी श्रेणियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, 23 अक्टूबर को दोपहर 12:36 बजे तक आईपीओ के तहत पेश किए गए 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले 147.98 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिल चुकी थीं. इस तरह इश्यू कुल 7.49 गुना सब्सक्राइब हो गया था.
एक करोड़ से अधिक आवेदन मिलने के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस मामले में पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. इससे पहले वारी एनर्जीज के आईपीओ को करीब 97 लाख आवेदन मिले थे. वहीं, बजाज हाउसिंग फाइनेंस और BCCL के आईपीओ को भी लगभग 90 लाख आवेदन मिले थे.
संस्थागत निवेशकों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में सबसे ज्यादा मांग क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की ओर से आई. इस श्रेणी में आरक्षित शेयरों के मुकाबले 16.06 गुना बोलियां मिलीं. गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की श्रेणी में इश्यू 10.14 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की श्रेणी में 2.10 गुना बोलियां मिलीं.
30,213 करोड़ रुपये का है इश्यू
आईपीओ के आकार के लिहाज से भी जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू नया रिकॉर्ड बनाने की ओर है. इसका कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये है, जो हुंडई मोटर इंडिया के 27,859 करोड़ रुपये के आईपीओ से बड़ा है. हालांकि, अंतिम आंकड़े और रिकॉर्ड की पुष्टि इश्यू बंद होने के बाद उपलब्ध आंकड़ों से होगी.
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के तहत कंपनी 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी कर रही है. इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयर बेचने का प्रस्ताव शामिल नहीं है. आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है.
ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये आंका गया है. खुदरा निवेशकों को कम से कम 12 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा. 1,119 रुपये प्रति शेयर की कीमत के हिसाब से न्यूनतम निवेश 13,428 रुपये होगा. निवेशक इसके बाद 12 शेयरों के गुणकों में बोली लगा सकते हैं.
कब होगा शेयरों का अलॉटमेंट और लिस्टिंग?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है. वहीं, कंपनी के शेयरों की बीएसई (BSE) और एनएसई (NSE) पर लिस्टिंग 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है. लिस्टिंग के बाद शेयर बाजार में कंपनी के प्रदर्शन पर निवेशकों की नजर रहेगी.
ग्रे मार्केट में 22% से ज्यादा प्रीमियम
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में भी उत्साह दिखाई दिया. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 22 अक्टूबर को कंपनी के अनलिस्टेड शेयर करीब 1,368 रुपये पर कारोबार कर रहे थे. यह आईपीओ के ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये से लगभग 249 रुपये अधिक है. इस आधार पर ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब 22.25% था.
हालांकि, ग्रे मार्केट में शेयरों का कारोबार अनौपचारिक और अनियमित होता है. वहां मिलने वाला प्रीमियम लिस्टिंग के दिन शेयर की कीमत या निवेश पर मुनाफे की गारंटी नहीं देता. इसलिए निवेशकों को केवल GMP के आधार पर निवेश का फैसला लेने से बचना चाहिए.
अक्टूबर में HSBC कंपोजिट PMI बढ़कर 56.7 पर पहुंचा, निर्यात ऑर्डर में जून 2025 के बाद सबसे तेज उछाल; मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार थोड़ी धीमी, रोजगार वृद्धि भी सुस्त
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में अक्टूबर में तेजी आई है. नए ऑर्डर, सेवा क्षेत्र में मजबूती और निर्यात मांग में बढ़ोतरी के दम पर HSBC फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स सितंबर के 55.9 से बढ़कर अक्टूबर में 56.7 पर पहुंच गया. यह चार महीने में निजी क्षेत्र की गतिविधियों के विस्तार की सबसे तेज रफ्तार है. हालांकि, रोजगार सृजन की गति धीमी पड़ने और मैन्युफैक्चरिंग PMI में मामूली गिरावट से संकेत मिलता है कि कारोबारी गतिविधियों की मजबूती के बावजूद श्रम बाजार में सुधार की रफ्तार सीमित बनी हुई है.
सर्विस सेक्टर में तेजी, मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार घटी
अक्टूबर में सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स सितंबर के 55.2 से बढ़कर 56.2 पर पहुंच गया. इसके उलट, मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.1 से घटकर 54.9 रह गया. फैक्ट्रियों में नए ऑर्डर और रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी होने से विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों पर असर पड़ा.
PMI में 50 से ऊपर का आंकड़ा गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का स्तर संकुचन दर्शाता है. कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स लगातार 63 महीनों से 50 के ऊपर बना हुआ है, जो निजी क्षेत्र में लगातार विस्तार का संकेत है.
विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन सूचकांक सितंबर के 57.5 से बढ़कर अक्टूबर में 57.6 हो गया. सर्वे के मुताबिक, बाजार की बेहतर परिस्थितियों और नए ऑर्डर की बढ़ती संख्या ने उत्पादन को सहारा दिया.
छह महीने में सबसे तेज बढ़े निर्यात ऑर्डर
निजी क्षेत्र के कुल नए कारोबार में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मांग की अहम भूमिका रही. सर्वे में जून 2025 के बाद नए निर्यात ऑर्डर में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई. कंपनियों ने अमेरिका, ब्रिटेन, पश्चिम एशिया और बांग्लादेश से मजबूत मांग मिलने की जानकारी दी.
HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार जारी रहा और उत्पादन तथा नए ऑर्डर की वृद्धि पिछले महीने के आसपास बनी रही. हालांकि, नए ऑर्डर की स्थिर रफ्तार के पीछे निर्यात ऑर्डर में आई तेज बढ़ोतरी एक महत्वपूर्ण कारक रही.
रोजगार सृजन की रफ्तार धीमी
कारोबारी गतिविधियों में तेजी के बावजूद रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर उतनी मजबूत नहीं रही. अक्टूबर में रोजगार में मामूली वृद्धि हुई, जो इस साल अब तक की सबसे धीमी रफ्तार रही. सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे लगातार नौ महीने से जारी रोजगार सृजन का सिलसिला थम गया. वहीं, विनिर्माण कंपनियों ने सीमित संख्या में नए कर्मचारियों की भर्ती की.
सर्वे के मुताबिक, चार महीनों में तीसरी बार कंपनियों के लंबित काम का बैकलॉग घटा. इसकी गिरावट पिछले साढ़े छह वर्षों में सबसे तेज रही, हालांकि कमी का स्तर मामूली था.
लागत और बिक्री कीमतों में महंगाई नरम
कंपनियों के लिए लागत के मोर्चे पर कुछ राहत के संकेत मिले हैं. इनपुट लागत में महंगाई लगातार सातवें महीने धीमी हुई और करीब एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई. विनिर्माण और सेवा, दोनों क्षेत्रों में लागत बढ़ने की रफ्तार कम रही. जिन कंपनियों ने लागत में बढ़ोतरी की जानकारी दी, उन्होंने स्टील और परिवहन महंगा होने का जिक्र किया.
बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी पड़ी और महंगाई मार्च 2025 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई. फैक्ट्री-गेट कीमतों में वृद्धि की गति भी करीब चार वर्षों के निचले स्तर पर रही.
प्रांजुल भंडारी ने कहा कि निर्माताओं ने खरीदारी और तैयार माल का स्टॉक बढ़ाकर प्रतिक्रिया दी. इस बीच, इनपुट लागत में महंगाई कम हुई और बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार भी नरम पड़ी.
फ्लैश PMI क्या बताता है?
HSBC फ्लैश PMI विनिर्माण, सेवा और कंपोजिट PMI के अंतिम आंकड़ों का शुरुआती संकेत देता है. यह मासिक सर्वेक्षण में मिली करीब 90 फीसदी प्रतिक्रियाओं पर आधारित होता है. अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि सेवा क्षेत्र और निर्यात मांग ने निजी क्षेत्र की गतिविधियों को सहारा दिया, लेकिन रोजगार वृद्धि की सुस्ती और विनिर्माण क्षेत्र की धीमी रफ्तार पर नजर रखना जरूरी होगा.
सैविल्स की रिपोर्ट में खुलासा, भारत में तेजी से बढ़ रही संपत्ति निर्माण की भूमिका; निवेश, उत्तराधिकार योजना और रियल एस्टेट पर परिवारों का जोर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख संपत्ति केंद्रों में अपनी जगह बनाई है. सैविल्स रिसर्च (Savills Research) की Savills Spotlight on Wealth Trends 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, नेक्स्ट-जेनरेशन वेल्थ हब्स इंडेक्स में मुंबई को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 17वां और वैश्विक स्तर पर 91वां स्थान मिला है. रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब दुनिया भर में संपत्ति सृजन के तौर-तरीकों में बदलाव हो रहा है और बड़ी मात्रा में संपत्ति अगली पीढ़ी को हस्तांतरित की जा रही है.
100 से अधिक संपत्ति केंद्रों का आकलन
रिपोर्ट के दूसरे संस्करण में दुनिया भर के 100 से अधिक संपत्ति केंद्रों का मूल्यांकन किया गया है. इसका उद्देश्य उन कारकों की पहचान करना है, जो भविष्य में संपन्न लोगों और नई पीढ़ी के धनवान परिवारों के लिए इन केंद्रों को आकर्षक बना सकते हैं.
इंडेक्स में कारोबार, प्रशासन और कनेक्टिविटी, संपत्ति के प्रमुख समूह और स्थानीय वातावरण, वेल्थ मैनेजमेंट एवं टैक्स व्यवस्था तथा जीवनशैली जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है. इन मानकों के आधार पर यह समझने की कोशिश की गई है कि आने वाले वर्षों में कौन से शहर और आर्थिक केंद्र संपत्ति प्रबंधन तथा निवेश के लिहाज से अपनी अहमियत बनाए रख सकते हैं.
निवेश और उत्तराधिकार योजना में फैमिली ऑफिस की बढ़ती भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फैमिली ऑफिस निवेश की संरचना तैयार करने, उत्तराधिकार योजना बनाने और परोपकारी गतिविधियों को व्यवस्थित करने में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. फैमिली ऑफिस ऐसी संस्थाएं या व्यवस्थाएं होती हैं, जो संपन्न परिवारों की संपत्ति, निवेश और वित्तीय मामलों का प्रबंधन करती हैं.
रियल एस्टेट अब भी संपत्ति को सुरक्षित रखने और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने का एक प्रमुख माध्यम बना हुआ है. कई परिवार भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए संपत्तियां खरीद रहे हैं, जिससे लंबी अवधि के निवेश और संपत्ति संरक्षण में रियल एस्टेट की भूमिका बनी हुई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और वियतनाम में उद्यमिता, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, वित्तीय सेवाओं और रियल एस्टेट विकास के जरिए संपत्ति का सृजन जारी है. ये क्षेत्र न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि पूंजी के प्रबंधन और संरक्षण के तरीकों को भी प्रभावित कर रहे हैं.
मुंबई के वेल्थ हब बनने के पीछे क्या हैं कारण?
सैविल्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (रिसर्च) अरविंद नंदन के मुताबिक, इंडेक्स में मुंबई की स्थिति भारत में घरेलू स्तर पर तेजी से हो रहे संपत्ति सृजन और निवेश व उत्तराधिकार योजना में फैमिली ऑफिस की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है. उन्होंने परोपकारी गतिविधियों में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया.
नंदन ने कहा कि संपत्ति को सुरक्षित रखने और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने में रियल एस्टेट की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है. इसके साथ ही लग्जरी आवास, वेलनेस पर केंद्रित सेवाओं और सुविधाजनक जीवनशैली को ध्यान में रखकर तैयार किए गए आवासीय विकल्पों की मांग भी बढ़ रही है.
यह रुझान दिखाता है कि संपन्न खरीदारों की प्राथमिकताएं केवल संपत्ति खरीदने तक सीमित नहीं हैं. वे अब ऐसी सुविधाओं और आवासीय विकल्पों को भी महत्व दे रहे हैं, जो उनकी जीवनशैली और दीर्घकालिक जरूरतों के अनुरूप हों.
भारत के साथ इन अर्थव्यवस्थाओं पर भी नजर
सैविल्स ने भारत के अलावा वियतनाम, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में चिह्नित किया है. इन देशों में संपत्ति सृजन, बुनियादी ढांचे में निवेश और जीवनशैली से जुड़ी सुविधाओं में सुधार के कारण वैश्विक स्तर पर दिलचस्पी बढ़ रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संपत्ति का परिदृश्य अब नए धन के सृजन और परिवारों की ओर से पूंजी के दीर्घकालिक प्रबंधन के बीच बढ़ते तालमेल से प्रभावित हो रहा है. इसका असर उन कारकों पर भी पड़ रहा है, जिनके आधार पर अगली पीढ़ी के संपन्न लोग निवेश, निवास और संपत्ति प्रबंधन के लिए किसी शहर का चुनाव करते हैं.
अगली पीढ़ी को संपत्ति हस्तांतरण पर जोर
रिपोर्ट में 'ग्रेट वेल्थ ट्रांसफर' यानी बड़ी मात्रा में संपत्ति के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरण पर विशेष ध्यान दिया गया है. स्थापित और उभरते संपत्ति केंद्रों में बदलते रुझानों के बीच यह प्रक्रिया वैश्विक वेल्थ मैनेजमेंट के लिए महत्वपूर्ण होती जा रही है.
इंडेक्स का उद्देश्य यह आकलन करना है कि कारोबार के लिए अनुकूल माहौल, स्थानीय सुविधाएं, संपत्ति प्रबंधन, कर व्यवस्था और जीवनशैली जैसे कारक किसी शहर की दीर्घकालिक आकर्षकता को किस तरह प्रभावित करते हैं. मुंबई की रैंकिंग इस व्यापक बदलाव के बीच भारत में संपत्ति सृजन और निवेश के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है.
कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे और रेवेन्यू की मजबूत वृद्धि के साथ खर्च और कर्ज में बढ़ोतरी भी अहम पहलू हैं. निवेशकों के लिए कंपनी की आय में आगे होने वाली वृद्धि, खर्च पर नियंत्रण और कर्ज के स्तर में बदलाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस (Adani Energy Solutions) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 148 फीसदी बढ़कर 1,323 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले साल की समान अवधि में कंपनी ने 534 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. इस दौरान कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू भी 53 फीसदी बढ़कर 10,076 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, मुनाफे और आय में बढ़ोतरी के साथ कंपनी के कुल खर्च और बकाया कर्ज में भी इजाफा हुआ है.
पिछली तिमाही के मुकाबले भी बढ़ा मुनाफा
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का प्रदर्शन पिछली तिमाही के मुकाबले भी बेहतर रहा. जून 2026 तिमाही में कंपनी का मुनाफा 1,149 करोड़ रुपये था, जो सितंबर तिमाही में करीब 15 फीसदी बढ़कर 1,323 करोड़ रुपये हो गया. इसी अवधि में ऑपरेशन से रेवेन्यू करीब 4 फीसदी बढ़कर 9,711 करोड़ रुपये से 10,076 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
सितंबर तिमाही में कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर करीब 51 फीसदी बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये रही. पिछले साल की समान तिमाही में यह 6,767 करोड़ रुपये थी. वहीं, कंपनी का टैक्स से पहले का मुनाफा (PBT) 746 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,767 करोड़ रुपये हो गया.
कंपनी का कुल खर्च 54% बढ़ा
कंपनी की आय और मुनाफे में बढ़ोतरी के साथ खर्च भी तेजी से बढ़ा है. सितंबर तिमाही में अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का कुल खर्च सालाना आधार पर 54 फीसदी बढ़कर 8,756 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल की समान अवधि में यह 5,688 करोड़ रुपये था.
बिजली खरीदने पर कंपनी का खर्च दोगुने से ज्यादा बढ़कर 3,244 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 1,601 करोड़ रुपये था. वहीं, निर्माण से जुड़े खर्च में भी बढ़ोतरी हुई. यह 1,625 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,256 करोड़ रुपये हो गया.
इसके अलावा, कंपनी का ब्याज खर्च 35 फीसदी बढ़कर 1,180 करोड़ रुपये रहा. पिछले साल की सितंबर तिमाही में यह 872 करोड़ रुपये था. डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन का खर्च भी 509 करोड़ रुपये से बढ़कर 601 करोड़ रुपये हो गया.
पहली छमाही में मुनाफा 136% बढ़ा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान भी कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की. इस अवधि में अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 136 फीसदी बढ़कर 2,472 करोड़ रुपये हो गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी का मुनाफा 1,046 करोड़ रुपये था.
पहली छमाही में कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 47 फीसदी बढ़कर 19,787 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह 13,415 करोड़ रुपये था. इस दौरान कुल आय 13,793 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,092 करोड़ रुपये हो गई. वहीं, टैक्स से पहले का मुनाफा 1,404 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,208 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
छह महीने में 2,622 करोड़ रुपये बढ़ा कर्ज
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के बकाया कर्ज में भी बढ़ोतरी हुई है. सितंबर 2026 के अंत तक कंपनी पर कुल बकाया कर्ज 51,520 करोड़ रुपये था. मार्च 2026 के अंत में यह 48,898 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था. इस तरह छह महीने में कंपनी के कुल बकाया कर्ज में 2,622 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई.
कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे और रेवेन्यू की मजबूत वृद्धि के साथ खर्च और कर्ज में बढ़ोतरी भी अहम पहलू हैं. निवेशकों के लिए कंपनी की आय में आगे होने वाली वृद्धि, खर्च पर नियंत्रण और कर्ज के स्तर में बदलाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ने के बीच केंद्रीय बैंक ने एडमिन एक्सेस, पासवर्ड, API और रियल-टाइम निगरानी को लेकर सख्ती बरतने को कहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और पेमेंट कंपनियों को साइबर सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. अब पासवर्ड लीक होने या सिस्टम में अनधिकृत पहुंच का पता चलने पर फॉरेंसिक जांच पूरी होने तक संबंधित टेक्नोलॉजी सिस्टम को असुरक्षित मानना होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ने के बीच केंद्रीय बैंक ने एडमिन एक्सेस, पासवर्ड, API और रियल-टाइम निगरानी को लेकर सख्ती बरतने को कहा है.
AI एजेंट्स से बढ़ा साइबर हमलों का खतरा
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऑटोनॉमस टूल्स का इस्तेमाल कर सिस्टम की कमजोरियां तलाशने और उनका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. ये टूल्स अपने स्तर पर कमांड चला सकते हैं और सुरक्षा खामियों की पहचान करने से लेकर संवेदनशील डेटा तक पहुंच बनाने में मदद कर सकते हैं.
भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने 15 अक्टूबर को जारी चेतावनी में साइबर हमलों में AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर आगाह किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, AI टूल्स की मदद से साइबर अपराधियों के लिए हमले की तैयारी और उसे अंजाम देने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है. पहले जिन गतिविधियों में कई दिन लगते थे, उन्हें अब कुछ ही घंटों में पूरा करने का खतरा बढ़ गया है.
करीब 20 वित्तीय संस्थान बने निशाना
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में करीब 20 वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं. इन हमलों में कथित तौर पर पार्टनर बैंकों के चोरी किए गए पासवर्ड और पेमेंट से जुड़े एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) की कमजोरियों का फायदा उठाया गया.
चिंता की बात यह है कि कुछ कंपनियों को अपने सिस्टम में हुई घुसपैठ की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी. रिपोर्ट में बताया गया है कि AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों ने भी ऐसे मामलों की जानकारी दी, जिनमें AI सिस्टम ने निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर लाइव बिजनेस रिकॉर्ड, निजी जानकारियों और गोपनीय डेटा तक पहुंच बनाई.
RBI ने 19 अक्टूबर को जारी की एडवाइजरी
साइबर हमलों के बढ़ते खतरे के बीच RBI ने 19 अक्टूबर को बैंकों, पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स और अपने नियामकीय दायरे में आने वाली अन्य वित्तीय संस्थाओं के लिए एडवाइजरी जारी की. इसमें कहा गया है कि किसी सिस्टम के क्रेडेंशियल्स लीक होने या अनधिकृत पहुंच की पुष्टि होने पर उसे तब तक कॉम्प्रोमाइज्ड यानी असुरक्षित माना जाए, जब तक फॉरेंसिक जांच से उसकी सुरक्षा को लेकर संतोषजनक पुष्टि न हो जाए.
केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संस्थानों को अपने आंतरिक सिस्टम के साथ थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स की साइबर सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा करने को कहा है. इसका उद्देश्य संभावित कमजोरियों की पहचान कर डेटा चोरी और अनधिकृत वित्तीय लेनदेन के जोखिम को कम करना है.
बैंकों को लागू करने होंगे ये सुरक्षा उपाय
RBI की एडवाइजरी के तहत वित्तीय संस्थानों को कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी.
1. एडमिन इंटरफेस की इंटरनेट तक पहुंच होगी सीमित: बैंकों और वित्तीय कंपनियों को अपने मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेटिव इंटरफेस को सार्वजनिक इंटरनेट की सीधी पहुंच से हटाना होगा, ताकि बाहरी हमलावर इनका आसानी से फायदा न उठा सकें.
2. एडमिन एक्सेस पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन: एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सेस के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) लागू करना होगा. क्लाउड और बैकएंड सिस्टम तक पहुंच केवल अधिकृत कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी के अनुरूप दी जानी चाहिए.
3. लीक हुए पासवर्ड की पहचान और बदलाव: संस्थानों को सोर्स कोड, कोड रिपॉजिटरी, कॉन्फिगरेशन फाइल्स, क्लाइंट ऐप्स और क्लाउड स्टोरेज की जांच करनी होगी. जहां भी लीक हुए पासवर्ड या अन्य क्रेडेंशियल्स मिलें, उन्हें तुरंत बदलने या हटाने की व्यवस्था करनी होगी.
4. पुराने और गैर-जरूरी API बंद करने होंगे: सभी API की सूची तैयार कर उनकी समीक्षा करनी होगी. पुराने, अप्रयुक्त और केवल टेस्टिंग के लिए बनाए गए API या अकाउंट्स को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इनके जरिए सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश का खतरा कम किया जा सके.
API की रियल-टाइम निगरानी पर जोर
RBI ने वित्तीय संस्थानों को API की निगरानी मजबूत करने को भी कहा है. इसके लिए ऐसे सिस्टम विकसित करने होंगे, जो असामान्य ऑटोमेटेड रिक्वेस्ट, बड़े पैमाने पर डेटा निकाले जाने और संदिग्ध अकाउंट रजिस्ट्रेशन जैसी गतिविधियों का समय रहते पता लगा सकें.
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर संभावित नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की जानकारी निर्धारित समयसीमा के भीतर RBI के केंद्रीय कार्यालय और संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को देनी होगी. संस्थानों को CERT-In की सलाह का पालन करने और अपने साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है.
बैंकों और ग्राहकों के लिए क्यों अहम हैं ये निर्देश?
डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट और API आधारित वित्तीय सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. किसी बैंक या पेमेंट कंपनी के सिस्टम में सेंध लगने से ग्राहकों की निजी जानकारी, वित्तीय डेटा और लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं.
RBI के इन निर्देशों का उद्देश्य वित्तीय संस्थानों को संभावित साइबर हमलों के प्रति अधिक सतर्क बनाना, सुरक्षा खामियों को समय रहते दूर करना और डेटा ब्रीच की स्थिति में जवाबदेही सुनिश्चित करना है. AI आधारित हमलों के बढ़ते खतरे के बीच बैंकों के लिए केवल सुरक्षा सॉफ्टवेयर लगाना ही नहीं, बल्कि एक्सेस कंट्रोल, पासवर्ड प्रबंधन और संदिग्ध गतिविधियों की लगातार निगरानी करना भी जरूरी होगा.
गुरुवार, 22 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 फीसदी गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 123.70 अंक यानी 0.54 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,687.65 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को तीन दिन से जारी गिरावट के बाद रिकवरी की उम्मीद है. गिफ्ट निफ्टी करीब 160 अंकों की तेजी के साथ 22,850 के पार पहुंच गया है, जो घरेलू बाजार में बढ़त के साथ कारोबार शुरू होने का संकेत दे रहा है. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों की भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. आज बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय हो सकती है. ऐसे में निवेशकों की नजर इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, JSW स्टील समेत कई शेयरों पर रहेगी.
गुरुवार को सेंसेक्स 460 अंक टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे बंद
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई. भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण निवेशकों ने बिकवाली की. कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 फीसदी गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 123.70 अंक यानी 0.54 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,687.65 पर बंद हुआ.
कारोबार के दौरान निफ्टी 22,600 के स्तर से भी नीचे फिसल गया था. हालांकि, दिन के निचले स्तर 22,554.85 से कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा.
गिफ्ट निफ्टी में तेजी, बाजार को मिल सकता है सहारा
शुक्रवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 160 अंकों की तेजी के साथ 22,850 के ऊपर कारोबार करता नजर आया. इससे घरेलू बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ होने की उम्मीद बढ़ी है. हालांकि, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इस तेजी को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ रहा है. ऐसे में निवेशक सतर्क रुख अपना सकते हैं और कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में बिकवाली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर कंपनियों के बढ़ते खर्च को लेकर चिंता और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के कारण गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में गिरावट दर्ज की गई. नैस्डैक कंपोजिट 2.6 फीसदी और S&P 500 करीब 1.2 फीसदी गिरकर बंद हुआ. इंटेल, AMD, माइक्रॉन और एनवीडिया जैसे प्रमुख टेक शेयरों में भी दबाव देखने को मिला.
शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही. शुरुआती कारोबार में चीन का शंघाई कंपोजिट 1.47 फीसदी, जापान का निक्केई करीब 1.7 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे थे. वैश्विक बाजारों में यह कमजोरी भारतीय शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है.
ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर के पार, निवेशकों की बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. सुबह के कारोबार में यह 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी उछला. महंगे कच्चे तेल का असर भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. इससे बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित होने की आशंका है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शुक्रवार को इंफोसिस, श्रीराम फाइनेंस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और JSW स्टील के शेयरों में तिमाही नतीजों के चलते हलचल देखने को मिल सकती है. इसके अलावा कोफोर्ज, इंडसइंड बैंक और जिंदल स्टील भी फोकस में रहेंगे. वहीं, कोलगेट-पामोलिव के उम्मीद से कमजोर नतीजों, स्विगी के तिमाही घाटे और HPCL के घाटे से मुनाफे में लौटने का असर संबंधित शेयरों पर पड़ सकता है. सैजिलिटी के मुनाफे में 13 फीसदी की बढ़त भी निवेशकों के लिए अहम रहेगी. बाजार की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के IPO पर भी होगी, जिसमें बोली लगाने का शुक्रवार को आखिरी दिन है.
Jio Platforms IPO को दूसरे दिन 5.57 गुना सब्सक्रिप्शन
जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ को गुरुवार को बोली के दूसरे दिन तक कुल 5.57 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) की श्रेणी में इश्यू 13.29 गुना सब्सक्राइब हुआ. आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी के बीच शुक्रवार को भी इस पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है.
FII की बिकवाली, DII ने खरीदे शेयर
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 22 अक्टूबर को 3,458 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की. इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 2,891 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
पहले ईमेल में हरि शंकर तिबरेवाल ने कहा कि उन्हें ईडी की फाइलिंग पर रिपोर्टिंग से कोई आपत्ति नहीं है, फिर उन्होंने लेख हटाने की मांग की. अप्रैल 2024 में पहली बार समन जारी होने के बाद से वह ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं. BW के पास उनसे पूछने के लिए कुछ सवाल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
ईडी के दो समन पर पेश नहीं हुए, BW को दी समयसीमा
हरि शंकर तिबरेवाल अप्रैल 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पहली बार समन जारी किए जाने के बाद से उसके सामने पेश नहीं हुए हैं. एजेंसी ने महादेव बेटिंग ऐप मामले में मनी लॉन्ड्रिंग अभियोजन में उन्हें आरोपी नंबर 24 बताया है. ईडी ने तिबरेवाल को "सिंडिकेट का सरगना श्री हरि शंकर तिबरेवाल (HST), स्काईएक्सचेंज का मालिक" कहा है. ईडी का कहना है कि HST का स्काईएक्सचेंज और महादेव ऐप साझेदारी में चलाए जाते थे और ये "एक ही आपराधिक उद्यम का हिस्सा" थे.
48 घंटे के भीतर उन्होंने BW Businessworld को एक समयसीमा दी, मांगों की सूची भेजी और ईडी की चार्जशीट तथा अन्य कानूनी दस्तावेजों पर मीडिया की वैध रिपोर्टिंग को लेकर दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की धमकी दी.
इसका निशाना BW की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट "हरि, शंकर, महादेव: स्काईएक्सचेंज के पीछे का रहस्य" है, जिसमें उन दस्तावेजों के आधार पर बताया गया था कि ईडी ने उनके बारे में क्या कहा है, जिन्हें एजेंसी ने अदालत में दाखिल किया है.
समयसीमाएं
तिबरेवाल का पहला ईमेल लेख प्रकाशित होने की दोपहर को आया. इसमें BW को पांच अंश हटाने या दोबारा लिखने, पेज के सर्च प्रीव्यू को ठीक करने, सुधार नोट प्रकाशित करने और उठाए गए कदमों की "लिखित पुष्टि" करने के लिए 48 घंटे दिए गए. उन्होंने लिखा कि ये मांगें "दुनिया भर में लेख के हर संस्करण" पर लागू होती हैं.
पूरा लेख ईडी की चार्जशीट पर आधारित है और BW इसे नहीं हटाएगा. BW ने तिबरेवाल का पक्ष बिना किसी संपादन के पूरी तरह प्रकाशित किया है. इसके बाद BW ने ईडी के दस्तावेजों में शामिल मामलों पर उनसे विस्तृत सवाल भी पूछे.
19 अक्टूबर को आए उनके दूसरे ईमेल में मांगें और सख्त हो गईं. उन्होंने BW से लेख को पूरी तरह हटाने की मांग की, जिसमें उसका सर्च प्रीव्यू, सोशल मीडिया प्रीव्यू और "हर कॉपी तथा सिंडिकेटेड संस्करण" शामिल था. उन्होंने इसकी लिखित पुष्टि भी मांगी. उन्होंने एक बयान तैयार किया, जिसके बारे में कहा कि भविष्य में किसी भी रिपोर्ट में BW को इसे "बिना किसी संपादन के पूरी तरह प्रकाशित करना होगा". उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भविष्य के किसी लेख में यह बयान शामिल नहीं किया गया या यह कहा गया कि उन्होंने जवाब नहीं दिया, तो उसे "बिना किसी और सूचना के अदालत के सामने रखा जाएगा". उन्होंने लिखा कि वह "BW, उसके संपादकों और लेखक के खिलाफ अपने सभी दीवानी और आपराधिक अधिकार सुरक्षित रखते हैं".
रिपोर्टिंग से नहीं, सिर्फ लेख से आपत्ति
तिबरेवाल के दोनों ईमेल एक-दूसरे के विपरीत हैं.
17 अक्टूबर को उन्होंने लिखा था, "मैं आपसे प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी फाइलिंग में जो कहा है, उसकी रिपोर्टिंग रोकने के लिए नहीं कह रहा हूं." दो दिन बाद उन्होंने लेख हटाने की मांग की.
दोनों में से किसी भी ईमेल में BW की उस रिपोर्ट में किसी तथ्यात्मक गलती की पहचान नहीं की गई है, जिसमें ईडी के दस्तावेजों में कही गई बातों का विवरण दिया गया है. वह इस बात से इनकार नहीं करते कि ईडी ने उन्हें आरोपी नंबर 24 बताया है, उन्हें "सिंडिकेट का सरगना" और "स्काईएक्सचेंज का मालिक" कहा है या स्काईएक्सचेंज को महादेव ऑनलाइन बुक के साथ "एक ही आपराधिक उद्यम का हिस्सा" बताया है.
वह इस बात से भी इनकार नहीं करते कि एजेंसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 22 अप्रैल और 25 अप्रैल 2024 को जारी समन पर पेश नहीं हुए. वह ईडी की ओर से बताए गए आंकड़ों, विदेशों में मौजूद धन और गवाहों के बयानों पर भी सवाल नहीं उठाते. उनकी आपत्ति लेख की प्रस्तुति को लेकर है, न कि ईडी के दस्तावेजों में मौजूद सामग्री को लेकर.
जवाब देने को तैयार, लेकिन शर्तों के साथ
BW के सवाल इन विषयों पर थे:
- स्काईएक्सचेंज के कथित स्वामित्व को लेकर.
- ईडी की ओर से उनसे जुड़ी बताई गई विदेशी फंडिंग, जिसमें टैनो इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज फंड भी शामिल है, जिसे मॉरीशस के वित्तीय नियामक ने सेबी को उनका लाभकारी स्वामित्व वाला फंड बताया था.
- ईडी के उस दावे के बारे में कि जिन कंपनियों में उनके फंड ने निवेश किया, उनके प्रमोटरों ने 30-40 फीसदी रकम नकद "कैशबैक" के रूप में वापस की.
- जेल में बंद ईबिक्स के चेयरमैन विकास गर्ग के साथ लंदन में उनकी कथित मुलाकातों को लेकर.
- ईडी के दो समन पर पेश नहीं होने के बारे में.
तिबरेवाल ने कहा कि वह "सवालों से डरते नहीं हैं" और "अगर आप सौ सवाल पूछेंगे, तो भी हर सवाल का जवाब देंगे". लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी: BW को पहले लेख हटाना होगा और उन्हें "नई प्रश्नावली" भेजनी होगी. तब तक उन्होंने लिखा कि वह "BW को लेख सही ठहराने में मदद करने वाले सवालों" का जवाब नहीं देंगे.
उन्होंने आपत्ति जताई है कि BW ने लेख प्रकाशित करने से पहले उनसे सवाल नहीं पूछे. ईडी के रिकॉर्ड बताते हैं कि अप्रैल 2024 के बाद से वह भारत में एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं. ईडी का कहना है कि वह दुबई में रहते हैं. BW की जानकारी के मुताबिक, वह फिलहाल लंदन में हैं. BW से उनका पहला संपर्क लेख प्रकाशित होने के बाद विदेश से ईमेल के जरिए हुआ.
अदालत की आड़
तिबरेवाल के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी ओर से दिल्ली की अदालतों में मानहानि के दो मुकदमे लंबित हैं. इन मुकदमों में अंतरिम आदेशों के जरिए कुछ मीडिया संस्थानों को उनके बारे में विशिष्ट शब्दों का इस्तेमाल करने से रोका गया है. अदालतों ने जांचकर्ताओं और अदालतों की ओर से कही गई बातों की रिपोर्टिंग पर रोक नहीं लगाई है और तिबरेवाल ने खुद अपने ईमेल में इस बात को स्वीकार किया है.
दिल्ली के एक प्रमुख समाचार संगठन के वकील ने पहले BW से कहा था, "सफेदपोश अपराधों के आरोपी मीडिया को चुप कराने के लिए कानून का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उन्हें आड़ मिलती है और उस मीडिया को डराया जाता है, जो उनकी रक्षा करने वाली व्यवस्था पर दबाव डाल सकता है."
तिबरेवाल का बयान
BW ने मूल रिपोर्ट में उनका बयान पूरा प्रकाशित किया है.
एक बार फिर, उनके अनुरोध पर BW उनका बयान पूरा प्रकाशित कर रहा है:
"मैं अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार करता हूं. मुझे किसी भी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया है और किसी अदालत ने मुझे फरार या भगोड़ा घोषित नहीं किया है. दिल्ली की अदालतों ने उन दावों के प्रकाशन पर रोक लगाई है कि मैं फरार या भगोड़ा हूं (सिविल मुकदमा संख्या 4242/2024, दिनांक 14.11.2024 का आदेश) और यह भी कहा है कि मुझे 'हवाला कारोबारी' कहना अपने आप में मानहानिकारक है (सिविल मुकदमा DJ ADJ 1212/2025, दिनांक 17.08.2026 का आदेश). BW ने लेख प्रकाशित करने से पहले मुझसे एक भी सवाल नहीं पूछा. मैंने BW से कहा है कि लेख हटाने और नई प्रश्नावली भेजने के बाद मैं उसके सभी सवालों के जवाब दूंगा."
BW का पक्ष
BW अपनी रिपोर्ट पर कायम है, जो ईडी की ओर से अदालत में दाखिल दस्तावेजों पर आधारित है, और इसे नहीं हटाएगा. अपने ईमेल में तिबरेवाल ने कहा है कि BW ने पत्रकारिता के बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया. BW का कहना है कि उसे ईडी की चार्जशीट में आरोपी नंबर 24 से पत्रकारिता का पाठ सीखने की जरूरत नहीं है.
तिबरेवाल से BW के सवाल अब भी खुले हैं. जब भी वह जवाब देंगे, उन्हें पूरा प्रकाशित किया जाएगा.
तिबरेवाल के खिलाफ ईडी के किसी भी आरोप की सुनवाई के दौरान जांच नहीं हुई है, क्योंकि उन्होंने ईडी के समन का पालन नहीं किया है और वह विदेश में रह रहे हैं, भारत की अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर.
सवाल
1\) ईडी ने आपको पीएमएलए की धारा 50 के तहत 22 अप्रैल 2024 और 25 अप्रैल 2024 को समन जारी किया था. उसके रिकॉर्ड के मुताबिक, आप दोनों ही बार पेश नहीं हुए. क्यों?
आप कहते हैं कि आप निर्दोष हैं और आपको दोषी नहीं ठहराया गया है. आप भारत लौटकर ईडी के सामने अपना बयान देने और सीधे उसके आरोपों का जवाब देने क्यों नहीं आए? आप ईडी के समन से क्यों बच रहे हैं?
2\) आप अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए दिल्ली की भारतीय अदालतों में वादी के रूप में मुकदमे कर रहे हैं, लेकिन रायपुर में भारतीय जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए. आप इस अंतर को कैसे समझाते हैं?
3\) आप फिलहाल कहां रहते हैं और क्या भारत लौटने का इरादा रखते हैं? अगर हां, तो कब? क्या अप्रैल 2024 के बाद से आपको ईडी, पुलिस या किसी अदालत की ओर से कोई और समन, नोटिस या वारंट मिला है? आपने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
4\) ईडी का कहना है कि आप स्काईएक्सचेंज के मालिक थे और इसे महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटरों के साथ "साझेदारी में सह-स्वामित्व और सह-प्रचार" के तहत चलाया जाता था. क्या आप स्काईएक्सचेंज में किसी भी स्वामित्व, हित या भूमिका से इनकार करते हैं?
5\) प्रशांत बागरी ने ईडी को बताया कि वह 2017 से आपके कर्मचारी हैं. क्या यह सही है? वह आपके लिए क्या काम करते हैं?
6\) क्या आप सौरभ चंद्राकर या रवि उप्पल को जानते हैं? क्या आपने उनके साथ कोई कारोबारी लेन-देन किया है?
7\) मॉरीशस के वित्तीय सेवा आयोग ने सेबी को बताया कि टैनो इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज फंड के लाभकारी मालिक आप हैं. क्या यह सही है? अगर नहीं, तो इसका मालिक कौन है?
8\) ईडी का कहना है कि समन जारी होते ही आपने टैनो का लाभकारी स्वामित्व "तुरंत बदल दिया". क्या आपने ऐसा किया और क्यों?
9\) क्या आपके पास AG Dynamic Funds, Forbes EMF, Coeus Global, Ebisu Global, Oyster Bay, Plutus, Zenith Multi Trading DMCC या Ecotek General Trading LLC का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्वामित्व या नियंत्रण है?
10\) एक गवाह ने ईडी को बताया कि इकोटेक का दर्ज मालिक आपका "बेनामीदार" है. आप इस पर क्या कहेंगे?
11\) ईडी का कहना है कि जेनिथ मल्टी ट्रेडिंग DMCC का पंजीकृत ईमेल पता आपका है. क्या यह सही है?
12\) इन फंड्स ने भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में जिस धन का निवेश किया, वह कहां से आया?
13\) ईडी का कहना है कि आपके संस्थानों से निवेश पाने वाली कंपनियों ने 30-40 फीसदी रकम नकद वापस की. क्या आपको कभी किसी ऐसी कंपनी के प्रमोटरों से सीधे या किसी अन्य व्यक्ति के जरिए नकद मिला है, जिसमें आपके संस्थानों ने निवेश किया हो?
14\) क्या आपको सलासर टेक्नो इंजीनियरिंग या टाइगर लॉजिस्टिक्स के प्रमोटरों से नकद मिला था?
15\) गगन गुप्ता के साथ आपका क्या संबंध है? ईडी का कहना है कि वह आपके नकद का प्रबंधन करते थे.
16\) क्या आप 2024 में लंदन में विकास गर्ग और रॉबिन रैना से मिले थे? दो गवाहों ने एक तस्वीर देखकर आपकी पहचान "मुख्य निवेशक" के रूप में की थी. क्या आप मुख्य निवेशक थे?
17\) क्या आपसे जुड़ी संस्थाओं ने एराया लाइफस्पेसेज, विकास लाइफकेयर या श्री गर्ग की अन्य कंपनियों में निवेश किया था? किन शर्तों पर?
18\) श्री गर्ग को "हरि भाई" कहते हुए दर्ज किया गया है. क्या वह आप हैं?
19\) ईडी ने उन प्रतिभूतियों में ₹580.78 करोड़ की राशि फ्रीज की है, जिनका लाभकारी मालिक वह आपको बताता है. क्या आपने इस फ्रीज को चुनौती दी है? अगर ये होल्डिंग्स आपकी हैं, तो आपने इन्हें कैसे हासिल किया?
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.
19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)