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CAT ने कसी कमर! GST के नए-नए नियमों के खिलाफ इस दिन से 'हल्ला-बोल'

GST को सरल बनाने के लिए कैट करेगा राष्ट्रीय आंदोलन. 26 जुलाई को भोपाल से शुरू होगा राष्ट्रीय आंदोलन.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: पिछले 5 वर्षों से जिस प्रकार से GST कर प्रणाली में GST काउंसिल ने बिना व्यापारियों से परामर्श किए GST के मूल कानून एवं नियमों में लगातार बदलाव किया है, उससे जहां GST कानून का स्वरूप ही विकृत हुआ है. वहीं दूसरी ओर कर प्रणाली सरल होने के बजाय बेहद जटिल हो गई है जिसके कारण देश भर के व्यापारी वर्ग में बेहद असंतोष, रोष एवं आक्रोश है. इस स्तिथि से परेशान होकर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज ( कैट) ने GST काउंसिल के मनमाने रवैए के खिलाफ एक देशव्यापी आंदोलन छेड़े जाने की घोषणा की है. फेडरेशन की मांग है कि GST कर प्रणाली की नए सिरे से समीक्षा कर कानून एवं नियमों को सरल एवं तार्किक बनाया जाए.

50 हजार से ज्यादा व्यापारी संगठन भाग लेंगे
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि इस देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत 26 जुलाई को भोपाल से होगी तथा इस राष्ट्रीय आंदोलन में देश के 50 हजार से ज्यादा व्यापारी संगठन भाग लेंगे. देश के प्रत्येक राज्य में व्यापारियों द्वारा अपने राज्य में सघन आंदोलन होगा और सभी राज्यों में बड़ी रैलियाँ होंगी. सितम्बर में दिल्ली में एक बड़ी राष्ट्रीय रैली होगी. उन्होंने यह भी बताया कि इस रैली में ट्रांसपोर्ट, किसान, स्वयं उद्यमी, महिला उद्यमी, छोटे एवं मध्यम निर्माता आदि के राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय संगठनों को भी शामिल किया जाएगा और एक बड़ा मोर्चा इस संघर्ष को देश भर में पूरी ताकत से लड़ेगा.

सब्र का बांध अब टूट चुका है
श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने आज नई दिल्ली में यह घोषणा करते हुए कहा कि GST को लेकर व्यापारियों के सब्र का बांध अब टूट चुका है. GST कानून एवं नियमों में पिछले 5 वर्षों में 1100 से अधिक मनमाने संशोधन GST काउंसिल की मनमानियों का साक्षात उदाहरण है. सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों ने मिल कर बिना सोचे विचारे और व्यापारियों से कोई सलाह किए बिना जिस प्रकार से GST के मूल स्वरूप को विकृत किया है, उससे साफ पता लगता है कि कर प्रणाली को सरल बनाने तथा कर दायरे को विकसित करने में काउंसिल की कोई रूचि नहीं है. कैट ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आम आदमी के जीवन को सरल बनाने तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के घोषित उद्देश्यों के पूर्ण खिलाफ है.

आम आदमी पर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा
श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा कि देश की अधिकतम आबादी द्वारा रोजमर्रा की चीजों जैसे पहले टेक्सटाइल, फिर फुटवियर की कर दर में वृद्धि और अब बिना ब्रांड वाले खाद्यान एवं अन्य उत्पादों को जीएसटी कर दायरे में लाना GST काउंसिल की सामंतवादी सोच का परिचायक है. एक तरफ आम आदमी पर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों पर लगातार कर पालना का बोझ बढ़ जाएगा.

सरकार एवं व्यापारियों के अपने-अपने अनुभव
श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल बे बताया कि कर दरों में विसंगतियों एवं राज्यों के मनमाने व्यवहार से कर प्रणाली दूषित हो गई है जिसको सुधारना बेहद आवश्यक है, ताकि व्यापारी आसानी से कर पालना कर सकें और इससे सरकारों को अधिक राजस्व मिल सके तथा कर वंचना को रोका जा सके. इसके लिए ST के कानून एवं नियमों की नए सिरे से पूर्ण समीक्षा की जाए. विगत 5 वर्षों में GST कर प्रणाली को लेकर सरकार एवं व्यापारियों के अपने-अपने अनुभव हैं, जिनके आधार पर कर प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन कर इसे एक स्थायी एवं श्रेष्ठ कर प्रणाली बनाया जाए. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि GST कर प्रणाली सबसे बेहतर है और इस वजह से इस कर प्रणाली की विकृतियों को दूर किया जाना जरूरी है.

VIDEO: महंगी हो जाएंगी ये चीजें, ज्यादा खर्च करने होंगे पैसे


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