✕

होम / बिजनेस / मुश्किलों के भंवर में फंसी Byju's को लगा बड़ा झटका, महज 7 महीने में ही सीईओ ने छोड़ा साथ!

मुश्किलों के भंवर में फंसी Byju's को लगा बड़ा झटका, महज 7 महीने में ही सीईओ ने छोड़ा साथ!

बायजू इंडिया के सीईओ अर्जुन मोहन ने पदभार संभालने के 7 महीने बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आर्थिक संकट से गुजर रही एडटेक कंपनी बायजू (Byju's) और एक बड़ा झटका लगा है. बायजू इंडिया के सीईओ अर्जुन मोहन (Arjun Mohan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अब कंपनी के फाउंडर बायजू रवींद्रन डेली ऑपरेशन संभालेंगे. अर्जुन मोहन को पदभार संभाले केवल 7 महीने ही हुए थे. बता दें कि पिछले काफी समय से बायजू को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कंपनी के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं है.

निभा सकते हैं ये भूमिका
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बायजू की तरफ से बताया गया है कि बायजू इंडिया के सीईओ अर्जुन मोहन ने पदभार संभालने के करीब 7 महीने बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. लिहाजा कंपनी फाउंडर बायजू रवींद्रन डेली ऑपरेशनल जिम्मेदारियों को फिर से संभालेंगे. रवींद्रन लगभग 4 साल बाद एक बार फिर से इस भूमिका में वापसी कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि अर्जुन मोहन अब बायजू के लिए एक एक्सटर्नल एडवाइजर की भूमिका निभा सकते हैं. अर्जुन मोहन ने पिछले साल Mrinal Mohit से सीईओ की जिम्मेदारी ली थी. 

कॉस्ट कटिंग कर रही कंपनी 
बायजू आर्थिक संकट का सामना कर रही है. एक तरफ जहां कंपनी कर्मचारियों को सैलरी नहीं दे पा रही है. वहीं, उसे छंटनी जैसे कदम भी उठाने पड़ रहे हैं. हाल ही में खबर आई थी कि बायजू की पैरेंट कंपनी थिंक एंड लर्न फाइनेंशियल छंटनी कर रही है. उसने अपने कर्मचारियों को फोन कॉल के जरिए नौकरी से निकालना शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि छंटनी की जद में आए कर्मचारियों को ना तो नोटिस दिया गया है और ना ही परफॉरमेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) में डाला गया है. HR की ओर से फोन कॉल करके बिना किसी कारण के नौकरी से निकाला जा रहा है. जिन कर्मचारियों को फोन पर फायर किया गया है, उनके नंबर बाद में HR द्वारा ब्लॉक कर दिए गए हैं. करीब 100 से 500 कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा सकते हैं.

ये भी पढ़ें - टेंशन में हैं Gautam Adani, उनकी इस टेंशन से आपका टेंशन में आना भी है लाजमी; जानें कैसे

बायजू से नाराज हैं निवेशक  
इसके अलावा, बायजू ने कुछ समय पहले ही अपने सभी कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा था, क्योंकि कंपनी ने आर्थिक तंगी के चलते देशभर में अपने ऑफिस खाली कर दिए हैं. केवल बेंगलुरु स्थित हेडक्वॉर्टर ही खुल रहा है. बायजू में 15 हजार के आसपास कर्मचारी हैं और सभी सैलरी को लेकर पिछले कुछ वक्त से परेशानियों का सामना कर रहे हैं. बायजू रवींद्रन रूठे निवेशकों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली है. नाराज निवेशकों का कहना है कि कंपनी मैनेजमेंट के काम करने के तरीके, जानकारियों, वित्तीय पारदर्शिता और गवर्नेंस कंट्रोल्स की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. मुख्य तौर पर Peak XV Partners, General Atlantic, Chan-Zuckerberg Initiative और प्रोसुस बायजू की कार्यप्रणाली से नाराज हैं. 

ऐसे आसमान से जमीं पर पहुंची कंपनी 
बायजू आज जिस स्थिति में है, उसके कई कारण हैं. 2011 में अस्तित्व में आई कंपनी को बायजू रवींद्रन ने अपनी मेहनत से सफलता की ऊंचाई पर पहुंचाया. यह एडटेक सेक्टर में देश की नंबर 1 कंपनी बन गई. कोरोना महामारी के दौरान बायजू ने खूब तरक्की की. जून 2020 में Byju’s दुनिया में सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाला एडटेक स्टार्टअप बनी. कंपनी की वैल्यूएशन उस समय 85 हजार करोड़ रुपए के आसपास पहुंच चुकी थी. दरअसल, लॉकडाउन के चलते जब स्‍कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर सब बंद हो गए, तो ऑनलाइन एजुकेशन में जबरदस्त तेजी आई. इससे उत्साहित बायजू ने विस्तार की योजनाओं को परवाना चढ़ाना शुरू कर दिया. इसके लिए कंपनी ने 1.2 बिलियन डॉलर का कर्ज तक ले लिया. हालांकि, जब हालात सामान्य हुए और स्कूल-कॉलेज खुले तो ऑनलाइन एजुकेशन का क्रेज कम होने लगा और बायजू की कमाई का ग्राफ भी नीचे आने लगा. स्टूडेंट्स की घटती संख्या से कंपनी की इनकम तो कम हुई, लेकिन उसके खर्चे बरकरार रही. ऐसे में उस पर कर्ज का बोझ बढ़ता चला गया. आज हालात ये हैं कि बायजू के पास कर्मचारियों की सैलरी देने के भी पैसे नहीं हैं. कंपनी के प्रमुख निवेशक इस हाल के लिए रवींद्रन को दोषी मानते हैं और उनकी कंपनी से विदाई चाहते हैं.  


टैग्स
सम्बंधित खबरें

पीएम गतिशक्ति से ₹20.23 लाख करोड़ की परियोजनाओं को रफ्तार की उम्मीद, विशेषज्ञों ने बताया विकास और निवेश पर क्या होगा असर

400 से अधिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का आकलन, विशेषज्ञों के मुताबिक बेहतर कनेक्टिविटी से रियल एस्टेट, निर्माण उपकरण और निजी निवेश को मिल सकते हैं नए अवसर

4 hours ago

Havas Q3: भारत में कारोबार का प्रदर्शन सकारात्मक, एशिया-प्रशांत और अफ्रीका में नेट रेवेन्यू ग्रोथ 6.7% घटी

तीसरी तिमाही में Havas का नेट रेवेन्यू 703 मिलियन यूरो रहा, पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.2% की बढ़ोतरी

5 hours ago

जामनगर क्यों जा रहे हैं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो?

अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अपने सबसे बड़े ग्राहक से संबंध मजबूत करने के लिए दिल्ली को दरकिनार कर रहे हैं.

5 hours ago

Formial Labs ने जुटाए 2.88 करोड़ रुपये, Zeropearl VC ने किया निवेश का नेतृत्व

पर्सनलाइज्ड स्किनकेयर स्टार्टअप फंडिंग का इस्तेमाल क्लिनिकल टीम के विस्तार, डायग्नोसिस तकनीक को मजबूत करने और स्किन व हेयर केयर उत्पादों की रेंज बढ़ाने में करेगा.

8 hours ago

AAAI ने गठित की मीडिया काउंसिल, ओम्निकॉम मीडिया इंडिया के कार्तिक शर्मा करेंगे अध्यक्षता

ऑडियंस मेजरमेंट, मीडिया ट्रेडिंग में बदलाव और कनेक्टेड टीवी जैसे मुद्दों पर होगा फोकस, विज्ञापन एजेंसियों और इंडस्ट्री के अन्य हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने की पहल

8 hours ago


बड़ी खबरें

Formial Labs ने जुटाए 2.88 करोड़ रुपये, Zeropearl VC ने किया निवेश का नेतृत्व

पर्सनलाइज्ड स्किनकेयर स्टार्टअप फंडिंग का इस्तेमाल क्लिनिकल टीम के विस्तार, डायग्नोसिस तकनीक को मजबूत करने और स्किन व हेयर केयर उत्पादों की रेंज बढ़ाने में करेगा.

8 hours ago

पीएम गतिशक्ति से ₹20.23 लाख करोड़ की परियोजनाओं को रफ्तार की उम्मीद, विशेषज्ञों ने बताया विकास और निवेश पर क्या होगा असर

400 से अधिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का आकलन, विशेषज्ञों के मुताबिक बेहतर कनेक्टिविटी से रियल एस्टेट, निर्माण उपकरण और निजी निवेश को मिल सकते हैं नए अवसर

4 hours ago

Havas Q3: भारत में कारोबार का प्रदर्शन सकारात्मक, एशिया-प्रशांत और अफ्रीका में नेट रेवेन्यू ग्रोथ 6.7% घटी

तीसरी तिमाही में Havas का नेट रेवेन्यू 703 मिलियन यूरो रहा, पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.2% की बढ़ोतरी

5 hours ago

जामनगर क्यों जा रहे हैं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो?

अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अपने सबसे बड़े ग्राहक से संबंध मजबूत करने के लिए दिल्ली को दरकिनार कर रहे हैं.

5 hours ago

शहान सूद ने साढ़े तीन साल बाद JAFCO Asia को छोड़ा, बिजनेस एडवाइजरी पर करेंगे ध्यान केंद्रित

शहान ने कहा कि मुनाफे में चल रहे स्टार्ट-अप्स के लिए वेंचर कैपिटल जुटाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि उन्हें निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपने मौजूदा परिचालन ढांचे में बदलाव करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

9 hours ago