पिछले दो दशक में हमारे देश में हुए कई आंतकी हमलों के बाद अब हमारी तैयारियों में बड़ा इजाफा हुआ है. हमने कई तरह के इंतजामों में इजाफा किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
BW Security 40under40 अवॉर्ड कार्यक्रम के पहले सेशन में सिक्योरिटी फील्ड के कई जानकारों ने भागीदारी की. किसी ने जहां एक ओर अहमदाबाद में हुए ब्लास्ट के बाद आए बदलावों को लेकर बताया तो किसी ने मेट्रो शहरों में सुरक्षा को लेकर बढ़ाए गए इंतजामों पर अपनी बात कही. इस सेशन में Eros Group के Group Chief Security Officer, ऋषि चौधरी, Accenture Solutions के CPP, VP - Global Assistance & Pro-tection (GAP), IndiaRegional Protective Services, पुण्यश्लोका पांडा, G4S Secure Solutions India की Manager-Risk & Integrated Security Solutions, आंचल सक्सेना, Fortis Healthcare Ltd-Shalimar Bagh, New Delhi के CSO, जितेन्द्र सिंह ने इस पैनल में भाग लिया. इस सेशन को Nokia के Head Personnel Security (Global), Col Shakti Rana ने चेयर किया.
बम ब्लास्ट के बाद कई तरह के बदलाव आए हैं
Fortis Healthcare Ltd-Shalimar Bagh, New Delhi के CSO, जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अहमदाबाद में 2008 में हुए बम ब्लास्ट के बारे में याद दिलाना चाहता हूं. दरअसल हुआ ये था कि अहमदाबाद बम ब्लास्ट के दौरान जब घायल हुए लोग हॉस्पिटल की ओर जा रहे थे तो उस दौरान वहां एक बम पहले से प्लांट किया हुआ था और बम ब्लास्ट हो गया. अब आप उस स्थिति की कल्पना कर सकते हैं जिसमें अफरातफरी किस तरह से फैली होगी. जब कभी भी किसी भी अस्पताल की इमरजेंसी में एक साथ ज्यादा मरीजों को साथ लाया जाता है तो उससे तनाव और दबाव दोनों बढ़ जाते हैं.
मै उसी स्थिति को लेकर अपनी बात कहना चाहता हूं. 2008 को आज 16 साल हो चुके हैं और उस दौरान कई तरह के चेंज आ चुके हैं. NABL तब से लेकर अब तक कई तरह के बदलाव लेकर आ चुकी है. ये बदलाव इसी तरह डिजास्टर को लेकर भी आए हैं. जब कभी भी इस तरह के घटनाक्रम होते हैं तो अब ये सभी के लिए जरूरी हो गया है कि अस्पताल के सीनियर प्रबंधन से लेकर सभी डिपार्टमेंट के प्रमुख के लिए अस्पताल पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है. ऐसे समय में होने वाले क्राउड को मैनेज करने के लिए भी कई तरह के नियम बनाए गए हैं. इनमें पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम को सेटअप करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं.
केवल सीसीटीवी लगाने से अपराध नहीं रुकेगा
Accenture Solutions के CPP, VP - Global Assistance & Pro-tection (GAP), IndiaRegional Protective Services, पुण्यश्लोका पांडा ने कहा कि भीड़ हमेशा से ही एक सॉफ्ट टारगेट होता है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो किसी मेट्रो सिटी में है या किसी दूसरे शहर में है. सबसे अहम सवाल ये है कि हम क्राउड मैनेजमेंट को लेकर किस तरह से काम करते हैं. ये एक तथ्यात्मक बात है कि जिन इलाकों में ज्यादा आबादी होती है वहां कम अपराध देखने को मिलते हैं. आप देख सकते हैं साउथ कोरिया और टोक्यो इसके उदाहरण हैं.
इसका कारण ये है कि वहां की सुरक्षा एजेंसिया अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हैं. दूसरी अहम बात ये भी है कि वहां सीसीटीवी का नेटवर्क जबरदस्त है. जब मैं सीसीटीवी लगाने की बात करता हूं तो वो सिर्फ सीसीटीवी लगाना नहीं है बल्कि सीसीटीवी ऐसा जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस हो. जो कि हमें अराजक तत्वों को पहचानने में मदद करे. अकेला सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम सही से काम नहीं कर सकता है. एक कहावत है कि अपराध का निर्णय कर चुके अपराधी को रोका नहीं जा सकता है, या तो वो डिले हो सकता है या उसे नहीं रोका जा सकता है. हम अपने शहर को सुरक्षा के साधनों से लैस कर सकते हैं लेकिन हम ये तय नहीं कह सकते हैं कि अपराध नहीं होगा.
रिस्क मैनेजमेंट सिक्योरिटी का अहम पहलू है
G4S Secure Solutions India की Manager-Risk & Integrated Security Solutions, आंचल सक्सेना ने कहा कि जब कभी भी हम फिजिकल सिक्योरिटी की बात करते तो है लेकिन हम रिस्क मैनेजमेंट को भूल जाते हैं. हम टियर 1,2, 3 शहरों के रिस्क के बारे में जानते तो हैं लेकिन हम उसे कैसे मैनेज करें ये नहीं समझ पाते हैं. अगर हम टियर 1 सिटी की बात करें तो दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहर इसमें आते हैं और उसके रिस्क के बारे में तो समझ पाते हैं, लेकिन जब हम टियर 2 सिटी के बारे में बात करते हैं तो जानते हैं तो वहां बहुत तेजी से रिटेल सेक्टर में ग्रोथ हो रही है. इन शहरों में इंदौर, पुणे, भोपाल, और इस तरह के कई और शहर शामिल हैं. मैं देखती हूं कि पिछले कुछ सालों में इन शहरों की सुरक्षा में भी कई सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं.
लेकिन समस्या यहां आती है कि हम अपने सिस्टम को इंटीग्रेट कैसे करें, और उसका फायदा कैसे उठाएं. टियर वन शहरों में हम देखते हैं कि वहां साइबर सुरक्षा और टेरेरिज्म जैसी समस्याएं सामने आती हैं. जबकि टियर 2 सिटी में चोरी, मनी लॉड्रिंग जैसे मामले सामने आते हैं. जहां तक बात करें एक कॉरपोरेट के तौर पर तो वो भले ही कोई एजेंसी हो या सर्विस प्रोवाइडर हो, हम अभी रिस्क को असेस नहीं करते हैं. कई बार हम उस रिस्क को नजरंदाज कर देते हैं जो अभी नहीं है.कई बार किसी बड़े रिस्क के बारे में भी सोच नहीं पाते हैं. लेकिन हमें रिस्क मैनेजमेंट को लेकर सही से आंकलन करना चाहिए.
सुरक्षा को लेकर रणनीति बनाना बेहद जरूरी
Eros Group के Group Chief Security Officer, ऋषि चौधरी ने कहा कि किसी भी शहर में फैक्ट्री, रेजीडेंशियल सोसाइटी, कमर्शियल एक्टिविटी से लेकर कई तरह की चीजें देखने को मिलती हैं. अगर किसी शहर के ये सभी स्टेकहोल्डर सुरक्षित हैं तो हम ये कह सकते हैं कि वो शहर सुरक्षित है. पिछले कुछ समय में आतंकवाद से लेकर प्राकृतिक आपदा के रिस्क में इजाफा हुआ है, शहरों में जो हम देख सकते हैं जो घटनाएं पिछले कुछ समय में हुई है इनमें चेन्नई में आई बाढ़, मुंबई अटैक और कोरोना बीमारी जैसी परेशानी शामिल हैं. कोविड ने सभी तरह की इंडस्ट्री को लेकर समस्या में इजाफा किया है.
अब वो कंपनी के बिजनेस प्लान हो, उनकी निरंतरता हो, या उनके विकास को लेकर दूसरे प्लान हो. फिजिकल थ्रेड एक बड़े पैमान पर फाइनेंशियल नुकसान पहुंचाता है. आज ये सभी संगठनों के लिए फिजिकल थ्रेड को लेकर रणनीति बनाने से लेकर उसका समाधान तलाशना सभी के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. हम बतौर चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर, सिक्योरिटी डॉरेक्टर, सिक्योरिटी प्रोफेशनल होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने मैनेजमेंट के साथ काम करें और सुरक्षा को लेकर और पुख्ता प्लान बनाएं जिससे संपत्ति और इंसानी जान की रक्षा की जा सके.
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महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियामक की कार्रवाई के बाद रक्षा मंत्रालय के कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) ने ओल्ड मोंक रम के तीन वेरिएंट के ऑर्डर निलंबित कर दिए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ओल्ड मोंक रम बनाने वाली कंपनी मोहन मीकिन्स को एक और झटका लगा है. महाराष्ट्र में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की कार्रवाई के बाद अब रक्षा मंत्रालय के कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) ने भी कंपनी के तीन उत्पादों के ऑर्डर निलंबित कर दिए हैं. इन उत्पादों में ओल्ड मोंक गोल्ड रिजर्व रम, ओल्ड मोंक द लीजेंड रम और ओल्ड मोंक XXX मैच्योर्ड रम शामिल हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएसडी ने 11 अगस्त को अपने क्षेत्रीय प्रबंधकों और डिपो को लिखे पत्र में इन तीनों उत्पादों के ऑर्डर निलंबित करने का निर्देश दिया था. सीएसडी रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों और उनके परिवारों को शराब सहित विभिन्न घरेलू उत्पाद उपलब्ध कराता है. ऐसे में इस फैसले से देशभर में फैले उसके नेटवर्क के जरिए ओल्ड मोंक की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
FSSAI ने लेबलिंग और उत्पाद संरचना पर उठाए सवाल
FSSAI ने करीब दो महीने पहले महाराष्ट्र के खोपोली स्थित मोहन मीकिन्स के प्लांट का निरीक्षण किया था. इस दौरान नियामक ने ओल्ड मोंक रम की उत्पाद संरचना और लेबलिंग पर आपत्तियां जताई थीं. इसके बाद महाराष्ट्र में इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई थी.
नियामक ने रम के लेबल पर इस्तेमाल किए गए ‘7 इयर्स ओल्ड ब्लेंड्ड’ और ‘वेरी ओल्ड वेटेड’ जैसे दावों पर सवाल उठाए थे. इसके अलावा, उत्पाद में मिलाए गए फ्लेवर की स्पष्ट जानकारी नहीं दिए जाने को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी.
तीन उत्पादों की जगह दूसरे ब्रांड शामिल
सीएसडी ने ओल्ड मोंक के तीन वेरिएंट के ऑर्डर निलंबित करने के साथ ही उनकी जगह तीन अन्य उत्पादों को शामिल किया है. इनमें मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रम, एंटिक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की शामिल हैं. मोहन मीकिन्स के लिए सीएसडी एक प्रमुख ग्राहक माना जाता है. ऐसे में उसके तीन उत्पादों के ऑर्डर निलंबित होने से कंपनी की कैंटीन नेटवर्क के जरिए होने वाली बिक्री पर असर पड़ने की आशंका है.
कंपनी ने एनसीआर से विस्तार की शुरुआत की है और दिल्ली-मुंबई समेत टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी संभावनाएं तलाश रही है. विस्तार के लिए नए स्टोर खोलने के साथ अधिग्रहण के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फ्रांस की रिटेल कंपनी कैरेफोर (Carrefour) अगले पांच साल में भारतीय बाजार में अपने स्टोर की संख्या बढ़ाकर 50 करने की योजना बना रही है. कंपनी ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पहला स्टोर खोलने के बाद 15 अक्टूबर को गाजियाबाद में अपना दूसरा स्टोर शुरू किया. अब कंपनी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ दिल्ली, मुंबई और दूसरे शहरों में विस्तार की संभावनाएं तलाश रही है.
दुबई स्थित अपैरल ग्रुप के साथ फ्रेंचाइजी साझेदारी के जरिए भारतीय बाजार में उतरी कैरेफोर की रणनीति फिलहाल ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क को मजबूत करने पर केंद्रित है. कंपनी नए स्टोर खोलने के अलावा मौजूदा रिटेल नेटवर्क के अधिग्रहण, क्विक कॉमर्स और भारत से फैशन एवं फुटवियर उत्पादों की खरीद के अवसरों पर भी विचार कर रही है.
अपैरल ग्रुप की मालिक कंपनी ऐपकॉर्प होल्डिंग के चेयरमैन नीलेश वेद ने बीडब्ल्यू रिटेल वर्ल्ड से बातचीत में बताया कि कंपनी अगले पांच साल में 50 स्टोर खोलने का लक्ष्य लेकर चल रही है. उन्होंने कहा कि भारत में विस्तार के लिए कंपनी ऐसे बाजारों को प्राथमिकता देगी, जहां पर्याप्त संख्या में स्टोर खोलकर परिचालन को प्रभावी बनाया जा सके.
ग्लोबल ब्रांड के साथ भारतीय बाजार में विस्तार
कैरेफोर एक अंतरराष्ट्रीय रिटेल ब्रांड है, जिसका वैश्विक स्तर पर व्यापक स्टोर नेटवर्क है. कंपनी भारतीय बाजार में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान और रिटेल क्षेत्र के अनुभव के आधार पर कारोबार बढ़ाना चाहती है.
नीलेश वेद के मुताबिक, कंपनी का लक्ष्य केवल अलग-अलग शहरों में एक-एक स्टोर खोलना नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों में स्टोर का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है, जहां कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके.
उन्होंने कहा कि विस्तार के दौरान सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा. कंपनी बहुत अधिक भौगोलिक क्षेत्रों में एक साथ विस्तार करने के बजाय आसपास के इलाकों में पर्याप्त संख्या में स्टोर खोलने की रणनीति पर काम कर रही है.
वेद ने कहा, “हमें राज्यों या आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर कारोबार की जरूरत है. हम अपने कारोबार को बहुत ज्यादा क्षेत्रों में फैलाकर संसाधनों को बिखेरना नहीं चाहते.” इस रणनीति से कंपनी को उत्पादों की आपूर्ति, स्टॉक प्रबंधन और स्टोर संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.
दिल्ली और मुंबई में जगह तलाश रही कंपनी
एनसीआर में शुरुआती मौजूदगी बनाने के बाद कैरेफोर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े बाजारों में भी प्रवेश की तैयारी कर रही है. कंपनी इन शहरों में स्टोर खोलने के लिए उपयुक्त स्थान तलाश रही है. कुछ नए मॉल में जगह को लेकर बातचीत भी चल रही है.
हालांकि, कंपनी ने दिल्ली और मुंबई में स्टोर खोलने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है. विस्तार का फैसला उपयुक्त लोकेशन मिलने और कारोबार की व्यावसायिक संभावनाओं के आधार पर किया जाएगा.
वेद ने कहा कि दिल्ली और मुंबई दोनों बाजारों में कंपनी जगह तलाश रही है. आने वाले वर्षों में खुलने वाले कुछ नए मॉल भी उसके विस्तार की योजना का हिस्सा हो सकते हैं.
कंपनी की योजना केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है. वेद के मुताबिक, भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी रिटेल कारोबार के विस्तार की अच्छी संभावनाएं हैं. कंपनी इन बाजारों में भी अवसरों का आकलन कर रही है. हालांकि, हर शहर में प्रवेश करने से पहले कंपनी स्थानीय प्रतिस्पर्धा, ग्राहकों की मांग और स्टोर नेटवर्क स्थापित करने की संभावनाओं का आकलन करेगी.
अधिग्रहण से तेजी से बढ़ सकता है स्टोर नेटवर्क
कैरेफोर भारत में विस्तार के लिए अधिग्रहण के विकल्प को भी खुला रख रही है. कंपनी का मानना है कि यदि किसी मौजूदा रिटेल नेटवर्क का अधिग्रहण करने का अवसर मिलता है, तो उसके जरिए नए बाजारों में तेजी से पहुंच बनाई जा सकती है.
वेद ने कहा कि कंपनी संभावित अधिग्रहण के अवसरों पर विचार करेगी और जरूरत पड़ने पर इसके लिए निवेश भी बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि अगर 80 स्टोर वाले नेटवर्क के अधिग्रहण का अवसर मिलता है, तो कंपनी उसे खरीदने पर विचार कर सकती है. यह एक संभावित स्थिति का उदाहरण था, किसी तय सौदे की घोषणा नहीं.
अधिग्रहण से कंपनी को पहले से स्थापित स्टोर, लोकेशन और परिचालन नेटवर्क का लाभ मिल सकता है. इससे नए बाजारों में विस्तार की प्रक्रिया तेज हो सकती है. हालांकि, कैरेफोर ने फिलहाल किसी संभावित अधिग्रहण के लिए कंपनी या रिटेल नेटवर्क का नाम नहीं बताया है.
वेद के मुताबिक, विस्तार के लिए निवेश जारी रहेगा और यदि अधिग्रहण का कोई उपयुक्त अवसर सामने आता है, तो निवेश की जरूरत भी बढ़ सकती है. कंपनी ने भारत में अपने पांच साल के विस्तार लक्ष्य के लिए कुल निवेश राशि का खुलासा नहीं किया है.
पहले ऑफलाइन स्टोर, फिर क्विक कॉमर्स
कैरेफोर की फिलहाल प्राथमिकता अपने ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क को मजबूत करना है. कंपनी आगे चलकर क्विक कॉमर्स कारोबार में भी उतरना चाहती है, लेकिन इसके लॉन्च की समयसीमा, डिलीवरी पार्टनर या परिचालन मॉडल के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.
भारतीय रिटेल बाजार में कंपनी को पहले से स्थापित संगठित रिटेल कारोबारियों से प्रतिस्पर्धा करनी होगी. इनमें डीमार्ट जैसे बड़े रिटेलर शामिल हैं, जो कीमतों और रोजमर्रा के जरूरी सामान की उपलब्धता पर ध्यान देते हैं.
ऐसे बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए कैरेफोर को उत्पादों की विविधता, कीमत, स्टोर लोकेशन और ग्राहकों के खरीदारी अनुभव पर ध्यान देना होगा.
भारतीय ग्राहक कीमतों को लेकर काफी जागरूक हैं और खरीदारी करते समय अलग-अलग विकल्पों की तुलना करते हैं. ऐसे में कंपनी के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ स्थानीय ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप कारोबार विकसित करना महत्वपूर्ण होगा.
भारत से फैशन और फुटवियर उत्पादों की खरीद पर भी नजर
कैरेफोर की भारत में रणनीति केवल घरेलू रिटेल बिक्री तक सीमित नहीं है. कंपनी भारत से फैशन और फुटवियर उत्पादों की खरीद कर उन्हें अपने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध कराने की संभावनाएं भी तलाश रही है.
इससे भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ कंपनी के संबंधों का दायरा बढ़ सकता है. हालांकि, इस योजना का आकार, उत्पादों की संभावित श्रेणियां और खरीद का लक्ष्य अभी स्पष्ट नहीं किया गया है.
भारतीय बाजार में कंपनी स्थानीय स्तर पर खरीदे गए उत्पादों के साथ अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी उपलब्ध करा रही है. गाजियाबाद स्थित स्टोर में किराने के सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुओं, ताजे फल-सब्जियों और बेकरी उत्पादों जैसी श्रेणियां शामिल हैं. कंपनी अपने निजी ब्रांड के उत्पादों की संभावनाएं भी तलाश रही है.
कैरेफोर के अंतरराष्ट्रीय साझेदारी कारोबार के कार्यकारी निदेशक पैट्रिक लासफार्ग ने कहा, “भारत में हमारे दूसरे स्टोर का खुलना इस बाजार में कैरेफोर की यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम है. ग्रेटर नोएडा में अपना पहला प्रमुख स्टोर शुरू करने के बाद गाजियाबाद में विस्तार से हमें एनसीआर में और अधिक ग्राहकों तक अपनी रिटेल सेवाएं पहुंचाने का अवसर मिला है. हम इस सफर को आगे बढ़ाने और पूरे भारत में अपनी मौजूदगी का विस्तार करने के लिए उत्सुक हैं.”
कंपनी की आगे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह पांच साल में 50 स्टोर खोलने के लक्ष्य को किस गति से पूरा करती है और भारतीय बाजार में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान को स्थानीय ग्राहकों की जरूरतों के साथ किस तरह जोड़ पाती है.
ट्रेंट ने 18 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी के जरिए भट के इस्तीफे की सूचना दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा समूह के वरिष्ठ अधिकारी हरीश भट ने बढ़ती पेशेवर और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए ट्रेंट लिमिटेड के गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है. उनका इस्तीफा 17 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो गया है.
हरीश भट ने ट्रेंट के चेयरमैन नोएल एन. टाटा को लिखे इस्तीफे के पत्र में कहा कि कई वर्षों तक कंपनी के निदेशक मंडल का हिस्सा रहना और उसकी चर्चाओं में भाग लेना उनके लिए खुशी और सम्मान की बात रही है. अपने इस्तीफे के पत्र में भट ने लिखा, “कंपनी के संचालन और रणनीतिक दिशा में योगदान देने का अवसर देने के लिए मैं आपको और निदेशक मंडल को धन्यवाद देता हूं.” ट्रेंट ने 18 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी के जरिए भट के इस्तीफे की सूचना दी.
2014 से ट्रेंट के निदेशक मंडल में थे शामिल
हरीश भट अप्रैल 2014 से ट्रेंट के निदेशक मंडल में शामिल थे. इससे पहले वह टाटा संस में ब्रांड संरक्षक के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने 1987 में टाटा प्रशासनिक सेवा में अधिकारी के रूप में टाटा समूह में अपना करियर शुरू किया था.
टाटा समूह में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर काम किया. इनमें टाटा ग्लोबल बेवरेजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, टाइटन कंपनी लिमिटेड के घड़ी और आभूषण कारोबार के मुख्य परिचालन अधिकारी तथा समूह के दूरसंचार कारोबार से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं. भट टाटा स्टारबक्स प्राइवेट लिमिटेड और इनफिनिटी रिटेल लिमिटेड के निदेशक भी हैं.
IMF ने 2028 में भारत की अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान घटाकर 2029 कर दिया है. रुपये की कमजोरी से डॉलर में जीडीपी का आकार घटने का अनुमान है, जबकि मजबूत घरेलू मांग के कारण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 फीसदी किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी देश के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में देरी कर सकती है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अक्टूबर 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार, भारत अब 2028 के बजाय 2029 में इस आंकड़े को पार कर सकता है. हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग में भारत की स्थिति मजबूत होने का अनुमान है. वर्ष 2027 में भारत जापान और ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
आईएमएफ ने भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया है. मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों के चलते वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया गया है. ऐसे में सवाल है कि जब देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत है, तो 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में देरी क्यों हो रही है?
रुपये की कमजोरी ने बिगाड़ा 5 ट्रिलियन डॉलर का गणित
किसी देश की अर्थव्यवस्था का वैश्विक आकार और रैंकिंग तय करने के लिए उसकी जीडीपी को डॉलर में भी मापा जाता है. रुपये की विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर इस गणना पर पड़ता है. रुपये की कीमत गिरने पर समान घरेलू आर्थिक उत्पादन का डॉलर में मूल्य कम हो जाता है.
आईएमएफ ने अप्रैल 2026 में अनुमान लगाया था कि भारत की अर्थव्यवस्था 2028 में 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी. अक्टूबर के नए अनुमान में इसे घटाकर 4.996 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया है. यानी भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार करने के लिए अब 2029 तक इंतजार करना पड़ सकता है.
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2026 में 4.06 ट्रिलियन डॉलर और 2027 में 4.52 ट्रिलियन डॉलर रहेगा. वर्ष 2028 में इसके 4.996 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसके बाद 2029 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 5.54 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है.
रुपये में बढ़ेगी जीडीपी, फिर भी डॉलर में घटा अनुमान
आईएमएफ के ताजा अनुमानों में रुपये के हिसाब से भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा है. वर्ष 2028 में देश की नाममात्र जीडीपी 477.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि अप्रैल में यह अनुमान 471.9 लाख करोड़ रुपये था. यानी रुपये के हिसाब से अनुमान में करीब 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
इसके बावजूद डॉलर में जीडीपी का अनुमान घट गया है. इसकी प्रमुख वजह रुपये की विनिमय दर में संभावित गिरावट है. आईएमएफ ने 2027 के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये की अनुमानित विनिमय दर 93 रुपये से बढ़ाकर 95 रुपये प्रति डॉलर कर दी है. वहीं, 2028 के लिए औसत विनिमय दर का अनुमान 93.3 रुपये से बढ़ाकर 95.5 रुपये प्रति डॉलर किया गया है.
रुपये की कीमत में गिरावट का असर इस बात से समझा जा सकता है कि समान राशि को डॉलर में बदलने पर पहले की तुलना में कम डॉलर मिलते हैं. इसी वजह से घरेलू अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने के बावजूद डॉलर में उसका मूल्य अपेक्षाकृत कम रह सकता है.
इस साल रुपये में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को रुपया 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. रुपये में गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को भी कदम उठाने पड़े हैं.
2027 में जापान और ब्रिटेन से आगे निकल सकता है भारत
5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में देरी के बावजूद वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में भारत की स्थिति मजबूत होने का अनुमान है. आईएमएफ के अनुमानों के मुताबिक, 2027 में भारत की जीडीपी 4.52 ट्रिलियन डॉलर रह सकती है. इसके साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
तुलना करें तो 2027 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 4.49 ट्रिलियन डॉलर और जापान का 4.47 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. हालांकि, इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतर कम है. ऐसे में विनिमय दरों में बदलाव से उनकी वास्तविक रैंकिंग प्रभावित हो सकती है.
आईएमएफ के अनुमान के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2030 में 6.13 ट्रिलियन डॉलर और 2031 में 6.74 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इस अनुमान के आधार पर भारत 2031 में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. फिलहाल भारत से आगे अमेरिका, चीन और जर्मनी हैं.
घरेलू मांग से मजबूत रहेगी आर्थिक वृद्धि
डॉलर में जीडीपी के अनुमान में कमी के बीच भारत के लिए राहत की बात यह है कि आईएमएफ ने आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाया है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी किया गया है. इसके अलावा, 2027 में रुपये के हिसाब से नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर 10.8 फीसदी के पुराने अनुमान से बढ़कर 11.7 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है.
ये अनुमान बताते हैं कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. हालांकि, डॉलर में अर्थव्यवस्था का आकार केवल घरेलू उत्पादन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर भी इसमें अहम भूमिका निभाती है. इसलिए भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का समय आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ रुपये की चाल पर भी निर्भर करेगा.
भारतीय विज्ञापन एजेंसियों के संगठन ने वर्ष 2026-27 के एजेंडे के तहत क्रिएटिव काउंसिल का गठन किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय विज्ञापन एजेंसियों के संगठन एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने पहली बार क्रिएटिव काउंसिल का गठन किया है. इस परिषद का नेतृत्व बीबीडीओ ग्रुप इंडिया के चेयरमैन और ग्रुप चीफ क्रिएटिव ऑफिसर जोसी पॉल करेंगे. इस पहल के जरिए संगठन भारतीय विज्ञापन उद्योग में रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और इसके पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम करेगा.
क्रिएटिव काउंसिल का उद्देश्य स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों, क्षेत्रीय प्रतिभाओं और उभरते रचनात्मक पेशेवरों सहित अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को एक मंच पर लाना है. इसके माध्यम से सहयोग, नए प्रयोग, मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों व पीढ़ियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान के अवसर तैयार किए जाएंगे.
विज्ञापन जगत से बाहर के विशेषज्ञ भी होंगे शामिल
जोसी पॉल ने इस पहल पर कहा कि क्रिएटिव काउंसिल प्रतिभाओं को निखारने, विविधता को प्रोत्साहित करने और नए विचारों के विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने का अवसर है. उन्होंने बताया कि परिषद के तहत अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों के बीच संवाद, प्रयोग, बहस, प्रदर्शन, पाठ सत्र और फिल्मों की स्क्रीनिंग जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है.
उन्होंने कहा कि विज्ञापन जगत के बाहर के लोगों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा. इनमें कलाकार, वैज्ञानिक, फिल्म निर्माता, डिजाइनर, उद्यमी और विचारक शामिल होंगे. इससे रचनात्मक समुदाय को नए दृष्टिकोण मिल सकेंगे और उद्योग में नए विचारों को बढ़ावा मिलेगा.
जोसी पॉल के काम को मिल चुके हैं 25 से अधिक कान्स लायंस पुरस्कार
जोसी पॉल के नेतृत्व में तैयार किए गए अभियानों को 25 से अधिक कान्स लायंस पुरस्कार मिल चुके हैं. इनमें ग्रां प्री और कई गोल्ड पुरस्कार शामिल हैं. एरियल के ‘शेयर द लोड’ अभियान को वार्क (WARC) ने लगातार दो बार दुनिया का सबसे प्रभावी अभियान माना था. यह अभियान लंबे समय तक ब्रांड निर्माण और विज्ञापन प्रभावशीलता के क्षेत्र में एक प्रमुख उदाहरण बना हुआ है.
एएएआई अध्यक्ष ने क्या कहा?
एएएआई के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संदीप गोयल ने कहा कि संगठन के इतिहास में पहली बार रचनात्मकता को संस्थागत ढांचे में सबसे प्रमुख स्थान दिया जा रहा है. उनके मुताबिक, जोसी पॉल के नेतृत्व में क्रिएटिव काउंसिल नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को मार्गदर्शन देने और देश की स्वतंत्र तथा क्षेत्रीय विज्ञापन एजेंसियों की विविधता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी. उन्होंने कहा कि विज्ञापन उद्योग ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां रणनीतिक नवाचार और रचनात्मक उत्कृष्टता को साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर होगा.
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने कर्मचारियों को अक्टूबर महीने का वेतन तय समय से करीब 15 दिन पहले जारी किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने कर्मचारियों को जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी आईपीओ में निवेश करने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने कर्मचारियों को अक्टूबर महीने की सैलरी निर्धारित समय से करीब 15 दिन पहले दे दी है. कंपनी का यह कदम जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से पहले आया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस समूह अपने कर्मचारियों को इस आईपीओ में निवेश करने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.
रिपोर्ट में मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया गया है कि कंपनी ने अपने समूह की विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले करीब 4.20 लाख कर्मचारियों में से अधिकांश से संपर्क किया है. कंपनी का लक्ष्य लगभग 3.2 अरब डॉलर यानी करीब 30,213 करोड़ रुपये के प्रस्तावित शेयर निर्गम में कर्मचारियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों को वेतन जल्दी जारी करने की कोई वजह नहीं बताई गई.
कर्मचारियों और उनके परिवारों के डीमैट खातों की जानकारी ली
रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस की ओर से कर्मचारियों से यह भी पता किया गया है कि उनके या उनके परिवार के सदस्यों के पास शेयरों में निवेश के लिए जरूरी डीमैट खाते हैं या नहीं. जिन कर्मचारियों के पास ऐसे खाते नहीं हैं, उन्हें खाते खुलवाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है.
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज में कुल 4,19,911 कर्मचारी कार्यरत थे. वहीं, कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, जियो में 74,822 कर्मचारी काम करते हैं.
जियो कर्मचारियों के लिए अलग श्रेणी में आवेदन का विकल्प
जियो प्लेटफॉर्म्स के पात्र कर्मचारी आईपीओ में कर्मचारियों के लिए आरक्षित श्रेणी के तहत आवेदन कर सकते हैं. रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों के कर्मचारी खुदरा निवेशक श्रेणी के तहत आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, पात्र रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए भी आईपीओ में एक अलग हिस्सा आरक्षित है.
21 अक्टूबर से खुलेगा जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक सदस्यता के लिए खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. कंपनी इस निर्गम के जरिए करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इसके लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है.
कंपनी की ओर से दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से के तहत पात्र कर्मचारियों को शेयरों पर छूट भी मिलेगी. ऐसे में आईपीओ में कर्मचारियों की भागीदारी पर बाजार की नजर रहेगी.
पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है. रूस से ईंधन निर्यात बढ़ने की संभावना के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस पर कुछ प्रमुख प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट दिए जाने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई. इस फैसले से रूस से ईंधन का निर्यात बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है.
सोमवार को 23:40 GMT तक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.43 डॉलर यानी 1.30 फीसदी गिरकर 108.43 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 19 मई के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 53 सेंट यानी 0.52 फीसदी गिरकर 100.88 डॉलर प्रति बैरल रही.
रूस पर प्रतिबंधों में छूट से बढ़ सकती है तेल की आपूर्ति
ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर ग्राहम एक्ट के तहत कुछ प्रमुख प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट दी. यह कानून उन्होंने पिछले महीने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की मांग कर रहे सांसदों के दबाव के बाद हस्ताक्षरित किया था. रूस पर यह दबाव यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के कारण बनाया जा रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप इस छूट के आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के लिए 60 दिन तक का समय ले सकते हैं.
यह फैसला ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अमेरिका को डीजल निर्यात करने को लेकर हुए समझौते के बाद आया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका के ये कदम यूक्रेन को नुकसान पहुंचाएंगे.
रूस से अतिरिक्त ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की संभावना ने तेल की कीमतों पर दबाव डाला. इससे पहले शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. मई के बाद यह पहला मौका था, जब कीमत इस स्तर पर पहुंची. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री परिवहन से जुड़े जोखिमों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं.
पश्चिम एशिया में जहाजों पर हमलों से आपूर्ति प्रभावित
रूस से अतिरिक्त तेल और ईंधन मिलने की संभावना के बावजूद पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का प्रवाह काफी घट गया है. इससे कीमतों में गिरावट सीमित रही.
एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के मुताबिक, पिछले सप्ताह खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का औसत प्रवाह सात दिन के आधार पर करीब 85 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. इससे पिछले सप्ताह यह मात्रा 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक थी.
केप्लर ने बताया कि पिछले सप्ताह वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी कम से कम 10 घटनाओं की पुष्टि हुई. ये घटनाएं क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन के सामने बढ़ते जोखिम को दर्शाती हैं.
यमन के हूती आंदोलन को लेकर भी बढ़ी चिंता
क्षेत्रीय तनाव के बीच मिस्र ने कहा कि वह यमन के ईरान समर्थित हूती आंदोलन से अपनी सुरक्षा और स्थिरता को होने वाले खतरों से निपटने के लिए सऊदी अरब को जरूरी सहयोग देने के लिए तैयार है. पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम और रूस से संभावित अतिरिक्त आपूर्ति के बीच तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका बनी हुई है.
21 अक्टूबर को खुलेगा जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ, 10.3 लाख करोड़ रुपये वैल्यूएशन का लक्ष्य
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
19 अक्टूबर से शुरू हो रहे छोटे कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजरें जियो प्लेटफॉर्म्स और पारस हेल्थकेयर के आईपीओ पर रहेंगी. दोनों कंपनियों के मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कुल 31,637.6 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ आकार के लिहाज से भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है. वहीं, दशहरा के कारण 20 अक्टूबर को शेयर बाजार बंद रहेगा.
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम सेवाओं से जुड़ी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आईपीओ के जरिए 30,187.6 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. कंपनी का यह आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. आईपीओ के लिए कंपनी का लक्ष्य करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये का वैल्यूएशन हासिल करना है.
इस इश्यू में 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे. कर्मचारियों को अंतिम ऑफर प्राइस पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट भी दी जाएगी. आईपीओ की एंकर बुक 19 अक्टूबर को खुलेगी, जिसके जरिए करीब 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.
इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,859 करोड़ रुपये का आईपीओ देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था. इसके बाद 2026 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और 2022 में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के आईपीओ आए थे.
निवेशकों के लिए कितना होगा न्यूनतम निवेश?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेशक कम से कम 12 शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे. इसके बाद 12 शेयरों के गुणक में आवेदन किया जा सकेगा. प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये के प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर एक लॉट के लिए न्यूनतम निवेश 13,428 रुपये होगा. वहीं, खुदरा निवेशक अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए 1,87,992 रुपये का निवेश कर सकेंगे.
कंपनी ने आईपीओ के तहत 50 प्रतिशत हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs), 15 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों (NIIs) और 35 प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए निर्धारित किया है. इसके अलावा, कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित किए गए हैं.
आईपीओ से मिलने वाली रकम से चुकाया जाएगा कर्ज
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये अपनी प्रमुख सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी. जून 2026 के बजाय उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी की सहायक इकाई पर कुल 29,917.1 करोड़ रुपये का कर्ज था. बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा.
कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी ने आईपीओ से पहले कहा था कि जियो प्लेटफॉर्म्स कर्ज-मुक्त स्थिति की ओर बढ़ रही है. कर्ज चुकाने से कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होने और भविष्य की विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
पारस हेल्थकेयर का आईपीओ भी 21 अक्टूबर को खुलेगा
गुरुग्राम स्थित पारस हेल्थकेयर भी इसी सप्ताह अपना आईपीओ लेकर आ रही है. कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. कंपनी की योजना आईपीओ के जरिए करीब 1,450 करोड़ रुपये जुटाने की है.
इसमें 500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि प्रमोटर धर्मिंदर कुमार नागर और निवेशक कॉमेलिना (Commelina) 650 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचेंगे.
जून 2026 तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पारस हेल्थकेयर उत्तर भारत, बिहार और झारखंड में आठ अस्पतालों का संचालन कर रही थी. इन अस्पतालों की कुल क्षमता 2,211 बेड की है. कंपनी नए शेयरों से मिलने वाली रकम में से 375 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने पर खर्च करेगी. शेष राशि सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाएगी.
अगले सप्ताह इन आईपीओ की सब्सक्रिप्शन अवधि होगी खत्म
19 अक्टूबर को चार मेनबोर्ड आईपीओ बंद होने वाले हैं. इनमें जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस, सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज, बॉनफिग्लिओली ट्रांसमिशन और टोंबो इमेजिंग इंडिया शामिल हैं. एसएमई सेगमेंट में शेल्ज इंडिया का आईपीओ भी इसी दिन बंद होगा.
उपलब्ध सब्सक्रिप्शन आंकड़ों के अनुसार, जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के 5,012 करोड़ रुपये के आईपीओ को 31 प्रतिशत, बॉनफिग्लिओली ट्रांसमिशन के 2,534 करोड़ रुपये के इश्यू को 99 प्रतिशत, सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज के 475 करोड़ रुपये के इश्यू को 82 प्रतिशत और शेल्ज इंडिया के 60 करोड़ रुपये के आईपीओ को 91 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिला था. वहीं, टोंबो इमेजिंग इंडिया के 852 करोड़ रुपये के आईपीओ को 7.78 गुना बोलियां मिली थीं.
अगले सप्ताह 9 कंपनियों की लिस्टिंग
आने वाले सप्ताह में नौ कंपनियों के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना है. एचडी फायर प्रोटेक्ट की लिस्टिंग 21 अक्टूबर और फ्यूजन सीएक्स की लिस्टिंग 22 अक्टूबर को प्रस्तावित है. जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस, सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज, बॉनफिग्लिओली ट्रांसमिशन और टोंबो इमेजिंग इंडिया के शेयर 23 अक्टूबर को बाजार में उतरने वाले हैं.
एसएमई सेगमेंट में वैभव व्यापार और रविता इंजीनियरिंग सर्विसेज के शेयर क्रमशः 21 और 22 अक्टूबर को एनएसई इमर्ज प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने वाले हैं. वहीं, शेल्ज इंडिया के शेयरों में 23 अक्टूबर से बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर कारोबार शुरू होने की योजना है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक चढ़कर 74,729.27 पर और निफ्टी 148.80 अंक मजबूत होकर 23,146.15 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को सपाट शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. वैश्विक बाजारों में कमजोरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से निवेशक सतर्क रह सकते हैं. इससे पहले शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक चढ़कर 74,729.27 पर और निफ्टी 148.80 अंक मजबूत होकर 23,146.15 पर बंद हुआ था. अब निवेशकों की नजर गिफ्ट निफ्टी, कच्चे तेल की चाल, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी. इसके अलावा, आज HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक समेत 10 शेयरों में खबरों और कारोबारी गतिविधियों के चलते हलचल देखने को मिल सकती है.
गिफ्ट निफ्टी से सपाट शुरुआत के संकेत
सोमवार सुबह शुरुआती संकेतों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सपाट रह सकती है. गिफ्ट निफ्टी 23,120 के आसपास कारोबार कर रहा था. दूसरी ओर, एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला. जापान का निक्केई शुरुआती कारोबार में 2.3 फीसदी तक गिरने के बाद करीब 1.1 फीसदी की कमजोरी पर था, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था.
अमेरिकी वायदा बाजारों में मजबूती के संकेत मिले. हालांकि, पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजारों में AI से जुड़े निवेश की स्थिरता को लेकर चिंताओं के कारण दबाव देखा गया था. ऐसे में घरेलू बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों की अहम भूमिका रहेगी.
शुक्रवार को सेंसेक्स 413 अंक चढ़ा, निफ्टी में भी तेजी
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई. आईटी, मीडिया और मेटल शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला. सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 फीसदी की बढ़त के साथ 74,729.27 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 148.80 अंक यानी 0.65 फीसदी चढ़कर 23,146.15 पर पहुंच गया. इस तेजी के साथ दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुए. पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 3.1 फीसदी और निफ्टी में 2.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
AI शेयरों में बिकवाली से वैश्विक बाजारों पर दबाव
अमेरिकी बाजारों में पिछले सप्ताह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. AI में बड़े निवेश से मिलने वाले रिटर्न और इस तेजी के टिकाऊ रहने को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया.
पिछले सप्ताह S&P 500 में करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक करीब 4.5 फीसदी फिसल गया. AI से जुड़े कुछ शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली. वैश्विक टेक शेयरों में कमजोरी का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी पड़ सकता है.
महंगे कच्चे तेल से बाजार की चिंता बढ़ी
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के दौरान सतर्कता बनी रह सकती है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं. WTI क्रूड करीब 97-98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ था. कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत के आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. इससे महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ सकती हैं.
होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी खबरों पर रहेगी नजर
कच्चे तेल की आगे की चाल काफी हद तक होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. ईरान ने दोहराया है कि अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार कर ले, तो इस समुद्री मार्ग को छह दिनों के भीतर दोबारा खोला जा सकता है. इन शर्तों में अमेरिकी नाकेबंदी, प्रतिबंधों और व्यापक स्तर पर संघर्ष रोकने से जुड़ी मांगें शामिल हैं.
हालांकि, किसी समझौते पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है. तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है और बाजार का भरोसा बढ़ सकता है. इसके विपरीत, तनाव बढ़ने या ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है.
आज इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, हिंदुस्तान जिंक और ऑयल इंडिया के शेयर फोकस में रह सकते हैं. HDFC बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा के इस्तीफे से जुड़ी खबरों के कारण बैंक का शेयर चर्चा में रह सकता है. वहीं, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक में तिमाही नतीजों से जुड़ी गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रहेगी.
टेक महिंद्रा के शेयर में आईटी सेक्टर के रुझान और वैश्विक AI शेयरों में बिकवाली का असर देखने को मिल सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज पर जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित IPO से जुड़ी खबरों के कारण फोकस रहेगा, जबकि भारती एयरटेल की नई प्रीपेड योजनाओं से जुड़ी खबरें शेयर की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं. इसके अलावा, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट और हिंदुस्तान जिंक के तिमाही नतीजे निवेशकों के लिए अहम रहेंगे. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच ऑयल इंडिया के शेयर पर भी नजर रखी जा सकती है.
कुल मिलाकर, शुक्रवार की तेजी के बावजूद वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल के कारण बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है. निवेशकों के लिए कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक संकेतों और सेक्टरवार गतिविधियों पर नजर रखना अहम होगा.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि IDBI बैंक में हिस्सेदारी घटाने पर रोक लगाने के लिए 2003 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. यह संशोधन न तो पारित हुआ और न ही IDBI (Repeal) Act, 2003 का हिस्सा बना.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या बेचने के कानूनी अधिकार को दोहराया है. सरकार ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के दिसंबर 2018 के फैसले का हवाला दिया है. अदालत ने कहा था कि संसद में विधायी प्रक्रिया के दौरान दिए गए बयानों के आधार पर सरकार को बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने से नहीं रोका जा सकता, जब संबंधित कानून में ऐसी कोई रोक नहीं है.
केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि IDBI बैंक में हिस्सेदारी घटाने पर रोक लगाने के लिए 2003 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. यह संशोधन न तो पारित हुआ और न ही IDBI (Repeal) Act, 2003 का हिस्सा बना. सरकार का यह बयान बैंक में रणनीतिक विनिवेश को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों और चर्चाओं के बीच आया है.
हिस्सेदारी घटाने पर क्या कहता है हाईकोर्ट का फैसला?
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के 17 दिसंबर 2018 के फैसले का उल्लेख किया. यह फैसला *All India IDBI Officers’ Association बनाम Union of India एवं अन्य* मामले में सुनाया गया था. अदालत ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान दिए गए बयान बाद में लागू किए गए कानून के प्रावधानों को बदल नहीं सकते.
अदालत ने कहा था कि सरकार की हिस्सेदारी घटाने की शक्ति पर रोक लगाने वाला प्रस्तावित संशोधन IDBI (Repeal) Act, 2003 में शामिल नहीं किया गया था. इसलिए संसद में दिए गए बयानों के आधार पर सरकार को अपनी हिस्सेदारी घटाने या बेचने से रोकने की मांग नहीं की जा सकती.
फैसले में यह भी कहा गया था कि संबंधित कानून में कोई अस्पष्टता नहीं है और न ही ऐसा कोई प्रावधान है, जो सरकार को IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या पूरी तरह बेचने से रोकता हो.
क्या है Promissory Estoppel का सिद्धांत?
सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में *Promissory Estoppel* के सिद्धांत से जुड़े पहलू का भी उल्लेख किया. इस कानूनी सिद्धांत के तहत कुछ परिस्थितियों में किसी पक्ष को अपने वादे या आश्वासन से पीछे हटने से रोका जा सकता है, यदि दूसरे पक्ष ने उस पर भरोसा करके कदम उठाया हो.
हालांकि, इस मामले में अदालत ने माना था कि संसद में कानून पर चर्चा के दौरान दिए गए बयानों को ऐसा आश्वासन नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर सरकार की कानूनी शक्तियों को सीमित कर दिया जाए. अदालत के मुताबिक, जब लागू कानून में सरकार की हिस्सेदारी घटाने पर रोक नहीं है, तो संसदीय बहस के बयानों के आधार पर ऐसी रोक नहीं लगाई जा सकती.
2016 के बजट में भी हिस्सेदारी घटाने का जिक्र
केंद्र सरकार ने IDBI बैंक को लेकर अपनी नीति के समर्थन में पिछले वर्षों के केंद्रीय बजट भाषणों का भी हवाला दिया. वित्त वर्ष 2016-17 के बजट भाषण में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने IDBI बैंक के बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इसमें सरकार की हिस्सेदारी 50% से नीचे लाने की संभावना पर विचार करने की बात कही थी.
बजट भाषण के पैराग्राफ 93 में इसका उल्लेख किया गया था. यह घोषणा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत बनाने, बैंक बोर्ड ब्यूरो को सक्रिय करने और बैंकों के एकीकरण की रूपरेखा तैयार करने से जुड़े व्यापक एजेंडे का हिस्सा थी.
2021-22 के बजट में रणनीतिक विनिवेश का लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट भाषण का भी हवाला दिया. तत्कालीन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने IDBI बैंक को उन सौदों में शामिल किया था, जिन्हें उस वित्त वर्ष के दौरान पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था.
यह घोषणा सरकार के रणनीतिक विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा थी. इसी बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया था.
सरकार ने विधायी और न्यायिक रिकॉर्ड का दिया हवाला
केंद्र सरकार के मुताबिक, IDBI (Repeal) Act, 2003 का विधायी इतिहास, दिल्ली हाईकोर्ट का 2018 का फैसला और अलग-अलग वर्षों के बजट भाषण बैंक में हिस्सेदारी को लेकर सरकार की नीति में हुए बदलाव को स्पष्ट करते हैं.
सरकार ने दोहराया कि 2018 के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया था कि संसद में दिए गए बयानों के आधार पर सरकार की हिस्सेदारी घटाने की शक्ति पर रोक नहीं लगाई जा सकती, जब लागू कानून में ऐसी कोई पाबंदी मौजूद न हो.