BW Festival of FinTech 2023 का शानदार समापन, इनके सिर सजा विनर का ताज 

BW Festival of FinTech में इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स ने अपने विचार प्रकट किए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की.

Last Modified:
Tuesday, 04 July, 2023
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BW फेस्टिवल ऑफ फिनटेक एंड अवार्ड्स (BW Festival of FinTech and Awards) का तीसरा संस्करण 29 जून को शानदार तरीके से संपन्न हुआ. बेंगलुरु के Taj MG Road होटल में आयोजित किए गए इस शिखर सम्मेलन ने फिनटेक क्षेत्र के लीडर्स, एक्सपर्ट्स और इनोवेटर्स को सेक्टर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत के लिए एक मंच प्रदान किया. BW Businessworld के इस इवेंट को BharatPe और Resurgent India Limited द्वारा प्रायोजित किया गया था.

ये रहे Keynote स्पीकर्स 
Riskcovry और Slack की भागीदारी से इस आयोजन का प्रभाव और बढ़ गया, ये दो संगठन फिनटेक इंडस्ट्री में अपने काम के लिए जाने जाते हैं. वहीं, Scoreme Solutions Pvt Ltd ने इस पूरे सम्मेलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इवेंट में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स जैसे कि Ravirajan & Co LLP जे प्रमोटर एवं पार्टनर एस. रवि, चेयरमैन TFCI एवं पूर्व चेयरमैन, BSE; NPCI की COO Praveena Rai, NPCI Bharat BillPay Ltd के हेड ऑनलाइन एप्लीकेशन Sai Ganesh Vootukuri, Slack के रीजनल VP Rohan Pagey, Resurgent India के MD Jyoti Prakash Gadia, Revolut India के सीईओ Paroma Chatterjee, Karnataka Digital Economy Mission के सीईओ Sanjeev Kumar Gupta और BW Businessworld के एडिटर इन चीफ एवं Exchange4media के फाउंडर Dr. Annurag Batra ने अपनी Keynote स्पीच में फिनटेक इंडस्ट्री के बारे में महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला.

उन्होंने भी दर्ज कराई उपस्थिति
इस मौके पर कई प्रतिष्ठित वक्ता भी उपस्थित रहे. जिसमें Scoreme Solutions के निदेशक Shashank Sharma, Paisabazaar.Com के CPO Radhika Binani, Kinara Capital के COO Thirunavukkarasu R (Thiru R), Perfios के VP- प्रोडक्ट Prasad Krishnamorthy, Bimaplan के COO Hemant Tathod, Flipkart Internet Pvt Limited की एसोसिएट डायरेक्टर Vaishali Talwar, Fisdom के COO Karan Batra, Axio के CPO Jatin Bhasin, Zolve के Head - Business & Growth Anandapadmanabhan Ramabhadran, Vivriti Capital के चीफ डेटा ऑफिसर Mohan Sushantam, C4IR India की स्पेशलिस्ट Data Policy and Blockchain / Digital Assets Arushi Goel, CoinDCX के CTO Vivek Gupta, Polygon Technology के VP – Strategy Ravikant Agrawal, InstaCrypto के फाउंडर एवं सीईओ Vikram Nikkam, Unocoin के को-फाउंडर एवं सीईओ Sathvik Vishwanath, MSC के Financial Inclusion Lab Lead (MSC Consultant)  Nishant Kumar, M2P Fintech के SVP- Business Development Nayan Ambali, Riskcovry के हेड पार्टनरशिप Karn Thakuria, KuCoin India की हेड Brand Comms Medha B, KuCoin India के Head - Brand Comms Dey Roy, Mudrex के सीईओ एवं को-फाउंडर Edul Patel, Neowise Technologies के सीईओ-को फाउंडर Siddarth Padmanabhan,  Blockchain & Emerging Tech Evangelist Sharat Chandra, Flipkart के Vivek Madani, Blockstack के सीईओ Prasanna Lohar आदि शामिल हैं.

जुड़ाव का मिला मौका
प्रतिभागियों को BW Festival of Fintech 2023 में सहकर्मियों, विचारकों और महत्वपूर्ण हितधारकों के साथ बातचीत करने, सहयोग करने और जुड़ने का अवसर मिला. इस इवेंट ने सूचनाओं के आदान-प्रदान, नए बिजनेस कनेक्शनों के विकास और फिनटेक सेक्टर में संभावित वृद्धि पर चर्चा के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया. एक संपूर्ण चयन प्रक्रिया का पालन करते हुए उम्मीदवारों को पहले BW Editorial Board द्वारा शॉर्टलिस्ट किया गया. इसके बाद जूरी ने अंतिम फैसला लिया. BW Festival of FinTech Awards में कैटेगरी विनर्स के अलावा, कई प्रतिभागियों को स्पेशल मेंशन्स प्राप्त हुआ. रेवफिन और पीबी फिनटेक को Fintech Leader of the Year की श्रेणी में स्पेशल मेंशन्स से नवाजा गया. इसके अलावा, Zolve को Fintech of the Year श्रेणी में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्पेशल मेंशन्स दिया गया. विजेताओं की पूरी सूची इस प्रकार है:


 

Tag

Cateogary

Company

Winner

Best Digital Lender of the Year

BharatPe

Winner

Best Digital Lender of the Year

axio

Winner

Best Financial Inclusion of the Year

Revfin

Winner

Best Financial Inclusion of the Year

ARTH

Winner

Best InsurTech of the Year

PhonePe Insurance Broking Services

Winner

Best InsurTech of the Year

Riskcovry InsurTech

Winner

Best InsurTech of the Year

Policybazaar.com

Winner

Best Payments Solutions of the Year

Zaggle

Winner

Best Payments Solutions of the Year

Winvesta

Winner

Best Payments Solutions of the Year

PhonePe

Winner

Fintech Startup of the Year

Mudrex

Winner

Most Innovative Fintech Product of the Year

Zolve

Winner

Most Innovative Fintech Product of the Year

Veefin Solutions

Winner

Regtech Solution of the Year

National e-Governance Services Limited

Winner

Regtech Solution of the Year

Presolv360

Winner

Technology Leader in Fintech

Veefin Solutions

Winner

Technology Leader in Fintech

RING

Winner

Women Leader of the Year

Veefin Solutions

Special Mention

Fintech Leader of the Year

Revfin

Special Mention

Fintech Leader of the Year

PB Fintech

Winner

Fintech Leader of the Year

BCT Digital

Special Mention

Fintech of the Year

Zolve

Winner

Fintech of the Year

mPokket

 

 


FPI ने अप्रैल में ₹60,847 करोड़ निकाले, वैश्विक अनिश्चितताओं से भारतीय बाजार पर दबाव

एफपीआई की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया है. इस साल अब तक उन्होंने लगभग ₹1.7 लाख करोड़ का निवेश किया है, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट टल गई.

Last Modified:
Friday, 01 May, 2026
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) ने अप्रैल 2026 में भारतीय शेयर बाजार से भारी बिकवाली जारी रखते हुए ₹60,847 करोड़ (लगभग $6.5 अरब) की निकासी की है. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है.

चार महीने में ₹1.92 लाख करोड़ की निकासी

राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कुल एफपीआई निकासी ₹1.92 लाख करोड़ तक पहुंच गई है. यह पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है.

साल भर बिकवाली का दबाव

एफपीआई इस साल अधिकांश महीनों में नेट सेलर बने रहे हैं. केवल फरवरी 2026 में थोड़ी राहत देखने को मिली थी, जब विदेशी निवेशकों ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों में सबसे बड़ा इनफ्लो था. हालांकि इसके बाद स्थिति फिर बिगड़ गई. मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की भारी बिकवाली हुई और अप्रैल में भी दबाव जारी रहा.

वैश्विक कारणों का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस लगातार बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारण हैं. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई की चिंता बढ़ी है. इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों, जैसे भारत, की आकर्षकता को कम किया है.

रुपये की कमजोरी और महंगे वैल्यूएशन

कच्चे तेल की कीमतों के $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये की कमजोरी ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया है. भारतीय शेयर बाजार फिलहाल उच्च वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू कर दिया है.

घरेलू निवेशकों ने दिया सहारा

एफपीआई की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया है. इस साल अब तक उन्होंने लगभग ₹1.7 लाख करोड़ का निवेश किया है, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट टल गई.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो विदेशी निवेश फिर से लौट सकते हैं. हालांकि, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में और उछाल आता है, तो निकासी का दबाव फिर बढ़ सकता है.

 


अडानी ग्रुप में बड़ा आंतरिक बदलाव, तेज फैसलों और मजबूत साझेदारी पर फोकस

गौतम अडानी ने बताया कि कंपनी एक “थ्री-लेयर मॉडल” अपनाएगी, जिसका उद्देश्य संगठनात्मक जटिलता को कम करना और बिजनेस में तेजी से फैसले लागू करना है. इस ढांचे में तीन मुख्य स्तंभ लीन मैनेजमेंट स्ट्रक्चर, पार्टनर इकोसिस्टम का एकीकरण, स्किलिंग और लर्निंग पर जोर शामिल हैं.

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Friday, 01 May, 2026
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अडानी ग्रुप (Adani Group) ने अपने तेज विस्तार को समर्थन देने के लिए बड़े आंतरिक बदलावों की घोषणा की है. समूह का लक्ष्य निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना, कॉन्ट्रैक्टर नेटवर्क को मजबूत करना और कर्मचारियों के कौशल विकास पर फोकस बढ़ाना है. यह घोषणा ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर की.

तीन-स्तरीय रणनीति का ऐलान

गौतम अडानी ने बताया कि कंपनी एक “थ्री-लेयर मॉडल” अपनाएगी, जिसका उद्देश्य संगठनात्मक जटिलता को कम करना और बिजनेस में तेजी से फैसले लागू करना है. इस ढांचे में तीन मुख्य स्तंभ लीन मैनेजमेंट स्ट्रक्चर, पार्टनर इकोसिस्टम का एकीकरण, स्किलिंग और लर्निंग पर जोर शामिल हैं.

लीन स्ट्रक्चर से तेज निर्णय

अडानी ने कहा कि बड़े संगठनों में अक्सर फैसले लेने की गति धीमी हो जाती है, जिसे बदलने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि संगठन में परतों (hierarchy) को कम किया जाएगा ताकि निर्णय तेजी से लिए जा सकें और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सके.

ग्रुप अब अपने कॉन्ट्रैक्टर और वेंडर नेटवर्क को भी सरल बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इसके तहत “पार्टनरशिप मॉडल” अपनाया जाएगा, जिसमें चुनिंदा और भरोसेमंद भागीदारों के साथ काम किया जाएगा, जो पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल सकें. इससे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट आसान होगा और देरी कम होगी.

स्किलिंग और ट्रेनिंग पर जोर

तीसरे स्तंभ के तहत कंपनी एक नई अडानी ट्रेनिंग अकेडमी स्थापित करने की योजना बना रही है. इसका उद्देश्य कर्मचारियों के लिए लगातार सीखने और करियर ग्रोथ के अवसर तैयार करना है. अडानी ने कहा कि यह पहल कर्मचारियों को अनस्किल्ड से स्किल्ड और आगे लीडरशिप भूमिकाओं तक पहुंचाने में मदद करेगी.

बड़े विस्तार की तैयारी

अडानी ने कहा कि वह आने वाले एक वर्ष में लगभग ₹2 लाख करोड़ की नई संपत्तियां जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है. यह पिछले कई दशकों में बनाई गई क्षमता के बराबर विस्तार होगा. अडानी ने इसे कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम बताया और कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि संगठन की सामूहिक उपलब्धि है.

कर्मचारी कल्याण पर फोकस

ग्रुप ने वर्कर वेलफेयर के तहत कई योजनाओं की भी घोषणा की है. इनमें लगभग 50,000 कर्मचारियों के लिए एयर-कंडीशन्ड आवास और प्रमुख साइट्स पर प्रतिदिन 1 लाख भोजन तैयार करने वाली बड़ी किचन सुविधा शामिल है.

कंपनी स्थानीय भर्ती और स्किल डेवलपमेंट को भी प्राथमिकता देगी, क्योंकि वर्तमान में समूह में 4 लाख से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं. 

अपने संबोधन के अंत में गौतम अडानी ने कहा कि संगठन की सफलता में हर कर्मचारी का योगदान महत्वपूर्ण है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा. उन्होंने इसे भारत के विकास विजन से जोड़ते हुए कहा कि यह यात्रा सामूहिक प्रयासों से ही आगे बढ़ सकती है.
 


अप्रैल में निसान की बिक्री में बड़ा उछाल, 75% ग्रोथ के साथ FY26 की मजबूत शुरुआत

कंपनी ने अप्रैल 2026 में कुल 5,388 यूनिट्स की बिक्री की. इसमें 3,203 यूनिट्स घरेलू बाजार में बेची गईं, जबकि 2,185 यूनिट्स का निर्यात किया गया.

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Friday, 01 May, 2026
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निसान मोटर इंडिया (Nissan Motor India Private Limited) ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत शानदार अंदाज में की है. अप्रैल 2026 में कंपनी की घरेलू बिक्री में सालाना आधार पर 75 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो भारतीय ऑटो बाजार में उसकी मजबूत होती पकड़ को दर्शाती है.

कुल बिक्री में भी जोरदार उछाल

कंपनी ने अप्रैल 2026 में कुल 5,388 यूनिट्स की बिक्री की. इसमें 3,203 यूनिट्स घरेलू बाजार में बेची गईं, जबकि 2,185 यूनिट्स का निर्यात किया गया. यह प्रदर्शन निसान के सतत विकास और बाजार में बढ़ती मौजूदगी का संकेत देता है.

बढ़ते पोर्टफोलियो को मिला ग्राहकों का साथ

अप्रैल के दौरान कंपनी के बढ़ते प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को ग्राहकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली. खासतौर पर निसान एक्स-ट्रेल ग्रेवाइट कॉन्सेप्ट (Gravite) को ग्राहकों ने काफी पसंद किया, जिससे कंपनी की बिक्री को गति मिली.

ग्रेवाइट और मैग्नाइट बने ग्रोथ ड्राइवर

अपनी शुरुआत से ही ग्रेवाइट ने कंपनी के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई है. इसकी 7-सीट मॉड्यूलैरिटी, बेहतर कम्फर्ट और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त फीचर्स ने ग्राहकों को आकर्षित किया है. वहीं  निसान मैग्नाइट कंपनी के लिए एक मजबूत स्तंभ बनी हुई है, जिसने प्रतिस्पर्धी SUV सेगमेंट में निसान की स्थिति को और मजबूत किया है.

कंपनी का बयान

इस प्रदर्शन पर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ वत्स ने कहा कि नए वित्त वर्ष की यह मजबूत शुरुआत उत्साहजनक है. उन्होंने कहा कि मैग्नाइट की सफलता और ग्रेवाइट को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया कंपनी की ग्राहक-केंद्रित रणनीति को मजबूत करती है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कंपनी इस वित्त वर्ष में नए प्रोडक्ट लॉन्च करने और देशभर में अपना नेटवर्क विस्तार करने की तैयारी में है.

आगे की रणनीति

निसान मोटर इंडिया आगे भी इनोवेशन, ग्राहक अनुभव और नेटवर्क विस्तार पर फोकस बनाए रखेगी. मजबूत प्रोडक्ट पाइपलाइन और बेहतर सर्विस अनुभव के जरिए कंपनी भारत में अपनी विकास गति को बरकरार रखने की स्थिति में है. 

यह प्रदर्शन साफ तौर पर दिखाता है कि भारतीय बाजार में निसान की रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत हो सकती है.
 


IdeaForge का शानदार Q4 प्रदर्शन, ₹141 करोड़ राजस्व के साथ कॉम्बैट ड्रोन सेगमेंट में एंट्री

प्रोडक्ट डेवलपमेंट के तहत कंपनी अब इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) प्लेटफॉर्म्स से आगे बढ़कर कॉम्बैट ड्रोन सिस्टम्स में विस्तार कर रही है.

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Friday, 01 May, 2026
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आइडियाफोर्ज (IdeaForge Technology) ने 30 अप्रैल 2026 को अपने अब तक के सबसे मजबूत तिमाही नतीजे घोषित किए. कंपनी ने FY26 की चौथी तिमाही (Q4) में ₹141 करोड़ का राजस्व और ₹60 करोड़ का शुद्ध लाभ (PAT) दर्ज किया.

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग ₹530 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक ऑर्डर इनफ्लो हासिल किया. यह FY27 के लिए मजबूत ग्रोथ आउटलुक का संकेत देता है. 31 मार्च 2026 को समाप्त वर्ष के ऑडिटेड नतीजों के अनुसार, रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों से मांग के चलते कंपनी को पूरे साल मजबूत ऑर्डर मिले.

ऑर्डर एग्जीक्यूशन और ऑपरेशनल प्रदर्शन

कंपनी ने Q4 के दौरान अपने ओपन ऑर्डर बुक का लगभग 40 प्रतिशत निष्पादित किया. इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) रेजिलिएंट सिस्टम्स की डिलीवरी भी शामिल रही, जो यूजर एक्सेप्टेंस टेस्टिंग के बाद सप्लाई किए गए. वित्तीय प्रदर्शन में सुधार के साथ कंपनी ने Q4 में मुनाफे में वापसी की और FY26 में ₹27 करोड़ का पॉजिटिव EBITDA दर्ज किया. यह बेहतर मार्जिन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है.

कॉम्बैट ड्रोन सेगमेंट में एंट्री

प्रोडक्ट डेवलपमेंट के तहत कंपनी अब इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) प्लेटफॉर्म्स से आगे बढ़कर कॉम्बैट ड्रोन सिस्टम्स में विस्तार कर रही है. इनमें लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक प्लेटफॉर्म्स, लोइटरिंग म्यूनिशंस और कामिकाज़े ड्रोन शामिल हैं, जिन्हें भारतीय सशस्त्र बलों की संभावित जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है.

ग्लोबल मार्केट में बढ़ती मौजूदगी

तिमाही के दौरान कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रगति दर्ज की. उसे अमेरिका में टेक्सास स्थित एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट पुलिस डिपार्टमेंट से पब्लिक सेफ्टी ऑपरेशंस के लिए पहला ऑर्डर मिला. इसके अलावा, कंपनी ने NATO बलों को US National Test Pilot School में ट्रेनिंग दी और US Department of Defense को अलास्का में अत्यधिक ठंडे मौसम में अपने सिस्टम्स का प्रदर्शन किया.

जापान में विस्तार की तैयारी

वैश्विक विस्तार रणनीति के तहत कंपनी ने Digital Media Professionals Inc. के साथ समझौता (MoU) किया है. इसका उद्देश्य AI-सक्षम अगली पीढ़ी के ड्रोन विकसित करना और जापान में अपनी उपस्थिति बढ़ाना है.

ऑपरेशनल उपलब्धियां

कंपनी के अनुसार, FY26 के दौरान उसकी तैनात ड्रोन फ्लीट ने 2,50,000 से अधिक ग्राहक उड़ानें पूरी कीं. इसके साथ ही कुल उड़ानों की संख्या 9,50,000 से अधिक हो गई है. कंपनी के ड्रोन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग पब्लिक सेफ्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है.

बढ़ती मांग का फायदा

रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों में मानव रहित प्रणालियों (ड्रोन) की बढ़ती मांग के बीच यह विकास हुआ है. कंपनियां अब स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत ड्रोन तकनीकों पर अधिक ध्यान दे रही हैं.

 


फेडरल बैंक करेगा स्टैंडर्ड चार्टर्ड के कार्ड पोर्टफोलियो का अधिग्रहण, जुड़ेंगे 4.5 लाख क्रेडिट कार्ड

इस अधिग्रहण के तहत लगभग 4.5 लाख क्रेडिट कार्ड शामिल हैं. यह फेडरल बैंक के मौजूदा लगभग 8 लाख नॉन को-ब्रांडेड और 13 लाख को-ब्रांडेड कार्ड्स के मुकाबले एक महत्वपूर्ण वृद्धि है.

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Friday, 01 May, 2026
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फेडरल बैंक ने अपने रिटेल क्रेडिट कारोबार का विस्तार करने और शहरी बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के उद्देश्य से स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के एक चयनित क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो के अधिग्रहण के लिए समझौता किया है.

पोर्टफोलियो का आकार और विस्तार

इस अधिग्रहण के तहत लगभग 4.5 लाख क्रेडिट कार्ड शामिल हैं. यह फेडरल बैंक के मौजूदा लगभग 8 लाख नॉन को-ब्रांडेड और 13 लाख को-ब्रांडेड कार्ड्स के मुकाबले एक महत्वपूर्ण वृद्धि है. इस सौदे के बाद बैंक के नॉन को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड रिसीवेबल्स में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है.

शहरी बाजारों में मजबूत पकड़

पोर्टफोलियो का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा भारत के शीर्ष आठ बड़े शहरों में केंद्रित है. इससे फेडरल बैंक की इन प्रमुख महानगरों में उपस्थिति दोगुनी से अधिक हो जाएगी. यह डील बैंक को शहरी और अधिक खर्च करने वाले ग्राहकों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी.

डील का मूल्यांकन और प्रक्रिया

इस ट्रांजैक्शन का मूल्य लगभग 1.5 से 1.6 गुना इम्प्लाइड इक्विटी के आधार पर तय किया गया है. अंतिम भुगतान राशि ट्रांसफर के समय बैलेंस पर निर्भर करेगी. कार्ड्स की वास्तविक संख्या ग्राहक की सहमति और माइग्रेशन के समय पर निर्भर करेगी.

बैंक नेतृत्व का बयान

फेडरल बैंक के एमडी और सीईओ KVS मणियन ने कहा कि यह अधिग्रहण रिटेल क्रेडिट फ्रेंचाइज़ी के लिए एक मजबूत और रणनीतिक जोड़ है. उन्होंने कहा कि यह पोर्टफोलियो उच्च गुणवत्ता वाला, सक्रिय और बैंक की रणनीति के अनुरूप बाजारों में केंद्रित है.

स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रणनीति

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक इस सौदे के जरिए भारत में वेल्थ और उच्च आय वर्ग पर फोकस बढ़ाना चाहता है और सिंगल-प्रोडक्ट रिलेशनशिप से अपनी निर्भरता कम करना चाहता है.

नियामकीय स्थिति और समयसीमा

इस डील को किसी अतिरिक्त नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता नहीं है और इसके कैलेंडर वर्ष 2026 के भीतर पूरा होने की उम्मीद है.

 


वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस का NSE Emerge पर डेब्यू, ₹41.69 करोड़ का IPO लॉन्च

इस IPO में ₹10 अंकित मूल्य वाले अधिकतम 42,54,000 इक्विटी शेयर शामिल हैं. इनकी कीमत ₹95 से ₹98 प्रति शेयर तय की गई है.

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Friday, 01 May, 2026
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वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस अपने अगले विकास चरण की ओर बढ़ते हुए ₹41.69 करोड़ का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लॉन्च करने जा रही है. यह इश्यू 4 मई 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा. कंपनी अपने शेयरों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के SME प्लेटफॉर्म NSE Emerge पर सूचीबद्ध करने की योजना बना रही है. यह पब्लिक इश्यू 6 मई 2026 को बंद होगा.

इश्यू साइज और प्राइस बैंड

इस IPO में ₹10 अंकित मूल्य वाले अधिकतम 42,54,000 इक्विटी शेयर शामिल हैं. इनकी कीमत ₹95 से ₹98 प्रति शेयर तय की गई है.

फंड का उपयोग

IPO से प्राप्त राशि का उपयोग कंपनी बुनियादी ढांचे और उन्नत तकनीक में पूंजीगत खर्च, कंटेंट प्रोडक्शन में विस्तार, और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म इरिडा इंटरएक्टिव (ClanConnect) में निवेश के लिए करेगी. इसके अलावा, ये फंड संभावित अधिग्रहण, कर्ज चुकाने, कार्यशील पूंजी की जरूरतों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों को पूरा करने में भी लगाए जाएंगे.

मैनेजमेंट और रजिस्ट्रार

इस इश्यू के लिए होराइजन मैनेजमेंट प्राइवेट को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है. जबकि KFin टेक्नोलॉजीज लिमिटेड रजिस्ट्रार की भूमिका निभाएगी.

 


निर्यातकों को राहत, वाणिज्य मंत्रालय ने RoDTEP स्कीम की टैरिफ सूची में किया बड़ा बदलाव

सरकार के अनुसार कुल 194 टैरिफ लाइनों में संशोधन किया गया है. इसमें 142 नई 8-अंकीय टैरिफ लाइनों को जोड़ा गया है. 50 पुरानी लाइनों को हटाया गया है और 2 टैरिफ लाइनों के विवरण में बदलाव किया गया है.

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Friday, 01 May, 2026
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केंद्र सरकार ने निर्यात क्षेत्र को और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और कर वापसी योजना (RoDTEP) स्कीम के तहत टैरिफ शेड्यूल में संशोधन किया है. यह बदलाव कस्टम टैरिफ ढांचे में वित्त अधिनियम 2026 के जरिए किए गए संशोधनों के अनुरूप किया गया है.

1 मई 2026 से लागू हुए नए नियम

वाणिज्य विभाग ने अधिसूचना संख्या 15/2026-27 जारी करते हुए बताया कि संशोधित प्रावधान 1 मई 2026 से प्रभावी हो गए हैं. इन बदलावों का उद्देश्य कस्टम्स ऑटोमेटेड सिस्टम में नई संरचना को शामिल करना और निर्यात लाभ दावों की प्रक्रिया को आसान बनाना है.

किन निर्यातकों पर पड़ेगा असर?

यह संशोधन Appendix 4R और Appendix 4RE पर लागू होगा. Appendix 4R घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) से होने वाले निर्यात को कवर करता है, जबकि Appendix 4RE एडवांस ऑथराइजेशन (AA), एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (EOUs) और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZs) के तहत काम करने वाले निर्यातकों पर लागू होगा.

194 टैरिफ लाइनों में बदलाव

सरकार के अनुसार कुल 194 टैरिफ लाइनों में संशोधन किया गया है. इसमें 142 नई 8-अंकीय टैरिफ लाइनों को जोड़ा गया है. 50 पुरानी लाइनों को हटाया गया है और 2 टैरिफ लाइनों के विवरण में बदलाव किया गया है.

तकनीकी बदलाव से मिलेगा बड़ा फायदा

मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन मुख्य रूप से तकनीकी प्रकृति का है, जिसका मकसद RoDTEP टैरिफ लाइनों को कस्टम टैरिफ एक्ट 1975 की अद्यतन पहली अनुसूची के साथ तालमेल में लाना है. इससे वर्गीकरण से जुड़ी अस्पष्टताएं कम होंगी और कस्टम्स तथा RoDTEP प्रविष्टियों में एकरूपता आएगी.

निर्यात लाभ दावों की प्रक्रिया होगी आसान

सरकार का मानना है कि नए बदलावों से सिस्टम स्तर की त्रुटियां कम होंगी और निर्यातकों को मिलने वाली ड्यूटी, टैक्स और लेवी की वापसी में निरंतरता बनी रहेगी. साथ ही दावों की प्रोसेसिंग पहले से अधिक तेज और पारदर्शी होगी.

क्या है RoDTEP स्कीम?

RoDTEP भारत सरकार की प्रमुख निर्यात प्रोत्साहन योजना है, जिसके तहत निर्यातित उत्पादों पर लगे ऐसे करों और शुल्कों की वापसी की जाती है, जो अन्य किसी योजना के तहत रिफंड नहीं होते. इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है.

कारोबार सुगमता पर सरकार का फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार की Ease of Doing Business नीति को मजबूत करेगा. समय पर नीति और अनुपालन ढांचे में सामंजस्य से निर्यातकों को राहत मिलेगी और भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति मिल सकती है.


सरकार ने दी तेल कंपनियों को राहत, डीजल-ATF पर विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. इससे पहले यह टैक्स 55.5 रुपये प्रति लीटर था, यानी कंपनियों को अब प्रति लीटर 32.5 रुपये की राहत मिलेगी.

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Friday, 01 May, 2026
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केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती कर दी है. नई दरें 1 मई 2026 से लागू हो गई हैं. वहीं पेट्रोल के निर्यात को पहले की तरह पूरी तरह ड्यूटी फ्री रखा गया है. इस फैसले से रिफाइनरी कंपनियों को फायदा मिल सकता है और निर्यात गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है.

डीजल पर टैक्स में बड़ी कटौती

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. इससे पहले यह टैक्स 55.5 रुपये प्रति लीटर था. यानी कंपनियों को अब प्रति लीटर 32.5 रुपये की राहत मिलेगी.

ATF पर भी घटा निर्यात शुल्क

हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन ATF पर भी टैक्स कम किया गया है. इसे 42 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इससे एविएशन फ्यूल सप्लाई चेन और निर्यात बाजार को राहत मिलने की संभावना है.

पेट्रोल निर्यात पर कोई टैक्स नहीं

सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया है. पेट्रोल एक्सपोर्ट पहले की तरह ड्यूटी फ्री रहेगा. इससे पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बनाए रखना आसान होगा.

घरेलू उपभोक्ताओं पर असर नहीं

वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कीमतों पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा.

पिछले रिव्यू में बढ़ाया गया था टैक्स

सरकार ने 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाया था. इसके बाद 11 अप्रैल की समीक्षा में इसे बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था. अब ताजा समीक्षा में फिर राहत दी गई है.

क्यों लगाया गया था विंडफॉल टैक्स?

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह टैक्स लगाया था. मकसद यह था कि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बड़े अंतर का अत्यधिक लाभ न उठा सकें और देश में सप्लाई बनी रहे.

क्रूड ऑयल में आई थी तेज तेजी

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. इससे पहले कीमतें लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं.

विशेषज्ञों के मुताबिक टैक्स कटौती से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के मार्जिन बेहतर हो सकते हैं. साथ ही निर्यात बढ़ने और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. आने वाले दिनों में सरकार वैश्विक तेल कीमतों के आधार पर फिर समीक्षा कर सकती है.


भारत-इटली रक्षा साझेदारी मजबूत: घातक हथियारों के सह-उत्पादन पर सहमति, रणनीतिक रिश्तों को नई धार

वार्ता के बाद भारत और इटली ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (Military Cooperation Plan) 2026-27 का अनावरण किया. यह योजना दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अभ्यास और रणनीतिक समन्वय को और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.

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Friday, 01 May, 2026
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भारत और इटली ने बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का फैसला किया है. भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो (Guido Crosetto) के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने सैन्य साजो-सामान के सह-उत्पादन और रक्षा औद्योगिक ढांचा विकसित करने पर सहमति जताई. इस कदम से न केवल सुरक्षा सहयोग मजबूत होगा, बल्कि रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा.

सह-उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर जोर

बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया. इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान और सार्वजनिक-निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति बनी. यह पहल भविष्य में उन्नत और घातक हथियार प्रणालियों के विकास का रास्ता खोल सकती है.

MCP 2026-27 का अनावरण

वार्ता के बाद भारत और इटली ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (Military Cooperation Plan) 2026-27 का अनावरण किया. यह योजना दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अभ्यास और रणनीतिक समन्वय को और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.

वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

आत्मनिर्भर भारत और इटली की पहल का मेल

राजनाथ सिंह ने कहा, भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ कार्यक्रम और इटली की रक्षा सहयोग पहलों के बीच तालमेल बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया गया. दोनों देशों ने पारस्परिक रूप से लाभकारी रक्षा औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई.

समुद्री सुरक्षा और सूचना साझाकरण

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति जताई. इसमें गुरुग्राम स्थित सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) के माध्यम से समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना शामिल है. भारत और इटली, दोनों ही प्राचीन समुद्री राष्ट्र हैं और इस क्षेत्र में सहयोग को अहम मानते हैं.

रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

बैठक से पहले गुइडो क्रोसेटो ने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमेरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने तीनों सेनाओं के सलामी गारद का निरीक्षण भी किया.  विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा. सह-उत्पादन और तकनीकी सहयोग से दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी.


SEBI का बड़ा कदम: AIF स्कीमों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी, 30 दिन में फंड लॉन्च का रास्ता साफ

SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी AIF स्कीम का पहला क्लोज उसकी लॉन्च पात्रता की तारीख से 12 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए. इससे फंड जुटाने की प्रक्रिया में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित होगी.

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पूंजी बाजार को और तेज व कुशल बनाने की दिशा में भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने बड़ा बदलाव किया है. अब ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) स्कीमों के लिए फास्ट-ट्रैक अप्रूवल सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत आवेदन के 30 दिनों के भीतर फंड लॉन्च करना संभव होगा. इससे निवेश प्रक्रिया में तेजी आएगी और बाजार में पूंजी का प्रवाह बेहतर होगा.

फास्ट-ट्रैक सिस्टम से क्या बदला?

नए फ्रेमवर्क के तहत AIF (एलवीएफ यानी बड़े वैल्यू फंड्स को छोड़कर) अपने प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPM) के साथ आवेदन करने के 30 दिन बाद स्कीम लॉन्च कर सकेंगे. इस दौरान यदि नियामक की ओर से कोई रोक या विशेष निर्देश नहीं आता है, तो फंड लॉन्च और निवेशकों को दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं.

पहली बार लॉन्च होने वाली स्कीमों के लिए नियम

पहली बार फंड लॉन्च करने वाले AIF के लिए भी प्रक्रिया को सरल किया गया है. ऐसे फंड या तो SEBI से रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद या आवेदन के 30 दिन पूरे होने के बाद, जो भी बाद में हो अपनी स्कीम शुरू कर सकते हैं. हालांकि, SEBI की ओर से आने वाली टिप्पणियों या सुझावों को स्कीम लॉन्च से पहले शामिल करना अनिवार्य होगा.

पुराने सिस्टम से कैसे अलग है नया फ्रेमवर्क?

पहले SEBI PPM दस्तावेजों की विस्तार से समीक्षा करता था और अपनी टिप्पणियों के बाद ही स्कीम को आगे बढ़ने की अनुमति मिलती थी. इस प्रक्रिया में कई बार संशोधन के कारण देरी होती थी. नया फास्ट-ट्रैक सिस्टम इस देरी को कम करने और प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने के लिए लाया गया है.

मर्चेंट बैंकर और मैनेजर की बढ़ी जिम्मेदारी

अब खुलासों (disclosures) की सटीकता और पूर्णता की जिम्मेदारी पूरी तरह मर्चेंट बैंकरों और AIF मैनेजरों पर होगी. यानी नियामकीय भरोसे के साथ उद्योग पर जवाबदेही भी बढ़ाई गई है.

12 महीने में पूरा करना होगा पहला क्लोज

SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी AIF स्कीम का पहला क्लोज उसकी लॉन्च पात्रता की तारीख से 12 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए. इससे फंड जुटाने की प्रक्रिया में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित होगी.

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भारत के वैकल्पिक निवेश बाजार को और गति देगा. तेज मंजूरी से फंड मैनेजर जल्दी निवेश शुरू कर पाएंगे, जिससे स्टार्टअप्स, प्राइवेट इक्विटी और अन्य सेक्टरों को समय पर पूंजी मिल सकेगी. कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय पूंजी बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.