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अस्तित्व में आने से पहले ही क्यों फेल हो जाते हैं कुछ स्टार्टअप? BW इवेंट में मिला जवाब

स्टार्टअप की सफलता के लिए उसकी नींव मजबूत होनी चाहिए. यानी आप क्या कारोबार करेंगे, इसका सही चुनाव ही सफलता की कहानी लिखता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

किसी भी बिज़नेस की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपका बिज़नेस मॉडल कैसा है, आपका आइडिया कितना यूनिक है. कई बार लोग आइडिया पर ज्यादा सोच-विचार किए बिना स्टार्टअप के साथ बाजार में कूद पड़ते हैं और परिणामस्वरूप उन्हें उम्मीद अनुरूप रिजल्ट नहीं मिल पाते. ‘BW Disrupt 30 under 30’ में Lead Angels Networks के डायरेक्टर प्रोफेसर ध्रुव नाथ में ऐसी ही कुछ बातों पर प्रकाश डाला. 

बिज़नेस मॉडल सही होना चाहिए 
प्रोफेसर ध्रुव नाथ ने Wedding Gift Registry का उदाहरण देते हुए समझाने की कोशिश की कि स्टार्टअप की सफलता के लिए उसकी नींव मजबूत होनी चाहिए. यानी आप क्या कारोबार करेंगे, इसका सही चुनाव ही सफलता की कहानी लिखता है. कुछ ऐसा, जो लीक से हटकर है, दूसरों की सोच से अलग है, उसके सफल होने की संभावना ज्यादा रहती है. क्योंकि उसकी राह में प्रतियोगी अपेक्षाकृत कम होते हैं. लेकिन तभी जब बिज़नेस मॉडल सही हो और फाउंडेशन मजबूत हो. 

Wedding Gift Registry कांसेप्ट
उन्होंने पश्चिमी देशों के कांसेप्ट Wedding Gift Registry की बात करते हुए कहा कि शादियों में सबसे बड़ी समस्या होती है गिफ्ट की. कई बार एक जैसे बहुत से गिफ्ट मिलते हैं. कुछ गिफ्ट ऐसे भी होते हैं, जिनकी कपल को ज़रूरत ही नहीं होती. ऐसे मामलों में आमतौर पर लोग उस गिफ्ट को आगे बढ़ा देते हैं. यानी किसी अवसर पर दूसरे को दे देते हैं. पश्चिमी देशों में इसका बहुत अच्छा समाधान है - Wedding Gift Registry. यह एक तरह की ई-कॉमर्स साइट है. शादी करने जा रहा कपल इस साइट पर जाता है और अपनी विशलिस्ट बनाता है. उस साइट पर सभी संभावित गिफ्ट आइटम्स मौजूद होते हैं. कपल उसमें से अपनी पसंद के आइटम पिक करके विशलिस्ट तैयार करता है. इसका मतलब है कि शादी में आने वाले गेस्ट तय नहीं करते कि उन्हें क्या गिफ्ट देना है, बल्कि कपल बताता है कि उसे क्या चाहिए. 

भारत में ये है प्रमुख समस्या 
प्रोफेसर नाथ ने बताया कि कपल शादी के कार्ड पर अपनी विशलिस्ट का लिंक देता है, गेस्ट उस लिंक पर जाते हैं और विशलिस्ट में शामिल आइटम में से चुनते हैं कि उन्हें कपल के लिए क्या खरीदना है. उन्होंने कहा, ‘भारत में इस कांसेप्ट के साथ एक कपल मेरे पास आया था. पति-पत्नी की टीम वाकई कमाल थी, उनके पास कई अच्छे पॉइंट थे, लेकिन कुछ ऐसा था जो ठीक नहीं था. वेस्ट में ज़रूर ये कांसेप्ट फेमस है, लेकिन भारत में इसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. जैसे कि सांस्कृतिक समस्याएं (Cultural Issues). सोचिए, यदि कोई लड़की लिस्ट तैयार करे कि उसे शादी में क्या चाहिए, तो घरवालों से लेकर आस-पड़ोस में रहने वाले भी कहेंगे कि – ‘तू डिमांड कर रही है’.

इसलिए नहीं मिल सका फंड
उन्होंने आगे कहा, ‘कपल में कुछ कर दिखाने का जोश था, लेकिन उन्होंने गलत बिज़नेस मॉडल का चुनाव किया. इसलिए उन्हें फंड नहीं मिल सका’. प्रोफेसर ध्रुव नाथ ने युवाओं को सीख देते हुए कहा कि वेस्ट के कांसेप्ट को हू-ब-हू कॉपी करने से बचें, क्योंकि ज़रूरी नहीं कि जो आइडिया वहां काम कर गया, वो यहां भी कर जाए. Wedgift Registry के कांसेप्ट में सुधार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वो कपल आगे बढ़ भी जाता, तो उसे रिवेन्यु जनरेट करने में समस्या होती. लोग विशलिस्ट देखकर अमेज़न आदि साइट्स से सामान खरीद लेते, क्योंकि वहां सामान सस्ता मिलेगा. ऐसे में रिवेन्यु कैसे जनरेट होता? इसके लिए यह किया जा सकता था कि कपल Wedgift रजिस्ट्री बनाता और कहता कि विशलिस्ट हमारे पार्टनर अमेज़न के माध्यम से पूरी होगी. ऐसे में उसका मार्जिन भले ही कम होगा, लेकिन उसे अमेज़न जैसे साइट से प्रतियोगिता नहीं होगी.
 


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