BW CFO 40 अंडर 40 अवार्ड्स की हुई घोषणा, इनको मिला कॉर्पोरेट जगत का यह बेहतरीन सम्मान

आईएमएफ के अनुसार, भारत के वित्तीय क्षेत्र ने हाल के दशकों में कई चुनौतियों का सामना किया है.

Last Modified:
Monday, 01 August, 2022
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नई दिल्लीः (उर्वी श्रीवास्तव) वित्तीय क्षेत्र ग्लोबल इकोनॉमी से लेकर किसी के घर तक सभी को प्रभावित करता है. आम आदमी से लेकर बड़े समूह तक को मुद्रास्फीति और रुपये की कीमतों में उतार-चढ़ाव का खामियाजा भुगतना पड़ता है. आईएमएफ के अनुसार, भारत के वित्तीय क्षेत्र ने हाल के दशकों में कई चुनौतियों का सामना किया है. 2012 के बाद से सकल घरेलू उत्पाद में अंतर के साथ एक बड़ी, नकारात्मक और लगातार क्रेडिट खोने की लड़ाई को लड़ा है. इसलिए फाइनेंस सेक्टर किसी भी देश की सरकार के साथ-साथ आम आदमी के भी मुख्य फोकस में रहता है. 

कंपनियों की जान होती है फाइनेंस डिपार्टमेंट

किसी भी कंपनी के फाइनेंस डिपार्टमेंट का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति करते हैं जिन्हें हम आमतौर पर मुख्य वित्तीय अधिकारी या सीएफओ कहते हैं. सीएफओ किसी भी कंपनी की इकोनॉमी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे कंपनी की वित्तीय सफलता की कुंजी रखते हैं. इसे स्वीकार करते हुए BW Businessworld ने अपने वार्षिक BW CFO 40 अंडर 40 अवार्ड्स का आयोजन किया. विजेताओं का चयन एक मुश्किल प्रक्रिया के बाद किया गया था, जहां उम्मीदवारों को जूरी के सामने खुद के लिए पिच करने की आवश्यकता थी जिसमें अनुभवी पेशेवर शामिल थे. 

पैनल में शामिल थे ये सदस्य

पैनल की अध्यक्षता सेतुरत्नम रवि, मैनेजिंग पार्टनर, रवि राजन एंड कंपनी चेयरमैन, टीएफसीआई; पूर्व अध्यक्ष, बीएसई ने की. इनके अलावा इस पैनल में डॉ. अनुराग बत्रा, Chairman & Editor-in-Chief, BW Business World & Founder, Exchange4Media; सुबोध गुप्ता, Director Finance, BHEL; नितिन पारेख, CFO, Zydus Lifesciences Limited; सोनम डोनकर, CFO, Rohit Group of Companies (Canada); विनोद गुप्ता, Managing Director, VG Learning Destination India Pvt Ltd; नागेश बैलूर, CFO, Randstad India; सीएमए पी. राजू अय्यर, President, The Institute of Cost Accountants of India; हितेश वैद, Chief Financial Officer, Cairn Oil & Gas (unit of Vedanta Limited) शामिल थे. 

इन लोगों को मिला अवॉर्ड

Name Designation Organisation
Aayush Saraswat DGM – Corporate Finance and Treasury InterGlobe Enterprises
Abhinav Jain CFO and Finance Head PharmEasy
Aditi Mittal Head - Investor relations; Media & Corporate Communications; Dalmia Bharat 
Aditya Gandhi Deputy Vice President - Business Planning, Internal Reporting and Investor Relations IndiaFirst Life Insurance Company
Ajay Kr Goel Principal Finance Infosys
Akshay J Sarma CFO axio
Anand Batra CFO Pepperfry
Ankit Jain CFO Arvind SmartSpaces
Ankur Maheshwari Group CFO Freo
Ashrith Rao CFO Asear Healthcare Private
Jagriti Kumar CFO NLB Services
Jaspreet Singh Arora CFO Cogent E Services
Kapil Mantri EVP and Head - Corporate Strategy and M&A Jindal Steel & Power
Kavish Chadha Head of Financial Reporting , Corporate Planning & FICO lead Titan Company
Mayank Sharma Senior Director IIFL Finance
Naveen Bansal CFO – International Markets Cipla
Neeraj Marwaha Vice President Finance, Infra / DF division (Global) HCL Technologies
Niraj Kedia CFO Finolex Industries
Nitesh Soni DGM Finance Birla Corporation
Pallav Sharma CFO Nineroot Technologies
Paras Bafna  Group CFO Tynor Orthotics
Pranesh Kumar CFO Sitics Logistic Solutions
Priyanka Chaudhary CFO RIL – Media Business Jio Studios
Rajiv Kumar Goyal CFO AST Telecom Solar (sub of Applied Solar Technologies India)
Rakesh Dash General Manager - Strategy Bajaj Electricals
Rao Pawan Pranesh DGM Business Finance, Land Mobility Division Tata Advanced Systems
Rohan Pewekar Chief Finance and Strategy officer Pizza Hut India
Rohit Chandak CFO Ayana Renewable Power
Rohit Saxena Senior Director Discovery Communications
Saket Padia  Associate Director - Finance HCL Technologies
Sandeep Kumar Katiyar Group CFO Arya.ag
Sandeep Modi Deputy & Interim CFO Hindustan Zinc
Shobhit Agarwal Group Manager – Financial planning & Analysis HCL Technologies
Shripad Ramanathan General Manager & CFO – Emerging Businesses Wipro Enterprises
Sumit Maheshwari Sr VP Finance Odessa
Uttam Gujrati Global Head - Business Finance Tata Technologies
Vijit Anand  CFO Purplle
Vishal Banthia CFO EverEnviro Resource Management
Yashashree Sardar Head - Business Finance Fino Payments Bank
Vivek Veda Chief Financial Officer Finnovation Tech Solutions (KreditBee)

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गेमिंग सेक्टर में बड़ा दांव: PlaySimple Games लाएगी ₹3150 करोड़ का IPO

PlaySimple Games, स्वीडन की Modern Times Group (MTG) की सब्सिडियरी है. MTG ने साल 2021 में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था. वर्तमान में MTG समूह की कंपनी में 100% हिस्सेदारी है.

Last Modified:
Saturday, 25 April, 2026
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मोबाइल गेमिंग कंपनी PlaySimple Games ने पूंजी बाजार में कदम रखने की तैयारी तेज कर दी है. कंपनी ने ₹3,150 करोड़ तक जुटाने के लिए अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति विनियम बोर्ड (SEBI) के पास जमा कर दिया है. यह इश्यू पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल (OFS) पर आधारित होगा.

OFS के जरिए जुटेगा पूरा पैसा

IPO के तहत कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा. पूरा इश्यू ऑफर-फॉर-सेल होगा, जिसमें प्रमोटर MTGx Gaming Holding AB अपनी हिस्सेदारी बेचेगी. इसका मतलब है कि IPO से जुटाई गई राशि सीधे प्रमोटर के पास जाएगी, कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा.

स्वीडिश ग्रुप की सहायक कंपनी

PlaySimple Games, स्वीडन की Modern Times Group (MTG) की सब्सिडियरी है. MTG ने साल 2021 में इस कंपनी का अधिग्रहण किया था. वर्तमान में MTG समूह की कंपनी में 100% हिस्सेदारी है.

भारत की सबसे बड़ी कैजुअल गेमिंग कंपनी होने का दावा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी वित्त वर्ष 2025 के रेवेन्यू के आधार पर खुद को भारत की सबसे बड़ी “प्योर-प्ले कैजुअल मोबाइल गेमिंग” कंपनी बताती है. भारत में इसका प्रमुख मुकाबला Nazara Technologies से है.

30 लाइव गेम्स और ग्लोबल यूजर बेस

बेंगलुरु स्थित कंपनी के पोर्टफोलियो में 5 प्रमुख कैटेगरी, सर्च, क्रॉसवर्ड, एनाग्राम, वर्ड गेम्स और नॉन-वर्ड पजल शामिल हैं. इन श्रेणियों में कंपनी के पास 30 लाइव कैजुअल मोबाइल गेम्स हैं.

दिसंबर 2025 तक, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में कंपनी के करीब 49.9 लाख डेली एक्टिव यूजर्स थे. इसके अलावा, कंपनी की सहायक कंपनियां इजरायल और सिंगापुर में भी मौजूद हैं.

किन बैंकों को मिली जिम्मेदारी

इस IPO को मैनेज करने के लिए Axis Capital, J.P. Morgan India और Morgan Stanley India को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया गया है.

वित्तीय प्रदर्शन: मुनाफा घटा, रेवेन्यू बढ़ा

कंपनी का कैलेंडर ईयर 2025 में मुनाफा 359 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 521.1 करोड़ रुपये के मुकाबले 31.1% कम है. हालांकि, इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 20.4% बढ़कर 2,259.8 करोड़ रुपये हो गया, जो 2024 में 1,876.9 करोड़ रुपये था.

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### **ग्लोबल स्तर पर कड़ी टक्कर**

अंतरराष्ट्रीय बाजार में PlaySimple Games का मुकाबला Roblox Corporation और Take-Two Interactive Software जैसी दिग्गज कंपनियों से है.

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### **निष्कर्ष**

PlaySimple Games का IPO ऐसे समय आ रहा है जब भारत में गेमिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है. हालांकि, OFS स्ट्रक्चर और घटता मुनाफा निवेशकों के लिए अहम फैक्टर रहेंगे. आने वाले समय में इस IPO को बाजार से कैसा रिस्पॉन्स मिलता है, इस पर नजर रहेगी.
 

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ओडिशा में स्टील सेक्टर को बड़ा बूस्ट: JSW और JFE की ₹32,000 करोड़ की जॉइंट वेंचर डील

JSW और JFE की यह साझेदारी न सिर्फ ओडिशा बल्कि पूरे भारत के स्टील सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. इससे उत्पादन क्षमता, तकनीक और रोजगार, तीनों क्षेत्रों में बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

Last Modified:
Saturday, 25 April, 2026
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जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) और जापान की जेएफई स्टील (JFE Steel Corporation) ने ओडिशा में स्टील उत्पादन बढ़ाने के लिए 50:50 की संयुक्त साझेदारी (JV) बनाने का ऐलान किया है. इस प्रोजेक्ट में करीब ₹32,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जो हाल के वर्षों में इस क्षेत्र का सबसे बड़ा विदेशी समर्थित निवेश माना जा रहा है.

संबलपुर प्लांट की क्षमता 10 MTPA तक बढ़ेगी

इस ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत ओडिशा के संबलपुर स्थित प्लांट में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी. इससे प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 MTPA हो जाएगी. देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार किया जा रहा है.

BPSL के ऑपरेशन नई कंपनी में ट्रांसफर होंगे

समझौते के तहत Bhushan Power and Steel Ltd (BPSL) के इंटीग्रेटेड स्टील ऑपरेशंस को नई जॉइंट वेंचर कंपनी में ट्रांसफर किया जाएगा. इस नई कंपनी का नाम JSW JFE Steel Ltd रखा जाएगा. इसमें JFE की 50% हिस्सेदारी होगी, जिसकी वैल्यू करीब ₹15,750 करोड़ आंकी गई है.

हाई-ग्रेड और स्पेशल स्टील पर फोकस

दोनों कंपनियों ने कहा कि यह साझेदारी न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि हाई-ग्रेड और स्पेशलाइज्ड स्टील के उत्पादन को भी तेज करेगी. इससे भारत के स्टील सेक्टर को तकनीकी मजबूती मिलेगी.

सरकार की मौजूदगी में लॉन्च हुआ नया ब्रांड

इस जॉइंट वेंचर की नई पहचान का अनावरण ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया. इसमें राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी, दोनों कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और भारत में जापान के राजदूत भी मौजूद रहे.

ओडिशा के लिए सबसे बड़ा जापानी निवेश

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि यह राज्य में अब तक का सबसे बड़ा जापानी निवेश है. उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक स्टील उत्पादन को 100 MTPA तक पहुंचाना है. इस प्रोजेक्ट से करीब ₹1 लाख करोड़ के निवेश और 2 लाख से ज्यादा नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं.

JSW और JFE की ताकत का होगा मेल

सज्जन जिंदल, चेयरमैन, JSW ग्रुप ने कहा कि यह साझेदारी JSW की मजबूत क्रियान्वयन क्षमता और JFE की उन्नत तकनीक को एक साथ लाएगी, जिससे भारत में स्टील उत्पादन को नई दिशा मिलेगी. वहीं, योशिहिसा कितानो ने इसे दोनों कंपनियों के सहयोग का अगला चरण बताया.

लोकेशन का मिलेगा बड़ा फायदा

संबलपुर स्थित यह प्लांट रेल और सड़क नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. साथ ही, यह भारत के प्रमुख आयरन ओर (लौह अयस्क) बेल्ट के करीब स्थित है, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता और लागत दोनों में फायदा मिलेगा.

JSW का विस्तार प्लान

JSW Steel की मौजूदा कच्चे स्टील की क्षमता 35.9 MTPA है, जिसमें 1.5 MTPA अमेरिका में शामिल है. कंपनी अगले तीन साल में इसे बढ़ाकर 43.9 MTPA करने की योजना बना रही है. वहीं, JFE Steel जापान की प्रमुख स्टील कंपनियों में से एक है, जो एडवांस टेक्नोलॉजी और स्पेशल स्टील के लिए जानी जाती है.

 


वैश्विक लिक्विडिटी मजबूत, भारत में लौटी निवेशकों की दिलचस्पी; 7 हफ्तों बाद आया पॉजिटिव फ्लो

भारत-केंद्रित फंड्स में बिकवाली का दबाव कम हुआ है. साप्ताहिक आउटफ्लो 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 180 मिलियन डॉलर रह गया.

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Saturday, 25 April, 2026
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वैश्विक बाजारों में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और इसका असर भारत पर भी दिखने लगा है. Elara Capital की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बाद लगातार चौथे हफ्ते वैश्विक लिक्विडिटी मजबूत बनी हुई है. इसी बीच भारत में भी सात हफ्तों बाद पहली बार इक्विटी में शुद्ध निवेश (इनफ्लो) दर्ज किया गया है.

अमेरिका और ग्लोबल फंड्स में मजबूत निवेश

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक महीने में अमेरिकी इक्विटी बाजारों में हर हफ्ते 10 से 22 अरब डॉलर के बीच मजबूत निवेश देखने को मिला. ग्लोबल-मैंडेटेड फंड्स में भी पांच हफ्तों का उच्चतम स्तर दर्ज हुआ, जहां 16 अरब डॉलर का इनफ्लो आया. वहीं, ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (GEM) फंड्स में हर हफ्ते 1 से 2 अरब डॉलर का स्थिर निवेश जारी रहा.

इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में रिकॉर्ड इनफ्लो

इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में 1.4 अरब डॉलर का साप्ताहिक रिकॉर्ड निवेश दर्ज किया गया. इसमें ताइवान आधारित निवेश रणनीतियों का बड़ा योगदान रहा. हालांकि, यूरोप और चीन में पिछले पांच हफ्तों से लगातार निवेशकों की निकासी (रिडेम्प्शन) जारी है, जो वहां के बाजारों पर दबाव बनाए हुए है.

भारत में 7 हफ्तों बाद लौटी पॉजिटिव फ्लो

भारत के लिए यह एक सकारात्मक संकेत रहा कि सात हफ्तों के बाद पहली बार शुद्ध निवेश देखने को मिला. एलोकेशन और डेडिकेटेड फंड्स के जरिए कुल 106 मिलियन डॉलर का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ. इससे पहले लगातार छह हफ्तों में करीब 5 अरब डॉलर की निकासी हुई थी.

बिकवाली का दबाव घटा, लेकिन आउटफ्लो जारी

भारत-केंद्रित फंड्स में बिकवाली का दबाव कम हुआ है. साप्ताहिक आउटफ्लो 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 180 मिलियन डॉलर रह गया. फिर भी, यह भारत-डेडिकेटेड रणनीतियों में लगातार नौवां हफ्ता रहा जब आउटफ्लो दर्ज किया गया.

ETF में निवेश बढ़ा, लॉन्ग-ओनली फंड्स में निकासी

भारतीय बाजार में ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) के जरिए 220 मिलियन डॉलर का निवेश आया. वहीं, लॉन्ग-ओनली फंड्स में 400 मिलियन डॉलर की निकासी जारी रही. अच्छी बात यह रही कि अमेरिकी फंड्स में 225 मिलियन डॉलर का इनफ्लो दर्ज हुआ, जबकि इससे पहले सात हफ्तों में 3.3 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी थी. यह बाजार में स्थिरता के शुरुआती संकेत माने जा रहे हैं.

कमोडिटी बाजार में निवेश सुस्त

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि युद्ध के दौरान कमोडिटी आधारित शेयरों में निवेश घटा था और अब तनाव कम होने के बावजूद इसमें खास सुधार नहीं हुआ है. एनर्जी इक्विटी फंड्स में पिछले तीन हफ्तों से आउटफ्लो धीरे-धीरे कम हुआ है.

सोने में निवेश स्थिर हुआ है, लेकिन यह पहले की तुलना में धीमा है. वहीं, चांदी में जनवरी 2026 से ही कमजोरी बनी हुई है.

विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक धीरे-धीरे जोखिम वाले एसेट्स की ओर लौट रहे हैं. भारत में निवेश प्रवाह का स्थिर होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता दिख रहा है.

वैश्विक स्तर पर बेहतर माहौल और घरेलू बाजार में घटती बिकवाली भारत के लिए राहत भरी खबर है. आने वाले समय में अगर यह रुझान जारी रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है.
 


मुनाफा घटा, रेवेन्यू बढ़ा: रिलायंस ने ₹6 डिविडेंड के साथ पेश किया Q4 रिपोर्ट कार्ड

एक तरफ जहां कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली. वैश्विक चुनौतियों के बीच कंपनी ने अपने विविध कारोबार के दम पर संतुलन बनाए रखा.

Last Modified:
Saturday, 25 April, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का प्रदर्शन मिश्रित रहा. एक तरफ जहां मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली. वैश्विक चुनौतियों के बीच कंपनी ने अपने विविध कारोबार के दम पर संतुलन बनाए रखा.

मुनाफा 13% घटा, 16,971 करोड़ रुपये पर आया

मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13% घटकर 16,971 करोड़ रुपये रह गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह 19,407 करोड़ रुपये था. वहीं, पिछली तिमाही के मुकाबले भी मुनाफे में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई.

रेवेन्यू में 13% की बढ़त, 2.98 लाख करोड़ तक पहुंचा

हालांकि, कंपनी की कुल आय में मजबूती बनी रही. ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 13% बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपये हो गया. यह इशारा करता है कि कंपनी के मुख्य बिजनेस सेगमेंट अब भी मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं.

EBITDA और मार्जिन पर दबाव

ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस की बात करें तो EBITDA में मामूली गिरावट आई और यह 0.3% घटकर 48,588 करोड़ रुपये रह गया. वहीं, EBITDA मार्जिन 200 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 14.9% पर आ गया, जो लागत दबाव और बाजार की चुनौतियों को दर्शाता है.

डिविडेंड का ऐलान

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 6 रुपये के डिविडेंड की सिफारिश की है, जिससे निवेशकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. 

कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और बदलते वैश्विक व्यापार माहौल का असर कारोबार पर पड़ा. उन्होंने कहा कि कंपनी की विविध बिजनेस मौजूदगी और घरेलू बाजार में मजबूत पकड़ ने इन चुनौतियों से निपटने में मदद की.

मुख्य कारोबार से मिली मजबूती

कंपनी के O2C (ऑयल-टू-केमिकल्स), डिजिटल सेवाएं और रिटेल सेगमेंट ने डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की. डिजिटल और रिटेल कारोबार की मजबूती ने ऊर्जा क्षेत्र में आई कमजोरी की भरपाई की.

जियो का प्रदर्शन दमदार, मुनाफा 13% बढ़ा

रिलायंस जियो ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया. कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा 13% बढ़कर 7,935 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 7,022 करोड़ रुपये था.

ARPU और यूजर बेस में भी इजाफा

जियो का औसत प्रति यूजर रेवेन्यू (ARPU) 3.8% बढ़कर 214 रुपये हो गया. साथ ही, कंपनी का ग्राहक आधार लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे भविष्य में डिजिटल सेवाओं से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.

आगे की रणनीति: डिजिटल और AI पर फोकस

जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने संकेत दिया कि कंपनी अब एडवांस कनेक्टिविटी और कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं को देशभर में विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज का चौथी तिमाही का प्रदर्शन यह दिखाता है कि वैश्विक दबावों के बावजूद कंपनी की बुनियादी ताकत बरकरार है. मुनाफे में गिरावट जरूर चिंता का विषय है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और डिजिटल बिजनेस की मजबूती भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है.
 


आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द किया, जमाकर्ताओं के हितों पर जताई चिंता

इस फैसले के बाद बैंक अब किसी भी प्रकार की बैंकिंग या अनुमत गतिविधियां तुरंत प्रभाव से नहीं कर सकेगा.

Last Modified:
Saturday, 25 April, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने बड़ा कदम उठाते हुए पेटीएम (Paytm Payments Bank) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंक का संचालन जमाकर्ताओं और सार्वजनिक हित के प्रतिकूल पाया गया, जिसके चलते इसे बंद (वाइंडिंग-अप) करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द

आरबीआई ने 24 अप्रैल 2026 के आदेश में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22(4) के तहत दिया गया लाइसेंस उसी दिन कारोबार बंद होने के साथ ही रद्द कर दिया. इस फैसले के बाद बैंक अब किसी भी प्रकार की बैंकिंग या अनुमत गतिविधियां तुरंत प्रभाव से नहीं कर सकेगा.

हाई कोर्ट में वाइंडिंग-अप की प्रक्रिया

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि वह बैंक को बंद करने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन दायर करेगा. साथ ही यह भी कहा गया कि बैंक के पास इतनी तरलता (लिक्विडिटी) है कि वह अपने सभी जमाकर्ताओं की राशि वापस कर सकता है.

नियमों के उल्लंघन और प्रबंधन पर सवाल

आरबीआई के अनुसार, बैंक का संचालन इस तरह किया जा रहा था जो जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ था. यह बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की धारा 22(3)(b) का उल्लंघन है.
इसके अलावा, बैंक के प्रबंधन की प्रकृति को भी जमाकर्ताओं और सार्वजनिक हित के लिए हानिकारक माना गया, जो धारा 22(3)(c) के तहत आता है.

आगे संचालन की अनुमति देना उचित नहीं

नियामक ने यह भी कहा कि बैंक को आगे जारी रखने से न तो कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा होगा और न ही सार्वजनिक हित सुरक्षित रहेगा. यह निष्कर्ष धारा 22(3)(e) के तहत दिया गया.
साथ ही, बैंक लाइसेंस से जुड़ी शर्तों का पालन करने में भी विफल रहा, जो धारा 22(3)(g) का उल्लंघन है.

पहले भी लगाए जा चुके थे प्रतिबंध

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है. इससे पहले 11 मार्च 2022 से बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया गया था. इसके बाद 31 जनवरी 2024 और 16 फरवरी 2024 को और सख्त प्रतिबंध लगाए गए, जिनके तहत खातों में नई जमा, क्रेडिट या वॉलेट टॉप-अप पर रोक लगा दी गई थी.

जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित

आरबीआई ने आश्वस्त किया है कि वाइंडिंग-अप प्रक्रिया के दौरान सभी जमाकर्ताओं को उनकी पूरी राशि वापस कर दी जाएगी. इससे यह संकेत मिलता है कि लाइसेंस रद्द होने के बावजूद ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहेगा.


ओडिशा में ₹3,800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मंजूर, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार

इन प्रस्तावों को राज्य स्तरीय सिंगल विंडो क्लीयरेंस अथॉरिटी (SLSWCA) की बैठक में मंजूरी दी गई.

Last Modified:
Friday, 24 April, 2026
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ओडिशा सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए करीब ₹3,800 करोड़ के नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं से राज्य में 7,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जो औद्योगिक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को मिली मंजूरी

इन प्रस्तावों को राज्य स्तरीय सिंगल विंडो क्लीयरेंस अथॉरिटी (SLSWCA) की बैठक में मंजूरी दी गई. यह संस्था औद्योगिक निवेश प्रस्तावों की समीक्षा कर उन्हें तेजी से स्वीकृति देने का कार्य करती है. स्वीकृत परियोजनाएं मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और उभरते उद्योगों सहित कई क्षेत्रों से जुड़ी हैं.

संतुलित क्षेत्रीय विकास पर जोर

सरकार का उद्देश्य इन परियोजनाओं को राज्य के विभिन्न जिलों में लागू कर संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है. इससे न केवल बड़े शहरों बल्कि छोटे क्षेत्रों में भी औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे.

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

अधिकारियों के अनुसार, ये निवेश राज्य के औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन में भी मदद करेंगे. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी.

निवेश आकर्षित करने की रणनीति जारी

ओडिशा लंबे समय से खुद को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए राज्य सरकार नीतिगत समर्थन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरल मंजूरी प्रक्रिया पर जोर दे रही है. साथ ही पारंपरिक उद्योगों के साथ नए क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित करने की रणनीति अपनाई जा रही है.

बदलते आर्थिक माहौल में प्रतिस्पर्धा

हाल के समय में राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. सप्लाई चेन में बदलाव और घरेलू मांग के बढ़ते प्रभाव के बीच ओडिशा का यह कदम औद्योगिक विकास को रोजगार सृजन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.


इंजीनियरिंग सेक्टर में बड़ी डील, Unimech ने Hobel Bellows के अधिग्रहण का किया ऐलान

यह अधिग्रहण Unimech की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें कंपनी क्षमता-आधारित ग्रोथ, संतुलित पूंजी निवेश और ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध बनाने पर जोर दे रही है.

Last Modified:
Friday, 24 April, 2026
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यूनिमैक एयरोस्पेस (Unimech Aerospace and Manufacturing Limited) ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाते हुए होबेल बेलोस (Hobel Bellows) के अधिग्रहण के लिए अंतिम समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह प्रस्तावित डील कंपनी के वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और क्षमता-आधारित प्रिसिजन इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. कंपनी का कहना है कि यह अधिग्रहण उसे हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने में मदद करेगा. हालांकि, यह सौदा अभी मानक शर्तों के पूरा होने के अधीन है.

क्षमता आधारित विकास पर फोकस

यह अधिग्रहण Unimech की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें कंपनी क्षमता-आधारित ग्रोथ, संतुलित पूंजी निवेश और ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध बनाने पर जोर दे रही है. इस कदम के जरिए कंपनी प्रिसिजन कंपोनेंट्स से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू इंजीनियर्ड असेंबली और सब-सिस्टम्स के क्षेत्र में विस्तार करना चाहती है.

Hobel Bellows का बिजनेस प्रोफाइल

Hobel Bellows मेटैलिक बेलोज, एक्सपेंशन जॉइंट्स, फ्लेक्सिबल ट्यूबिंग कंपोनेंट्स और प्रिसिजन इंजीनियर्ड असेंबली का एक प्रमुख निर्माता है. इसके प्रोडक्ट्स ऑटोमोबाइल, रेलवे, पावर ट्रांसमिशन, वाटर और गैस जैसे कई सेक्टर्स में उपयोग होते हैं. कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट विशाखापत्तनम के दुव्वाड़ा SEZ में स्थित है, जिसका क्षेत्रफल करीब 1.8 लाख वर्ग फुट है. यहां डिजाइन, टेस्टिंग और वैलिडेशन की इन-हाउस सुविधाएं उपलब्ध हैं.

Hobel Bellows के पास ISO 9001:2015 और IATF 16949:2016 जैसे क्वालिटी सर्टिफिकेशन हैं, जो इसकी उच्च गुणवत्ता और प्रोसेस अनुशासन को दर्शाते हैं. कंपनी का करीब 90% बिजनेस एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड है और यह यूके, अमेरिका, सिंगापुर और चीन जैसे बाजारों में सेवाएं देती है.

वित्त वर्ष 31 मार्च 2026 तक के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, कंपनी ने 123.7 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया है, साथ ही मजबूत मुनाफा और स्थिर कैश फ्लो बनाए रखा है.

टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में बढ़त

Hobel Bellows के जुड़ने से Unimech को कई उन्नत मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं मिलेंगी, जिनमें शामिल हैं:

1. हाइड्रोफॉर्मिंग और एलास्टोमर फॉर्मिंग जैसी मेटल फॉर्मिंग टेक्नोलॉजी
2. प्रिसिजन पाइप बेंडिंग और फैब्रिकेशन
3. TIG, रोबोटिक और सीम वेल्डिंग जैसी एडवांस वेल्डिंग तकनीक
4. अत्याधुनिक टेस्टिंग और क्वालिटी वैलिडेशन सिस्टम

इन क्षमताओं से Unimech अब केवल पार्ट्स बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी इंजीनियर्ड असेंबली और सिस्टम सॉल्यूशंस प्रदान कर सकेगा.

रणनीतिक तालमेल और संभावित फायदे

यह अधिग्रहण Unimech की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है और इससे कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद है:

1.  मौजूदा ग्राहकों के साथ बिजनेस बढ़ाने का मौका
2. रेलवे, इंडस्ट्रियल और पावर सेक्टर में विस्तार
3. एयरोस्पेस, डिफेंस, एनर्जी और मेडिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों में मजबूती
4. तेजी से बाजार में नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की क्षमता
5. बेहतर मुनाफा और मजबूत फाइनेंशियल प्रोफाइल

Hobel का एक्सपोर्ट-आधारित मॉडल Unimech को एक भरोसेमंद वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा.

मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया

कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Anil Puthan ने इस डील पर कहा, “यह अधिग्रहण Unimech की ग्रोथ यात्रा में एक अहम पड़ाव है. Hobel Bellows सिर्फ नए प्रोडक्ट्स नहीं जोड़ता, बल्कि हमारी तकनीकी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी मजबूत करता है. यह हमें ग्राहकों को अधिक वैल्यू-एडेड और इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस देने में सक्षम बनाएगा. साथ ही, कंपनी की मुनाफाखोरी और कैश फ्लो को भी मजबूत करेगा.”

इस अधिग्रहण के साथ Unimech एक मजबूत, स्केलेबल और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. कंपनी का फोकस आगे भी ऐसे रणनीतिक अवसरों पर रहेगा, जो उसकी तकनीकी क्षमता बढ़ाएं, ग्राहकों के साथ संबंध मजबूत करें और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन करें.
 


IDBI Bank विनिवेश पर सरकार अडिग, वित्त मंत्री के बयान से शेयरों में जोरदार उछाल

वित्त मंत्री के बयान के तुरंत बाद IDBI Bank के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई. कारोबार के दौरान शेयर करीब 8% चढ़कर एक महीने के उच्चतम स्तर 79.90 रुपये तक पहुंच गया.

Last Modified:
Friday, 24 April, 2026
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सरकारी हिस्सेदारी बिक्री को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कर दिया है कि आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में विनिवेश की प्रक्रिया जारी रहेगी. उनके इस बयान के बाद बैंक के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला, जिससे निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत हुआ है.

शेयर बाजार में तेजी, 8% तक उछले भाव

वित्त मंत्री के बयान के तुरंत बाद IDBI Bank के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई. कारोबार के दौरान शेयर करीब 8% चढ़कर एक महीने के उच्चतम स्तर 79.90 रुपये तक पहुंच गया. हालांकि, बाद में थोड़ी मुनाफावसूली देखी गई और दोपहर करीब 2:20 बजे यह 3.24% की बढ़त के साथ 76.12 रुपये पर कारोबार करता नजर आया. ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया, करीब 36 करोड़ शेयरों का लेन-देन हुआ, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले कई गुना ज्यादा था.

सरकार बेचेगी 30% से अधिक हिस्सेदारी

सरकार लंबे समय से IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी घटाने की योजना पर काम कर रही है. मौजूदा योजना के तहत सरकार बैंक में अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. इसके साथ ही Life Insurance Corporation of India (LIC) भी अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचने की इच्छुक है. वित्त मंत्री ने कहा कि प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण पहले ही स्पष्ट किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार इस दिशा में आगे बढ़ेगी.

बैंकिंग सेक्टर में कंसॉलिडेशन पर भी चर्चा

पुणे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान सीतारमण ने बैंकिंग सेक्टर में संभावित कंसॉलिडेशन पर भी टिप्पणी की. उन्होंने बताया कि एक उच्च-स्तरीय कमेटी इस मुद्दे पर विचार कर सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वित्त मंत्रालय के स्तर पर कंसॉलिडेशन को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.

ओपन आर्किटेक्चर मॉडल पर जोर

वित्त मंत्री ने बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर के तालमेल पर भी बात की. उन्होंने संकेत दिया कि कमेटी “ओपन आर्किटेक्चर” मॉडल पर विचार करेगी, जिससे बैंकों को इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने के लिए एक से अधिक कंपनियों के साथ साझेदारी की अनुमति मिल सकती है. इससे ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है.

बोली प्रक्रिया में संशोधन की संभावना

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IDBI Bank के लिए पहले आए बिड रिजर्व प्राइस से काफी कम थे. ऐसे में सरकार संभावित निवेशकों से संशोधित बोली मंगवा सकती है. बताया जा रहा है कि Fairfax Financial Holdings और Emirates NBD जैसे बड़े निवेशकों ने बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी खरीदने में रुचि दिखाई है.

वित्त मंत्री के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि सरकार IDBI Bank के निजीकरण को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है. बाजार की प्रतिक्रिया भी इसी दिशा में संकेत देती है कि निवेशक इस कदम को सकारात्मक मान रहे हैं. अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संशोधित बिड्स और आगे की प्रक्रिया किस रफ्तार से पूरी होती है.
 


Infosys Q4FY26: मुनाफे में 21% की छलांग, निवेशकों के लिए ₹25 डिविडेंड का ऐलान

इंफोसिस का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी तिमाही के ₹7,033 करोड़ की तुलना में बढ़कर ₹8,501 करोड़ हो गया.

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Friday, 24 April, 2026
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देश की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 21% बढ़कर ₹8,501 करोड़ पहुंच गया है. वहीं, इस दौरान रेवेन्यू में भी दो अंकों की बढ़त देखने को मिली है. मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर दबाव नजर आया और हल्की गिरावट दर्ज की गई.

मुनाफे और रेवेन्यू दोनों में मजबूत ग्रोथ

इंफोसिस का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी तिमाही के ₹7,033 करोड़ की तुलना में बढ़कर ₹8,501 करोड़ हो गया. यह बढ़त कंपनी के मजबूत कॉन्ट्रैक्ट्स और बड़े डील्स का परिणाम मानी जा रही है. कंपनी का कुल रेवेन्यू भी इस तिमाही में ₹46,402 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹40,925 करोड़ की तुलना में लगभग 13.4% ज्यादा है. तिमाही आधार पर भी प्रदर्शन बेहतर रहा है. Q3FY26 के मुकाबले मुनाफा 28% बढ़ा है, जबकि रेवेन्यू में लगभग 2% की वृद्धि दर्ज की गई है.

शेयरधारकों के लिए ₹25 का डिविडेंड

कंपनी ने निवेशकों को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹25 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है. इसके तहत रिकॉर्ड डेट 10 जून 2026 तय की गई है, जबकि भुगतान की तारीख 25 जून 2026 रखी गई है. यह फैसला शेयरधारकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

FY27 के लिए ग्रोथ गाइडेंस

इंफोसिस ने अगले वित्त वर्ष (FY27) के लिए रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 1.5% से 3.5% के बीच रखा है. कंपनी का मानना है कि ऑपरेटिंग मार्जिन 20% से 22% के दायरे में बना रहेगा. Q4FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 21% रहा, जो पिछले साल के मुकाबले स्थिर है, लेकिन पिछली तिमाही की तुलना में इसमें सुधार देखने को मिला है.

डॉलर रेवेन्यू और बाजार प्रतिक्रिया

डॉलर के हिसाब से कंपनी की कमाई $5,040 मिलियन रही. इसमें तिमाही आधार पर 6.6% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि सालाना आधार पर 1.2% की गिरावट देखने को मिली. नतीजों के बाद Infosys के ADR में प्री-मार्केट ट्रेडिंग के दौरान लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ है कि निवेशक भविष्य को लेकर अभी सतर्क रुख अपना रहे हैं.

मैनेजमेंट का बयान और AI रणनीति

इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख के अनुसार, FY26 में कंपनी का प्रदर्शन स्थिर और मजबूत रहा है. इस दौरान Infosys को लगभग $14.9 बिलियन के बड़े डील्स मिले हैं, जो इसकी मजबूत ग्लोबल पकड़ को दर्शाते हैं. कंपनी अब AI-First रणनीति पर तेजी से काम कर रही है और डिजिटल तथा टेक्नोलॉजी सेवाओं का विस्तार कर रही है ताकि नए क्लाइंट्स को आकर्षित किया जा सके.

आगे की दिशा और AGM

इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 23 जून 2026 को आयोजित की जाएगी. कंपनी आने वाले समय में AI और डिजिटल सेवाओं को अपने विकास का मुख्य आधार बनाने पर फोकस कर रही है.

कुल मिलाकर इंफोसिस के Q4FY26 नतीजे मजबूत रहे हैं. मुनाफा और रेवेन्यू दोनों में अच्छी बढ़त देखने को मिली है. हालांकि, शेयर बाजार की हल्की गिरावट यह संकेत देती है कि निवेशक अभी भी वैश्विक टेक सेक्टर और भविष्य की ग्रोथ को लेकर सावधानी बरत रहे हैं.


वैश्विक बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: रिपोर्ट

मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में 53.51% की तेज बढ़ोतरी हुई, जिसने वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी. साथ ही, अमेरिकी डॉलर रुपये के मुकाबले 4.26% मजबूत हुआ, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा.

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Friday, 24 April, 2026
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वैश्विक बाजारों में तेज बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी साफ दिखा. मार्च 2026 के दौरान निवेशकों की जोखिम से दूरी और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार को नीचे खींच दिया. मोतीलाल ओसवाल म्युचुअल फंड (Motilal Oswal Mutual Fund) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजारों में मार्च के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 में 11.31% की गिरावट आई, जबकि निफ्टी नेक्स्ट 50 13.43% लुढ़क गया. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी क्रमशः 11.06% और 10.03% तक गिर गए, जिससे बाजार में व्यापक दबाव देखने को मिला.

वैश्विक बाजारों का भी यही हाल
अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. S&P 500 7.78% गिरा, जबकि Nasdaq 100 में 8.04% की गिरावट आई. Dow Jones Industrial Average भी 7.68% नीचे रहा. विकसित देशों में जर्मनी 13.26% और जापान 12.16% गिरा, जबकि यूनाइटेड किंगडम में अपेक्षाकृत कम 8.64% की गिरावट दर्ज की गई. उभरते बाजारों में चीन और ब्राजील में सीमित गिरावट रही, जबकि दक्षिण अफ्रीका और कोरिया में 20% से अधिक गिरावट आई.

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में 53.51% की तेज बढ़ोतरी हुई, जिसने वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी. साथ ही, अमेरिकी डॉलर रुपये के मुकाबले 4.26% मजबूत हुआ, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा.

कीमती धातुओं में गिरावट
जहां तेल की कीमतें बढ़ीं, वहीं सोना और चांदी में गिरावट देखी गई. सोना 13.27% और चांदी 21.37% तक गिर गए, जो कमजोर मांग का संकेत है.

सेक्टोरल स्तर पर भारी नुकसान
भारतीय बाजार में अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे. बैंकिंग सेक्टर 16.94% गिरा, ऑटो 15.59% और रियल एस्टेट 16.58% नीचे आया. एफएमसीजी सेक्टर में भी 10.96% की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहे. आईटी में 5.04% और हेल्थकेयर में 4.51% की सीमित गिरावट रही.

विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी
मार्च में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1,25,736 करोड़ रुपये की भारी निकासी की, जबकि पिछले महीने 37,804 करोड़ रुपये का निवेश आया था. घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी 91,511 करोड़ रुपये की निकासी के साथ बाजार पर दबाव बढ़ाते दिखे.

घरेलू संकेतक मिले-जुले
हालांकि कुछ घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहे. जीएसटी संग्रह 2,00,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो आर्थिक गतिविधि में मजबूती दर्शाता है. वहीं, महंगाई (CPI) 2.75% से बढ़कर 3.21% हो गई. बेरोजगारी दर 6.70% से बढ़कर 7.00% हो गई. कम्पोजिट PMI 59.30 से घटकर 56.50 पर आ गया, जो आर्थिक गति में थोड़ी नरमी का संकेत है.

फिक्स्ड इनकम और क्रिप्टो का प्रदर्शन
इक्विटी के मुकाबले फिक्स्ड इनकम बाजार स्थिर रहे. निफ्टी लिक्विड इंडेक्स ने 0.54% रिटर्न दिया. क्रिप्टो बाजार में अपेक्षाकृत मजबूती दिखी. Bitcoin 0.70% और Ethereum 3.45% तक बढ़े.

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई का दबाव और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार की दिशा तय करेंगे. निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि बाजार में अस्थिरता अभी जारी रह सकती है.

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