Budget 2023: क्या टैक्सपेयर्स के लिए खुशखबरी सुनाएंगी वित्त मंत्री? ये है इसका जवाब  

बजट की तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार टैक्सपेयर्स को कोई राहत देने जा रही है.

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Thursday, 29 December, 2022
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फरवरी में पेश होने वाले बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं. टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि सरकार उन्हें कुछ राहत प्रदान करे और माना जा रहा है कि सरकार उनकी ये मुराद पूरी कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार 2023-24 के आगामी बजट में आयकर छूट की सीमा को बढ़ा सकती है. ये सीमा अभी 2.5 लाख रुपए है जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपए किया जा सकता है. 

क्या है मौजूदा व्यवस्था
मौजूदा व्यवस्था की बात करें, तो 2.5 लाख रुपए की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता. 60-80 वर्ष की आयु वर्ग के के मामले में, यह 3 लाख और 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए 5 लाख रुपए है. टैक्स स्लैब की बात करें, तो 2.5-5 लाख तक की सालाना इनकम पर 5% टैक्स, 5-10 लाख तक की सालाना इनकम पर 20% टैक्स और 10 लाख से ज्यादा की सालाना इनकम पर 30% टैक्स लगता है. 

2014 के बाद बदलाव नहीं
मोदी सरकार ने 2014 में आयकर की सीमा में बदलाव किया था. उस सयम 2 लाख की ल‍िम‍िट को बढ़ाकर ढाई लाख किया गया था. दरअसल, वो मोदी सरकार का पहला आम बजट था, इसलिए जनता को लुभाने की कोशिश की गई थी. उसके बाद से सरकार को आर्थिक मोर्चे पर जब परेशानी का सामना करना पड़ा तो राहत की बात हवा हो गई. अब 2023 में मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश करने वाली है. लिहाजा, माना जा रहा है कि इसे लोकलुभावन बनाने की कोशिश रहेगी.

वित्त मंत्रालय ने मांगे सुझाव
व‍ित्‍त मंत्रालय की तरफ से बजट को लेकर सुझाव मांगे जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स को लेकर सुझाव मांगा था क‍ि न्यू टैक्स रिजीम में क‍ितना सुधार क‍िया जा सकता है. संभावना है कि इस बार सरकार नई और पुरानी दोनों तरह की टैक्स र‍िजीम में बदलाव कर सकती है. गौरतलब है कि पिछले बजट में भी उम्‍मीद थी कि सरकार मध्‍यम वर्ग को टैक्‍स से राहत देगी. लेकिन, ऐसा नहीं किया गया. यदि इस बार अगर टैक्स स्‍लैब में बदलाव करते हुए आयकर सीमा को बढ़ाया जाता है, तो इसका सबसे ज्‍यादा फायदा मध्‍यम वर्ग को होगा. 


कर्नाटक में FDI का बड़ा उछाल, वित्त वर्ष 2026 में विदेशी निवेश करीब दोगुना होकर 13 अरब डॉलर पहुंचा

टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में बढ़ते निवेश से राज्य को मिला फायदा

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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कर्नाटक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य ने 13 अरब डॉलर का FDI इक्विटी निवेश आकर्षित किया, जो पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना है. टेक्नोलॉजी सेक्टर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में बढ़ते निवेश ने राज्य में विदेशी पूंजी प्रवाह को मजबूत किया है.

टेक और GCC विस्तार से बढ़ा निवेश

कर्नाटक में निवेश बढ़ने की सबसे बड़ी वजह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग और वैश्विक टेक कंपनियों द्वारा अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का विस्तार करना रहा है. राज्य के मजबूत टेक इकोसिस्टम, कुशल मानव संसाधन और आईटी सेक्टर में लंबे समय से बनी पकड़ ने विदेशी कंपनियों को आकर्षित किया है.

टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आने से कर्नाटक देश के सबसे तेजी से उभरते निवेश केंद्रों में शामिल हो गया है.

महाराष्ट्र अब भी सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्ता

हालांकि, FDI आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र अब भी देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है. लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में विदेशी निवेश प्रवाह में गिरावट दर्ज की गई है. इसके उलट कर्नाटक ने तेज वृद्धि दर्ज करते हुए निवेश के लिहाज से अपनी स्थिति और मजबूत की है.

GCC विस्तार से रोजगार के नए अवसर

विशेषज्ञों के मुताबिक, कर्नाटक में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का लगातार विस्तार आने वाले समय में निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा देगा. बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन केंद्रों का विस्तार कर रही हैं, जिसका सबसे ज्यादा फायदा कर्नाटक जैसे टेक हब को मिल रहा है.

कर्नाटक की यह बढ़त भारत के FDI परिदृश्य में राज्य की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है और इसे देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में और मजबूत स्थिति प्रदान करती है.
 

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अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 10% किया, जबरन मजदूरी नियमों में बदलाव से मिली राहत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जारी एक मेमोरेंडम में कहा कि व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के बाद उन देशों से आने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाया जाएगा, जिन्होंने जबरन मजदूरी से जुड़े प्रतिबंधों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं.

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Friday, 24 July, 2026
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अमेरिका ने भारत को टैरिफ मोर्चे पर राहत दी है. अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाने का फैसला किया है, जबकि पहले भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. यह राहत भारत की ओर से जबरन मजदूरी (Forced Labour) से तैयार किए गए सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए विदेश व्यापार नीति में किए गए बदलाव के बाद मिली है.

भारत समेत 17 देशों पर 10% टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जारी एक मेमोरेंडम में कहा कि व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के बाद उन देशों से आने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाया जाएगा, जिन्होंने जबरन मजदूरी से जुड़े प्रतिबंधों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं.

अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है. इनमें से भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10% टैरिफ लगाया गया है, जबकि बाकी 43 देशों पर 12.5% शुल्क लागू होगा.

भारत ने बदली थी विदेश व्यापार नीति

अमेरिकी प्रशासन ने अपने फैसले में भारत के उस कदम का जिक्र किया है, जिसमें नई दिल्ली ने 14 जून को विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का प्रावधान किया था. अमेरिका का कहना है कि इस तरह के नियम लागू करने से वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा होगी और व्यापार में असमानता को कम करने में मदद मिलेगी.

किन सामानों पर नहीं लगेगा शुल्क?

अमेरिका ने कुछ उत्पादों और कच्चे माल को नए शुल्क से छूट दी है. ऐसे कच्चे माल जिन पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, उन्हें शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है. इसके अलावा ऐसे उत्पाद, जिनका अमेरिका में पर्याप्त उत्पादन संभव नहीं है या जिनसे अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है, उन्हें भी छूट दी गई है.

अमेरिका-भारत व्यापार पर असर

अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है. वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 141 अरब डॉलर रहा था. इसमें भारत का निर्यात लगभग 87.3 अरब डॉलर था.

विशेषज्ञों का मानना है कि 12.5% से घटाकर 10% किया गया टैरिफ प्रतिशत के लिहाज से भले ही छोटा बदलाव है, लेकिन यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत है.

व्यापार वार्ता के बीच आया फैसला

भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से शुरू की गई दोनों जांचों का विरोध किया था. भारत का कहना है कि इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत के तहत चर्चा की जा सकती है.

उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, टैरिफ में यह कटौती दिखाती है कि अमेरिका व्यापार नियमों को लागू करने के साथ-साथ भारत के साथ रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को भी संतुलित रखना चाहता है.
 


जेफ बेजोस फिर लौटे ऑपरेशनल भूमिका में, बोले- AI ने बदल दी मेरी रिटायरमेंट की योजना

Amazon CEO पद छोड़ने के बाद दोबारा ऑपरेशनल रोल में लौटे बेजोस, इंडस्ट्रियल AI स्टार्टअप बना मुख्य फोकस

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Friday, 24 July, 2026
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अमेरिकी कारोबारी और Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रही तेज प्रगति ने उन्हें दोबारा सक्रिय नेतृत्व की भूमिका में लौटने के लिए प्रेरित किया. Amazon के CEO पद से हटने के कुछ साल बाद बेजोस अब इंडस्ट्रियल AI स्टार्टअप Prometheus पर अपना ज्यादा समय दे रहे हैं. उनका मानना है कि AI इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रहा है, जिससे खुद को इससे दूर रखना मुश्किल था.

Prometheus पर बेजोस का मुख्य फोकस

मीडिया से बातचीत में जेफ बेजोस ने बताया कि वह अब AI स्टार्टअप Prometheus को को-CEO विक बजाज के साथ मिलकर लीड कर रहे हैं. इसके अलावा वह Amazon के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और स्पेस कंपनी Blue Origin की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.

बेजोस ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस तेजी से इंडस्ट्री को बदल रहा है, उसे देखते हुए वह "सिर्फ दर्शक बनकर नहीं रह सकते थे". उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने Prometheus में निवेशक के तौर पर निवेश किया था, लेकिन बाद में कंपनी में सक्रिय ऑपरेशनल भूमिका संभाल ली.

क्या करती है Prometheus?

Prometheus ऐसे AI मॉडल विकसित कर रही है, जो इंजीनियरों को फिजिकल प्रोडक्ट्स के डिजाइन, टेस्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा तेज और प्रभावी बनाने में मदद कर सकें. कंपनी का फोकस उपभोक्ताओं के लिए बनाए जाने वाले AI चैटबॉट और असिस्टेंट से अलग है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Prometheus ने हाल ही में नई फंडिंग जुटाई है और कंपनी का वैल्यूएशन करीब 41 अरब डॉलर आंका गया है. यह इंडस्ट्रियल AI में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दिखाता है.

तेजी से बढ़ रहा है इंडस्ट्रियल AI बाजार

इंडस्ट्रियल AI अब AI इकोसिस्टम के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हो रहा है. कंपनियां इसका इस्तेमाल प्रोडक्ट डिजाइन, इंजीनियरिंग, सिमुलेशन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए कर रही हैं.

कंज्यूमर AI एप्लिकेशन की तुलना में इंडस्ट्रियल AI का उद्देश्य एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाना और नए उत्पादों के विकास की प्रक्रिया को तेज करना है.

Amazon भी बढ़ा रही AI पर पकड़

Amazon ने भी CEO एंडी जेसी के नेतृत्व में अपनी AI रणनीति को मजबूत किया है. कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया है और Nova नाम से फाउंडेशन AI मॉडल विकसित किए हैं. इसके अलावा Amazon ने Amazon Bedrock प्लेटफॉर्म को मजबूत किया है और AI स्टार्टअप Anthropic में अरबों डॉलर का निवेश किया है. बेजोस ने कहा कि वह Amazon की लंबी अवधि की AI रणनीति का समर्थन जारी रखेंगे, हालांकि उनका मौजूदा फोकस Prometheus पर है.

AI इंसानों की जगह नहीं, क्षमता बढ़ाएगा: बेजोस

जेफ बेजोस का मानना है कि AI इंसानों को पूरी तरह बदलने के बजाय उनकी क्षमताओं को बढ़ाने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि AI इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में आने वाली बाधाओं को दूर कर उत्पादकता बढ़ा सकता है.

उनके अनुसार, AI की मदद से इंजीनियर नए विचारों और इनोवेशन पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे और फिजिकल प्रोडक्ट्स की डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सकेगा.

AI की रेस में बढ़ रही है प्रतिस्पर्धा

बेजोस की सक्रिय भूमिका में वापसी ऐसे समय में हुई है जब टेक कंपनियां और स्टार्टअप AI के क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रहे हैं. जहां अब तक जनरेटिव AI असिस्टेंट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित रहा है, वहीं इंडस्ट्रियल AI में भी निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है.

जेफ बेजोस का दोबारा ऑपरेशनल भूमिका में आना इस बात का संकेत है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिलिकॉन वैली के बड़े उद्यमियों और निवेशकों की प्राथमिकताओं को बदल रहा है. कंपनियां अब कंज्यूमर AI के साथ-साथ एंटरप्राइज और इंडस्ट्रियल AI के भविष्य पर भी बड़ा दांव लगा रही हैं.


ई-कॉमर्स कंपनियों को बड़ी राहत, निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल में FDI को सरकार की मंजूरी

इस फैसले से Amazon और Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.

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Friday, 24 July, 2026
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केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) से जुड़ी ई-कॉमर्स नीति में बड़ा बदलाव करते हुए विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों को भारत में बने उत्पादों के निर्यात के लिए इन्वेंटरी (स्टॉक) रखने की अनुमति दे दी है. इस फैसले से Amazon और Walmart के स्वामित्व वाली Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.

निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल को मिली मंजूरी

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने प्रेस नोट-3 (2026 सीरीज) जारी कर भारत में निर्मित और उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दे दी है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए Amazon के प्रवक्ता ने कहा कि नई नीति भारतीय कारोबारियों, खासकर छोटे शहरों के निर्माताओं और MSME को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेगी. कंपनी ने कहा कि वह 2030 तक भारत से 80 अरब डॉलर के संचयी निर्यात के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और यह फैसला 'ब्रांड इंडिया' को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा.

पहले क्या था नियम?

अब तक सरकार मार्केटप्लेस आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में 100% FDI की अनुमति देती थी, लेकिन इन्वेंटरी आधारित मॉडल में विदेशी निवेश पर रोक थी. नए फैसले के बाद केवल भारत में बने सामान के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित मॉडल में FDI की मंजूरी दी गई है. हालांकि, घरेलू बाजार के लिए विदेशी कंपनियां अब भी इन्वेंटरी मॉडल के तहत कारोबार नहीं कर सकेंगी.

क्या होता है इन्वेंटरी और मार्केटप्लेस मॉडल?

इन्वेंटरी आधारित मॉडल में ई-कॉमर्स कंपनी खुद सामान का स्टॉक रखती है और सीधे ग्राहकों को बेचती है. वहीं, मार्केटप्लेस मॉडल में कंपनी केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है, जहां विक्रेता और खरीदार आपस में लेनदेन करते हैं. इस मॉडल में कंपनी खुद स्टॉक नहीं रखती.

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की यह अधिसूचना लंबे समय से चली आ रही नीतिगत अस्पष्टताओं को दूर करती है. इससे ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्यात कारोबार में अधिक स्पष्टता मिलेगी और भारत के विनिर्माण तथा निर्यात क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
 


बाजार में आज क्या लौटेगी रौनक? लगातार चार दिन की गिरावट के बाद इन ट्रिगर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर

गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47% गिरकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53% टूटकर 23,869.60 अंक पर आ गया.

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Friday, 24 July, 2026
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घरेलू शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद आज निवेशकों की नजर बाजार की शुरुआती चाल पर रहेगी. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, तिमाही नतीजे और कई कंपनियों से जुड़ी अहम घोषणाएं आज बाजार की दिशा तय कर सकती हैं. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 363.66 अंक और निफ्टी 126.65 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए थे.

लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ था बाजार

गुरुवार को कारोबार के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर घरेलू शेयर बाजार पर साफ दिखा. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47% गिरकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53% टूटकर 23,869.60 अंक पर आ गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 400 अंक से अधिक और निफ्टी 23,900 के नीचे तक फिसल गया था.

इन ब्लूचिप शेयरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 17 गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा दबाव अदाणी पोर्ट्स पर रहा, जिसके शेयर 2.26% टूट गए. इसके अलावा बजाज फाइनेंस, इंडिगो, एक्सिस बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, एसबीआई, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, इटरनल, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.

सेक्टोरल इंडेक्स में कहां रहा सबसे ज्यादा दबाव?

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी केमिकल और निफ्टी ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा दबाव में रहे. वहीं निफ्टी मीडिया और निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया. इससे साफ है कि निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी जारी रखी, जबकि जोखिम वाले सेक्टर्स में मुनाफावसूली देखने को मिली.

आज इन शेयरों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर

आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते उनके शेयर निवेशकों के फोकस में रहेंगे. गांधार ऑयल रिफाइनरी इंडिया में सोसाइटी जेनरल ने 19.22 करोड़ रुपये में 0.7% हिस्सेदारी खरीदी है. हिंदाल्को इंडस्ट्रीज ने अगले तीन वर्षों में भारत में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना का ऐलान किया है. इंडिगो को जून तिमाही में 238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि साइएंट का तिमाही शुद्ध लाभ 90% बढ़कर 104 करोड़ रुपये पहुंच गया है.

इसके अलावा लॉजिस्टिक्स कंपनी शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज में Eight Roads, Flipkart और IMM India Fund 9.08% तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं. ओसवाल पंप्स में VQ FasterCap Fund ने 0.52% हिस्सेदारी बेची है. ई-कॉमर्स कंपनी मीशो का तिमाही घाटा घटकर 133 करोड़ रुपये रह गया है. आईटी कंपनी कोफोर्ज ने अपना नया AI ऑपरेटिंग सिस्टम 'Coforge Nuuron' लॉन्च किया है. वहीं, स्विगी के बोर्ड ने विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49.5% तक तय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. 

आज बाजार की चाल किन फैक्टर्स से तय होगी?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आज निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, वैश्विक बाजारों के संकेत, रुपये की चाल और पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर रहेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो घरेलू बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या क्रूड ऑयल में और तेजी आने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


Raydean Enterprises ने जुटाए ₹200 करोड़, रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन कारोबार को मिलेगा विस्तार

कंपनी के अनुसार, यह फंड जुटाव उसके इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, एग्री-सोलर माउंटिंग स्ट्रक्चर में विशेषज्ञता, EPC और ट्रांसमिशन कारोबार के विस्तार तथा भारत के लंबी अवधि के रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड आधुनिकीकरण अभियान में उसकी भूमिका पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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जयपुर. रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और ऊर्जा दक्षता क्षेत्र में काम करने वाली Raydean Enterprises Limited ने इक्विटी और डेट के मिश्रण से ₹200 करोड़ की पूंजी जुटाई है. कंपनी ने बताया कि इस फंडिंग में संस्थागत निवेशकों, फैमिली ऑफिस और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) ने इक्विटी के जरिए भागीदारी की, जबकि डेट फंडिंग प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुटाई गई है.

कंपनी के अनुसार, यह फंड जुटाव उसके इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, एग्री-सोलर माउंटिंग स्ट्रक्चर में विशेषज्ञता, EPC और ट्रांसमिशन कारोबार के विस्तार तथा भारत के लंबी अवधि के रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड आधुनिकीकरण अभियान में उसकी भूमिका पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.

नए इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में होगा निवेश

Raydean Enterprises ने बताया कि जुटाई गई इक्विटी राशि का एक बड़ा हिस्सा नए पूरी तरह इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विकास में लगाया जाएगा. इस प्लांट में माउंटिंग स्ट्रक्चर, सोलर ट्रैकर्स, ट्रांसमिशन टावर और अन्य फैब्रिकेशन उत्पादों को एक ही अत्याधुनिक परिसर में तैयार किया जाएगा.

इस सुविधा में इन-हाउस गैल्वनाइजेशन, ऑटोमेटेड फैब्रिकेशन लाइन और आधुनिक क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम शामिल होंगे. कंपनी को उम्मीद है कि इससे लागत दक्षता बढ़ेगी, उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और अधिक वैल्यू-एडेड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

भारत के ऊर्जा बदलाव से बढ़ेंगे अवसर

कंपनी ने कहा कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. सरकार की PM-KUSUM योजना, PM Surya Ghar रूफटॉप सोलर कार्यक्रम और ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से सोलर वैल्यू चेन में लंबे समय तक मांग बनी रहने की उम्मीद है.

इसके अलावा, सोलर ट्रैकर्स का बढ़ता इस्तेमाल और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्ष उत्पादों की बढ़ती मांग भी कंपनी के लिए नए अवसर पैदा कर रही है. Raydean फिलहाल राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में परियोजनाओं पर काम कर रही है.

MD ने कहा- ऊर्जा बदलाव में निभाएंगे अहम भूमिका

Raydean Enterprises Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर समर्थ दक्षिनी ने कहा, "यह फंड जुटाव Raydean की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. कंपनी एक स्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरर से विकसित होकर अब भारत की रिन्यूएबल, ट्रांसमिशन और कंजम्पशन वैल्यू चेन को सपोर्ट करने वाली इंटीग्रेटेड एनर्जी इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म बन चुकी है."

उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा बदलाव और ग्रिड आधुनिकीकरण के कई दशकों के चक्र के शुरुआती दौर में है और Raydean अपनी मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और नए समाधानों के जरिए इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है. इस लेनदेन में Kumbhat Investment Banking ने Raydean Enterprises Limited के एक्सक्लूसिव फाइनेंशियल एडवाइजर के रूप में काम किया.
 

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चार महीने की बिकवाली के बाद भारतीय बाजार में लौटे विदेशी निवेशक, जुलाई में FPIs ने लगाए ₹17,227 करोड़

NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर भरोसा दिखाया है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध रूप से ₹17,227 करोड़ का निवेश किया है. इसके साथ ही FPIs की लगातार चार महीने से जारी बिकवाली का सिलसिला खत्म हो गया है.

22 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में हुआ निवेश इस साल का केवल दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में नेट खरीदार बने हैं. इससे पहले फरवरी में FPIs ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था. हालांकि, जुलाई में खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब भी कुल मिलाकर शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं. 22 जुलाई तक भारतीय इक्विटी बाजार से FPIs की कुल निकासी ₹2.57 लाख करोड़ रही है. साल की शुरुआत में भारी बिकवाली के कारण यह आंकड़ा अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है.

मार्च से जून तक जारी रही भारी बिकवाली

इससे पहले विदेशी निवेशकों ने लगातार चार महीनों तक भारतीय बाजार से पैसा निकाला था. आंकड़ों के मुताबिक, जून में FPIs ने ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में ₹1.18 लाख करोड़ की निकासी की थी.

वहीं, जनवरी में विदेशी निवेशकों ने ₹35,962 करोड़ की बिकवाली की थी. इसके बाद फरवरी में वे नेट खरीदार बने थे, लेकिन मार्च से जून तक फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिला.

कंज्यूमर सर्विसेज और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश

NSDL के सेक्टर आधारित आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में किया. इस सेक्टर में ₹7,361 करोड़ का विदेशी निवेश आया.

इसके बाद मेटल्स और माइनिंग सेक्टर में ₹5,993 करोड़ और हेल्थकेयर सेक्टर में ₹4,101 करोड़ का निवेश हुआ. जुलाई के पहले दो हफ्तों में विदेशी निवेशक लगातार दूसरी पखवाड़े में नेट खरीदार रहे, जो फरवरी की शुरुआत के बाद सबसे मजबूत खरीदारी का दौर रहा. हालांकि, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और पावर सेक्टर में विदेशी निवेशकों की ओर से अब भी शुद्ध निकासी जारी रही.

विदेशी निवेश में सुधार के संकेत

जुलाई में FPIs की वापसी भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. चार महीने की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सेंटीमेंट को मजबूती मिली है. हालांकि, पूरे साल के आंकड़े अभी भी नकारात्मक बने हुए हैं और विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी में सुधार आने में समय लग सकता है.
 


BitDelta India ने लॉन्च किया CrypTution, क्रिप्टो निवेशकों को मिलेगी लर्निंग, सिमुलेशन और सर्टिफिकेशन की सुविधा

कंपनी के अनुसार, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है.

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म BitDelta India ने भारत में क्रिप्टो निवेशकों के लिए पहला स्ट्रक्चर्ड लर्निंग और सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम 'CrypTution' लॉन्च किया है. यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को क्रिप्टो बाजार में उतरने से पहले ब्लॉकचेन और डिजिटल एसेट्स की शिक्षा, वर्चुअल ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन उपलब्ध कराएगा. इस पहल के लिए कंपनी ने अमेरिका एकेडमी ऑफ फाइनेंशियल  मैनेजमेंट (AAFM) के साथ साझेदारी की है.

कंपनी का कहना है कि आज क्रिप्टो से जुड़ी जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है, लेकिन संरचित और भरोसेमंद शिक्षा की कमी के कारण अधिकांश निवेशक अधूरी या बिखरी हुई जानकारी पर निर्भर रहते हैं. CrypTution इसी अंतर को भरने का प्रयास करेगा. इसमें निवेशकों को वास्तविक निवेश से पहले प्रशिक्षण, वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन और योग्यता आधारित सर्टिफिकेशन की सुविधा मिलेगी.

जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सा

BitDelta India के मुताबिक, देश के लगभग 40% क्रिप्टो यूजर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस प्लेटफॉर्म को अलग-अलग भाषाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है. BitDelta India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विकास एम. सचदेवा ने कहा कि जिस तरह म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेशक शिक्षा ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, उसी तरह क्रिप्टो सेक्टर को भी व्यवस्थित शिक्षा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत में VDA के प्रति जागरूकता 30% से कम है और हर पांच में से एक सक्रिय निवेशक मानता है कि वह अभी भी इस बाजार को समझने की प्रक्रिया में है. ऐसे में CrypTution जिम्मेदार और सुरक्षित निवेश संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण

CrypTution का लर्निंग मॉडल 'पढ़ो, सीखो और बढ़ो' के तीन चरणों पर आधारित है.

1. 'पढ़ो' चरण में ब्लॉकचेन, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, बाजार की बुनियादी समझ, सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन की पढ़ाई कराई जाएगी.
2.'सीखो' चरण में प्रतिभागियों को बिना वास्तविक पैसा लगाए वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन के जरिए ट्रेडिंग का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.
3. 'बढ़ो' चरण में सफल प्रतिभागियों को BitDelta India के प्लेटफॉर्म पर लाइव मार्केट ट्रेडिंग की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा.

AAFM India के साथ साझेदारी

CrypTution के 'पढ़ो' मॉड्यूल को American Academy of Financial Management (AAFM) India के सहयोग से तैयार किया गया है. AAFM India इस पहल में नॉलेज और एजुकेशन पार्टनर की भूमिका निभाएगा. संस्था को BFSI शिक्षा क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है और वह एक लाख से ज्यादा वित्तीय पेशेवरों को प्रशिक्षण दे चुकी है.

तीन सर्टिफिकेशन कोर्स

CrypTution के तहत अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तीन सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए गए हैं. इनमें शुरुआती निवेशकों के लिए 'Certified Virtual Asset Investor', वित्तीय सलाहकारों के लिए 'Certified Virtual Asset Practitioner' और एडवांस ट्रेडिंग, मार्केट एनालिसिस तथा जोखिम प्रबंधन सीखने के इच्छुक लोगों के लिए 'Certified Virtual Asset Trader' शामिल हैं.

कंपनी के अनुसार, CrypTution केवल सर्टिफिकेट देने तक सीमित नहीं रहेगा. इस प्लेटफॉर्म पर शिक्षार्थियों को वर्चुअल मार्केट सिमुलेशन, मार्केट इंटेलिजेंस, वेबिनार, विशेषज्ञों की मेंटरशिप, परीक्षाएं और कम्युनिटी नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के क्षेत्र में अधिक जागरूक, प्रशिक्षित और जिम्मेदार निवेशक तैयार करना है.
 


Suzlon और Waaree की बड़ी साझेदारी, आंध्र प्रदेश में बनेगा 201.6 MW का विंड पावर प्रोजेक्ट

कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.

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Thursday, 23 July, 2026
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देश की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी Suzlon Energy को Waaree Group की पहली विंड एनर्जी परियोजना के लिए 201.6 मेगावाट (MW) का बड़ा ऑर्डर मिला है. आंध्र प्रदेश में विकसित होने वाली इस परियोजना के तहत Suzlon अपने DevCo (डेवलपमेंट कंपनी) मॉडल पर जमीन अधिग्रहण, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण (EPC), टरबाइन की स्थापना और संचालन एवं रखरखाव (O&M) तक की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी. यह साझेदारी दोनों कंपनियों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम मानी जा रही है.

64 विंड टरबाइन लगाएगी Suzlon

इस परियोजना के तहत Suzlon अपनी S144 विंड टरबाइन जनरेटर (WTG) की 64 यूनिट लगाएगी. प्रत्येक टरबाइन की क्षमता 3.15 मेगावाट होगी. कंपनी जमीन अधिग्रहण, टरबाइन की आपूर्ति, बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP), इंजीनियरिंग, निर्माण, कमीशनिंग और लंबे समय तक संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहित पूरी EPC सेवाएं प्रदान करेगी.

DevCo मॉडल पर बढ़ रहा जोर

कंपनी के अनुसार, जैसे-जैसे रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाएं बड़ी और जटिल होती जा रही हैं, एंड-टू-एंड DevCo मॉडल की मांग भी बढ़ रही है. यह मॉडल परियोजनाओं के विकास से जुड़े जोखिम कम करने, समय पर निष्पादन और बड़े स्तर पर विस्तार में मदद करता है.

'दो अग्रणी कंपनियों का रणनीतिक गठजोड़'

Suzlon Group के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती ने कहा कि यह साझेदारी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियां एक साथ आई हैं. उनके मुताबिक, Waaree ने सोलर सेक्टर में और Suzlon ने विंड एनर्जी क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अब दोनों कंपनियां ग्राहकों को एकीकृत (Integrated) रिन्यूएबल एनर्जी समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगी, जहां अलग-अलग तकनीकों के बजाय समग्र समाधान की मांग बढ़ रही है.

Waaree ने विंड एनर्जी में रखा पहला कदम

Waaree Forever Energies के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पवन अग्रवाल ने कहा कि कंपनी सोलर एनर्जी से आगे बढ़कर विविधीकृत रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में 201.6 मेगावाट की यह विंड एनर्जी परियोजना कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे भारत की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

Suzlon और Waaree की मजबूत मौजूदगी

करीब 33% बाजार हिस्सेदारी के साथ Suzlon भारत की सबसे बड़ी विंड एनर्जी कंपनी है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का राजस्व 1.75 अरब डॉलर से अधिक रहा और 1 जून 2026 तक उसका मार्केट कैप 7.5 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका था. कंपनी अब तक 17 देशों में लगभग 21.7 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता स्थापित कर चुकी है.

वहीं, 1990 में स्थापित Waaree Energies भारत की प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल है. कंपनी की वैश्विक सोलर पीवी मॉड्यूल और सोलर सेल निर्माण क्षमता 22.77 गीगावाट है तथा उसका कारोबार भारत समेत 25 से अधिक देशों में फैला हुआ है.
 


ईरान संकट का असर: HPCL-BPCL को हजारों करोड़ का घाटा, पहली तिमाही में भारी नुकसान

वेस्ट एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बिगाड़ा तेल कंपनियों का गणित, HPCL को ₹12,265 करोड़ और BPCL को ₹3,962 करोड़ का नुकसान

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारतीय तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर दिखाई देने लगा है. सरकारी तेल कंपनियां हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारी घाटा उठाना पड़ा है.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कंपनियों ने लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया, जिससे उन्हें लागत और बिक्री मूल्य के बीच भारी अंतर का सामना करना पड़ा. हालांकि, रिफाइनरी कारोबार से अच्छी कमाई हुई, लेकिन ईंधन बिक्री में हुए नुकसान ने पूरे मुनाफे को खत्म कर दिया.

HPCL को ₹12,265 करोड़ का घाटा

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है. पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. कंपनी के मुख्य कारोबार (स्टैंडअलोन ऑपरेशंस) के आधार पर देखें तो HPCL को 11,526 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 4,371 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था.

हालांकि, कंपनी की कुल आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई. अप्रैल-जून तिमाही में HPCL की कुल आय बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत ज्यादा है. लेकिन कच्चे तेल की महंगाई और ईंधन बिक्री में दबाव के कारण आय बढ़ने के बावजूद कंपनी मुनाफे में नहीं आ सकी.

BPCL को 15 तिमाहियों बाद हुआ नुकसान

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) भी पहली तिमाही में घाटे में रही. कंपनी को अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह BPCL का करीब 15 तिमाहियों के बाद पहला घाटा है. पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 6,124 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था.

BPCL की कुल आय बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.35 लाख करोड़ रुपये था. यानी कंपनी का कारोबार बढ़ा, लेकिन लागत बढ़ने और मार्जिन घटने के कारण मुनाफा घाटे में बदल गया.

क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?

तेल कंपनियों के घाटे की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही. वेस्ट एशिया में तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल के दामों में भारी तेजी आई.

आमतौर पर कच्चा तेल महंगा होने पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई जाती हैं, ताकि कंपनियां बढ़ी हुई लागत की भरपाई कर सकें. लेकिन इस बार सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल के दामों में बदलाव नहीं किया.

बाद में मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई. साथ ही घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव हुआ, लेकिन तब तक कंपनियों को बड़ा नुकसान हो चुका था.

आगे भी बनी रह सकती है चुनौती

तेल कंपनियों के लिए आने वाली तिमाहियां भी चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. अगर भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ईंधन कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और कंपनियों के मुनाफे पर इसका असर जारी रह सकता है.