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बजट 2023: सरकारी कंपनियों की सेहत सुधरी, अब Disinvestment से बचेगी सरकार!
मोदी सरकार विनिवेश यानी डिसइनवेस्टमेंट पर जोर देती आई है, लेकिन इस बार बजट में इसे लेकर कोई नई घोषणा शायद ही हो.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मोदी सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल के आखिरी पूर्ण बजट में विनिवेश यानी डिसइनवेस्टमेंट (Disinvestment) को लेकर शायद ही कोई घोषणा करे. इसकी दो बड़ी वजह हैं. पहली - सरकारी कंपनियों, खासकर बैंकों की आर्थिक सेहत में सुधार और दूसरी - किसी भी वर्ग को नाराज न करना. बता दें कि मोदी सरकार शुरुआत से ही सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की हिमायती रही है. पिछले बजट में सरकार ने कुछ कंपनियों में विनिवेश को लेकर घोषणा भी की थी.
बैंकों के हालात बेहतर
एक रिपोर्ट बताती है कि बीते कुछ सालों में सरकारी कंपनियों की सेहत बेहतर हुई है. वित्त वर्ष 2018 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के कुल मुनाफे में 16.8 फीसदी हिस्सा सरकारी कंपनियों का था. वहीं, प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी 83.2 फीसदी थी. वहीं, वित्त वर्ष 2022 में सरकारी कंपनियों का कुल मुनाफे में हिस्सा बढ़कर 31.3% पहुंच गया, जबकि प्राइवेट सेक्टर कंपनियों की हिस्सेदारी घटकर 68.7 प्रतिशत पर आ गई. गौर करने वाली बात ये है कि मुनाफा बढ़ाने में सबसे अधिक योगदान उन सरकारी बैंकों का है, जिनके कामकाज पर सबसे ज्यादा सवाल उठते रहे हैं.
पहले लक्ष्य ही पूरे नहीं
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसकी संभावना बेहद कम है कि सरकार यूनियन बजट 2023-24 में विनिवेश यानी डिसइनवेस्टमेंट (Disinvestment) को लेकर कोई ऐलान करे. क्योंकि वह पिछले लक्ष्यों को ही पूरा नहीं कर पाई है. हालांकि, Budget 2023-24 में सरकार पिछले डिसइनवेस्टमेंट लक्ष्यों को पूरा करने के उपायों को लेकर कोई न कोई घोषणा जरूर कर सकती है. उनका यह भी मानना है कि चूंकि यह मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है. ऐसे में सरकार विनिवेश का जिक्र करके किसी भी वर्ग को नाराज करने का जोखिम मोल नहीं लेगी.
ये हैं लिस्ट में शामिल
BPCL, IDBI के अलावा सरकार की संभावित डिसइनवेस्टमेंट लिस्ट में कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Concor), राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान जिंक, NMDC और SAIL के स्टील प्लांट सहित कुछ छोटी कंपनियों की बिक्री शामिल हो सकती है. IDBI को निजी हाथों में सौंपने लेकर सरकार काफी तेजी से काम कर रही है. कुछ विदेशी संस्थाओं ने भी इसमें रुचि दिखाई है. BPCL के डिसइनवेस्टमेंट को लेकर भी सरकार बीच में सक्रिय हुई थी, लेकिन फिर इससे जुड़ी खबरें सामने आना बंद हो गई.
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