अमेरिकी बैंकिंग संकट के बीच, Bitcoin की कीमतों ने लगाई लंबी छलांग

पूरी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे मशहूर क्रिप्टो मार्केट Bitcoin की कीमतों ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ ली है

Last Modified:
Tuesday, 21 March, 2023
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पूरी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे मशहूर क्रिप्टो मार्केट Bitcoin की कीमतों ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ ली है और जून 2022 के बाद से पहली बार कल 28,000 डॉलर्स की सीमा को पार किया है. 10 मार्च 2023 को SVB (सिलिकॉन वैली बैंक) के गिरने के बाद से  Bitcoin की कीमतों में लगभग 40% की उछाल देखने को मिली है. 

बैंकिंग क्राइसिस से बचाएगा BTC? 
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो क्रिप्टो कस्टडी प्लेटफॉर्म लिमिनल के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट ध्रुविल शाह ने कहा है कि, अमेरिका में पैदा हुए बैंकिंग संकट की वजह से ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में विकेंद्रीकरण की एक प्रक्रिया शुरू हुई है और BTC (Bitcoin) की कीमतों में इसी वजह से बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है. विकेन्द्रित हुए फाइनेंस का प्रमुख फायदा Bitcoin को हो रहा है और इसके लिए रिटेल और संस्थागत इन्वेस्टर्स की मांग भी बढ़ रही है. BTC को इस वक्त चल रही बैंकिंग क्राइसिस से बचाने वाली एक शील्ड के रूप में देखा जा रहा है. 

बैंकों के गिरने से हुआ फायदा?
Mudrex के को-फाउंडर और CEO एदुल पटेल ने कहा – SVB और सिल्वरगेट का गिरना क्रिप्टो के लिए एक जादुई पल के जैसा था क्योंकि जैसे ही ये क्रिप्टो-फ्रेंडली बैंक गिरे इन बैंकों में जमा बहुत सा पैसा सीधे तौर पर क्रिप्टोकर्रेंसी इकोसिस्टम में चला गया और इन पैसों का ज्यादा बड़ा हिस्सा ब्लू-चिप क्रिप्टोकर्रेंसी यानी Bitcoin और Ethereum में गया. बैंकिंग क्षेत्र में अस्थिरता, उम्मीद से ज्यादा बड़े इन्फ्लेशन डाटा और कमजोर होते फेडरल रिजर्व पर दोबारा भरोसे की वजह से Bitcoin पिछले नौ महीनों में अब तक के सबसे बड़े लेवल पर पहुंच गए हैं.

ग्लोबल इक्विटी मार्केटों पर बना हुआ है दबाव
अमेरिका और यूरोप में बहुत से क्षेत्रीय बैंकों के गिरने की वजह से ग्लोबल इक्विटी मार्केटों पर अभी भी दबाव बना हुआ है. 10 मार्च 2023 से निफ्टी में लगभग 4% की गिरावट आ चुकी है जबकि इस दौरान Dow Jones बिलकुल फ्लैट बना रहा था लेकिन Bitcoin ने बाकी के सभी उपकरणों को आउटपरफॉर्म कर दिया है. 
 

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अब दक्षिण के ग्राहकों तक पहुंचने के लिए इस फर्म ने किया विस्‍तार, इस शहर में खुला ऑफिस 

कंपनी का मानना है कि आने वाले दिनों में वो अपने इस नए ऑफिस से और ग्राहकों तक पहुंच पाएगी और अपनी क्षमताओं में इजाफा कर पाएगी. 

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Wednesday, 19 June, 2024
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देश भर में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए, भारतीय कंसल्टेंसी फर्म प्राइमस पार्टनर्स ने मंगलवार को चेन्नई में अपने नए कार्यालय का उद्घाटन किया. कंपनी इससे पहले साउथ इंडियन बाजार तक पहुंचने के लिए एक ऑफिस खोल चुकी है. अब इसी कड़ी में कंपनी ने नए नया ऑफिस चेन्‍नई में खोला है. कंपनी का मानना है कि नए कार्यालय स्थान से फर्म की पकड़ और ग्राहक-सेवा क्षमताओं में वृद्धि होने की उम्मीद है.

ये है दक्षिण के बाजार में पहुंचने की प्रमुख वजह? 
कंपनी की ओर से इस मामले को लेकर कहा गया है कि भारत के दक्षिणी राज्य कंपनी के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में काम करते हैं और क्षेत्र के ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हुए सही प्रतिभा को आकर्षित करने में मदद करते हैं. चेन्नई कार्यालय ग्राहकों को कई सेवाएं प्रदान करेगा, जिसमें डिजिटल रणनीति और कार्यान्वयन और आपदा लचीलापन और शमन योजना दो प्रमुख पेशकश शामिल होंगी. विशेष रूप से, प्राइमस पार्टनर्स चेन्नई में अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहा है और इसका लक्ष्य अगले 12 से 18 महीनों के भीतर इसे शीर्ष तीन कार्यालयों में शामिल करना है. 

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क्‍या बोले कंपनी के सह संस्‍थापक?  
कंपनी प्राइमस पार्टनर्स के सह-संस्थापक और सीईओ निलय वर्मा ने कहा, ‘हम प्राइमस पार्टनर्स जैसी नए युग की परामर्श फर्मों के लिए जबरदस्त गुंजाइश देखते हैं. भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ, यह न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर अपनी उपस्थिति का विस्तार करने का सही समय है. तदनुसार, हम इस वित्तीय वर्ष में 5-6 नए कार्यालय खोलने का इरादा रखते हैं, जिससे हमारे कार्यालयों की संख्या दोगुनी हो जाएगी, जिसमें विदेश स्थित कार्यालय भी शामिल हैं.

क्‍या बोले प्राइमस के एमडी? 
प्राइमस पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक अरुण मोरल ने कहा, ‘चेन्नई भारत में हमारे छठे कार्यालय की मेजबानी करता है, जो हमारे बेंगलुरु कार्यालय की सफलता के बाद प्राइमस पार्टनर्स की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. आने वाले महीनों में पर्याप्त वृद्धि की आशा करते हुए, हम अगले 12 से 18 महीनों में अपने कर्मचारियों की संख्या 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. इसमें विदेश में लोगों को शामिल करना शामिल होगा. कंपनी का कहना है कि पिछले दो वर्षों में, प्राइमस पार्टनर्स ने अपने कार्यबल में 100 प्रतिशत की वृद्धि की है और नए कार्यालय के उद्घाटन से संकेत मिलता है कि अभी और भी उपलब्धियां आने वाली हैं.
 


तपती दिल्‍ली में इस विमान कंपनी ने छुड़ाए पसीने, वाकिए पर कंपनी ने दिया ये जवाब 

SpiceJet में 19 जून को सामने आई ये घटना 18 जून को सामने आई घटना से ठीक एक दिन बाद सामने आई है. कंपनी ने इसके लिए जमीनी तापमान को वजह बताया है. 

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Wednesday, 19 June, 2024
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दिल्‍ली की तपती गर्मी में जहां एक ओर कई लोग बीमार पड़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर सोचिए अगर आपको विमान में बिठा दिया जाए और एसी ऑन न किया जाए तो क्‍या कहेंगे…जी हां कुछ ऐसा ही मामला दिल्‍ली एयरपोर्ट पर देखने को मिला जब यात्रियों को विमान में बिठाने के बाद तब तक एसी नहीं चलाया गया जब तक टेक ऑफ नहीं हो गया. 40 डिग्री तापमान में यात्री विमान में रखी मैग्‍जीन से हवा करते दिखाई दे रहे हैं. 

कब की है ये पूरी घटना 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस फ्लाइट में सफर कर रहे रोहन कुमार ने बताया कि ये पूरा मामला दिल्‍ली एयरपोर्ट पर 19 जून को सामने आया जब दिल्‍ली से दरभंगा जाने वाली फ्लाइट (SG486) ने यात्रियों के चेक इन करने के बाद लगभग एक घंटे तक एसी ऑन ही नहीं किया. उन्‍होंने कहा कि विमान में एसी तब ऑन किया गया जब फ्लाइट टेक ऑफ करने लगी. 

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स्‍पाइसजेट के प्रवक्‍ता ने कही क्‍या बात? 
लेकिन स्पाइसजेट के प्रवक्ता की ओर से मीडिया को दिए गए बयान के मुताबिक, 19 जून की सुबह 11 बजे उड़ान भरने वाली दिल्ली से दरभंगा की उड़ान संख्या एसजी 476 बिना किसी देरी के समय पर रवाना हो गई. एयर कंडीशनिंग से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए उन्‍होंने कहा कि विमान में पूरी उड़ान के दौरान और दरभंगा पहुंचने पर सामान्य रूप से संचालित हुआ. 
प्रवक्ता ने ये भी बताया कि उसी विमान ने बिना किसी एयर कंडीशनिंग समस्या के दिल्ली के लिए वापसी उड़ान भी सफलतापूर्वक भरी. दिल्ली में बोर्डिंग प्रक्रिया के दौरान, अत्यधिक मौसम की गर्मी और विमान के दरवाजे खुले होने के कारण एयर कंडीशनिंग के साथ थोड़ी चुनौतियाँ आईं, क्योंकि बोर्डिंग एयरोब्रिज के माध्यम से नहीं हुई थी.

एक दिन पहले भी सामने आया था मामला 
दिल्‍ली एयरपोर्ट पर ये घटना 18 जून को हुई कुछ इसी तरह की घटना के बाद सामने आया है. दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ज्‍यादा तापमान के कारण तकनीकी समस्याओं के चलते यात्रियों को लंबी देरी का सामना करना पड़ा. इंडिगो ने एक बयान जारी कर उड़ान 6ई 2521 की देरी के लिए ‘जमीन के ज्‍यादा तापमान’ के कारण हुई तकनीकी समस्या को जिम्मेदार ठहराया था.
 


PLI स्कीम में होने जा रहा है बदलाव, इस सेक्टर को मिलेगा ज्यादा फायदा, बरसेंगी नौकरियां

PLI स्कीम का आकार 1.97 लाख करोड़ रुपये का है, जिसमें से मार्च 2024 तक केवल 9,700 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं.

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Wednesday, 19 June, 2024
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केंद्र सरकार की ओर से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI Scheme) में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है. इसके तहत नए सेक्टरों को इसमें जोड़ा जाएगा और MSME के लिए फायदों को बढ़ाया जाएगा. PIL स्कीम में सुधार के तहत सरकार फंड जुटाने के नियमों को आसान बना सकती है. इसमें नए सेक्टरों को जोड़ने के साथ अधिक श्रम वाले क्षेत्रों की MSME को ज्यादा लाभ दिए जा सकते हैं. सरकार का पूरा ध्यान मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने को लेकर है. PIL में रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए इंसेंटिव को जोड़ा जाएगा. 

इन सेक्टर को भी कवर किया जाएगा

टॉय, फर्नीचर और कपड़ा क्षेत्र को इस स्कीम के अंदर जल्द ही कवर किया जा सकता है. इन क्षेत्रों में अधिक नौकरियां पैदा होने की संभावना है. सरकार मानव निर्मित फाइबर (MMF) को भी PIL स्कीम के तहत ला सकती है. इसके अलावा कुछ कॉटन को कवर करने के लिए टेक्निकल टेक्सटाइल को भी इसमें शामिल किया जा सकता है. इनका ऐलान आगामी बजट में हो सकता है.

वित्त वर्ष 2024 में 6800 करोड़ रुपए बांटे गए

PIL स्कीम का आकार 1.97 लाख करोड़ रुपए (करीब 26 अरब डॉलर) का है, जिसमें से मार्च 2024 तक केवल 9,700 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं. वित्त वर्ष 2024 में विभिन्न क्षेत्रों में कुल 6,800 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन प्रदान किया गया था. पीएलआई का लाभ प्राप्त कर चुकी कंपनियों की ओर से दिसंबर 2023 तक 1.07 लाख करोड़ रुपए निवेश किए जा चुके हैं. इनसे 9 लाख करोड़ रुपए से अधिक की ब्रिकी हुई है और 7 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं.

2020 में शुरु हुई थी PLI Scheme 

PIL स्कीम को मार्च 2020 में लॉन्च किया गया था. उस समय यह स्कीम फार्मा इंडस्ट्री के कच्चे माल, मेडिकल डिवाइस और बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए शुरू की गई थी. नवंबर 2020 में 10 अन्य सेक्टर्स को इसमें शामिल किया गया था. सितंबर 2021 में ड्रोन सेक्टर को भी इसमें जोड़ा गया था.
 


विवादों में फंसे इस पोर्ट को मिल सकती है कैबिनेट की मंजूरी, कीमत में हुआ इतना इजाफा 

वधावन प्रोजेक्‍ट को केन्‍द्र सरकार ने 2020 में सागरमाला प्रोजेक्‍ट के तहत मंजूरी दी थी. लेकिन उसके बाद इस पर हुए विवाद के कारण इस परियोजना में देरी होती चली गई.

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Wednesday, 19 June, 2024
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महाराष्‍ट्र में प्रस्‍तावित वधावन पोर्ट प्रोजेक्‍ट को कैबिनेट मंजूरी दे सकती है. इस प्रोजेक्‍ट को अगर कैबिनेट की मंजूरी मिल जाती है तो इसके लिए केन्‍द्र सरकार को 76000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. इससे पहले जब ये योजना विवादों में घिरी थी उस वक्‍त इसकी कीमत 66 हजार करोड़ आंकी गई थी. इस परियोजना को किसानों, मछुआरों के पुनर्वास को लेकर हुए विवाद के बाद रोक दिया गया था. 

आखिर क्‍या है ये पूरा मामला? 
सरकार की योजना वधावन पोर्ट की योजना लाकर पीपीपी मोड के जरिए 38 हजार करोड़ रुपये के निवेश को जुटाने की थी. इस बंदरगाह का विकास वधावन पोर्ट प्रोजेक्‍ट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा. इस विशेष प्रयोजन वाहन का निर्माण जवाहर लाल नेहरु बंदरगाह प्राधिकरण और महाराष्‍ट्र समुद्री बोर्ड के बीच सहयोग के माध्‍यम से किया गया है. इस पूरे प्रोजेक्‍ट को दो चरणों में विकसित करने की योजना बनाई गई है. इस परियोजना का सबसे खास पार्ट ये है कि इसमें 5 किलोमीटर की दूरी पर एक प्राकृतिक ड्राफ्ट है. जो बड़े से बड़े जहाजों को डाक करने में कामयाब रहेगा. ये नैचुरल डैक इसकी क्षमता को बढ़ा देता है. इस परियोजना की पहले लागत 66 हजार करोड़ रुपये थी लेकिन देरी के कारण अब इसकी लागत 76 हजार करोड़ रुपये हो गई है. इस पूरे पोर्ट के विकास से 16 हजार से 25 हजार बीस हजार फुट समकक्ष इकाईयों की क्षमता वाले कंटेनर जहाजों की आवाजाही की सुविधा मिल सकेगी. 

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फरवरी में मिल चुकी हैं दूसरी कई अनुमति 
वधावन प्रोजेक्‍ट को लेकर इससे पहले फरवरी में ही पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय से हरी झंडी मिल चुकी है. फरवरी में ही महाराष्‍ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा 76220 करोड़ रुपये की इस परियोजना को मंजूरी दी जा चुकी है. माना जा रहा है कि इस परियोजना के कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद पीएम मोदी इसका भूमि पूजन कर सकते हैं. 

2020 में सागरमाला प्रोजेक्‍ट के तहत मिली थी मंजूरी 
वधावन प्रोजेक्‍ट को केन्‍द्र सरकार ने 2020 में सागरमाला प्रोजेक्‍ट के तहत मंजूरी दी थी. लेकिन उसके बाद इस पर हुए विवाद के कारण इस परियोजना में देरी होती चली गई. भारत में मौजूदा समय में जवाहरलाल नेहरूं पोर्ट ट्रस्‍ट और मुंद्रा केवल मध्‍यम आकार के जहाजों को ही संभाल सकते हैं. क्‍योंकि कंटेनर जहाजों का आकार लगातार बढ़ रहा है ऐसे में भारत के पश्चिम तट पर डीप ड्राफ्ट कंटेनर को विकसित करना अनिवार्य हो गया था. इसीलिए सरकार इस योजना को विकसित करना चाह रही है. 
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गर्मी के कारण पहली बार सामने आ रहे हार्ट हटैक और ब्रेन स्‍ट्रोक के मामले, क्‍यों करें उपाय

सामान्‍य तौर पर गर्मियों में तापमान 45 से 48 डिग्री तक ही तापमान जाता है लेकिन इस बार तापमान 52 डिग्री तक जा पहुंच चुका है. 

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Wednesday, 19 June, 2024
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देश में पहली बार गर्मियों के मौसम में बढ़ते तापमान ने सभी को हैरान और परेशान कर रखा है. बढ़ते तापमान के कारण कोई राज्‍य ऐसा नहीं है जहां मौतें नहीं हो रही है. लेकिन पहली बार पड़ रही इस गर्मी के साइड इफेक्‍ट सामने आने शुरू हो गए हैं. सामान्‍य तौर पर सर्दियों में सामने आने वाले हार्ट अटैक और ब्रेन स्‍ट्रोक के मामले इस बार गर्मियों में भी सामने आ रहे हैं. विशेषज्ञ डॉक्‍टरों का तो यहां तक कहना है कि अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो इतना ज्‍यादा तापमान और गर्मी आपकी उस बीमारी पर असर कर सकती है और आप परेशानी में आ सकते हैं. 

पहली बार गर्मियों में सामने आ रहे हैं मामले
PSRI के सीनियर न्‍यूरोलॉजिस्‍ट डॉ. भास्‍कर शुक्‍ला कह रहे हैं कि अपने करियर में पहली बार ऐसा हो रहा है जब मैं गर्मियों में भी हार्ट अटैक और ब्रेन स्‍ट्रोक के मामले देख रहे हैं. ऐसा इससे पहले कभी देखने को नहीं है. इससे पहले हार्ट अटैक और ब्रेन स्‍ट्रोक के मामले हमेशा ही सर्दियों में देखने को आते हैं. सर्दियों के दिनों में तो इस तरह के मामलों को समझा जा सकता है, क्‍योंकि उन दिनों कोहरा हो जाता है, प्रदूषण बढ़ जाता है. 

अब जानिए गर्मियों में क्‍यों आ रहे हैं ये मामले? 
डॉ. भास्‍कर शुक्‍ला कहते हैं कि अभी अचानक हार्ट अटैक और ब्रेन स्‍ट्रोक के बढ़ने का कारण क्‍या है इसके बारे में कहना थोड़ा ज्‍यादा कठिन होगा. क्‍योंकि अभी हम लोगों ने सिर्फ मामलों को देखा है. ये पता बाद में जांच और शोध से ही लगाया जा सकेगा कि इसके कारण क्‍या हैं. लेकिन प्राथमिक तौर पर ये कहा जा सकता है कि जिस तरह से तापमान में इजाफा हुआ है वो इसका एक कारण हो सकता है. 

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हीट सभी बीमार लोगों के लिए बन रही है समस्‍या 
डॉ. प्रशांत सिन्‍हा कहते हैं कि इस बार की हीट वेव में कुछ बदलाव ये भी देखने को मिल रहा है कि सभी तरह के मरीज सामने आ रहे हैं. अगर कोई मरीज किसी भी तरह की बीमारी से जूझ रहा हो तो गर्मी उसकी उस परेशानी को काफी हद तक बढ़ा रही है. उनका कहना है कि मरीज जिन बीमारियों से जूझ रहे हैं उनमें इस बढ़ते तापमान के कारण उसी की शिकायत सामने आ रही है. इसलिए कोशिश ये करें कि अगर आप किसी भी तरह की बीमारी से ग्रसित हैं तो बढ़ता तापमान आपके लिए परेशानी पैदा कर सकता है. 

अगर बाहर जाना जरूरी है तो करें ये काम 
डॉक्‍टरों का कहना है कि अगर आप कोई ऐसा काम करते हैं जिसमें आपको बाहर जाना जरूरी है, तो ऐसे में आपको कुछ बचाव के कदम जरुर उठाने चाहिए. 
-घर से बाहर जाते समय पानी की बोतल अपने साथ लेकर चलें. 
-फुल स्‍लीव्‍स के कपड़े पहनकर ही अपने सारे काम करें. 
- सर मैं कैप पहनकर बाहर निकलें. 
- दिन में कम से कम 4 से 5 लीटर तक पानी पियें. 
- इस बात का ध्‍यान रखें कि ज्‍यादा देर तक धूप में ना रहें. 
 


जिस सांसद की बेटी ने फुटपाथ पर सो रहे युवक को दी मौत, कितनी दौलत है उनके पास?

माधुरी ने फुटपाथ पर सो रहे युवक को अपनी लग्जरी कार से रौंद दिया, जिससे उसकी मौत हो गई.

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Wednesday, 19 June, 2024
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चेन्नई में भी पुणे जैसा हिट एंड रन (Hit & Run Case) का मामला सामने आया है. वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद बीदा मस्तान राव (Beeda Masthan Rao) की बेटी माधुरी ने अपनी BMW कार से फुटपाथ पर सो रहे एक व्यक्ति को रौंद डाला, जिससे उसकी मौत हो गई. हादसे को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गई. जबकि उसकी दोस्त कुछ देर तक भीड़ से बहस करती रही और बाद में वो भी वहां से निकल भागी. पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर सांसद की बेटी को गिरफ्तार किया, लेकिन थाने से ही उसे जमानत दे दी गई. 

क्या नशे में थी आरोपी?
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि सांसद की बेटी माधुरी हादसे के वक्त नशे में थी, इसलिए मौके से फरार हो गई. मृतक की पहचान 22 वर्षीय सूर्या के रूप में हुई है. सूर्या का अपनी पत्नी से किसी बात पर झगड़ा हो गया था. इसके बाद वह अपने घर से करीब 2 किमी दूर फुटपाथ पर आकर सो गया. काफी देर तक जब सूर्या घर नहीं आया, तो पत्नी वनिता उसे खोजने निकली. उसे नशे की हालत में सूर्या फुटपाथ पर सोते मिला. इससे पहले कि वो उसे उठाकर घर ले जाती, सांसद की बेटी की तेज रफ़्तार कार ने सूर्या को रौंद दिया. यह घटना सोमवार की शाम बेसेंट नगर-चेन्नई की है.

बिजनेसमैन भी हैं राव
दुर्घटना के बाद सांसद की बेटी तुरंत वहां से भाग निकली, लेकिन उसकी दोस्त कुछ देर तक लोगों से बहस करती रही और बाद में वो भी वहां से भाग खड़ी हुई. मौके पर मौजूद लोगों ने सूर्या को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी मौत हो गई. पुलिस ने जब आसपास लगे CCTV फुटेज की जांच की, तो पता चला कि कार BMR (बीदा मस्तान राव) ग्रुप की है और पुडुचेरी में रजिस्टर्ड है. राज्यसभा सांसद बीदा मस्तान राव नेता होने के साथ-साथ मशहूर कारोबारी भी हैं. BMR उन्हीं की कंपनी है.  

165 करोड़ की संपत्ति
चेन्नई पुलिस ने आरोपी माधुरी को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन थाने से ही उन्हें जमानत मिल गई. बीदा मस्तान राव आंध्र प्रदेश के दिग्गज नेता और मशहूर बिजनेसमैन हैं. चुनावी हलफनामे में उन्होंने बताया था कि उनके पास 165 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है. बीदा मस्तान की कंपनी BMR  सी-फूड इंडस्ट्री में जाना-माना नाम है. बीदा 2009 से 2019 तक ममता बनर्जी की चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (TDP) में रहे. इस दौरान, वह 2009 से 2014 तक आंध्र प्रदेश की कवाली सीट से विधायक रहे. उन्होंने 2019 में YSR कांग्रेस जॉइन की और 2022 में राज्यसभा सांसद बने. 

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UGRO Capital ने सीसीडी, वारंट के जरिए 1,265 करोड़ रुपये किए सिक्योर 

1 जून 2024 को शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद यूग्रो कैपिटल (UGRO Capital) ने 258 करोड़ रुपये के सीसीडी और 1,007 करोड़ रुपये के वारंट आवंटित किए गए. 

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Wednesday, 19 June, 2024
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माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइसिस (MSME) लोन देने पर ध्यान केंद्रित करने वाली डेटाटेक गैर-बैंक वित्तीय कंपनी (NBFC) यूग्रो कैपिटल (UGRO Capital) ने अपनी इक्विटी पूंजी बढ़ाने और 1,265 करोड़ रुपये के अनिवार्य परिवर्तनीय डिबेंचर (सीसीडी) वारंट के आवंटन की घोषणा की है. 2 मई 2024 को एक बोर्ड बैठक के दौरान, कंपनी के निदेशक मंडल ने भारतीय आम चुनावों के चरम के साथ 1,332.66 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी जुटाने को मंजूरी दी थी. 
 
मंजूरी मिलने के बाद इतने करोड़ रुपये किए आवंटित
1 जून 2024 को यूग्रो कैपिटल को शेयरधारकों की मंजूरी मिली, जिसकेबाद 258 करोड़ रुपये के सीसीडी और 1,007 करोड़ रुपये के वारंट आवंटित किए गए. उन्हें मौजूदा निजी इक्विटी निवेशक समेना कैपिटल का समर्थन प्राप्त था, जिसने वारंट और अन्य संस्थागत निवेशकों जैसे एरेजेंस और भारत के कई प्रमुख पारिवारिक कार्यालयों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये का निवेश किया था. उग्रो के संस्थापक, बोर्ड के सदस्यों और प्रबंधन टीम ने भी वारंट इश्यू की सदस्यता ली. सब्सक्राइबर्स आवंटन की तारीख पर इश्यू प्राइस का 25 प्रतिशत और शेष राशि 18 महीने बाद चुका सकते हैं. 

भारत के छोटे व्यवसायों की मदद करने के लक्ष्य के करीब 
यूग्रो कैपिटल के संस्थापक और प्रबंध निदेशक शचींद्र नाथ ने कहा है कि बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच इस पूंजी को जुटाना निवेशकों का हमारे ऊपर विश्वास को दर्शाता है. हमारा लक्ष्य हमेशा एक डेटाटेक संचालित ऋण संस्थान का निर्माण करना रहा है, जो संस्थागत स्वामित्व, स्वतंत्र रूप से पर्यवेक्षण और पेशेवर रूप से प्रबंधित, सार्वजनिक बाजार निवेशकों के लिए सुलभ हो. अब हम भारत में सभी छोटे व्यवसायों की मदद करने के अपने लक्ष्य के करीब हैं और इसे पूरा करने के लिए मेरे मन में हमारे सभी निवेशकों, साझेदारों और पूरी उगरो टीम के प्रति कृतज्ञता की भावना है. 

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2018 में इस कंपनी का किया अधिग्रहण
2018 में शचींद्र नाथ ने 40 करोड़ की नेटवर्थ वाली सूचीबद्ध एनबीएफसी, 'चोखानी सिक्योरिटीज लिमिटेड' का अधिग्रहण किया और भारत के पहले सूचीबद्ध स्टार्ट-अप की अवधारणा को क्रियान्वित किया. इसने टीपीजी- न्यूक्वेस्ट, पीएजी, एडीवी कैपिटल, समेना कैपिटल और अन्य घरेलू पारिवारिक कार्यालयों और सार्वजनिक बाजार निवेशकों सहित निवेशकों से 914 करोड़ रुपये की संस्थागत इक्विटी पूंजी जुटाई. अपने डेनिश सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स इन्वेस्टमेंट फंड के/एस और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के माध्यम से अन्य संस्थागत शेयरधारकों से 100.5 करोड़ रुपये के माध्यम से यूग्रो कैपिटल ने पिछले साल 340.5 करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें डेनमार्क सरकार के स्वामित्व वाले आईएफयू से 240 करोड़ रुपये शामिल थे.  

13 बैंको के साथ साझेदारी करके 2,700 करोड़ रुपये की कुल इक्विटी पूंजी जुटाई
यूग्रो कैपिटल ने 2,700 करोड़ रुपये की कुल इक्विटी पूंजी प्रतिबद्धता जुटाई है, घरेलू और वैश्विक संस्थानों से कुल 4,643 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है और 3,295 करोड़ रुपये के सह-उधार (Co-Lending) देने के लिए 13 बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी की है. इसने भारत भर में 78,000 से अधिक एमएसएमई तक डेटा-संचालित अनुकूलित वित्त समाधान बढ़ाया है.


 


Swiss Court में पहुंचा हिंदुजा परिवार का मामला, बैंकिंग एम्पायर भी जांच के दायरे में

मानव तस्करी  (human trafficking) के लिए दोषी पाए जाने पर प्रकाश हिंदुजा परिवार (Hinduja Family) को 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है.

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Wednesday, 19 June, 2024
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स्विट्जरलैंड (Switzerlank) के जिनेवा (Geneva) की एक कोर्ट ने अरबपति प्रकाश और उनकी पत्नी कमल हिंदुजा, उनके बेटे अजय और बेटे की पत्नी नम्रता के खिलाफ मानव तस्करी से जुड़े आपराधिक आरोपों पर सुनवाई शुरू कर दी है. इस सप्ताह मामले की सुनवाई समाप्त हो सकती है, ऐसे में दोषी पाए जाने पर हिंदुजा परिवार के सदस्यों को 5 साल तक की जेल का सामना करना पड़ सकता है. 

परिवार पर ये आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हिंदुजा परिवार पर जिनेवा झील पर अपने विला में घरेलू कर्मचारियों का शोषण करने, 15 से 18 घंटे तक के कार्य दिवसों के लिए कम से कम 8 डॉलर का भुगतान करने और उनके लिए काम करने वालों के पासपोर्ट जब्त करने का आरोप है. 

अजय हिंदुजा पर ये भी है आरोप 
इसके अलावा अजय हिंदुजा को हिंदुजा बैंक के संबंध में भी आपराधिक कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी क्रॉस होल्डिंग्स के माध्यम से भारत के इंडसइंड बैंक में हिस्सेदारी है. इंडसइंड बैंक को इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IIHL) द्वारा प्रवर्तित (Promoted) किया जाता है, जो मॉरीशस में स्थित है. इसके 600 छिपे हुए शेयरधारक हैं, जो भारत में पब्लिक और अथॉरिटीज के लिए अज्ञात हैं.  संभावना है कि स्विट्जरलैंड स्थित हिंदुजा बैंक मॉरीशस होल्डिंग कंपनी के शेयरधारकों में से एक है.

कर्मचारियों को अवैध रूप से काम करने के लिए किया मजबूर 

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार हिंदुजा परिवार के विला में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ मामला सुलझाने के बाद कोर्ट में यह मुकदमा शुरू हुआ. समझौते के विवरण का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन नागरिक मुकदमा दायर होने के 6 साल बाद बीते शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ, जिसमें आरोप है कि उन्होंने चाइल्ड केयर वर्कर सहित अपने कर्मचारियों को लोकल मजदूरी का एक अंश भुगतान किया और उन्हें लंबे समय तक अवैध रूप से काम करने के लिए मजबूर किया. 

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कर्मचारियों के पासपोर्ट जब्त किए
ये आपराधिक आरोप इस दावे पर केंद्रित हैं कि हिंदुजा परिवार अपने कर्मचारियों के पासपोर्ट जब्त करने के बाद उन्हें अवैध रूप से स्विट्जरलैंड के अंदर और बाहर लाता था. अदालती कार्यवाही में यह तर्क दिया गया कि हिंदुजा के नौकरों को बिना अनुमति के एम्प्लॉयर्स (हिंदुजा परिवार) का घर छोड़ने की अनुमति नहीं थी और उन्हें भारत में उनके काम के लिए भुगतान किया गया था, जिसका अर्थ है कि उनके पास कोई स्विस पैसा नहीं था, इसलिए देश में आने पर उन्हें बहुत कम स्वतंत्रता थी. 

हिंदुजा परिवार के वकील ने कही ये बात 

हिंदुजा के वकीलों ने कहा है कि प्रति दिन 18 घंटे काम करने का दावा झूठा है और वेतन जिसे प्रति दिन 8 डॉलर से कम बताया जा रहा है, उसे कम नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उन्हें नकद में भी भुगतान किया जाता था और कर्मचारियों के खाने और रहने का खर्च परिवार द्वारा ही उठाया जाता था. 

हिंदुजा बैंक धोखाधड़ी मामला

जिनेवा स्थित अभियोजकों (Prosecutors) ने हिंदुजा बैंक के एक खाते के संबंध में दिसंबर 2019 में अजय हिंदुजा के खिलाफ एक आपराधिक आदेश प्राप्त किया था. अजय हिंदुजा ने कथित तौर पर खुद को खाते का लाभकारी मालिक घोषित किया था, जिसे 2008 में खोला गया था और कहा गया था कि इसे परिवार की एक परिचित महिला द्वारा नियंत्रित किया जाता था.

हिंदुजा बैंक के स्वामित्व को लेकर पारिवारिक विवाद 

हिंदुजा बैंक के स्वामित्व को लेकर एक बड़ा पारिवारिक विवाद है, जिसके कारण हिंदुजा परिवार में झगड़े हो रहे हैं, जो यूरोप के सबसे धनी परिवारों में से एक के रूप में जाना जाता है, जिसका विश्वव्यापी एम्पायर बैंकिंग, कार मेकिंग, रियल एस्टेट, एनर्जी, आउटसोर्सिंग और फिलनथ्रोफी है. 2014 में की गई घोषणा के बाद 4 हिंदुजा भाईयों ने दावा किया है कि हिंदुजा बैंक का संयुक्त स्वामित्व उनका है. वे यूके और स्विस अदालतों के साथ-साथ जर्सी में प्राइवेट हियरिंग में अपना मामला लेकर गए हैं. पिछले साल एसपी हिंदुजा के निधन के बाद उनके भाई गोपी ने परिवार के कारोबार की जिम्मेदारी संभाली है. बढ़ते पारिवारिक झगड़े के बीच, हिंदुजा बंधुओं में से एक अशोक हिंदुजा ने रिलायंस कैपिटल को खरीदने के लिए बोली लगाई है, लेकिन अधिग्रहण के लिए 9850 करोड़ रुपये जुटाने के लिए 3 डेडलाइन से चूक गए.


निफ्टी लाल लेकिन Bank Nifty में आई बहार; तेजी से दौड़ रहे बैंकों के शेयर 

बैंक निफ्टी को आज पंख लगे हुए हैं. खासतौर पर प्राइवेट बैंकों के शेयरों में तेजी दिखाई दे रही है.

Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2024
BWHindia

शेयर बाजार (Stock Market) में आज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रही है. एक तरफ जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स हरे निशान पर कारोबार कर रहा है. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी वापस लाल निशान पर आ गया है. दोपहर एक बजे तक निफ्टी 0.014% की गिरावट के साथ 23,554.55 के लेवल पर कारोबार कर रहा था. जबकि सेंसेक्स 0.17% मजबूती हासिल कर चुका था. इन दोनों इंडेक्स में चल रहे उतार-चढ़ाव के बीच बैंक निफ्टी तेजी से दौड़ रहा है. बैंकिंग सेक्टर के अधिकांश शेयर मुनाफे में दिखाई दे रहे हैं.

ये है टॉप गेनर
बैंक निफ्टी इस समय 1.36% या 685.05 अंकों की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है. इस बैंकिंग इंडेक्स में HDFC बैंक टॉप गेनर बना हुआ है. फिलहाल यह करीब 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,637.40 रुपए पर ट्रेड कर रहा है. इसके बाद ICICI बैंक का नंबर है. इस प्राइवेट बैंक के शेयर में भी लगभग दो प्रतिशत का उछाल आया है. 1,139.55 रुपए के भाव पर मिल रहा ये शेयर तेजी से आगे बढ़ रहा है. Axis बैंक के शेयर 1.77% की मजबूती हासिल करके 1,213.05 रुपए पर कारोबार कर रहे हैं. प्राइवेट सेक्टर के कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी आज बढ़त आई है. इसमें अब तक एक प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज हो चुकी है. वहीं, Indusind Bank डेढ़ प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 1,531.25 रुपए पर ट्रेड कर रहा है.

इनमें भी आया उछाल
सरकारी बैंकों के शेयरों में SBI 0.21% की तेजी के साथ 846.65 रुपए पर पहुंच चुका है. शुरुआती कारोबार में बैंक का शेयर चढ़कर 852 रुपए के लेवल पर पहुंच गया था, लेकिन बाद में इसमें कुछ नरमी देखने को मिली. बैंक निफ्टी के बढ़त वाले शेयरों में IDFC First Bank, AU Small Finance Bank और Bandhan Bank भी शामिल हैं. बंधन बैंक के शेयर दोपहर एक बजे तक 0.52% की बढ़त हासिल कर चुके थे. जबकि AU में 0.31% की तेजी दर्ज हुई थी और 1.45% के उछाल के साथ 82.59 रुपए पर पहुंच गए थे.

इनमें आई है गिरावट
आज बढ़त के बीच कुछ बैंकों के शेयरों में गिरावट भी दिखाई दे रही है. Union Bank of India के शेयर 0.30% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं. पंजाब नेशनल बैंक के शेयर में 0.55% की गिरावट आई है. Bank of Baroda सबसे ज्यादा 1.22% गिर चुका है. इसी तरह, Central Bank of India (0.046%), Canara बैंक (0.35%), Bank of Maharashtra (0.046%) और Federal Bank (0.36%) भी लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं. इससे पहले फेडरल बैंक ने पिछले 5 कारोबारी सत्रों में 4.44% का रिटर्न भी दिया है. इस साल अब तक ये शेयर 11.44% चढ़ चुका है.


Maggi ने बनाया सबको दीवाना, कमाई में बनी नंबर-1, 15 महीने में कमा डाले 24000 करोड़ रुपये

नेस्ले की इंडिया यूनिट Nestle India ने अपनी साला रिपोर्ट में बताया है कि कंपनी ने FY2023-24 में इंस्टैंट नूडल्स मैगी की रिकॉर्ड सेल करते हुए इस प्रोडक्ट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है.

Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2024
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दो मिनट में बन जाने नूडल्स मैगी (Maggi) ने भारत में रिकॉर्डतोड़ बिक्री की है. नेस्ले इंडिया (Nestle India) के अनुसार, भारत मैगी का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 में भारत में लगभग 600 करोड़ यूनिट मैगी की बिक्री की है. इसके अलावा कंपनी की चॉकलेट किटकैट (KitKat) ने भी बिक्री के रिकॉर्ड तोड़े हैं. कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान 420 करोड़ यूनिट किटकैट बेची हैं. भारत किटकैट का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है.

मैगी और किटकैट ने कराई मोटी कमाई

स्विस एमएनसी नेस्ले की इंडिया यूनिट ने अपनी सालाना रिपोर्ट में यह आंकड़े जारी किए. इसके मुताबिक, दुनिया में सबसे ज्यादा मैगी भारत में ही बिक रही है. नेस्ले ने बताया कि भारत उनके लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बन गया है. कंपनी यहां डबल डिजिट में ग्रोथ कर रही है. कंपनी ने मैगी नूडल्स और मैगी मसाला-ए-मैजिक की कीमत एवं प्रोडक्ट मिक्स के जरिए यह तेजी हासिल की है. किटकैट चॉकलेट भी नेस्ले का बेस्टसेलर बनी है. वहीं, इससे कंपनी की भी अच्छी खासी कमाई हुई है. कंपनी के प्रोडक्ट की सेल में जोरदार इजाफे के चलते Nestle India ने 31 मार्च 2024 तक पिछले 15 महीने में ही 24,275.5 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की है.

विवादों में फंस गई थी मैगी, FSSAI ने लगाया था बैन

आज कंपनी के लिए रिकॉर्ड सेल कर रही मैगी साल 2015 में बड़े विवाद में फंस गई थी. स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने जून, 2015 में मैगी नूडल्स पर 5 महीने का बैन लगा दिया था. मैगी में तय सीमा से ज्यादा लेड होने का आरोप लगा था. लेड एक खतरनाक केमिकल होता है, जो न सिर्फ इंसानों बल्कि जानवरों के लिए भी घातक होता है. FSSAI के अनुसार, मैगी में 17.2 पार्ट्स पर मिलियन (PPM) लेड था. यह तय सीमा 2.5 पीपीएम से लगभग 1000 गुना ज्यादा था. 

बैन के बाद जीरो हो गया था मैगी का मार्केट शेयर 

इस बैन के चलते नेस्ले इंडिया को तगड़ा झटका लगा था. बैन के समय भारतीय नूडल्स मार्केट में मैगी का शेयर लगभग 80 फीसदी था. बैन के एक महीने के अंदर यह घटकर शून्य पर आ गया था. अब बैन के लगभग एक दशक बाद भी मैगी अपना पुराना स्थान वापस हासिल करने में संघर्ष कर रही है. इस सेगमेंट में कई कंपनियों के आ जाने से कम्पटीशन तगड़ा हो गया है. पिछले 8 साल में कंपनी लगभग 140 प्रोडक्ट इंडिया में उतार चुकी है. साथ ही वह भारत में 2025 तक 7500 करोड़ रुपये का निवेश भी करने वाली है.