बिहार के मखाना की विदेश में धूम! ऑस्ट्रेलिया पहुंची पहली खेप, किसानों को मिला 18% ज्यादा दाम

18 मीट्रिक टन की पहली समुद्री खेप ने खोला विदेशी बाजार का रास्ता, जीआई टैग वाले मिथिला मखाना को किसानों की आय बढ़ाने का नया जरिया बनाने पर जोर

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Saturday, 08 August, 2026
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बिहार के किसानों के लिए मिथिला मखाना ने वैश्विक बाजार में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है. खास बात यह है कि इस खेप के लिए दरभंगा के किसानों से सीधे मखाना खरीदा गया और उन्हें स्थानीय बाजार भाव की तुलना में करीब 18% अधिक कीमत मिली. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने एक्स हैंडल पर इस निर्यात की जानकारी साझा की है. इस पूरी प्रक्रिया में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने सहयोग किया.

किसानों को बाजार से 18% ज्यादा कीमत

ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 18 मीट्रिक टन मखाना की पूरी खेप दरभंगा के किसानों से सीधे खरीदी गई. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, सीधे खरीद और निर्यात से जुड़े इस मॉडल के तहत किसानों को मौजूदा बाजार कीमत से करीब 18% अधिक दाम मिला. इससे किसानों को न केवल बेहतर कीमत मिली, बल्कि उन्हें सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर भी मिला.

यह बिहार से ऑस्ट्रेलिया के लिए मिथिला मखाना की पहली समुद्री खेप है. निर्यात प्रक्रिया को APEDA ने सुगम बनाया. इससे बिहार के मखाना उत्पादकों के लिए विदेशी बाजार में अपनी उपज पहुंचाने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं.

2022 में मिला था जीआई टैग

मिथिला मखाना बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रमुख कृषि उपज है. इसकी विशिष्ट पहचान और क्षेत्रीय विशेषताओं को देखते हुए इसे वर्ष 2022 में जीआई टैग प्रदान किया गया था. जीआई टैग मिलने के बाद मिथिला मखाना की ब्रांड वैल्यू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बढ़ाने पर सरकार का जोर रहा है. जीआई टैग से किसी उत्पाद की भौगोलिक पहचान और विशिष्ट गुणवत्ता को मान्यता मिलती है. ऐसे उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी प्रीमियम कीमत हासिल करने का अवसर मिलता है.

APEDA की मदद से विदेशी खरीदारों तक पहुंच

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाला APEDA कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है. मखाना उत्पादकों को भी निर्यात बाजार से जोड़ने के लिए गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, प्रमाणन और विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाने जैसी व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है.

किसानों को सीधे निर्यात श्रृंखला से जोड़ने का फायदा यह है कि बिचौलियों की भूमिका कम हो सकती है और उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है. मिथिला मखाना की इस खेप को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

अमेरिका और ब्रिटेन में भी बढ़ रही मांग

मिथिला मखाना की मांग अब भारत तक सीमित नहीं है. भारतीय मखाना की मांग अमेरिका, ब्रिटेन और मध्य पूर्व के बाजारों में भी बढ़ रही है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के बाजार में हुई यह पहली समुद्री खेप बिहार के मखाना किसानों के लिए नए अवसर खोल सकती है.

सरकार कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और जीआई टैग वाले उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है. मिथिला मखाना इसी रणनीति का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभर रहा है.

किसानों की आय बढ़ाने में मिल सकती है मदद

विदेशी बाजार में बेहतर कीमत मिलने से मखाना किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं. अगर निर्यात का यह मॉडल बड़े स्तर पर दोहराया जाता है, तो इससे बिहार के मखाना उत्पादकों को स्थायी बाजार, बेहतर मूल्य और वैश्विक मांग का लाभ मिल सकता है.

ऑस्ट्रेलिया के लिए पहली समुद्री खेप को इसी लिहाज से बिहार के मखाना कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. यह कदम स्थानीय कृषि उत्पाद को वैश्विक ब्रांड में बदलने और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जोड़ने की दिशा में अहम साबित हो सकता है.


डीपफेक और AI कंटेंट पर मेटा की बढ़ी मुश्किलें, छिन सकता है ‘सेफ हार्बर’ का कवच

सरकार ने Meta के कंटेंट मॉडरेशन और रिकमेंडेशन सिस्टम पर उठाए सवाल, डीपफेक और बिना लेबल वाले AI कंटेंट को लेकर मांगा जवाब

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
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Saturday, 08 August, 2026
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फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दरअसल, डीपफेक, बिना लेबल वाले AI कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर केंद्र सरकार ने कंपनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. सरकार अब यह भी जांच रही है कि भारतीय कानून के तहत मेटा को ‘इंटरमीडियरी’ का दर्जा देकर मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा जारी रखी जा सकती है या नहीं. अगर कंपनी तय कानूनी शर्तों का पालन करने में विफल पाई जाती है, तो उसकी कानूनी सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.

दरअसल, सरकार की चिंता खास तौर पर मेटा के उन सिस्टम को लेकर है, जो यूजर्स को उनकी पसंद और व्यवहार के आधार पर कंटेंट दिखाते हैं. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म केवल यूजर्स के कंटेंट को होस्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने रिकमेंडेशन सिस्टम के जरिए यह भी तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए, तो उसके इंटरमीडियरी स्टेटस पर सवाल उठ सकता है.

मेटा के रिकमेंडेशन सिस्टम पर सरकार की नजर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल में मेटा के साथ हुई बैठकों में कंपनी के रिकमेंडेशन सिस्टम और पैसे देकर कंटेंट प्रमोट करने के तरीकों पर भी सवाल किए गए. सरकार यह समझना चाहती है कि कंटेंट को चुनने, प्रमोट करने और खास यूजर्स तक पहुंचाने की प्रक्रिया इंटरमीडियरी को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा की शर्तों के अनुरूप है या नहीं.

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरी को यूजर्स या तीसरे पक्ष की ओर से पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कुछ परिस्थितियों में ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा मिलती है. हालांकि, यह सुरक्षा कुछ तय शर्तों और कानूनी जिम्मेदारियों के पालन पर निर्भर करती है. इसमें 2021 के IT नियमों के तहत तय ड्यू डिलिजेंस की शर्तें भी शामिल हैं.

अगर कोई प्लेटफॉर्म इन कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करता है, तो वह धारा 79 के तहत मिलने वाली सुरक्षा गंवा सकता है. ऐसी स्थिति में उसके खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है.

डीपफेक और बिना लेबल वाले AI कंटेंट पर सवाल

सरकार ने मेटा के सामने डीपफेक, चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM), बिना लेबल वाले सिंथेटिक कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं. अधिकारियों ने सवाल किया कि नियमों के तहत AI से तैयार सिंथेटिक कंटेंट की पहचान और लेबलिंग जरूरी होने के बावजूद बिना सही लेबल वाले AI वीडियो प्लेटफॉर्म पर कैसे मौजूद हैं और तेजी से फैल रहे हैं.

इस सप्ताह मेटा की ग्लोबल टीम के साथ दो दिनों तक इन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई. इस दौरान कंपनी ने अधिकारियों को तकनीकी स्तर पर अपनी व्यवस्थाओं और इन समस्याओं से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी.

भारतीय भाषाओं और लोकल कंटेंट की मॉनिटरिंग पर भी जोर

सरकार ने मेटा से कंटेंट मॉनिटरिंग में इंसानी दखल बढ़ाने और भारतीय भाषाओं व स्थानीय संदर्भों को बेहतर तरीके से समझने वाली व्यवस्था मजबूत करने को कहा है. सरकार का मानना है कि भारत जैसे बहुभाषी देश में केवल ऑटोमेटेड सिस्टम के भरोसे कंटेंट मॉडरेशन पर्याप्त नहीं हो सकता. इन मुद्दों पर सरकार और मेटा के बीच बातचीत आगे भी जारी रहने की संभावना है. अगले सप्ताह दोनों पक्षों के बीच एक और बैठक हो सकती है.

कानूनी कार्रवाई पर भी विचार

हालिया बैठकों के नतीजों के आधार पर सरकार मेटा के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर भी विचार कर रही है. इसके लिए कानूनी राय लेने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है. अगर सरकार की समीक्षा आगे बढ़ती है, तो इसका असर केवल मेटा तक सीमित नहीं रह सकता. दूसरे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म के रिकमेंडेशन सिस्टम, कंटेंट मॉडरेशन और यूजर कंटेंट से जुड़े तौर-तरीकों की भी भारतीय कानूनों के तहत जांच की जा सकती है.

सरकार का कहना है कि उसका मकसद सेंसरशिप लागू करना नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित कराना है.

PM मोदी की पोस्ट हटाने का मामला भी चर्चा में

यह पूरा मामला उस घटना के बाद भी चर्चा में आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था. मेटा ने बाद में इसके लिए माफी मांगी थी. इसके बाद संसदीय स्थायी समिति ने भी मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से माफी मांगने को कहा था और कंपनी को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर दोबारा विचार करने की चेतावनी दी थी.


E20 पेट्रोल पर तेल कंपनियों की सफाई, ‘ईंधन सुरक्षित’; 90 हजार पंपों पर बढ़ी क्वालिटी जांच

E20 विवाद के बीच इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL ने कहा कि देशभर में पेट्रोल की गुणवत्ता की व्यापक जांच की गई है. कंपनियों के मुताबिक, ज्यादातर सैंपल में क्लोराइड और नमी की मात्रा तय मानकों के भीतर मिली है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
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Saturday, 08 August, 2026
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सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच ईंधन की गुणवत्ता और वाहनों पर इसके असर को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने संयुक्त बयान में कहा कि देशभर में E20 पेट्रोल की सप्लाई चेन की व्यापक जांच की गई है और ज्यादातर सैंपल में नमी तथा क्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर पाई गई है.

कंपनियों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए E20 पेट्रोल के सैंपल की जांच की गई. E20 पेट्रोल में 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी इथेनॉल होता है. जांच में केवल दो स्थानों पर क्लोराइड का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया. दोनों मामलों में संबंधित पेट्रोल पंपों पर तत्काल बिक्री रोक दी गई और विस्तृत जांच के बाद जरूरी सुधार किए गए.

E20 से माइलेज और इंजन पर असर को लेकर क्या कहा गया?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, E20 पेट्रोल को लेकर खासतौर पर पुराने वाहनों के मालिकों के बीच माइलेज कम होने और इंजन के कुछ हिस्सों में घिसाव को लेकर चिंता जताई गई है. ऐसे वाहनों के इंजन अधिक मात्रा में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे.

सरकार पहले ही इंजन के हिस्सों में ज्यादा घिसाव होने के दावों को खारिज कर चुकी है. हालांकि, पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल से माइलेज में कुछ कमी आने की संभावना जताई गई है. सरकार के मुताबिक, यह कमी मामूली हो सकती है और करीब 3 से 5 फीसदी के दायरे में रह सकती है.

जुलाई के अंत में ऑटो इंडस्ट्री की संस्था सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स यानी SIAM ने भी ईंधन में ज्यादा क्लोराइड और नमी को लेकर चिंता जताई थी. संस्था ने कुछ इंजन पार्ट्स में जंग और घिसाव की आशंका व्यक्त की थी. हालांकि, बाद में SIAM ने सरकार को भेजी अपनी चिट्ठी वापस लेते हुए कहा कि उपलब्ध आंकड़ों की आगे जांच और पुष्टि की जरूरत है. इसके बाद सरकार ने तेल कंपनियों को देशभर में ईंधन की गुणवत्ता की निगरानी और मजबूत करने के निर्देश दिए.

100 से ज्यादा पेट्रोल सैंपल की जांच

तेल कंपनियों ने बताया कि अतिरिक्त निगरानी के तहत अलग-अलग रिफाइनरियों से 100 से ज्यादा पेट्रोल सैंपल रैंडम तरीके से लिए गए. इन सभी सैंपल में क्लोराइड की मात्रा 1 पार्ट पर मिलियन यानी ppm या उससे कम रही.

इथेनॉल की गुणवत्ता की भी जांच की गई. देशभर की 80 डिस्टिलरी से पिछले 10 दिनों में इथेनॉल के सैंपल लिए गए. पेट्रोलियम मंत्रालय के सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी यानी CHT और तेल कंपनियों की संयुक्त टास्क फोर्स ने इनकी जांच की. कंपनियों के अनुसार, सभी सैंपल में क्लोराइड की मात्रा निर्धारित 3 ppm की सीमा से नीचे रही. डिपो और टर्मिनल से लिए गए E20 और इथेनॉल के 80 से ज्यादा सैंपल की भी जांच की गई. यहां भी क्लोराइड का स्तर 3 ppm से कम पाया गया.

पेट्रोल पंपों पर 160 से ज्यादा सैंपल का विश्लेषण किया गया. OMCs के मुताबिक, इन सैंपल में क्लोराइड का स्तर 0 से 3 ppm के बीच रहा. कंपनियों ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें ईंधन में क्लोराइड की मात्रा कई सौ ppm तक होने की बात कही गई थी.

पेट्रोल पंपों पर दिन में 8 से 12 बार जांच

ईंधन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए पेट्रोल पंपों पर पानी के रिसाव और ईंधन की डेंसिटी की जांच दिन में 8 से 12 बार की जा रही है. इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में मोबाइल फ्यूल क्वालिटी टेस्टिंग लैब भी तैनात की गई हैं. पेट्रोल पंपों के भूमिगत टैंकों की भी जांच की जा रही है. करीब 90 हजार पेट्रोल पंपों पर इन टैंकों की अनिवार्य जांच और निगरानी की जा रही है. कंपनियों के अनुसार, अब तक की जांच में टैंकों में पानी के रिसाव का कोई मामला सामने नहीं आया है.

OMCs ने कहा कि जहां भी ईंधन की गुणवत्ता में गड़बड़ी मिलती है, वहां तुरंत बिक्री रोककर आवश्यक सुधार किए जाते हैं. दो पेट्रोल पंपों पर क्लोराइड का स्तर अधिक मिलने के मामलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई.

पांच साल पहले हासिल हुआ 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य

भारत ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल किया है. पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम दो दशक से ज्यादा पुराना है और पिछले कुछ वर्षों में इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ने के साथ इसमें तेजी आई है.

इथेनॉल सप्लाई ईयर 2013-14 में पेट्रोल में औसत इथेनॉल ब्लेंडिंग करीब 1.5 फीसदी थी. यह 2021-22 में बढ़कर 10 फीसदी और 2025-26 में 20 फीसदी तक पहुंच गई.

सरकार के अनुसार, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और वाहन निर्माताओं ने E20 को लेकर लैब स्टडी और फील्ड ट्रायल किए हैं. इन परीक्षणों में इंजन की मजबूती, वाहन की परफॉर्मेंस, स्टार्ट होने की क्षमता, जंग से बचाव और अलग-अलग मटेरियल के साथ ईंधन की अनुकूलता जैसे पहलुओं की जांच की गई. सरकार का कहना है कि निर्धारित मानकों के तहत किए गए परीक्षणों में E20 को इस्तेमाल के लिए सुरक्षित पाया गया है.

 


Mafatlal Industries का Q1 प्रदर्शन मजबूत, कोर बिजनेस का रेवेन्यू 14.6% बढ़कर ₹447.9 करोड़

Mafatlal Industries ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ₹942.5 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया. कंपनी का रनिंग ऑर्डर बुक करीब ₹890 करोड़ रहा, जिससे आने वाली तिमाहियों में कारोबार के लिए बेहतर रेवेन्यू विजिबिलिटी बनी हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
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Saturday, 08 August, 2026
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विविध कारोबार वाली मफतलाल इंडस्ट्रीज (Mafatlal Industries Limited) ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं. कंपनी के टेक्सटाइल्स एवं संबंधित उत्पाद और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार से राजस्व सालाना आधार पर 14.6 फीसदी बढ़कर ₹447.9 करोड़ हो गया. कंपनी ने बताया कि संस्थागत मांग में मजबूती और प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर लगातार काम आगे बढ़ने से कोर बिजनेस को सपोर्ट मिला.

कंपनी अपने बिजनेस पोर्टफोलियो को भी बेहतर बनाने पर फोकस कर रही है. इसके तहत कम मार्जिन वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्ट्स में कारोबार को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा रहा है.

Q1 में ₹942.5 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Mafatlal Industries का ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹942.5 करोड़ रहा. इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA ₹23.5 करोड़ और प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) ₹19.6 करोड़ रहा. कंपनी का रनिंग ऑर्डर बुक करीब ₹890 करोड़ पर रहा. इससे कंपनी के प्रमुख कारोबारों में आने वाली तिमाहियों के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी मजबूत बनी हुई है.

टेक्सटाइल्स कारोबार बना प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर

तिमाही के दौरान टेक्सटाइल्स एवं संबंधित उत्पाद और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार कंपनी के प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर रहे. संस्थागत मांग और प्रोजेक्ट्स के लगातार निष्पादन से दोनों सेगमेंट को फायदा मिला.

टेक्सटाइल्स एवं संबंधित उत्पाद कारोबार ने तिमाही के कुल EBIT में 59.9 फीसदी का योगदान दिया. कंपनी के मुताबिक, इसके इंटीग्रेटेड यूनिफॉर्म्स सॉल्यूशन बिजनेस में लगातार मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला.

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में भी तेजी

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार ने भी तिमाही के दौरान अच्छी ग्रोथ दर्ज की. संस्थागत प्रोजेक्ट्स और डिजिटल लर्निंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बढ़ती गतिविधियों से इस कारोबार को मजबूती मिली. कंपनी के मुताबिक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर धीरे-धीरे उसके प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है.

सस्टेनेबिलिटी पर कंपनी का फोकस

Mafatlal Industries ने अपने सस्टेनेबिलिटी प्रयासों को भी आगे बढ़ाया है. कंपनी ने नडियाद मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 4 MWp का कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके अलावा बारिश के पानी को बचाने के लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग से जुड़े उपाय भी शुरू किए गए हैं.

क्या बोले कंपनी के MD और CEO?

अरविंद मफतलाल ग्रुप के वाइस चेयरमैन और Mafatlal Industries के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं CEO प्रियव्रत मफतलाल ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी का फोकस कारोबार में बेहतर एक्जीक्यूशन और टिकाऊ ग्रोथ पर बना हुआ है.

उन्होंने कहा कि कंपनी का इंटीग्रेटेड यूनिफॉर्म्स सॉल्यूशन बिजनेस उसकी एंड-टू-एंड क्षमताओं और मजबूत ग्राहक संबंधों से लगातार लाभ उठा रहा है. वहीं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार तेजी से एक प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है.

कंपनी के मुताबिक, मजबूत ऑर्डर बुक और अनुशासित तरीके से कारोबार को आगे बढ़ाने की रणनीति के दम पर वह सभी हितधारकों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू तैयार करने पर फोकस कर रही है.
 


Dalmia Bharat Sugar का Q1 मुनाफा दबाव में, गन्ने की ऊंची कीमतों का दिखा असर; रेवेन्यू ₹848 करोड़

Dalmia Bharat Sugar ने जून तिमाही में ₹848 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया. गन्ने की ऊंची कीमतों और कम बिक्री वॉल्यूम के चलते कंपनी का प्रदर्शन दबाव में रहा, हालांकि बेहतर चीनी कीमतों ने कुछ राहत दी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
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Saturday, 08 August, 2026
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डालमिया भारत शुगर (Dalmia Bharat Sugar and Industries Limited) ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजे जारी किए हैं. कंपनी ने तिमाही के दौरान ₹848 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू और ₹71 करोड़ का EBITDA दर्ज किया. कंपनी के मुताबिक, पिछले शुगर सीजन में गन्ने की ऊंची कीमतों के कारण शुरुआती इन्वेंट्री की लागत बढ़ी, जिसका असर तिमाही के प्रदर्शन पर पड़ा. हालांकि, बेहतर चीनी कीमतों ने इस दबाव को कुछ हद तक कम किया.

चीनी बिक्री 1.3 लाख टन रही

जून तिमाही में कंपनी की चीनी बिक्री 1.3 लाख टन रही. इस दौरान चीनी का औसत नेट सेलिंग रियलाइजेशन (NSR) ₹40.6 प्रति किलो रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ₹39.9 प्रति किलो था. यानी सालाना आधार पर चीनी की बिक्री कीमत में सुधार हुआ है.

कंपनी ने बताया कि जुलाई 2026 में चीनी का NSR बढ़कर ₹43-44 प्रति किलो के दायरे में बना हुआ है. घरेलू मांग स्थिर रहने और सप्लाई संतुलित रहने से कंपनी को निकट अवधि में चीनी कीमतों के मजबूत बने रहने की उम्मीद है.

गन्ने की ऊंची कीमतों से चीनी कारोबार पर दबाव

कंपनी के मुताबिक, चीनी कारोबार की लाभप्रदता पर ऊंची गन्ना कीमतों और कम बिक्री वॉल्यूम का असर पड़ा. हालांकि, पिछले साल की तुलना में बेहतर NSR ने इस दबाव को आंशिक रूप से कम किया. 30 जून 2026 तक कंपनी के पास 2.36 लाख टन चीनी का स्टॉक था, जिसकी वैल्यू ₹36.9 प्रति किलो के हिसाब से आंकी गई है. कंपनी ने कहा कि पहली तिमाही में बिक्री वॉल्यूम कम रहने से तिमाही के अंत में स्टॉक जमा हुआ है. आने वाली तिमाहियों में इस अतिरिक्त स्टॉक की बिक्री होने की उम्मीद है.

डिस्टिलरी कारोबार में भी गतिविधियां बढ़ीं

कंपनी के डिस्टिलरी कारोबार की तिमाही वॉल्यूम 4.3 करोड़ लीटर रही. कंपनी इस कारोबार में अपनी क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है. बोर्ड ने रामगढ़ स्थित मौजूदा केन डिस्टिलरी को ड्यूल-फीड 100 KLPD डिस्टिलरी में बदलने की परियोजना को मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹49 करोड़ खर्च होने का अनुमान है और इसके अप्रैल 2027 तक चालू होने की उम्मीद है.

कोल्हापुर में Bio-CNG प्रोजेक्ट पर काम जारी

कंपनी का कोल्हापुर में CBG यानी Bio-CNG प्रोजेक्ट तय समयसीमा के मुताबिक आगे बढ़ रहा है. इसके नवंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है.

तंजानिया में ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का प्रोजेक्ट

कंपनी ने तंजानिया प्रोजेक्ट को भी 14 जुलाई 2026 को मंजूरी दी है. इसके तहत 10,000 हेक्टेयर में गन्ने की खेती विकसित करने और करीब 70,000 टन सालाना चीनी उत्पादन क्षमता वाली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना है. इसके साथ 20 MW का को-जनरेशन प्लांट भी लगाया जाएगा.

इस परियोजना की अनुमानित लागत 132 मिलियन डॉलर है. कंपनी के मुताबिक, मध्यम से लंबी अवधि में इस परियोजना को 20,000 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र और 1.5 लाख टन चीनी उत्पादन क्षमता तक बढ़ाया जा सकता है. कंपनी इस इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स को आगे चलकर बायो-एनर्जी प्लेटफॉर्म में बदलने की योजना बना रही है.

गन्ने की FRP बढ़कर ₹365 प्रति क्विंटल

शुगर सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल कर दिया गया है. यह 10.25 फीसदी की बेसिक रिकवरी पर लागू होगा. पिछले सीजन में FRP ₹355 प्रति क्विंटल था.

आगे चीनी की कीमतों में मजबूती की उम्मीद

कंपनी को आगामी सीजन में गन्ने की अच्छी फसल की उम्मीद है. हालांकि, फसल का वास्तविक उत्पादन मौसम, अल नीनो और अन्य कृषि-जलवायु परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. कंपनी का कहना है कि पहली तिमाही में कम बिक्री के कारण जो स्टॉक जमा हुआ है, उसकी बिक्री आने वाली तिमाहियों में की जाएगी. वहीं, घरेलू मांग और संतुलित सप्लाई को देखते हुए चीनी की कीमतों के निकट अवधि में मजबूत बने रहने की उम्मीद है.

क्रेडिट रेटिंग बरकरार

Dalmia Bharat Sugar की लॉन्ग टर्म क्रेडिट रेटिंग CARE AA+ (Stable) पर बरकरार रखी गई है, जबकि शॉर्ट टर्म क्रेडिट रेटिंग CARE A1+ पर कायम है.

 


Oil India का मुनाफा 97% उछला, ₹4,027 करोड़ पहुंचा प्रॉफिट; रिकॉर्ड क्रूड उत्पादन से मिला फायदा

कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 97 फीसदी बढ़कर करीब 4,027 करोड़ रुपये हो गया. रिकॉर्ड क्रूड उत्पादन, मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और नई गैस खोज ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
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Saturday, 08 August, 2026
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सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनी ऑयल इंडिया (OIL) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए. अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट करीब 4,027 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 97 फीसदी अधिक है. कंपनी के मुताबिक, बेहतर क्रूड उत्पादन और उसकी सब्सिडियरी नूमालीगढ़ रिफाइनरी (NRL) के मजबूत प्रदर्शन से मुनाफे में यह बढ़ोतरी हुई है.

कुल आय भी बढ़ी

अप्रैल-जून तिमाही में ऑयल इंडिया की कंसोलिडेटेड कुल आय बढ़कर करीब 13,236 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 9,006 करोड़ रुपये थी. तिमाही आधार पर कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 66 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है. यह कंपनी के एक्सप्लोरेशन और रिफाइनिंग कारोबार में बेहतर परिचालन प्रदर्शन को दर्शाता है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा क्रूड उत्पादन

ऑयल इंडिया ने पहली तिमाही में 0.950 मिलियन टन यानी करीब 9.50 लाख टन कच्चे तेल का उत्पादन किया. पिछले साल की समान तिमाही में यह 0.853 मिलियन टन था. कंपनी ने 27 जून 2026 को अपना अब तक का सबसे अधिक दैनिक क्रूड उत्पादन भी दर्ज किया. इस दिन कंपनी ने 10,921 टन कच्चे तेल का उत्पादन किया, जो करीब 84,109 बैरल प्रतिदिन के बराबर है.

कंपनी के मुताबिक, पुराने तेल क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने और परिचालन क्षमता में सुधार की रणनीति से उत्पादन में तेजी आई है. इससे देश की घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी.

Numaligarh Refinery का मुनाफा 167% बढ़ा

ऑयल इंडिया की महत्वपूर्ण सब्सिडियरी Numaligarh Refinery Ltd (NRL) ने भी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया. NRL का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 167 फीसदी बढ़कर 1,305 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 488 करोड़ रुपये था.

रिफाइनरी का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) भी तेजी से बढ़ा. यह पिछले साल के 5.02 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 35.95 डॉलर प्रति बैरल हो गया. वहीं, डिस्टिलेट यील्ड 85.38 फीसदी से बढ़कर 87.58 फीसदी हो गई.

अंडमान बेसिन में मिली नई गैस खोज

कंपनी ने एक्सप्लोरेशन के मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है. ऑयल इंडिया ने अंडमान बेसिन के Vijaya Puram-3 एक्सप्लोरेटरी वेल में प्राकृतिक गैस की खोज की है. कंपनी के मुताबिक, यह खोज इस बेसिन में हाइड्रोकार्बन की संभावनाओं को मजबूत करती है.

इसके अलावा, असम में कंपनी ने एक अत्यधिक झुका हुआ एक्सप्लोरेटरी वेल सफलतापूर्वक पूरा किया. इसमें 3,116 मीटर का रिकॉर्ड हॉरिजॉन्टल डिस्प्लेसमेंट दर्ज किया गया, जो कंपनी की ओर से किसी ऑनशोर वेल में अब तक का सबसे अधिक है.

ऑयल इंडिया ने कहा कि बढ़ा हुआ क्रूड उत्पादन, बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में तेजी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को मजबूती दी है.


तेल संकट के बीच बड़ी खबर! ईरान-ओमान में होर्मुज पर समझौते का ढांचा तैयार

मौजूदा तनाव के बावजूद इस रास्ते से ऊर्जा की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन सप्लाई प्रभावित हुई है. अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की उपलब्धता बढ़ सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 08 August, 2026
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत में अहम प्रगति होने की खबर है. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता हसन गशघावी के मुताबिक, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते का सामान्य ढांचा तैयार हो चुका है. हालांकि, अंतिम शर्तों पर अभी फैसला होना बाकी है और समझौते को ईरान के उच्च स्तर से मंजूरी मिलनी है. अगर इस समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. भारत समेत एशिया के कई बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर होगी.

कब पूरी तरह खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल यह साफ नहीं है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह कब खुलेगा. ईरान ने संकेत दिया है कि इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी से जुड़ा हुआ है. दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से नाकाबंदी हटाने को लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि अस्थायी रास्तों के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही के लिए किसी विशेष मंजूरी, अनुमति या शुल्क की जरूरत नहीं होगी. ऐसे में फिलहाल पूरी तरह सामान्य आवाजाही बहाल होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है.

जहाजों की आवाजाही पर ईरान का नियंत्रण?

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के प्रवेश पर नियंत्रण ईरान के पास रह सकता है. वहीं, जहाजों के बाहर निकलने की निगरानी ईरान और ओमान संयुक्त रूप से कर सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, जहाजों की आवाजाही के लिए एक केंद्रीय समुद्री मार्ग तय किया जा सकता है. वहीं, फिलहाल सीमित रूप से इस्तेमाल किए जा रहे दो अन्य रास्तों को एक निश्चित समय के बाद बंद किया जा सकता है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी इस सप्ताह कहा था कि ओमान के साथ इस मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है.

दुनिया के लिए क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है. दुनिया की बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही इसी समुद्री मार्ग से होती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल बाजार पर तुरंत असर डाल सकता है.

मौजूदा तनाव के बावजूद इस रास्ते से ऊर्जा की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन सप्लाई प्रभावित हुई है. अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की उपलब्धता बढ़ सकती है.

भारत के लिए भी राहत की उम्मीद

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई सामान्य होने पर भारतीय रिफाइनरों और ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है.

सप्लाई बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. इसका असर आगे चलकर भारत के आयात बिल, रुपये और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही कितनी जल्दी और कितनी पूरी तरह सामान्य होती है.

 

 


विदेशी मुद्रा भंडार में जबरदस्त उछाल, 5 हफ्तों में बढ़ा 2.5 लाख करोड़ का खजाना

विदेशी मुद्रा भंडार के साथ देश के गोल्ड रिजर्व में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिपोर्टिंग सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार का मूल्य 1.685 अरब डॉलर बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 08 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 08 August, 2026
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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है. RBI की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई को खत्म सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे पिछले सप्ताह भी विदेशी मुद्रा भंडार में 6.118 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी और यह 682.354 अरब डॉलर रहा था.

5 हफ्तों में 26 अरब डॉलर की बढ़ोतरी

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार पांचवें सप्ताह बढ़ोतरी हुई है. 26 जून को समाप्त सप्ताह में फॉरेक्स रिजर्व 666.93 अरब डॉलर तक गिर गया था. इसके बाद से इसमें लगातार सुधार हुआ है और पांच हफ्तों में कुल करीब 25.94 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

इस साल 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और रुपये पर दबाव के चलते इसके बाद कई हफ्तों तक फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट आई थी. इस दौरान RBI को रुपये को संभालने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की बिक्री करनी पड़ी थी.

Foreign Currency Assets में भी बड़ी बढ़ोतरी

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति (Foreign Currency Assets) 8.75 अरब डॉलर बढ़कर 564.68 अरब डॉलर हो गई. विदेशी मुद्रा संपत्तियों के मूल्य में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है.

गोल्ड रिजर्व भी बढ़ा

विदेशी मुद्रा भंडार के साथ देश के गोल्ड रिजर्व में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिपोर्टिंग सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार का मूल्य 1.685 अरब डॉलर बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) 48 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.666 अरब डॉलर हो गए. वहीं, IMF के पास भारत की रिजर्व पोजिशन भी 28 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.778 अरब डॉलर हो गई.

विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम

देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए RBI और सरकार की ओर से हाल के दिनों में कई कदम उठाए गए हैं. इनमें FCNR(B) से जुड़े उपाय भी शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन पहलों के तहत अब तक करीब 32 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हुआ है, जिसमें FCNR(B) योजना की अहम भूमिका रही है.

लगातार बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है. इससे बाहरी झटकों से निपटने, आयात भुगतान को सपोर्ट करने और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए RBI की क्षमता मजबूत होती है.

 


IPO के मामले में दुनिया में नंबर-1 बना भारत, FY26 में प्राइमरी मार्केट से जुटाए 13.6 लाख करोड़ रुपये: सेबी

भारत ने FY26 में IPO की संख्या के मामले में वैश्विक स्तर पर अपनी शीर्ष स्थिति बरकरार रखी. वहीं, फंड जुटाने के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार रहा.

Last Modified:
Friday, 07 August, 2026
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भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में IPO के मामले में एक बार फिर दुनिया में अपनी बादशाहत कायम रखी है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की FY26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत IPO की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा बाजार रहा. हालांकि, जुटाई गई रकम के लिहाज से भारत तीसरे स्थान पर रहा. SEBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के प्राइमरी मार्केट से कुल 13.6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई. यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 4.4 फीसदी कम है. हालांकि, IPO, फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) और राइट्स इश्यू के जरिए पब्लिक इक्विटी फंडरेजिंग 11.7 फीसदी बढ़कर 2.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई.

IPO से 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए

FY26 में IPO और FPO के जरिए कुल फंड जुटाने की राशि करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल के लगभग बराबर है. इस दौरान नई लिस्टेड कंपनियों की संख्या 320 से बढ़कर 366 हो गई. इससे प्राइमरी इक्विटी मार्केट में मजबूत गतिविधि का संकेत मिलता है. मेनबोर्ड IPO के जरिए कंपनियों ने FY26 में 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8.9 फीसदी अधिक है.

Preferential Issues से 1.48 लाख करोड़ रुपये जुटे

प्राइमरी मार्केट में कंपनियों ने पूंजी जुटाने के लिए अन्य रास्तों का भी इस्तेमाल किया. वित्त वर्ष 2025-26 में Preferential Issues के जरिए 1,48,219 करोड़ रुपये जुटाए गए. इसमें सालाना आधार पर 76.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, 36 Qualified Institutional Placements (QIPs) के जरिए 67,853 करोड़ रुपये जुटाए गए. FY25 में 91 QIPs के जरिए 1,35,597 करोड़ रुपये जुटाए गए थे.

SME कंपनियों की भी रही मजबूत भागीदारी

SME सेगमेंट में भी प्राइमरी मार्केट की गतिविधियां मजबूत रहीं. FY26 में कुल 257 कंपनियां SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुईं और इनके जरिए 11,587 करोड़ रुपये जुटाए गए. यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 18.1 फीसदी अधिक है.

SEBI ने किए कई बड़े बदलाव

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि साल के दौरान प्राइमरी इक्विटी मार्केट ने अपनी मजबूती और गतिशीलता बरकरार रखी. भू-राजनीतिक संघर्ष, व्यापारिक तनाव, पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बावजूद बाजार लचीला बना रहा.

पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने और निवेशकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए SEBI ने कई कदम उठाए. इनमें न्यूनतम पब्लिक ऑफर फ्रेमवर्क में बदलाव प्रमुख रहा. इसके तहत पब्लिक फ्लोट की जरूरतों को इश्यू के आकार के अनुरूप किया गया. इसके अलावा, बड़े इश्यू जारी करने वाली कंपनियों के लिए अनिवार्य 25 फीसदी न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई.

SEBI ने न्यू-एज कंपनियों के संस्थापकों को IPO से पहले दिए गए Employee Stock Option Plans (ESOPs) को बनाए रखने की भी अनुमति दी. नियामक के मुताबिक, इससे कंपनियों में लंबे समय के प्रोत्साहन और सार्वजनिक शेयरधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.

डेट मार्केट से जुटाई गई सबसे ज्यादा पूंजी

FY26 में प्राइमरी मार्केट से पूंजी जुटाने में डेट इश्यू सबसे बड़ा हिस्सा रहा. हालांकि, डेट इश्यू के जरिए जुटाई गई रकम 8.4 फीसदी घटकर 9,11,078 करोड़ रुपये रह गई. इसमें प्राइवेट प्लेसमेंट की हिस्सेदारी 98.8 फीसदी रही. वहीं, पब्लिक डेट इश्यू 39.2 फीसदी बढ़कर 11,343 करोड़ रुपये पहुंच गए.

म्युनिसिपल बॉन्ड और AIF में भी बढ़ी गतिविधि

वित्त वर्ष के दौरान 14 म्युनिसिपल बॉन्ड इश्यू के जरिए 1,756 करोड़ रुपये जुटाए गए. SEBI ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को पारंपरिक Probability of Default मॉडल के साथ Expected Loss आधारित रेटिंग स्केल अपनाने की अनुमति दी, ताकि शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड को बढ़ावा दिया जा सके. वहीं, Alternative Investment Fund (AIF) इंडस्ट्री का भी विस्तार जारी रहा. 31 मार्च 2026 तक रजिस्टर्ड AIF की संख्या बढ़कर 1,829 हो गई, जो एक साल पहले 1,526 थी. इस दौरान AIF में कुल कमिटमेंट 25.6 फीसदी बढ़कर 16,94,262 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 13,49,051 करोड़ रुपये था.

SEBI चेयरमैन ने कहा कि नियामक की सोच अब 'Resilience by Design' की दिशा में आगे बढ़ रही है. इसके तहत बेहतर रेगुलेशन, AI आधारित निगरानी, पुराने नियमों के आधुनिकीकरण और बाजार प्रतिभागियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है.


SBI का मुनाफा 10% बढ़कर ₹21,121 करोड़, कुल बिजनेस ₹110 लाख करोड़ के पार

SBI के मजबूत तिमाही नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब बैंकिंग सेक्टर में ब्याज दरों, डिपॉजिट लागत और क्रेडिट ग्रोथ पर बाजार की नजर बनी हुई है. बेहतर मुनाफे, मजबूत NII और बढ़ते लोन कारोबार से बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है.

Last Modified:
Friday, 07 August, 2026
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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 10% बढ़कर ₹21,121 करोड़ पहुंच गया, जो बाजार के ₹19,052 करोड़ के अनुमान से काफी अधिक है. इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 15% बढ़कर ₹46,992 करोड़ हो गई. मजबूत तिमाही नतीजों के बीच SBI के शेयर में करीब 3% की तेजी देखने को मिली.

अनुमान से बेहतर रहा SBI का मुनाफा

SBI ने बताया कि जून 2026 को समाप्त तिमाही में उसका स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹21,121 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹19,160 करोड़ था. यानी बैंक के मुनाफे में सालाना आधार पर करीब 10% की बढ़ोतरी हुई.

बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम भी मजबूत रही. पहली तिमाही में NII 15% बढ़कर ₹46,992 करोड़ पहुंच गई, जबकि बाजार का अनुमान ₹46,214 करोड़ था. वहीं, बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 10% बढ़कर ₹33,529 करोड़ रहा.

NIM में भी सुधार

SBI का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पहली तिमाही में 3% रहा. इसमें पिछली तिमाही की तुलना में 7 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ. वहीं, पूरे बैंक का NIM क्रमिक आधार पर 5 बेसिस पॉइंट बढ़कर 2.86% हो गया. मार्जिन में यह सुधार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फंडिंग कॉस्ट और टर्म डिपॉजिट की री-प्राइसिंग से बैंक की लाभप्रदता पर दबाव की आशंका जताई जा रही थी.

SBI का कुल बिजनेस ₹110 लाख करोड़ के पार

बैंक ने बताया कि जून तिमाही के दौरान उसका कुल बिजनेस **₹110 लाख करोड़ के पार** पहुंच गया. इसमें डिपॉजिट ₹60 लाख करोड़ से अधिक और एडवांसेज यानी लोन ₹50 लाख करोड़ से ज्यादा रहे.

बैंक के कुल एडवांसेज में सालाना आधार पर 19% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि घरेलू एडवांसेज 18.15% बढ़े. विदेशी कार्यालयों के एडवांसेज में रुपये के लिहाज से 21% और डॉलर के लिहाज से 10% की वृद्धि हुई.

रिटेल से कॉरपोरेट तक सभी सेगमेंट में ग्रोथ

SBI ने बताया कि रिटेल, कृषि, SME और कॉरपोरेट लोन समेत उसके सभी प्रमुख सेगमेंट में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. RAM यानी Retail, Agriculture और MSME एडवांसेज में सालाना आधार पर 18.20% की बढ़ोतरी हुई और सभी प्रमुख सेगमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ रही. कृषि एडवांसेज में सबसे ज्यादा 25% की वृद्धि हुई. इसके बाद SME एडवांसेज 22% बढ़े. रिटेल पर्सनल एडवांसेज में 15% और कॉरपोरेट एडवांसेज में 18% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

SBI के मजबूत तिमाही नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब बैंकिंग सेक्टर में ब्याज दरों, डिपॉजिट लागत और क्रेडिट ग्रोथ पर बाजार की नजर बनी हुई है. बेहतर मुनाफे, मजबूत NII और बढ़ते लोन कारोबार से बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है.
 


SGB ने दिया बंपर रिटर्न, ₹1 लाख का निवेश बना करीब ₹3 लाख; RBI ने तय की नई कीमत

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारत सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले गोल्ड-आधारित निवेश साधन हैं. इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है.

Last Modified:
Friday, 07 August, 2026
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2020-21 Series-XI में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस सीरीज के बॉन्ड की समय से पहले रिडेम्प्शन कीमत ₹14,564 प्रति यूनिट तय की है. यह कीमत 7 अगस्त 2026 से लागू होगी. जिन निवेशकों ने इस सीरीज को ऑनलाइन ₹4,862 प्रति ग्राम की शुरुआती कीमत पर खरीदा था, उन्हें मौजूदा रिडेम्प्शन कीमत पर करीब 199.55% का प्राइस रिटर्न मिला है. इसमें SGB पर मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज शामिल नहीं है.

7 अगस्त से कर सकेंगे समय से पहले रिडीम

RBI के मुताबिक, SGB 2020-21 Series-XI के निवेशक 7 अगस्त 2026 से अपने बॉन्ड की समय से पहले रिडेम्प्शन करा सकते हैं. 8 और 9 अगस्त को अवकाश होने के कारण रिडेम्प्शन के लिए 7 अगस्त की तारीख तय की गई है.

नियमों के तहत SGB जारी होने के पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले रिडेम्प्शन की सुविधा मिलती है. इस सीरीज के लिए अब रिडेम्प्शन कीमत ₹14,564 प्रति यूनिट निर्धारित की गई है.

कैसे तय हुई ₹14,564 की रिडेम्प्शन कीमत?

RBI ने बताया कि रिडेम्प्शन कीमत 4, 5 और 6 अगस्त 2026 के दौरान 999 शुद्धता वाले सोने के औसत बंद भाव के आधार पर तय की गई है. इसके लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की ओर से जारी सोने की कीमतों को आधार बनाया गया है.

₹4,862 से ₹14,564 पहुंची कीमत

SGB 2020-21 Series-XI में ऑनलाइन खरीदने वाले निवेशकों के लिए शुरुआती इश्यू प्राइस ₹4,862 प्रति ग्राम था. अब रिडेम्प्शन कीमत ₹14,564 प्रति यूनिट होने से प्रति यूनिट ₹9,702 का अंतर बनता है. यानी शुरुआती कीमत के मुकाबले करीब 199.55% का प्राइस रिटर्न मिला है.

मसलन, अगर किसी निवेशक ने उस समय ₹1 लाख का निवेश किया था, तो सिर्फ बॉन्ड की कीमत में बढ़ोतरी के आधार पर उसका मूल्य करीब  ₹2.99 लाख हो गया है. इसके अलावा निवेशक को पूरे निवेश अवधि में मिलने वाला 2.5% सालाना ब्याज भी अलग से प्राप्त हुआ होगा. ऑफलाइन खरीदने वाले निवेशकों के लिए शुरुआती इश्यू प्राइस ₹4,912 प्रति ग्राम था. ऑनलाइन आवेदन करने वालों को उस समय ₹50 प्रति ग्राम की छूट मिली थी.

SGB पर मिलता है 2.5% सालाना ब्याज

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेशकों को शुरुआती निवेश राशि पर 2.50% सालाना तय ब्याज मिलता है. यह ब्याज हर छह महीने में निवेशक के बैंक खाते में जमा किया जाता है. मैच्योरिटी के समय आखिरी ब्याज मूल राशि के साथ दिया जाता है. इसका मतलब है कि निवेशकों का कुल रिटर्न सिर्फ सोने की कीमत में हुई बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें निवेश अवधि के दौरान ब्याज से भी अतिरिक्त कमाई हुई है.

क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारत सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले गोल्ड-आधारित निवेश साधन हैं. इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है. इसमें निवेशक को फिजिकल सोना खरीदकर रखने की जरूरत नहीं होती. निवेश सोने के ग्राम के हिसाब से किया जाता है और मैच्योरिटी या रिडेम्प्शन के समय राशि नकद में मिलती है.

कितना निवेश किया जा सकता है?

SGB में न्यूनतम निवेश एक ग्राम सोने के बराबर किया जा सकता है. एक वित्त वर्ष में व्यक्तिगत निवेशकों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए अधिकतम निवेश सीमा 4 किलोग्राम है. वहीं, ट्रस्ट और अन्य पात्र संस्थाएं एक वित्त वर्ष में अधिकतम 20 किलोग्राम तक निवेश कर सकती हैं.