VI को सरकार से बड़ी राहत: AGR बकाया घटा, अब कर्ज और 5G निवेश का रास्ता खुला

AGR बकाये में कटौती का फैसला VI के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है. हालांकि आगे का रास्ता आसान नहीं है, लेकिन यह राहत कंपनी को दोबारा प्रतिस्पर्धा में मजबूती से उतरने का मौका जरूर देती है.

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Saturday, 02 May, 2026
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टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (VI) के लिए सरकार ने बड़ा राहत पैकेज जैसा कदम उठाया है. समायोजित सकल राजस्व (AGR) बकाये में करीब 27% की कटौती कर इसे 64,046 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया गया है. इस फैसले से कंपनी की वित्तीय स्थिति को सहारा मिलने के साथ ही बैंकों से कर्ज जुटाने और नेटवर्क विस्तार की राह आसान होने की उम्मीद है.

AGR कटौती से मिली बड़ी राहत

केंद्र सरकार के इस फैसले को VI के लिए ‘लाइफलाइन’ माना जा रहा है. लंबे समय से भारी कर्ज और बकाये के दबाव में चल रही कंपनी को इससे तत्काल वित्तीय राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव कम होगा और वह अपने संचालन को स्थिर कर पाएगी.

बैंकों से फंड जुटाना होगा आसान

AGR बकाया कम होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब VI के लिए बैंकों से कर्ज लेना आसान हो जाएगा. विश्लेषकों के मुताबिक, कंपनी करीब 25,000 करोड़ रुपये कर्ज और 10,000 करोड़ रुपये गैर-ऋण साधनों से जुटाने की योजना बना रही है. यह फंड अगले तीन वर्षों में 45,000 करोड़ रुपये के कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) में लगाया जाएगा.

नेटवर्क विस्तार और 5G पर फोकस

VI अब अपने नेटवर्क को मजबूत करने और 5G सेवाओं के विस्तार पर जोर दे सकती है. तेजी से बढ़ते डेटा उपयोग और 5G अपनाने की रफ्तार के बीच कंपनी के लिए यह निवेश बेहद अहम होगा. साथ ही, टैरिफ बढ़ोतरी की संभावनाएं भी उसकी आय में सुधार ला सकती हैं.

आगे की चुनौती: स्पेक्ट्रम भुगतान

हालांकि राहत के बावजूद चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 से कंपनी को स्पेक्ट्रम खरीद से जुड़े बड़े भुगतान करने होंगे. ऐसे में VI को अपनी कमाई (EBITDA) तेजी से बढ़ानी होगी, ताकि भविष्य के वित्तीय दबाव को संभाला जा सके.

लंबी अवधि में भुगतान का नया स्ट्रक्चर

सरकार ने AGR बकाया के भुगतान को लंबी अवधि में फैलाते हुए बड़ा बोझ कम करने की कोशिश की है.

1. कुल भुगतान को अगले 10 वर्षों में सीमित किया गया है.
2. संशोधित बकाया की गणना 31 दिसंबर 2025 तक तय कर दी गई है.
3. इस राशि पर अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाएगा.
4. भुगतान की समयसीमा बढ़ाकर वित्त वर्ष 2041 तक कर दी गई है.

यह संरचना कंपनी को दीर्घकालिक स्थिरता देने में मदद कर सकती है.

कंपनी के पुनरुद्धार की दिशा में कदम

VI इस राहत के सहारे अपने बिजनेस को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश करेगी. कंपनी की रणनीति में नेटवर्क सुधार, ग्राहक आधार बनाए रखना और लाभप्रदता बढ़ाना शामिल है. अगर ये योजनाएं सफल होती हैं, तो VI भारतीय टेलीकॉम बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है.

 


भारत-तंजानिया डील: लोकल करेंसी ट्रेड से बदलेगा गेम, चीन पर बढ़ेगा दबाव

भारत और तंजानिया के बीच लोकल करेंसी ट्रेड की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है.

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Saturday, 02 May, 2026
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भारत और पूर्वी अफ्रीकी देश तंजानिया के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है. दोनों देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन (लोकल करेंसी ट्रेड) शुरू करने की संभावना पर गंभीर चर्चा की है. यह पहल न केवल द्विपक्षीय व्यापार को आसान बना सकती है, बल्कि अफ्रीका में बढ़ते चीन के प्रभाव के बीच भारत के लिए एक रणनीतिक कदम भी मानी जा रही है.

लोकल करेंसी ट्रेड पर फोकस

भारत सरकार और दार-एस-सलाम के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में यह प्रस्ताव सामने आया कि व्यापार को डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय मुद्राओं में निपटाया जाए. इससे लेन-देन की लागत कम हो सकती है और व्यापारिक प्रक्रियाएं अधिक सरल बन सकती हैं. यह मुद्दा 29-30 अप्रैल 2026 को तंजानिया की राजधानी दार-एस-सलाम में आयोजित भारत-तंजानिया संयुक्त व्यापार समिति (JTC) की बैठक में प्रमुखता से उठाया गया.

अफ्रीका में चीन की मजबूत पकड़

तंजानिया में चीन पहले से ही एक बड़ा व्यापारिक साझेदार और निवेशक है. वह वहां इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और खनन जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर चुका है. खासतौर पर ग्रेफाइट और सोने जैसे रणनीतिक खनिजों पर उसकी नजर है. इसके अलावा, चीन ने मई 2026 से तंजानिया सहित कई अफ्रीकी देशों के लिए ‘जीरो-टैरिफ’ नीति लागू की है, जिससे उसकी आर्थिक पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है. ऐसे में भारत की नई पहल को सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धी कदम के रूप में देखा जा रहा है.

भारत और चीन की रणनीति में अंतर

जहां चीन का फोकस खनिज संसाधनों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर है, वहीं भारत तंजानिया के कृषि उत्पादों जैसे दालें और काजू का प्रमुख खरीदार बना हुआ है. भारत की रणनीति ज्यादा संतुलित और साझेदारी आधारित मानी जाती है, जिसमें क्षमता निर्माण और स्थानीय विकास पर जोर दिया जाता है.

कई सेक्टरों में सहयोग की संभावना

बैठक के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जिनमें शामिल हैं:

1. भारतीय व्यापारियों के लिए लंबी अवधि के व्यापार वीजा
2. फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में नियामक सहयोग
3. स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में साझेदारी
4. जहाज निर्माण और बंदरगाह विकास
5. कौशल विकास और क्षमता निर्माण

इसके अलावा, डिजिटल सहयोग जैसे रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम और डिजिलॉकर जैसी सेवाओं पर भी बातचीत हुई.

भारत के प्रमुख ऑफर

भारत ने तंजानिया को कई क्षेत्रों जैसे शिपयार्ड और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, रेलवे आधुनिकीकरण, लोकोमोटिव और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति, विशेष प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट में सहयोग का प्रस्ताव दिया है, ये पहल तंजानिया की आर्थिक संरचना को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की तकनीकी विशेषज्ञता को भी स्थापित कर सकती हैं.

बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार

भारत और तंजानिया के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है.

1. 2024-25: 8.64 अरब डॉलर
2. 2025-26: 9.02 अरब डॉलर

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं.

बता दें, भारत और तंजानिया के बीच लोकल करेंसी ट्रेड की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है. अफ्रीका में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच भारत का यह प्रयास उसे एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित कर सकता है. आने वाले समय में यह पहल वैश्विक व्यापार के नए समीकरण भी तय कर सकती है.
 


भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों को नई गति, CETA से निवेश और निर्यात बढ़ाने पर जोर

पीयूष गोयल ने भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते (CEPA) का उल्लेख करते हुए कहा कि मई 2022 में लागू इस समझौते ने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है.

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Saturday, 02 May, 2026
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भारत और ब्रिटेन ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) के तहत उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने और कारोबारी साझेदारी बढ़ाने पर उच्चस्तरीय चर्चा हुई. यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक व्यापार नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है.

गोयल और पीटर काइल के बीच अहम चर्चा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य राज्य सचिव पीटर काइल के बीच शुक्रवार को वर्चुअल बैठक आयोजित हुई. बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए नई संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया.

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत-ब्रिटेन CETA के जरिए दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की गई.

2025 में हुआ था CETA पर हस्ताक्षर

भारत और ब्रिटेन ने 24 जुलाई 2025 को व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. समझौते के अनुसार भारत के 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलेगा. वहीं ब्रिटेन के कार और व्हिस्की जैसे उत्पादों पर भारत में शुल्क में चरणबद्ध कमी की जाएगी.

2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

भारत और ब्रिटेन ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 56 अरब डॉलर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग, आईटी और सेवा क्षेत्र को बड़ा फायदा मिल सकता है.

यूएई समझौते की सफलता का भी जिक्र

पीयूष गोयल ने भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते (CEPA) का उल्लेख करते हुए कहा कि मई 2022 में लागू इस समझौते ने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि यूएई भारत के लिए अफ्रीका, जीसीसी देशों, मध्य पूर्व, CIS देशों और कुछ यूरोपीय बाजारों तक पहुंच का बड़ा प्रवेश द्वार बनकर उभरा है.

भारत-यूएई व्यापार 101 अरब डॉलर के पार

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच कुल व्यापार 101.25 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष 100.03 अरब डॉलर था. रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि क्षेत्र में व्यापार तेज़ी से बढ़ा है.

इसी अवधि में भारत का यूएई को निर्यात 2 प्रतिशत बढ़कर 37.36 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि आयात 63.89 अरब डॉलर रहा. इससे भारत का व्यापार घाटा 26.53 अरब डॉलर दर्ज किया गया.

विदेशी निवेश में भी बनी रुचि

अप्रैल-दिसंबर 2025-26 के दौरान यूएई से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 2.45 अरब डॉलर रहा. हालांकि यह पिछले वर्ष 4.34 अरब डॉलर की तुलना में कुछ कम रहा.

वैश्विक व्यापार रणनीति पर भारत का फोकस

भारत लगातार मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए नए बाजारों तक पहुंच बना रहा है. ब्रिटेन और यूएई जैसे प्रमुख साझेदार देशों के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते भारत की निर्यात क्षमता, निवेश प्रवाह और वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.


FPI ने अप्रैल में ₹60,847 करोड़ निकाले, वैश्विक अनिश्चितताओं से भारतीय बाजार पर दबाव

एफपीआई की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया है. इस साल अब तक उन्होंने लगभग ₹1.7 लाख करोड़ का निवेश किया है, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट टल गई.

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Friday, 01 May, 2026
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) ने अप्रैल 2026 में भारतीय शेयर बाजार से भारी बिकवाली जारी रखते हुए ₹60,847 करोड़ (लगभग $6.5 अरब) की निकासी की है. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है.

चार महीने में ₹1.92 लाख करोड़ की निकासी

राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कुल एफपीआई निकासी ₹1.92 लाख करोड़ तक पहुंच गई है. यह पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है.

साल भर बिकवाली का दबाव

एफपीआई इस साल अधिकांश महीनों में नेट सेलर बने रहे हैं. केवल फरवरी 2026 में थोड़ी राहत देखने को मिली थी, जब विदेशी निवेशकों ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों में सबसे बड़ा इनफ्लो था. हालांकि इसके बाद स्थिति फिर बिगड़ गई. मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की भारी बिकवाली हुई और अप्रैल में भी दबाव जारी रहा.

वैश्विक कारणों का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस लगातार बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारण हैं. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई की चिंता बढ़ी है. इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों, जैसे भारत, की आकर्षकता को कम किया है.

रुपये की कमजोरी और महंगे वैल्यूएशन

कच्चे तेल की कीमतों के $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये की कमजोरी ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया है. भारतीय शेयर बाजार फिलहाल उच्च वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू कर दिया है.

घरेलू निवेशकों ने दिया सहारा

एफपीआई की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया है. इस साल अब तक उन्होंने लगभग ₹1.7 लाख करोड़ का निवेश किया है, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट टल गई.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो विदेशी निवेश फिर से लौट सकते हैं. हालांकि, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में और उछाल आता है, तो निकासी का दबाव फिर बढ़ सकता है.

 


अडानी ग्रुप में बड़ा आंतरिक बदलाव, तेज फैसलों और मजबूत साझेदारी पर फोकस

गौतम अडानी ने बताया कि कंपनी एक “थ्री-लेयर मॉडल” अपनाएगी, जिसका उद्देश्य संगठनात्मक जटिलता को कम करना और बिजनेस में तेजी से फैसले लागू करना है. इस ढांचे में तीन मुख्य स्तंभ लीन मैनेजमेंट स्ट्रक्चर, पार्टनर इकोसिस्टम का एकीकरण, स्किलिंग और लर्निंग पर जोर शामिल हैं.

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Friday, 01 May, 2026
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अडानी ग्रुप (Adani Group) ने अपने तेज विस्तार को समर्थन देने के लिए बड़े आंतरिक बदलावों की घोषणा की है. समूह का लक्ष्य निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना, कॉन्ट्रैक्टर नेटवर्क को मजबूत करना और कर्मचारियों के कौशल विकास पर फोकस बढ़ाना है. यह घोषणा ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर की.

तीन-स्तरीय रणनीति का ऐलान

गौतम अडानी ने बताया कि कंपनी एक “थ्री-लेयर मॉडल” अपनाएगी, जिसका उद्देश्य संगठनात्मक जटिलता को कम करना और बिजनेस में तेजी से फैसले लागू करना है. इस ढांचे में तीन मुख्य स्तंभ लीन मैनेजमेंट स्ट्रक्चर, पार्टनर इकोसिस्टम का एकीकरण, स्किलिंग और लर्निंग पर जोर शामिल हैं.

लीन स्ट्रक्चर से तेज निर्णय

अडानी ने कहा कि बड़े संगठनों में अक्सर फैसले लेने की गति धीमी हो जाती है, जिसे बदलने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि संगठन में परतों (hierarchy) को कम किया जाएगा ताकि निर्णय तेजी से लिए जा सकें और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सके.

ग्रुप अब अपने कॉन्ट्रैक्टर और वेंडर नेटवर्क को भी सरल बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इसके तहत “पार्टनरशिप मॉडल” अपनाया जाएगा, जिसमें चुनिंदा और भरोसेमंद भागीदारों के साथ काम किया जाएगा, जो पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल सकें. इससे प्रोजेक्ट मैनेजमेंट आसान होगा और देरी कम होगी.

स्किलिंग और ट्रेनिंग पर जोर

तीसरे स्तंभ के तहत कंपनी एक नई अडानी ट्रेनिंग अकेडमी स्थापित करने की योजना बना रही है. इसका उद्देश्य कर्मचारियों के लिए लगातार सीखने और करियर ग्रोथ के अवसर तैयार करना है. अडानी ने कहा कि यह पहल कर्मचारियों को अनस्किल्ड से स्किल्ड और आगे लीडरशिप भूमिकाओं तक पहुंचाने में मदद करेगी.

बड़े विस्तार की तैयारी

अडानी ने कहा कि वह आने वाले एक वर्ष में लगभग ₹2 लाख करोड़ की नई संपत्तियां जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है. यह पिछले कई दशकों में बनाई गई क्षमता के बराबर विस्तार होगा. अडानी ने इसे कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम बताया और कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि संगठन की सामूहिक उपलब्धि है.

कर्मचारी कल्याण पर फोकस

ग्रुप ने वर्कर वेलफेयर के तहत कई योजनाओं की भी घोषणा की है. इनमें लगभग 50,000 कर्मचारियों के लिए एयर-कंडीशन्ड आवास और प्रमुख साइट्स पर प्रतिदिन 1 लाख भोजन तैयार करने वाली बड़ी किचन सुविधा शामिल है.

कंपनी स्थानीय भर्ती और स्किल डेवलपमेंट को भी प्राथमिकता देगी, क्योंकि वर्तमान में समूह में 4 लाख से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं. 

अपने संबोधन के अंत में गौतम अडानी ने कहा कि संगठन की सफलता में हर कर्मचारी का योगदान महत्वपूर्ण है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा. उन्होंने इसे भारत के विकास विजन से जोड़ते हुए कहा कि यह यात्रा सामूहिक प्रयासों से ही आगे बढ़ सकती है.
 


अप्रैल में निसान की बिक्री में बड़ा उछाल, 75% ग्रोथ के साथ FY26 की मजबूत शुरुआत

कंपनी ने अप्रैल 2026 में कुल 5,388 यूनिट्स की बिक्री की. इसमें 3,203 यूनिट्स घरेलू बाजार में बेची गईं, जबकि 2,185 यूनिट्स का निर्यात किया गया.

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Friday, 01 May, 2026
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निसान मोटर इंडिया (Nissan Motor India Private Limited) ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत शानदार अंदाज में की है. अप्रैल 2026 में कंपनी की घरेलू बिक्री में सालाना आधार पर 75 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो भारतीय ऑटो बाजार में उसकी मजबूत होती पकड़ को दर्शाती है.

कुल बिक्री में भी जोरदार उछाल

कंपनी ने अप्रैल 2026 में कुल 5,388 यूनिट्स की बिक्री की. इसमें 3,203 यूनिट्स घरेलू बाजार में बेची गईं, जबकि 2,185 यूनिट्स का निर्यात किया गया. यह प्रदर्शन निसान के सतत विकास और बाजार में बढ़ती मौजूदगी का संकेत देता है.

बढ़ते पोर्टफोलियो को मिला ग्राहकों का साथ

अप्रैल के दौरान कंपनी के बढ़ते प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को ग्राहकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली. खासतौर पर निसान एक्स-ट्रेल ग्रेवाइट कॉन्सेप्ट (Gravite) को ग्राहकों ने काफी पसंद किया, जिससे कंपनी की बिक्री को गति मिली.

ग्रेवाइट और मैग्नाइट बने ग्रोथ ड्राइवर

अपनी शुरुआत से ही ग्रेवाइट ने कंपनी के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई है. इसकी 7-सीट मॉड्यूलैरिटी, बेहतर कम्फर्ट और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त फीचर्स ने ग्राहकों को आकर्षित किया है. वहीं  निसान मैग्नाइट कंपनी के लिए एक मजबूत स्तंभ बनी हुई है, जिसने प्रतिस्पर्धी SUV सेगमेंट में निसान की स्थिति को और मजबूत किया है.

कंपनी का बयान

इस प्रदर्शन पर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ वत्स ने कहा कि नए वित्त वर्ष की यह मजबूत शुरुआत उत्साहजनक है. उन्होंने कहा कि मैग्नाइट की सफलता और ग्रेवाइट को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया कंपनी की ग्राहक-केंद्रित रणनीति को मजबूत करती है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कंपनी इस वित्त वर्ष में नए प्रोडक्ट लॉन्च करने और देशभर में अपना नेटवर्क विस्तार करने की तैयारी में है.

आगे की रणनीति

निसान मोटर इंडिया आगे भी इनोवेशन, ग्राहक अनुभव और नेटवर्क विस्तार पर फोकस बनाए रखेगी. मजबूत प्रोडक्ट पाइपलाइन और बेहतर सर्विस अनुभव के जरिए कंपनी भारत में अपनी विकास गति को बरकरार रखने की स्थिति में है. 

यह प्रदर्शन साफ तौर पर दिखाता है कि भारतीय बाजार में निसान की रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत हो सकती है.
 


IdeaForge का शानदार Q4 प्रदर्शन, ₹141 करोड़ राजस्व के साथ कॉम्बैट ड्रोन सेगमेंट में एंट्री

प्रोडक्ट डेवलपमेंट के तहत कंपनी अब इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) प्लेटफॉर्म्स से आगे बढ़कर कॉम्बैट ड्रोन सिस्टम्स में विस्तार कर रही है.

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Friday, 01 May, 2026
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आइडियाफोर्ज (IdeaForge Technology) ने 30 अप्रैल 2026 को अपने अब तक के सबसे मजबूत तिमाही नतीजे घोषित किए. कंपनी ने FY26 की चौथी तिमाही (Q4) में ₹141 करोड़ का राजस्व और ₹60 करोड़ का शुद्ध लाभ (PAT) दर्ज किया.

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग ₹530 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक ऑर्डर इनफ्लो हासिल किया. यह FY27 के लिए मजबूत ग्रोथ आउटलुक का संकेत देता है. 31 मार्च 2026 को समाप्त वर्ष के ऑडिटेड नतीजों के अनुसार, रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों से मांग के चलते कंपनी को पूरे साल मजबूत ऑर्डर मिले.

ऑर्डर एग्जीक्यूशन और ऑपरेशनल प्रदर्शन

कंपनी ने Q4 के दौरान अपने ओपन ऑर्डर बुक का लगभग 40 प्रतिशत निष्पादित किया. इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) रेजिलिएंट सिस्टम्स की डिलीवरी भी शामिल रही, जो यूजर एक्सेप्टेंस टेस्टिंग के बाद सप्लाई किए गए. वित्तीय प्रदर्शन में सुधार के साथ कंपनी ने Q4 में मुनाफे में वापसी की और FY26 में ₹27 करोड़ का पॉजिटिव EBITDA दर्ज किया. यह बेहतर मार्जिन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है.

कॉम्बैट ड्रोन सेगमेंट में एंट्री

प्रोडक्ट डेवलपमेंट के तहत कंपनी अब इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) प्लेटफॉर्म्स से आगे बढ़कर कॉम्बैट ड्रोन सिस्टम्स में विस्तार कर रही है. इनमें लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक प्लेटफॉर्म्स, लोइटरिंग म्यूनिशंस और कामिकाज़े ड्रोन शामिल हैं, जिन्हें भारतीय सशस्त्र बलों की संभावित जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है.

ग्लोबल मार्केट में बढ़ती मौजूदगी

तिमाही के दौरान कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रगति दर्ज की. उसे अमेरिका में टेक्सास स्थित एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट पुलिस डिपार्टमेंट से पब्लिक सेफ्टी ऑपरेशंस के लिए पहला ऑर्डर मिला. इसके अलावा, कंपनी ने NATO बलों को US National Test Pilot School में ट्रेनिंग दी और US Department of Defense को अलास्का में अत्यधिक ठंडे मौसम में अपने सिस्टम्स का प्रदर्शन किया.

जापान में विस्तार की तैयारी

वैश्विक विस्तार रणनीति के तहत कंपनी ने Digital Media Professionals Inc. के साथ समझौता (MoU) किया है. इसका उद्देश्य AI-सक्षम अगली पीढ़ी के ड्रोन विकसित करना और जापान में अपनी उपस्थिति बढ़ाना है.

ऑपरेशनल उपलब्धियां

कंपनी के अनुसार, FY26 के दौरान उसकी तैनात ड्रोन फ्लीट ने 2,50,000 से अधिक ग्राहक उड़ानें पूरी कीं. इसके साथ ही कुल उड़ानों की संख्या 9,50,000 से अधिक हो गई है. कंपनी के ड्रोन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग पब्लिक सेफ्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है.

बढ़ती मांग का फायदा

रक्षा और नागरिक दोनों क्षेत्रों में मानव रहित प्रणालियों (ड्रोन) की बढ़ती मांग के बीच यह विकास हुआ है. कंपनियां अब स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत ड्रोन तकनीकों पर अधिक ध्यान दे रही हैं.

 


फेडरल बैंक करेगा स्टैंडर्ड चार्टर्ड के कार्ड पोर्टफोलियो का अधिग्रहण, जुड़ेंगे 4.5 लाख क्रेडिट कार्ड

इस अधिग्रहण के तहत लगभग 4.5 लाख क्रेडिट कार्ड शामिल हैं. यह फेडरल बैंक के मौजूदा लगभग 8 लाख नॉन को-ब्रांडेड और 13 लाख को-ब्रांडेड कार्ड्स के मुकाबले एक महत्वपूर्ण वृद्धि है.

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Friday, 01 May, 2026
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फेडरल बैंक ने अपने रिटेल क्रेडिट कारोबार का विस्तार करने और शहरी बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के उद्देश्य से स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के एक चयनित क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो के अधिग्रहण के लिए समझौता किया है.

पोर्टफोलियो का आकार और विस्तार

इस अधिग्रहण के तहत लगभग 4.5 लाख क्रेडिट कार्ड शामिल हैं. यह फेडरल बैंक के मौजूदा लगभग 8 लाख नॉन को-ब्रांडेड और 13 लाख को-ब्रांडेड कार्ड्स के मुकाबले एक महत्वपूर्ण वृद्धि है. इस सौदे के बाद बैंक के नॉन को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड रिसीवेबल्स में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है.

शहरी बाजारों में मजबूत पकड़

पोर्टफोलियो का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा भारत के शीर्ष आठ बड़े शहरों में केंद्रित है. इससे फेडरल बैंक की इन प्रमुख महानगरों में उपस्थिति दोगुनी से अधिक हो जाएगी. यह डील बैंक को शहरी और अधिक खर्च करने वाले ग्राहकों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी.

डील का मूल्यांकन और प्रक्रिया

इस ट्रांजैक्शन का मूल्य लगभग 1.5 से 1.6 गुना इम्प्लाइड इक्विटी के आधार पर तय किया गया है. अंतिम भुगतान राशि ट्रांसफर के समय बैलेंस पर निर्भर करेगी. कार्ड्स की वास्तविक संख्या ग्राहक की सहमति और माइग्रेशन के समय पर निर्भर करेगी.

बैंक नेतृत्व का बयान

फेडरल बैंक के एमडी और सीईओ KVS मणियन ने कहा कि यह अधिग्रहण रिटेल क्रेडिट फ्रेंचाइज़ी के लिए एक मजबूत और रणनीतिक जोड़ है. उन्होंने कहा कि यह पोर्टफोलियो उच्च गुणवत्ता वाला, सक्रिय और बैंक की रणनीति के अनुरूप बाजारों में केंद्रित है.

स्टैंडर्ड चार्टर्ड की रणनीति

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक इस सौदे के जरिए भारत में वेल्थ और उच्च आय वर्ग पर फोकस बढ़ाना चाहता है और सिंगल-प्रोडक्ट रिलेशनशिप से अपनी निर्भरता कम करना चाहता है.

नियामकीय स्थिति और समयसीमा

इस डील को किसी अतिरिक्त नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता नहीं है और इसके कैलेंडर वर्ष 2026 के भीतर पूरा होने की उम्मीद है.

 


वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस का NSE Emerge पर डेब्यू, ₹41.69 करोड़ का IPO लॉन्च

इस IPO में ₹10 अंकित मूल्य वाले अधिकतम 42,54,000 इक्विटी शेयर शामिल हैं. इनकी कीमत ₹95 से ₹98 प्रति शेयर तय की गई है.

Last Modified:
Friday, 01 May, 2026
BWHindia

वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस अपने अगले विकास चरण की ओर बढ़ते हुए ₹41.69 करोड़ का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लॉन्च करने जा रही है. यह इश्यू 4 मई 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा. कंपनी अपने शेयरों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के SME प्लेटफॉर्म NSE Emerge पर सूचीबद्ध करने की योजना बना रही है. यह पब्लिक इश्यू 6 मई 2026 को बंद होगा.

इश्यू साइज और प्राइस बैंड

इस IPO में ₹10 अंकित मूल्य वाले अधिकतम 42,54,000 इक्विटी शेयर शामिल हैं. इनकी कीमत ₹95 से ₹98 प्रति शेयर तय की गई है.

फंड का उपयोग

IPO से प्राप्त राशि का उपयोग कंपनी बुनियादी ढांचे और उन्नत तकनीक में पूंजीगत खर्च, कंटेंट प्रोडक्शन में विस्तार, और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म इरिडा इंटरएक्टिव (ClanConnect) में निवेश के लिए करेगी. इसके अलावा, ये फंड संभावित अधिग्रहण, कर्ज चुकाने, कार्यशील पूंजी की जरूरतों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों को पूरा करने में भी लगाए जाएंगे.

मैनेजमेंट और रजिस्ट्रार

इस इश्यू के लिए होराइजन मैनेजमेंट प्राइवेट को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है. जबकि KFin टेक्नोलॉजीज लिमिटेड रजिस्ट्रार की भूमिका निभाएगी.

 


निर्यातकों को राहत, वाणिज्य मंत्रालय ने RoDTEP स्कीम की टैरिफ सूची में किया बड़ा बदलाव

सरकार के अनुसार कुल 194 टैरिफ लाइनों में संशोधन किया गया है. इसमें 142 नई 8-अंकीय टैरिफ लाइनों को जोड़ा गया है. 50 पुरानी लाइनों को हटाया गया है और 2 टैरिफ लाइनों के विवरण में बदलाव किया गया है.

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Friday, 01 May, 2026
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केंद्र सरकार ने निर्यात क्षेत्र को और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और कर वापसी योजना (RoDTEP) स्कीम के तहत टैरिफ शेड्यूल में संशोधन किया है. यह बदलाव कस्टम टैरिफ ढांचे में वित्त अधिनियम 2026 के जरिए किए गए संशोधनों के अनुरूप किया गया है.

1 मई 2026 से लागू हुए नए नियम

वाणिज्य विभाग ने अधिसूचना संख्या 15/2026-27 जारी करते हुए बताया कि संशोधित प्रावधान 1 मई 2026 से प्रभावी हो गए हैं. इन बदलावों का उद्देश्य कस्टम्स ऑटोमेटेड सिस्टम में नई संरचना को शामिल करना और निर्यात लाभ दावों की प्रक्रिया को आसान बनाना है.

किन निर्यातकों पर पड़ेगा असर?

यह संशोधन Appendix 4R और Appendix 4RE पर लागू होगा. Appendix 4R घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) से होने वाले निर्यात को कवर करता है, जबकि Appendix 4RE एडवांस ऑथराइजेशन (AA), एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (EOUs) और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZs) के तहत काम करने वाले निर्यातकों पर लागू होगा.

194 टैरिफ लाइनों में बदलाव

सरकार के अनुसार कुल 194 टैरिफ लाइनों में संशोधन किया गया है. इसमें 142 नई 8-अंकीय टैरिफ लाइनों को जोड़ा गया है. 50 पुरानी लाइनों को हटाया गया है और 2 टैरिफ लाइनों के विवरण में बदलाव किया गया है.

तकनीकी बदलाव से मिलेगा बड़ा फायदा

मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन मुख्य रूप से तकनीकी प्रकृति का है, जिसका मकसद RoDTEP टैरिफ लाइनों को कस्टम टैरिफ एक्ट 1975 की अद्यतन पहली अनुसूची के साथ तालमेल में लाना है. इससे वर्गीकरण से जुड़ी अस्पष्टताएं कम होंगी और कस्टम्स तथा RoDTEP प्रविष्टियों में एकरूपता आएगी.

निर्यात लाभ दावों की प्रक्रिया होगी आसान

सरकार का मानना है कि नए बदलावों से सिस्टम स्तर की त्रुटियां कम होंगी और निर्यातकों को मिलने वाली ड्यूटी, टैक्स और लेवी की वापसी में निरंतरता बनी रहेगी. साथ ही दावों की प्रोसेसिंग पहले से अधिक तेज और पारदर्शी होगी.

क्या है RoDTEP स्कीम?

RoDTEP भारत सरकार की प्रमुख निर्यात प्रोत्साहन योजना है, जिसके तहत निर्यातित उत्पादों पर लगे ऐसे करों और शुल्कों की वापसी की जाती है, जो अन्य किसी योजना के तहत रिफंड नहीं होते. इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है.

कारोबार सुगमता पर सरकार का फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार की Ease of Doing Business नीति को मजबूत करेगा. समय पर नीति और अनुपालन ढांचे में सामंजस्य से निर्यातकों को राहत मिलेगी और भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति मिल सकती है.


सरकार ने दी तेल कंपनियों को राहत, डीजल-ATF पर विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. इससे पहले यह टैक्स 55.5 रुपये प्रति लीटर था, यानी कंपनियों को अब प्रति लीटर 32.5 रुपये की राहत मिलेगी.

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Friday, 01 May, 2026
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केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती कर दी है. नई दरें 1 मई 2026 से लागू हो गई हैं. वहीं पेट्रोल के निर्यात को पहले की तरह पूरी तरह ड्यूटी फ्री रखा गया है. इस फैसले से रिफाइनरी कंपनियों को फायदा मिल सकता है और निर्यात गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है.

डीजल पर टैक्स में बड़ी कटौती

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. इससे पहले यह टैक्स 55.5 रुपये प्रति लीटर था. यानी कंपनियों को अब प्रति लीटर 32.5 रुपये की राहत मिलेगी.

ATF पर भी घटा निर्यात शुल्क

हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन ATF पर भी टैक्स कम किया गया है. इसे 42 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इससे एविएशन फ्यूल सप्लाई चेन और निर्यात बाजार को राहत मिलने की संभावना है.

पेट्रोल निर्यात पर कोई टैक्स नहीं

सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया है. पेट्रोल एक्सपोर्ट पहले की तरह ड्यूटी फ्री रहेगा. इससे पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बनाए रखना आसान होगा.

घरेलू उपभोक्ताओं पर असर नहीं

वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल कीमतों पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा.

पिछले रिव्यू में बढ़ाया गया था टैक्स

सरकार ने 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाया था. इसके बाद 11 अप्रैल की समीक्षा में इसे बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था. अब ताजा समीक्षा में फिर राहत दी गई है.

क्यों लगाया गया था विंडफॉल टैक्स?

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह टैक्स लगाया था. मकसद यह था कि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बड़े अंतर का अत्यधिक लाभ न उठा सकें और देश में सप्लाई बनी रहे.

क्रूड ऑयल में आई थी तेज तेजी

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. इससे पहले कीमतें लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं.

विशेषज्ञों के मुताबिक टैक्स कटौती से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के मार्जिन बेहतर हो सकते हैं. साथ ही निर्यात बढ़ने और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. आने वाले दिनों में सरकार वैश्विक तेल कीमतों के आधार पर फिर समीक्षा कर सकती है.