निर्यातकों को बड़ी राहत: मार्च 2027 तक बढ़ी RELIEF योजना की अवधि, माल ढुलाई और बीमा लागत पर मिलेगी सुरक्षा

योजना का दूसरा घटक 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई ECGC की अलग-अलग और समग्र कारोबार वाली बीमा पॉलिसियों पर लागू होता है. इसके तहत पात्र माल की विभिन्न प्रकार की खेपों को शामिल किया गया है.

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Tuesday, 27 October, 2026
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पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री माल परिवहन में बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने निर्यातकों को राहत दी है. सरकार ने RELIEF योजना के दूसरे घटक की अवधि छह महीने बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी है. इस योजना के तहत पात्र निर्यातकों को 95 फीसदी तक जोखिम सुरक्षा मिल सकती है. इसका उद्देश्य बढ़ती माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और युद्ध संबंधी जोखिमों के कारण निर्यातकों पर पड़ रहे वित्तीय दबाव को कम करना है.

31 मार्च 2027 तक मिलेगा योजना का लाभ

वाणिज्य विभाग ने सोमवार को बताया कि Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation (RELIEF) योजना के दूसरे घटक की अवधि बढ़ाई गई है. इस विस्तार का उद्देश्य निर्यातकों को पात्र खेपों के लिए भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) से बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करना है. योजना का लाभ लेने के इच्छुक निर्यातकों को अपने दावे और संबंधित दस्तावेज ECGC के ग्राहक पोर्टल पर जमा करने होंगे.

सरकार ने ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निर्यातकों को राहत देने के लिए 19 मार्च 2026 को यह योजना शुरू की थी. अब इसकी अवधि बढ़ने से पात्र निर्यातकों को अतिरिक्त समय मिलेगा.

बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी से भी सुरक्षा

वाणिज्य विभाग के अनुसार, RELIEF योजना के तहत पात्र निर्यातकों को 95 फीसदी तक जोखिम सुरक्षा मिल सकती है. इसके अलावा, संकट से पहले के स्तर की तुलना में बीमा प्रीमियम में हुई बढ़ोतरी से भी निर्धारित शर्तों के तहत सुरक्षा उपलब्ध है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों पर माल परिवहन प्रभावित हुआ है. इससे भारतीय निर्यातकों के लिए माल ढुलाई की लागत, बीमा प्रीमियम और युद्ध संबंधी जोखिम बढ़ गए हैं. योजना की अवधि बढ़ाने का उद्देश्य इन अतिरिक्त लागतों के असर को कम करना और निर्यात गतिविधियों को समर्थन देना है.

किन निर्यातकों और खेपों को मिलेगा लाभ?

योजना का दूसरा घटक 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई ECGC की अलग-अलग और समग्र कारोबार वाली बीमा पॉलिसियों पर लागू होता है. इसके तहत पात्र माल की विभिन्न प्रकार की खेपों को शामिल किया गया है.

इसमें पूर्ण कंटेनर लोड (FCL), आंशिक कंटेनर लोड (LCL) और रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों के जरिये भेजे जाने वाले पात्र माल शामिल हैं. हालांकि, ऊर्जा से संबंधित खेपों को योजना के इस घटक के दायरे से बाहर रखा गया है.

497 करोड़ रुपये के बजट वाली योजना

RELIEF योजना सरकार के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का हिस्सा है. इसका कुल बजट 497 करोड़ रुपये है. इसका उद्देश्य ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों पर व्यवधान के कारण लॉजिस्टिक्स लागत में हुई असाधारण बढ़ोतरी तथा निर्यात संबंधी जोखिमों से भारतीय निर्यातकों को निपटने में मदद करना है.

योजना को निर्यातकों की अलग-अलग श्रेणियों की जरूरतों के अनुसार तीन घटकों में बांटा गया है. पहला घटक मौजूदा ECGC पॉलिसीधारकों के लिए है, जबकि दूसरा घटक भविष्य में किए जाने वाले निर्यात के लिए सहायता प्रदान करता है. तीसरा घटक उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को लक्षित करता है, जिनके पास ECGC क्रेडिट बीमा नहीं है.

योजना की अवधि बढ़ाए जाने से पश्चिम एशिया संकट के बीच पात्र निर्यातकों को जोखिम प्रबंधन और बीमा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा. इससे बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
 


मंथली एक्सपायरी पर बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 95 अंक टूटा; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 482.92 अंक यानी 0.66 फीसदी चढ़कर 73,606.75 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 153.20 अंक यानी 0.68 फीसदी की बढ़त के साथ 22,753.20 पर पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
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अक्टूबर सीरीज की मंथली एक्सपायरी के दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखने को मिल सकता है. गिफ्ट निफ्टी 95 अंक से ज्यादा टूटकर 22,700 के नीचे पहुंच गया है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, एशियाई बाजारों में तेजी और पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार की बढ़त से निवेशकों को कुछ राहत मिल सकती है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के बीच निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम तकनीकी स्तरों पर रहेगी. इसके अलावा, मारुति सुजुकी, एलऐंडटी, बजाज ऑटो और टाटा स्टील समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजे और बीएलएस पॉलिमर्स का आईपीओ भी बाजार में चर्चा के केंद्र में रहेंगे.

पिछले सत्र में चार दिन की गिरावट पर लगा था ब्रेक

सोमवार, 26 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में तेजी के साथ लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया था. फार्मा, मेटल और ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे.

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 482.92 अंक यानी 0.66 फीसदी चढ़कर 73,606.75 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 153.20 अंक यानी 0.68 फीसदी की बढ़त के साथ 22,753.20 पर पहुंच गया. बड़ी कंपनियों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा तेजी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.2 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.4 फीसदी चढ़कर बंद हुए थे. हालांकि, मंगलवार को मंथली एक्सपायरी और वैश्विक संकेतों के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत

मंगलवार को शुरुआती कारोबार से पहले गिफ्ट निफ्टी में 95 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,700 के नीचे फिसल गया. इससे संकेत मिल रहे हैं कि घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दबाव के साथ कारोबार की शुरुआत कर सकते हैं. हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगी. मंथली एक्सपायरी के कारण भी कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है.

एशियाई बाजारों में तेजी

भारतीय बाजार के लिए वैश्विक संकेत मिले-जुले हैं. एक ओर गिफ्ट निफ्टी कमजोरी का संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिल रही है. टेक शेयरों में खरीदारी के बीच जापान का निक्केई करीब 2 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 4.3 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहे हैं. हेंगसेंग और शंघाई कंपोजिट में भी हल्की मजबूती दर्ज की गई है. हालांकि, एशियाई बाजारों की तेजी के बावजूद घरेलू निवेशक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों को लेकर सतर्क रह सकते हैं.

कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव बढ़ा सकते हैं चिंता

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को सतर्क रुख बना रह सकता है. इसकी प्रमुख वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं. अमेरिकी WTI क्रूड करीब 101 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है.

पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान को लेकर चल रहे कूटनीतिक प्रयासों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है. अमेरिका और इजरायल में होने वाले अहम मतदान से पहले क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिशें भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई और कंपनियों की लागत के लिहाज से चिंता बढ़ा सकती है. ऐसे में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है.

मंथली एक्सपायरी पर निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर अहम

अक्टूबर सीरीज की मंथली एक्सपायरी के दिन निफ्टी के लिए 22,500 से 22,600 का दायरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी नजरिये से निफ्टी ने 20 दिन के मूविंग एवरेज और 200 सप्ताह के मूविंग एवरेज का स्तर दोबारा हासिल किया है. अब बाजार के लिए इन स्तरों के ऊपर मजबूती बनाए रखना जरूरी होगा.

तकनीकी स्तरों के लिहाज से 22,800 के ऊपर निकलने पर निफ्टी में तेजी बढ़ सकती है और यह 22,900 से 23,000 तक पहुंच सकता है. इसके विपरीत, यदि सूचकांक लगातार 22,500 के नीचे बना रहता है, तो गिरावट बढ़ने की आशंका है और निफ्टी 22,400 से 22,200 के स्तर तक फिसल सकता है.

बैंक निफ्टी के चार्ट पर डबल बॉटम पैटर्न बनने की संभावना भी दिखाई दे रही है. हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए बैंक निफ्टी का 55,000 के ऊपर मजबूती से बंद होना जरूरी है. विशेषज्ञ के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है और निफ्टी 22,500 के ऊपर बना रहता है, तो शुरुआती कमजोरी के बाद बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है.

आज खुलेगा बीएलएस पॉलिमर्स का 255 करोड़ रुपये का आईपीओ

प्राथमिक बाजार में भी मंगलवार को निवेशकों की नजर रहेगी. बीएलएस पॉलिमर्स का 255 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) 27 अक्टूबर को खुलने वाला है. एसबीआई सिक्योरिटीज ने कंपनी की मुनाफे की संभावनाओं और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना को देखते हुए लंबी अवधि के नजरिये से निवेश पर विचार करने की सलाह दी है. आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों की नजर कंपनी की कारोबारी संभावनाओं और निर्गम से जुड़ी शर्तों पर रहेगी.

इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार, 27 अक्टूबर को मारुति सुजुकी, लार्सन ऐंड टुब्रो (L&T), बजाज ऑटो, टाटा स्टील, सिप्ला और वारी एनर्जीज समेत कई कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे जारी होंगे, जिससे इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. वहीं, पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस का मुनाफा करीब 11 गुना बढ़कर 226 करोड़ रुपये और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का मुनाफा 15.7 फीसदी बढ़कर 470.1 करोड़ रुपये रहा. नजारा टेक्नोलॉजीज घाटे से उबरकर मुनाफे में आ गई, जबकि सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स का मुनाफा 29.3 फीसदी बढ़ा. दूसरी ओर, सरकारी कंपनी आरईसी का मुनाफा 21.2 फीसदी घटकर 3,477.7 करोड़ रुपये रह गया और डालमिया भारत को 205 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. इसके अलावा केफिन टेक्नोलॉजीज, मैनकाइंड फार्मा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सुमितोमो केमिकल इंडिया और एक्वस के शेयर भी तिमाही नतीजों के चलते चर्चा में रहेंगे. कारोबारी घटनाक्रमों में सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स को 973 करोड़ रुपये का रक्षा उपकरण आपूर्ति ऑर्डर मिला है, एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने रोबोटिक डॉट एआई का अधिग्रहण पूरा किया है और जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर्स ने 312 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 148.2 करोड़ रुपये तक के शेयर बायबैक को मंजूरी दी है. वहीं, हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को एनएचएआई से 91.78 करोड़ रुपये का ठेका मिला है और रेमंड रियल्टी ने अपनी सहायक कंपनी में 210 करोड़ रुपये तक के निवेश के लिए समझौता किया है.

निवेशकों की नजर किन संकेतों पर रहेगी?

मंगलवार को बाजार की दिशा तय करने में गिफ्ट निफ्टी, कच्चे तेल की कीमतों, एशियाई बाजारों की चाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेतों की अहम भूमिका रहेगी. इसके साथ ही निफ्टी के 22,500 से 22,600 के समर्थन क्षेत्र और 22,800 के प्रतिरोध स्तर पर निवेशकों की नजर रहेगी. मंथली एक्सपायरी के दिन तिमाही नतीजों और कंपनियों से जुड़ी खबरों के कारण शेयर-विशेष में उतार-चढ़ाव संभव है. ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार के संकेतों और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


उत्तर प्रदेश में निवेश को मिलेगी रफ्तार, 500 जीसीसी बनाने का लक्ष्य, 15 एमओयू पर हस्ताक्षर

उत्तर प्रदेश ने लखनऊ में आयोजित यूपी जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 में उद्योग जगत के साथ 15 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, पांच निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए और 13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौते किए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2031 तक राज्य में 500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है.

Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
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उत्तर प्रदेश को वैश्विक कारोबारी संचालन, उन्नत प्रौद्योगिकी, उत्पाद विकास और उच्च मूल्य वाले रोजगार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने 2031 तक 500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

सोमवार को लखनऊ में आयोजित यूपी जीसीसी इनोवेशन समिट 2026 में राज्य सरकार ने कंपनियों और टैलेंट पार्टनर्स के साथ 15 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा, संभावित निवेशकों को पांच लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए गए और 13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौतों का आदान-प्रदान किया गया. इन पहलों का उद्देश्य निवेश बढ़ाना, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग मजबूत करना तथा बदलती वैश्विक कारोबारी जरूरतों के अनुरूप कार्यबल तैयार करना है.

आईआईटी कानपुर एलुमनी एसोसिएशन ने इन्वेस्ट यूपी और एचसीएलटेक के सहयोग से होटल द सेंट्रम में इस समिट का आयोजन किया. इसमें कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, निवेशकों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल बदलाव, उत्पाद आधारित नवाचार और वैश्विक कारोबारी सेवाओं के भविष्य पर चर्चा की.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य अब पारंपरिक कारोबारी गतिविधियों से आगे बढ़कर नवाचार, डिजाइन, इंजीनियरिंग और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए तैयार है. उन्होंने राज्य के औद्योगिक आधार, कुशल कार्यबल, बुनियादी ढांचे और निवेशक केंद्रित नीतियों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण बताया.

बुनियादी ढांचा और प्रतिभाशाली कार्यबल यूपी की ताकत

मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश के निवेश माहौल में आए बदलावों का उल्लेख किया. उन्होंने सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और प्रशासनिक दक्षता पर जोर देने को निवेशकों का भरोसा बढ़ाने वाला कदम बताया. उनके अनुसार, राज्य अपनी पहले की 'बीमारू' छवि से आगे बढ़कर राजस्व अधिशेष वाला राज्य बन गया है.

राज्य की प्रमुख बुनियादी और औद्योगिक सुविधाओं में व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और 75,000 एकड़ से अधिक का औद्योगिक भूमि बैंक शामिल हैं. समिट में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत के मोबाइल विनिर्माण में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में 60 प्रतिशत है.

उत्तर प्रदेश में अनुमानित 6.7 लाख पेशेवर हैं, जिनमें तीन लाख प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े हैं. राज्य में 8,000 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान हैं और हर साल दो लाख से अधिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) स्नातक तैयार होते हैं. इससे जीसीसी स्थापित करने या अपने मौजूदा परिचालन का विस्तार करने वाली कंपनियों को कुशल प्रतिभाएं मिल सकती हैं.

आईआईटी कानपुर, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, आईआईएम लखनऊ, आईआईआईटी लखनऊ और एमएनएनआईटी प्रयागराज जैसे संस्थान इंजीनियरिंग, एआई, एनालिटिक्स और प्रबंधन के क्षेत्र में विशेषज्ञता उपलब्ध कराते हैं.

राज्य सरकार स्टेट एआई मिशन, डीप-टेक हब, एआई सिटी और रोबोटिक्स क्लस्टर जैसी पहल भी आगे बढ़ा रही है. इनका उद्देश्य एआई आधारित जीसीसी, उत्पाद इंजीनियरिंग टीमों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और उन्नत कारोबारी सेवाओं को राज्य में आकर्षित करना है.

पांच निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी

राज्य सरकार ने पांच कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए हैं. इनमें हैवेल्स इंडिया लिमिटेड, अमेरिकप्राइज इंडिया एलएलपी, मेटलाइफ ग्लोबल ऑपरेशंस सपोर्ट सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, एलजी सॉफ्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.

डब्ल्यूएसपी कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को जारी किए जाने वाले लेटर ऑफ कम्फर्ट के लिए उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री की मंजूरी और औपचारिक पत्र जारी होना अभी बाकी है.

इन पत्रों का उद्देश्य निवेशकों की रुचि को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना और जीसीसी बाजार में उत्तर प्रदेश की स्थिति मजबूत करना है. हालांकि, ये निवेश को सुविधाजनक बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं. इनसे यह पुष्टि नहीं होती कि सभी प्रस्तावित परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं.

जीसीसी और कौशल विकास के लिए 15 समझौते

उद्योग जगत के साथ किए गए 15 एमओयू में जीसीसी के विस्तार, प्रौद्योगिकी आधारित निवेश और प्रतिभा विकास से जुड़े सहयोग शामिल हैं. इनमें ईवाई जीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटासेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, डैमैक, अल्ट्रुइस्ट और स्मार्टवर्क्स जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं.

स्मार्टवर्क्स लखनऊ में दो समर्पित कैंपस स्थापित करने की योजना बना रही है. राज्य ने जीसीसी की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए पेटीएम, एडब्ल्यूएस, बार्कलेज, आईबीएम और नौकरी के साथ भी साझेदारी की है. पेटीएम ने इस सहयोग के तहत दो एमओयू पर हस्ताक्षर किए.

इन साझेदारियों का उद्देश्य वैश्विक कारोबारी परिचालन के विस्तार के साथ कंपनियों को प्रासंगिक तकनीकी और प्रबंधकीय कौशल वाले पेशेवर उपलब्ध कराना है. जीसीसी अब पारंपरिक सपोर्ट और डिलीवरी सेवाओं से आगे बढ़कर विशेषज्ञता आधारित काम भी कर रहे हैं.

13 शैक्षणिक संस्थान भी सहयोग में शामिल

उत्तर प्रदेश ने 13 शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौतों का आदान-प्रदान किया. इनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, शिव नाडर विश्वविद्यालय, एमएनएनआईटी इलाहाबाद, लखनऊ विश्वविद्यालय, आईआईआईटी इलाहाबाद, आईआईआईटी लखनऊ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हैं.

इन साझेदारियों का उद्देश्य शैक्षणिक कार्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना और व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा उद्योग आधारित कौशल विकास के अवसर बढ़ाना है. विश्वविद्यालयों और कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल से विद्यार्थियों को एआई, एनालिटिक्स, उत्पाद इंजीनियरिंग और वैश्विक कारोबारी सेवाओं से जुड़े रोजगार के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

जीसीसी के भविष्य पर सात सत्रों में चर्चा

समिट में निवेश संबंधी फैसलों, एआई के इस्तेमाल, नवाचार और कार्यबल विकास पर सात विषय आधारित सत्र आयोजित किए गए. इनमें जीसीसी स्थापित करने के लिए कंपनियों के स्थान चयन के कारकों, भविष्य के केंद्रों के लिए उत्तर प्रदेश को चुनने के कारणों और एआई आधारित जीसीसी विकसित करने के अनुभवों पर चर्चा हुई.

अन्य सत्रों में सेवा वितरण से उत्पाद स्वामित्व की ओर बढ़ने, स्टार्टअप के साथ जीसीसी की साझेदारी, उत्कृष्टता केंद्रों, एआई के दौर में विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित किए जाने वाले कौशल और कार्यबल को नए कौशल सिखाने जैसे विषय शामिल रहे.

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' ने भी राज्य के जीसीसी इकोसिस्टम, बुनियादी ढांचे और प्रतिभाशाली कार्यबल पर अपने विचार साझा किए.

कंपनियों ने निवेश के अनुभव साझा किए

समिट में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टवर्क्स, माइक्रोसॉफ्ट और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश की नीतियों, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सहयोग की सराहना की. कंपनियों ने राज्य में चल रही परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं की जानकारी भी दी.

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रतिनिधि बृजेश शर्मा ने बताया कि कंपनी अपने इको सॉल्यूशंस जीसीसी में 634 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है और 2026 के अंत तक इसका परिचालन शुरू करने का लक्ष्य है. यह केंद्र हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी), हीट पंप तकनीक और उन्नत उत्पाद विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा. प्रतिभा विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से 500 से अधिक उच्च मूल्य वाले रोजगार सृजित करने की योजना है. कंपनी एआई आधारित डेटा सेंटर कूलिंग तकनीकों में अनुसंधान एवं विकास का भी विस्तार करना चाहती है.

स्मार्टवर्क्स के प्रतिनिधि हर्ष बिनानी ने कहा कि कंपनी नोएडा में 20 लाख वर्ग फुट से अधिक कार्यालय क्षेत्र का प्रबंधन करती है, जहां 110 से अधिक कंपनियां काम कर रही हैं. कंपनी अब लखनऊ में भी विस्तार कर रही है. उन्होंने बताया कि बीबीडी टाइम्स स्क्वायर में दो लाख वर्ग फुट का जीसीसी हब विकसित किया गया है.

बिनानी ने कहा कि लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों के युवाओं के लिए करियर के अवसर तैयार करना महत्वपूर्ण है. उन्होंने जोर दिया कि ध्यान केवल एमओयू पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि परियोजनाओं को जमीन पर उतारने और रोजगार पैदा करने पर भी होना चाहिए.

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने राज्य में उपलब्ध प्रतिभाओं, कर्मचारियों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और नीतिगत सहयोग को निवेश के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि जब माइक्रोसॉफ्ट नोएडा में अपना केंद्र स्थापित कर रही थी, तब नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितु माहेश्वरी के साथ बातचीत के बाद लगभग छह सप्ताह के भीतर जमीन उपलब्ध करा दी गई थी.

कुमार के अनुसार, केंद्र में पहले वर्ष लगभग 600 कर्मचारी थे, जिनकी संख्या तीन वर्षों में बढ़कर करीब 3,000 हो गई. लगभग 2,500 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित इस कैंपस ने वर्ड, एक्सेल, पावरपॉइंट और कोपायलट जैसी तकनीकों के विकास में योगदान दिया है.

एचसीएल टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधि किरण चेरुकुरी ने राज्य की जीसीसी नीति और निवेश प्रोत्साहनों के क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि एचसीएल ने लगभग एक दशक पहले लखनऊ में अपना कैंपस स्थापित किया था और वर्तमान में वहां करीब 1,500 लोग कार्यरत हैं. उन्होंने अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) के सहयोग से कैंपस में शुरू किए गए एआई आधारित जीसीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उन्नत क्लाउड और कंप्यूटिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना है.

एआई पर श्वेत पत्र जारी, निवेश प्रोत्साहनों पर जोर

समिट के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'द ट्रू इकोनॉमिक्स ऑफ एआई एडॉप्शन इन जीसीसी' शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया. इसे एचसीएल और आईआईटी कानपुर के बीच डीप-टेक नवाचार सहयोग के तहत तैयार किया गया है. इस श्वेत पत्र के जरिए जीसीसी में एआई के इस्तेमाल और उसके कारोबारी प्रभावों को प्रमुखता दी गई.

उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति 2024 के तहत पात्र निवेशकों को 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी और 50 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी का प्रावधान है. इसके अलावा, नीति के प्रावधानों और पात्रता मानदंडों के अधीन परिचालन संबंधी सहायता भी दी जाती है. इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाना और कंपनियों को राज्य में उच्च मूल्य वाले परिचालन स्थापित करने या उनका विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है.

कार्यक्रम में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' और संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी उपस्थित रहे. वरिष्ठ अधिकारियों में आईआईडीसी दीपक कुमार, उद्योग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख सचिव आलोक कुमार, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरण आनंद, इन्वेस्ट यूपी की एसीईओ प्रेरणा शर्मा और गजल भारद्वाज तथा आईआईटी कानपुर के निदेशक मनींद्र अग्रवाल शामिल थे.

उत्तर प्रदेश का 2031 तक 500 जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य देश की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना है. अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश प्रतिबद्धताओं, संस्थागत साझेदारियों और नीतिगत प्रोत्साहनों को किस हद तक वास्तविक परिचालन केंद्रों, निरंतर भर्ती और राज्यभर में कुशल पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसरों में बदला जाता है.


AI नेटवर्क पर 450 मिलियन डॉलर तक खर्च करेगी टाटा कम्यूनिकेशन्स, बनाएगी 10,000 किमी फाइबर नेटवर्क

मुंबई-पुणे-हैदराबाद-चेन्नई कॉरिडोर से शुरू होगा नेटवर्क का पहला चरण, देश के प्रमुख डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्रों को जोड़ने पर रहेगा जोर

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Monday, 26 October, 2026
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टाटा कम्यूनिकेशन्स (Tata Communications) भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर से जुड़ी कनेक्टिविटी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 400-450 मिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है. कंपनी इसके तहत 10,000 किलोमीटर लंबा फाइबर नेटवर्क विकसित करेगी, जो देश के प्रमुख डेटा सेंटर क्लस्टर और एआई केंद्रों को आपस में जोड़ेगा.

कंपनी के मुताबिक, इस नेटवर्क का उद्देश्य एआई से जुड़े कामकाज के लिए तेज, भरोसेमंद और अधिक क्षमता वाली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है. इससे बड़े क्लाउड ऑपरेटरों, एआई प्लेटफॉर्म, उभरती क्लाउड कंपनियों और बड़े उद्यमों को फायदा मिलने की उम्मीद है. नेटवर्क को हाई बैंडविड्थ, कम लेटेंसी और बेहतर विश्वसनीयता को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा.

मुंबई-पुणे-हैदराबाद-चेन्नई कॉरिडोर से होगी शुरुआत

टाटा कम्यूनिकेशन्स ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि नेटवर्क के पहले चरण में मुंबई-पुणे-हैदराबाद-चेन्नई कॉरिडोर पर ध्यान दिया जाएगा. इसके बाद कंपनी पूर्वी तट और पश्चिम भारत के अन्य बाजारों में नेटवर्क का विस्तार करेगी. इनमें विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, जामनगर और गिफ्ट सिटी शामिल हैं.

प्रस्तावित नेटवर्क को कंपनी के वैश्विक कनेक्टिविटी नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा. इससे भारत के डेटा सेंटर क्लस्टर अंतरराष्ट्रीय केबल लैंडिंग स्टेशनों और विदेशों में मौजूद प्रमुख एआई इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों से जुड़ सकेंगे. कंपनी ने हालांकि, इस नेटवर्क के विस्तार को पूरा करने की कोई समयसीमा नहीं बताई है.

डेटा सेंटर कनेक्टिविटी बाजार में बढ़ती संभावनाएं

टाटा कम्यूनिकेशन्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गणेश लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि मध्यम अवधि में भारत में डेटा सेंटर से डेटा सेंटर तक कनेक्टिविटी का बाजार एक अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है.

उन्होंने बताया कि कंपनी का प्रस्तावित निवेश उसके मौजूदा नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है. नेटवर्क विस्तार का बढ़ता हिस्सा प्रमुख ग्राहकों की प्रतिबद्धताओं और पहले से तय मांग के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है.

भारत में क्लाउड सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल, कंपनियों में एआई एप्लिकेशन की तैनाती और स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोरेज व प्रोसेसिंग की जरूरत के कारण डेटा सेंटर उद्योग में निवेश बढ़ रहा है. एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कंप्यूटिंग क्षमता और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति महत्वपूर्ण हैं, लेकिन डेटा सेंटरों के बीच बड़ी मात्रा में डेटा तेजी से भेजने की क्षमता भी उतनी ही अहम होती जा रही है.

एआई और क्लाउड कंपनियों की जरूरतें पूरी करने पर जोर

कंपनी के अनुसार, प्रस्तावित नेटवर्क बड़े क्लाउड ऑपरेटरों, एआई कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), डिजिटल कारोबारों और भारत में अपना परिचालन बढ़ा रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों को पूरा करेगा.

टाटा कम्यूनिकेशन्स में नेटवर्क सर्विसेज के कार्यकारी उपाध्यक्ष और वैश्विक कारोबार प्रमुख रुपेश चोकशी ने कहा कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ऐसे कनेक्टिविटी नेटवर्क की जरूरत है, जो कम लेटेंसी और बेहतर विश्वसनीयता के साथ बड़ी मात्रा में डेटा ट्रांसफर कर सकें.

नए नेटवर्क के साथ कंपनी अपने मौजूदा नेशनल लॉन्ग डिस्टेंस और मेट्रो कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विस्तार करने की योजना बना रही है. इसका उद्देश्य उद्यमों और डेटा सेंटर ऑपरेटरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है.

वैश्विक फाइबर नेटवर्क का भी कर रही विस्तार

टाटा कम्यूनिकेशन्स के मुताबिक, कंपनी के पास 5 लाख किलोमीटर से अधिक का सबसी ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और 2 लाख किलोमीटर से अधिक का स्थलीय फाइबर नेटवर्क है.

जून 2026 में कंपनी ने मुंबई और सिंगापुर को जोड़ने वाली नई सबसी केबल प्रणाली विकसित करने की योजना की घोषणा की थी. इसके अलावा, वह चेन्नई और सिंगापुर को जोड़ने वाली एक अन्य केबल परियोजना में कंसोर्टियम सदस्य के रूप में शामिल है. इस परियोजना के 2029 की चौथी तिमाही में सेवा के लिए तैयार होने की उम्मीद है.

कंपनी ने 2025 में अपने TGN IA2 सबमरीन केबल को भी नेटवर्क में एकीकृत किया था, ताकि एशिया में नेटवर्क की अतिरिक्त क्षमता, लेटेंसी और कनेक्टिविटी में सुधार किया जा सके.

निवेश की नई योजना के जरिए कंपनी अब घरेलू स्तर पर एआई और डेटा सेंटर केंद्रों को जोड़ने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना ध्यान बढ़ा रही है. साथ ही, अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर कई देशों में कारोबार करने वाले ग्राहकों को कनेक्टिविटी सेवाएं उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है.
 


अमेजन के फेस्टिव सेल में विक्रेताओं की बिक्री 3.5 गुना बढ़ी, छोटे कारोबारों ने भी बनाया रिकॉर्ड

अमेजन के फेस्टिव सेल के पहले सप्ताह में 10 लाख रुपये से अधिक की बिक्री करने वाले छोटे और मध्यम कारोबारों की संख्या 4.6 गुना बढ़ी, महिला उद्यमियों और पारंपरिक कारीगरों को भी मिला फायदा

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Monday, 26 October, 2026
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अमेजन इंडिया के ग्रेट इंडियन फेस्टिवल (AGIF) 2026 के पहले सप्ताह में छोटे कारोबारों और विक्रेताओं ने शानदार प्रदर्शन किया. सामान्य दिनों की तुलना में विक्रेताओं की कुल बिक्री 3.5 गुना बढ़ गई, जबकि नए विक्रेताओं ने बेची गई यूनिट्स की संख्या में 2.5 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की. इस दौरान 10 लाख रुपये से ज्यादा की बिक्री करने वाले छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMBs) की संख्या में भी 4.6 गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई.

कंपनी के मुताबिक, इस साल के फेस्टिव सेल में छोटे कारोबारों की अब तक की सबसे अधिक भागीदारी दर्ज की गई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 30% ज्यादा रही. इसमें हिस्सा लेने वाले 70% से अधिक व्यवसाय टियर-2 और टियर-3 शहरों से थे. चूरू और भोपाल की महिला उद्यमियों से लेकर जोधपुर और सहारनपुर के पारंपरिक कारीगरों तक, देशभर के कारोबारियों ने त्योहारों के दौरान बढ़ी ऑनलाइन मांग का लाभ उठाया.

अमेजन की ओर से विक्रेताओं की लागत कम करने के लिए उठाए गए कदमों में 1,000 रुपये से कम कीमत वाले उत्पादों पर जीरो रेफरल फीस भी शामिल है. कंपनी का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य ऑनलाइन बिक्री को छोटे कारोबारों के लिए अधिक आसान और किफायती बनाना है.

नए विक्रेताओं और छोटे कारोबारों की बिक्री में बड़ी बढ़ोतरी

अमेजन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल के पहले सप्ताह में नए विक्रेताओं ने बिक्री के कई अहम पड़ाव पार किए. एक लाख रुपये से ज्यादा की बिक्री करने वाले नए विक्रेताओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में 2.4 गुना रही. वहीं, 10 लाख रुपये से ज्यादा की बिक्री करने वाले नए विक्रेताओं की संख्या में चार गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई.

छोटे और मध्यम व्यवसायों के बीच भी बिक्री में तेजी देखने को मिली. पहले सप्ताह में 10 लाख रुपये से अधिक की बिक्री करने वाले एसएमबी की संख्या 4.6 गुना से ज्यादा बढ़ी. वहीं, एक करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री करने वाले विक्रेताओं की संख्या में 1.5 गुना से अधिक वृद्धि हुई.

कंपनी के अनुसार, 500 रुपये से कम कीमत वाले उत्पाद बेचने वाले विक्रेताओं के लिए भी यह फेस्टिव सेल फायदेमंद रहा. ऐसे विक्रेताओं के समूह में, जिनकी बिक्री में 10 गुना उछाल आया, पहले 24 घंटों में शामिल विक्रेताओं की संख्या सालाना आधार पर दोगुने से अधिक रही.

महिला उद्यमियों और पारंपरिक कारीगरों को मिला फायदा

अमेजन के महिला उद्यमियों को समर्थन देने वाले कार्यक्रम 'अमेजन सहेली' से जुड़ी चुनिंदा महिला कारोबारियों ने त्योहारों के दौरान बिक्री में 10 गुना तक वृद्धि दर्ज की. चूरू, भोपाल, जयपुर और कोटा जैसे शहरों की महिला उद्यमियों ने अपने स्थानीय बाजारों से आगे बढ़कर देश के दूसरे हिस्सों में ग्राहकों तक पहुंच बनाई.

वहीं, 'अमेजन कारीगर' से जुड़े पारंपरिक शिल्पकारों की बिक्री में 1.5 गुना से अधिक वृद्धि हुई. जोधपुर, नागौर, सहारनपुर, अजमेर और नादिया के कारीगरों ने अपने हस्तनिर्मित और पारंपरिक उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के जरिए नए ग्राहकों तक पहुंच बनाई.

यह प्रदर्शन छोटे शहरों में कारोबार करने वाले उद्यमियों और कारीगरों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका को भी दिखाता है.

ज्वेलरी, जूते और ऑटोमोटिव उत्पादों की रही ज्यादा मांग

ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2026 के पहले सप्ताह में विक्रेताओं के लिए ज्वेलरी, जूते, ऑटोमोटिव उत्पाद, बड़े घरेलू उपकरण और वायरलेस उत्पाद बिक्री के लिहाज से शीर्ष पांच श्रेणियों में शामिल रहे. इससे पता चलता है कि त्योहारों के दौरान ग्राहकों ने फैशन और व्यक्तिगत इस्तेमाल की वस्तुओं के साथ-साथ घरेलू और ऑटोमोटिव उत्पादों की भी खरीदारी की.

छोटे कारोबारों की मदद के लिए अमेजन की पहल

अमेजन इंडिया के सेलिंग पार्टनर सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट सचिन कौशिक ने कहा कि हर त्योहार पर ऐसे उद्यमियों की कहानियां सामने आती हैं, जो नए ग्राहकों तक पहुंचकर अपना कारोबार बढ़ाते हैं. इस साल नए विक्रेताओं, महिला उद्यमियों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों की सफलता उत्साहजनक रही है.

उन्होंने कहा कि भाग लेने वाले 70% से अधिक छोटे कारोबार टियर-2 और टियर-3 शहरों से हैं. जयपुर, कोटा, नागौर और नादिया जैसे शहरों के कारोबारी अब अपने स्थानीय बाजारों से काफी आगे तक ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं. कंपनी बिक्री की लागत कम करने, आसान टूल उपलब्ध कराने और कारोबारियों को जरूरी सहायता देने पर ध्यान दे रही है.

फेस्टिव सेल से पहले विक्रेताओं को किया तैयार

ग्रेट इंडियन फेस्टिवल से पहले अमेजन इंडिया ने सितंबर में 'सेल ऑन अमेजन' डिजिटल अभियान शुरू किया था. यह अभियान 150 से अधिक शहरों और कस्बों में विक्रेता बनने के इच्छुक लोगों तक पहुंचा.

कंपनी ने 'फेस्टिव रेडीनेस सेलर एकेडमी' भी शुरू की. इसके तहत ई-कॉमर्स इन्फ्लुएंसर्स और अमेजन एड्स के विशेषज्ञों के साथ 10 सत्र आयोजित किए गए. इन सत्रों में त्योहारों के लिए कारोबार की तैयारी, विज्ञापन और बिक्री बढ़ाने जैसे विषय शामिल थे. कार्यक्रम में 'त्योहारों की तैयारी के लिए एआई का इस्तेमाल कैसे करें' जैसे सत्रों के साथ इंटरैक्टिव एआई आधारित अनुभव और सेलर यूनिवर्सिटी के संसाधन भी उपलब्ध कराए गए. इन सत्रों को औसतन 4.5 में से 5 की रेटिंग मिली.

कंपनी के मुताबिक, इन पहलों का उद्देश्य विक्रेताओं के लिए ऑनलाइन कारोबार की लागत और जटिलता कम करना तथा देशभर के छोटे और मध्यम व्यवसायों को विकास के नए अवसर उपलब्ध कराना है.
 


दिल्ली के आर्टशिला में शुरू हुआ ‘सूई धागा’ उत्सव, 16 देशों की कढ़ाई परंपराओं की झलक

एशिया-प्रशांत क्षेत्र की पारंपरिक कढ़ाई, समकालीन कला और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाया गया. 17 जनवरी 2027 तक चलने वाले इस उत्सव में प्रदर्शनियों, कलाकारों के रेजिडेंसी कार्यक्रमों और संवाद सत्रों का होगा आयोजन.

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Monday, 26 October, 2026
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दिल्ली के आर्टशिला में 23 अक्टूबर को ‘सूई धागा: होल्डिंग टुगेदर विद नीडल एंड थ्रेड’ उत्सव की शुरुआत हुई. इस आयोजन में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 16 से अधिक देशों की कढ़ाई परंपराओं को प्रदर्शित किया जा रहा है. उत्सव 17 जनवरी 2027 तक चलेगा. इसके तहत प्रदर्शनियों, कलाकारों के रेजिडेंसी कार्यक्रमों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवाद सत्रों के जरिए कढ़ाई को कला, सांस्कृतिक स्मृति और पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक ज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा.

इस उत्सव की मेजबानी करने वाला भारत पहला देश है. इसका आयोजन अहद अनहद सामूहिक समूह की अगुवाई में एशिया पैसिफिक क्राफ्ट्स अलायंस, आर्टशिला, क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया और दिल्ली क्राफ्ट्स काउंसिल के सहयोग से किया जा रहा है. यह पहल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित होने वाले आगामी इंडिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिजाइन बिएनाले से भी जुड़ी है.

‘द कंटिन्यूइंग थ्रेडलाइन’ मुख्य प्रदर्शनी का आकर्षण

उत्सव की मुख्य प्रदर्शनी ‘द कंटिन्यूइंग थ्रेडलाइन’ को सुजाता प्रसाद और ओरून दास ने क्यूरेट किया है. यह प्रदर्शनी कढ़ाई को केवल सजावटी कला तक सीमित रखने के बजाय इसके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को सामने लाती है. इसमें कपड़ों और कढ़ाई के जरिए पहचान, पलायन, आस्था, समुदाय और रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी कहानियों को प्रस्तुत किया गया है.

प्रदर्शनी में पारंपरिक कढ़ाई के नमूनों के साथ समकालीन कलात्मक दृष्टिकोण भी शामिल हैं. इसका उद्देश्य यह समझना है कि हस्तशिल्प किस तरह पीढ़ियों की सामूहिक स्मृतियों को सहेजता है और बदलते सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश के साथ विकसित होता रहता है.

इसमें कढ़ाई की परंपराओं को आगे बढ़ाने में महिलाओं के श्रम, पीढ़ियों से हस्तांतरित तकनीकों और स्थानीय ज्ञान की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है. प्रदर्शनी हस्तशिल्प को अतीत की स्थिर विरासत के बजाय एक जीवंत परंपरा के रूप में देखती है, जिसे कारीगर और समुदाय लगातार नया रूप देते रहते हैं.

16 देशों की कढ़ाई परंपराओं का संगम

इस उत्सव में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, कजाकिस्तान, लाओस, मलेशिया, ओमान, फिलिस्तीन, फिलीपींस, थाईलैंड, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और वियतनाम की भागीदारी है.

इन देशों की वस्त्र और कढ़ाई परंपराओं को एक मंच पर लाने का उद्देश्य उनकी विशिष्टताओं के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक संबंधों को भी सामने लाना है. इसके जरिए दर्शकों को विभिन्न क्षेत्रों की कलात्मक शैलियों और उनसे जुड़ी सामाजिक परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा.

मुख्य प्रदर्शनी के अलावा उत्सव में कलाकारों के रेजिडेंसी कार्यक्रम, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और संवाद सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं. इन गतिविधियों के माध्यम से कारीगरों, डिजाइनरों, शोधकर्ताओं और कलाकारों के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है.

कार्यक्रम में पारंपरिक कढ़ाई को समकालीन डिजाइन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और वस्त्र संबंधी पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण जैसे व्यापक विषयों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है.

कला और संस्कृति के लिए मंच है आर्टशिला

तक्षशिला एजुकेशनल सोसाइटी की ओर से स्थापित आर्टशिला एक बहु-कला सांस्कृतिक मंच है. यहां कला, वास्तुकला, हस्तशिल्प, सिनेमा, डिजाइन, साहित्य और प्रदर्शन कलाओं से जुड़े कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं.

वहीं, अहद अनहद विभिन्न पीढ़ियों और समुदायों के बीच सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने के लिए साहित्य, कविता, संगीत और प्रस्तुतियों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता है. इसके काम में सांस्कृतिक स्मृतियों और समावेशी संवाद को विशेष महत्व दिया जाता है.

‘सूई धागा’ उत्सव के जरिए क्षेत्रीय सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने और कढ़ाई के प्रति लोगों की समझ बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. यह आयोजन पारंपरिक हस्तशिल्प को कलात्मक अभिव्यक्ति के साथ-साथ सांस्कृतिक ज्ञान और सामुदायिक विरासत के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में सामने लाता है. दिल्ली के आर्टशिला में यह उत्सव 17 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा.
 


वॉकी-टॉकी के विज्ञापन में नियमों का उल्लंघन, CCPA ने कंपनी पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना

CCPA ने फ्रीक्वेंसी, लाइसेंस और सरकारी मंजूरी से जुड़ी जरूरी जानकारी नहीं देने पर की कार्रवाई; ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर नियमों का उल्लंघन करने वाली 12 कंपनियों पर अब तक 58 लाख रुपये का जुर्माना

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Monday, 26 October, 2026
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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी का प्रचार करते समय उसकी फ्रीक्वेंसी, लाइसेंस और सरकारी मंजूरी से जुड़ी जानकारी नहीं देना एक कंपनी को महंगा पड़ा है. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने होगार टेक्नोलॉजीज एंड इनोवेशन एलएलपी पर भ्रामक विज्ञापन और उपभोक्ता संरक्षण नियमों के उल्लंघन के मामले में 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण के अनुसार, जरूरी जानकारी के अभाव में ग्राहक अनजाने में ऐसे उपकरण खरीद सकते हैं, जिनके इस्तेमाल के लिए उन्हें लाइसेंस या अन्य सरकारी मंजूरी की जरूरत हो सकती है.

वेबसाइट पर जरूरी जानकारी नहीं देने का मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CCPA की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की पीठ ने मामले की सुनवाई की. जांच में पाया गया कि कंपनी की वेबसाइट पर वॉकी-टॉकी के विज्ञापन में उपकरणों की ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी और उनके इस्तेमाल के लिए जरूरी लाइसेंस व सरकारी मंजूरी से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई थी.

प्राधिकरण के मुताबिक, इस तरह की जानकारी उपलब्ध नहीं होने से उपभोक्ता यह मान सकते हैं कि संबंधित उपकरण का इस्तेमाल बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के किया जा सकता है. इससे उन्हें कानूनी और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

कंपनी की दलीलें CCPA ने खारिज कीं

सुनवाई के दौरान कंपनी ने दलील दी कि उसके पास वैध ‘डीलर पजेशन लाइसेंस’ है और उसके उपकरणों को इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) प्रमाणपत्र मिले हुए हैं. कंपनी ने यह भी कहा कि उसकी वेबसाइट पर सीधे ऑनलाइन बिक्री नहीं होती, बल्कि इसका इस्तेमाल उत्पादों की जानकारी देने और कारोबारी पूछताछ जुटाने के लिए किया जाता है.

हालांकि, CCPA ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया. प्राधिकरण के अनुसार, किसी उत्पाद के लिए सरकारी मंजूरी होना विज्ञापन में जरूरी जानकारी देने की जिम्मेदारी से छूट नहीं देता. वेबसाइट से सीधे बिक्री नहीं होने पर भी उस पर किए गए प्रचार और दावे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के दायरे में आ सकते हैं.

वॉकी-टॉकी इस्तेमाल करने के नियम क्या हैं?

कम पावर वाले रेडियो उपकरणों के लिए वर्ष 2018 में निर्धारित नियमों के तहत 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज बैंड में काम करने वाले वॉकी-टॉकी को तय शर्तों के अधीन लाइसेंस से छूट मिल सकती है. निर्धारित फ्रीक्वेंसी बैंड से बाहर काम करने वाले उपकरणों के लिए संबंधित सरकारी नियमों और लाइसेंस की शर्तों का पालन करना जरूरी हो सकता है.

इसी वजह से वॉकी-टॉकी का विज्ञापन करते समय उसकी ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी, लाइसेंस संबंधी जरूरतों और लागू मंजूरियों की जानकारी स्पष्ट रूप से देना अहम है. उपभोक्ताओं को भी खरीदने से पहले इन जानकारियों की जांच करनी चाहिए.

12 कंपनियों पर अब तक 58 लाख रुपये का जुर्माना

CCPA ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग की जांच शुरू की थी. इस दौरान 16,970 से अधिक ऐसी लिस्टिंग मिलीं, जिनमें नियमों के अनुरूप जरूरी जानकारी नहीं थी. इसके बाद 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए गए.

प्राधिकरण अब तक 12 कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश जारी कर चुका है. इन कंपनियों पर कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इनमें पांच कंपनियों पर 10-10 लाख रुपये और सात कंपनियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना शामिल है.

कुछ कंपनियों ने इन आदेशों को अदालतों और उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी है. इन मामलों में कार्यवाही जारी है. CCPA की यह कार्रवाई ऑनलाइन उत्पादों के विज्ञापन में सही और पूरी जानकारी देने की जिम्मेदारी को रेखांकित करती है.


म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों की रफ्तार घटी, NFO से 5 साल में सबसे कम रकम जुटी

सितंबर 2026 तक म्यूचुअल फंड उद्योग से जुड़े 44 लाख नए निवेशक, कुल संख्या 6.33 करोड़ पहुंची; अप्रैल-जून तिमाही में नए फंड ऑफरिंग से केवल 1,759 करोड़ रुपये जुटे

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Monday, 26 October, 2026
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म्यूचुअल फंड उद्योग में नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार लगातार दूसरे साल धीमी बनी हुई है. सितंबर 2026 तक इस साल उद्योग से 44 लाख नए निवेशक जुड़े हैं. यह कोविड प्रभावित वर्ष 2020 के बाद नए निवेशकों की सबसे कम संख्या है. वहीं, अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में नए फंड ऑफरिंग (NFO) के जरिए जुटाई गई रकम घटकर करीब 1,759 करोड़ रुपये रह गई, जो पांच साल का निचला स्तर है. हालांकि, कुल निवेशकों की संख्या बढ़कर 6.33 करोड़ हो गई है.

बाजार की सुस्ती का असर

म्यूचुअल फंड में निवेशकों की संख्या बढ़ने की रफ्तार शेयर बाजार के प्रदर्शन से काफी हद तक जुड़ी रहती है. जब बाजार में तेजी होती है, तो नए निवेशक निवेश के लिए आकर्षित होते हैं. वर्ष 2021 और 2024 में बाजार में तेजी के दौरान म्यूचुअल फंड उद्योग ने करीब एक-एक करोड़ नए निवेशक जोड़े थे. इसके मुकाबले कोविड के बाद के अन्य वर्षों में यह संख्या लगभग 50-60 लाख रही.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2024 असाधारण रहा था. उस दौरान बाजार में तेज उछाल ने पहली बार निवेश करने वाले लोगों और कम अवधि के लिए निवेश करने वालों को आकर्षित किया. ऐसे में उस साल को सामान्य मानक के रूप में देखने के बजाय अपवाद के तौर पर देखना चाहिए.

नए निवेशकों का बाजार में आना काफी हद तक निवेशकों की धारणा पर निर्भर करता है. पिछले दो वर्षों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और नियामक ने अधिक जोखिम वाली ट्रेडिंग पर नियम सख्त किए हैं. इन परिस्थितियों का असर नए निवेशकों के जुड़ने की रफ्तार पर पड़ा है.

44 लाख नए निवेशकों को भी मजबूत वृद्धि मान रहे विशेषज्ञ

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद 44 लाख नए निवेशकों का जुड़ना उद्योग के लिए मजबूत संकेत है. उनके मुताबिक, ब्याज दरों में बढ़ोतरी और भूराजनीतिक अनिश्चितता वाले माहौल में निवेशकों की यह संख्या कमजोरी के बजाय उद्योग की मजबूती को दर्शाती है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में नए निवेशकों की संख्या असाधारण रूप से अधिक रही थी. आम तौर पर निवेशक हाल के रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला लेते हैं. पिछले दो वर्षों में बाजार का प्रदर्शन अस्थिर रहने से नए निवेशकों के आने की रफ्तार प्रभावित हुई है.

NFO से जुटाई रकम पांच साल के निचले स्तर पर

नए निवेशकों की संख्या बढ़ने पर बाजार के प्रदर्शन के साथ-साथ म्यूचुअल फंड कंपनियों की ओर से लॉन्च किए जाने वाले नए फंडों का भी असर पड़ता है. पिछले दो वर्षों में नए फंड लॉन्च करने की संख्या और उनमें निवेशकों की दिलचस्पी दोनों में कमी आई है.

चॉइस वेल्थ में रिसर्च एंड प्रोडक्ट के प्रमुख अक्षत गर्ग के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में नए फंड ऑफरिंग (NFO) के जरिए जुटाई गई रकम घटकर करीब 1,759 करोड़ रुपये रह गई. यह पांच साल का निचला स्तर है.

उन्होंने बताया कि नियामकीय सख्ती के कारण थीमैटिक फंडों के लॉन्च में कमी आई है. पहले ऐसे फंड बड़ी संख्या में नए निवेशकों को आकर्षित करते थे. नए फंड लॉन्च करना निवेशकों को म्यूचुअल फंड उद्योग से जोड़ने का एक अहम माध्यम रहा है, लेकिन अब इस माध्यम की रफ्तार धीमी पड़ गई है.

कुल मिलाकर, म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेशकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन नए निवेशकों के जुड़ने और NFO के जरिए रकम जुटाने की गति पहले की तुलना में सुस्त है. बाजार में उतार-चढ़ाव, वैश्विक अनिश्चितता और नए फंड लॉन्च की घटती संख्या इस रुझान को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं.

 


इंफोसिस का मुनाफा 6% बढ़कर ₹7,823 करोड़, AI से कमाई में 29% की तेजी

इंफोसिस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कारोबार ने भी दूसरी तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया. कंपनी का AI रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 29% बढ़ा और कुल रेवेन्यू में इसकी हिस्सेदारी 10.5% रही.

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Monday, 26 October, 2026
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आईटी कंपनी इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मुनाफे और रेवेन्यू, दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 6% बढ़कर 7,823 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऑपरेशंस से रेवेन्यू में 11% की वृद्धि हुई. कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कारोबार से होने वाली कमाई भी पिछली तिमाही के मुकाबले 29% बढ़ी है. हालांकि, इंफोसिस ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपना रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान घटा दिया है. कंपनी ने शेयरधारकों के लिए 26 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है.

रेवेन्यू 11% बढ़कर 49,244 करोड़ रुपये

इंफोसिस ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर 7,823 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 7,364 करोड़ रुपये था. इस तरह कंपनी के मुनाफे में सालाना आधार पर करीब 6% की बढ़ोतरी हुई.

जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 11% बढ़कर 49,244 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल की समान अवधि में यह 44,485 करोड़ रुपये था. जून तिमाही के मुकाबले कंपनी का नेट प्रॉफिट 0.7% बढ़ा, जबकि रेवेन्यू में करीब 2% की वृद्धि दर्ज की गई.

ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 10.4% की बढ़ोतरी

कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 10.4% बढ़कर 10,330 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ऑपरेटिंग मार्जिन 21% पर स्थिर रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के बराबर है. कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के लिए ऑपरेटिंग मार्जिन का अनुमान 20% से 22% के बीच बरकरार रखा है.

AI कारोबार से कमाई 29% बढ़ी

इंफोसिस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कारोबार ने भी दूसरी तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया. कंपनी का AI रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 29% बढ़ा और कुल रेवेन्यू में इसकी हिस्सेदारी 10.5% रही.

कंपनी के मुताबिक, ग्राहक कामकाज को ऑटोमेट करने, उत्पादकता बढ़ाने और कारोबारी प्रक्रियाओं में बदलाव लाने के लिए AI का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. इससे इस क्षेत्र में आईटी सेवाओं की मांग को समर्थन मिल रहा है.

शेयरधारकों को 26 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड

इंफोसिस ने शेयरधारकों के लिए 26 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है. इसके लिए 3 नवंबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है. इसी तारीख के आधार पर यह तय होगा कि किन शेयरधारकों को डिविडेंड का लाभ मिलेगा.

हालांकि, कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान में कटौती की है. ऐसे में निवेशकों की नजर कंपनी की आगे की कारोबारी संभावनाओं, AI सेवाओं की मांग और रेवेन्यू ग्रोथ पर बनी रहेगी.


2047 तक भारत की बंदरगाह क्षमता चार गुना करने का लक्ष्य, पीयूष गोयल ने पेश किया रोडमैप

गोयल के मुताबिक, भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए आधुनिक बंदरगाह सुविधाओं और बेहतर समुद्री संपर्क व्यवस्था में निवेश करना होगा. इसके साथ ही बंदरगाहों की परिचालन दक्षता बढ़ाना भी जरूरी है.

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Monday, 26 October, 2026
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 2047 तक भारत की बंदरगाह क्षमता को चार गुना करने की योजना का खाका पेश किया है. उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जरूरतों को पूरा करने के लिए बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, समुद्री कनेक्टिविटी और परिचालन दक्षता में सुधार पर जोर देना होगा. इसके लिए भारत नीदरलैंड के रॉटरडैम बंदरगाह की विशेषज्ञता का लाभ उठाने के साथ-साथ हरित ऊर्जा, कार्बन कैप्चर और टिकाऊ समुद्री व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है.

बंदरगाह क्षमता बढ़ाने पर जोर

नीदरलैंड की यात्रा के दौरान रॉटरडैम में पीयूष गोयल ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने अपनी बंदरगाह क्षमता दोगुनी की है, लेकिन बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को देखते हुए अभी और विस्तार की जरूरत है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो दशकों में भारत की बंदरगाह क्षमता फिर दोगुनी होगी. इससे 2047 तक क्षमता को चार गुना करने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी.

गोयल के मुताबिक, भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए आधुनिक बंदरगाह सुविधाओं और बेहतर समुद्री संपर्क व्यवस्था में निवेश करना होगा. इसके साथ ही बंदरगाहों की परिचालन दक्षता बढ़ाना भी जरूरी है.

रॉटरडैम के साथ सहयोग की संभावनाएं

भारत और यूरोप के बीच समुद्री सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए गोयल ने कहा कि भारत बंदरगाहों के विकास और संचालन में रॉटरडैम की विशेषज्ञता से लाभ उठा सकता है. भारत अपने मौजूदा बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करने के साथ अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित कर रहा है. ऐसे में रॉटरडैम के अनुभवों से सीखने और दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ाने के अवसर मौजूद हैं.

रॉटरडैम बंदरगाह यूरोप के प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्रों में शामिल है और वैश्विक शिपिंग नेटवर्क को यूरोपीय बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. भारत के बढ़ते समुद्री क्षेत्र के लिए इसके साथ सहयोग व्यापार और लॉजिस्टिक्स की क्षमता मजबूत करने में मददगार हो सकता है.

ग्रीन एनर्जी और कार्बन कैप्चर पर फोकस

गोयल ने टिकाऊ समुद्री विकास की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि कार्बन कैप्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में काम करने से पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के साथ हरित ऊर्जा व्यापार के नए अवसर भी खुल सकते हैं.

भारत अपनी आर्थिक वृद्धि के साथ गुणवत्ता, उत्पादकता और परिचालन दक्षता के मानकों को बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है. ऐसे में टिकाऊ तकनीकों को अपनाना समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास का अहम हिस्सा है.

'ये दिल मांगे मोर' को बताया लक्ष्य

भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि देश को अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट होकर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने 'ये दिल मांगे मोर' को इसी सोच का प्रतीक बताया.

मंत्री ने सागरमाला पहल का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे और समुद्री कनेक्टिविटी में सुधार करना है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने समुद्री इकोसिस्टम का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है.

समुद्री क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने की योजना

गोयल ने मुंबई में मैरीटाइम इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना का भी जिक्र किया. इसका उद्देश्य वैश्विक शिपिंग उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल नाविकों और समुद्री क्षेत्र के पेशेवरों को तैयार करना है.

भारत की योजना बंदरगाह क्षमता बढ़ाने के साथ समुद्री क्षेत्र में प्रशिक्षित कार्यबल विकसित करने की भी है. बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, बेहतर लॉजिस्टिक्स, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और हरित तकनीकों पर जोर देकर भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है.
 


भारतीय बाजार में बिकवाली: वॉशिंगटन से नजर हटाएं, 27 अक्टूबर पर दें ध्यान

इजरायल में मतदान, एफएंडओ की एक्सपायरी और जियो का पैसा वापस. भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल में किया गया कारोबार जरूरत से ज्यादा भीड़भाड़ वाला हो गया है और यह तेजी से पलटने वाला है.

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Monday, 26 October, 2026
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पलक शाह

इस सप्ताह क्यों बदल सकता है बाजार का रुख

हर कोई 3 नवंबर पर नजर रख रहा है. समझदार निवेशक 27 अक्टूबर पर नजर रख रहे हैं.

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले इजरायल में मतदान होगा और इस सप्ताह आपके निवेश पोर्टफोलियो के लिए यह मतदान वॉशिंगटन से आने वाली किसी भी खबर से ज्यादा मायने रखता है. इसी मंगलवार को अक्टूबर सीरीज के एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी होगी और जियो आईपीओ का पैसा निवेशकों के खातों में वापस आएगा. बुधवार को जियो की लिस्टिंग होगी और इजरायल के चुनाव नतीजे भी स्पष्ट हो जाएंगे.

बाजार की तीन सबसे बड़ी चिंताएं 48 घंटे के भीतर निर्णायक मोड़ पर पहुंचने वाली हैं. यहां बताया गया है कि हमें क्यों लगता है कि इन तीनों का अंत एक ही दिशा में होगा.

बीबी की अग्निपरीक्षा: तीन रास्ते, एक मंजिल

अंतिम चुनावी सर्वेक्षणों से त्रिशंकु संसद के संकेत मिल रहे हैं. गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला नेतन्याहू-विरोधी गठबंधन ज्यादातर मुख्यधारा के सर्वेक्षणों में आगे है, लेकिन कोई भी पक्ष सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के करीब नहीं है. हर संभावित नतीजे को लेकर हमारा आकलन इस प्रकार है.

त्रिशंकु संसद या बीबी की मामूली हार: यह सबसे जोखिम भरा रास्ता है और हम इस बात को छिपाना नहीं चाहते. कार्यवाहक प्रधानमंत्री नेतन्याहू के पास अब भी सेना का नियंत्रण रहेगा और ऐसी चर्चा है कि बहुमत वाली साझा सरकार बनाने के लिए 'ईरान कार्ड' खेला जा सकता है. लेकिन तेहरान लड़ाई नहीं चाहता. ईरान के राष्ट्रपति खुले तौर पर कह चुके हैं कि ईरान अमेरिका के मध्यावधि चुनाव से पहले समझौता करना चाहता है. सबसे संभावित नतीजा बातचीत है. सबसे खराब स्थिति में भी अगर थोड़े समय के लिए तेज हमला होता है, तो संभवतः उसके तुरंत बाद समझौता हो जाएगा. इससे कच्चे तेल की कीमतों में आने वाला उछाल भागने के बजाय बिकवाली के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

बीबी की हार: वॉशिंगटन अपने सबसे आक्रामक सहयोगी को खो देगा, जबकि ट्रंप मध्यावधि चुनाव से पहले विदेश नीति के मोर्चे पर कोई बड़ी सफलता हासिल करना चाहते हैं. सैन्य कार्रवाई की संभावना कमजोर होगी और समझौते की कोशिश तेज हो जाएगी. उम्मीद है कि होर्मुज के बदले नाकेबंदी खत्म करने से जुड़ी बातचीत तेजी से आगे बढ़ेगी.

बीबी की जीत: इसके बाद तेहरान के सामने फिर से निर्वाचित नेतन्याहू और मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे. दोनों के पास सख्त रुख अपनाने की वजह होगी. ईरान के सामने विकल्प स्पष्ट है: अभी समझौते पर हस्ताक्षर करे या टॉमहॉक मिसाइलों का सामना करे. तेहरान से मिलने वाले सभी संकेत बताते हैं कि वह बातचीत का रास्ता चुनेगा.

निष्कर्ष: तीनों संभावित नतीजे होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते और रुख में नरमी की ओर ले जाते हैं. कच्चे तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम के कारण जुड़ा प्रीमियम बाजार के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले कारोबारों में से एक है और अब जोखिम का झुकाव तेल की कीमतें नीचे जाने की ओर है. भारत के लिए प्रति बैरल तेल की कीमत में हर एक डॉलर की गिरावट का मतलब है कि रुपये को बचाने के लिए उतनी ही कम मेहनत करनी पड़ेगी.

रुपया: दिल्ली कमजोर रुपये का बोझ नहीं उठा सकती

आरबीआई की फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की नेट शॉर्ट पोजिशन 200 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है. इस स्तर पर रुपये में कमजोरी केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट को सीधे नुकसान पहुंचाती है, यह कोई मामूली परेशानी नहीं है.

इससे दिल्ली में हाल की गतिविधियों को समझा जा सकता है. वित्त मंत्री ने वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें की हैं और प्रधानमंत्री भी इसमें शामिल रहे हैं. जब सरकार बाजारों के साथ इतनी नजदीकी से जुड़ती है, तो आमतौर पर इसका मतलब होता है कि वह कदम उठाने का इरादा रखती है. हमें उम्मीद है कि बाजार में भरोसा कायम रखने के लिए कुछ कदम उठाए जाएंगे और रुपये को स्थिर रखना मुख्य प्राथमिकता होगी. तेल की कीमतें घटने से यह काम काफी आसान हो जाएगा. मजबूत रुपया विदेशी निवेश को वापस आकर्षित करता है, जिससे रुपये को और समर्थन मिलता है. यह भी याद रखें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि सरकार दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को तर्कसंगत बनाने से जुड़े सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है.

वित्त मंत्री के इस बयान के बाद वित्तीय बाजार के विशेषज्ञों और विदेशी निवेशकों के साथ बैठकों की झड़ी लग गई. क्या मोदी सरकार बाजार में और बड़ी बिकवाली का जोखिम उठा सकती है?

जियो: पैसा वापस आएगा

भारत के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ को करीब 30,000 करोड़ रुपये के इश्यू के मुकाबले 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलीं. शेयरों का आवंटन सोमवार को होगा, रिफंड और अनब्लॉक हुई रकम मंगलवार को निवेशकों के खातों में आएगी और बुधवार को शेयर बाजार में लिस्ट होंगे.

इसका मतलब है कि ज्यादातर पैसा निवेशकों के पास वापस आ जाएगा. इसका कुछ हिस्सा आईपीओ फाइनेंसिंग के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होगा. कुछ पैसा संस्थागत निवेशकों के पास नकदी के रूप में रहेगा. लेकिन बोली लगाने वाले निवेशक अपनी पूंजी निवेश करना चाहते थे. इस रकम का एक छोटा हिस्सा भी अगर द्वितीयक बाजार में आता है, तो इससे पहले से दबाव झेल रहे बाजार को अच्छी मांग मिल सकती है.

एक वास्तविक समस्या: एमटीएफ पोजिशन का समापन

निकट अवधि में एकमात्र गंभीर दबाव मार्जिन ट्रेडिंग (एमटीएफ) बुक से जुड़ा है, जो करीब 140 लाख करोड़ रुपये का था. मार्जिन कॉल के कारण निवेशकों को लगातार शेयर बेचने पड़े हैं या ब्रोकरों को उनकी पोजिशन खत्म करनी पड़ी हैं. इस तरह की बिकवाली आमतौर पर एक्सपायरी के आसपास चरम पर पहुंचती है. मजबूरी में होने वाली इस बिकवाली का कंपनियों के बुनियादी प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है और यह अंततः खत्म हो जाती है. मंगलवार को अक्टूबर सीरीज की एक्सपायरी के बाद इस दबाव का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाना चाहिए.

मजबूरी में बिकवाली करने वाले निवेशकों के दबाव को हटाएं, तेल की कम कीमतों, रुपये को मिलने वाले सहारे और नई नकदी को जोड़ें, तो नवंबर के लिए बाजार की तस्वीर अक्टूबर के माहौल से काफी अलग दिखाई देती है.

रणनीति

मंगलवार और बुधवार तक बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीद रखें. चुनाव नतीजे, एक्सपायरी और जियो की लिस्टिंग, ये सभी घटनाएं दो कारोबारी सत्रों के भीतर होंगी. घबराहट में आई गिरावट पर खरीदारी करें, तेजी के पीछे भागने से बचें.

तेल की कम कीमतों से इन क्षेत्रों को फायदा होगा: तेल विपणन कंपनियां, विमानन, पेंट, टायर और विशेष रसायन.

स्थिर रुपये से इन क्षेत्रों को फायदा होगा: निजी बैंक, एनबीएफसी और विदेशी निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी वाली कंपनियों के शेयर.

तेल की कम कीमतों से अपस्ट्रीम उत्पादकों को नुकसान होगा. अगर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो इन शेयरों में निवेश घटाएं.

किन स्थितियों में बदल सकता है हमारा आकलन

- चुनाव की रात ईरान पर ऐसा हमला होना, जिससे जल्द समझौते के बजाय लंबा संघर्ष शुरू हो जाए.
- इजरायल में गठबंधन को लेकर लंबे समय तक गतिरोध बने रहना, जिससे नवंबर तक तनाव बना रहे.
- मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल हो जाना.
- जियो की कमजोर लिस्टिंग होना और बाजार में नकदी वापस आने के बजाय उसमें कमी आना.
- एक्सपायरी के बाद भी मार्जिन कॉल के कारण बिकवाली जारी रहना.

निष्कर्ष: बाजार पहले ही सबसे खराब स्थिति को कीमतों में शामिल कर चुका है.

इस सप्ताह अनिश्चितता दूर होगी और हमारा आकलन है कि इसका नतीजा कच्चे तेल की कम कीमतों, रुपये में मजबूती और भारतीय शेयरों में तेजी के रूप में सामने आएगा.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स 

पलक शाह अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पहलुओं को उजागर करते हैं. मुंबई में करीब दो दशक तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की पड़ताल की है. उनके लेख भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं. 19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई की गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक परिष्कृत रूप ने ले ली है. इसमें कॉरपोरेट इमारतों के भीतर चलने वाली सफेदपोश वित्तीय धोखाधड़ी शामिल है. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम वित्तीय दुनिया की चमकदार सतह के पीछे काम करने वाले समूहों को उजागर करता है. सच सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता में एक ऐसी प्रभावशाली आवाज बनाती है जो यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वालों को बेनकाब करने से नहीं हिचकती.