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सबसे बड़ा सवाल: क्या खतरे में अडानी समूह के कर्मचारियों का भविष्य?
24 जनवरी यानी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने के बाद से अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में गिरावट का दौर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अडानी समूह (Adani Group) और उसके मुखिया संकट में हैं. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने ग्रुप इतना तगड़ा नुकसान पहुंचाया है, जिससे बाहर निकलना उसके लिए आसान नहीं होगा. अडानी समूह की सभी कंपनियों को लगातार झटके लग रहे हैं. खुद गौतम अडानी (Gautam Adani) अमीरी के मामले में पिछड़ते जा रहे हैं. ऐसे में अब यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या अडानी समूह की कंपनियों के कर्मचारियों का भविष्य खतरे में है? इस वक्त दुनियाभर में छंटनी का दौर चल रहा है. कंपनियां घाटे का हवाला देते हुए अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं. अडानी समूह का घाटा ऐसे सभी कंपनियों से कहीं ज्यादा है, तो क्या अडानी भी छंटनी का सहारा लेंगे?
80% तक गिरे शेयर
शेयर बाजार में अडानी समूह की कुल 10 कंपनियां लिस्टेड हैं. 24 जनवरी यानी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने के बाद से इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट का दौर है. इन कंपनियों के शेयर दो कदम ऊपर चढ़ते हैं, तो 10 कदम नीचे आ जाते हैं. पिछले एक महीने में अडानी ग्रुप के 2 शेयर 80 प्रतिशत तक गिर चुके हैं. इसमें अडानी टोटल गैस और अडानी ट्रांसमिशन शामिल हैं. जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर इस दौरान 73.28% नीचे आए हैं. बाकी कंपनियों के हालात भी खास जुदा नहीं हैं.
मार्केट कैप में भी गिरावट
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 24 जनवरी से अडानी टोटल गैस की मार्केट वैल्यू में 3.35 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आ चुकी है. जबकि ग्रुप की कंपनियों के कंबाइंड मार्केट कैप में 13500 करोड़ डॉलर से ज्यादा कमी आई है और यह 9800 करोड़ डॉलर से कम रह गया. 24 जनवरी को मार्केट कैप 23200 करोड़ डॉलर था, जबकि अब यह 9700 करोड़ डॉलर के आसपास है. ग्रुप की कंपनियों के लगभग सभी शेयर अपने एक साल के हाई लेवल से काफी नीचे ट्रेड कर रहे हैं.
कुल इतने हैं कर्मचारी
अडानी समूह के देश में 30,000 से ज्यादा रेगुलर कर्मचारी हैं. सप्लायर आदि के जरिए कंपनी करीब 3.5 लाख अतिरिक्त लोगों को जॉब देती है. अडानी पोर्ट में करीब एक से 5 हजार कर्मचारी हैं और इतनी ही संख्या अडानी इंटरप्राइजेज में है. अब सवाल ये है कि यदि संकट और गहराता है, तो क्या इन कमर्चारियों के भविष्य पर कोई प्रभाव पड़ेगा? अडानी समूह ने अपनी विस्तार की सभी योजनाओं पर ब्रेक लगा दिया है. समूह कैश बचाकर रखना चाहता है, ताकि उसे जरूरी कामों अपर खर्च किया जा सके. ऐसे में यह आशंका बनी रहेगी कि हालात बिगड़ने पर कॉस्ट कटिंग के नाम पर छंटनी शुरू हो जाए. हालांकि, समूह ने अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं.
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