चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं पर ₹9,450 करोड़ और बिहार के 83 किलोमीटर फोरलेन हाईवे कॉरिडोर पर ₹3,591 करोड़ खर्च होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में रेल और सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए कुल ₹13,041 करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में करीब 410 किलोमीटर लंबी चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं और बिहार में 83 किलोमीटर लंबे फोरलेन हाईवे कॉरिडोर का विकास शामिल है.
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर क्षमता की बाधाओं को दूर करना, माल ढुलाई को गति देना और बंदरगाहों, औद्योगिक केंद्रों, खनन क्षेत्रों तथा स्टील उत्पादन वाले इलाकों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना है.
रेलवे परियोजनाओं पर ₹9,450 करोड़ का निवेश
चारों रेलवे परियोजनाओं पर कुल ₹9,450 करोड़ खर्च किए जाएंगे. इनमें से ज्यादातर परियोजनाएं हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) और कटक-पारादीप कॉरिडोर से जुड़ी हैं.
खड़गपुर-रानीताल के बीच बनेगी चौथी रेल लाइन
सबसे बड़ी परियोजना के तहत पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से ओडिशा के रानीताल के बीच 173 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन बनाई जाएगी. इस पर करीब ₹3,352 करोड़ खर्च होंगे. यह रेलखंड पश्चिम मेदिनीपुर, बालेश्वर और भद्रक से होकर गुजरता है और हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा है. इस मार्ग पर यात्री और मालगाड़ी दोनों का भारी दबाव रहता है.
परियोजना में दो बड़े पुल समेत 41 प्रमुख और 169 छोटे पुल बनाए जाएंगे. इनमें सुवर्णरेखा नदी पर 564 मीटर लंबा पुल भी शामिल है. नई लाइन से जखापुरा, टाटानगर और दुर्गापुर जैसे स्टील उत्पादक केंद्रों की पारादीप और धामरा बंदरगाहों से कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
भद्रक-हरिदासपुर में चौथी लाइन
ओडिशा में भद्रक और हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन के निर्माण को भी मंजूरी मिली है. इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,583 करोड़ है. भद्रक और जाजपुर जिलों से गुजरने वाला यह रेलखंड फिलहाल करीब 91 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है. अतिरिक्त लाइन से स्टील उत्पादक केंद्रों और पूर्वी तट के बंदरगाहों के बीच माल ढुलाई को बढ़ावा मिलेगा.
सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब 2.9 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता पैदा होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में लगभग ₹433 करोड़ सालाना की बचत हो सकती है.
गुम्मिडीपुंडी-गुडूर में तीसरी और चौथी लाइन
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच 90 किलोमीटर लंबे गुम्मिडीपुंडी-गुडूर रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी. इस परियोजना पर करीब ₹2,229 करोड़ खर्च होंगे. यह मार्ग दिल्ली-चेन्नई और हावड़ा-चेन्नई दोनों हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा है. यह विशाखापत्तनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और प्रस्तावित ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी जुड़ा है.
मौजूदा क्षमता के 131 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. नई लाइनों से चेन्नई, कामराजार (एन्नोर) और कृष्णापट्टनम बंदरगाहों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और सालाना करीब 2.1 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस परियोजना से करीब 61 लाख मानव-दिवस का रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. अतिरिक्त माल ढुलाई से हर साल करीब 17 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है.
कटक-पारादीप रेलखंड का भी होगा विस्तार
ओडिशा में 72 किलोमीटर लंबे कटक-पारादीप रेलखंड के लिए ₹2,286 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है. इसके तहत तीसरी और चौथी रेल लाइन बनाई जाएगी. इससे पारादीप बंदरगाह को कटक के पास हावड़ा-चेन्नई हाई डेंसिटी नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा. साथ ही कलिंगानगर स्टील क्लस्टर, क्योंझर की लौह अयस्क खदानों और तालचेर के कोयला क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
मौजूदा रेलखंड करीब 101 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है और औद्योगिक व बंदरगाह गतिविधियों के बढ़ने के साथ इसके 177 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. परियोजना से सालाना 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ने और लॉजिस्टिक्स लागत में करीब ₹173 करोड़ की सालाना बचत होने की उम्मीद है.
बढ़ती परिवहन मांग के बीच रेल क्षमता पर जोर
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में परिवहन की मांग हर साल करीब 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. ऐसे में रेलवे, सड़क, हवाई और जल परिवहन सभी क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रेल क्षमता का उद्देश्य सिर्फ अधिक ट्रेनों को चलाना नहीं है, बल्कि ट्रेनों की औसत गति और सुरक्षा में भी सुधार करना है. पिछले एक दशक में करीब 81 प्रतिशत रेलवे ट्रैक को अपग्रेड किया गया है, जबकि रेलवे नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है.
सड़क के मुकाबले रेल से माल ढुलाई सस्ती
वैष्णव ने परिवहन के अलग-अलग माध्यमों की लागत का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, समुद्री मार्ग से माल ढुलाई की संकेतात्मक लागत करीब 55 पैसे प्रति टन-किलोमीटर है, जबकि रेल से यह करीब ₹1.60 और सड़क से करीब ₹3.60 प्रति टन-किलोमीटर है.
लागत में इस अंतर से औद्योगिक और बंदरगाह आधारित कॉरिडोर में माल ढुलाई को सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करने में मदद मिल सकती है. रेल परिवहन पर्यावरण की दृष्टि से भी सड़क परिवहन की तुलना में बेहतर है.
बिहार में ₹3,591 करोड़ का फोरलेन हाईवे
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-22 पर 83 किलोमीटर लंबे फोरलेन ब्राउनफील्ड कॉरिडोर के विकास को भी मंजूरी दी है. इस परियोजना पर ₹3,591 करोड़ खर्च किए जाएंगे.
परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत लागू किया जाएगा और इसके निर्माण में करीब 30 महीने लगने की उम्मीद है. इसमें सात बड़े पुल, तीन रोड ओवरब्रिज और छह व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे. बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल भी परियोजना का हिस्सा होगा.
मुजफ्फरपुर-सोनबरसा सफर का समय आधा होने की उम्मीद
फोरलेन कॉरिडोर तैयार होने के बाद मुजफ्फरपुर से सोनबरसा के बीच यात्रा का समय करीब दो घंटे से घटकर एक घंटे रह सकता है. इससे जाम कम करने और वाहनों की परिचालन लागत घटाने में भी मदद मिलेगी. यह कॉरिडोर पांच पीएम गति शक्ति आर्थिक नोड, चार सामाजिक नोड और दो लॉजिस्टिक्स नोड को जोड़ेगा.
चार साल में पूरी होंगी रेलवे परियोजनाएं
₹13,041 करोड़ के कुल निवेश में रेलवे की चार परियोजनाओं पर ₹9,450 करोड़ और बिहार हाईवे परियोजना पर ₹3,591 करोड़ खर्च होंगे. रेलवे परियोजनाओं को चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि बिहार हाईवे कॉरिडोर का निर्माण 30 महीने में पूरा होने की उम्मीद है. इन परियोजनाओं से प्रमुख रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने के साथ बंदरगाहों, खदानों, औद्योगिक क्लस्टरों और अन्य माल उत्पादक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.
5.625% की फिक्स्ड कूपन दर वाले तीन साल के बॉन्ड 2029 में होंगे मैच्योर, वैश्विक संस्थागत निवेशकों ने लिया हिस्सा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank) ने अंतरराष्ट्रीय डेट कैपिटल मार्केट में अपनी शुरुआत करते हुए 500 मिलियन डॉलर के तीन वर्षीय फिक्स्ड रेट सीनियर नोट्स की सफलतापूर्वक कीमत तय कर आवंटन किया है. ये बॉन्ड 2029 में मैच्योर होंगे और इन पर 5.625% की फिक्स्ड कूपन दर होगी. बॉन्ड को अमेरिका के बाहर के निवेशकों के बीच रेगुलेशन एस (Regulation S) फॉर्मेट में रखा गया.
बैंक ने यह बॉन्ड GIFT City स्थित अपनी IFSC Banking Unit के माध्यम से जारी किए हैं. यह IDFC FIRST Bank का पहला अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड इश्यू है और इसके साथ बैंक ने वैश्विक डेट कैपिटल मार्केट में प्रवेश किया है.
S&P की इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग के बाद पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय इश्यू
यह इश्यू S&P Global Ratings की ओर से 13 अगस्त 2026 को बैंक को दी गई ‘BBB-’ लॉन्ग-टर्म इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और स्टेबल आउटलुक के बाद आया है. बैंक के मुताबिक, इस रेटिंग ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच उसके वित्तीय प्रदर्शन और क्रेडिट प्रोफाइल को लेकर भरोसा मजबूत करने में मदद की.
बॉन्ड इश्यू में BlackRock, Capital Group और AllianceBernstein समेत कई प्रमुख वैश्विक संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया. बैंक ने कहा कि इन निवेशकों की भागीदारी उसकी वित्तीय मजबूती, बढ़ते कारोबार, सतर्क जोखिम प्रबंधन और लंबी अवधि की संभावनाओं में मजबूत भरोसे को दर्शाती है.
मजबूत हुआ बैंक का बैलेंस शीट
पिछले कुछ वर्षों में IDFC FIRST Bank ने अपने बैलेंस शीट को मजबूत किया है. बैंक ने रिटेल डिपॉजिट का व्यापक आधार तैयार करने के साथ लाभप्रदता में सुधार और एसेट क्वालिटी को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया है. इसके साथ ही बैंक टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और कस्टमर सर्विस में लगातार निवेश कर रहा है. बैंक के अनुसार, इस बॉन्ड इश्यू से उसकी फंडिंग के स्रोतों में विविधता आएगी और अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार से धन जुटाने का एक नया माध्यम तैयार होगा.
IDFC FIRST Bank के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और हेड-कॉरपोरेट सेंटर सुधांशु जैन ने कहा कि यह बैंक के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. उन्होंने कहा कि पहली अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बिक्री में दुनिया के प्रमुख संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी बैंक के फ्रेंचाइजी की मजबूती, बैलेंस शीट की मजबूती और पिछले कुछ वर्षों में हुई प्रगति को लेकर बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है.
उन्होंने कहा कि बैंक अपने निवेशकों के भरोसे और विश्वास के लिए आभारी है. यह इश्यू बैंक के फंडिंग स्रोतों में विविधता लाने, वैश्विक पूंजी बाजार तक पहुंच बढ़ाने और लंबी अवधि के विकास लक्ष्यों को समर्थन देने में मदद करेगा.
रिटेल से कॉरपोरेट बैंकिंग तक सेवाएं
IDFC FIRST Bank रिटेल, MSME, ग्रामीण बैंकिंग, स्टार्टअप, कॉरपोरेट बैंकिंग, कैश मैनेजमेंट, क्रेडिट कार्ड, वेल्थ मैनेजमेंट, डिपॉजिट, सरकारी बैंकिंग, वर्किंग कैपिटल, ट्रेड फाइनेंस और ट्रेजरी समेत कई तरह की बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराता है. बैंक का कहना है कि वह एथिकल, डिजिटल और सोशल गुड बैंकिंग के सिद्धांतों पर आधारित विश्वस्तरीय बैंक बनाने की दिशा में काम कर रहा है. बैंक ने डिजिटल बैंकिंग के लिए क्लाउड-नेटिव, API-आधारित और माइक्रोसर्विस आर्किटेक्चर पर आधारित टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया है, जिसमें डेटा, एनालिटिक्स और AI का इस्तेमाल किया जाता है.
सामाजिक क्षेत्र में भी निवेश
बैंक के अनुसार, उसकी विभिन्न पहलों से 4 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन पर असर पड़ा है, जिनमें 36 लाख महिला उद्यमी शामिल हैं. बैंक ने लैपटॉप, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर जैसी जीवनशैली सुधारने वाली जरूरतों के लिए 75 लाख से अधिक लोन दिए हैं. इसके अलावा बैंक ने 2.5 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों, 2.7 लाख पानी, स्वच्छता और हाइजीन लोन तथा 20 लाख आजीविका संबंधी लोन को वित्तपोषित किया है. बैंक ने 3 लाख से अधिक MSME को भी वित्तीय सहायता दी है.
छोटे और मध्यम उद्यमों की लिस्टिंग व्यवस्था में ट्रेडिंग, मार्केट मेकिंग और मेन बोर्ड में माइग्रेशन से जुड़े नियमों की होगी समीक्षा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) की लिस्टिंग व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है. इसके साथ ही वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के इस्तेमाल को लेकर संस्थाओं की जवाबदेही भी स्पष्ट की जाएगी. सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि SME प्लेटफॉर्म से जुड़े कई पहलुओं की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही व्यापक सुधारों के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा.
SME प्लेटफॉर्म पर इन नियमों की होगी समीक्षा
मुंबई में फिक्की के सालाना कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस के दौरान पांडेय ने कहा कि सेबी SME प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग, मार्केट मेकिंग, अंडरराइटिंग और कंपनियों के मेन बोर्ड में माइग्रेशन से जुड़े मौजूदा नियमों की कमियों की समीक्षा कर रहा है.
सेबी के सामने SME प्लेटफॉर्म पर बनने वाले ‘ऑड लॉट’ भी चिंता का विषय हैं. इससे निवेशकों के लिए शेयरों में कारोबार करना मुश्किल हो सकता है. पांडेय के मुताबिक, रिटेल निवेशकों की भागीदारी को नियंत्रित करने के लिए ट्रेडिंग लॉट और एप्लीकेशन साइज बढ़ाने जैसे कदम अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए हैं.
मार्केट मेकिंग और अंडरराइटिंग में भी बदलाव की जरूरत
सेबी चेयरमैन ने कहा कि SME प्लेटफॉर्म पर मार्केट मेकिंग की मौजूदा व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही है. इससे SME कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है. अंडरराइटिंग व्यवस्था में बदलाव की जरूरत के साथ-साथ मेन बोर्ड में माइग्रेशन और पेड-अप कैपिटल से जुड़ी आवश्यकताओं की भी समीक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा कि सेबी व्यापक सुधारों का प्रस्ताव तैयार करेगा और इस संबंध में कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा.
AI-ML के इस्तेमाल पर संस्थाओं की जवाबदेही तय होगी
वित्तीय बाजार में AI और ML के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सेबी इनके जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए नए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है. सेबी के मुताबिक, तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि AI या ML से जुड़े किसी फैसले या सिस्टम की जिम्मेदारी किसकी होगी.
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सेबी के दायरे में आने वाली प्रत्येक संस्था अपने इस्तेमाल किए जाने वाले AI या ML टूल के लिए जिम्मेदार होगी. यह जिम्मेदारी इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि टूल संस्था ने खुद विकसित किया है या किसी तीसरी पार्टी से लिया है.
डेटा की सुरक्षा और AI के नतीजों की भी जिम्मेदारी
AI-ML से जुड़े प्रस्तावित नियमों में निवेशकों के डेटा की प्राइवेसी, सुरक्षा और प्रमाणिकता के साथ-साथ AI सिस्टम से मिलने वाले नतीजों की जवाबदेही भी शामिल होगी. सेबी अलग-अलग स्तरों के लिए जिम्मेदारी और निगरानी से जुड़े स्पष्ट नियम बनाने की तैयारी में है. प्रस्तावित व्यवस्था में ‘किल स्विच’ और ‘ह्यूमन इन द लूप’ जैसे सुरक्षा उपायों को भी शामिल किया जा सकता है. इसके अलावा डेटा पर नियंत्रण की व्यवस्था पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि तकनीकी नवाचार और निवेशकों की सुरक्षा के बीच संतुलन कायम रहे.
संदिग्ध वित्तीय प्रचार की निगरानी में AI का इस्तेमाल
सेबी संदिग्ध वित्तीय प्रचार और संभावित रूप से भ्रामक विज्ञापनों की पहचान के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है. इसके लिए ‘प्रोजेक्ट सुदर्शन’ और ‘R(AI)DAR’ जैसी पहल का उपयोग किया जा रहा है. इसके अलावा मार्केट इकोसिस्टम में सूचनाओं के आदान-प्रदान और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेबी ने साइबर सुरक्षा पोर्टल भी बनाया है.
LODR और डीलिस्टिंग फ्रेमवर्क की भी समीक्षा
SME लिस्टिंग और AI-ML नियमों के अलावा सेबी लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) और डीलिस्टिंग फ्रेमवर्क की भी समीक्षा कर रहा है. वहीं, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) के लिए भी कुछ नियमों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है. इनमें निर्धारित सीमाओं के भीतर निर्माणाधीन परियोजनाओं में निवेश की अनुमति को अधिक लचीला बनाने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है.
दिल्ली पुलिस की EOW की FIR में Sammaan Capital को कथित लेनदेन का पीड़ित बताया गया, कंपनी ने कहा- पांच समूहों को दिए गए सभी ऋण की राशि वापस मिल चुकी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सम्मान कैपिटल (Sammaan Capital) से जुड़े कथित लेनदेन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को जांच के निर्देश दिए हैं. इससे पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस मामले में FIR दर्ज कर चुकी है, जिसमें कंपनी के पूर्व प्रमोटर समीर गहलोत समेत कई कारोबारी समूहों के नाम आरोपी के तौर पर शामिल हैं. सम्मान कैपिटल ने कहा है कि कंपनी इस FIR में आरोपी नहीं है और उसे कथित लेनदेन का पीड़ित माना गया है.
सम्मान कैपिटल के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली पुलिस की EOW ने 15 दिसंबर 2025 को FIR दर्ज की थी. इस FIR में Indiabulls Housing Finance Ltd. (IHFL) के पूर्व प्रमोटर समीर गहलोत, DLF Group, Vatika Group, Americorp Group, Chordia Group और Reliance ADAG Group को आरोपी बनाया गया था.
सम्मान कैपिटल को कथित लेनदेन का पीड़ित बताया गया
कंपनी ने स्पष्ट किया कि सम्मान कैपिटल इस FIR में आरोपी नहीं है. कंपनी के अनुसार, जांच में उसे संबंधित उधारकर्ता समूहों, समीर गहलोत और उनकी प्रमोटर इकाइयों के बीच कथित ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी कथित लेनदेन व्यवस्था का संभावित पीड़ित माना गया है.
कंपनी ने बताया कि 11 अगस्त 2026 को दिल्ली पुलिस की EOW ने इस FIR में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की. इस रिपोर्ट में कहा गया कि PIL में जिन पांच समूहों का उल्लेख किया गया था, उन्हें दिए गए ऋण से संबंधित पूरी राशि सम्मान कैपिटल को वापस मिल चुकी है.
इसके बाद मामले को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने CBI को EOW द्वारा दर्ज FIR में लगाए गए आरोपों की जांच करने को कहा. कंपनी ने दोहराया कि इस FIR में भी सम्मान कैपिटल आरोपी नहीं है.
Yes Bank और IHFL के पूर्व प्रमोटरों से जुड़े लेनदेन की भी जांच
सम्मान कैपिटल ने कहा कि CBI अलग से Yes Bank Ltd. के प्रमोटरों की कंपनियों और IHFL के पूर्व प्रमोटर समीर गहलोत की कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की जांच कर रही है. कंपनी के मुताबिक, इस जांच में भी सम्मान कैपिटल के खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही है. कंपनी ने कहा कि CBI की ओर से दायर आवेदन केवल समीर गहलोत, उनकी प्रमोटर कंपनियों और राणा कपूर से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित है.
सात वर्षों में किसी एजेंसी को नहीं मिला कोई उल्लंघन
सम्मान कैपिटल ने दावा किया कि पिछले सात वर्षों के दौरान PIL में लगाए गए आरोपों से जुड़े मामलों में उसे किसी भी तरह की गड़बड़ी से मुक्त पाया गया है. कंपनी के अनुसार, मामले की जांच करने वाली विभिन्न वैधानिक एजेंसियों को PIL में लगाए गए आरोपों के अनुरूप कोई उल्लंघन नहीं मिला.
कंपनी के मुताबिक, इस मामले को देखने वाली एजेंसियों में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA), नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) शामिल हैं. सम्मान कैपिटल ने कहा कि PIL में लगाए गए आरोपों से उत्पन्न किसी भी जांच में उसे किसी एजेंसी द्वारा आरोपी नहीं बनाया गया है.
2023 से समीर गहलोत से कोई संबंध नहीं
कंपनी ने यह भी कहा कि समीर गहलोत द्वारा 2023 में कंपनी के प्रमोटर पद से हटने और अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के बाद से सम्मान कैपिटल का उनसे कोई संबंध नहीं है. कंपनी ने बताया कि अब उसका संचालन एक नए प्रमोटर, अबू धाबी स्थित International Holding Company PJSC (IHC), के तहत हो रहा है. कंपनी के अनुसार, IHC ने सम्मान कैपिटल में 1 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. इसे भारतीय NBFC क्षेत्र के सबसे बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सौदों में से एक बताया गया है. कंपनी ने कहा कि IHC अब उसके बोर्ड पर नियंत्रण रखता है.
एसबीआई रिसर्च का अनुमान, FY27 में भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स 50 अरब डॉलर के सरप्लस में रह सकता है; मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह से बाहरी मोर्चे पर अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है. एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) करीब 50 अरब डॉलर के सरप्लस में रह सकता है. इसका मतलब है कि देश में बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा के मुकाबले आने वाली विदेशी मुद्रा अधिक रहेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के करीब 1 फीसदी तक सीमित रह सकता है और भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहेगी.
विदेशी मुद्रा का बढ़ता प्रवाह
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए किए गए उपायों से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है. FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़े उपायों के तहत अब तक करीब 57 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है.
रिपोर्ट का अनुमान है कि अगस्त के बाकी दिनों में 25 से 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त प्रवाह हो सकता है. ऐसे में कुल राशि करीब 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) भी भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के मजबूत प्रवाह का उल्लेख कर चुकी है. इससे देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है.
विदेशी मुद्रा जुटाने की लागत कितनी?
विदेशी मुद्रा जुटाने के साथ उसकी हेजिंग और प्रबंधन की लागत भी जुड़ी होती है. इसको लेकर बाजार में चिंता जताई जा रही थी, लेकिन एसबीआई रिसर्च के मुताबिक यह लागत भारत के लिए बड़ी चिंता नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल की कुल हेजिंग लागत करीब 10.5 अरब डॉलर हो सकती है. यह भारत के करीब 700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 1.45 फीसदी है. यानी विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले यह लागत सीमित है.
रुपये को मिल सकता है सहारा
विदेशी मुद्रा के मजबूत प्रवाह का असर रुपये की स्थिति पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, FCNR(B) से जुड़े उपायों के बाद रुपये में करीब 0.1 फीसदी की मजबूती आई है. एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि अगस्त के अंत तक रुपया 95 से 95.5 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है. रुपये में स्थिरता से आयात लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. खासकर कच्चे तेल और अन्य जरूरी आयात महंगे होने की स्थिति में मजबूत रुपया अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करने में मददगार हो सकता है.
कच्चे तेल की कीमत बनी चुनौती
हालांकि, वैश्विक स्तर पर कई जोखिम अभी भी बने हुए हैं. अमेरिका में 30 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 5.3 फीसदी तक पहुंच गई है. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का जोखिम बना हुआ है. ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है. भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है.
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ी हिस्सेदारी
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता पर भी जोर दे रहा है. इसी रणनीति के तहत विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ी है. वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 16.7 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी. 7 अगस्त तक यह करीब 15.38 फीसदी रही. सोने का बढ़ता भंडार वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संकट की स्थिति में भारत के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकता है.
कुल मिलाकर, मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह, बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में संभावित सरप्लस भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिमों पर भी नजर बनाए
अमेजन सेलर सर्विसेज ने पहली बार दर्ज किया 172 करोड़ रुपये का सकारात्मक PBIT, टैक्स के बाद घाटा भी घटा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेजन के भारत में मार्केटप्लेस कारोबार ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अहम उपलब्धि हासिल की है. अमेजन सेलर सर्विसेज ने इस दौरान पहली बार ब्याज और टैक्स से पहले मुनाफा (PBIT) दर्ज किया है. कंपनी का PBIT 172 करोड़ रुपये रहा. वहीं, कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर 15.5 फीसदी बढ़कर 35,574 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 30,805 करोड़ रुपये थी.
यह प्रदर्शन भारत में अमेजन के मुख्य मार्केटप्लेस कारोबार में लगातार हो रही वृद्धि को दर्शाता है. कंपनी ने FY25 में पहली बार सकारात्मक EBITDA दर्ज किया था और अब FY26 में सकारात्मक PBIT हासिल किया है.
टैक्स के बाद घाटा भी हुआ कम
अमेजन सेलर सर्विसेज ने FY26 में टैक्स के बाद अपने घाटे को भी कम किया है. कंपनी का घाटा घटकर 389.9 करोड़ रुपये रह गया, जबकि FY25 में यह 408.2 करोड़ रुपये था. खास बात यह है कि कंपनी ने यह सुधार ऐसे समय में दर्ज किया है, जब अमेजन भारत में ई-कॉमर्स के साथ-साथ क्विक कॉमर्स, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है.
PBIT में मुनाफे और टैक्स के बाद घाटे में कमी से संकेत मिलता है कि भारत में अमेजन के मार्केटप्लेस कारोबार की परिचालन स्थिति में सुधार हो रहा है. हालांकि, कंपनी अभी भी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को प्राथमिकता दे रही है.
भारत में 48 अरब डॉलर निवेश की योजना
अमेजन ने 2026 से 2030 के बीच भारत में 48 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है. इसके साथ ही 2010 से भारत में कंपनी का कुल निवेश दशक के अंत तक 88 अरब डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद है. यह निवेश मुख्य रूप से अमेजन के ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स फुलफिलमेंट नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा.
क्विक कॉमर्स पर बढ़ा फोकस
अमेजन भारत के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है. कंपनी ‘अमेजन नाउ’ के जरिए इस क्षेत्र में विस्तार कर रही है. कंपनी के मुताबिक, अमेजन नाउ भारत में उसका सबसे तेजी से बढ़ने वाला ई-कॉमर्स बिजनेस यूनिट है और लॉन्च के बाद से इसके ऑर्डर हर तिमाही दोगुने हो रहे हैं. कंपनी इस सेवा का विस्तार 300 से अधिक शहरों में कर रही है.
इसके जरिए अमेजन किराना और रोजमर्रा की जरूरत के सामान के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां उसे पहले से मौजूद क्विक-कॉमर्स कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है.
सेलर्स के लिए कम की फीस
अमेजन अपने प्लेटफॉर्म पर विक्रेताओं की लागत कम करने पर भी ध्यान दे रही है. मार्च में कंपनी ने 1,000 रुपये से कम कीमत वाले 12.5 करोड़ से अधिक उत्पादों पर जीरो रेफरल फीस का दायरा बढ़ाया था. यह सुविधा 1,800 से अधिक कैटेगरी में लागू की गई.
इसके अलावा 300 रुपये से कम कीमत वाले उत्पादों के लिए ईजी शिप फीस में 20 फीसदी से अधिक की कटौती की गई. अमेजन के अनुसार, इन बदलावों से विक्रेताओं को फीस में 70 फीसदी तक की बचत हो सकती है.
एआई से सेलर्स को मिलेगी मदद
कंपनी ने भारत में एआई आधारित सेलर असिस्टेंट भी पेश किया है. यह टूल विक्रेताओं को प्रोडक्ट लिस्टिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, बिजनेस इनसाइट्स और ग्लोबल एक्सपेंशन जैसे कामों में मदद करता है. यह टूल अंग्रेजी और हिंग्लिश में उपलब्ध है और अमेजन के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है.
FY26 के नतीजे अमेजन के भारत में मार्केटप्लेस कारोबार के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं. आय में मजबूत वृद्धि, पहली बार सकारात्मक PBIT और लगातार बढ़ते निवेश से संकेत मिलता है कि कंपनी भारत में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
DRDO ने मिसाइल और बम वेपन सिस्टम के लिए निजी कंपनियों से मांगे आवेदन, ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर’ मॉडल के तहत होगा चयन
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पहली बार रणनीतिक हथियारों और मिसाइल प्रणालियों के निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की पहल की है. इसके तहत निजी कंपनियों से मिसाइल और बम वेपन सिस्टम विकसित करने और उत्पादन के लिए आवेदन मांगे गए हैं. इस कदम से आधुनिक हथियारों का विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन तेजी से करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
निजी कंपनियों को मिलेगा रणनीतिक हथियारों के विकास का मौका
DRDO के मिसाइल एवं रणनीतिक सिस्टम विभाग ने भविष्य की महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है. इसके तहत अग्नि सीरीज जैसी मिसाइलों से लेकर पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली परमाणु हथियार प्रणालियों के नए वैरिएंट विकसित किए जाने की योजना है.
अब तक इन संवेदनशील हथियार प्रणालियों के निर्माण में सरकारी कंपनियों की प्रमुख भूमिका रही है. भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इनके उत्पादन से जुड़े रहे हैं. नई व्यवस्था में निजी क्षेत्र को भी इन परियोजनाओं में भागीदार बनाया जाएगा. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और सोलर एयरोस्पेस एंड डिफेंस जैसी कंपनियों की इस तरह की परियोजनाओं में भागीदारी की संभावना है.
कंपनियों के लिए तय किए गए सख्त मानक
रणनीतिक हथियारों के निर्माण से जुड़ी इन परियोजनाओं में भाग लेना निजी कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा. DRDO ने कंपनियों के लिए तकनीकी और वित्तीय योग्यता से जुड़े कड़े मानक तय किए हैं. आवेदक कंपनियों के पास रक्षा निर्माण से संबंधित इंडस्ट्रियल लाइसेंस होना जरूरी होगा. इसके साथ ही विस्फोटकों के सुरक्षित रखरखाव और संचालन के लिए पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) का लाइसेंस भी अनिवार्य होगा.
कंपनी के लिए न्यूनतम टर्नओवर और नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी निर्धारित की गई हैं. कंपनी की नेटवर्थ परियोजना की अनुमानित लागत के 5 फीसदी से अधिक होनी चाहिए. इसके अलावा बड़े और जटिल प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा करने का अनुभव रखने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
हर प्रोजेक्ट में कम से कम दो कंपनियां होंगी
नई व्यवस्था को ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर’ मॉडल के तहत लागू किया जाएगा. प्रत्येक परियोजना के लिए कम से कम दो कंपनियों का चयन किया जाएगा. चयनित कंपनियां DRDO के साथ मिलकर हथियार प्रणालियों के प्रोटोटाइप तैयार करेंगी.
इन प्रोटोटाइप का परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा. सफल परीक्षण के बाद रणनीतिक बलों की जरूरत और मांग के आधार पर इन्हीं कंपनियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन की जिम्मेदारी दी जा सकेगी.
उत्पादन क्षमता की भी होगी कड़ी जांच
हथियारों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता से कोई समझौता न हो, इसके लिए कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमताओं का विस्तृत आकलन किया जाएगा. DRDO यह भी जांच करेगा कि कंपनियां 50 से 100 या उससे अधिक हथियारों का थोक उत्पादन करने में सक्षम हैं या नहीं.
इसके लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति कंपनियों की उत्पादन इकाइयों का निरीक्षण करेगी. टीम यह देखेगी कि संबंधित कंपनी के पास जरूरी मशीनरी, तकनीकी विशेषज्ञता, उत्पादन क्षमता और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचा मौजूद है या नहीं.
निजी क्षेत्र की भागीदारी से बढ़ेगी रक्षा उत्पादन क्षमता
रणनीतिक हथियारों के विकास और उत्पादन में निजी कंपनियों को शामिल करने की यह पहल भारत के रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत कर सकती है. इससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ हथियार प्रणालियों के विकास और उत्पादन में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अधिग्रहण के बाद देशभर में 420 सेंटर और 1,000 से अधिक सेवा प्रदाता जुड़े, 2027 तक 500 सेंटर का लक्ष्य
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हियरिंग हेल्थकेयर क्षेत्र की कंपनी हियरजैप (Hearzap) ने एम्प्लीफॉन (Amplifon India) के हियरिंग हेल्थकेयर कारोबार के अधिग्रहण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह सौदा मई 2026 में घोषित किए गए अंतिम समझौते के बाद पूरा हुआ है. कंपनी के मुताबिक, यह अधिग्रहण भारत के संगठित हियरिंग हेल्थकेयर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है.
इस अधिग्रहण के साथ Hearzap का नेटवर्क बढ़कर देशभर में 420 सेंटर का हो गया है. कंपनी के पास अब 1,000 से अधिक सेवा प्रदाता हैं. Hearzap का लक्ष्य 2027 तक 500 हियरिंग केयर सेंटर का नेटवर्क तैयार करना है. कंपनी को उम्मीद है कि इस विस्तार से महानगरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी गुणवत्तापूर्ण हियरिंग केयर की पहुंच बढ़ेगी.
एम्प्लीफॉन इंडिया के 240 हियरिंग केयर पॉइंट जुड़े
इस सौदे के तहत Amplifon India के करीब 240 हियरिंग केयर पॉइंट्स Hearzap के नेटवर्क में शामिल हुए हैं. इनमें 115 सीधे संचालित केंद्र हैं. इसके अलावा अनुभवी क्लिनिकल टीम और मौजूदा ग्राहकों का आधार भी इस अधिग्रहण का हिस्सा है.
Hearzap को अपने निवेशक 360 ONE Asset Management का समर्थन प्राप्त है. कंपनी का कहना है कि Amplifon India की वैश्विक स्तर की क्लिनिकल विशेषज्ञता और Hearzap के बढ़ते राष्ट्रीय नेटवर्क के एकीकरण से भारत में संगठित हियरिंग हेल्थकेयर के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार होगा.
'सिर्फ नेटवर्क का विस्तार नहीं, क्लिनिकल विशेषज्ञता को जोड़ने का अवसर'
Hearzap के प्रबंध निदेशक राजा एस. ने कहा कि Amplifon India का अधिग्रहण कंपनी की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. उनके मुताबिक, यह केवल नेटवर्क का विस्तार नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रमाणित क्लिनिकल विशेषज्ञता, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और ग्राहक-केंद्रित देखभाल को कंपनी के साथ जोड़ने का अवसर भी है.
उन्होंने कहा कि संयुक्त प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों भारतीयों तक बेहतर हियरिंग हेल्थकेयर पहुंचाने की क्षमता मजबूत होगी. कंपनी का फोकस हियरिंग केयर की पहुंच बढ़ाने, क्लिनिकल गुणवत्ता मजबूत करने और आधुनिक तकनीक तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर व्यक्तिगत देखभाल उपलब्ध कराने पर रहेगा.
अगले 12 महीनों में चरणबद्ध एकीकरण
Hearzap अगले 12 महीनों में Amplifon India के कारोबार का चरणबद्ध तरीके से एकीकरण करेगी. कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य ग्राहकों और कर्मचारियों के लिए सुगम बदलाव सुनिश्चित करना और क्लिनिकल सेवाओं को बिना किसी बाधा के जारी रखना है.
Amplifon India के मौजूदा पेशेवर भी संगठन का हिस्सा बने रहेंगे. इससे सेवाओं में निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल Hearzap की भविष्य की विकास योजनाओं में किया जा सकेगा.
2029 तक करीब 500 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य
एकीकरण के बाद संयुक्त कारोबार का टॉपलाइन राजस्व 230 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है. Hearzap का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के अंत तक करीब 250 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करना है. कंपनी FY2029 तक इसे लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना बना रही है.
इस वृद्धि को समर्थन देने के लिए कंपनी नए हियरिंग केयर सेंटर खोलने, कम सेवा वाले बाजारों में विस्तार करने, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और टेली-ऑडियोलॉजी समाधान अपनाने तथा रिहैबिलिटेशन सेवाओं को मजबूत करने में निवेश करेगी. इसके अलावा कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्लिनिकल एक्सीलेंस पर भी निवेश जारी रखा जाएगा.
हेल्थकेयर संस्थानों और बीमा कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना
Hearzap की योजना हेल्थकेयर संस्थानों, बीमा प्रदाताओं और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी है. इसके जरिए हियरिंग से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच और शुरुआती स्तर पर इलाज को बढ़ावा देने तथा लंबे समय तक हियरिंग हेल्थ को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा.
भारत में तेजी से बदल रहा हियरिंग हेल्थकेयर सेक्टर
भारत का हियरिंग हेल्थकेयर सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है. बढ़ती जीवन प्रत्याशा, हियरिंग हेल्थ को लेकर बढ़ती जागरूकता, कामकाजी और पर्यावरणीय शोर के बढ़ते संपर्क तथा हियरिंग केयर समाधानों की बढ़ती स्वीकार्यता इसके प्रमुख कारण हैं.
हालांकि, देश के कई हिस्सों में विशेषज्ञ हियरिंग सेवाओं की पहुंच अभी भी सीमित है. Hearzap का मानना है कि Amplifon India का अधिग्रहण इस अंतर को कम करने और अधिक मजबूत, सुलभ तथा आधुनिक हियरिंग हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव को मिली मंजूरी, फिलहाल UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था बरकरार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भुगतान को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही सरकार को UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी अधिकार मिल गया है. हालांकि, फिलहाल UPI पर जीरो MDR की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
नोटिफिकेशन के जरिए तय होगी MDR की व्यवस्था
कानून में संशोधन के बाद अब सरकार नोटिफिकेशन के जरिए यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट्स को MDR से छूट दी जाएगी. मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर MDR के रूप में कोई शुल्क नहीं ले सकते हैं.
इस बदलाव से सरकार के पास भविष्य में UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का विकल्प खुल गया है. हालांकि, इसके लिए अलग से सरकारी फैसला और नोटिफिकेशन जारी करना होगा. यानी राष्ट्रपति की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि UPI पेमेंट पर तत्काल कोई चार्ज लग गया है.
सरकार को इंसेंटिव पर खर्च घटाने में मिल सकती है मदद
UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था के कारण बैंकों और पेमेंट कंपनियों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए सरकार समय-समय पर इंसेंटिव देती रही है. MDR व्यवस्था में बदलाव की अनुमति मिलने से भविष्य में सरकार को इस तरह के खर्च को कम करने का विकल्प मिल सकता है.
टैक्स कानून में भी बदलाव को मंजूरी
राष्ट्रपति ने Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 को भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और कारोबार करना आसान बनाना है. इसके अलावा नए प्रावधानों के तहत फंड मैनेजरों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करने की प्रक्रिया आसान करने का प्रयास किया गया है. कुछ परिस्थितियों में भारत में उनकी मौजूदगी को टैक्स नियमों के तहत भारत में कारोबार करने के रूप में नहीं माना जाएगा. इससे भारत को ग्लोबल फंड मैनेजमेंट और निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
वित्तमंत्री ने कहा कि सरकारी बैंक दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों तक अधिक ऋण पहुंचाएं. इसके साथ ही युवाओं को बैंकिंग से जोड़ने के लिए 2 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू करने का सुझाव भी दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत को दलहन और तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने सरकारी बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को दिए जाने वाले ऋण में तेजी लाने को कहा है. उनका मानना है कि इससे इन फसलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्क्लेव’ के समापन सत्र में सीतारमण ने सरकारी बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि सरकार की कृषि और खाद्य उत्पादन से जुड़ी प्राथमिकताओं को सही रणनीति के साथ किसानों तक वित्तीय सहायता पहुंचाने में बदलना होगा.
दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर
वित्तमंत्री ने कहा कि बैंकों को विशेष रूप से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को अधिक ऋण देना चाहिए. इससे भारत की आयात निर्भरता कम करने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है.
सरकार पहले ही दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष मिशन पर काम कर रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित दलहन मिशन का लक्ष्य 2031 तक घरेलू उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना और खेती का रकबा 310 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना है.
धन धान्य कृषि योजना वाले जिलों पर विशेष फोकस
सीतारमण ने बैंकों से प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत आने वाले जिलों में ऋण उपलब्धता बढ़ाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के कृषि ऋण की जरूरत है. इसके अलावा सिंचाई, फसल कटाई के बाद भंडारण और कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए भी पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया.
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में तेजी लाने की जरूरत
वित्तमंत्री ने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के तहत अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास तेज करने को भी कहा. उन्होंने बैंक प्रमुखों से कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र में ऋण की कमी को केवल अन्य संस्थानों के माध्यम से पूरा करने के बजाय बैंक खुद अपनी क्षमता बढ़ाएं.
उन्होंने कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र को केवल लक्ष्य पूरा करने के रूप में नहीं, बल्कि औपचारिक ऋण के विस्तार, नए ग्राहकों को जोड़ने, उद्यमों को मजबूत बनाने और व्यापक आर्थिक विकास के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए.
युवाओं के लिए शुरू हो सकता है ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान
बैठक में वित्तमंत्री ने युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए भी एक नई पहल का सुझाव दिया. उन्होंने सरकारी बैंकों से 2 अक्टूबर से एक महीने तक चलने वाला ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान शुरू करने का आग्रह किया.
यह अभियान 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा सकता है. सीतारमण ने कहा कि बैंकों को युवाओं के शाखाओं में आने का इंतजार करने के बजाय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य परिसरों तक पहुंचना चाहिए.
उन्होंने कहा कि खाता खोलने, वित्तीय जागरूकता और बैंकिंग उत्पादों की जानकारी के जरिए युवाओं के साथ सीधा जुड़ाव बढ़ाया जा सकता है. वित्तमंत्री ने बैंक शाखाओं में युवाओं की मदद के लिए समर्पित ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ जैसी व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया.
12 सरकारी बैंकों को अलग रणनीति बनाने की सलाह
सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी 12 बैंकों को अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी, उत्पादों और संस्थागत क्षमताओं के आधार पर युवाओं को आकर्षित करने और उनसे जुड़ने की अलग रणनीति तैयार करनी चाहिए. सरकार का फोकस एक ओर किसानों तक औपचारिक ऋण की पहुंच बढ़ाने पर है, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर भी है.
मंगलवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 भी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को निवेशकों की नजर बाजार की आगे की चाल पर रहेगी. मंगलवार को सेंसेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में लगातार छठे दिन कमजोरी देखने को मिली. ऐसे में आज बाजार खुलने पर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल और रुपये की स्थिति पर निवेशकों की खास नजर रहेगी. साथ ही RailTel, Paytm, BPCL, Exide Industries और PC Jeweller समेत कई कंपनियों के अहम अपडेट शेयरों में हलचल ला सकते हैं.
कल बाजार का क्या रहा हाल?
मंगलवार के कारोबारी सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स में यह लगातार तीसरे दिन गिरावट रही, जबकि निफ्टी लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रहा. मंगलवार को रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.68 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.6025 पर बंद हुआ था.
इन शेयरों ने बढ़ाया बाजार पर दबाव
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए. एशियन पेंट्स में सबसे ज्यादा 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो और आईटीसी जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर एक्सिस बैंक, पावरग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.
सेक्टोरल मोर्चे पर आईटी और रियल्टी पर दबाव
मंगलवार को निफ्टी आईटी, रियल्टी और पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली. वहीं, निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 0.43 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप लगभग सपाट बंद हुआ. अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि लगातार बिकवाली के बाद बाजार में रिकवरी आती है या पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बनाए रखती हैं.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज के कारोबार में RailTel, Paytm, Exide Industries, BPCL, Hindustan Zinc, HCC, PC Jeweller, Eicher Motors और ONGC समेत कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी. RailTel को EPFO से 166.8 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर मिला है, जबकि Paytm की पैरेंट कंपनी One 97 Communications में करीब 2,948.94 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील हुई है. Exide Industries ने अपनी सब्सिडियरी Exide Energy Solutions में 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है और BPCL ने 5,000 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने को मंजूरी दी है. Hindustan Zinc ने रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाने की जानकारी दी है, वहीं HCC को 800 करोड़ रुपये तक पूंजी जुटाने की मंजूरी मिली है. PC Jeweller ने एक और कंसोर्टियम बैंक का पूरा कर्ज चुकाया है. इसके अलावा Royal Enfield के नए Classic 350 Gorkha Edition लॉन्च के चलते Eicher Motors और असम में नई गैस सुविधाएं शुरू करने के कारण ONGC के शेयर भी फोकस में रह सकते हैं.
बाजार के लिए क्या रहेंगे अहम संकेत?
आज के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी. मंगलवार की गिरावट के बाद बाजार में शॉर्ट-कवरिंग या निचले स्तरों पर खरीदारी से कुछ रिकवरी भी देखने को मिल सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)