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ASCI ने बदले नियम, अब मीडिया कंपनियों के लिए सोशल हैंडल पर भुगतान किए गए पोस्ट पर स्पष्ट लेबलिंग जरूरी

भारत के विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने डिजिटल मीडिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अपने स्वयं-नियमन कोड में अहम संशोधन किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत के विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने अपने स्वयं-नियमन कोड में एक नया प्रावधान जोड़ा है, जिसके तहत मीडिया कंपनियों को अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर भुगतान किए गए या प्रायोजित कंटेंट को स्पष्ट रूप से चिन्हित करना अनिवार्य होगा. इस कदम का उद्देश्य विज्ञापनों या प्रचार सामग्री को सम्पादकीय कंटेंट के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत होने से रोकना है, जो भारत के तेजी से बदलते डिजिटल इकोसिस्टम में एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है.

नए क्लॉज 1.8 के तहत स्पष्ट पहचान जरूरी

नए क्लॉज 1.8 के तहत, जो ‘सत्य और ईमानदार प्रतिनिधित्व’ (Chapter 1) का हिस्सा है, किसी भी मीडिया कंपनी द्वारा किए गए भुगतान या प्रायोजित पोस्ट की शुरुआत में स्पष्ट रूप से एक डिस्क्लोजर होना आवश्यक होगा, ताकि दर्शकों को पहले ही पता चल जाए कि यह सामग्री प्रचारात्मक है. स्वीकार्य लेबल में “विज्ञापन,” “साझेदारी,” “एड,” “फ्री गिफ्ट,” “प्रायोजित,” “प्लेटफॉर्म डिस्क्लोजर टैग्स” और “कोलैबोरेशन” शामिल हैं. पत्रकारों के आचार संहिता के नियम भी अखबारों को विज्ञापन और कंटेंट के बीच स्पष्ट अंतर दिखाने के लिए कहते हैं.

उपभोक्ता शिकायतों के बाद बदलाव

यह बदलाव उपभोक्ता शिकायतों और भ्रामक या अप्रकाशित प्रचार सामग्री के बढ़ते मामलों के बाद आया है, जहां संपादकीय विश्वसनीयता उच्च होती है. डिजिटल मीडिया के प्राथमिक समाचार और सूचना स्रोत बनने के कारण, ASCI ने कहा है कि पारदर्शिता दर्शकों और मीडिया ब्रांड दोनों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है.

ASCI की CEO मनीषा कपूर का बयान

ASCI की CEO और सचिव जनरल मनीषा कपूर ने कहा, “प्रायोजित कंटेंट को लेबल करना कई कारणों से महत्वपूर्ण है. यह दर्शकों के साथ भरोसा और पारदर्शिता बनाता है, जो यह जानना पसंद करते हैं कि वे किसी उत्पाद या सेवा की सिफारिश व्यक्तिगत या भुगतान के आधार पर हो रही है. दूसरा, यह कानूनों और दिशानिर्देशों का पालन करने में मदद करता है, जो किसी भी सामग्री संबंध या ब्रांड के साथ संबंध को प्रकट करने की आवश्यकता हो सकती है. अंत में, यह नियामकों से संभावित दंड, जुर्माना या कानूनी कार्रवाई से बचाता है, जो आपको भ्रामक या अनुचित मार्केटिंग प्रथाओं का दोषी ठहरा सकते हैं. ASCI ऐसे कंटेंट पर कड़ी नजर रखता है ताकि ब्रांड के प्रभाव से भ्रामक सामग्री को रोका जा सके.”

मीडिया की जिम्मेदारी और उपभोक्ता अधिकार

उन्होंने आगे कहा, “कई मीडिया आउटलेट नियमित रूप से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर संपादकीय कंटेंट पोस्ट करते हैं. लेकिन हम देखते हैं कि बिना या कम दिखाई देने वाले डिस्क्लोजर के साथ विज्ञापन ऐसी पोस्ट पर आ रहे हैं. मीडिया समाचार और फीचर्स की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि प्रायोजित या प्रचारित कंटेंट को स्पष्ट रूप से पहचान योग्य बनाया जाए. इससे उपभोक्ताओं को उनकी असली प्रकृति के बारे में भ्रमित होने से बचाया जा सकेगा. उपभोक्ताओं का अधिकार है कि वे शुरू से ही जान सकें कि वे प्रायोजित कंटेंट या संपादकीय सामग्री से निपट रहे हैं.”


 


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