गौतम अडानी के लिए जहां 4 जून किसी सदमे की तरह रहा था, वहीं 5 जून को उन्होंने जमकर कमाई की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
चार जून को जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आए, तो नई सरकार को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं था. NDA को बहुमत जरूर मिला था, लेकिन JDU चीफ नीतीश कुमार की पलटने की आदत ने कई आशंकाओं को भी जन्म दिया. इस वजह से शेयर बाजार धड़ाम से नीचे आ गया. अडानी समूह की कंपनियों को भी खासा नुकसान उठाना पड़ा. समूह की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयर आसमान से सीधे जमीं पर आ गिरे. गौतम अडानी की दौलत का पहाड़ भी दरक गया और उन्होंने एक दिन में 24.9 अरब डॉलर गंवा डाले. लेकिन जैसे ही तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल (यूनाइटेड) के NDA में डटे रहने की खबर पक्की हुई, अडानी की दौलत भी एक झटके में बढ़ गई.
कुछ हद तक हुई भरपाई
मोदी की ताजपोशी की सभी संभावनाओं के बनने से शेयर बाजार को बूस्ट मिला. अडानी की कंपनियों के शेयर फिर आसमान की ओर बढ़ चले और उनकी दौलत का ग्राफ भी फिर से खड़ा हो गया. भले ही अडानी 24.9 अरब डॉलर के नुकसान की पूरी भरपाई न कर पाए हों, लेकिन बुधवार को 5.21 अरब डॉलर कमाकर वह 100 डॉलर क्लब में फिर से शामिल हो गए हैं. इसके साथ ही दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में वह एक पायदान ऊपर चढ़ गए हैं. वह 15वें नंबर से 14वें स्थान पर पहुंच गए हैं. बता दें कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ये आरोप लगाते रहे हैं कि मोदी सरकार की नीतियां गौतम अडानी को फायदा पहुंचाने पर केन्द्रित हैं.
3 जून को थे टॉप गेनर
एग्जिट पोल्स के बाद 3 जून को बाजार में ज़बरदस्त तेजी देखने को मिली थी, जिसके चलते अडानी सोमवार को दुनिया के अरबपतियों में टॉप गेनर बन गये थे. लेकिन मंगलवार 4 जून को जब लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आए, तो वह टॉप लूजर बन गए और एक ही दिन में 24.9 अरब डॉलर गंवाकर 100 अरब डॉलर के क्लब से बाहर हो गए. हालांकि, 5 जून यानी कल उन्होंने अपने इस नुकसान की कुछ भरपाई कर ली है. वह 5 जून को सबसे ज्यादा कमाई करने वाले अरबपतियों में चौथे स्थान पर रहे.
अंबानी की अमीरी भी बढ़ी
ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में गौतम अडानी 103 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ अब 14वें स्थान पर पहुंच गए हैं. जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी 11वें स्थान पर हैं. 5 जून को उन्होंने 2.20 अरब डॉलर कमाए और उनकी कुल संपत्ति बढ़कर 109 अरब डॉलर हो गई. दुनिया के अमीरों की लिस्ट में पहले स्थान पर फ़्रांस के कारोबारी बर्नार्ड अर्नाल्ट हैं. इनकी कुल संपत्ति 212 अरब डॉलर है. दूसरे नंबर पर Amazon के फाउंडर जेफ बेजोस हैं, उनके पास 204 अरब डॉलर की दौलत है. जबकि तीसरे स्थान पर टेस्ला के मालिक एलन मस्क 201 अरब डॉलर के साथ हैं.
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 19 से 21 सितंबर के बीच बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध नकदी अधिशेष करीब ₹6 लाख करोड़ रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी निकालने का असर अब दिखाई देने लगा है. बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी का अधिशेष घटकर करीब ₹6 लाख करोड़ रह गया है. इसके साथ ही बैंकों के बीच एक-दूसरे को दिए जाने वाले overnight loans की ब्याज दर भी बढ़कर 5.24 फीसदी हो गई है, जो RBI की रेपो रेट के करीब है. बॉन्ड बिक्री के साथ GST भुगतान के लिए हुई नकद निकासी ने भी सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम किया है.
सितंबर की शुरुआत में ₹11.16 लाख करोड़ था नकदी अधिशेष
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 19 से 21 सितंबर के बीच बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध नकदी अधिशेष करीब ₹6 लाख करोड़ रहा. सितंबर के पहले सप्ताह में यह बढ़कर ₹11.16 लाख करोड़ के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. यानी कुछ ही हफ्तों में बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी में काफी कमी आई है.
RBI ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए खुले बाजार परिचालन (OMO) के तहत सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है. इसकी पहली नीलामी शुक्रवार को हुई थी. सोमवार को हुई दूसरी OMO नीलामी में भी निवेशकों की मजबूत मांग देखने को मिली. ₹25,000 करोड़ के बॉन्ड बेचने के लिए ₹84,942 करोड़ की बोलियां मिलीं.
कॉल रेट बढ़कर 5.24 फीसदी
बैंकिंग सिस्टम में नकदी कम होने का असर overnight call rate पर भी पड़ा है. यह दर शुक्रवार के 4.92 फीसदी से बढ़कर सोमवार को 5.24 फीसदी पर पहुंच गई. यह RBI की मौजूदा रेपो रेट के लगभग बराबर है. एक प्राथमिक डीलरशिप के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नकदी की स्थिति पर OMO और GST भुगतान के लिए हुई नकद निकासी, दोनों का असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि इन दोनों वजहों से कॉल रेट रेपो रेट के करीब पहुंच गई है.
सितंबर में ₹1 लाख करोड़ के बॉन्ड बेचने की योजना
RBI ने सितंबर में कुल ₹1 लाख करोड़ के OMO के तहत सरकारी बॉन्ड बेचने की घोषणा की है. इसका मकसद बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त और अपेक्षाकृत लंबी अवधि की नकदी को कम करना है. यह अतिरिक्त नकदी मुख्य रूप से डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत विदेशी निवेश के बड़े प्रवाह से बनी है. RBI ने अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए लंबी अवधि के वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) जैसे दूसरे उपाय भी किए हैं.
आगे और घट सकती है बैंकिंग सिस्टम की नकदी
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में बैंकिंग सिस्टम की नकदी स्थिति में और बदलाव हो सकता है. महीने के अंत में सरकारी और अन्य भुगतान की स्थिति बदलने के साथ सिस्टम में नकदी फिर बढ़ या घट सकती है. इसके अलावा RBI की ओर से आगे भी OMO के तहत बॉन्ड बिक्री जारी रहने की संभावना है.
बैंकों के ट्रेजरी अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले महीनों में करीब ₹1 लाख करोड़ की एक और OMO बिक्री भी नकदी अधिशेष पर असर डाल सकती है. वहीं, अर्थव्यवस्था में चलन में मौजूद नकदी बढ़ने और बैंक जमा बढ़ने के साथ बैंकों की नकद आरक्षित अनुपात (CRR) से जुड़ी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं. इससे सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी और कम हो सकती है.
10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर भी नजर
IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता के मुताबिक, फिलहाल करीब ₹13 लाख करोड़ का दीर्घकालिक नकदी अधिशेष है, जिसे पूरी तरह सिस्टम से निकालने में वित्त वर्ष 2028 की दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है.
बाजार प्रतिभागियों के मुताबिक, आगे चलकर 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7 फीसदी से बढ़कर 7.25 फीसदी तक जा सकती है. हालांकि, सोमवार को 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 2 आधार अंक घटकर 7.05 फीसदी पर बंद हुई.
ONGC ने बताया कि महानदी बेसिन में ‘समुद्र मंथन’ अभियान के तहत खोदा गया यह उसका पहला कुआं है. MN-DW18-1-H-D नाम के इस कुएं को 1,623 मीटर की लक्षित गहराई तक खोदा गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) को ओडिशा तट के पास गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस की खोज में सफलता मिली है. कंपनी ने ‘समुद्र मंथन’ डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन अभियान के तहत कोणार्क से करीब 43 किलोमीटर दूर महानदी अपतटीय बेसिन में खोदे गए पहले कुएं में 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई पर गैस की खोज की है. ONGC के अनुसार, कुएं से पिछले तीन दिनों से गैस का प्रवाह बना हुआ है और दबाव भी उत्साहजनक है. हालांकि, इस खोज को व्यावसायिक रूप से विकसित करने से पहले इसका आगे मूल्यांकन किया जाएगा.
1,623 मीटर की गहराई तक खोदा गया कुआं
ONGC ने बताया कि महानदी बेसिन में ‘समुद्र मंथन’ अभियान के तहत खोदा गया यह उसका पहला कुआं है. MN-DW18-1-H-D नाम के इस कुएं को 1,623 मीटर की लक्षित गहराई तक खोदा गया था. 18 सितंबर को कंपनी को 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई के बीच प्राकृतिक गैस मिली.
कंपनी के अनुसार, खोज के बाद से कुएं में गैस का प्रवाह जारी है और इसका दबाव एवं फ्लो उत्साहजनक बना हुआ है. हालांकि, खोज की वास्तविक क्षमता और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन आगे के परीक्षण और मूल्यांकन के बाद किया जाएगा.
#ONGC strikes gas in the deep waters of Mahanadi Basin.
— Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) (@ONGC_) September 21, 2026
MDW-28, the maiden well of ONGC’s current deepwater campaign in the Mahanadi Basin is flowing gas with encouraging rates and sustained reservoir pressure.
The campaign was launched on 25 July 2026 by Hon'ble Minister of… pic.twitter.com/whAV8TubIK
जल्द उत्पादन शुरू होने की संभावना
ONGC के अनुसार, खोज स्थल ओडिशा तट से अपेक्षाकृत कम दूरी पर है. ऐसे में अगर यह खोज व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित होती है तो इसके विकास और गैस को बाजार तक पहुंचाने में मौजूदा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 के तहत साझा बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल से गहरे समुद्र में मिले संसाधनों को उत्पादन में लाने में मदद मिल सकती है.
यह खोज भारत के घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में भी अहम हो सकती है, हालांकि इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन खोज के आकार, उत्पादन क्षमता और व्यावसायिक व्यवहार्यता स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा.
शुक्रवार को सेंसेक्स 19.63 अंक की गिरावट के साथ 74,294.96 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23,346.40 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 फीसदी चढ़कर 74,858.99 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 फीसदी की तेजी के साथ 23,414.30 पर बंद हुआ. मंगलवार को भी बाजार की शुरुआत मजबूत रहने के संकेत मिल रहे हैं. शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 23,500 के पार पहुंच गया है. वहीं, ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर है और अमेरिकी बाजारों में भी सोमवार को तेजी रही. इन संकेतों के बीच आज Hindustan Copper, Waaree Energies, Pine Labs और Lenskart Solutions समेत कई शेयर कॉरपोरेट अपडेट्स के कारण फोकस में रह सकते हैं.
सोमवार को सेंसेक्स के 24 शेयरों में तेजी
सोमवार को सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 6 शेयरों में गिरावट रही. UltraTech Cement 4.11 फीसदी की तेजी के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा. HCL Tech 3.42 फीसदी, Eternal 2.59 फीसदी, Titan 2.49 फीसदी और ITC 1.93 फीसदी चढ़े. वहीं, Bharti Airtel 1.93 फीसदी की गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर रहा. Power Grid में 1.15 फीसदी, Infosys में 0.97 फीसदी, Adani Ports में 0.72 फीसदी और Tata Steel में 0.62 फीसदी की गिरावट रही.
निफ्टी में 30 शेयर चढ़े
निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 बढ़त और 20 गिरावट के साथ बंद हुए. Eternal 2.77 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. HCL Tech 2.54 फीसदी, ITC 1.79 फीसदी, Sun Pharma 1.72 फीसदी और Reliance Industries 1.71 फीसदी चढ़े. गिरावट वाले शेयरों में Bharti Airtel 3.33 फीसदी टूटकर सबसे आगे रहा. Adani Ports 2.02 फीसदी, Bajaj Finance 1.83 फीसदी, Power Grid 1.55 फीसदी और Adani Enterprises 1.49 फीसदी नीचे बंद हुए.
आज बाजार के लिए क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार के कारोबार से पहले GIFT Nifty 23,500 के पार कारोबार कर रहा है. इससे घरेलू बाजार में मजबूत शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, बाजार खुलने के बाद दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू कारोबार के आधार पर बदल सकती है.
ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. पिछले पांच दिनों में इसकी कीमत करीब 8 फीसदी घट चुकी है. दूसरी ओर, AI शेयरों में तेजी और क्रूड में नरमी के बीच अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूत रहे. Nasdaq करीब 600 अंक चढ़ा, जबकि S&P 500 और Dow Jones में भी करीब आधे से एक फीसदी तक की तेजी रही.
इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज Hindustan Copper ने अगले 5-6 वर्षों में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक के कैपेक्स की योजना के चलते फोकस में है. Waaree Energies को एक प्रमुख सोलर डेवलपर से 2 GW सोलर मॉड्यूल सप्लाई का ऑर्डर मिला है. Pine Labs में Mastercard Asia/Pacific करीब 4.3 फीसदी हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेच सकती है. Lenskart Solutions में Platinum Jasmine A 2018 Trust ने 3.5 करोड़ शेयर यानी करीब 2.01 फीसदी हिस्सेदारी 2,390.57 करोड़ रुपये में बेची है.
इसके अलावा, Patanjali Foods के एक Sunrich Sunflower Oil बैच की बिक्री पर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई हुई है. Edelweiss Financial Services 300 करोड़ रुपये तक के NCD जारी कर फंड जुटाएगी. Canara Bank को Basel III Additional Tier-I Bonds की NSE डेट लिस्टिंग की मंजूरी मिली है. Suryoday Small Finance Bank के बोर्ड ने 400 करोड़ रुपये तक के NCD इश्यू को मंजूरी दी है, जबकि Share India Securities 200 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए कन्वर्टिबल वारंट जारी करेगी.
Lloyds Metals 1,550 करोड़ रुपये तक के NCD जारी करने के साथ क्षमता विस्तार पर 140 करोड़ रुपये निवेश करेगी. वहीं, GRSE के बोर्ड ने रायचक में ग्रीनफील्ड शिपयार्ड के लिए 2,896 करोड़ रुपये के कैपिटल बजट को मंजूरी दी है. Reliable Data Services भी 200 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने की तैयारी में है.
ब्लॉक डील के बाद लेंसकार्ट के शेयरों में दबाव देखने को मिला और BSE पर शेयर करीब 3 फीसदी तक गिरकर ₹683.30 के निचले स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
लेंसकार्ट (Lenskart Solutions) के शेयरों में सोमवार को बड़ी ब्लॉक डील हुई, जिसमें कंपनी के 3.6 करोड़ शेयरों का कारोबार ₹688 प्रति शेयर के भाव पर हुआ. यह सौदा करीब ₹2,468 करोड़ का है और कंपनी की कुल 2.07 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है. ब्लॉक डील के बाद लेंसकार्ट के शेयरों में दबाव देखने को मिला और BSE पर शेयर करीब 3 फीसदी तक गिरकर ₹683.30 के निचले स्तर पर पहुंच गया.
3.6 करोड़ शेयरों का हुआ कारोबार
ब्लॉक डील में लेंसकार्ट के 3.6 करोड़ शेयरों का लेनदेन हुआ है. हालांकि, शेयर बेचने वाले और खरीदने वाले निवेशकों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Platinum Jasmine A 2018 Trust कंपनी में 1.7 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकता है. Platinum Jasmine, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) से जुड़ा एक इनवेस्टमेंट व्हीकल है. ब्लॉक डील के तहत बेचे गए शेयरों पर 90 दिनों का लॉक-अप पीरियड लागू होगा. यानी इस अवधि के दौरान इन शेयरों को आगे नहीं बेचा जा सकेगा.
प्रमोटर्स के पास 17.53% हिस्सेदारी
जून 2026 तिमाही के अंत तक लेंसकार्ट में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 17.53 फीसदी थी. कंपनी ने 10 नवंबर 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी. ब्लॉक डील के बाद सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई. BSE पर शेयर ₹683.30 के निचले स्तर तक गया. इसके साथ कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.19 लाख करोड़ रह गया. हालांकि, हालिया गिरावट के बावजूद लेंसकार्ट के शेयर ने इस साल अब तक करीब 60 फीसदी की बढ़त दर्ज की है. पिछले तीन महीनों में शेयर करीब 35 फीसदी चढ़ा है.
जून और अगस्त में भी SoftBank ने बेची थी हिस्सेदारी
लेंसकार्ट के प्रमुख निवेशकों में शामिल SoftBank Vision Fund II Lightbulb (Cayman) Limited ने इस साल अगस्त में भी कंपनी की हिस्सेदारी बेची थी. अगस्त में ब्लॉक डील के जरिए 4.5 करोड़ शेयर यानी करीब 2.58 फीसदी हिस्सेदारी ₹2,887.87 करोड़ में बेची गई थी. इस सौदे में Societe Generale ODI, Goldman Sachs, Motilal Oswal Mutual Fund, Vanguard Group, Morgan Stanley, SBI Mutual Fund, Nippon India और HDFC Mutual Fund समेत कई घरेलू और विदेशी निवेशकों ने शेयर खरीदे थे.
इससे पहले जून में भी SoftBank समूह ने SVF II Lightbulb (Cayman) के जरिए लेंसकार्ट में 3.25 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी. उस समय 5.65 करोड़ शेयरों का सौदा करीब ₹2,873.30 करोड़ में हुआ था.
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर को दशहरा के दिन प्रभावी होगा. समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच उपलब्ध कराएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो जाएगा. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. इस समझौते के लागू होने के बाद न्यूजीलैंड को होने वाले भारत के 100 फीसदी निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी. दोनों देशों ने वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 27 अप्रैल को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
दशहरा के दिन लागू होगा FTA
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर को दशहरा के दिन प्रभावी होगा. समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच उपलब्ध कराएगा. फिलहाल न्यूजीलैंड सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कलपुर्जों समेत कई प्रमुख भारतीय उत्पादों पर अधिकतम 10 फीसदी तक आयात शुल्क लगाता है. FTA लागू होने के बाद इन उत्पादों के निर्यातकों को शुल्क में राहत मिलेगी.
न्यूजीलैंड भारत में करेगा 20 अरब डॉलर का निवेश
मुक्त व्यापार समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों के दौरान 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ-साथ निवेश संबंधों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
भारत और न्यूजीलैंड ने इस FTA पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर किए थे. समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ाना तथा निवेश के लिए बेहतर अवसर तैयार करना है.
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, हैदराबाद का नया डेटासेंटर रीजन भारत में कंपनी की 20.5 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का अहम हिस्सा है. अडानी ग्रुप, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसी कंपनियां इस नए रीजन के लिए साइन अप कर चुकी हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में अपने नए इंडिया साउथ सेंट्रल डेटासेंटर रीजन को लाइव कर दिया है. कंपनी के मुताबिक, यह भारत में उसका चौथा क्लाउड रीजन है, जिसे एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स के लिए तैयार किया गया है. तीन-जोन आर्किटेक्चर वाले इस रीजन में समय के साथ एज़्योर और एआई सर्विसेज की क्षमता बढ़ाई जाएगी. माइक्रोसॉफ्ट इसे भारत के साथ-साथ एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्ट्रैटेजिक हब के रूप में विकसित करना चाहता है.
भारत में माइक्रोसॉफ्ट का 20.5 अरब डॉलर का निवेश
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, हैदराबाद का नया डेटासेंटर रीजन भारत में कंपनी की 20.5 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का अहम हिस्सा है. अडानी ग्रुप, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसी कंपनियां इस नए रीजन के लिए साइन अप कर चुकी हैं.
कंपनी ने कहा कि भारत में उसके डेटासेंटर रीजन अब एआई-रेडी हैं. इनमें एआई-कैपेबल हार्डवेयर, हाई-एफिशिएंसी कूलिंग सिस्टम और एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स को चलाने के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म फाउंडेशन शामिल हैं.
तीन-जोन आर्किटेक्चर से बढ़ेगी क्षमता
इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन को रेजिलिएंट थ्री-जोन आर्किटेक्चर के साथ तैयार किया गया है. कंपनी के मुताबिक, इसे भविष्य में क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें फिलहाल एज़्योर सर्विसेज का व्यापक पोर्टफोलियो उपलब्ध है और आने वाले महीनों में अतिरिक्त एज़्योर और एआई सर्विसेज जोड़ी जाएंगी.
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, सपोर्टेड सर्विसेज के उपलब्ध होने के साथ भारतीय संगठन अपनी पात्र संवेदनशील वर्कलोड्स को स्थानीय स्तर पर ऐसे कंट्रोल्स के साथ डिप्लॉय कर सकेंगे, जो सुरक्षा, कंप्लायंस और डेटा सॉवरेन्टी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे.
डेटा प्रोटेक्शन और सॉवरेन्टी पर फोकस
कंपनी ने कहा कि उसके भारत स्थित क्लाउड रीजन MeitY की गाइडलाइंस के अनुरूप क्षमताएं उपलब्ध कराते हैं. इनमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) फ्रेमवर्क के साथ-साथ RBI और CERT-In जैसी संस्थाओं की सेक्टर-स्पेसिफिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करने वाली क्षमताएं शामिल हैं.
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, अलग-अलग एआई और क्लाउड वर्कलोड्स के लिए डेटा लोकेशन, एन्क्रिप्शन, ऑपरेशनल एक्सेस और गवर्नेंस के अलग-अलग स्तर के कंट्रोल की जरूरत हो सकती है. इंडिया साउथ सेंट्रल में सपोर्टेड सर्विसेज के विस्तार के साथ Azure Confidential Computing, Customer Lockbox और Azure Key Vault जैसी क्षमताएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
कूलिंग में पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन में हाई-एफिशिएंसी मैकेनिकल कूलिंग का इस्तेमाल किया गया है और कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य रहता है. कंपनी ने इसे अपने 2030 तक कार्बन नेगेटिव, वाटर पॉजिटिव और जीरो वेस्ट बनने के वैश्विक लक्ष्यों से जोड़ा है.
हैदराबाद में कंपनी स्थानीय साझेदारों के साथ ग्राउंडवॉटर रिचार्ज, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और वाटरशेड रेजिलिएंस पर भी काम कर रही है. कंपनी के मुताबिक, एलिकट्टा ग्राउंडवॉटर रिचार्ज प्रोग्राम ने जून 2026 तक करीब 50 लाख लीटर की रिचार्ज क्षमता जोड़ी है.
1 करोड़ से ज्यादा भारतीयों को AI स्किल्स
माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में एआई स्किलिंग को लेकर भी नया आंकड़ा साझा किया है. कंपनी के मुताबिक, 2030 तक 2 करोड़ लोगों को एआई स्किल्स देने की प्रतिबद्धता के तहत अब तक 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को एआई स्किल्स प्रदान की जा चुकी हैं. कंपनी के अनुसार, करीब 25 फीसदी लर्नर्स फाउंडेशनल एआई कोर्स से आगे बढ़कर अतिरिक्त लर्निंग पाथवे के लिए क्रेडेंशियल हासिल कर चुके हैं.
इसके अलावा, माइक्रोसॉफ्ट का डेटा सेंटर अकैडमी प्रोग्राम तेलंगाना सरकार और यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर चलाया जा रहा है. इसके तहत 600 घंटे का इंडस्ट्री-अलाइन्ड स्किलिंग प्रोग्राम है, जिसमें छात्रों को डेटासेंटर ऑपरेशंस और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है.
3,600 किलोमीटर की सबमरीन केबल परियोजना में भी भागीदारी
माइक्रोसॉफ्ट भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी निवेश कर रहा है. कंपनी इंडिया-साउथईस्ट एशिया (I-2SEA) सबमरीन केबल सिस्टम में कंसोर्टियम पार्टनर है.
करीब 3,600 किलोमीटर लंबा यह सबसी केबल कॉरिडोर भारत, मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ेगा. भारत में मछलीपट्टनम और साउथ चेन्नई में इसके दो लैंडिंग पॉइंट होंगे. कंपनी के मुताबिक, इस सिस्टम का लक्ष्य 2029 तक सर्विस के लिए तैयार होना है.
माइक्रोसॉफ्ट ने क्या कहा?
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एंड साउथ एशिया के प्रेसिडेंट पुनीत चंडोक ने कहा कि इंडिया साउथ सेंट्रल कंपनी का भारत में चौथा क्लाउड रीजन है, जिसे एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स के लिए तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि भारत में एआई के लिए केवल कंप्यूट क्षमता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित, सॉवरेन और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर भी जरूरी है.
वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इंडिया साउथ सेंट्रल डेटासेंटर रीजन भारत की एआई महत्वाकांक्षा के लिए जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करता है. उनके मुताबिक, ऐसे निवेश देश में एआई क्षमता बढ़ाने, इनोवेशन को गति देने और डेवलपर्स, कंपनियों तथा सार्वजनिक संस्थानों को एआई के इस्तेमाल में सक्षम बनाने में मदद कर सकते हैं.
भारत में बढ़ रहा डेटासेंटर निवेश
माइक्रोसॉफ्ट ने Boston Consulting Group (BCG) की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि भारत में डेटासेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से 2030 तक 140-200 अरब डॉलर का आर्थिक आउटपुट पैदा हो सकता है. कंपनी के मुताबिक, भारत में बढ़ती क्लाउड और एआई मांग के बीच डेटासेंटर, कनेक्टिविटी और एआई स्किलिंग में निवेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार में योगदान दे रहा है.
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2022 के बाद टाटा ग्रुप की 14 लिस्टेड कंपनियों में से 10 में LIC की हिस्सेदारी बढ़ी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप (Tata Group) की कई लिस्टेड कंपनियों में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बढ़ी है. प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2022 के बाद टाटा ग्रुप की 14 लिस्टेड कंपनियों में से 10 में LIC की हिस्सेदारी बढ़ी है. इसके साथ ही टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों में LIC के निवेश का कुल मूल्य ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है. यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब चंद्रशेखरन के दोबारा पांच साल के कार्यकाल को लेकर टाटा ग्रुप में मतभेद की खबरें हैं.
TCS में LIC की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
टाटा ग्रुप की कंपनियों में LIC की सबसे बड़ी हिस्सेदारी TCS में है. कंपनी में LIC की हिस्सेदारी करीब 5.22% है, जिसकी मौजूदा वैल्यू करीब ₹41,960 करोड़ बताई गई है. टाटा ग्रुप में LIC के कुल निवेश का करीब 40% हिस्सा अकेले TCS में है. इसके बाद टाटा स्टील में LIC की करीब 6.3% हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू ₹14,000 करोड़ से अधिक है.
Tata Elxsi में सबसे तेज बढ़ी हिस्सेदारी
जून 2022 के बाद LIC की हिस्सेदारी सबसे तेजी से Tata Elxsi में बढ़ी है. जून 2022 में कंपनी में LIC की हिस्सेदारी 1.04% थी, जो अब बढ़कर 6.59% हो गई है. हालांकि, इसी अवधि में Tata Elxsi के शेयर में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अप्रैल 2020 से अगस्त 2022 के बीच शेयर करीब 10 गुना से ज्यादा चढ़ा था. जून 2022 के बाद इसमें गिरावट भी आई. अगस्त 2022 में शेयर करीब ₹10,238 के स्तर तक पहुंचा था, जबकि 18 सितंबर को यह करीब ₹3,333 पर था.
Trent में जीरो से 3% से ज्यादा हिस्सेदारी
LIC ने टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी Trent में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. जून 2022 में कंपनी में LIC की हिस्सेदारी शून्य थी, जो अब बढ़कर 3% से कुछ अधिक हो गई है. Trent के शेयर में भी पिछले कुछ वर्षों में बड़ी तेजी और उसके बाद गिरावट देखने को मिली. शेयर अगस्त 2020 से अक्टूबर 2024 के बीच तेजी से बढ़ा और करीब ₹5,200 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा था. इसके बाद इसमें गिरावट आई और 18 सितंबर तक यह करीब ₹2,806 पर आ गया.
Tata Consumer और Tata Chemicals में भी बढ़ी हिस्सेदारी
Tata Consumer Products में LIC की हिस्सेदारी जून 2022 के मुकाबले 3 प्रतिशत अंक बढ़कर अब 8.23% हो गई है. वहीं, Tata Chemicals में LIC की हिस्सेदारी जून 2022 के 6.79% से बढ़कर 9.24% हो गई है. एक संस्थागत निवेशक के तौर पर LIC किसी कंपनी में अधिकतम 10% हिस्सेदारी रख सकती है. ऐसे में Tata Chemicals में LIC की हिस्सेदारी इस सीमा के काफी करीब पहुंच चुकी है.
इन टाटा कंपनियों में घटी LIC की हिस्सेदारी
हालांकि, सभी टाटा कंपनियों में LIC की हिस्सेदारी नहीं बढ़ी है. Tata Communications में LIC की हिस्सेदारी जून 2022 के 3.37% से घटकर 1% से भी कम रह गई है. Titan में भी LIC की हिस्सेदारी 1.09 प्रतिशत अंक घटकर 2.17% रह गई है. Tata Motors और Tata Motors Passenger Vehicles में भी हिस्सेदारी में बदलाव हुआ है. हालांकि, जून 2022 में ये दोनों कंपनियां एक ही इकाई थीं और 2025 में हुए डीमर्जर के बाद अलग हुईं.
चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट को लेकर मतभेद
LIC की टाटा ग्रुप की कंपनियों में बढ़ती हिस्सेदारी की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति को लेकर मतभेद सामने आए हैं. Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को पांच साल का एक और कार्यकाल देने का समर्थन किया है. हालांकि, Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया है. Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए Tata Trusts का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है. LIC की टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों में बढ़ती हिस्सेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब Tata Sons की संभावित लिस्टिंग और उसके कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं.
दुगराजपट्टनम में प्रस्तावित शिपयार्ड की सालाना क्षमता 1.2 मिलियन ग्रॉस टनेज होगी. कंपनी अगले 5 से 7 वर्षों में इस परियोजना पर करीब ₹15,000 करोड़ खर्च करेगी, जिससे करीब 45,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने आंध्र प्रदेश में अपने विस्तार की बड़ी योजना का ऐलान किया है. कंपनी ने नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क एपी (NSHIP AP) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया है. इसके तहत आंध्र प्रदेश के दुगराजपट्टनम में आधुनिक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित किया जाएगा.
5 से 7 साल में ₹15,000 करोड़ का निवेश
MoU के मुताबिक, मझगांव डॉक इस परियोजना पर अगले 5 से 7 वर्षों में करीब ₹15,000 करोड़ का निवेश करेगी. कंपनी के अनुसार, इस परियोजना से करीब 45,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
प्रस्तावित शिपयार्ड को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा और इसकी डिजाइन क्षमता सालाना 1.2 मिलियन ग्रॉस टनेज रखी गई है. भविष्य में बाजार की जरूरत के अनुसार इसकी क्षमता बढ़ाने की भी गुंजाइश होगी.
दुगराजपट्टनम में एंकर शिपयार्ड के रूप में काम करेगी MDL
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य 2047 तक भारत को दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है. इसके लिए राज्य अपनी लंबी तटरेखा, रणनीतिक स्थिति और औद्योगिक इकोसिस्टम का इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र के विकास को गति देने में करेगा. उन्होंने कहा कि दुगराजपट्टनम शिपबिल्डिंग क्लस्टर में मझगांव डॉक एंकर शिपयार्ड के रूप में काम करेगी.
घरेलू और विदेशी बाजार पर नजर
मझगांव डॉक के CMD कैप्टन जगमोहन के मुताबिक, दुगराजपट्टनम में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपयार्ड विकसित करने के लिए जरूरी पैमाना और समुद्री क्षमता मौजूद है. कंपनी का लक्ष्य ऐसी आधुनिक सुविधा तैयार करना है, जो घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को भी पूरा कर सके.
खबर के बाद शेयर में तेजी
शिपयार्ड परियोजना की खबर के बीच मझगांव डॉक के शेयर में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली. BSE पर शेयर करीब 1.5 फीसदी की बढ़त के साथ ₹2,250 के पार पहुंच गया. हालांकि, पिछले एक महीने में कंपनी के शेयर में करीब 13 फीसदी की गिरावट आई है. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में भी शेयर करीब 3 फीसदी कमजोर हुआ है. मझगांव डॉक के शेयर का 52-सप्ताह का उच्च स्तर ₹3,061 और निचला स्तर ₹2,057.40 है. कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण करीब ₹90,732 करोड़ है.
आईपीओ के शेयर ग्रे मार्केट में अपर प्राइस बैंड से करीब 48 रुपये ऊपर यानी लगभग 3 फीसदी के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं. इस हिसाब से अनुमानित लिस्टिंग कीमत करीब 1,833 रुपये बैठती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के 22,569 करोड़ रुपये के आईपीओ में निवेश के लिए आज यानी 21 सितंबर को आखिरी मौका है. इश्यू के तीसरे दिन सुबह 10:30 बजे तक इसे कुल 1.46 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका था. रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी अभी पूरी तरह नहीं भरी है, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की ओर से मजबूत मांग देखने को मिली है. वहीं, ग्रे मार्केट में करीब 3 फीसदी का प्रीमियम आईपीओ की संभावित लिस्टिंग को लेकर संकेत दे रहा है.
तीसरे दिन तक 1.46 गुना सब्सक्रिप्शन
NSE IPO के तहत कुल 8.86 करोड़ शेयर ऑफर किए गए हैं. तीसरे दिन सुबह 10:30 बजे तक इश्यू को 1.46 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका था. रिटेल निवेशकों के लिए 4.41 करोड़ शेयर रिजर्व रखे गए हैं, जिनमें से करीब 87 फीसदी के लिए बोलियां मिली हैं. नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.31 गुना और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का कोटा 1.83 गुना सब्सक्राइब हुआ है. कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 8 शेयर हैं. अपर प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट के लिए 14,280 रुपये लगाने होंगे.
GMP से क्या संकेत मिल रहे हैं?
आईपीओ के शेयर ग्रे मार्केट में अपर प्राइस बैंड से करीब 48 रुपये ऊपर यानी लगभग 3 फीसदी के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं. इस हिसाब से अनुमानित लिस्टिंग कीमत करीब 1,833 रुपये बैठती है. हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम आधिकारिक लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं देता और इसमें लिस्टिंग तक बदलाव हो सकता है. NSE के शेयर 24 सितंबर को BSE पर लिस्ट होने की उम्मीद है, जबकि शेयर अलॉटमेंट 22 सितंबर को होने की संभावना है.
पूरी तरह OFS है इश्यू
NSE का यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है. यानी आईपीओ से जुटाई गई रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को उनके शेयर बेचने से प्राप्त होगी. कई ब्रोकरेज फर्मों ने NSE IPO को लेकर सकारात्मक राय दी है और लंबी अवधि के नजरिए से सब्सक्रिप्शन की बात कही है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकरेज ने NSE के वैल्यूएशन की तुलना उसके प्रतिद्वंद्वी BSE से करते हुए इसे अपेक्षाकृत कम वैल्यूएशन पर उपलब्ध बताया है. NSE की कैश मार्केट में करीब 93 फीसदी हिस्सेदारी है. कंपनी के कारोबार की एक प्रमुख विशेषता इसका मजबूत मार्जिन और कर्ज-मुक्त स्थिति है.
कमाई और कारोबार से जुड़े जोखिम
निवेशकों के लिए कंपनी के कारोबार से जुड़े जोखिमों को समझना भी जरूरी है. वित्त वर्ष 2026 में NSE का रेवेन्यू 3.1 फीसदी घटकर 16,601 करोड़ रुपये रहा. इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा 12,188 करोड़ रुपये से घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया.
कंपनी की कमाई में ट्रांजैक्शन चार्ज की बड़ी हिस्सेदारी है. कुल आय का करीब 78.7 फीसदी हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से आता है और इसमें ऑप्शंस ट्रेडिंग का बड़ा योगदान है. ऐसे में शेयर बाजार के नियमों में बदलाव का NSE की आय पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, ऑप्शंस मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी में भी कुछ कमी दर्ज की गई है.
NSE IPO के प्रमुख आंकड़े
इश्यू साइज: 22,569 करोड़ रुपये
प्राइस बैंड: 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर
लॉट साइज: 8 शेयर
न्यूनतम निवेश: 14,280 रुपये
तीसरे दिन तक कुल सब्सक्रिप्शन: 1.46 गुना
रिटेल हिस्सा: 87 फीसदी सब्सक्राइब
NII हिस्सा: 2.31 गुना
QIB हिस्सा: 1.83 गुना
GMP: करीब 3 फीसदी
अलॉटमेंट की संभावित तारीख: 22 सितंबर
लिस्टिंग की संभावित तारीख: 24 सितंबर
हर कोई योग्य है, हर कोई नियमों का पालन करता है, तो आखिर समस्या क्या हो सकती है? बाजार की अखंडता इससे ज्यादा सुरक्षित कभी महसूस नहीं हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
एक बेहद व्यस्त रिटायरमेंट
जब MCX ने इस साल 28 मई को संतोष कुमार मोहंती को पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर के रूप में शामिल किया, तो उन्हें किसी कोने में नहीं बैठाया गया. वह सीधे ऑडिट कमेटी में चले गए, जो वित्तीय रिपोर्टिंग और वैधानिक अनुपालन की निगरानी करती है. वह एक्सचेंज की पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स कमेटी में भी हैं, जो सिर्फ PID सदस्यों वाली संस्था है और जिसका उद्देश्य बाजार की अखंडता और निवेशक संरक्षण की निगरानी करना है. इसके अलावा, वह एक्सचेंज की रिस्क मैनेजमेंट कमेटी, स्टैंडिंग कमेटी ऑन टेक्नोलॉजी, इन्वेस्टमेंट कमेटी और मेंबर कमेटी में भी हैं. पहले ही दिन से इमारत की सभी सबसे संवेदनशील जिम्मेदारियां.
याद कीजिए कि SEBI ने हाल में MCX से क्या कहा है.
मई 2025 में नियामक ने 63 Moons के साथ ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर अनुबंध पर खुलासे में कमी और गलत जानकारी देने के लिए एक्सचेंज पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, तीन तिमाहियों में 222 करोड़ रुपये का भुगतान, जबकि पिछले वर्ष का मुनाफा 118 करोड़ रुपये था, और इसका खुलासा देरी से किया गया था. इस आदेश में SEBI ने कई अन्य आरोपों को खारिज कर दिया और केवल खुलासा संबंधी उल्लंघन पाए. 2023 में SEBI ने MCX पर 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, जब पाया गया कि सात ब्रोकरों ने 50 ग्राहकों को सिक्किम के निवासी के रूप में कोड किया था, जबकि KYC रिकॉर्ड में ऐसा नहीं था. एक ग्राहक सिक्किम से जुड़े कारोबार का 95% हिस्सा था. SEBI ने पाया कि MCX इसे पकड़ने में विफल रहा था. इसके बाद ट्रेडिंग रुकने की घटनाएं, तकनीकी गड़बड़ियों के लिए वित्तीय हतोत्साहन और पिछले अक्टूबर में चार घंटे का आउटेज आया, जिसके कारण ट्रेडिंग को डिजास्टर रिकवरी साइट पर ले जाना पड़ा.
खुलासे की पर्याप्तता, कमेटी की प्रक्रिया, अनुपालन, ठीक वही विषय, जिनसे जुड़ी कमेटियों में अब श्री मोहंती बैठे हैं.
उनकी योग्यता बेजोड़ है, क्योंकि जून 2023 तक वह दूसरी तरफ बैठे थे. वह 2015 में फॉरवर्ड मार्केट्स कमीशन से SEBI आए थे, जहां विलय के बाद बनाए गए कमोडिटी डेरिवेटिव्स विभाग को चलाने की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद उन्होंने पांच साल तक होल टाइम मेंबर के रूप में बाजार नियमन, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और अंतरराष्ट्रीय मामलों का जिम्मा संभाला. वह फाइल, प्रारूप, अधिकारियों और SEBI के भीतर उस प्रक्रिया को जानते हैं, जब किसी जवाब को अपर्याप्त पाया जाता है. बोर्ड केवल नाम की पट्टिका के लिए भुगतान नहीं करते.
अब वह हिस्सा, जिसे दोनों संस्थानों में कोई स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखना चाहता.
उन्होंने वास्तव में SEBI की तरफ की मेज छोड़ी नहीं है. SEBI की अपनी वेबसाइट पर सेटलमेंट ऑर्डर और अपराधों के कंपाउंडिंग से जुड़ी हाई पावर्ड एडवाइजरी कमेटी की सूची है: जस्टिस (रिटायर्ड) जय नारायण पटेल इसके अध्यक्ष हैं, जबकि एन. वेंकटराम, एस.के. मोहंती और सरित जाफा सदस्य हैं. यह कमेटी उस प्रस्ताव की जांच करती है, जो कथित उल्लंघनकर्ता ने दिया है और SEBI के होल टाइम मेंबर्स को अपनी सिफारिश भेजती है. अंतिम अधिकार SEBI की निर्णय लेने वाली व्यवस्था के पास रहता है, जिसमें संबंधित प्रक्रिया में होल टाइम मेंबर्स का पैनल शामिल है. लेकिन सिफारिश का अपना महत्व होता है.
तो स्थिति पर विचार कीजिए.
एक तरफ वह कमेटी है जो SEBI के निर्णयकर्ताओं के लिए सेटलमेंट की शर्तों की जांच और सिफारिश करती है, और दूसरी तरफ वह एक्सचेंज की ऑडिट और अन्य कमेटियों में भी बैठते हैं, जिसकी निगरानी SEBI करता है. वह SEBI द्वारा विनियमित क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं के बोर्ड में भी हैं, जिनमें Acuite Ratings & Research, Computer Age Management Services, Bajaj Finserv Asset Management और SBI CDMDF Trustee शामिल हैं. इससे किसी विशेष मामले में हितों का टकराव स्थापित नहीं होता. हालांकि, यह संस्थागत ओवरलैप का सवाल जरूर पैदा करता है: वही पूर्व SEBI WTM सेटलमेंट मामलों पर नियामक को सलाह दे रहा है, जबकि उन संस्थाओं में गवर्नेंस की भूमिकाएं निभा रहा है, जो नियामक के व्यापक निगरानी दायरे में आती हैं.
इस टकराव के परिणाम काल्पनिक नहीं हैं. यह संरचनात्मक है और तीन दिशाओं में चलता है.
नीचे की ओर, एक एक्सचेंज अपने सदस्यों का प्रथम स्तर का नियामक होता है. PID कमेटी के जरिए, SEBI को सेटलमेंट मामलों पर सलाह देने वाला व्यक्ति ब्रोकरों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई तय करने में भी मदद करता है, इनमें से कुछ बाद में SEBI से सेटलमेंट की मांग कर सकते हैं. MCX एक मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्था है, जिसके नियामकीय कार्यों में अपने सदस्यों की निगरानी शामिल है. मोहंती अब इसकी पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स कमेटी में हैं, जबकि अलग से SEBI की सेटलमेंट एडवाइजरी कमेटी में भी सेवा दे रहे हैं.
ऊपर की ओर, MCX में कार्यकारी नियुक्तियों के लिए SEBI की मंजूरी जरूरी है; एक्सचेंज ने 27 मई को कार्यकारी निदेशकों के लिए मंजूरी की घोषणा की, उसी दिन SEBI ने उन्हें मंजूरी दी थी. वह उस कमेटी में बैठते हैं जो इन कार्यकारियों का चयन करती है और उस कमेटी में भी जो उस नियामक को सलाह देती है, जिसे इन नियुक्तियों को मंजूरी देनी होती है. मोहंती की नियुक्ति के लिए SEBI की मंजूरी 27 मई की थी; MCX की घोषणा में उनकी नियुक्ति 28 मई से दर्ज है. एक्सचेंज ने 27 मई को कार्यकारी निदेशक पदों पर नियुक्तियों के लिए SEBI की मंजूरी की भी घोषणा की थी.
क्षैतिज दिशा में, जब इनमें से किसी संस्था का मामला HPAC के सामने आता है, तो उन्हें खुद को उस मामले से अलग करना यानी रिक्यूज करना होगा. SEBI के सेटलमेंट नियमों में तीन सदस्यों का कोरम जरूरी है, जैसा कि नियामक ने 2017 में देखा था, जब NSE को-लोकेशन सहमति मामले में दो सदस्यों ने खुद को अलग कर लिया था और पैनल को फिर से गठित करना पड़ा था. पांच विनियमित जिम्मेदारियों वाले सदस्य के लिए रिक्यूजल एक ऐसी समस्या हो सकती है, जिसका समय आना बाकी है? नियम पहले से ही रिक्यूजल की व्यवस्था करते हैं. सवाल यह है कि जब सेटलमेंट कमेटी का कोई सदस्य ऐसी कई संस्थाओं में पद भी संभालता हो, जो SEBI के नियामकीय दायरे में आती हैं, तो ऐसे रिक्यूजल कितनी बार सामने आ सकते हैं.
वर्तमान नियम इस तरह की भूमिकाओं के संयोजन पर कोई व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाते दिखते हैं.
1992 के सेवा नियम किसी सेवानिवृत्त होल टाइम मेंबर को एक साल तक नौकरी करने से रोकते हैं, हालांकि केंद्र की मंजूरी से इसमें छूट दी जा सकती है. जून 2026 में अपनाई गई नई संहिता पूर्व WTMs को दो साल तक SEBI के समक्ष या उसके खिलाफ पेश होने से रोकती है, यह प्रावधान SEBI के समक्ष या उसके खिलाफ पेश होने को संबोधित करता है; पहली नजर में यह SEBI के नियामकीय दायरे में आने वाली संस्थाओं के बोर्ड में नियुक्तियों पर सामान्य दो साल का प्रतिबंध नहीं लगाता. संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने एक साल की अवधि को बढ़ाकर दो साल करने की मांग की है.
मोहंती इस मामले में अकेले नहीं हैं. जी. महालिंगम ने सेवानिवृत्ति के बाद SEBI की सेकेंडरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी के अध्यक्ष के रूप में वापसी की. SEBI के पूर्व होल टाइम मेंबर एम.एस. साहू 2022 में इसकी मार्केट डेटा एडवाइजरी कमेटी की अध्यक्षता करने के लिए लौटे. एस. रविंद्रन को इंटरमीडियरी एडवाइजरी कमेटी मिली, जो एक्सचेंजों पर सलाह देती है, जबकि वह NSE के बोर्ड में भी थे. अनंत बरुआ ने 2023 में एक लॉ फर्म में सलाहकार की भूमिका और IFSCA की फंड मैनेजमेंट कमेटी के लिए पद छोड़ा.
नियामक एक ऐसे बाजार को नियंत्रित करता है, जिसके बोर्डरूम में उसी ने लोगों को नियुक्त किया है. हर कोई योग्य है. हर कोई नियमों का पालन करता है. और जब अगला कारण बताओ नोटिस Exchange Square पहुंचता है, तो इसमें शामिल हर व्यक्ति पहले से ही एक-दूसरे को नाम से जानता होगा.
मुद्दा यह नहीं है कि ये पूर्व नियामक योग्य हैं या नहीं. वे स्पष्ट रूप से योग्य हो सकते हैं. न ही मुद्दा यह है कि किसी पूर्व SEBI अधिकारी को कभी भी किसी विनियमित संस्था के बोर्ड में सेवा देनी चाहिए या नहीं. नियम सार्वजनिक नियामकीय विशेषज्ञता और निजी क्षेत्र के गवर्नेंस के बीच काफी हद तक आवाजाही की अनुमति देते हैं. अधिक कठिन सवाल यह है कि जब वही पूर्व नियामक नियामकीय दायरे के दोनों तरफ बैठता है, SEBI को सेटलमेंट मामलों पर सलाह देते हुए उन संस्थाओं में गवर्नेंस की भूमिकाएं निभाते हुए, जो उसके नियामकीय दायरे में काम करती हैं, तब सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं या नहीं.
इस व्यवस्था पर रोक लगाने वाला कोई नियम हो सकता है या नहीं भी हो सकता है. लेकिन ठीक इसी वजह से इस सवाल को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)