महाकुंभ जाने वालों के लिए हवाई यात्रा हुई सस्ती, सरकार की दखल के बाद इस एयरलाइन ने घटाया किराया!

दुनियाभर से श्रद्धालु महाकुंभ के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं, जिसके चलते हवाई उड़ानों का किराया काफी महंगा हो गया था. बुधवार को नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइंस को उचित किराया तय करने के निर्देश दिए हैं.

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Thursday, 30 January, 2025
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देश विदेश के करोड़ों श्रद्धालु महाकुंभ मेले में शामिल होने के लिए प्रयागराज संगम क्षेत्र पहुंच रहे हैं. इसके चलते हवाई यात्रा की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है, जिससे हवाई उड़ानों के किराये में भी जबर्दस्त उछाल देखने को मिली है. ऐसी स्थिति में अब नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइंस कंपनियों से टिकट की कीमतों को तर्कसंगत बनाने के निर्देश दिए हैं. इस निर्देश के बाद देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (Indigo) ने प्रयागराज के लिए अपनी उड़ानों का किराया काफी कम कर दिया है. इसके पहले उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने प्रयागराज की उड़ानों का हवाई किराया ‘बहुत अधिक’ हो जाने की बात कही और विमानन नियामक डीजीसीए से  पत्र लिखकर इस दिशा में कदम उठाने की मांग की है. 

मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

प्रयागराज के संगम क्षेत्र में 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ मेले का हिस्सा बनने के लिए देश-विदेश के लाखों लोग पहुंच रहे हैं. इसकी वजह से हवाई यात्रा की मांग बहुत तेजी से बढ़ी जिससे किराये में भी जबर्दस्त उछाल आया है. ऐसी स्थिति में नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइंस से टिकट की कीमतों को तर्कसंगत बनाने के लिए कहा था. नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने बुधवार को सचिव वी वुलनाम, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के महानिदेशक फैज अहमद किदवई और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रयागराज की उड़ानों के संबंध में एयरलाइंस प्रतिनिधियों से मुलाकात की. मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि महाकुंभ महोत्सव के दौरान उचित किराया बनाए रखते हुए देश भर से प्रयागराज के लिए हवाई संपर्क की पर्याप्तता की समीक्षा की गई. उसने कहा कि श्रद्धालुओं को एक सहज और आरामदायक यात्रा अनुभव देने के लिए नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की गई हैं.

इतने प्रतिशत घटा किराया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंडिगो ने प्रयागराज की उड़ानों के लिए हवाई किराये में 30-50 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है. हालांकि एयरलाइन की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई. इंडिगो की वेबसाइट के अनुसार, 31 जनवरी के लिए टिकट की कीमत 21,200 रुपये से अधिक है और 12 फरवरी के लिए सबसे कम कीमत 9,000 रुपये है. इंडिगो लखनऊ, दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु और अहमदाबाद से प्रयागराज के लिए उड़ानें संचालित करती है. हालांकि एयर इंडिया, अकासा एयर और स्पाइसजेट की ओर से प्रयागराज की उड़ानों के किराये को लेकर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई. 

प्रयागराज की 26 शहरों से डायरेक्ट फ्लाइट
नागर विमानन मंत्रालय ने सोमवार को कहा था कि प्रयागराज के लिए हवाई किराया तर्कसंगत बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और बढ़ती यातायात मांग को पूरा करने के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ा दी गई है. फिलहाल देश के विभिन्न शहरों से प्रयागराज के लिए लगभग 80,000 मासिक सीटों के साथ 132 उड़ानें संचालित हो रही हैं. प्रयागराज 26 शहरों तक पहुंचने वाली सीधी और कनेक्टिंग उड़ानों के जरिये जुड़ा हुआ है.

 


मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का बड़ा कदम, तेल-गैस सेक्टर में नई रॉयल्टी व्यवस्था लागू

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्नेर मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन की बचत और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की अपील की है.

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Tuesday, 12 May, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस सेक्टर से जुड़ा बड़ा नीतिगत फैसला लिया है. सरकार ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और केसिंग हेड कंडेनसेट पर लागू रॉयल्टी दरों और उनकी गणना प्रणाली में बदलाव किया है. इस कदम का मकसद नियमों को सरल बनाना, निवेश को आकर्षित करना और घरेलू उत्पादन को मजबूत करना है.

क्या है सरकार का नया फैसला?

केंद्र सरकार ने तेल और गैस क्षेत्र में रॉयल्टी ढांचे को तर्कसंगत और पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है. अब कच्चे तेल और गैस उत्पादन पर लगने वाली रॉयल्टी की गणना पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट और एकरूप होगी. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम देश के अपस्ट्रीम तेल-गैस सेक्टर के लिए एक नए दौर की शुरुआत करेगा.

निवेश और उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस

सरकार का मानना है कि नई रॉयल्टी व्यवस्था से लंबे समय से चली आ रही नीतिगत जटिलताएं खत्म होंगी. अलग-अलग अनुबंधों और नियमों में मौजूद अंतर अब कम होंगे, जिससे कंपनियों को काम करने में आसानी होगी. इस बदलाव से घरेलू और विदेशी निवेशकों को अधिक स्थिर और अनुमानित नीति वातावरण मिलेगा, जिससे भारत में तेल और गैस की खोज और उत्पादन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है.

ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रॉयल्टी प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है. इसके तहत जटिल नियमों की जगह एक समान और प्रतिस्पर्धी ढांचा लागू किया जाएगा. इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा.

वैश्विक तनाव के बीच अहम फैसला

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन की बचत और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की अपील की है.

उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था पर जोर दिया है, ताकि ईंधन खपत को नियंत्रित किया जा सके.

क्या होंगे इसके मायने?

सरकार के इस कदम का सबसे बड़ा असर तेल और गैस उत्पादन कंपनियों पर देखने को मिलेगा. नई व्यवस्था से रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया सरल होगी और नीति संबंधी अनिश्चितता कम होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और घरेलू उत्पादन को नई गति मिल सकती है, जिससे आयात पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम हो सकती है.
 


बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्युचुअल फंड्स पर भरोसा कायम, अप्रैल में ₹38,440 करोड़ का निवेश फ्लो

अप्रैल में निवेशकों का सबसे ज्यादा रुझान फ्लेक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स की ओर देखने को मिला. इन तीनों कैटेगरी का कुल एक्टिव इक्विटी निवेश में करीब 61 फीसदी हिस्सा रहा.

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Tuesday, 12 May, 2026
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वैश्विक अनिश्चितताओं, बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता के बावजूद म्युचुअल फंड्स (MF) में निवेश का सिलसिला मजबूत बना हुआ है. अप्रैल 2026 में इक्विटी म्युचुअल फंड्स में ₹38,440 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. हालांकि यह मार्च के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा कम रहा, लेकिन लगातार ऊंचा निवेश यह दिखाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अब भी बाजार पर कायम है. खास बात यह रही कि स्मॉलकैप, मिडकैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बने रहे.

मार्च के रिकॉर्ड के करीब रहा निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में इक्विटी म्युचुअल फंड्स में ₹38,440 करोड़ का शुद्ध निवेश आया. मार्च में यह आंकड़ा ₹40,450 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था. हालांकि अप्रैल में कुल निवेश में करीब 16 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर ₹70,302 करोड़ रह गया, लेकिन रिडेम्प्शन यानी निकासी में 26 फीसदी की बड़ी कमी देखने को मिली. निकासी घटकर ₹31,862 करोड़ पर आ गई, जो पिछले आठ महीनों का सबसे निचला स्तर है.

बाजार की रिकवरी ने बढ़ाया भरोसा

अप्रैल के दौरान भारतीय शेयर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली. अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर चिंताएं कुछ कम होने के बाद बाजार ने मार्च में हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर ली. महीने के दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में करीब 7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जबकि व्यापक बाजार ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया. निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स करीब 17 फीसदी तक उछल गया. विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया.

स्मॉलकैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स बने पसंदीदा विकल्प

अप्रैल में निवेशकों का सबसे ज्यादा रुझान फ्लेक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स की ओर देखने को मिला. इन तीनों कैटेगरी का कुल एक्टिव इक्विटी निवेश में करीब 61 फीसदी हिस्सा रहा. फ्लेक्सीकैप फंड्स में लगातार दूसरे महीने ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में संयुक्त निवेश 9 फीसदी बढ़कर ₹13,437 करोड़ तक पहुंच गया. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी को ध्यान में रखकर छोटे और मिड साइज कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं.

SIP निवेश में आई हल्की नरमी

जहां इक्विटी फंड्स में निवेश मजबूत बना रहा, वहीं सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के मोर्चे पर हल्की कमजोरी देखने को मिली. अप्रैल में SIP निवेश 3 फीसदी घटकर ₹31,115 करोड़ रह गया. हालांकि AMFI का कहना है कि SIP खातों की कुल संख्या स्थिर बनी हुई है और यह गिरावट अस्थायी हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार मार्च में कुछ ट्रांजैक्शन छुट्टियों की वजह से शिफ्ट हो गए थे, जिसका असर अप्रैल के आंकड़ों पर पड़ा.

डेट और हाइब्रिड फंड्स में भी मजबूत निवेश

केवल इक्विटी ही नहीं, बल्कि अन्य श्रेणियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही. अप्रैल में डेट फंड्स में सबसे ज्यादा ₹2.5 लाख करोड़ का निवेश आया. वहीं हाइब्रिड और पैसिव फंड्स में भी करीब ₹20,000 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया. इसके चलते म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मासिक आधार पर करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली.

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम रहना भारतीय निवेशकों की परिपक्वता को दर्शाता है. स्मॉलकैप फंड्स में लगातार निवेश यह संकेत देता है कि निवेशकों को भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में अस्थिरता बनी भी रहती है, तब भी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए SIP और म्युचुअल फंड निवेश बेहतर विकल्प बने रह सकते हैं. लगातार मजबूत निवेश यह संकेत दे रहा है कि भारतीय निवेशक अब बाजार की छोटी अवधि की गिरावट से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे हैं और लंबी अवधि की रणनीति पर भरोसा जता रहे हैं.

(डिस्क्लेमर: म्युचुअल फंड्स शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


कल निवेशकों के डूबे ₹6 लाख करोड़, क्या आज संभलेगा बाजार? इन शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1300 अंक से ज्यादा टूट गया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 अंक टूटकर बंद हुआ.

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Tuesday, 12 May, 2026
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वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को हिला कर रख दिया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1300 अंक से ज्यादा टूट गया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया और निवेशकों के करीब ₹6 लाख करोड़ स्वाहा हो गए. रुपये ने भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया. अब सवाल यह है कि आज बाजार की चाल कैसी रह सकती है. पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों के बीच आज निवेशकों की नजर कई बड़े शेयरों और कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहने वाली है. वहीं, कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे आज बाजार में हलचल बढ़ा सकते हैं.

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 1,312.91 अंक यानी 1.70 फीसदी गिरकर 76,015.28 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 360.30 अंक यानी 1.49 फीसदी टूटकर 23,815.85 पर आ गया. बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल देखने को मिला. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 लाल निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा.

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

शेयर बाजार की कमजोरी के बीच भारतीय मुद्रा पर भी भारी दबाव देखने को मिला. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.88 फीसदी टूटकर 95.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया है.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में

केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी गिरावट का माहौल रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.05 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.13 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई. सेक्टर आधारित इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में रही, जो करीब 4 फीसदी टूट गया. इसके अलावा रियल्टी, पीएसयू बैंक और मीडिया सेक्टर के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने कुछ राहत दी.

क्यों आई गिरावट
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे पिछले कई हफ्तों से जारी संघर्ष के जल्द समाप्त होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई. इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछल गईं. ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी. यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है. फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कई बड़ी कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों का ध्यान खींच सकती हैं. कहीं बड़े ऑर्डर मिले हैं तो कहीं मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है, जबकि कई कंपनियां विस्तार और नई ग्रोथ रणनीतियों पर काम कर रही हैं. घरेलू एडटेक कंपनी Adda247 ने IPO की तैयारी के बीच 200 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की है, जो उसकी कुल वर्कफोर्स का करीब 20 फीसदी बताया जा रहा है. वहीं Bajaj Group अपने 100 साल पूरे कर रहा है और 14 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल हो चुका है. Afcons Infrastructure को यूरोप में 7,544 करोड़ रुपये का बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट मिला है, जबकि HFCL को करीब 184 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट ऑर्डर हासिल हुआ है. Munjal Auto Industries को Honda Motorcycle & Scooter India से नया सप्लाई ऑर्डर मिला है. दूसरी ओर Bharat Forge ने ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी Embraer के साथ लंबी अवधि की डील की है और अब वह महत्वपूर्ण लैंडिंग गियर फोर्जिंग कंपोनेंट्स की सप्लाई करेगी. Adani Ports में भी बड़ा नेतृत्व बदलाव हुआ है, जहां CEO Ports प्रनव चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह नीरज बंसल जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके अलावा आज बाजार बंद होने के बाद Dr Reddy’s Laboratories, Tata Power, Berger Paints, Dixon Technologies, Max Financial Services, Nazara Technologies, Pfizer, Torrent Power और V-Guard Industries समेत कई दिग्गज कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी, जिससे इन शेयरों में कारोबार के दौरान तेज हलचल देखने को मिल सकती है.

 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


रोजमर्रा की वस्तुओं को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, देश में जरूरी सामान की कमी नहीं होगी: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री ने मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट की. इस बैठक में वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर संभावित असर की समीक्षा की गई.

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Monday, 11 May, 2026
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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों पर असर की आशंका के बीच देशवासियों के लिए राहत भरी खबर आई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा है कि भारत में किसी भी आवश्यक वस्तु की कमी नहीं होगी और लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

IGoM बैठक के बाद सरकार का आश्वासन

रक्षा मंत्री ने मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट की. इस बैठक में वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर संभावित असर की समीक्षा की गई. राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पूरी सतर्कता और मजबूती के साथ काम कर रही है, ताकि देश में सप्लाई चेन पर कोई असर न पड़े.

सप्लाई चेन और जरूरी वस्तुओं पर फोकस

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि किसी भी परिस्थिति में देश में जरूरी सामानों की उपलब्धता बनी रहे. उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की वस्तुओं को लेकर जनता को किसी भी तरह की चिंता या घबराहट नहीं करनी चाहिए और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी.

पीएम मोदी की अपील: सोना और ईंधन पर संयम जरूरी

इस पूरे घटनाक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया आर्थिक अपील से भी जोड़ा जा रहा है. पीएम मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें और पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल में संयम रखें. उन्होंने कहा कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी.

विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने पर जोर

सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का आधार होता है. सोने के आयात और ईंधन खपत को नियंत्रित कर देश की आर्थिक स्थिति को और स्थिर किया जा सकता है.

पेट्रोलियम मंत्रालय का स्पष्ट बयान

पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी जनता को आश्वस्त किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में सप्लाई बाधित होने या ‘ड्राई आउट’ जैसी कोई स्थिति नहीं है. उन्होंने भी नागरिकों से ईंधन की खपत में संयम बरतने की अपील की है.

सरकार ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए केवल नीतिगत कदम ही नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है. ऊर्जा की बचत और अनावश्यक खर्चों में कटौती से देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी और संकट के समय स्थिरता बनी रहेगी.
 


Q4 में केनरा बैंक को झटका, ₹4,505 करोड़ पर आया मुनाफा, शेयर फिसला

नतीजों के बाद बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला और स्टॉक दिन के उच्च स्तर से फिसल गया. बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

Last Modified:
Monday, 11 May, 2026
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सरकारी क्षेत्र के केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 9.9 प्रतिशत घटकर ₹4,505 करोड़ रह गया है. पिछले साल की समान तिमाही में बैंक ने ₹5,002 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था. नतीजों के बाद बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला और स्टॉक दिन के उच्च स्तर से फिसल गया. बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. 

तिमाही नतीजों के बाद केनरा बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 3.62 प्रतिशत टूटकर ₹129.48 पर ट्रेड करता दिखाई दिया. इस साल अब तक बैंक का शेयर लगभग 15 प्रतिशत कमजोर हो चुका है.

प्रॉफिट में गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?

केनरा बैंक का मुनाफा घटने की सबसे बड़ी वजह दूसरी आय (Other Income) में आई तेज गिरावट रही. मार्च तिमाही में बैंक की दूसरी आय घटकर ₹4,824 करोड़ रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹6,350 करोड़ थी. हालांकि टैक्स खर्च और प्रावधानों (Provision) में कमी आई, लेकिन इससे मुनाफे में गिरावट को पूरी तरह संतुलित नहीं किया जा सका.

प्रावधानों में आई बड़ी कमी

बैंक के प्रावधान दिसंबर तिमाही के ₹2,414 करोड़ से घटकर मार्च तिमाही में ₹992 करोड़ रह गए. इसके बावजूद नेट प्रॉफिट में गिरावट दर्ज की गई, जिससे संकेत मिलता है कि आय के दूसरे स्रोतों पर दबाव बना हुआ है.

नेट इंटरेस्ट इनकम में हल्की बढ़ोतरी

केनरा बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) यानी मुख्य आय में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. मार्च तिमाही में बैंक की NII बढ़कर ₹9,809 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹9,442 करोड़ थी. इससे बैंक की कोर बैंकिंग गतिविधियों में स्थिरता का संकेत मिलता है.

एसेट क्वालिटी में सुधार जारी

बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है. मार्च 2026 के अंत तक बैंक का ग्रॉस NPA घटकर 1.84 प्रतिशत रह गया, जो दिसंबर तिमाही में 2.08 प्रतिशत था. वहीं नेट NPA भी 0.45 प्रतिशत से घटकर 0.43 प्रतिशत पर आ गया.

ग्रॉस NPA में ₹2,000 करोड़ से ज्यादा की कमी

एब्सोल्यूट आधार पर देखें तो बैंक का ग्रॉस NPA दिसंबर तिमाही के ₹24,832 करोड़ से घटकर ₹22,740 करोड़ रह गया. वहीं, नेट NPA में मामूली कमी आई और यह ₹5,322 करोड़ से घटकर ₹5,209 करोड़ पर पहुंच गया.

स्लिपेज बढ़ने से बढ़ी चिंता

हालांकि एसेट क्वालिटी में सुधार के बावजूद बैंक के स्लिपेज बढ़े हैं. मार्च तिमाही में स्लिपेज ₹2,000 करोड़ के पार पहुंच गए, जबकि दिसंबर तिमाही में यह करीब ₹1,900 करोड़ थे. बढ़ते स्लिपेज को लेकर बाजार में सतर्कता देखने को मिली.

आगे कैसी रहेगी नजर?

विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार सकारात्मक संकेत है, लेकिन बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में कमजोरी निकट अवधि में दबाव बनाए रख सकती है. अब निवेशकों की नजर बैंक की क्रेडिट ग्रोथ, रिकवरी और आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की स्थिरता पर रहेगी.
 


शैलेश चतुर्वेदी ने Neopolis Brands के लिए जुटाए ₹90 करोड़, भारत में ग्लोबल फैशन विस्तार की बड़ी तैयार

Neopolis Brands का उद्देश्य भारत में ग्लोबल फैशन ब्रांड्स को लोकल जरूरतों के अनुसार ढालकर उन्हें बड़े स्तर पर स्थापित करना है.

Last Modified:
Monday, 11 May, 2026
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फैशन रिटेल इंडस्ट्री के अनुभवी दिग्गज शैलेश चतुर्वेदी ने अपने नए वेंचर निओपोलिस ब्रांड्स (Neopolis Brands Private Limited) की शुरुआत की है. कंपनी ने शुरुआती चरण में ही 90 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटा ली है, जो देश के कई प्रमुख निवेशकों और रणनीतिक पार्टनर्स से आई है. यह कंपनी भारत में ग्लोबल फैशन ब्रांड्स को मजबूत करने और उन्हें बड़े पैमाने पर विस्तार देने के उद्देश्य से बनाई गई है.

ग्लोबल ब्रांड्स को भारत में मजबूत बनाने की रणनीति

निओपोलिस ब्रांड्स का फोकस उन अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड्स पर है जो अपने घरेलू बाजारों में पहले से ही लीडर हैं. कंपनी का लक्ष्य ऐसे ब्रांड्स को भारत में भी उसी स्तर की सफलता दिलाना और उन्हें तेजी से स्केल करना है. इसके लिए कंपनी मल्टी-चैनल विस्तार यानी स्टोर्स और ई-कॉमर्स दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है.

शुरुआती फंडिंग में बड़े निवेशकों की भागीदारी

कंपनी को मिली 90 करोड़ रुपये की शुरुआती फंडिंग में कई बड़े नाम शामिल हैं. इनमें आशीष कचोलिया, लशित सांघवी (Alchemy Capital), ब्रांडिक्स श्रीलंका और मणिपाल टेक्नोलॉजी जैसे निवेशक और पार्टनर्स शामिल हैं. यह निवेश कंपनी की रणनीति और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं पर मजबूत भरोसे को दर्शाता है.

अनुभवी टीम के साथ मजबूत शुरुआत

निओपोलिस ब्रांड्स ने अपनी टीम में अनुभवी पेशेवरों को शामिल किया है, जिन्होंने पहले भी शैलेश चतुर्वेदी के साथ काम किया है. कंपनी के सीएफओ के रूप में अंकुश त्रिवेदी को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे फाइनेंशियल और ऑपरेशनल स्तर पर मजबूत निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके.

100 स्टोर्स और मल्टी-चैनल विस्तार का लक्ष्य

शैलेश चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी ब्रांड की सफलता के लिए स्केलिंग बेहद जरूरी है. निओपोलिस  का लक्ष्य भारत में ऐसे कई बड़े ब्रांड बनाना है जिनके कम से कम 100 स्टोर्स हों और जिनकी ई-कॉमर्स में भी मजबूत मौजूदगी हो. कंपनी 40 से 50 शहरों तक अपने ब्रांड्स को पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है.

निवेशकों का भरोसा और बाजार की संभावनाएं

निवेशक अशीष कचोलिया का मानना है कि भारत में महिलाओं के फैशन और एक्सेसरीज सेगमेंट में अभी भी बड़ा अनछुआ अवसर मौजूद है. उनके अनुसार, इस क्षेत्र में डिमांड मजबूत है लेकिन संगठित ब्रांड्स की हिस्सेदारी अभी सीमित है, जो नए खिलाड़ियों के लिए बड़ा मौका बनाता है.

वहीं लषित सांघवी ने कहा कि शैलेश चतुर्वेदी के पास तीन दशकों से अधिक का अनुभव है और उन्होंने पहले भी कई ग्लोबल ब्रांड्स को सफलतापूर्वक स्केल किया है, जिससे निओपोलिस को मजबूत दिशा मिलने की उम्मीद है.

भारत का फैशन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है

भारत का प्रीमियम फैशन और लाइफस्टाइल सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है. बढ़ती आय, प्रीमियम लाइफस्टाइल की ओर झुकाव और फैशन अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति इस ग्रोथ के मुख्य कारण हैं.

कुल बाजार का आकार लगभग ₹20,000 करोड़ आंका गया है, जिसमें संगठित सेक्टर करीब ₹7,000 करोड़ का है. यह दर्शाता है कि अभी भी ब्रांड-लेड ग्रोथ के लिए बड़ा अवसर मौजूद है.

निवेश का उपयोग और विस्तार योजना

कंपनी द्वारा जुटाई गई पूंजी का उपयोग संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने, ब्रांड्स के विस्तार, सप्लाई चेन विकास और डिजिटल क्षमताओं को बढ़ाने में किया जाएगा. इसके साथ ही कंपनी नए बाजारों और बिक्री चैनलों में आक्रामक विस्तार की योजना पर काम करेगी.

नियोपोलिस ब्रांड्स का उद्देश्य भारत में ग्लोबल फैशन ब्रांड्स को लोकल जरूरतों के अनुसार ढालकर उन्हें बड़े स्तर पर स्थापित करना है. कंपनी डेटा-ड्रिवन और ओमनीचैनल रणनीति के जरिए प्रीमियम फैशन सेगमेंट में मजबूत नेतृत्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
 


गोल्ड पर पीएम मोदी की अपील का असर, ज्वेलरी स्टॉक्स में भारी बिकवाली, टाइटन समेत कई शेयर 7% तक गिरे

सोने की खरीद टालने की अपील से बाजार में मचा हड़कंप, ज्वेलरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा

Last Modified:
Monday, 11 May, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने और सोने की खरीद टालने की अपील का असर शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया है. सोमवार को ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें टाइटन, सैंको गोल्ड और अन्य प्रमुख कंपनियों के स्टॉक्स 10 प्रतिशत तक टूट गए. निवेशकों में बढ़ी चिंता और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच इस बयान ने ज्वेलरी सेक्टर में तेज बिकवाली को जन्म दिया.

टाइटन समेत प्रमुख ज्वेलरी शेयरों में तेज गिरावट

सुबह के कारोबार में टाइटन कंपनी के शेयर करीब 7 प्रतिशत तक टूट गए और निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हो गए. खबर लिखे जाने के दौरान यह शेयर 6.22 प्रतिशत की गिरावट क साथ 4,232.70 रुपये पर कारोबार कर रहा था. यह गिरावट ऐसे समय आई है जब कंपनी ने हाल ही में मजबूत तिमाही नतीजों के बाद अपने अब तक के उच्चतम स्तर को छुआ था. इसी तरह कल्याण ज्वेलर्स, सैंको गोल्ड और पीसी ज्वेलर्स जैसे शेयरों में भी 8 से 10 प्रतिशत तक की तेज गिरावट देखने को मिली. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल कंपनी के फंडामेंटल्स नहीं बल्कि नीतिगत संकेतों और उपभोक्ता मांग को लेकर बनी अनिश्चितता का नतीजा है.

पीएम मोदी की अपील से बढ़ी बाजार की संवेदनशीलता

प्रधानमंत्री ने हाल ही में देश से अपील की थी कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सोने की खरीद और अनावश्यक विदेशी यात्राओं को एक साल तक टाला जाए. उन्होंने कहा कि देश को विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल, खाद और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है.

इस बयान के बाद निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों में सतर्कता बढ़ गई, जिसका सीधा असर ज्वेलरी और ट्रैवल सेक्टर पर देखा गया.

बाजार पर व्यापक दबाव, सभी सेक्टर लाल निशान में

सुबह के कारोबार में शेयर बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स करीब 1,045 अंक गिरकर 76,282 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 300 अंक से अधिक टूटकर 23,877 के नीचे आ गया. सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. खासकर निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी असर

सोने के साथ-साथ अनावश्यक विदेशी यात्रा कम करने की अपील का असर ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी पड़ा है. IRCTC और अन्य ट्रैवल से जुड़े स्टॉक्स में भी बिकवाली का दबाव देखा गया. विश्लेषकों का कहना है कि यह असर अल्पकालिक भावनात्मक प्रतिक्रिया भी हो सकता है, लेकिन निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं.

किन सेक्टरों पर दिखेगा असर

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, इस तरह के नीतिगत संकेतों का असर कुछ सेक्टरों पर अधिक दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि ज्वेलरी, फ्यूल, ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और फर्टिलाइजर जैसे सेक्टरों में दबाव बढ़ सकता है. वहीं फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं.

आगे क्या रह सकता है रुझान?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट भावनात्मक प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकती है, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी मुद्रा स्थिति आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगी. निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार की नीतियां और वैश्विक परिस्थितियां आगे बाजार को किस दिशा में ले जाती हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


सूखा-बाढ़ से लड़ने को तैयार भारतीय खेती, सरकार ने जारी कीं 2,996 नई फसल किस्में

सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत कुल 2,996 जलवायु-लचीली फसल किस्में जारी की गईं.

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Monday, 11 May, 2026
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भारत सरकार ने कहा है कि देश ने पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरों से बचाने के लिए लगभग 3,000 जलवायु-लचीली फसल किस्में विकसित और जारी की हैं. यह पहल किसानों को सूखा, बाढ़, अत्यधिक गर्मी और अन्य जलवायु चुनौतियों से निपटने में मदद करने के उद्देश्य से की गई है.

2014 से 2025 के बीच जारी हुईं 2,996 नई किस्में

सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (National Mission for Sustainable Agriculture) संबंधी आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्ष 2014 से 2025 के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत कुल 2,996 जलवायु-लचीली फसल किस्में जारी की गईं.

टिकाऊ खेती के लिए नई कृषि तकनीकों पर जोर

बयान में कहा गया है कि नई बीज किस्मों के साथ-साथ वैज्ञानिकों ने जलवायु जोखिम कम करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए कई कृषि पद्धतियों को भी विकसित और प्रोत्साहित किया है. इनमें डायरेक्ट-सीडेड राइस, जीरो-टिलेज गेहूं, तनाव-सहिष्णु फसलों को अपनाना और फसल अवशेष प्रबंधन में सुधार जैसी तकनीकें शामिल हैं.

ICAR का कार्यक्रम बना जलवायु अनुकूलन का आधार

भारत की कृषि क्षेत्र में जलवायु अनुकूलन रणनीति का मुख्य आधार ICAR द्वारा वर्ष 2011 में शुरू किया गया “नेशनल इनोवेशंस ऑन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर” कार्यक्रम है. यह कार्यक्रम स्थानीय जलवायु चुनौतियों के अनुरूप तकनीकों के विकास और प्रसार पर केंद्रित है.

सरकार के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत किसानों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण और फील्ड डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई है.

सूखा, बाढ़ और हीटवेव से निपटने पर फोकस

इस पहल के तहत खेती प्रणालियों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है ताकि वे सूखा, बाढ़ और हीटवेव जैसी चरम मौसम घटनाओं का बेहतर सामना कर सकें. बयान में बताया गया कि इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के प्रोटोकॉल के अनुसार देश के 651 कृषि जिलों में जलवायु संवेदनशीलता का आकलन किया गया. इनमें से 310 जिलों को अत्यधिक या बहुत अधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया.

448 गांव बने जलवायु-लचीले मॉडल गांव

शोध को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए सरकार ने 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 151 संवेदनशील जिलों में 448 गांवों को “जलवायु-लचीले गांव” के रूप में विकसित किया है. इन गांवों में नई तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है ताकि उन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सके.

जल संरक्षण और मिट्टी की सेहत सुधारने पर जोर

राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन का उद्देश्य जल उपयोग दक्षता बढ़ाने, मिट्टी के स्वास्थ्य को मजबूत करने और अधिक टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देकर इन प्रयासों का विस्तार करना है.


निजी कंपनियों ने निवेश में लगाया जोर, प्राइवेट कैपेक्स 67% उछलकर 7.7 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

CII ने CMIE Prowess डेटाबेस में शामिल करीब 1,200 कंपनियों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने निजी निवेश में सबसे बड़ा योगदान दिया.

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Monday, 11 May, 2026
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भारत में निजी निवेश का माहौल तेजी से मजबूत होता दिखाई दे रहा है. सितंबर 2025 तक देश का प्राइवेट कैपेक्स 67 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी के साथ 7.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. एक साल पहले यह आंकड़ा 4.6 लाख करोड़ रुपये था. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने इसे देश की निवेश साइकिल में बड़े बदलाव का संकेत बताया है. संगठन का कहना है कि निजी क्षेत्र का बढ़ता निवेश न सिर्फ औद्योगिक विस्तार को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, निर्यात और आर्थिक विकास को भी मजबूती देगा.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच CII ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए 5-पॉइंट एक्शन प्लान भी पेश किया है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना निवेश का सबसे बड़ा इंजन

CII ने CMIE Prowess डेटाबेस में शामिल करीब 1,200 कंपनियों का विश्लेषण किया. रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने निजी निवेश में सबसे बड़ा योगदान दिया. इस सेक्टर में करीब 3.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो कुल प्राइवेट कैपेक्स का लगभग आधा हिस्सा है. मेटल, ऑटोमोबाइल और केमिकल सेक्टर निवेश के प्रमुख केंद्र रहे.

वहीं सर्विस सेक्टर का योगदान करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें ट्रेड, कम्युनिकेशन और आईटी-आईटीईएस सेक्टर की अहम भूमिका रही.

निवेश चक्र में आया बड़ा बदलाव

CII के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि प्राइवेट कैपेक्स में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस बात का सबसे मजबूत संकेत है कि भारत का निवेश चक्र निर्णायक रूप से बदल चुका है. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 74.3 प्रतिशत से बढ़कर 75.6 प्रतिशत हो गया.

इसके अलावा नए ऑर्डर बुक में सालाना आधार पर 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बैंक क्रेडिट ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 के दूसरे हाफ में करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गई.

CII ने पेश किया 5-पॉइंट एक्शन प्लान

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और निवेश की रफ्तार बनाए रखने के लिए CII ने पांच बड़े सुझाव दिए हैं.

1. पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में राहत

CII ने सुझाव दिया है कि पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की केंद्रीय एक्साइज कटौती को अगले 6 से 9 महीनों में धीरे-धीरे वापस लिया जाए, जैसे-जैसे कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हों.

2. ऊर्जा बचत पर उद्योगों का फोकस

उद्योग संगठन ने सदस्य कंपनियों से अगले दो तिमाहियों में फ्यूल और बिजली की खपत में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी लाने का प्रस्ताव रखा है.

3. MSME के लिए 45 दिन पेमेंट गारंटी

छोटे और मझोले उद्योगों पर दबाव कम करने के लिए TReDS और सप्लाई-चेन फाइनेंस के जरिए 45 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है.

4. सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने पर जोर

CII ने इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने के लिए स्पेशलिटी केमिकल्स और कैपिटल गुड्स सेक्टर में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही है.

5. निवेश और इंटर्नशिप को बढ़ावा

मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी ट्रांजिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में वित्त वर्ष 2027 के निवेश को पहले शुरू करने और PMIS योजना के तहत इंटर्नशिप बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है.

सरकार की नीतियों से मिला निवेश को बढ़ावा

चंद्रजीत बनर्जी ने निजी निवेश में तेजी का श्रेय सरकार की नीतियों को दिया. उन्होंने कहा कि लगातार सरकारी पूंजीगत खर्च, राजकोषीय अनुशासन, आधुनिक टैक्स ढांचा, PLI योजनाएं और मुक्त व्यापार समझौते निवेश बढ़ाने में अहम साबित हुए हैं.

उन्होंने कहा कि भारत अब उस स्थिति में पहुंच चुका है जहां उद्योगों को इस सकारात्मक माहौल को बड़े पैमाने पर उत्पादन, रोजगार और निर्यात में बदलना होगा.

GDP ग्रोथ और एक्सपोर्ट को लेकर बड़ी उम्मीद

CII को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.6 प्रतिशत से अधिक रह सकती है. संगठन का अनुमान है कि देश का निर्यात 863 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर के पार जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि निजी निवेश में आई यह तेजी भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
 


होर्मुज संकट से तेल सप्लाई प्रभावित, बाजार खुलते ही कच्चा तेल 104 डॉलर के पार

दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है.

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Monday, 11 May, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. सोमवार को बाजार खुलते ही क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिससे भारत समेत दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ गया है और तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर दिख सकता है.

1 अरब बैरल कच्चा तेल संकट की भेंट

सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में करीब 1 अरब बैरल कच्चा तेल ईरान संकट की वजह से प्रभावित हुआ है. उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सामान्य हो जाए, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर होने में लंबा समय लग सकता है.

केप्लर (Kpler) के शिपिंग डेटा के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में केवल दो तेल टैंकर ही होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल पाए. बताया जा रहा है कि ईरानी हमलों से बचने के लिए कई जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम तक बंद कर दिए.

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है. मौजूदा हालात में यही देखने को मिल रहा है.

कच्चे तेल की कीमत में जोरदार उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.32 प्रतिशत बढ़कर 104.7 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. वहीं यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 3.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 99 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. शुक्रवार को भी तेल की कीमतों में मजबूती देखी गई थी और नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भी तेजी के साथ हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा डर सप्लाई संकट को लेकर है.

अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा तैयार किए गए शांति प्रस्ताव को ईरान ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के जवाब को खारिज कर दिया. इससे पिछले 10 हफ्तों से जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह चीन यात्रा पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच ईरान संकट और तेल सप्लाई को लेकर अहम चर्चा हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का ईरान पर प्रभाव होने के कारण यह बैठक वैश्विक बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर?

फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. सरकार के मुताबिक, मौजूदा हालात में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

सरकार ने यह भी कहा है कि भारत में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि कई देशों में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं.

आने वाले दिनों में क्या बढ़ सकती है महंगाई?

जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हर बड़ी तेजी सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के बजट को प्रभावित करती है. फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका, ईरान और चीन के बीच होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है.