AI क्रैश: हर मोर्चे पर मौजूद थी जेन स्ट्रीट

जब जुलाई में AI बूम का सबसे बड़ा दांव धराशायी हुआ, तो कुछ समय के लिए उसके पीछे की पूरी "आर्किटेक्चर" सामने आ गई. भारत में जांच के दायरे में रही फर्म जेन स्ट्रीट के पास चिप्स, कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर्स और मॉडल्स में हिस्सेदारी थी. यह शेयरों में मार्केट मेकर भी थी और उस सबसे बड़े फंड में भी इसका पैसा लगा हुआ था जो धराशायी हो गया. फंड के पतन के 12 दिन बाद जेन स्ट्रीट ने 14.6 अरब डॉलर जुटाए और फिर चुप्पी साध ली. क्या जेन स्ट्रीट के AI ट्रेड और उसके मामले में कोई पैटर्न है?

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Monday, 17 August, 2026
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पलक शाह

भारत जेन स्ट्रीट को इसलिए जानता है क्योंकि सेबी ने कहा था कि उसने बाजारों में हेरफेर किया. जुलाई के AI क्रैश ने एक झलक दी कि जब यह फर्म भारत के नियामकीय माइक्रोस्कोप के बाहर काम करती है तो उसका स्वरूप कैसा दिखता है. जुलाई के AI ब्लो-अप की अनकही कहानी.

जुलाई 2025 में नियामक ने इसे भारतीय बाजारों से प्रतिबंधित कर दिया और 4,843.57 करोड़ रुपये करीब 560 मिलियन डॉलर, वापस जमा कराने का आदेश दिया. सेबी के इतिहास में यह इस तरह का सबसे बड़ा आदेश था. आरोप था कि इसने एक्सपायरी के दिनों में इंडेक्स स्तरों में हेरफेर किया. जेन स्ट्रीट ने अपने काम को "बेसिक इंडेक्स आर्बिट्राज" बताया: न्यूट्रल, मैकेनिकल और किसी भी चीज पर कोई राय नहीं. इसने पैसा जमा कर दिया, प्रतिबंध हटा लिया गया और इसकी अपील सितंबर से सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने बिना सुने पड़ी है.

न्यूट्रैलिटी का यह दावा अब कोई तकनीकी मुद्दा या साइड डिटेल नहीं है. यही पूरा मामला है और यही मुख्य कारण है कि दुनिया भर के नियामक इस तरह की फर्मों को इतना बड़ा बनने, गोपनीय बने रहने और ऑर्डर बुक के इतने करीब रहने की अनुमति देते हैं. इसलिए यह समझना जरूरी है कि जेन स्ट्रीट बाकी जगहों पर क्या कर रही थी.

भारत में सेबी का मामला यह सवाल उठाता है कि क्या जेन स्ट्रीट ऑर्डर बुक के भीतर बैठकर और उसके आसपास ट्रेडिंग करते हुए भी न्यूट्रल रह सकती है. AI ब्लो-अप एक अलग लेकिन जुड़ा हुआ सवाल उठाता है: क्या वही फर्म केवल एक मार्केट मेकर हो सकती है, जब वह एक साथ उन कंपनियों के आसपास निवेशक, लेंडर, को-इन्वेस्टर और बिडर भी हो, जिनके शेयरों में वह मार्केट बनाती है?

इंस्ट्रूमेंट्स अलग हैं. सवाल वही है: मार्केट-मेकिंग कहां खत्म होती है और आर्थिक एक्सपोजर कहां शुरू होता है?

मशीन के अंदर जेन स्ट्रीट

यह वॉल स्ट्रीट की सबसे बड़ी प्रॉप ट्रेडिंग फर्मों में से एक है. इसके कोई बाहरी क्लाइंट नहीं हैं, कोई लिस्टेड शेयर नहीं है और इसकी सार्वजनिक आवाज लगभग नहीं के बराबर है. इसने 2025 में ट्रेडिंग से 39.6 अरब डॉलर कमाए, उन बैंकों के ट्रेडिंग आर्म्स से भी ज्यादा, जिनसे यह प्रतिस्पर्धा करती है और अकेले 2026 की पहली तिमाही में 16.1 अरब डॉलर का रेवेन्यू और 10.3 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया. और करीब दो वर्षों में इसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को चलाने वाली मशीनरी की लगभग हर परत में पोजीशन ली है.

AI बनने से पहले उसे जिन चीजों की जरूरत होती है, वहीं से शुरुआत कीजिए.

उसे चिप्स चाहिए. जेन स्ट्रीट ने MatX में 500 मिलियन डॉलर के निवेश का सह-नेतृत्व किया, जो Nvidia को चुनौती देने वाले प्रोसेसर डिजाइन करने वाला एक स्टार्ट-अप है.

उसे कंप्यूटिंग पावर चाहिए. जेन स्ट्रीट के पास CoreWeave की करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो सबसे बड़ी लिस्टेड AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक है, और अप्रैल में इसने स्टॉक में 1 अरब डॉलर और लगाए.

उस कंप्यूटिंग पावर को बनाने के लिए कर्ज चाहिए. जेन स्ट्रीट CoreWeave के सबसे बड़े लेंडर्स में से एक भी है, रिपोर्ट के मुताबिक एक सिंगल फाइनेंसिंग फैसिलिटी में कमिटेड फंडिंग का करीब 35 प्रतिशत, जो केवल Anthropic से पीछे है और इसके साथ कई अरब डॉलर की क्लाउड कैपेसिटी कमिटेड है.

उसे डेटा सेंटर्स चाहिए. जेन स्ट्रीट ने Fluidstack में 1 अरब डॉलर के निवेश का सह-नेतृत्व किया, जिसमें कंपनी का वैल्यूएशन 18 अरब डॉलर था, जो उसी साल की शुरुआत में कंपनी की कीमत से दोगुने से भी ज्यादा था. Fluidstack का सबसे बड़ा ग्राहक Anthropic है, जिसके साथ कस्टम फैसिलिटीज बनाने के लिए कथित तौर पर दसियों अरब डॉलर का समझौता है.

और उसे मॉडल्स चाहिए. जेन स्ट्रीट के पास Anthropic में हिस्सेदारी है, जिसे उसने दो राउंड में खरीदा था. Bloomberg के मुताबिक, 2025 की एक तिमाही में प्राइवेट निवेशों ने इसके ट्रेडिंग रेवेन्यू में करीब 830 मिलियन डॉलर का योगदान दिया, कुल का करीब 12 प्रतिशत, जिसमें Anthropic का हिस्सा भारी था.

जेन स्ट्रीट AI बूम के आसपास सिर्फ ट्रेडिंग नहीं कर रही थी. उसने उस पूरी मशीनरी में निवेश किया था जिसने इस बूम को संभव बनाया. चिप कंपनी, कंप्यूटिंग कंपनी, कंप्यूटिंग कंपनी को कर्ज देने वाली संस्था, डेटा-सेंटर कंपनी और मॉडल कंपनी.

फिर खुद बाजार भी है

BW द्वारा जेन स्ट्रीट की अपनी तिमाही फाइलिंग्स के विश्लेषण, जिसमें 2025 की शुरुआत से CoreWeave, Bloom Energy, SanDisk, IREN, Core Scientific और Nebius शामिल हैं, से पता चलता है कि फर्म हर एक में मौजूद थी. लगभग हर तिमाही में यह तीन अलग-अलग लाइनें फाइल करती है: शेयर, कीमत बढ़ने पर लाभ देने वाली पोजीशन और कीमत गिरने पर लाभ देने वाली पोजीशन. तीनों एक साथ.

30 जून को तस्वीर ऐसी थी, जो पतन से पहले Leopold Aschenbrenner के अंतिम स्नैपशॉट की भी तारीख थी.

उनकी दूसरी सबसे बड़ी होल्डिंग SanDisk में 5.67 अरब डॉलर की थी. उसी तारीख को, उसी स्टॉक में, जेन स्ट्रीट ने 2.6 अरब डॉलर के शेयर, 8.1 अरब डॉलर की अपसाइड पोजीशन और 14.6 अरब डॉलर की डाउनसाइड पोजीशन रिपोर्ट की. इन तीनों को जोड़ें तो एक ही कंपनी में जेन स्ट्रीट की बुक करीब 25 अरब डॉलर की थी, Aschenbrenner के पूरे फंड से भी बड़ी.

यहां चीजों को जरूरत से ज्यादा पढ़ लेने का बड़ा प्रलोभन है. लेकिन हम इससे बचेंगे. जेन स्ट्रीट क्या कहेगी? एक ही नाम में शेयर, कॉल्स और पुट्स को एक साथ रखना किसी बड़े ऑप्शंस मार्केट-मेकिंग डेस्क का सामान्य परिणाम है. यह इन्वेंट्री और हेजिंग है, किसी के खिलाफ लगाया गया दांव नहीं.

लेकिन इसकी संरचना ही पूरी कहानी की संरचना है. तिमाही के आखिरी दिन, उस फंड की सबसे बड़ी सिंगल स्टॉक पोजीशन जो धराशायी होने वाला था, और उस फर्म की सबसे बड़ी डाउनसाइड बुक जो उस स्टॉक की कीमतें कोट कर रही थी, एक ही कंपनी में थी.

एक और पोजीशन थी

जून में Wall Street Journal ने रिपोर्ट किया कि जेन स्ट्रीट के निवेशों में अब Aschenbrenner का फंड भी शामिल था.

इस तरह फर्म उस इकोसिस्टम के अंदर थी जिस पर वह दांव लगा रहा था, और उस व्हीकल के अंदर भी जो लीवरेज्ड दांव लगा रहा था. जेन स्ट्रीट के पास Anthropic था; उसके पास Anthropic में करीब 5 अरब डॉलर थे. इसके पास CoreWeave था; CoreWeave उसकी सबसे बड़ी होल्डिंग्स में से एक थी. इसने CoreWeave को कर्ज दिया था. दोनों ने MatX में साथ निवेश किया और Fluidstack में भी साथ निवेश किया. यह उसके सबसे बड़े स्टॉक्स में मार्केट बनाती थी. और 29 जुलाई को, जब उसका लीवरेज टूट गया और बैंक खरीदार की तलाश में जुट गए, तो जेन स्ट्रीट उन फर्मों में शामिल थी जो बचे हुए एसेट्स के लिए बोली लगा रही थीं.

एक ही ट्रेड के आसपास छह पोजीशन

दो स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हैं और फर्म दोनों की हकदार है. कहीं भी यह रिपोर्ट नहीं हुआ है कि जेन स्ट्रीट Aschenbrenner को कर्ज दे रही थी, उसकी फाइनेंसिंग Goldman Sachs, JPMorgan और Bank of America से आई थी. और जेन स्ट्रीट कोई फाउंडिंग बैकर भी नहीं थी. यह तब आई जब फंड पहले ही 1,000 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दे चुका था और यह Citadel से नीलामी हार गई. मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार, जेन स्ट्रीट ने यह ट्रेड बनाया नहीं था. यह उस ट्रेड में शामिल हुई जो पहले से चल रहा था.

अब पैटर्न

भारतीय नियामक इस संरचना को पहले देख चुके हैं. उन्होंने इस पर एक आदेश भी लिखा है.

SEBI की जुलाई 2025 की फाइंडिंग्स से उनके मैकेनिक्स को हटा दें तो एक आरोप बचता है और वह यह नहीं है कि जेन स्ट्रीट ने आक्रामक तरीके से ट्रेड किया, कोई राय ली या किस्मत से जीत गई. आरोप यह है कि फर्म एक बाजार में इतनी बड़ी हो गई थी कि उसकी अपनी खरीद और बिक्री उस इंडेक्स को प्रभावित कर सकती थी, जो तय करता था कि उसके ऑप्शंस कितना भुगतान करेंगे.

यहीं SEBI के आदेश की असली धार है: जेन स्ट्रीट के पास Calls थे. इसके पास Puts थे. और इसके पास अंतर्निहित बैंक शेयरों की इतनी बड़ी मात्रा थी कि वह उस संख्या को प्रभावित कर सके, जिसके आधार पर ये कॉन्ट्रैक्ट्स सेटल होते थे. नियामक ने इसे हेरफेर कहा. जेन स्ट्रीट ने इसे हेजिंग कहा.

अब इसे फाइलिंग्स के सामने रखिए

भारत में SEBI ने Bank Nifty कॉम्प्लेक्स में जेन स्ट्रीट की पोजीशंस को इतना बड़ा माना कि वे इंडेक्स को प्रभावित कर सकती थीं. AI ट्रेड में, जून के आखिरी दिन एक ही स्टॉक — SanDisk में इसकी बुक उस पूरे 20 अरब डॉलर के फंड से भी बड़ी थी, जिसके पतन ने चार हफ्ते बाद वैश्विक बाजारों को हिला दिया. प्रतिबंध से पहले इस तरह की प्रॉप फर्म्स भारत के इंडेक्स-ऑप्शंस वॉल्यूम का करीब आधा हिस्सा थीं. AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नामों में इसकी तीन तरफ की बुक्स उन कंपनियों के मुकाबले दसियों अरब डॉलर तक पहुंचती हैं, जिनके बारे में ज्यादातर निवेशकों ने दो साल पहले सुना भी नहीं था.

जेन स्ट्रीट के बारे में समझने वाली यही बात है, और इसका किसी एक ट्रेड से कोई संबंध नहीं है.

इस पैमाने पर कोई फर्म बाजार की केवल एक प्रतिभागी नहीं रह जाती, बल्कि बाजार की स्थितियों में से एक बन जाती है. जब आप एसेट के मालिक हों, एसेट को फाइनेंस करें, एसेट की कीमत कोट करें और एसेट के सबसे बड़े लीवरेज्ड खरीदार को फंड भी करें, तो आप बाजार में केवल पोजीशन नहीं ले रहे होते. आप उस चीज का हिस्सा बन जाते हैं, जो खुद बाजार है.

अब तक जेन स्ट्रीट पर यह आरोप नहीं है कि उसने AI ट्रेड में किसी चीज में हेरफेर किया, और सार्वजनिक रिकॉर्ड में भी ऐसा कोई संकेत नहीं है. BW इस तरह की समानता नहीं खींच रहा है.

लेकिन एक समानता स्पष्ट है, इसका तरीका. दो महाद्वीप, दो एसेट क्लास, एक ही हस्ताक्षर: हर तरफ मौजूद, आकार में प्रभावशाली और किसी भी पक्ष पर पूरी तरह न्यूट्रल नहीं. SEBI जिस बात पर मुकदमा लड़ रहा है, वह केवल भारत की एक घटना नहीं है. यह उस तरीके का सवाल है, जिससे यह फर्म किसी बाजार में खड़ी होती है, और जुलाई ने इसे दशक के सबसे बड़े कैपिटल साइकिल में बिल्कुल उसी तरह खड़ा दिखाया.

मुंबई का ट्रिब्यूनल 2023 और 2024 के 18 एक्सपायरी दिनों पर फैसला देगा. AI क्रैश से संकेत मिलता है कि सवाल इससे कहीं बड़ा है.

हर तरफ मौजूद रहने से आपको क्या मिलता है

इसका जवाब 14 अगस्त को मिला, जब Reuters ने रिपोर्ट किया कि जेन स्ट्रीट को जुलाई में करीब 15 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, लगभग एक दशक में इसका पहला घाटे वाला महीना. नुकसान Aschenbrenner के फंड में इसकी हिस्सेदारी और एशियाई इक्विटी बाजारों में गलत दिशा में गए दांवों से हुआ.

15 अरब डॉलर किसी भी ट्रेडिंग फर्म द्वारा घोषित अब तक के सबसे बड़े मासिक नुकसानों में से एक है.

लेकिन तथ्य यह है कि फर्म ने इस साल के पहले आठ महीनों में अब भी 40 अरब डॉलर से ज्यादा का नेट ट्रेडिंग रेवेन्यू कमाया है, जो 2025 के पूरे रिकॉर्ड वर्ष से भी ज्यादा है. फायर सेल के 12 दिन बाद इसने बाजार से 14.6 अरब डॉलर मांगे और मिल गए. और फंड के मामले में, जेन स्ट्रीट का अपना कहना है कि इस पतन के बाद भी साल के लिए उसकी हिस्सेदारी लगभग फ्लैट रही. निवेश की पूरी अवधि में, उसका कहना है कि वह अब भी फायदे में है.

इसे आपको फिर पढ़ना चाहिए. Archegos के बाद सबसे शानदार हेज फंड पतनों में से एक- चार हफ्तों में 67 प्रतिशत की गिरावट, 16 अरब डॉलर के पोर्टफोलियो की रातोंरात डिस्काउंट पर नीलामी और उसमें पैसा लगाने वाला निवेशक साल के अंत तक अब भी ब्रेक-ईवन से बेहतर स्थिति में है और पूरे निवेश की अवधि में फायदे में है.

हर तरफ मौजूद रहने से आपको यही मिलता है. इम्यूनिटी नहीं, बल्कि उससे ज्यादा उपयोगी चीज: अनुपात. तब तबाही पूरे साल में सिर्फ एक खराब महीना बन जाती है.

उस ट्रेड में बाकी सभी के लिए जुलाई अंतिम साबित हुआ. Aschenbrenner ने चार हफ्तों में अपने फंड का दो-तिहाई हिस्सा खो दिया. जिन रिटेल निवेशकों ने उसकी फाइलिंग्स ट्रैक कीं और उसकी पोजीशंस कॉपी कीं, उनके पास वापस लौटने के लिए Anthropic में कोई निजी हिस्सेदारी नहीं थी, कोई लोन रीपेमेंट लगातार नहीं आ रहा था, कोई ऐसा मार्केट-मेकिंग डेस्क नहीं था जो ऊपर जाने और नीचे आने दोनों रास्तों में कमाई कर रहा हो. उनके पास एक पोजीशन थी, एक दिशा थी और मौजूद रहने के लिए कोई दूसरा पक्ष नहीं था.

यह एक असाधारण असमानता है और शायद सबसे शक्तिशाली आर्किटेक्चर भी.

एक फर्म उस 25 वर्षीय व्यक्ति के आसपास छह पोजीशंस तक कैसे पहुंच जाती है, जिसे उसने कभी नौकरी पर भी नहीं रखा?

किसी कॉन्ट्रैक्ट के जरिए नहीं, बल्कि एक ऐसे नेटवर्क के जरिए जो एक दशक से सार्वजनिक है.

2014 में इफेक्टिव अल्ट्रूइज्म मूवमेंट , जो प्रतिभाशाली युवाओं को बहुत बड़ी रकम कमाने और फिर उसे दान करने के लिए प्रेरित करता है, ने एक युवा गणितज्ञ को जेन स्ट्रीट की ओर निर्देशित किया. उसका नाम Sam Bankman-Fried था; करियर संगठन 80,000 Hours ने इसे अपनी वेबसाइट पर केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया था. Caroline Ellison, जो बाद में उसके ट्रेडिंग आर्म को चलाने वाली थीं, ने भी अपना करियर वहीं से शुरू किया. 2022 में Bankman-Fried की Alameda ने Modulo Capital को 400 मिलियन डॉलर दिए, जो दो पूर्व जेन स्ट्रीट ट्रेडर्स द्वारा स्थापित एक बिल्कुल नया फंड था. यह निवेश उस बहामास कॉम्प्लेक्स से हुआ जहां FTX के कर्मचारी रहते थे. Alameda इसका एकमात्र निवेशक था. पारंपरिक संस्थानों ने इसे खारिज कर दिया था.

इसलिए सवाल "किसी युवा और अज्ञात व्यक्ति को अरबों कौन देता है?" का जवाब चार साल पहले ही मौजूद था.

Aschenbrenner भी उसी दुनिया से आया था, बस एक पीढ़ी बाद. उसने Columbia के इफेक्टिव अल्ट्रूइज्म चैप्टर की सह-स्थापना की, 19 साल की उम्र में वैलेडिक्टोरियन के रूप में ग्रेजुएट हुआ और फरवरी 2022 में Bankman-Fried के FTX Future Fund में शामिल हुआ , 10 नवंबर को इस्तीफा दे दिया, FTX के दिवालियापन के लिए आवेदन करने से एक दिन पहले. जब एस्टेट ने मार्च 2024 में FTX की Anthropic हिस्सेदारी के दो-तिहाई हिस्से को 884 मिलियन डॉलर में बेचा, तो खरीदारों में से एक जेन स्ट्रीट थी.

इन दो फर्मों के बीच कोई सीधा तार नहीं है, और यही असली बात है. इन्हें जोड़ता है लोगों की एक पाइपलाइन, एक साझा विश्वास और ऐसे एसेट्स जिनके मालिक दोनों पहले से थे.

फिर आता है आखिरी मोड़

12 अगस्त को, लिक्विडेशन के 12 दिन बाद, जेन स्ट्रीट ने 14.6 अरब डॉलर का नया कर्ज जुटाया 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा, जिसमें उसने अपने करीब 11.1 अरब डॉलर के पुराने कर्ज को क्लियर किया, जिसमें एक टर्म लोन और नोट्स की एक ट्रांच शामिल थी, जो इन घटनाओं से काफी पहले की थी.

यह रीफाइनेंसिंग पतन की वजह से नहीं हुई थी; इतने बड़े सौदे को दो हफ्तों में तैयार नहीं किया जाता. लेकिन घटनाक्रम फिर भी उल्लेखनीय है. जब दुनिया एक 25 वर्षीय व्यक्ति के लीवरेज्ड AI दांव को सार्वजनिक रूप से टूटते देख रही थी, जेन स्ट्रीट चुपचाप अपनी बैलेंस शीट को रिस्ट्रक्चर कर रही थी और अपनी अधिक फाइनेंसिंग को प्राइवेट लेंडर्स की ओर ले जा रही थी, जिनमें बातचीत में Pimco का नाम भी सामने आया.

कम क्रेडिटर्स. कम सार्वजनिक खुलासा. एक ऐसी बैलेंस शीट जिसे बाहर से देखना ज्यादा मुश्किल हो.

तीन में से दो रेटिंग एजेंसियों ने नए पेपर को जंक रेटिंग दी. तीसरी, Fitch, ने 24 जुलाई को फर्म को इन्वेस्टमेंट ग्रेड में अपग्रेड किया, फायर सेल से पांच दिन पहले और उसी CoreWeave लोन को बेचने की प्रक्रिया के बीच, जिसे खरीदारों को आकर्षित करने के लिए काफी अधिक आकर्षक बनाना पड़ा. किसी ने किसी गलत काम का आरोप नहीं लगाया है. घटनाक्रम बस घटनाक्रम है.

और देखिए कि क्या अब भी दिखाई देता है. वे तिमाही फाइलिंग्स अमेरिकी लिस्टेड शेयरों को कवर करती हैं और कुछ नहीं. Anthropic की हिस्सेदारी नहीं. CoreWeave का लोन नहीं. MatX या Fluidstack नहीं. Aschenbrenner के फंड में जेन स्ट्रीट ने जो भी रकम लगाई, उसका एक रुपया भी नहीं.

जुलाई की एक सुबह, एक मार्जिन कॉल ने वह काम किया जो कोई नियामकीय आदेश नहीं कर पाया था. उसने इस फर्म के आसपास की पूरी आर्किटेक्चर को रोशन कर दिया, वे एसेट्स जिनकी वह मालिक थी, वे कंपनियां जिन्हें उसने फाइनेंस किया, वे स्टॉक्स जिनमें वह कीमतें बनाती थी, वह फंड जिसे उसने बैक किया था और जब वह फंड खत्म हुआ तो उसके बचे हुए हिस्से खरीदने में उसकी दिलचस्पी.

फिर जब रोशनी आगे बढ़ गई, जेन स्ट्रीट ने 15 अरब डॉलर का नुकसान बताया, 14.6 अरब डॉलर जुटाए और अपने अधिक कर्ज को प्राइवेट हाथों में ले गई, जहां अगली बार उसका खुलासा करना भी जरूरी नहीं होगा क्योंकि वह प्राइवेट लेंडर  PIMCO  से आया है.

SEBI ने भारत के भीतर जेन स्ट्रीट को उजागर किया. AI क्रैश ने भारत के बाहर जेन स्ट्रीट के पैमाने को उजागर किया.

लेकिन जेन स्ट्रीट ने यह सुनिश्चित कर लिया है कि दूसरी तस्वीर को देखना और मुश्किल हो जाए.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 

 


नौसेना की ताकत बढ़ेगी! ₹1,943 करोड़ में लीज पर मिलेंगे दो MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन

हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने जनरल एटॉमिक्स के साथ किया समझौता

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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रक्षा मंत्रालय (MoD) ने भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और खुफिया क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मंत्रालय ने जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक. (GA-ASI) के साथ दो MQ-9B सी गार्जियन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स (RPAS) को लीज पर लेने के लिए करीब ₹1,943 करोड़ का करार किया है.

यह करार 30 महीने की अवधि के लिए किया गया है. समझौते पर 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए. इस दौरान रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरासु भी मौजूद रहे.

समुद्र में लंबी दूरी तक होगी निगरानी

MQ-9B सी गार्जियन सिस्टम अत्याधुनिक सेंसर, सिस्टम और पेलोड से लैस हैं. इन्हें बड़े समुद्री क्षेत्रों में लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) मिशन को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है.

इन ड्रोन के शामिल होने से भारतीय नौसेना की मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है. खासतौर पर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखने में यह सिस्टम अहम भूमिका निभाएगा.

संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करने में मिलेगी मदद

लीज पर लिए जा रहे ये विमान नौसेना को विशाल समुद्री क्षेत्रों में गतिविधियों की निगरानी करने, संदिग्ध हलचलों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और क्षेत्र में उभरती किसी भी स्थिति पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करेंगे.

यह समझौता भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने तथा भारत के व्यापक समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में उसकी ऑपरेशनल अवेयरनेस बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
 

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बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधारों की तैयारी, ‘विकसित भारत’ के लिए बनेगी उच्चस्तरीय समिति: निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री ने कहा, सरकार बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा के लिए जल्द करेगी उच्चस्तरीय समिति का गठन. वित्तीय स्थिरता, समावेशन और ग्राहक हितों को मजबूत करने पर रहेगा फोकस

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ सरकार अब बैंकिंग सेक्टर में अगले दौर के सुधारों की तैयारी कर रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ के लिए जल्द ही एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा. यह समिति देश की बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेगी और भविष्य के सुधारों के लिए सुझाव देगी.

नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय पीएसबी सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही इस हाई-लेवल कमेटी के गठन की घोषणा कर सकती है. समिति का उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर को भारत की अगली विकास यात्रा के लिए अधिक मजबूत, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाना होगा.

बजट में किया गया था समिति गठन का ऐलान

वित्त मंत्री ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट में ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव रखा था. सरकार का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रही है और ऐसे में बैंकिंग सिस्टम को भी नई चुनौतियों और बढ़ती वित्तीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है. यह समिति बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा व्यवस्था, उसकी चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों का आकलन करेगी. इसके आधार पर सरकार को बैंकिंग सुधारों की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है.

वित्तीय स्थिरता और समावेशन पर रहेगा फोकस

प्रस्तावित समिति के एजेंडे में केवल बैंकों की आर्थिक क्षमता और कर्ज देने की क्षमता बढ़ाना ही शामिल नहीं होगा. वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण भी इसके प्रमुख मुद्दों में रहेंगे. डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच ग्राहकों के हितों और उनकी सुरक्षा को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता है. वहीं, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की पहुंच उन वर्गों तक बढ़ाने पर भी जोर रहेगा, जो अभी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़े हैं.

विकसित भारत के लक्ष्य में अहम है मजबूत बैंकिंग सिस्टम

भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. बैंक उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, छोटे कारोबार और आम उपभोक्ताओं को वित्तीय सहायता और कर्ज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं. सरकार चाहती है कि बैंकिंग व्यवस्था देश की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और निवेश जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक मजबूत और सक्षम बने. उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशें आने वाले वर्षों में बैंकिंग सेक्टर में संभावित नीतिगत सुधारों और बदलावों का आधार तैयार कर सकती हैं. समिति के गठन के बाद इसके सदस्यों, कार्यक्षेत्र और रिपोर्ट की समयसीमा को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है.
 


LPG संकट से निपटने की तैयारी, 21 रिफाइनरियों को सरकार ने दिए नए टारगेट

21 रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों के लिए तय किए गए नए उत्पादन लक्ष्य. संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में देश में तेजी से बढ़ाया जा सकेगा LPG उत्पादन

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के दौरान LPG सप्लाई पर पड़े दबाव से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों तथा तेल-गैस कंपनियों के लिए LPG उत्पादन के अधिकतम लक्ष्य तय कर दिए हैं. इसका मकसद भविष्य में आयात बाधित होने या सप्लाई संकट की स्थिति में घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी आदेश में 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए LPG उत्पादन का शेड्यूल तय किया है. इन कंपनियों की कुल उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन निर्धारित की गई है. यह देश की रोजाना LPG खपत का करीब 70 फीसदी है.

सामान्य दिनों में नहीं, संकट के समय लागू होंगे लक्ष्य

सरकार की ओर से तय किए गए ये लक्ष्य सामान्य परिस्थितियों में अनिवार्य रूप से लागू नहीं होंगे. लेकिन अगर देश में LPG की सप्लाई पर दबाव बढ़ता है या कमी की स्थिति बनती है, तो केंद्र सरकार संबंधित कंपनियों को तय क्षमता के अनुसार उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दे सकेगी.

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी वैश्विक संकट या समुद्री आपूर्ति मार्ग बाधित होने की स्थिति में भारत के पास घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए पहले से तैयार ढांचा मौजूद हो.

LPG के आयात पर भारत की बड़ी निर्भरता

भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश में कुल 3.32 करोड़ टन LPG की खपत हुई थी, यानी रोजाना करीब 91,000 टन की जरूरत. इस दौरान देश में करीब 1.31 करोड़ टन LPG का घरेलू उत्पादन हुआ, जबकि लगभग 2.13 करोड़ टन LPG का आयात किया गया. यानी देश की LPG जरूरतों का 64 फीसदी से ज्यादा हिस्सा विदेशों से आया.

पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान इसी आयात निर्भरता ने सरकार की चिंता बढ़ाई थी. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज मार्ग से LPG सप्लाई प्रभावित हुई थी. भारत को सऊदी अरब समेत कई देशों से मिलने वाली बड़ी मात्रा में LPG इसी समुद्री रास्ते से आती है.

संकट में 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंचा उत्पादन

सप्लाई बाधित होने के बाद सरकार ने मार्च में रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कुछ धाराओं को LPG उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था. इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को अधिकतम स्तर तक पहुंचाना था.

संकट के दौरान औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों को LPG की बिक्री पर शुरुआती तौर पर रोक लगाई गई. घरेलू ग्राहकों के लिए सिलेंडर रीफिल बुकिंग के बीच का अंतर भी बढ़ाया गया और लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया गया.

इन आपात कदमों के बीच देश में LPG का घरेलू उत्पादन करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया था. जून के मध्य से आयात और सप्लाई की स्थिति सुधरने के बाद उत्पादन बढ़ाने के लिए जारी आपात निर्देश वापस ले लिए गए. अब सरकार ने इसी अनुभव के आधार पर एक स्थायी व्यवस्था तैयार की है.

रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी को सबसे बड़ा टारगेट

नए शेड्यूल के तहत सबसे बड़ा LPG उत्पादन लक्ष्य रिलायंस इंडस्ट्रीज की गुजरात के जामनगर स्थित घरेलू टैरिफ एरिया यानी DTA रिफाइनरी को दिया गया है. 3.3 करोड़ टन सालाना क्षमता वाली इस रिफाइनरी के लिए 18,000 टन प्रतिदिन LPG उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है.

जामनगर में रिलायंस की एक दूसरी रिफाइनरी भी है, जिसकी सालाना क्षमता 3.52 करोड़ टन है. हालांकि यह निर्यात उन्मुख रिफाइनरी है और इसके लिए LPG उत्पादन का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है.

सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन LPG उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है. वहीं, रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की गुजरात के वाडीनार स्थित रिफाइनरी को रोजाना 4,480 टन LPG उत्पादन का लक्ष्य मिला है. ONGC और GAIL जैसी अपस्ट्रीम गैस कंपनियों और प्रोसेसर्स को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है, जिनके लिए कुल 6,460 टन प्रतिदिन का लक्ष्य रखा गया है.

स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ाना होगा

सरकार ने कंपनियों को सिर्फ LPG उत्पादन बढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं दी है, बल्कि स्टोरेज, सप्लाई और ट्रांसपोर्ट के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने को कहा है. आदेश के तहत सरकारी, संयुक्त उपक्रम और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों व अपस्ट्रीम कंपनियों को तय उत्पादन क्षमता के अनुरूप LPG के भंडारण, निकासी और परिवहन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा. कंपनियां इसके लिए अपनी व्यवस्था करने के साथ रेलवे और सड़क टैंकर जैसी अन्य एजेंसियों की मदद भी ले सकेंगी.

मौजूदा ढांचे से ज्यादा LPG बनाने पर जोर

सरकार ने कंपनियों को ऐसी तकनीकों और प्रक्रियाओं पर भी काम करने को कहा है, जिनसे मौजूदा रिफाइनिंग ढांचे से अधिक LPG का उत्पादन किया जा सके. इसमें तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव होने पर नैफ्था को LPG में बदलने और फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट में जरूरी अपग्रेड जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं. सरकार का फोकस मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल कर LPG उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर है.

जरूरत पड़ने पर सरकार दे सकेगी उत्पादन बढ़ाने का आदेश

नए ढांचे के तहत केंद्र सरकार को जरूरत पड़ने पर रिफाइनरियों, तेल विपणन कंपनियों और अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देने का अधिकार होगा. अगर सरकार को लगता है कि घरेलू LPG की पर्याप्त उपलब्धता, उचित वितरण और सही कीमत पर सप्लाई बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाना जरूरी है, तो वह कंपनियों को तय मात्रा और अवधि के लिए उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकती है.

ऐसे निर्देश मिलने के बाद कंपनियों को निर्धारित समय के भीतर उत्पादन बढ़ाना होगा. जरूरत पड़ने पर LPG उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले इनपुट की अन्य क्षेत्रों में खपत पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

हर छह महीने में होगा उत्पादन शेड्यूल का अपडेट

सरकार ने इस व्यवस्था को समय के साथ अपडेट रखने के लिए उत्पादन शेड्यूल की नियमित समीक्षा का भी प्रावधान किया है. केंद्र सरकार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को उत्पादन शेड्यूल को अपडेट करेगी.

नई रिफाइनरियों, अपस्ट्रीम कंपनियों या मौजूदा संयंत्रों में तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के जरिए बढ़ने वाली अतिरिक्त LPG उत्पादन क्षमता को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा.

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया संकट के दौरान अपनाए गए आपात कदमों से आगे बढ़ते हुए सरकार ने LPG सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार किया है. इसका लक्ष्य साफ है, अगर भविष्य में आयात बाधित होता है, तो देश घरेलू उत्पादन बढ़ाकर रसोई गैस की सप्लाई को बनाए रख सके.
 


रिलायंस इंडस्ट्रीज और रोल्स-रॉयस की साझेदारी, AMCA के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन विकसित करने की तैयारी

इंजन के डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और डिलीवरी पर होगा फोकस. सोमवार को RIL के शेयरों पर रहेगी नजर

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों पर सोमवार को निवेशकों की नजर रहेगी. कंपनी ने भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन विकसित करने को लेकर ब्रिटिश एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी रोल्स-रॉयस के साथ साझेदारी की योजना का ऐलान किया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि प्रस्तावित साझेदारी के तहत इंजन के डिजाइन, विकास, निर्माण और डिलीवरी पर काम किया जाएगा.

भारत में एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की योजना

दोनों कंपनियां भारत में एक समर्पित एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की संभावनाएं भी तलाशेंगी. यह कॉम्प्लेक्स पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में काम कर सकता है. रिलायंस का कहना है कि प्रस्तावित कॉम्प्लेक्स इंजन डिजाइन और डेवलपमेंट से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, प्रोडक्शन और पूरे लाइफसाइकिल सपोर्ट तक एक मजबूत घरेलू क्षमता विकसित करने में मदद करेगा.

स्वदेशी एयरो-इंजन इकोसिस्टम बनाने पर जोर

रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने कहा कि रोल्स-रॉयस के साथ कंपनी का उद्देश्य उन्नत प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में उसकी वैश्विक विशेषज्ञता को रिलायंस की टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता और एग्जीक्यूशन क्षमताओं के साथ जोड़ना है. उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के जरिए भारत में एक मजबूत और स्वदेशी एयरो-इंजन इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य है.

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत रक्षा निर्माण को मजबूत करने और सैन्य उपकरणों व प्रोपल्शन सिस्टम के आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दे रहा है. रोल्स-रॉयस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तुफान एर्गिनबिल्गिक ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की इंजीनियरिंग और इंजन निर्माण विशेषज्ञता को भारत के औद्योगिक इकोसिस्टम में रिलायंस की मजबूत स्थिति के साथ जोड़ेगी.

उन्होंने कहा कि भारत में कंपनी की मौजूदा साझेदारियों और क्षमताओं के साथ यह सहयोग देश में एक मजबूत और आत्मनिर्भर एयरोस्पेस इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा.

AMCA के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावना

रिलायंस के अनुसार, प्रस्तावित एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स का इस्तेमाल सिर्फ AMCA कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा. यह रक्षा, सिविल एयरोस्पेस और अगली पीढ़ी के पावर व प्रोपल्शन सिस्टम से जुड़े अन्य सहयोग के अवसर भी पैदा कर सकता है.

AMCA भारत का प्रस्तावित पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है. इसके लिए स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम का विकास देश की उन्नत सैन्य विमानन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. हालांकि, रिलायंस और रोल्स-रॉयस के बीच प्रस्तावित साझेदारी अभी आवश्यक मंजूरियों और दोनों कंपनियों के बीच आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी.
 

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मुंबई में FDA का बड़ा एक्शन, एक्सपायर्ड ड्रिंक्स मिलने पर पारले एग्रो से जुड़ा गोदाम सील

चेंबूर स्थित वेयरहाउस में रातभर चली जांच, एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री और आवाजाही पर रोक; दो वाहन भी जब्त

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मुंबई में पेय पदार्थ निर्माता पारले एग्रो से जुड़े एक गोदाम को सील कर दिया है. FDA के अनुसार, चेंबूर स्थित इस वेयरहाउस में Appy Fizz, Frooti और Candy Juice के एक्सपायर्ड बैच पाए गए, जिसके बाद कार्रवाई की गई.

रातभर चला FDA का निरीक्षण

FDA के आठ अधिकारियों की टीम ने 13 अगस्त की शाम 6 बजे से 14 अगस्त की सुबह 5 बजे तक प्रयाग नगर में एलयू गडकरी मार्ग पर स्थित Velocity Express के गोदाम का निरीक्षण किया. यह गोदाम चेंबूर नाका के पास स्थित है. निरीक्षण के दौरान एक्सपायर्ड उत्पादों की आवाजाही और बिक्री को तुरंत रोक दिया गया. FDA ने स्टॉक के परिवहन में इस्तेमाल हो रहे दो वाहनों को भी जब्त कर लिया.

अगले आदेश तक सील रहेगा परिसर

FDA ने स्पष्ट किया है कि गोदाम अगले आदेश तक सील रहेगा. इस दौरान परिसर से किसी भी सामान को बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होगी. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब महाराष्ट्र FDA खाद्य कारोबार, रेस्तरां और डिलीवरी नेटवर्क की जांच को लगातार तेज कर रहा है.

होटल, रेस्तरां और ढाबों पर भी सख्ती

FDA के मुताबिक, 13 अगस्त तक राज्य में 109 होटल, रेस्तरां और ढाबों का निरीक्षण किया गया. इनमें 49 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए, जबकि चार के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए. फिल्म सिटी के गोरेगांव ईस्ट स्थित Bollywood Cafe में भी जांच के दौरान कई खामियां मिलीं. अधिकारियों ने वहां बिना धुले खाना पकाने के बर्तन, बड़ी संख्या में मक्खियों की मौजूदगी और रसोई में जमा गंदा पानी व खाद्य अपशिष्ट पाया.

क्विक-कॉमर्स वेयरहाउस भी FDA के निशाने पर

FDA ने क्विक-कॉमर्स कंपनियों के डिलीवरी वेयरहाउस की जांच भी तेज कर दी है. विभिन्न निरीक्षणों में स्टोरेज क्षेत्रों में कॉकरोच, एक्सपायर्ड मांस, खराब सब्जियां, चूहों और कीटों की बीट तथा गंदे फर्श पर रखे खाद्य पैकेट जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं.

13 अगस्त को FDA ने 86 क्विक-कॉमर्स आउटलेट्स का निरीक्षण किया. इनमें से 60 को सुधार नोटिस जारी किए गए, 14 के लाइसेंस निलंबित किए गए और एक आउटलेट को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया.

Instamart के गोदामों में भी मिलीं खामियां

बांद्रा के हिल रोड स्थित Instamart के एक वेयरहाउस में निरीक्षकों ने स्टोरेज एरिया में कॉकरोचों की आवाजाही, खाद्य उत्पादों के पास कीटों की बीट, धूल और मकड़ी के जाले, जंग लगी शेल्फ, क्षतिग्रस्त फर्श और चींटियों की समस्या पाई. वहीं, अंधेरी वेस्ट में आजाद नगर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक अन्य Instamart आउटलेट में करी-कट चिकन मिला, जिसकी एक्सपायरी दो दिन पहले हो चुकी थी.

विज्ञापनों पर भी FDA की नजर

FDA की कार्रवाई सिर्फ खाद्य प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं है. नियामक ने Vimal Elaichi अभियान में नजर आने वाले अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

FDA का कहना है कि यह विज्ञापन पान मसाला या तंबाकू से जुड़े उत्पाद के अप्रत्यक्ष प्रचार की श्रेणी में आ सकता है. तीनों अभिनेताओं को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. नियामक ने चेतावनी दी है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
 


मुथूट फिनकॉर्प का मुनाफा करीब 3 गुना बढ़कर ₹705 करोड़, अब IPO से जुटाएगी ₹3,000 करोड़

मुथूट फिनकॉर्प ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब तीन गुना बढ़कर 705.48 करोड़ रुपये पहुंच गया. मजबूत नतीजों के बीच कंपनी अब IPO के जरिए 3,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की तैयारी में है.

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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मुथूट पप्पाचन ग्रुप की प्रमुख वित्तीय सेवा कंपनी मुथूट फिनकॉर्प ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जोरदार मुनाफा दर्ज किया है. सोने के बदले कर्ज देने के कारोबार में मजबूत वृद्धि के चलते कंपनी की आय और मुनाफे में बड़ा उछाल देखने को मिला है. वित्त वर्ष 2027 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ करीब तीन गुना बढ़कर 705.48 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 179.30 करोड़ रुपये था.

कुल आय भी दोगुनी से ज्यादा

कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर दोगुनी से अधिक बढ़कर 3,158.83 करोड़ रुपये हो गई. वहीं, परिचालन आय 101 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,167.10 करोड़ रुपये पहुंच गई. ब्याज से होने वाली आय भी मजबूत रही और वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के 1,427.40 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 2,781.88 करोड़ रुपये हो गई.

गोल्ड लोन कारोबार ने बढ़ाई कमाई

मुथूट फिनकॉर्प का मुख्य कारोबार सोने के बदले कर्ज उपलब्ध कराने का है. कंपनी के वित्तीय कारोबार में मजबूत वृद्धि का असर सीधे उसके राजस्व और मुनाफे पर देखने को मिला. पहली तिमाही में कंपनी ने 22.33 प्रतिशत का शुद्ध लाभ मार्जिन दर्ज किया, जो मजबूत आय और बेहतर परिचालन प्रदर्शन का संकेत है.

IPO से 3,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी

मजबूत तिमाही नतीजों के बीच मुथूट फिनकॉर्प अब शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है. कंपनी ने IPO के जरिए 3,000 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए बाजार नियामक SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP पहले ही दाखिल कर दिया है.

जुटाई गई रकम का कहां होगा इस्तेमाल?

IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने पूंजी आधार को मजबूत करने में करेगी. कंपनी बड़े शहरों में विस्तार, भविष्य की पूंजी जरूरतों और कारोबार की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस फंड का उपयोग करने की योजना बना रही है. इसमें कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म और विभिन्न प्रकार के लोन पोर्टफोलियो के विस्तार से जुड़ी जरूरतें भी शामिल हैं.

मजबूत तिमाही नतीजों और IPO की तैयारी के साथ मुथूट फिनकॉर्प अब अपने कारोबार के अगले विस्तार चरण की ओर बढ़ रही है. कंपनी की नजर गोल्ड लोन कारोबार को मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल और अन्य लोन सेगमेंट में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर है.
 


इस हफ्ते प्राइमरी मार्केट में धमाल, 7 कंपनियां जुटाएंगी 6,400 करोड़ रुपये से ज्यादा

लगातार आ रहे IPO से साफ है कि प्राइमरी मार्केट में कंपनियों की फंड जुटाने की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं. अब निवेशकों की नजर इन इश्यू की कीमत, कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार की स्थितियों पर रहेगी, जो इन IPO को मिलने वाले रिस्पॉन्स को तय करेंगे.

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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प्राइमरी मार्केट में अगले हफ्ते जबरदस्त हलचल देखने को मिलेगी. 17 से 21 अगस्त के बीच 7 कंपनियां अपने IPO लॉन्च करने जा रही हैं और इनके जरिए 6,400 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने की तैयारी है. Horizon Industrial Parks और Lalita Jewellery Mart जैसे बड़े नामों के साथ ज्वैलरी, एंटरटेनमेंट, एसेट मैनेजमेंट और अन्य सेक्टरों की कंपनियां भी निवेशकों के सामने अपना इश्यू लेकर आएंगी. लगातार नए इश्यू आने से प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के लिए कई विकल्प खुलेंगे.

आज खुलेंगे दो बड़े IPO

हफ्ते की शुरुआत Horizon Industrial Parks और Lalita Jewellery Mart के IPO के साथ होगी. Blackstone समर्थित Horizon Industrial Parks 2,600 करोड़ रुपये का IPO लेकर आ रही है. यह पूरी तरह से फ्रेश इश्यू होगा और कंपनी जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी. कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 57 से 60 रुपये प्रति शेयर तय किया है. इसी दिन Lalita Jewellery Mart का 1,700 करोड़ रुपये का IPO भी खुलेगा. इसमें 1,200 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और 500 करोड़ रुपये तक का Offer For Sale यानी OFS शामिल है. कंपनी ने इसका प्राइस बैंड 190 से 201 रुपये प्रति शेयर तय किया है.

18 अगस्त को इन कंपनियों की एंट्री

18 अगस्त को Shankesh Jewellers और Sunshine Pictures के IPO निवेशकों के लिए खुलेंगे. Shankesh Jewellers की योजना करीब 367 करोड़ रुपये जुटाने की है और इसके IPO का प्राइस बैंड 88 से 93 रुपये प्रति शेयर रखा गया है. वहीं, फिल्म और टेलीविजन प्रोड्यूसर Sunshine Pictures करीब 282 करोड़ रुपये का IPO लेकर आएगी. कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 342 से 360 रुपये प्रति शेयर तय किया है.

19 और 20 अगस्त को भी रहेगा IPO का जोर

19 अगस्त को Gaja Alternative Asset Management का 550 करोड़ रुपये का IPO खुलेगा. इसमें 450 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू और 100 करोड़ रुपये तक का OFS शामिल होगा. कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड 152 से 160 रुपये प्रति शेयर तय किया है. इसके बाद 20 अगस्त को Tempsens Instruments का IPO खुलेगा. कंपनी 95 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू लाएगी, जबकि इसके साथ 1.85 करोड़ शेयरों का OFS भी शामिल होगा. कंपनी के प्राइस बैंड की घोषणा की जानी है.

21 अगस्त को Augmont Enterprises का IPO

हफ्ते का आखिरी IPO 21 अगस्त को Augmont Enterprises का होगा. कंपनी की योजना करीब 825 करोड़ रुपये जुटाने की है. इसमें 620 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 205 करोड़ रुपये का OFS शामिल है. कंपनी के IPO का प्राइस बैंड मंगलवार को घोषित किए जाने की उम्मीद है.

अगले हफ्ते के बाद भी नहीं थमेगी रफ्तार

IPO बाजार की यह हलचल अगले हफ्ते तक सीमित नहीं रहेगी. Skyways Air Services भी 24 अगस्त को करीब 583 करोड़ रुपये का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है. इन नए इश्यू के साथ वर्ष 2026 में IPO बाजार में उतरने वाली कंपनियों की संख्या बढ़कर करीब 55 तक पहुंचने की उम्मीद है. लगातार आ रहे IPO से साफ है कि प्राइमरी मार्केट में कंपनियों की फंड जुटाने की गतिविधियां तेज बनी हुई हैं. अब निवेशकों की नजर इन इश्यू की कीमत, कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार की स्थितियों पर रहेगी, जो इन IPO को मिलने वाले रिस्पॉन्स को तय करेंगे.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


LIC के दम पर OFS से रिकॉर्ड फंड जुटाव, 2026 में अब तक 62,730 करोड़ रुपये आए

वर्ष 2026 में अब तक 23 OFS सौदों के जरिए 20 कंपनियों ने करीब 62,730 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस रिकॉर्ड जुटाव में LIC का योगदान सबसे अहम रहा है

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ऑफर फॉर सेल (OFS) से रकम जुटाने का सिलसिला वर्ष 2026 में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. अब तक हुए 23 OFS सौदों के जरिए 20 कंपनियों ने करीब 62,730 करोड़ रुपये जुटाए हैं. आंकड़े उपलब्ध होने के बाद OFS के जरिए जुटाई गई यह सबसे बड़ी रकम बताई जा रही है. इस उपलब्धि में भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC की हिस्सेदारी बिक्री का सबसे बड़ा योगदान रहा है.

सरकारी कंपनियों से आया सबसे ज्यादा पैसा

इस साल OFS के जरिए जुटाई गई कुल रकम में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी 93 फीसदी से अधिक रही है. इन कंपनियों से करीब 58,425.12 करोड़ रुपये जुटाए गए. इस दौरान इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉर्पोरेशन यानी IRFC, आंध्र सीमेंट्स और ईस्ट इंडिया ड्रम्स एंड बैरल्स ने दो-दो बार OFS का सहारा लिया.

LIC की हिस्सेदारी बिक्री बनी सबसे बड़ा फैक्टर

सरकार ने इस महीने की शुरुआत में LIC में OFS के जरिए बड़ी हिस्सेदारी बेची थी. विनिवेश से अब तक जुटाई गई कुल रकम में OFS का योगदान 98 फीसदी से अधिक रहा है. करीब 51,787.29 करोड़ रुपये OFS के जरिए जुटाए गए, जिसमें अकेले LIC का योगदान लगभग 31,514.89 करोड़ रुपये रहा. यही वजह है कि इस साल OFS से रिकॉर्ड फंड जुटाने में LIC की हिस्सेदारी बिक्री को अहम माना जा रहा है.

सफल OFS से बढ़ा सरकार का भरोसा

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक मई में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और कोल इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री की सफलता के बाद केंद्र सरकार का OFS के जरिए और फंड जुटाने का भरोसा बढ़ा. सरकार राजस्व बढ़ाने और विनिवेश लक्ष्य हासिल करने के लिए इस माध्यम का लगातार इस्तेमाल कर रही है.

कच्चे तेल की तेजी ने भी बढ़ाई फंड की जरूरत

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा. कच्चे तेल की महंगाई से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के आयात बिल पर असर पड़ता है, जिससे सरकार के खर्च और राजकोषीय गणित पर भी दबाव बढ़ सकता है. ऐसे माहौल में हिस्सेदारी बिक्री के जरिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना सरकार के लिए अहम हो गया.

विनिवेश लक्ष्य का दो-तिहाई हिस्सा हासिल

हिस्सेदारी बिक्री से केंद्र सरकार को अपने सालाना विनिवेश लक्ष्य का करीब दो-तिहाई हिस्सा हासिल करने में मदद मिली है. निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग यानी DIPAM के मुताबिक अब तक करीब 52,716.02 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने करीब 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है.

2019 के बाद सबसे मजबूत प्रदर्शन

विनिवेश के जरिए फंड जुटाने के लिहाज से वित्त वर्ष 2026-27, वित्त वर्ष 2018-19 के बाद सबसे मजबूत वर्षों में शामिल हो गया है. वित्त वर्ष 2018-19 में विनिवेश से करीब 84,972 करोड़ रुपये जुटाए गए थे. मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक के आंकड़े बताते हैं कि सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में OFS सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है और LIC की हिस्सेदारी बिक्री ने इस रफ्तार को नई मजबूती दी है.
 

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शुक्रवार की बिकवाली के बाद बाजार में क्या होगा? आज इन बड़े शेयरों पर रखें नजर

शुक्रवार को सेंसेक्स 388.19 अंक की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 112.10 अंक टूटकर 24,471.70 अंक के स्तर पर बंद हुआ.

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Monday, 17 August, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को कमजोरी देखने को मिली. कारोबार के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला. कमजोर वैश्विक संकेतों, मुनाफावसूली और आर्थिक व भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया.

शुक्रवार को सेंसेक्स 388.19 अंक की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 112.10 अंक टूटकर 24,471.70 अंक के स्तर पर बंद हुआ. दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र का अंत हुआ.

गिरावट के पीछे क्या रहे कारण?

शेयर बाजार में शुक्रवार की गिरावट के पीछे निवेशकों की मुनाफावसूली एक प्रमुख कारण रही. इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और आर्थिक व भू-राजनीतिक मोर्चे पर बनी अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को सतर्क रखा. कई सेक्टरों में बिकवाली के दबाव से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर असर देखने को मिला.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, नए कारोबारी सत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज, PB Fintech, Juniper Hotels, Bank of India, Dr Reddy's Laboratories, Ather Energy, HAL, BEML, LEAP India और Eicher Motors के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. रिलायंस इंडस्ट्रीज और Rolls-Royce ने भारत के Advanced Medium Combat Aircraft यानी AMCA कार्यक्रम के लिए साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई है और दोनों कंपनियां स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन विकसित करने की संभावनाएं तलाशेंगी. PB Fintech की इकाई Policybazaar Insurance Brokers को IRDAI से शो-कॉज नोटिस मिला है. Juniper Hotels नई दिल्ली में एक होटल परियोजना के लिए करीब 850 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जबकि Bank of India ने Medium-Term Notes के जरिए 1 अरब डॉलर तक जुटाने को मंजूरी दी है.

Dr Reddy's Laboratories की Bachupally स्थित FTO-3 यूनिट के USFDA निरीक्षण के बाद चार टिप्पणियों वाला Form 483 जारी हुआ है. Ather Energy के शेयरधारकों ने 1,200 करोड़ रुपये के preferential issue को मंजूरी दे दी है. HAL ने Adani Defence Systems and Technologies और BEML के साथ Prachand Light Combat Helicopter के fuselage structures के निर्माण के लिए साझेदारी की है. BEML को Mauritius से 6.65 मिलियन डॉलर का ऑर्डर मिला है. LEAP India में Capital Group की Smallcap World Fund Inc, Prudential Assurance Company, Habrok India Master LP, Aagam Investments और GDN Investments जैसे निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीदी है. वहीं, Eicher Motors ने Continental GT 650 मोटरसाइकिल का अपडेटेड मॉडल लॉन्च किया है. इन सभी कॉरपोरेट अपडेट, निवेश, ऑर्डर और साझेदारियों के चलते आज इन शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


विकसित भारत की ‘सप्तधारा’: मैन्युफैक्चरिंग से AI तक, पीएम मोदी ने बताया 2047 का रोडमैप

लाल किले से पीएम मोदी ने देश की 7 बड़ी ताकतों पर रखा फोकस. 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग देने का ऐलान, मैन्युफैक्चरिंग, किसान, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी और सॉफ्ट पावर को बताया विकसित भारत की बुनियाद

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 15 August, 2026
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80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 2047 तक ‘विकसित भारत’ का रोडमैप पेश किया. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन सामने रखा. उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 साल में भारत उन क्षेत्रों में तेज प्रगति कर सकता है, जिनमें पिछले कई दशकों में अपेक्षित गति नहीं मिल सकी.

प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, किसानों और फूड प्रोसेसिंग से लेकर कनेक्टिविटी, रक्षा और साइबर सुरक्षा से लेकर ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर तक, सात प्रमुख क्षेत्रों को देश की भविष्य की ताकत बताया. इसी कड़ी में उन्होंने अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग देने का भी बड़ा ऐलान किया.

मैन्युफैक्चरिंग: पुर्जों से लेकर पूरे प्रोडक्ट तक भारत में निर्माण

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग में केवल बड़े उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. देश में छोटे-छोटे कंपोनेंट और पुर्जों से लेकर पूरी मशीन और तैयार उत्पाद बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी.

उन्होंने उद्योग जगत से ग्लोबल मार्केट में भारतीय उत्पादों की पहचान मजबूत क्वालिटी और भरोसे के साथ बनाने का आह्वान किया. उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत में बना सामान दुनिया के बाजारों तक पहुंचे और ‘मेक इन इंडिया’ को ग्लोबल सप्लाई चेन से मजबूती से जोड़ा जाए.

पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर को भी देश की आत्मनिर्भरता के लिए अहम बताया. उन्होंने कहा कि चिप आज लगभग हर आधुनिक क्षेत्र की जरूरत बन चुकी है और भारत इस सेक्टर में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है.

खेत से सीधे ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने की तैयारी

‘सप्तधारा’ की दूसरी शक्ति के रूप में प्रधानमंत्री ने किसानों और फूड प्रोडक्शन-प्रोसेसिंग सेक्टर को रखा. उन्होंने कहा कि भारत के मसाले, फल, फूल और दूसरे कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजार में बड़ी संभावनाएं हैं.

पीएम मोदी का जोर सिर्फ कच्चे कृषि उत्पादों के निर्यात पर नहीं, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर भी रहा. यानी खेत से निकलने वाला उत्पाद प्रोसेस होकर अधिक मूल्य के साथ दुनिया के बाजारों तक पहुंचे.

AI, डेटा सेंटर और क्वांटम

प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ‘सप्तधारा’ की तीसरी शक्ति बताया. उन्होंने कहा कि आज का दौर डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी का है और भारत को इन उभरती तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ना होगा. पीएम मोदी ने ऐलान किया कि अगले एक साल में देश के 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग दी जाएगी. यह कदम देश के युवाओं को नई तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया का इनोवेशन हब बनना होगा. साथ ही डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया.

गति शक्ति और कनेक्टिविटी

प्रधानमंत्री की ‘सप्तधारा’ में चौथी शक्ति गति शक्ति और बेहतर कनेक्टिविटी है. उन्होंने कहा कि देश में लोगों और सामान की आवाजाही को तेज, आसान और अधिक किफायती बनाने की जरूरत है. शहरों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने, पोर्ट और लैंड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फोकस रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार और निवेश को भी गति मिलने की उम्मीद है.

आत्मनिर्भर भारत की सुरक्षा ढाल

पीएम मोदी ने रक्षा शक्ति को पांचवां प्रमुख स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता भारत की रणनीतिक और आर्थिक मजबूती दोनों के लिए जरूरी है. उन्होंने साइबर सुरक्षा को भी आज की रक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया. डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ साइबर खतरे बढ़ रहे हैं और इस चुनौती से निपटने में भारत की युवा शक्ति बड़ी भूमिका निभा सकती है.

ऊर्जा सुरक्षा से समुद्री अर्थव्यवस्था तक

छठी शक्ति के तौर पर प्रधानमंत्री ने ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर जोर दिया. ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को भविष्य की अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्र बताया गया. प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भी देश की बड़ी जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि भारत को कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों के लिए बाहरी निर्भरता कम करनी होगी.

सोलर एनर्जी के विस्तार और पीएम सूर्यघर योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा को आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा. वहीं, लंबी समुद्री सीमा भारत की ब्लू इकोनॉमी के लिए बड़ी ताकत है. फिशरीज, कोस्टल टूरिज्म और समुद्री तकनीक जैसे क्षेत्रों में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं.

योग से लेकर फिल्मों और डिजिटल कंटेंट तक

‘सप्तधारा’ की सातवीं और आखिरी शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है. पीएम मोदी ने कहा कि योग ने दुनिया के करोड़ों लोगों को भारत से जोड़ा है. इसके साथ ही आयुर्वेद, होलिस्टिक हेल्थकेयर, आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन, हैंडीक्राफ्ट और भारतीय संस्कृति में भी देश की मजबूत वैश्विक पहचान बनाने की क्षमता है.

उन्होंने फिल्म, गेमिंग, VFX, एनीमेशन और डिजिटल कंटेंट जैसे उभरते क्रिएटिव सेक्टर को भी भारत की सॉफ्ट पावर का हिस्सा बताया. इन क्षेत्रों के जरिए भारत सांस्कृतिक प्रभाव के साथ-साथ नई आर्थिक संभावनाएं भी पैदा कर सकता है.

आत्मनिर्भरता और ग्लोबल पहुंच, दोनों पर जोर

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भरता को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि संकट के समय ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक, तकनीक और महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए बाहरी निर्भरता देश के सामने चुनौती बन सकती है.

हालांकि, आत्मनिर्भरता के साथ उनका जोर भारतीय उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने पर भी रहा. टेक्सटाइल, मशीन, दवाइयों और दूसरे भारतीय उत्पादों की दुनिया में मजबूत पहचान बनाने के लिए क्वालिटी और प्रतिस्पर्धा को अहम बताया गया.

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन भारत की अर्थव्यवस्था को सात प्रमुख आधारों पर मजबूत करने की रणनीति के रूप में सामने आया है. मैन्युफैक्चरिंग से लेकर AI तक और किसानों से लेकर ग्रीन एनर्जी तक, इन क्षेत्रों पर आने वाले वर्षों में तेजी से काम कर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है.