आखिर यूलिप को लेकर क्‍यों है इंडस्‍ट्री में उत्‍साह, किस किस ने लिया एक्‍सेस

लॉन्च होने के बाद से अब तक 13 कंपनियों ने यूलिप को लेकर एनडीए नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर साइन कर दिए हैं और यूलिप का डाटा एक्सेस कर लिया है.

Last Modified:
Saturday, 01 October, 2022
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के लिए पहली बार लॉजिस्टिक पॉलिसी को लॉन्च करने के बाद उद्योगपतियों में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. लॉन्च होने के बाद से अब तक 13 कंपनियों ने यूलिप को लेकर नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट एनडीए पर साइन कर दिए हैं और यूलिप का डाटा एक्सेस कर लिया है. लॉजिस्टिक पॉलिसी में यूलिप यानी यूनिफाइड लॉजिस्टिक इंटरफेस प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जिसके जरिए उद्यमी अपने कारोबार को आसानी से और कई सुविधाओं के साथ कर सकते हैं.

किन-किन कंपनियों ने किया है साइन
यूलिप पर अब तक 13 कंपनियां एनडीए साइन कर चुकी हैं जिन कंपनियों ने इस पर साइन किया है, उनमें प्रमुख तौर पर मैप माय इंडिया,  कार्गो एक्सचेंज, फ्रेट फॉक्स, कोमोव, इंटुज़िन, ई कॉन्टैक्ट यस बैंक, सुपरप्रोक्योर, कार्गो शक्ति, क्लाउडस्ट्रेट्स, शिप लाइट और  एचसीजी जैसे कंपनी हैं, जिन्होंने यूलिप पर एक्सेस ले लिया है.

आखिर क्या है यूलिप
लॉजिस्टिक पॉलिसी में यूलिप को एक पोर्टल बनाया गया है. जो इंडस्ट्री को अलग-अलग मंत्रालयों में मौजूद संसाधनों की सूचना सिक्योर एक्सेस के साथ उपलब्ध करवाता है. मौजूदा समय में 7 मंत्रालयों की 30 सेवाएं इसके अंतर्गत आती हैं, जिसमें जाकर उद्यमी सुरक्षित तरीके से उसका लाभ उठा सकते हैं.

कैसे कर सकते हैं एक्सेस
यूलिप पर "https://goulip.in/” इसके जरिए लॉगिन किया जा सकता है. लॉग इन करने के बाद अगर समस्या आ रही हो तो उसके लिए सरकार की ओर से 24 घंटे के सपोर्ट सिस्टम का भी इंतजाम किया गया है. जो इस पर आने वाले लोगों को सहायता मुहैया कराती है. यूलिप के जरिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर सभी लॉजिस्टिक स्टेकहोल्डर अपने ड्राइवर का वेरिफिकेशन और गाड़ी की जानकारी एक सिंगल क्लिक पर हासिल कर सकते हैं. यूलिप के जरिए उन गाड़ियों को ट्रैक और ट्रेस भी किया जा सकता है जो माल लेकर आ या जा रही हैं. यूलिप के जरिए जहां पेपर वर्क कम होता है, वही गाड़ी के खाली वापस लौटने की भी संभावना बेहद कम हो जाती है.

पीएम मोदी ने लॉन्च की थी लॉजिस्टिक योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 सितंबर को नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी को दिल्ली के विज्ञान भवन से लॉन्च किया था,जिसमें उन्होंने कहा था कि इस पॉलिसी के आने के बाद भारत की सप्लाई चेन और मजबूत होगी. मात्र 11 दिनों में लॉजिस्टिक पॉलिसी को अब तक 13 कंपनियां इस्तेमाल करने के लिए दस्तावेज साइन कर चुकी है.


NTPC का ₹12,000 करोड़ जुटाने का प्लान, NCD जारी करने के प्रस्ताव को बोर्ड की मंजूरी

कंपनी यह रकम नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी कर जुटाएगी. इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी लेना जरूरी होगा.

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
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सरकारी क्षेत्र की प्रमुख बिजली कंपनी एनटीपीसी (NTPC Limited) ने अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. कंपनी के बोर्ड ने घरेलू बाजार से NCD जारी कर ₹12,000 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह राशि प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए अधिकतम 12 चरणों (ट्रेंच) में जुटाई जाएगी. कंपनी ने यह फैसला शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में लिया. इसी बैठक में NTPC ने जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के वित्तीय नतीजों को भी मंजूरी दी.

शेयरधारकों की मंजूरी के बाद शुरू होगी प्रक्रिया

NTPC ने बताया कि NCD जारी करने की योजना को लागू करने के लिए शेयरधारकों से विशेष प्रस्ताव (Special Resolution) की मंजूरी लेनी होगी. मंजूरी मिलने के बाद कंपनी एक साल तक या वित्त वर्ष 2027-28 की अगली वार्षिक आम बैठक (AGM) तक, जो भी पहले हो, NCD जारी कर सकेगी.

सिक्योर्ड या अनसिक्योर्ड NCD जारी करने का विकल्प

कंपनी के मुताबिक, वह जरूरत के अनुसार सिक्योर्ड या अनसिक्योर्ड, टैक्सेबल या टैक्स-फ्री और क्यूमुलेटिव या नॉन-क्यूमुलेटिव NCD जारी कर सकती है. हर ट्रेंच के लिए अवधि, ब्याज दर (कूपन रेट), सिक्योरिटी स्ट्रक्चर और लिस्टिंग से जुड़ी शर्तें बाद में तय की जाएंगी. NTPC ने कहा कि अलग-अलग चरणों में जारी किए जाने वाले NCD को जरूरत के अनुसार बीएसई, एनएसई या दोनों स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध किया जा सकता है.

क्या होता है NCD?

नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) एक तरह का डेट इंस्ट्रूमेंट होता है, जिसके जरिए कंपनियां निवेशकों से पैसा उधार लेती हैं. इसके बदले निवेशकों को तय ब्याज दिया जाता है. NCD को भविष्य में कंपनी के शेयरों में बदला नहीं जा सकता, इसलिए इसे नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर कहा जाता है.
 


टैरिफ का दबाव या Q1 नतीजों का सहारा? आज इन संकेतों से तय होगी शेयर बाजार की चाल

बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 331.62 अंक यानी 0.43% गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 102.15 अंक फिसलकर 23,767.45 पर पहुंच गया था.

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Monday, 27 July, 2026
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भारतीय शेयर बाजार के लिए नया कारोबारी सप्ताह कई अहम घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों के बीच शुरू होने जा रहा है. पिछले सप्ताह लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए बाजार पर इस सप्ताह भी दबाव बने रहने की आशंका है. निवेशकों की नजर अमेरिका के नए टैरिफ, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी.

बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 331.62 अंक यानी 0.43% गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)निफ्टी 102.15 अंक फिसलकर 23,767.45 पर आ गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया था. पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 2,091.68 अंक (2.67%) और निफ्टी 566.85 अंक (2.32%) लुढ़क गया.

अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक संकेतों पर रहेगी नजर

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका के उस फैसले का रहा, जिसमें भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है. इस कदम से वैश्विक व्यापार और भारतीय निर्यात पर असर की आशंका बढ़ी है. ऐसे में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निवेशकों की नजर इस घटनाक्रम से जुड़े आगे के संकेतों पर रहेगी.

इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक भी बाजार के लिए अहम रहेगी. ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर फेड की टिप्पणी वैश्विक बाजारों की दिशा तय कर सकती है. वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे.

Q1 नतीजों से बढ़ेगी बाजार में हलचल

घरेलू मोर्चे पर जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों का सिलसिला जारी रहेगा. इस सप्ताह Coal India, BEL, Larsen & Toubro, Hindustan Unilever, Adani Enterprises, Asian Paints, Adani Ports, Bajaj Finance, Mahindra & Mahindra, Tata Steel, Maruti Suzuki, ITC और Sun Pharma जैसी दिग्गज कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी. इनके प्रदर्शन का असर संबंधित सेक्टरों और बाजार की चाल पर देखने को मिल सकता है. इसके अलावा निवेशकों की नजर जून महीने के औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़ों, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों के रुख पर भी रहेगी.

आज इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कॉर्पोरेट अपडेट्स के चलते आज कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. Waaree Renewable Technologies को दो बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स के ऑर्डर मिले हैं, जबकि NBCC को ₹108.85 करोड़ के नए वर्क ऑर्डर प्राप्त हुए हैं. Landmark Cars को अहमदाबाद में नया MG Experia शोरूम खोलने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है.

वहीं, Bank of Baroda ने विदेशी बाजार से फंड जुटाने की सीमा बढ़ाने का फैसला किया है. Indo Tech Transformers को NTPC से बड़ा ऑर्डर मिला है. IDFC First Bank ने ₹20,000 करोड़ तक पूंजी जुटाने की मंजूरी दी है, जबकि Sarda Energy ने ₹300 करोड़ के पूंजीगत निवेश को मंजूरी दी है. इसके अलावा Shadowfax Technologies में बड़ी ब्लॉक डील हुई है. Caliber Mining & Logistics और Gandhar Oil Refinery में विदेशी व संस्थागत निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीदी है. दूसरी ओर, HDFC Bank ने 25 अगस्त को अपने 1 अरब डॉलर के AT1 बॉन्ड्स को रिडीम करने का फैसला किया है. इन घटनाक्रमों के चलते इन शेयरों में आज अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.

पिछले सत्र में इन शेयरों पर रहा दबाव

शुक्रवार को सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. Eternal, Bajaj Finance, Mahindra & Mahindra, Bharti Airtel, Infosys, Asian Paints, Tata Steel और Sun Pharma में सबसे ज्यादा बिकवाली रही. वहीं HCL Tech, ITC, Axis Bank, Trent, Maruti Suzuki, Reliance Industries, TCS और Kotak Mahindra Bank ने बाजार को कुछ सहारा दिया.

विश्लेषकों का मानना है कि पिछले सप्ताह की तेज गिरावट के बाद इस सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. ऐसे में निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों के साथ-साथ कंपनियों के तिमाही नतीजों और प्रमुख कॉर्पोरेट अपडेट्स पर पैनी नजर रखनी होगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


जून तिमाही में Hindustan Zinc का दमदार प्रदर्शन, मुनाफा 145% उछला, रेवेन्यू 77% बढ़ा

तिमाही नतीजों के बाद Hindustan Zinc का शेयर लगभग सपाट कारोबार करता दिखा. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 0.35% प्रतिशत की तेजी के साथ 533 रुपये पर कारोबार करता दिथा.

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Friday, 24 July, 2026
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वेदांता समूह की कंपनी Hindustan Zinc ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में शानदार नतीजे पेश किए हैं. देश की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 145% बढ़कर ₹5,469 करोड़ पहुंच गया, जबकि ऑपरेशन से रेवेन्यू 77% की बढ़ोतरी के साथ ₹13,747 करोड़ रहा. बेहतर मेटल कीमतों और मजबूत सिल्वर कारोबार के दम पर कंपनी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज किया. बता दें, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने ₹2,234 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था.

कंपनी की परिचालन आय (Revenue from Operations) भी मजबूत रही. अप्रैल-जून तिमाही में यह 77% बढ़कर ₹13,747 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹7,771 करोड़ थी. तिमाही के दौरान कुल खर्च 33% बढ़कर ₹6,749 करोड़ रहा. वहीं, मार्च तिमाही के मुकाबले कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 9% बढ़ा. पिछली तिमाही में यह ₹5,033 करोड़ था.

सिल्वर बिजनेस बना ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन

हिंदुस्तान जिंक के सिल्वर बिजनेस ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट से कंपनी की आय सालाना आधार पर 169% बढ़कर ₹3,839 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह ₹1,426 करोड़ थी. हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 5% की हल्की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, जिंक, लेड और अन्य धातुओं से होने वाला रेवेन्यू 50% बढ़कर ₹9,146 करोड़ पहुंच गया. तिमाही आधार पर भी इसमें 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

मार्जिन और बैलेंस शीट भी हुई मजबूत

जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट मार्जिन बढ़कर 40% हो गया, जो पिछली तिमाही में 37% और एक साल पहले 29% था. इसी तरह ऑपरेटिंग मार्जिन भी बढ़कर 52% पर पहुंच गया. कंपनी की वित्तीय स्थिति भी पहले से मजबूत हुई है. जून 2026 के अंत तक नेटवर्थ 108% बढ़कर ₹23,587 करोड़ हो गई. साथ ही डेट-टू-इक्विटी रेशियो घटकर 0.32 गुना रह गया, जबकि एक साल पहले यह 1.19 गुना था.

शेयर पर क्या रहा असर?

तिमाही नतीजों के बाद Hindustan Zinc का शेयर लगभग सपाट कारोबार करता दिखा. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 0.35% प्रतिशत की तेजी के साथ 533 रुपये पर कारोबार करता दिथा. वहीं, पिछले एक सप्ताह में शेयर में 2% से अधिक की तेजी आई है. हालांकि, चांदी की कीमतों में नरमी के चलते पिछले एक महीने में इसमें 2% से ज्यादा और वर्ष 2026 में अब तक करीब 13% की गिरावट दर्ज की गई है.

लंबी अवधि की बात करें तो कंपनी ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है. शेयर ने पिछले एक साल में 19%, तीन साल में 68% और पांच साल में 62% का रिटर्न दिया है. कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹2.24 लाख करोड़ है.
 


जुलाई में निजी क्षेत्र की रफ्तार पड़ी सुस्त, 3 साल के निचले स्तर पर पहुंचा PMI

कमजोर मांग, बढ़ती लागत और सर्विस सेक्टर में सुस्ती के चलते कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार पर दबाव देखने को मिला.

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Friday, 24 July, 2026
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भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में जुलाई के दौरान सुस्ती दर्ज की गई है. HSBC Flash India PMI के अनुसार, जून में 57.1 पर रहने वाला कंपोजिट PMI जुलाई में घटकर 54.3 पर आ गया. यह मार्च 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है. हालांकि PMI अभी भी 50 के ऊपर है, जो विस्तार का संकेत देता है, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार पहले के मुकाबले काफी धीमी हो गई है.

कमजोर मांग और बढ़ती चुनौतियों का असर

रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ऑर्डर रद्द होने और ग्राहकों की ओर से कम पूछताछ के कारण नई मांग प्रभावित हुई है. कई उद्योगों को कच्चे माल की कमी का भी सामना करना पड़ा, जिससे उत्पादन पर दबाव बना रहा. नए ऑर्डर में बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसकी रफ्तार करीब साढ़े चार साल के सबसे निचले स्तर पर रही.

सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा सुस्ती

जुलाई में सर्विस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला. सर्विस PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जून के 57.4 से घटकर 53.1 पर पहुंच गया, जो पिछले 53 महीनों का सबसे निचला स्तर है. इससे साफ है कि सेवाओं से जुड़े कारोबार की रफ्तार में उल्लेखनीय कमी आई है.

वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया. मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई, हालांकि हेडलाइन PMI में मामूली गिरावट रही. इससे संकेत मिलता है कि उत्पादन जारी है, लेकिन उसकी गति धीमी पड़ गई है.

निर्यात बढ़ा, लेकिन लागत का दबाव कायम

रिपोर्ट में एक सकारात्मक संकेत यह भी मिला कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से मांग में सुधार हुआ है और खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निर्यात ऑर्डर बढ़े हैं. हालांकि, ईंधन, मजदूरी, कच्चे माल और परिवहन लागत में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों पर खर्च का दबाव बढ़ गया है. बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां उत्पादों और सेवाओं की कीमतें बढ़ा रही हैं, जिससे महंगाई का दबाव भी बना हुआ है.

रोजगार बढ़ा, लेकिन कारोबारी भरोसा घटा

जुलाई में लगातार सातवें महीने रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, हालांकि भर्ती की गति सीमित रही. दूसरी ओर, कारोबारी विश्वास छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच कंपनियां सतर्क रुख अपनाते हुए अतिरिक्त इन्वेंट्री जमा कर रही हैं.

कुल मिलाकर, भारतीय निजी क्षेत्र अब भी विस्तार के दौर में है, लेकिन कमजोर मांग, बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है. आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति और नीतिगत फैसले इस रुझान की दिशा तय करेंगे.


लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होगी Airtel Money, 10 अरब डॉलर से ज्यादा वैल्यूएशन का अनुमान

इस लिस्टिंग के जरिए कंपनी अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है और अफ्रीका के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है.

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Friday, 24 July, 2026
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भारती एयरटेल की अफ्रीकी इकाई Airtel Africa अपनी फिनटेक शाखा Airtel Money को वैश्विक बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है. कंपनी ने 2026 की दूसरी छमाही में Airtel Money को London Stock Exchange (LSE) पर सूचीबद्ध करने की योजना बनाई है. इस लिस्टिंग के जरिए कंपनी अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है और अफ्रीका के तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है.

Airtel Money की LSE पर लिस्टिंग की तैयारी

Airtel Africa के CEO सुनील तलदार ने कहा कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग से कंपनी को व्यापक अंतरराष्ट्रीय निवेशक आधार तक पहुंच मिलेगी. उन्होंने कहा कि इस कदम से अफ्रीका के प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म में से एक Airtel Money की लंबी अवधि की वैल्यू को सामने लाने में मदद मिलेगी. हालांकि, यह लिस्टिंग नियामकीय मंजूरियों के अधीन होगी.

Airtel Money का तेजी से बढ़ता कारोबार

Airtel Money, Airtel Africa की प्रमुख वित्तीय सेवा इकाइयों में से एक है. कंपनी ने हाल के वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज की है. Airtel Money के जरिए सालाना प्रोसेस किए गए कुल लेनदेन मूल्य में 51.5% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसके उपभोक्ता आधार में 23.3% की वृद्धि दर्ज की गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लूमबर्ग ने पहले Airtel Africa की वित्तीय सेवा इकाई का मूल्यांकन 10 अरब डॉलर से अधिक आंका था.

पहले से थी लिस्टिंग की योजना, लेकिन हुई देरी

Airtel Money की शेयर बाजार में लिस्टिंग की योजना पहले से थी, लेकिन युद्ध से जुड़े खर्चों और बढ़ती लागत के दबाव के कारण इसमें देरी हुई. कंपनी ने जून 2026 को समाप्त तिमाही के नतीजों के दौरान कहा था कि ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा लागत बढ़ने से निकट अवधि में लाभ मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है.

भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी लागत की चुनौती

Airtel Africa ने कहा है कि वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण इनपुट लागत बढ़ सकती है. इसका असर ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता, बिक्री और मुनाफे पर पड़ सकता है. कंपनी के मुताबिक, हालिया संघर्षों के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई और कई क्षेत्रों में ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ी है.

ग्लोबल फिनटेक बाजार में बढ़ेगी Airtel की मौजूदगी

Airtel Money की लंदन में लिस्टिंग कंपनी के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है. अफ्रीका में मोबाइल पेमेंट और डिजिटल वित्तीय सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और Airtel इस अवसर का फायदा उठाकर अपने फिनटेक कारोबार का विस्तार करना चाहती है.
 


कर्नाटक में FDI का बड़ा उछाल, वित्त वर्ष 2026 में विदेशी निवेश करीब दोगुना होकर 13 अरब डॉलर पहुंचा

टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में बढ़ते निवेश से राज्य को मिला फायदा

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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कर्नाटक में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य ने 13 अरब डॉलर का FDI इक्विटी निवेश आकर्षित किया, जो पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना है. टेक्नोलॉजी सेक्टर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में बढ़ते निवेश ने राज्य में विदेशी पूंजी प्रवाह को मजबूत किया है.

टेक और GCC विस्तार से बढ़ा निवेश

कर्नाटक में निवेश बढ़ने की सबसे बड़ी वजह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग और वैश्विक टेक कंपनियों द्वारा अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का विस्तार करना रहा है. राज्य के मजबूत टेक इकोसिस्टम, कुशल मानव संसाधन और आईटी सेक्टर में लंबे समय से बनी पकड़ ने विदेशी कंपनियों को आकर्षित किया है.

टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आने से कर्नाटक देश के सबसे तेजी से उभरते निवेश केंद्रों में शामिल हो गया है.

महाराष्ट्र अब भी सबसे बड़ा FDI प्राप्तकर्ता

हालांकि, FDI आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र अब भी देश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है. लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में विदेशी निवेश प्रवाह में गिरावट दर्ज की गई है. इसके उलट कर्नाटक ने तेज वृद्धि दर्ज करते हुए निवेश के लिहाज से अपनी स्थिति और मजबूत की है.

GCC विस्तार से रोजगार के नए अवसर

विशेषज्ञों के मुताबिक, कर्नाटक में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का लगातार विस्तार आने वाले समय में निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा देगा. बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन केंद्रों का विस्तार कर रही हैं, जिसका सबसे ज्यादा फायदा कर्नाटक जैसे टेक हब को मिल रहा है.

कर्नाटक की यह बढ़त भारत के FDI परिदृश्य में राज्य की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है और इसे देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में और मजबूत स्थिति प्रदान करती है.
 


अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 10% किया, जबरन मजदूरी नियमों में बदलाव से मिली राहत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जारी एक मेमोरेंडम में कहा कि व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के बाद उन देशों से आने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाया जाएगा, जिन्होंने जबरन मजदूरी से जुड़े प्रतिबंधों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं.

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Friday, 24 July, 2026
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अमेरिका ने भारत को टैरिफ मोर्चे पर राहत दी है. अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाने का फैसला किया है, जबकि पहले भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. यह राहत भारत की ओर से जबरन मजदूरी (Forced Labour) से तैयार किए गए सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए विदेश व्यापार नीति में किए गए बदलाव के बाद मिली है.

भारत समेत 17 देशों पर 10% टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जारी एक मेमोरेंडम में कहा कि व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के बाद उन देशों से आने वाले सामान पर 10% शुल्क लगाया जाएगा, जिन्होंने जबरन मजदूरी से जुड़े प्रतिबंधों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं.

अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है. इनमें से भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10% टैरिफ लगाया गया है, जबकि बाकी 43 देशों पर 12.5% शुल्क लागू होगा.

भारत ने बदली थी विदेश व्यापार नीति

अमेरिकी प्रशासन ने अपने फैसले में भारत के उस कदम का जिक्र किया है, जिसमें नई दिल्ली ने 14 जून को विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का प्रावधान किया था. अमेरिका का कहना है कि इस तरह के नियम लागू करने से वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा होगी और व्यापार में असमानता को कम करने में मदद मिलेगी.

किन सामानों पर नहीं लगेगा शुल्क?

अमेरिका ने कुछ उत्पादों और कच्चे माल को नए शुल्क से छूट दी है. ऐसे कच्चे माल जिन पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, उन्हें शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है. इसके अलावा ऐसे उत्पाद, जिनका अमेरिका में पर्याप्त उत्पादन संभव नहीं है या जिनसे अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है, उन्हें भी छूट दी गई है.

अमेरिका-भारत व्यापार पर असर

अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है. वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 141 अरब डॉलर रहा था. इसमें भारत का निर्यात लगभग 87.3 अरब डॉलर था.

विशेषज्ञों का मानना है कि 12.5% से घटाकर 10% किया गया टैरिफ प्रतिशत के लिहाज से भले ही छोटा बदलाव है, लेकिन यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत है.

व्यापार वार्ता के बीच आया फैसला

भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से शुरू की गई दोनों जांचों का विरोध किया था. भारत का कहना है कि इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत के तहत चर्चा की जा सकती है.

उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, टैरिफ में यह कटौती दिखाती है कि अमेरिका व्यापार नियमों को लागू करने के साथ-साथ भारत के साथ रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को भी संतुलित रखना चाहता है.
 


जेफ बेजोस फिर लौटे ऑपरेशनल भूमिका में, बोले- AI ने बदल दी मेरी रिटायरमेंट की योजना

Amazon CEO पद छोड़ने के बाद दोबारा ऑपरेशनल रोल में लौटे बेजोस, इंडस्ट्रियल AI स्टार्टअप बना मुख्य फोकस

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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अमेरिकी कारोबारी और Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रही तेज प्रगति ने उन्हें दोबारा सक्रिय नेतृत्व की भूमिका में लौटने के लिए प्रेरित किया. Amazon के CEO पद से हटने के कुछ साल बाद बेजोस अब इंडस्ट्रियल AI स्टार्टअप Prometheus पर अपना ज्यादा समय दे रहे हैं. उनका मानना है कि AI इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रहा है, जिससे खुद को इससे दूर रखना मुश्किल था.

Prometheus पर बेजोस का मुख्य फोकस

मीडिया से बातचीत में जेफ बेजोस ने बताया कि वह अब AI स्टार्टअप Prometheus को को-CEO विक बजाज के साथ मिलकर लीड कर रहे हैं. इसके अलावा वह Amazon के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और स्पेस कंपनी Blue Origin की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.

बेजोस ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस तेजी से इंडस्ट्री को बदल रहा है, उसे देखते हुए वह "सिर्फ दर्शक बनकर नहीं रह सकते थे". उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने Prometheus में निवेशक के तौर पर निवेश किया था, लेकिन बाद में कंपनी में सक्रिय ऑपरेशनल भूमिका संभाल ली.

क्या करती है Prometheus?

Prometheus ऐसे AI मॉडल विकसित कर रही है, जो इंजीनियरों को फिजिकल प्रोडक्ट्स के डिजाइन, टेस्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा तेज और प्रभावी बनाने में मदद कर सकें. कंपनी का फोकस उपभोक्ताओं के लिए बनाए जाने वाले AI चैटबॉट और असिस्टेंट से अलग है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Prometheus ने हाल ही में नई फंडिंग जुटाई है और कंपनी का वैल्यूएशन करीब 41 अरब डॉलर आंका गया है. यह इंडस्ट्रियल AI में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दिखाता है.

तेजी से बढ़ रहा है इंडस्ट्रियल AI बाजार

इंडस्ट्रियल AI अब AI इकोसिस्टम के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हो रहा है. कंपनियां इसका इस्तेमाल प्रोडक्ट डिजाइन, इंजीनियरिंग, सिमुलेशन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए कर रही हैं.

कंज्यूमर AI एप्लिकेशन की तुलना में इंडस्ट्रियल AI का उद्देश्य एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाना और नए उत्पादों के विकास की प्रक्रिया को तेज करना है.

Amazon भी बढ़ा रही AI पर पकड़

Amazon ने भी CEO एंडी जेसी के नेतृत्व में अपनी AI रणनीति को मजबूत किया है. कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया है और Nova नाम से फाउंडेशन AI मॉडल विकसित किए हैं. इसके अलावा Amazon ने Amazon Bedrock प्लेटफॉर्म को मजबूत किया है और AI स्टार्टअप Anthropic में अरबों डॉलर का निवेश किया है. बेजोस ने कहा कि वह Amazon की लंबी अवधि की AI रणनीति का समर्थन जारी रखेंगे, हालांकि उनका मौजूदा फोकस Prometheus पर है.

AI इंसानों की जगह नहीं, क्षमता बढ़ाएगा: बेजोस

जेफ बेजोस का मानना है कि AI इंसानों को पूरी तरह बदलने के बजाय उनकी क्षमताओं को बढ़ाने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि AI इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में आने वाली बाधाओं को दूर कर उत्पादकता बढ़ा सकता है.

उनके अनुसार, AI की मदद से इंजीनियर नए विचारों और इनोवेशन पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे और फिजिकल प्रोडक्ट्स की डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सकेगा.

AI की रेस में बढ़ रही है प्रतिस्पर्धा

बेजोस की सक्रिय भूमिका में वापसी ऐसे समय में हुई है जब टेक कंपनियां और स्टार्टअप AI के क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रहे हैं. जहां अब तक जनरेटिव AI असिस्टेंट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित रहा है, वहीं इंडस्ट्रियल AI में भी निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है.

जेफ बेजोस का दोबारा ऑपरेशनल भूमिका में आना इस बात का संकेत है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिलिकॉन वैली के बड़े उद्यमियों और निवेशकों की प्राथमिकताओं को बदल रहा है. कंपनियां अब कंज्यूमर AI के साथ-साथ एंटरप्राइज और इंडस्ट्रियल AI के भविष्य पर भी बड़ा दांव लगा रही हैं.


ई-कॉमर्स कंपनियों को बड़ी राहत, निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल में FDI को सरकार की मंजूरी

इस फैसले से Amazon और Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.

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Friday, 24 July, 2026
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केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) से जुड़ी ई-कॉमर्स नीति में बड़ा बदलाव करते हुए विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों को भारत में बने उत्पादों के निर्यात के लिए इन्वेंटरी (स्टॉक) रखने की अनुमति दे दी है. इस फैसले से Amazon और Walmart के स्वामित्व वाली Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.

निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल को मिली मंजूरी

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने प्रेस नोट-3 (2026 सीरीज) जारी कर भारत में निर्मित और उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दे दी है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए Amazon के प्रवक्ता ने कहा कि नई नीति भारतीय कारोबारियों, खासकर छोटे शहरों के निर्माताओं और MSME को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेगी. कंपनी ने कहा कि वह 2030 तक भारत से 80 अरब डॉलर के संचयी निर्यात के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और यह फैसला 'ब्रांड इंडिया' को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा.

पहले क्या था नियम?

अब तक सरकार मार्केटप्लेस आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में 100% FDI की अनुमति देती थी, लेकिन इन्वेंटरी आधारित मॉडल में विदेशी निवेश पर रोक थी. नए फैसले के बाद केवल भारत में बने सामान के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित मॉडल में FDI की मंजूरी दी गई है. हालांकि, घरेलू बाजार के लिए विदेशी कंपनियां अब भी इन्वेंटरी मॉडल के तहत कारोबार नहीं कर सकेंगी.

क्या होता है इन्वेंटरी और मार्केटप्लेस मॉडल?

इन्वेंटरी आधारित मॉडल में ई-कॉमर्स कंपनी खुद सामान का स्टॉक रखती है और सीधे ग्राहकों को बेचती है. वहीं, मार्केटप्लेस मॉडल में कंपनी केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है, जहां विक्रेता और खरीदार आपस में लेनदेन करते हैं. इस मॉडल में कंपनी खुद स्टॉक नहीं रखती.

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की यह अधिसूचना लंबे समय से चली आ रही नीतिगत अस्पष्टताओं को दूर करती है. इससे ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्यात कारोबार में अधिक स्पष्टता मिलेगी और भारत के विनिर्माण तथा निर्यात क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
 


बाजार में आज क्या लौटेगी रौनक? लगातार चार दिन की गिरावट के बाद इन ट्रिगर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर

गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47% गिरकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53% टूटकर 23,869.60 अंक पर आ गया.

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Friday, 24 July, 2026
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घरेलू शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद आज निवेशकों की नजर बाजार की शुरुआती चाल पर रहेगी. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, तिमाही नतीजे और कई कंपनियों से जुड़ी अहम घोषणाएं आज बाजार की दिशा तय कर सकती हैं. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 363.66 अंक और निफ्टी 126.65 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए थे.

लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ था बाजार

गुरुवार को कारोबार के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर घरेलू शेयर बाजार पर साफ दिखा. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47% गिरकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53% टूटकर 23,869.60 अंक पर आ गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 400 अंक से अधिक और निफ्टी 23,900 के नीचे तक फिसल गया था.

इन ब्लूचिप शेयरों में रही सबसे ज्यादा बिकवाली

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 17 गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा दबाव अदाणी पोर्ट्स पर रहा, जिसके शेयर 2.26% टूट गए. इसके अलावा बजाज फाइनेंस, इंडिगो, एक्सिस बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, एसबीआई, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, इटरनल, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.

सेक्टोरल इंडेक्स में कहां रहा सबसे ज्यादा दबाव?

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी केमिकल और निफ्टी ऑयल एंड गैस सबसे ज्यादा दबाव में रहे. वहीं निफ्टी मीडिया और निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया. इससे साफ है कि निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी जारी रखी, जबकि जोखिम वाले सेक्टर्स में मुनाफावसूली देखने को मिली.

आज इन शेयरों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर

आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते उनके शेयर निवेशकों के फोकस में रहेंगे. गांधार ऑयल रिफाइनरी इंडिया में सोसाइटी जेनरल ने 19.22 करोड़ रुपये में 0.7% हिस्सेदारी खरीदी है. हिंदाल्को इंडस्ट्रीज ने अगले तीन वर्षों में भारत में 50,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना का ऐलान किया है. इंडिगो को जून तिमाही में 238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि साइएंट का तिमाही शुद्ध लाभ 90% बढ़कर 104 करोड़ रुपये पहुंच गया है.

इसके अलावा लॉजिस्टिक्स कंपनी शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज में Eight Roads, Flipkart और IMM India Fund 9.08% तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं. ओसवाल पंप्स में VQ FasterCap Fund ने 0.52% हिस्सेदारी बेची है. ई-कॉमर्स कंपनी मीशो का तिमाही घाटा घटकर 133 करोड़ रुपये रह गया है. आईटी कंपनी कोफोर्ज ने अपना नया AI ऑपरेटिंग सिस्टम 'Coforge Nuuron' लॉन्च किया है. वहीं, स्विगी के बोर्ड ने विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49.5% तक तय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. 

आज बाजार की चाल किन फैक्टर्स से तय होगी?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आज निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, वैश्विक बाजारों के संकेत, रुपये की चाल और पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर रहेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो घरेलू बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या क्रूड ऑयल में और तेजी आने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)