स्पाइसजेट को कर्ज देने वाली कंपनी एयरक्राफ्ट लेसर एयरकॉसल लिमिटेड ने दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए NCLT में अर्जी लगाई है,
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
गो फर्स्ट (Go First) के बाद एक और एयरलाइन मुश्किलों में घिर गई है. स्पाइसजेट (SpiceJet) के खिलाफ भी दिवाला प्रक्रिया की सुनवाई होने वाली है. दरअसल, स्पाइसजेट के एक कर्जदाता ने कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी लगाई है, जिस पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) सप्ताह सुनवाई करेगा. हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस घटनाक्रम से एयरलाइन के ऑपरेशन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला.
दो याचिकाएं लंबित
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि स्पाइसजेट को कर्ज देने वाली कंपनी एयरक्राफ्ट लेसर एयरकॉसल (आयरलैंड) लिमिटेड ने दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए NCLT में अर्जी लगाई है, जिस पर 8 मई को सुनवाई हो सकती है. स्पाइसजेट के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित दो अन्य याचिकाएं भी लंबित हैं. इस बीच, स्पाइसजेट ने अपने 25 विमानों को फिर से शुरू करने की योजना बनाई है, ताकि गो फर्स्ट की उड़ान बंद होने से मिले मौके को भुनाया जा सके. कंपनी के ये विमान आउट ऑफ सर्विस हैं. स्पाइसजेट इन्हें दुरुस्त करने के लिए सरकार की आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) का लाभ लेने की तैयारी में है.
12 तक फ्लाइट कैंसिल
उधर, गो फर्स्ट (Go First) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. कंपनी ने अब 12 मई तक अपनी सभी फ्लाइट्स कैंसल कर दी हैं. कंपनी ने यात्रियों से असुविधा के लिए माफी मांगते हुए कहा है कि यात्रियों को उनकी टिकट का पूरा पैसा जल्द वापस किया जाएगा. बता दें कि वाडिया ग्रुप की इस एयरलाइन ने पहले अपनी उड़ानें तीन मई से तीन दिन के लिए रद्द की थीं. बाद में इसे बढ़ाकर नौ मई और अब 12 मई कर दिया गया है. एविएशन रेगुलेटर DGCA के अनुसार, कंपनी ने 15 मई तक टिकट बिक्री पर रोक लगा दी है.
इन्होंने दायर की याचिकाएं
गो फर्स्ट के खिलाफ दो दिवाला समाधान याचिकाएं दायर हुई हैं. वहीं, गो फर्स्ट ने वॉलेंटरी इनसॉलवेंसी प्रॉसीडिंग के साथ-साथ वित्तीय दायित्वों पर अंतरिम रोक लगाने का भी आग्रह किया है. GO First के खिलाफ एक याचिका विमानन कंपनी के लिए परिवहन सेवाएं प्रदान करने वाली SS एसोसिएट्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की है, जिसमें उसने लगभग 3 करोड़ रुपए का दावा किया है. जबकि दूसरी याचिका एक पायलट की तरफ से दायर हुई है. पायलट का दावा है कि उसे अपनी सेवाओं के एवज में कंपनी से एक करोड़ रुपए से अधिक लेना है.
RBI का मानना है कि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बैंकों और NBFC को अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को पहले से मजबूत करना होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए डेटा जोखिम प्रबंधन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नए मानकों का मसौदा जारी किया है. प्रस्तावित नियमों के तहत संस्थानों को डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क मजबूत करना होगा, डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी और इसके लिए कार्यकारी स्तर पर निगरानी व्यवस्था भी बनानी होगी. यह कदम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले एक्सपेक्टिड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क से पहले उठाया गया है.
RBI ने क्यों जारी किया नया मसौदा?
RBI ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा की मात्रा, विविधता और उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी सिस्टम में डेटा सटीक, सुरक्षित, एक समान और उपयोग योग्य रहे. इसी उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने डेटा गवर्नेंस और डेटा जोखिम प्रबंधन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है.
ECL फ्रेमवर्क से पहले होगी तैयारी
प्रस्तावित नियम ऐसे समय आए हैं, जब 1 अप्रैल 2027 से एक्सपेक्टिड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क लागू होना है. RBI का मानना है कि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बैंकों और NBFC को अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को पहले से मजबूत करना होगा.
डेटा गवर्नेंस पर रहेगा बोर्ड का फोकस
मसौदे के अनुसार, सभी बैंकों और NBFC को कार्यकारी स्तर पर डेटा गवर्नेंस कमेटी गठित करनी होगी या यह जिम्मेदारी किसी मौजूदा कार्यकारी समिति को सौंपी जा सकती है. वहीं, निदेशक मंडल (Board) को डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क की निगरानी करनी होगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा करनी होगी. RBI ने सुझाव दिया है कि इस फ्रेमवर्क की समीक्षा कम से कम साल में एक बार या जरूरत पड़ने पर उससे अधिक बार की जाए.
डेटा जोखिम प्रबंधन के लिए क्या होंगे मानक?
RBI के मसौदे के मुताबिक, बैंकों और NBFC को अपनी समग्र जोखिम प्रबंधन प्रणाली में डेटा जोखिम को भी शामिल करना होगा. इसके तहत डेटा से जुड़े जोखिमों की पहचान, आकलन, निगरानी और प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था बनानी होगी. साथ ही डेटा स्रोत (आंतरिक और बाहरी), डेटा गुणवत्ता, डेटा वर्गीकरण और बिग डेटा के उपयोग से जुड़े जोखिमों पर भी विशेष ध्यान देना होगा.
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, कई मंत्री, उद्योगपति, संत और हजारों लोगों ने नंद किशोर गोयनका को श्रद्धांजलि अर्पित की.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
गो-सेवा, समाजसेवा और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रखर समर्थक एवं वरिष्ठ उद्योगपति नंद किशोर गोयनका बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए. उनकी अंतिम यात्रा हिसार की श्री वैष्णव गौशाला से अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान तक पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ निकाली गई. अंतिम यात्रा में उमड़े हजारों लोगों के जनसैलाब ने उनके प्रति समाज की गहरी आस्था और सम्मान को दर्शाया. हिसार से अग्रोहा तक विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
परिवार की ओर से एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा, जवाहर गोयनका, लक्ष्मी नारायण गोयनका, अशोक गोयनका और परिवार के अन्य सदस्य पूरी यात्रा के दौरान मौजूद रहे. देशभर से पहुंचे शुभचिंतक भी इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहे.
वैदिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ अंतिम संस्कार
अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान में वैदिक परंपरा के अनुसार नंद किशोर गोयनका का अंतिम संस्कार किया गया. इसी स्थान पर उनकी धर्मपत्नी का भी अंतिम संस्कार हुआ था. अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और उपस्थित लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.
बड़ी संख्या में पहुंचे मंत्री, उद्योगपति और संत
अंतिम संस्कार में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा, पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, पूर्व मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, आदमपुर विधायक चंद्रप्रकाश और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. डी.पी. वत्स सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
इसके अलावा देशभर से उद्योग जगत की हस्तियां, फिल्म जगत से जुड़े लोग, संत-महात्मा, समाजसेवी, गौभक्त, शिक्षाविद, व्यापारी, ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अंतिम यात्रा में भाग लेकर श्रद्धांजलि अर्पित की. हजारों लोगों की मौजूदगी ने नंद किशोर गोयनका के सामाजिक योगदान और जनस्वीकृति की झलक पेश की.
'उनके विचार हमेशा जीवित रहेंगे': मनोहर लाल खट्टर
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नंद किशोर गोयनका भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और आदर्श हमेशा जीवित रहेंगे. उन्होंने कहा कि गोयनका जी ने अपने परिवार, समाज और विशेष रूप से अग्रोहा धाम के माध्यम से सेवा की जो परंपरा स्थापित की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी.
उन्होंने कहा कि 96 वर्षों का उनका जीवन सेवा, संतोष और समर्पण का प्रतीक रहा. ऐसे व्यक्तित्व का जाना केवल शोक का विषय नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने का अवसर भी है.
मनोहर लाल खट्टर ने अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक के रूप में उन्हें लगभग दो महीने तक अग्रोहा धाम में नंद किशोर गोयनका के साथ कार्य करने का अवसर मिला था. उन्होंने कहा कि डॉ. सुभाष चंद्रा, जवाहर गोयनका, लक्ष्मी नारायण गोयनका, अशोक गोयनका सहित पूरा गोयनका परिवार जिस तरह समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और मानवीय मूल्यों की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है, वह नंद किशोर गोयनका के जीवन मूल्यों का ही विस्तार है. उन्होंने विश्वास जताया कि परिवार आगे भी इन्हीं आदर्शों पर चलते हुए देश और समाज की सेवा करता रहेगा.
केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने एक इंटरव्यू में बताया है कि टाटा ग्रुप ने राज्य में शिपबिल्डिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप अब शिपबिल्डिंग सेक्टर में एंट्री की तैयारी कर रहा है. केरल सरकार के मुताबिक, समूह राज्य में करीब 10,000 करोड़ रुपये (1 अरब डॉलर) का निवेश कर जहाज निर्माण परियोजना स्थापित करने की योजना बना रहा है. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह टाटा ग्रुप का समुद्री उद्योग में पहला बड़ा कदम होगा और भारत की शिपबिल्डिंग क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी.
एक महीने में मिल सकती है मंजूरी
केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में बताया कि टाटा ग्रुप ने राज्य में शिपबिल्डिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है. सरकार इस परियोजना के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है और प्रस्ताव पर तेजी से काम चल रहा है. उम्मीद है कि अगले एक महीने के भीतर इस मेगा प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी मिल सकती है.
टाटा के कारोबार में जुड़ेगा नया अध्याय
नमक, स्टील, ऑटोमोबाइल, आईटी, एयरलाइंस और कंज्यूमर बिजनेस में मजबूत मौजूदगी रखने वाला टाटा ग्रुप अब जहाज निर्माण जैसे रणनीतिक सेक्टर में भी कदम रखने जा रहा है. हालांकि, इस निवेश को लेकर टाटा ग्रुप की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
अडानी को मिलेगी कड़ी चुनौती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा की यह योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब अडानी ग्रुप पहले से समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश कर रहा है. केरल के विझिंजम में अडानी का डीपवाटर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित किया जा रहा है, जिसे हाल ही में एमएससी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी से 1.4 अरब डॉलर का निवेश समर्थन मिला है. ऐसे में टाटा की एंट्री से देश के समुद्री कारोबार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है.
भारत के शिपबिल्डिंग मिशन को मिलेगा बल
भारत सरकार देश को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. इसी रणनीति के तहत अप्रैल में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ था. दक्षिण कोरिया चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग केंद्र है.
केरल बनना चाहता है समुद्री उद्योग का बड़ा केंद्र
कोच्चि और विझिंजम जैसे प्रमुख बंदरगाहों के दम पर केरल खुद को देश के बड़े मैरीटाइम हब के रूप में विकसित करना चाहता है. राज्य सरकार जहाज निर्माण और मरम्मत से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है. हालांकि, प्रस्तावित टाटा प्लांट की उत्पादन क्षमता और निर्माण शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है.
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में राहत देते हुए इसे 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यह बदलाव वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी घटा दी है. नई दरें 16 जुलाई से लागू हो गई हैं.
डीजल और ATF पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लेवी 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
पेट्रोल निर्यात पर मिली राहत
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में राहत देते हुए इसे 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यह बदलाव वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए किया गया है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार हर 15 दिन में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है. हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. ऐसे में सरकार ने वैश्विक बाजार की मौजूदा स्थिति के अनुरूप टैक्स दरों में संशोधन किया है.
कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आई तेजी?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 0.35% की बढ़त के साथ 85.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. अमेरिका द्वारा ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू किए जाने से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है.
डीजल बाजार पर भी बढ़ा दबाव
रूस से डीजल निर्यात में कमी और वैश्विक सप्लाई बाधित होने से डीजल रिफाइनिंग मार्जिन भी बढ़ा है. इससे ईंधन बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है. इससे पहले सरकार ने 11 जून को औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत ग्राहकों के लिए पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर अस्थायी रोक लगाई थी, जिसे 1 जुलाई से हटा लिया गया था. अब विंडफॉल टैक्स में बदलाव के जरिए सरकार ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नया कदम उठाया है.
नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को मंजूरी दे दी है. नई योजनाओं के तहत चिप डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, घरेलू वैल्यू एडिशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में तेजी आने की उम्मीद है.
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर सरकार का बड़ा फोकस
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के तहत अब सिर्फ चिप फैब्रिकेशन ही नहीं, बल्कि डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, गैस, सामग्री और पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर जोर दिया जाएगा. योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश अगले दो सप्ताह में जारी किए जाएंगे.
स्टार्टअप्स और घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने भारत में रणनीतिक और व्यावसायिक चिप डिजाइन करने वाले स्टार्टअप्स के लिए ग्रांट-प्लस-इक्विटी मॉडल का प्रस्ताव रखा है, ताकि बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) देश में ही बने रहें. वहीं, मध्यम और बड़ी भारतीय कंपनियों को चिप डिजाइन के क्षेत्र में उतारने के लिए सह-निवेश, रॉयल्टी आधारित फंडिंग और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन की व्यवस्था की जाएगी.
मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम पर रहेगा जोर
नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का मानना है कि इससे चिप निर्माण के लिए आवश्यक सप्लाई चेन भी देश में विकसित होगी.
फैब्रिकेशन और पैकेजिंग के प्रोत्साहन में बदलाव
ISM 2.0 में चिप फैब्रिकेशन और पैकेजिंग इकाइयों के लिए प्रोत्साहन दरों को पहले चरण की तुलना में कम किया गया है. सिलिकॉन फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए प्रोत्साहन 50% से घटाकर 40% और अन्य फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए 35% कर दिया गया है. वहीं एडवांस्ड पैकेजिंग इकाइयों को 35% और पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को 25% तक प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का कहना है कि पहले चरण में 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद अब फोकस पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर है.
रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा समर्थन
सरकार उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को केंद्रीय और राज्य सरकारों की ओर से कुल परियोजना लागत का 75% तक संयुक्त प्रोत्साहन देगी. इसका उद्देश्य रिसर्च, इनोवेशन और कुशल मानव संसाधन तैयार करना है.
₹4 लाख करोड़ निवेश और 1 लाख करोड़ निर्यात का लक्ष्य
सरकार का अनुमान है कि इस मिशन के जरिए करीब ₹4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित होगा. इससे ₹2 लाख करोड़ का उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ का निर्यात हासिल किया जा सकेगा. अब तक पहले चरण के तहत ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है.
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को भी मिला बड़ा प्रोत्साहन
कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को भी मंजूरी दी है. नई योजना में प्रोत्साहन उत्पादन आधारित मॉडल की बजाय घरेलू वैल्यू एडिशन और स्थानीय सोर्सिंग के आधार पर दिया जाएगा. साथ ही भारतीय कंपनियों को मोबाइल डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और स्वदेशी बौद्धिक संपदा विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा.
उत्पादन, निर्यात और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य अगले छह वर्षों में मोबाइल फोन उत्पादन को ₹39 लाख करोड़ तक पहुंचाना, ₹15 लाख करोड़ का निर्यात हासिल करना और मोबाइल विनिर्माण व इससे जुड़े क्षेत्रों में 60,000 अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है. इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
बुधवार को सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17% की तेजी के साथ 77,185.43 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 26.45 अंक यानी 0.11% चढ़कर 24,078.50 के स्तर पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को गिरावट के बाद शानदार वापसी की और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए. अब गुरुवार के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, कॉरपोरेट घोषणाओं और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी. ऐसे में बाजार खुलने से पहले जानिए पिछले सत्र का हाल और आज किन फैक्टर्स से बाजार की दिशा तय हो सकती है.
बुधवार को कैसी रही बाजार की चाल?
बुधवार को एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के दम पर घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी लौटी. कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक उछलकर 77,200 के करीब पहुंच गया था. हालांकि, दोपहर बाद मुनाफावसूली के चलते बढ़त कुछ कम हो गई. आखिरकार सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17% की तेजी के साथ 77,185.43 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 26.45 अंक यानी 0.11% चढ़कर 24,078.50 के स्तर पर बंद हुआ.
इन ब्लूचिप शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 बढ़त के साथ बंद हुए. Eternal, UltraTech Cement, SBI, Bajaj Finance, IndiGo, Asian Paints, Tech Mahindra और HDFC Bank के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर Power Grid, Larsen & Toubro, Tata Steel, Infosys, NTPC और Bajaj Finserv के शेयरों में बिकवाली हावी रही.
ब्रॉडर मार्केट ने भी दिखाया दम
मुख्य सूचकांकों के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा. निफ्टी मिडकैप 150 करीब 0.5% और निफ्टी स्मॉलकैप 250 लगभग 0.75% की बढ़त के साथ बंद हुआ. सेक्टरवार देखें तो PSU बैंक और फार्मा शेयरों में खरीदारी रही, जबकि मेटल, आईटी, रियल्टी और FMCG इंडेक्स दबाव में रहे. ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी दो दिनों की गिरावट के बाद संभल गया.
आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में Ather Energy, Adani Power, SBI, HDFC Bank, Tata Capital, Jio Platforms और Jupiter Life Line Hospitals से जुड़ी खबरों के चलते इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. Ather Energy ने 960 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है, Adani Power ने 25 साल का बड़ा बिजली आपूर्ति समझौता किया है, जबकि SBI और HDFC Bank में शीर्ष स्तर की नियुक्तियां हुई हैं.
Q1 नतीजे तय करेंगे बाजार की दिशा
आज Wipro, Tech Mahindra, Jio Financial Services, BHEL, Polycab India, ITC Hotels, South Indian Bank, Ceat और WeWork India Management समेत कई कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इन नतीजों का असर संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की चाल पर भी देखने को मिल सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, Q1 नतीजों और कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी. यदि अंतरराष्ट्रीय संकेत सकारात्मक रहे और कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक आए, तो बुधवार की तेजी गुरुवार के कारोबार में भी जारी रह सकती है. हालांकि, कमजोर वैश्विक संकेत या उम्मीद से खराब नतीजे आने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि यह संस्थान युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ नंद किशोर गोयनका की सेवा और समाज कल्याण की विरासत को आगे बढ़ाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता एवं वरिष्ठ उद्योगपति और समाजसेवी स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका की स्मृति में हरियाणा के अग्रोहा में लगभग ₹100 करोड़ की लागत से 'नंद किशोर गोयनका यूनिवर्सिटी' स्थापित करने की घोषणा की है. 32 एकड़ में बनने वाली यह यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सेवा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित की जाएगी.
अंतिम संस्कार के बाद किया ऐलान
यह घोषणा 13 जुलाई को मुंबई में 96 वर्ष की आयु में निधन के बाद स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका के अंतिम संस्कार के अवसर पर की गई. उनका अंतिम संस्कार हरियाणा के हिसार स्थित अग्रोहा धाम के गोयनका उद्यान में संपन्न हुआ, जहां परिवार, समाज के प्रमुख लोगों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. अंतिम संस्कार के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि उन्होंने अपने तीनों भाइयों के साथ मिलकर अपने पिता की स्मृति में इस विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया है.
32 एकड़ में बनेगा आधुनिक विश्वविद्यालय
डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय एग्रोहा में 32 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा. इस परियोजना पर लगभग ₹100 करोड़ का निवेश किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह संस्थान युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ नंद किशोर गोयनका की सेवा और समाज कल्याण की विरासत को आगे बढ़ाएगा.
सामाजिक सेवा पर आधारित होंगे विशेष पाठ्यक्रम
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जो सामाजिक सेवा, सामुदायिक विकास और समाज को वापस देने की भावना को प्रोत्साहित करेंगे. उद्देश्य यह है कि छात्र केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें और निभाएं.
एग्रोहा धाम के विकास में रहा अहम योगदान
हरियाणा के हिसार स्थित अग्रोहा धाम महाराजा अग्रसेन और मां महालक्ष्मी को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है. इसका निर्माण वर्ष 1976 में शुरू हुआ था और 1984 में पूरा हुआ. नंद किशोर गोयनका एग्रोहा धाम के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रमुख लोगों में शामिल रहे. समय के साथ यह परिसर अग्रवाल समाज का प्रमुख आस्था केंद्र बन गया है, जहां मंदिरों के अलावा शक्ति सरोवर, शैक्षणिक संस्थान और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक सुविधाएं मौजूद हैं.
समाज सेवा और परोपकार के लिए जाने जाते थे नंद किशोर गोयनका
नंद किशोर गोयनका को उद्योग, समाज सेवा और परोपकार के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए व्यापक सम्मान मिला. वे कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े अनेक कार्यों का समर्थन किया. वे श्री देवी भवन मंदिर गौशाला ट्रस्ट के संरक्षक और श्री वैश्य अग्रसेन गौशाला से भी जुड़े रहे. एग्रोहा धाम और अन्य सामाजिक परियोजनाओं में उनके योगदान ने उन्हें अग्रवाल समाज में विशेष पहचान दिलाई.
जल्द साझा होगी परियोजना की विस्तृत जानकारी
फिलहाल विश्वविद्यालय के निर्माण की समय-सीमा, शैक्षणिक कार्यक्रमों और नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि यह विश्वविद्यालय उनके पिता की विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामुदायिक विकास के नए अवसर पैदा करेगा.
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिटेल, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रों में कर्ज की मजबूत मांग से बैंक की आय को सहारा मिला.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. अप्रैल-जून तिमाही में बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 30% बढ़कर 5,332.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 4,116 करोड़ रुपये था. बैंक के बेहतर नतीजों की प्रमुख वजह मजबूत कर्ज वृद्धि (Credit Growth), परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में सुधार और प्रावधान (Provisioning) पर कम खर्च रही.
कुल आय में भी हुई बढ़ोतरी
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय (Total Income) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिटेल, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्रों में कर्ज की मजबूत मांग से बैंक की आय को सहारा मिला. हालांकि, बदलते ब्याज दरों के माहौल के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बना रहा.
एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार
तिमाही के दौरान यूनियन बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार जारी रहा. बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात पिछले वर्ष की तुलना में और घटा है. वहीं, नेट एनपीए (NNPA) में भी सुधार देखने को मिला. साथ ही, प्रावधान कवरेज अनुपात (Provision Coverage Ratio) मजबूत बना रहा, जिससे संभावित डिफॉल्ट से निपटने की बैंक की क्षमता और मजबूत हुई है.
रिटेल और MSME से मिला ग्रोथ का सहारा
बैंक की कुल अग्रिम (Advances) में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई. खासकर रिटेल, कृषि और प्राथमिकता क्षेत्र (Priority Sector) में कर्ज वितरण ने क्रेडिट ग्रोथ को मजबूती दी. कम प्रावधान और मजबूत बैलेंस शीट ने बैंक की तिमाही लाभप्रदता को और बेहतर बनाया.
मार्जिन पर दबाव, लेकिन भविष्य को लेकर उम्मीद
यूनियन बैंक परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ाने के साथ जोखिम प्रबंधन और कर्ज वितरण में अनुशासित रणनीति पर लगातार काम कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर एसेट क्वालिटी और स्थिर कर्ज वृद्धि के दम पर बैंक की आय आगे भी मजबूत रह सकती है, हालांकि ब्याज दरों में बदलाव के चलते नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.
निवेशकों की नजर इन संकेतकों पर
विश्लेषकों के अनुसार, अब निवेशकों की नजर बैंक प्रबंधन की जमा जुटाने (Deposit Mobilisation), कर्ज मांग (Credit Demand) और मार्जिन के भविष्य को लेकर दी जाने वाली टिप्पणी पर रहेगी. इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों से जुड़े फैसले भी पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बैंक की लाभप्रदता पर अहम असर डाल सकते हैं.
सरकारी बैंकों की स्थिति लगातार मजबूत
यूनियन बैंक के बेहतर तिमाही नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. घटते एनपीए, कम क्रेडिट लागत और मजबूत बैलेंस शीट के कारण सरकारी बैंकों की कमाई में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है.
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को पंजाब के चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश के रेलवे और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme) के तहत पंजाब के चार पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करने के साथ ही वह भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे. इसके अलावा हरियाणा और राजस्थान में भी कई रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा.
पंजाब के चार रेलवे स्टेशनों का होगा उद्घाटन
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को पंजाब के चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे. इनमें जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन प्रधानमंत्री स्वयं करेंगे, जबकि एसएएस नगर (मोहाली), श्री मुक्तसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन दोपहर करीब 3 बजे वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा.
125 करोड़ रुपये की लागत से बदला जालंधर कैंट स्टेशन का स्वरूप
करीब 110 वर्ष पुराने जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का लगभग 125 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिकीकरण किया गया है. स्टेशन पर डबल-हाइट एयर कॉन्कोर्स, भारी स्टील प्लेटफॉर्म रूफिंग, फिसलन-रोधी फ्लोरिंग और ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं. हाल ही में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार ने स्टेशन पर चल रहे अंतिम चरण के कार्यों की समीक्षा भी की थी.
यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, आधुनिक कॉन्कोर्स, उन्नत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर और दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. साथ ही स्टेशनों के पुनर्विकास में उनकी स्थानीय स्थापत्य शैली और सांस्कृतिक पहचान को भी बरकरार रखा गया है. इसी दिन राजस्थान के कोटा मंडल स्थित गंगापुर सिटी रेलवे स्टेशन का भी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत उद्घाटन किया जाएगा.
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिलेगी हरी झंडी
प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे. यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी. इसके अलावा जींद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का उद्घाटन, कुरुक्षेत्र में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक और पुनर्निर्मित रेलवे स्टेशन का लोकार्पण भी किया जाएगा. साथ ही कुरुक्षेत्र में प्रस्तावित सिख संग्रहालय की आधारशिला भी रखी जाएगी.
पंजाब में बीजेपी के नए चुनावी अभियान की शुरुआत
जालंधर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी रेलवे स्टेशन परिसर में आयोजित एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 5,000 भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की संभावना है. पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा द्वारा अकेले चुनाव लड़ने के फैसले के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी का पहला पंजाब दौरा होगा. इसे राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है.
बुधवार के कारोबार के दौरान एथर एनर्जी का शेयर 9 फीसदी तक चढ़कर 1,290.10 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जो कंपनी की लिस्टिंग के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हीरो मोटोकॉर्प ने इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता एथर एनर्जी में 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दे दी है. इस घोषणा के बाद बुधवार को एथर एनर्जी के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और कंपनी का शेयर 9 फीसदी तक उछलकर अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया. निवेशकों का मानना है कि यह निवेश एथर के भविष्य के विस्तार और भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा शेयर
बुधवार के कारोबार के दौरान एथर एनर्जी का शेयर 9 फीसदी तक चढ़कर 1,290.10 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जो कंपनी की लिस्टिंग के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. हालांकि बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली और शेयर बीएसई पर 7.90 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,298,00 रुपये पर बंद हुआ. यह तेजी हीरो मोटोकॉर्प के बोर्ड द्वारा एथर एनर्जी में 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दिए जाने के बाद आई.
प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए होगा निवेश
हीरो मोटोकॉर्प का यह निवेश पूरी तरह नकद (कैश) में किया जाएगा. कंपनी यह निवेश प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए करेगी, जिसके तहत इक्विटी शेयरों के साथ-साथ अन्य पात्र सिक्योरिटीज जैसे कंपल्सरिली कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर (CCPS) और वारंट जारी किए जा सकते हैं. हालांकि यह निवेश आवश्यक कॉर्पोरेट और नियामकीय मंजूरियों के अधीन रहेगा.
हीरो मोटोकॉर्प की कितनी हिस्सेदारी?
30 जून 2026 तक उपलब्ध एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, हीरो मोटोकॉर्प के पास एथर एनर्जी की पूर्ण रूप से डायल्यूटेड पेड-अप शेयर पूंजी में 29.48 फीसदी हिस्सेदारी थी. प्रस्तावित निवेश के बाद कंपनी की अंतिम हिस्सेदारी प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट की कीमत और संरचना पर निर्भर करेगी.
विस्तार की रणनीति को मिलेगा बल
नया निवेश ऐसे समय में आया है जब एथर एनर्जी भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, रिटेल नेटवर्क और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है. बेंगलुरु स्थित एथर एनर्जी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में 3,671.76 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया था.
2016 से एथर के साथ है हीरो मोटोकॉर्प
भारत की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प वर्ष 2016 से एथर एनर्जी में निवेशक है. कंपनी समय-समय पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती रही है, ताकि देश के तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार में अपनी मौजूदगी को मजबूत किया जा सके.
निवेशकों का भरोसा और मजबूत
विश्लेषकों का मानना है कि 1,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी एथर एनर्जी के अगले चरण के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी. साथ ही, यह निवेश हीरो मोटोकॉर्प के एथर के बिजनेस मॉडल और दीर्घकालिक विकास पर मजबूत भरोसे को भी दर्शाता है. यही वजह है कि इस घोषणा के बाद एथर के शेयरों में खरीदारी का जोर देखने को मिला और कंपनी के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए.