इस सेवा को चलाने वाली एनपीसीआई दुनिया के कई देशों के साथ इसे लेकर एमओयू कर चुकी है. उम्मीद है कि जल्द ही भारत का यूपीआई वहां भी शुरू हो जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत का UPI दुनिया के कई देशों में लगातार अपना विस्तार कर रहा है. सबसे पहले फ्रांस के एफेल टॉवर पर शुरू हुआ तो उसके बाद अब दो और देशों में इसकी शुरुआत हो गई है. अब भारत की ये अनोखी पेमेंट सर्विस उसके पड़ोसी देश श्री लंका और मॉरिशियस में भी शुरू हो चुकी है. इसका मतलब ये है कि अगर आप श्रीलंका और मॉरिशियस घूमने जाते हैं तो आप वहां भी हमारे पेमेंट सिस्टम की तरह पेमेंट कर सकते हैं. भारत के यूपीआई को लेकर दुनिया के कई देशों में और भी प्रयोग चल रहा है.
300 मिलियन भारतीय कर रहे हैं इस्तेमाल
इस मामले को लेकर जानकार कहते हैं कि आज यूपीआई देश के बहुसंख्यक लोगों का पेमेंट सिस्टम बन गया है. आज इससे सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि एनआरआई भी फायदा उठा रहे हैं. यूपीआई उन्हें सिर्फ भारत में ही पेमेंट की सुविधा नहीं दे रहा है बल्कि विदेशों में भी सुविधा मुहैया करा रहा है. भारत का ये पेमेंट सिस्टम पूरी दुनिया में यूनिक पेमेंट सिस्टम बनकर उभर रहा है. एक दूसरे जानकार भी कहते हैं कि एनआरआई भी इस पेमेंट तरीके से सिर्फ भारत में पैसा नहीं भेज सकते हैं बल्कि जहां वो रह रहे हैं वहां भी वो पेमेंट कर सकते हैं.
अब तक इन देशों में हो चुका है यूपीआई शुरू
भारत का यूपीआई अब तक दुनिया के कई देशों में शुरू हो चुका है जबकि कई और देशों में इसे लेकर वहां की सरकार से बात चल रही है. यूपीआई अभी तक जहां फ्रांस, श्री लंका और मॉरिशियस में शुरू हो चुका है वहीं दूसरी ओर इस पेमेंट सिस्टम को चलाने वाला एनपीसीआई आस्ट्रेलिया, यूएई, सउदी अरेबिया, सिंगापुर, अमेरिका, कतर, हांगकांग, यूके, कनाडा और ओमान जैसे देशों से बात कर रहा है. विदेशों में रहने वाले लोग अब अपने इंटरनेशनल मोबाइल नंबर को NRE/NRO अकाउंट के साथ लिंक करके यूपीआई पेमेंट कर सकते हैं. इससे उनके लिए भारतीय नंबर को एक्टिव रखने की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी.
पीएम मोदी ने रुपे कार्ड की शुरुआत की
मंगलवार को पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ मिलकर रुपे कार्ड की शुरुआत की. भारत के यूपीआई से लैस रुपे कार्ड वहां के राष्ट्रपति के नाम पर जारी किया गया था. इस मौके पर दोनों देशों के बीच भारत के रुपे और यूएई के एएनआई को जोड़ने का एक समझौता भी किया गया है. इस समझौते के बाद दोनों देशों के लोगों के लिए पेमेंट को लेकर कहीं भी कोई समस्या नहीं होगी.
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मजबूत मांग के बीच UltraTech, Ambuja Cement और JSW Cement का फोकस लागत घटाने, क्षमता बढ़ाने और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री पर; आने वाले वर्षों में 7-8% सालाना बढ़ सकती है सीमेंट की मांग
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सीमेंट कंपनियों के लिए मांग का माहौल मजबूत बना हुआ है, लेकिन बढ़ती ईंधन और माल ढुलाई लागत मुनाफे पर दबाव डाल रही है. ऐसे में कंपनियां केवल सीमेंट की कीमत बढ़ाकर मार्जिन सुधारने के बजाय लागत घटाने, प्लांट की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री बढ़ाने पर जोर दे रही हैं. अल्ट्राटेक सीमेंट (UltraTech Cement), अंबुजा सीमेंट (Ambuja Cement) और जेएसडब्ल्यू सीमेंट (JSW Cement) की रणनीति में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है.
ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक Jefferies की इंडिया फोरम की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तीनों कंपनियां आने वाले वर्षों में अलग-अलग तरीकों से लागत कम करने और ऑपरेटिंग प्रॉफिट बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं. कंपनियों को उम्मीद है कि मजबूत मांग के साथ लागत पर नियंत्रण से उनकी कमाई में सुधार हो सकता है.
3-5 साल में 7-8% बढ़ सकती है सीमेंट की मांग
रिपोर्ट के अनुसार, मकान निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और निजी क्षेत्र के निवेश से सीमेंट की मांग उम्मीद से बेहतर बनी हुई है. देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनियों में शामिल अल्ट्राटेक की मौजूदा उत्पादन क्षमता करीब 20 करोड़ टन सालाना है. कंपनी इसे बढ़ाकर 23.7 करोड़ टन करने की तैयारी में है. 2019 के बाद कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता करीब दोगुनी कर चुकी है. अब कंपनी का फोकस सिर्फ नई क्षमता जोड़ने पर नहीं, बल्कि मौजूदा प्लांट्स का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी है. क्षमता का उपयोग बढ़ने से प्रति टन सीमेंट उत्पादन की औसत लागत कम हो सकती है, जिससे कंपनी के मुनाफे को सहारा मिलेगा.
अंबुजा सीमेंट: 500 रुपये प्रति टन तक लागत घटाने का लक्ष्य
अंबुजा सीमेंट का जोर भी क्षमता विस्तार के साथ लागत कम करने पर है. कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में ACC, Sanghi, Penna और Orient जैसी कंपनियों या उनकी परिसंपत्तियों को अपने कारोबार में जोड़ा है. हालांकि, कुछ अधिग्रहित परिसंपत्तियों के प्रदर्शन में सुधार उम्मीद से अधिक समय ले रहा है.
कंपनी ने अगले दो वर्षों में अपनी लागत करीब 500 रुपये प्रति टन तक कम करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए लॉजिस्टिक्स पर भी काम किया जा रहा है. अंबुजा चालू वित्त वर्ष के अंत तक सीमेंट की औसत ढुलाई दूरी करीब 15 किलोमीटर कम करने की योजना बना रही है. इससे परिवहन लागत घट सकती है.
कंपनी ऊर्जा लागत कम करने के लिए भी कदम उठा रही है. अंबुजा सीमेंट अपने कुल बिजली इस्तेमाल में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी मौजूदा करीब 30 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी करना चाहती है. इसके साथ ही मिक्स सीमेंट और ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना है. इस रणनीति का मकसद सीमेंट की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी किए बिना प्रति टन मुनाफा बढ़ाना है.
जेएसडब्ल्यू सीमेंट: 6.8 करोड़ टन होगी क्षमता
जेएसडब्ल्यू सीमेंट भी आने वाले वर्षों में बड़े क्षमता विस्तार की तैयारी कर रही है. कंपनी अपनी मौजूदा करीब 2.41 करोड़ टन सालाना क्षमता को अगले 5 से 7 वर्षों में बढ़ाकर करीब 6.8 करोड़ टन करना चाहती है.
कंपनी के कुल कारोबार में करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी दूसरी कंपनियों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से आती है. इसलिए इंफ्रा और निर्माण गतिविधियों में तेजी उसके लिए मांग का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है. जेएसडब्ल्यू सीमेंट भी कीमत बढ़ाने के बजाय लागत कम करने पर जोर दे रही है. कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा, वैकल्पिक ईंधन, वेस्ट हीट से बिजली उत्पादन और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने जैसे उपायों पर काम कर रही है. कंपनी का लक्ष्य प्रति टन ऑपरेटिंग प्रॉफिट को वित्त वर्ष 2025-26 के करीब 900 रुपये से बढ़ाकर लगभग 1,100 रुपये करना है.
कीमतों के बजाय लागत पर क्यों बढ़ा फोकस?
सीमेंट उद्योग में मांग मजबूत रहने के बावजूद कंपनियों के सामने लागत का दबाव बना हुआ है. ईंधन, बिजली और परिवहन खर्च बढ़ने पर कीमत बढ़ाना हमेशा आसान नहीं होता, क्योंकि इससे मांग पर असर पड़ सकता है और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है. ऐसे में कंपनियों के लिए प्लांट की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल, कम दूरी तक माल ढुलाई, सस्ती और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल तथा प्रीमियम सीमेंट की बिक्री बढ़ाना मुनाफा सुधारने के वैकल्पिक तरीके बन रहे हैं.
कुल मिलाकर, सीमेंट उद्योग में कंपनियों की रणनीति अब सिर्फ ‘कीमत बढ़ाओ और मार्जिन बचाओ’ तक सीमित नहीं रह गई है. मजबूत मांग के बीच उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ लागत घटाने और प्रति टन कमाई बढ़ाने पर जोर है. अगर सीमेंट की मांग अनुमान के मुताबिक बढ़ती है और कंपनियां लागत नियंत्रण के अपने लक्ष्य हासिल करती हैं, तो आने वाले वर्षों में उनके ऑपरेटिंग मार्जिन और मुनाफे को सहारा मिल सकता है.
5 दिन तक प्रभावित हो सकती हैं बैंकिंग सेवाएं, हाफ इयरली क्लोजिंग के बीच हड़ताल से बढ़ सकती है परेशानी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बैंक कर्मचारियों की 28 सितंबर से प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को लेकर वित्त मंत्रालय ने बैंक यूनियनों से आंदोलन वापस लेने की अपील की है. मंत्रालय का कहना है कि कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं और बाकी मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 5 दिन के वर्किंग वीक समेत कई मांगों को लेकर 28 सितंबर से तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है.
28 सितंबर से 3 दिन की हड़ताल
UFBU की प्रस्तावित हड़ताल 28 सितंबर से शुरू होगी. इससे बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है. हड़ताल से ठीक पहले सप्ताहांत की छुट्टियां होने के कारण कई जगह लगातार पांच दिन तक बैंक शाखाओं का कामकाज प्रभावित हो सकता है.
इस हड़ताल का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बैंकों की हाफ इयरली क्लोजिंग यानी 30 सितंबर के आसपास पड़ रही है. इस दौरान खातों के मिलान, प्रोविजनिंग, ट्रेजरी और अन्य वित्तीय गतिविधियों का काम महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से ग्राहकों, कारोबारियों और सरकारी लेन-देन से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं.
सरकार ने गिनाए कर्मचारियों के लिए उठाए गए कदम
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सरकार बैंक कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठा चुकी है. मंत्रालय के मुताबिक, कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी, नया पे-स्केल लागू करने और स्टाफ वेलफेयर फंड का दायरा बढ़ाने जैसे फैसले लिए गए हैं. इसके अलावा असिस्टेंट जनरल मैनेजर से लेकर चीफ जनरल मैनेजर स्तर तक के उच्च पदों की संख्या भी बढ़ाई गई है. कर्मचारियों की मांगों को देखते हुए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को भी बातचीत के बाद स्थगित किया गया था.
वेतन समझौते पर समय से पहले शुरू हुई बातचीत
मंत्रालय ने बताया कि बैंक कर्मचारियों के वेतन संशोधन और भत्तों से जुड़े नए द्विपक्षीय समझौते (Bipartite Settlement) की प्रक्रिया भी समय से पहले शुरू की गई है. सरकार का कहना है कि नवंबर 2027 की निर्धारित समयसीमा से काफी पहले इस प्रक्रिया को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है.
5 दिन के वर्किंग वीक की मांग पर क्या कहा?
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में 5 दिन का वर्किंग वीक भी शामिल है. मौजूदा व्यवस्था में बैंक आम तौर पर दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं, जबकि अन्य शनिवार को कामकाज होता है. सरकार का कहना है कि बाकी शनिवार को बैंक शाखाएं खुली रहने से आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच मिलती है. मंत्रालय ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाएं और लंबित मुद्दों का समाधान चर्चा के जरिए निकालें.
सरकार के अनुसार, हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ आम ग्राहकों, कारोबारियों और स्वयं कर्मचारियों पर भी असर पड़ सकता है.
शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के पास टाटा संस की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है. समूह लंबे समय से इस हिस्सेदारी में अधिक तरलता चाहता है, क्योंकि उसकी होल्डिंग और ऑपरेटिंग कंपनियों पर बड़ी मात्रा में कर्ज है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शापूरजी पलोनजी ग्रुप (SP Group) के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग के समर्थन में टाटा ट्रस्ट्स से सहयोग की अपील की है. यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नियामकीय कार्रवाई के बाद टाटा संस पर शेयर बाजार में लिस्टिंग से जुड़े नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ गया है. वहीं, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध कर रहे हैं.
शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के पास टाटा संस की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है. समूह लंबे समय से इस हिस्सेदारी में अधिक तरलता चाहता है, क्योंकि उसकी होल्डिंग और ऑपरेटिंग कंपनियों पर बड़ी मात्रा में कर्ज है. मिस्त्री ने कहा कि लिस्टिंग का मुद्दा शेयरधारकों के बीच विवाद के तौर पर देखने के बजाय सभी संबंधित पक्षों को मिलकर इसका समाधान तलाशना चाहिए. उन्होंने दोनों कारोबारी समूहों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा भी जताई.
लिस्टिंग को लेकर मिलकर फैसला लेने की अपील
मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस, कंपनी के नेतृत्व, शेयरधारकों और अन्य हितधारकों से लिस्टिंग के मुद्दे पर सामूहिक रूप से विचार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि SP ग्रुप और टाटा समूह के बीच संबंध 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं और दोनों समूहों के बीच आगे भी बेहतर सहयोग की संभावनाएं हैं.
उनका यह बयान 17 सितंबर को हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक के बाद आया है. इस बैठक में बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर एक और पांच साल का कार्यकाल देने को मंजूरी दी थी. हालांकि, नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था.
बोर्ड ने RBI की लागू गाइडलाइंस का पालन करने के लिए जरूरी कदम उठाने और नियामक, टाटा ट्रस्ट्स तथा अन्य हितधारकों से लागू नियमों को लेकर मार्गदर्शन लेने का भी फैसला किया था.
टाटा संस में हिस्सेदारी SP ग्रुप के लिए अहम
SP ग्रुप ने 1965 में पहली बार टाटा संस के शेयर खरीदे थे. इसके बाद समूह ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 18.37 फीसदी कर ली, जिससे वह टाटा संस का सबसे बड़ा अल्पमत शेयरधारक बन गया. हालांकि, टाटा संस के शेयरों से जुड़े प्रतिबंधों के कारण SP ग्रुप के लिए इस हिस्सेदारी को आसानी से भुनाना संभव नहीं रहा है. समूह की कंपनियों पर मौजूद कर्ज के बीच टाटा संस में हिस्सेदारी उसके लिए संभावित नकदी स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण बनी हुई है. टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग होने पर इस हिस्सेदारी के लिए बाजार आधारित मूल्य भी तय हो सकता है.
नोएल टाटा ने दिया था 3 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव
17 सितंबर की बोर्ड बैठक में नोएल टाटा ने एक प्रस्ताव रखा था. इसके तहत SP ग्रुप को टाटा संस में 3 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने के बदले करीब ₹25,000 करोड़ जुटाने का रास्ता सुझाया गया था. इस प्रस्ताव को टाटा संस को निजी कंपनी बनाए रखते हुए SP ग्रुप की नकदी जरूरतों को पूरा करने के वैकल्पिक तरीके के तौर पर देखा गया.
RBI के फैसले से बदला लिस्टिंग का समीकरण
टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर बहस उस समय और तेज हो गई जब RBI ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग को खारिज कर दिया. इसके बाद टाटा संस पर अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से जुड़े नियामकीय ढांचे के तहत लागू आवश्यकताओं का पालन करने की स्थिति बनी हुई है, जिसमें संबंधित लिस्टिंग नियम भी शामिल हैं.
बोर्ड की ओर से अनुपालन की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला कंपनी के पहले के रुख से बदलाव को दर्शाता है. इससे पहले टाटा संस सार्वजनिक लिस्टिंग से बचने के प्रयास कर रही थी. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग का विरोध कर रहा है. इसके विपरीत, SP ग्रुप लगातार टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में रहा है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन APUs को Make-II फ्रेमवर्क के तहत देश में ही विकसित किया गया है. Make-II के तहत उद्योगों की अगुवाई में रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों के लिए सहायक विद्युत इकाइयां (APUs) की खरीद को लेकर एक्यूरेट इंडस्ट्रीयल कंट्रोल्स (Accurate Industrial Controls Private Limited) के साथ ₹586 करोड़ का करार किया है. यह समझौता 21 सितंबर को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुआ. APU टैंकों के महत्वपूर्ण सिस्टम के लिए बिजली का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराता है. इनमें फायर-कंट्रोल सिस्टम, फायरिंग सर्किट, गन स्टेबिलाइजेशन सिस्टम और टैंक में लगे अन्य उपकरण शामिल हैं. मंत्रालय के मुताबिक, इन APUs को सेना के मैकेनाइज्ड फॉर्मेशन की ऑपरेशनल तैयारियों, विश्वसनीयता और टिकाऊपन को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
Make-II के तहत विकसित किए गए हैं APUs
इस खरीद को बख्तरबंद प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण सब-सिस्टम के स्वदेशीकरण की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन APUs को Make-II फ्रेमवर्क के तहत देश में ही विकसित किया गया है. Make-II के तहत उद्योगों की अगुवाई में रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाता है.
आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर
₹586 करोड़ का यह करार रक्षा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. मंत्रालय ने कहा कि यह खरीद 'विकसित भारत@2047' के विजन और मजबूत, आत्मनिर्भर तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय रक्षा उद्योग के निर्माण के उद्देश्य के अनुरूप है.
T-72 और T-90 टैंकों के बेड़े में स्वदेशी APUs की तैनाती से इन टैंकों के इलेक्ट्रॉनिक और हथियार प्रणालियों को संचालित करने वाले सहायक सिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है. साथ ही, यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में भी योगदान देगा.
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 19 से 21 सितंबर के बीच बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध नकदी अधिशेष करीब ₹6 लाख करोड़ रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी निकालने का असर अब दिखाई देने लगा है. बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी का अधिशेष घटकर करीब ₹6 लाख करोड़ रह गया है. इसके साथ ही बैंकों के बीच एक-दूसरे को दिए जाने वाले overnight loans की ब्याज दर भी बढ़कर 5.24 फीसदी हो गई है, जो RBI की रेपो रेट के करीब है. बॉन्ड बिक्री के साथ GST भुगतान के लिए हुई नकद निकासी ने भी सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम किया है.
सितंबर की शुरुआत में ₹11.16 लाख करोड़ था नकदी अधिशेष
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 19 से 21 सितंबर के बीच बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध नकदी अधिशेष करीब ₹6 लाख करोड़ रहा. सितंबर के पहले सप्ताह में यह बढ़कर ₹11.16 लाख करोड़ के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. यानी कुछ ही हफ्तों में बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी में काफी कमी आई है.
RBI ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए खुले बाजार परिचालन (OMO) के तहत सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है. इसकी पहली नीलामी शुक्रवार को हुई थी. सोमवार को हुई दूसरी OMO नीलामी में भी निवेशकों की मजबूत मांग देखने को मिली. ₹25,000 करोड़ के बॉन्ड बेचने के लिए ₹84,942 करोड़ की बोलियां मिलीं.
कॉल रेट बढ़कर 5.24 फीसदी
बैंकिंग सिस्टम में नकदी कम होने का असर overnight call rate पर भी पड़ा है. यह दर शुक्रवार के 4.92 फीसदी से बढ़कर सोमवार को 5.24 फीसदी पर पहुंच गई. यह RBI की मौजूदा रेपो रेट के लगभग बराबर है. एक प्राथमिक डीलरशिप के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नकदी की स्थिति पर OMO और GST भुगतान के लिए हुई नकद निकासी, दोनों का असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि इन दोनों वजहों से कॉल रेट रेपो रेट के करीब पहुंच गई है.
सितंबर में ₹1 लाख करोड़ के बॉन्ड बेचने की योजना
RBI ने सितंबर में कुल ₹1 लाख करोड़ के OMO के तहत सरकारी बॉन्ड बेचने की घोषणा की है. इसका मकसद बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त और अपेक्षाकृत लंबी अवधि की नकदी को कम करना है. यह अतिरिक्त नकदी मुख्य रूप से डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत विदेशी निवेश के बड़े प्रवाह से बनी है. RBI ने अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए लंबी अवधि के वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) जैसे दूसरे उपाय भी किए हैं.
आगे और घट सकती है बैंकिंग सिस्टम की नकदी
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में बैंकिंग सिस्टम की नकदी स्थिति में और बदलाव हो सकता है. महीने के अंत में सरकारी और अन्य भुगतान की स्थिति बदलने के साथ सिस्टम में नकदी फिर बढ़ या घट सकती है. इसके अलावा RBI की ओर से आगे भी OMO के तहत बॉन्ड बिक्री जारी रहने की संभावना है.
बैंकों के ट्रेजरी अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले महीनों में करीब ₹1 लाख करोड़ की एक और OMO बिक्री भी नकदी अधिशेष पर असर डाल सकती है. वहीं, अर्थव्यवस्था में चलन में मौजूद नकदी बढ़ने और बैंक जमा बढ़ने के साथ बैंकों की नकद आरक्षित अनुपात (CRR) से जुड़ी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं. इससे सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी और कम हो सकती है.
10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर भी नजर
IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता के मुताबिक, फिलहाल करीब ₹13 लाख करोड़ का दीर्घकालिक नकदी अधिशेष है, जिसे पूरी तरह सिस्टम से निकालने में वित्त वर्ष 2028 की दूसरी तिमाही तक का समय लग सकता है.
बाजार प्रतिभागियों के मुताबिक, आगे चलकर 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7 फीसदी से बढ़कर 7.25 फीसदी तक जा सकती है. हालांकि, सोमवार को 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 2 आधार अंक घटकर 7.05 फीसदी पर बंद हुई.
ONGC ने बताया कि महानदी बेसिन में ‘समुद्र मंथन’ अभियान के तहत खोदा गया यह उसका पहला कुआं है. MN-DW18-1-H-D नाम के इस कुएं को 1,623 मीटर की लक्षित गहराई तक खोदा गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) को ओडिशा तट के पास गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस की खोज में सफलता मिली है. कंपनी ने ‘समुद्र मंथन’ डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन अभियान के तहत कोणार्क से करीब 43 किलोमीटर दूर महानदी अपतटीय बेसिन में खोदे गए पहले कुएं में 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई पर गैस की खोज की है. ONGC के अनुसार, कुएं से पिछले तीन दिनों से गैस का प्रवाह बना हुआ है और दबाव भी उत्साहजनक है. हालांकि, इस खोज को व्यावसायिक रूप से विकसित करने से पहले इसका आगे मूल्यांकन किया जाएगा.
1,623 मीटर की गहराई तक खोदा गया कुआं
ONGC ने बताया कि महानदी बेसिन में ‘समुद्र मंथन’ अभियान के तहत खोदा गया यह उसका पहला कुआं है. MN-DW18-1-H-D नाम के इस कुएं को 1,623 मीटर की लक्षित गहराई तक खोदा गया था. 18 सितंबर को कंपनी को 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई के बीच प्राकृतिक गैस मिली.
कंपनी के अनुसार, खोज के बाद से कुएं में गैस का प्रवाह जारी है और इसका दबाव एवं फ्लो उत्साहजनक बना हुआ है. हालांकि, खोज की वास्तविक क्षमता और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन आगे के परीक्षण और मूल्यांकन के बाद किया जाएगा.
#ONGC strikes gas in the deep waters of Mahanadi Basin.
— Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) (@ONGC_) September 21, 2026
MDW-28, the maiden well of ONGC’s current deepwater campaign in the Mahanadi Basin is flowing gas with encouraging rates and sustained reservoir pressure.
The campaign was launched on 25 July 2026 by Hon'ble Minister of… pic.twitter.com/whAV8TubIK
जल्द उत्पादन शुरू होने की संभावना
ONGC के अनुसार, खोज स्थल ओडिशा तट से अपेक्षाकृत कम दूरी पर है. ऐसे में अगर यह खोज व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित होती है तो इसके विकास और गैस को बाजार तक पहुंचाने में मौजूदा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 के तहत साझा बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल से गहरे समुद्र में मिले संसाधनों को उत्पादन में लाने में मदद मिल सकती है.
यह खोज भारत के घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में भी अहम हो सकती है, हालांकि इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन खोज के आकार, उत्पादन क्षमता और व्यावसायिक व्यवहार्यता स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा.
शुक्रवार को सेंसेक्स 19.63 अंक की गिरावट के साथ 74,294.96 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23,346.40 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 फीसदी चढ़कर 74,858.99 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 फीसदी की तेजी के साथ 23,414.30 पर बंद हुआ. मंगलवार को भी बाजार की शुरुआत मजबूत रहने के संकेत मिल रहे हैं. शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 23,500 के पार पहुंच गया है. वहीं, ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर है और अमेरिकी बाजारों में भी सोमवार को तेजी रही. इन संकेतों के बीच आज Hindustan Copper, Waaree Energies, Pine Labs और Lenskart Solutions समेत कई शेयर कॉरपोरेट अपडेट्स के कारण फोकस में रह सकते हैं.
सोमवार को सेंसेक्स के 24 शेयरों में तेजी
सोमवार को सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 6 शेयरों में गिरावट रही. UltraTech Cement 4.11 फीसदी की तेजी के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा. HCL Tech 3.42 फीसदी, Eternal 2.59 फीसदी, Titan 2.49 फीसदी और ITC 1.93 फीसदी चढ़े. वहीं, Bharti Airtel 1.93 फीसदी की गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर रहा. Power Grid में 1.15 फीसदी, Infosys में 0.97 फीसदी, Adani Ports में 0.72 फीसदी और Tata Steel में 0.62 फीसदी की गिरावट रही.
निफ्टी में 30 शेयर चढ़े
निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 बढ़त और 20 गिरावट के साथ बंद हुए. Eternal 2.77 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. HCL Tech 2.54 फीसदी, ITC 1.79 फीसदी, Sun Pharma 1.72 फीसदी और Reliance Industries 1.71 फीसदी चढ़े. गिरावट वाले शेयरों में Bharti Airtel 3.33 फीसदी टूटकर सबसे आगे रहा. Adani Ports 2.02 फीसदी, Bajaj Finance 1.83 फीसदी, Power Grid 1.55 फीसदी और Adani Enterprises 1.49 फीसदी नीचे बंद हुए.
आज बाजार के लिए क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार के कारोबार से पहले GIFT Nifty 23,500 के पार कारोबार कर रहा है. इससे घरेलू बाजार में मजबूत शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि, बाजार खुलने के बाद दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू कारोबार के आधार पर बदल सकती है.
ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. पिछले पांच दिनों में इसकी कीमत करीब 8 फीसदी घट चुकी है. दूसरी ओर, AI शेयरों में तेजी और क्रूड में नरमी के बीच अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूत रहे. Nasdaq करीब 600 अंक चढ़ा, जबकि S&P 500 और Dow Jones में भी करीब आधे से एक फीसदी तक की तेजी रही.
इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज Hindustan Copper ने अगले 5-6 वर्षों में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक के कैपेक्स की योजना के चलते फोकस में है. Waaree Energies को एक प्रमुख सोलर डेवलपर से 2 GW सोलर मॉड्यूल सप्लाई का ऑर्डर मिला है. Pine Labs में Mastercard Asia/Pacific करीब 4.3 फीसदी हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेच सकती है. Lenskart Solutions में Platinum Jasmine A 2018 Trust ने 3.5 करोड़ शेयर यानी करीब 2.01 फीसदी हिस्सेदारी 2,390.57 करोड़ रुपये में बेची है.
इसके अलावा, Patanjali Foods के एक Sunrich Sunflower Oil बैच की बिक्री पर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई हुई है. Edelweiss Financial Services 300 करोड़ रुपये तक के NCD जारी कर फंड जुटाएगी. Canara Bank को Basel III Additional Tier-I Bonds की NSE डेट लिस्टिंग की मंजूरी मिली है. Suryoday Small Finance Bank के बोर्ड ने 400 करोड़ रुपये तक के NCD इश्यू को मंजूरी दी है, जबकि Share India Securities 200 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए कन्वर्टिबल वारंट जारी करेगी.
Lloyds Metals 1,550 करोड़ रुपये तक के NCD जारी करने के साथ क्षमता विस्तार पर 140 करोड़ रुपये निवेश करेगी. वहीं, GRSE के बोर्ड ने रायचक में ग्रीनफील्ड शिपयार्ड के लिए 2,896 करोड़ रुपये के कैपिटल बजट को मंजूरी दी है. Reliable Data Services भी 200 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने की तैयारी में है.
ब्लॉक डील के बाद लेंसकार्ट के शेयरों में दबाव देखने को मिला और BSE पर शेयर करीब 3 फीसदी तक गिरकर ₹683.30 के निचले स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
लेंसकार्ट (Lenskart Solutions) के शेयरों में सोमवार को बड़ी ब्लॉक डील हुई, जिसमें कंपनी के 3.6 करोड़ शेयरों का कारोबार ₹688 प्रति शेयर के भाव पर हुआ. यह सौदा करीब ₹2,468 करोड़ का है और कंपनी की कुल 2.07 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है. ब्लॉक डील के बाद लेंसकार्ट के शेयरों में दबाव देखने को मिला और BSE पर शेयर करीब 3 फीसदी तक गिरकर ₹683.30 के निचले स्तर पर पहुंच गया.
3.6 करोड़ शेयरों का हुआ कारोबार
ब्लॉक डील में लेंसकार्ट के 3.6 करोड़ शेयरों का लेनदेन हुआ है. हालांकि, शेयर बेचने वाले और खरीदने वाले निवेशकों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Platinum Jasmine A 2018 Trust कंपनी में 1.7 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकता है. Platinum Jasmine, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) से जुड़ा एक इनवेस्टमेंट व्हीकल है. ब्लॉक डील के तहत बेचे गए शेयरों पर 90 दिनों का लॉक-अप पीरियड लागू होगा. यानी इस अवधि के दौरान इन शेयरों को आगे नहीं बेचा जा सकेगा.
प्रमोटर्स के पास 17.53% हिस्सेदारी
जून 2026 तिमाही के अंत तक लेंसकार्ट में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 17.53 फीसदी थी. कंपनी ने 10 नवंबर 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी. ब्लॉक डील के बाद सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई. BSE पर शेयर ₹683.30 के निचले स्तर तक गया. इसके साथ कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.19 लाख करोड़ रह गया. हालांकि, हालिया गिरावट के बावजूद लेंसकार्ट के शेयर ने इस साल अब तक करीब 60 फीसदी की बढ़त दर्ज की है. पिछले तीन महीनों में शेयर करीब 35 फीसदी चढ़ा है.
जून और अगस्त में भी SoftBank ने बेची थी हिस्सेदारी
लेंसकार्ट के प्रमुख निवेशकों में शामिल SoftBank Vision Fund II Lightbulb (Cayman) Limited ने इस साल अगस्त में भी कंपनी की हिस्सेदारी बेची थी. अगस्त में ब्लॉक डील के जरिए 4.5 करोड़ शेयर यानी करीब 2.58 फीसदी हिस्सेदारी ₹2,887.87 करोड़ में बेची गई थी. इस सौदे में Societe Generale ODI, Goldman Sachs, Motilal Oswal Mutual Fund, Vanguard Group, Morgan Stanley, SBI Mutual Fund, Nippon India और HDFC Mutual Fund समेत कई घरेलू और विदेशी निवेशकों ने शेयर खरीदे थे.
इससे पहले जून में भी SoftBank समूह ने SVF II Lightbulb (Cayman) के जरिए लेंसकार्ट में 3.25 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी. उस समय 5.65 करोड़ शेयरों का सौदा करीब ₹2,873.30 करोड़ में हुआ था.
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर को दशहरा के दिन प्रभावी होगा. समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच उपलब्ध कराएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो जाएगा. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. इस समझौते के लागू होने के बाद न्यूजीलैंड को होने वाले भारत के 100 फीसदी निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी. दोनों देशों ने वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 27 अप्रैल को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
दशहरा के दिन लागू होगा FTA
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड FTA 20 अक्टूबर को दशहरा के दिन प्रभावी होगा. समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच उपलब्ध कराएगा. फिलहाल न्यूजीलैंड सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कलपुर्जों समेत कई प्रमुख भारतीय उत्पादों पर अधिकतम 10 फीसदी तक आयात शुल्क लगाता है. FTA लागू होने के बाद इन उत्पादों के निर्यातकों को शुल्क में राहत मिलेगी.
न्यूजीलैंड भारत में करेगा 20 अरब डॉलर का निवेश
मुक्त व्यापार समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों के दौरान 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ-साथ निवेश संबंधों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
भारत और न्यूजीलैंड ने इस FTA पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर किए थे. समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ाना तथा निवेश के लिए बेहतर अवसर तैयार करना है.
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, हैदराबाद का नया डेटासेंटर रीजन भारत में कंपनी की 20.5 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का अहम हिस्सा है. अडानी ग्रुप, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसी कंपनियां इस नए रीजन के लिए साइन अप कर चुकी हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में अपने नए इंडिया साउथ सेंट्रल डेटासेंटर रीजन को लाइव कर दिया है. कंपनी के मुताबिक, यह भारत में उसका चौथा क्लाउड रीजन है, जिसे एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स के लिए तैयार किया गया है. तीन-जोन आर्किटेक्चर वाले इस रीजन में समय के साथ एज़्योर और एआई सर्विसेज की क्षमता बढ़ाई जाएगी. माइक्रोसॉफ्ट इसे भारत के साथ-साथ एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्ट्रैटेजिक हब के रूप में विकसित करना चाहता है.
भारत में माइक्रोसॉफ्ट का 20.5 अरब डॉलर का निवेश
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, हैदराबाद का नया डेटासेंटर रीजन भारत में कंपनी की 20.5 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का अहम हिस्सा है. अडानी ग्रुप, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसी कंपनियां इस नए रीजन के लिए साइन अप कर चुकी हैं.
कंपनी ने कहा कि भारत में उसके डेटासेंटर रीजन अब एआई-रेडी हैं. इनमें एआई-कैपेबल हार्डवेयर, हाई-एफिशिएंसी कूलिंग सिस्टम और एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स को चलाने के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म फाउंडेशन शामिल हैं.
तीन-जोन आर्किटेक्चर से बढ़ेगी क्षमता
इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन को रेजिलिएंट थ्री-जोन आर्किटेक्चर के साथ तैयार किया गया है. कंपनी के मुताबिक, इसे भविष्य में क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें फिलहाल एज़्योर सर्विसेज का व्यापक पोर्टफोलियो उपलब्ध है और आने वाले महीनों में अतिरिक्त एज़्योर और एआई सर्विसेज जोड़ी जाएंगी.
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, सपोर्टेड सर्विसेज के उपलब्ध होने के साथ भारतीय संगठन अपनी पात्र संवेदनशील वर्कलोड्स को स्थानीय स्तर पर ऐसे कंट्रोल्स के साथ डिप्लॉय कर सकेंगे, जो सुरक्षा, कंप्लायंस और डेटा सॉवरेन्टी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे.
डेटा प्रोटेक्शन और सॉवरेन्टी पर फोकस
कंपनी ने कहा कि उसके भारत स्थित क्लाउड रीजन MeitY की गाइडलाइंस के अनुरूप क्षमताएं उपलब्ध कराते हैं. इनमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) फ्रेमवर्क के साथ-साथ RBI और CERT-In जैसी संस्थाओं की सेक्टर-स्पेसिफिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करने वाली क्षमताएं शामिल हैं.
माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, अलग-अलग एआई और क्लाउड वर्कलोड्स के लिए डेटा लोकेशन, एन्क्रिप्शन, ऑपरेशनल एक्सेस और गवर्नेंस के अलग-अलग स्तर के कंट्रोल की जरूरत हो सकती है. इंडिया साउथ सेंट्रल में सपोर्टेड सर्विसेज के विस्तार के साथ Azure Confidential Computing, Customer Lockbox और Azure Key Vault जैसी क्षमताएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
कूलिंग में पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य
माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, इंडिया साउथ सेंट्रल रीजन में हाई-एफिशिएंसी मैकेनिकल कूलिंग का इस्तेमाल किया गया है और कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य रहता है. कंपनी ने इसे अपने 2030 तक कार्बन नेगेटिव, वाटर पॉजिटिव और जीरो वेस्ट बनने के वैश्विक लक्ष्यों से जोड़ा है.
हैदराबाद में कंपनी स्थानीय साझेदारों के साथ ग्राउंडवॉटर रिचार्ज, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और वाटरशेड रेजिलिएंस पर भी काम कर रही है. कंपनी के मुताबिक, एलिकट्टा ग्राउंडवॉटर रिचार्ज प्रोग्राम ने जून 2026 तक करीब 50 लाख लीटर की रिचार्ज क्षमता जोड़ी है.
1 करोड़ से ज्यादा भारतीयों को AI स्किल्स
माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में एआई स्किलिंग को लेकर भी नया आंकड़ा साझा किया है. कंपनी के मुताबिक, 2030 तक 2 करोड़ लोगों को एआई स्किल्स देने की प्रतिबद्धता के तहत अब तक 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को एआई स्किल्स प्रदान की जा चुकी हैं. कंपनी के अनुसार, करीब 25 फीसदी लर्नर्स फाउंडेशनल एआई कोर्स से आगे बढ़कर अतिरिक्त लर्निंग पाथवे के लिए क्रेडेंशियल हासिल कर चुके हैं.
इसके अलावा, माइक्रोसॉफ्ट का डेटा सेंटर अकैडमी प्रोग्राम तेलंगाना सरकार और यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर चलाया जा रहा है. इसके तहत 600 घंटे का इंडस्ट्री-अलाइन्ड स्किलिंग प्रोग्राम है, जिसमें छात्रों को डेटासेंटर ऑपरेशंस और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है.
3,600 किलोमीटर की सबमरीन केबल परियोजना में भी भागीदारी
माइक्रोसॉफ्ट भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी निवेश कर रहा है. कंपनी इंडिया-साउथईस्ट एशिया (I-2SEA) सबमरीन केबल सिस्टम में कंसोर्टियम पार्टनर है.
करीब 3,600 किलोमीटर लंबा यह सबसी केबल कॉरिडोर भारत, मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ेगा. भारत में मछलीपट्टनम और साउथ चेन्नई में इसके दो लैंडिंग पॉइंट होंगे. कंपनी के मुताबिक, इस सिस्टम का लक्ष्य 2029 तक सर्विस के लिए तैयार होना है.
माइक्रोसॉफ्ट ने क्या कहा?
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एंड साउथ एशिया के प्रेसिडेंट पुनीत चंडोक ने कहा कि इंडिया साउथ सेंट्रल कंपनी का भारत में चौथा क्लाउड रीजन है, जिसे एडवांस्ड एआई वर्कलोड्स के लिए तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि भारत में एआई के लिए केवल कंप्यूट क्षमता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित, सॉवरेन और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर भी जरूरी है.
वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इंडिया साउथ सेंट्रल डेटासेंटर रीजन भारत की एआई महत्वाकांक्षा के लिए जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करता है. उनके मुताबिक, ऐसे निवेश देश में एआई क्षमता बढ़ाने, इनोवेशन को गति देने और डेवलपर्स, कंपनियों तथा सार्वजनिक संस्थानों को एआई के इस्तेमाल में सक्षम बनाने में मदद कर सकते हैं.
भारत में बढ़ रहा डेटासेंटर निवेश
माइक्रोसॉफ्ट ने Boston Consulting Group (BCG) की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि भारत में डेटासेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से 2030 तक 140-200 अरब डॉलर का आर्थिक आउटपुट पैदा हो सकता है. कंपनी के मुताबिक, भारत में बढ़ती क्लाउड और एआई मांग के बीच डेटासेंटर, कनेक्टिविटी और एआई स्किलिंग में निवेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार में योगदान दे रहा है.