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नोटबंदी के बाद आयकरदाताओं की संख्या में हुआ इतने करोड़ का इजाफा, सरकार का बढ़ा रेवेन्यू
रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में इस अवधि के दौरान, कॉरपोरेट टैक्स 4.28 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 7.12 ट्रिलियन रुपये हो गया, जो कि 66 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
जिस नोटबंदी को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठाता रहा है उसी नोटबंदी को लेकर संसद से अच्छी खबर निकलकर आई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2016 में नोटबंदी के निर्णय के बाद अगले वित्तीय वर्ष में 1 करोड़ व्यक्तिगत आयकर दाताओं को जोड़ा गया है. रिपोर्ट ये भी बताती है कि करदाताओं की संख्या में 32.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
1 करोड़ आयकर दाताओं का हुआ इजाफा
मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि नोटबंदी के ठीक एक साल बाद जब टैक्स फाइल करने वालों की रिपोर्ट सामने आई तो पता चला कि वित्तीय वर्ष 2017 में 1 करोड़ व्यक्तिगत आयकर दाताओं की संख्या में इजाफा हो गया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कॉरपोरेट टैक्स में भी इजाफा हुआ है. 8 नवंबर, 2016 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अघोषित काले धन को लक्षित करने और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए प्रचलन में 86 प्रतिशत नकदी को अवैध घोषित कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस जनवरी में फैसले की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह केंद्रीय बैंक के परामर्श से लिया गया था कि इसमें उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2017 में कॉर्पोरेट करदाताओं की संख्या में 32.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जब से मोदी सरकार ने वर्ष 2014 में सत्ता संभाली है, व्यक्तिगत आयकरदाताओं की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
आखिर क्या रहा वृद्धि का कारण
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा में सरकार के लिखित जवाब में आयकरदाताओं की संख्या में वृद्धि का कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके कई कारक हैं, जिनमें अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण, प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोग, अधिक खर्च करने वालों पर नज़र रखना और बैंकों में विमुद्रीकृत नोटों को जमा करना शामिल है. इसके अतिरिक्त, आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में सरलीकरण और अनुपालन में आसानी से भी करदाताओं की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है, रिपोर्ट में कहा गया है.
नोटबंदी के बाद जारी हुए 500 और 2000 के नोट
नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी किए. लोगों को 30 दिसंबर, 2016 को या उससे पहले पुराने नोटों को नए नोटों से बदलने का विकल्प दिया गया था. जो लोग 9 नवंबर-30 दिसंबर, 2016 के दौरान भारत से बाहर थे, उन्हें 31 मार्च, 2017 तक पुराने नोट जमा करने का अवसर दिया गया था, जैसा कि रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है. बैंकों में 99 प्रतिशत से अधिक पुराने नोट जमा होने के बाद सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.
हालांकि, कर अधिकारियों ने कहा कि इस कदम से जमाकर्ताओं को ट्रैक करने में मदद मिली, जिससे अधिक करदाताओं को जोड़ने में मदद मिली, जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विशेष रूप से, वित्त मंत्रालय द्वारा सोमवार को लोकसभा में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चला है कि वित्त वर्ष 22 में आयकर संग्रह 2.58 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 6.73 ट्रिलियन रुपये हो गया, जो 160 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है.
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