Aequs ने फाइल किया IPO का ड्राफ्ट, बनेगी पब्लिक कंपनी, जुटाएगी 200 मिलियन डॉलर

एयरोस्पेस और हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनी का बड़ा कदम

Last Modified:
Tuesday, 03 June, 2025
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एयरोस्पेस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सक्रिय Aequs ने अपने आईपीओ (IPO) के लिए भारतीय शेयर बाजारों और रेगुलेटर के पास गोपनीय रूप से ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दायर किया है। कंपनी लगभग 200 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रही है, जिसमें फ्रेश इक्विटी शेयर जारी करने के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल होगा। कंपनी के निदेशक मंडल ने हाल ही में एक प्रस्ताव पास कर 'Aequs Private Limited' से उसका नाम बदलकर 'Aequs Limited' करने और उसे सार्वजनिक कंपनी का दर्जा देने की मंजूरी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो, इस आईपीओ के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, JM फाइनेंशियल और IIFL कैपिटल को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है। कंपनी की वैल्यूएशन, शेयर स्ट्रक्चर और समयसीमा जैसी जानकारियां जल्द सार्वजनिक की जाएंगी।

वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी की कुल आय लगभग Rs 988 करोड़ रही, जिसमें से Rs 970 करोड़ ऑपरेटिंग इनकम थी। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CareEdge के मुताबिक, कंपनी की राजस्व वृद्धि निकट से मध्यम अवधि में 45 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने की संभावना है। यह वृद्धि कंपनी के कैपेक्स प्रोजेक्ट्स के सफल क्रियान्वयन और एयरोस्पेस ऑर्डर्स में बढ़त के कारण संभव हो रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी को इसके प्रमोटरों से लगातार वित्तीय समर्थन मिलता रहा है, जिससे उसकी फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मजबूत बनी हुई है।

एएकस भारत, फ्रांस और अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चलाती है, जिससे यह वैश्विक ग्राहकों को सप्लाई चेन की दक्षता प्रदान करती है। भारत में कंपनी का संचालन कर्नाटक के बेलगावी, हुबली और कोप्पल में मौजूद तीन प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स से होता है।

यह प्रस्तावित आईपीओ न केवल कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा, बल्कि भारत के बढ़ते एयरोस्पेस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए भी एक बड़ा संकेत है कि घरेलू कंपनियां अब वैश्विक मंच पर कदम रखने के लिए तैयार हैं।

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पर्यटन के लिए राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा शुरू, 2028 तक 23 हजार अनुभव और होमस्टे डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेंगे

राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन ढांचा पर्यटन मंत्रालय और ONDC मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके जरिए अलग-अलग जगहों पर बिखरी पर्यटन सेवाओं को साझा डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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केंद्र सरकार ने पर्यटन क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की शुरुआत की है. इसका लक्ष्य दिसंबर 2028 तक 23,000 पर्यटन अनुभवों और होमस्टे को एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है. पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के तहत पर्यटकों को अलग-अलग डिजिटल मंचों के बजाय एक साझा नेटवर्क के माध्यम से पर्यटन सेवाओं को खोजने और बुक करने की सुविधा मिलेगी.

पर्यटन सेवाओं को एक डिजिटल नेटवर्क पर लाने की तैयारी

राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन ढांचा पर्यटन मंत्रालय और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके जरिए अलग-अलग जगहों पर बिखरी पर्यटन सेवाओं को साझा डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाएगा.

इस पहल के तहत 14,000 पर्यटन अनुभवों और 9,000 होमस्टे को डिजिटल नेटवर्क पर लाने का लक्ष्य रखा गया है. खास तौर पर उन पर्यटन अनुभवों पर ध्यान दिया जाएगा, जो अभी डिजिटल रूप से उपलब्ध नहीं हैं या जिनकी ऑनलाइन मौजूदगी सीमित है. पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में इस परियोजना की शुरुआत की.

पहचान से लेकर भुगतान और शिकायत निवारण तक की सुविधा

मंत्रालय के अनुसार, ओएनडीसी और इंटरनेशनल सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इनोवेशन एंड एडवांसमेंट (आईसीडीआईए) के सहयोग से विकसित किए जा रहे इस डिजिटल ढांचे में कई सुविधाएं शामिल होंगी. इनमें सत्यापित पहचान और सेवा प्रदाताओं की जानकारी, खोज और सेवा चयन, भुगतान, रेटिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल हैं.

पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि इस पहल के सामने वाले हिस्से में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार की व्यापक योजना भविष्य में ‘एक टिकट, एक पास’ व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे पर्यटक की यात्रा के अलग-अलग हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ा जा सके.

उन्होंने कहा कि फिलहाल उड़ान, होटल, टैक्सी, नाव की सवारी या किसी मंदिर में आरती जैसी सेवाओं की बुकिंग के लिए अलग-अलग वेबसाइटों का इस्तेमाल करना पड़ता है. इस बिखरी हुई व्यवस्था के कारण यात्रा की योजना बनाना पर्यटकों के लिए डिजिटल रूप से मुश्किल हो जाता है.

तीन चरणों में लागू होगी योजना

परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इसकी तैयारी और विकास का काम होगा. इसके बाद जनवरी से जून 2027 के बीच पायलट चरण चलाया जाएगा, जिसमें पर्यटन अनुभवों और होमस्टे का पहला समूह डिजिटल नेटवर्क पर उपलब्ध कराया जाएगा.

जुलाई 2027 से दिसंबर 2028 के बीच देशभर में इसका विस्तार किया जाएगा और अधिक से अधिक पर्यटन सेवाओं को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.

मंत्रालय के अनुसार, परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है. पर्यटन मंत्रालय इसका नेतृत्व करेगा और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर पर्यटन अनुभवों को सूचीबद्ध और सत्यापित करेगा. पर्यटन उद्योग की भागीदारी के लिए एक संचालन समिति भी बनाई जाएगी.

कम चर्चित पर्यटन स्थलों पर भी बढ़ेगा ध्यान

सरकार का कहना है कि इस डिजिटल बुनियादी ढांचे का उद्देश्य पर्यटन की योजना और यात्रा को आसान, सुरक्षित और पर्यटकों की पसंदीदा भाषाओं में अधिक सुलभ बनाना है. इससे कागजी प्रक्रिया कम करने और कम चर्चित पर्यटन स्थलों तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.

यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है, जब सरकार देश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से आगे पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करने और स्थानीय समुदायों तथा छोटे पर्यटन कारोबारियों तक आर्थिक अवसर पहुंचाने पर जोर दे रही है.

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पर्यटक अब स्थानीय खान-पान, कला, परंपराओं और अन्य स्थानीय अनुभवों को भी यात्रा का हिस्सा बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में पर्यटन के अगले चरण में विकास का लाभ लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से आगे स्थानीय समुदायों, उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचना जरूरी है.

दो अन्य पर्यटन पहलों की भी शुरुआत

कार्यक्रम के दौरान सरकार ने ‘कम चर्चित पर्यटन स्थलों की मांग बढ़ाने के लिए पर्यटन मांग पुनर्वितरण मिशन’ और ‘देखो अपना देश 2.0’ की भी शुरुआत की. इस अवसर पर ‘भारत पर्यटन सांख्यिकी 2026’ जारी की गई. इसके अलावा एयरबीएनबी, फ्लिक्सबस, ग्लांस डिजिटल एक्सपीरियंस, आइशर ग्रुप फाउंडेशन और मेकमायट्रिप के साथ पांच समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया गया. इन समझौतों का उद्देश्य पर्यटन स्थलों के प्रचार, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है.


तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में बढ़ा MF निवेश, AUM 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंचा; 25% निवेशक महिलाएं

देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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तेलंगाना और आंध्र प्रदेश म्युचुअल फंड निवेश के तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में उभर रहे हैं. जुलाई 2026 तक दोनों राज्यों का कुल म्युचुअल फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. खास बात यह है कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड निवेशकों में करीब 25 फीसदी महिलाएं हैं. वहीं, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.

तेलंगाना का एयूएम 19 फीसदी बढ़ा

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (MFs) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में तेलंगाना का म्युचुअल फंड एयूएम 2,12,856 करोड़ रुपये रहा. जुलाई 2025 की तुलना में इसमें 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेलंगाना एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा.

देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.

आंध्र प्रदेश में 23 फीसदी बढ़ा एयूएम

आंध्र प्रदेश में जुलाई 2026 में म्युचुअल फंड एयूएम 82,409 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले के मुकाबले इसमें 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1 फीसदी रही. एयूएम के मामले में आंध्र प्रदेश देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 15वें स्थान पर रहा. राज्य में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 79.44 लाख को पार कर गई.

हैदराबाद में तेलंगाना के एयूएम का 87 फीसदी

तेलंगाना में म्युचुअल फंड निवेश का सबसे बड़ा केंद्र हैदराबाद बना हुआ है. जुलाई में शहर का म्युचुअल फंड एयूएम 1,84,261 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 87 फीसदी है. एक साल में हैदराबाद के एयूएम में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

देश के शीर्ष 30 शहरों में हैदराबाद एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में शहर की हिस्सेदारी 2.10 फीसदी रही. हैदराबाद में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 54.44 लाख रही, जो तेलंगाना के कुल फोलियो का 66.2 फीसदी है.

विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा भी आगे

आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम म्युचुअल फंड निवेश के मामले में सबसे आगे रहा. जुलाई में शहर का एयूएम 16,614 करोड़ रुपये रहा. इसके बाद विजयवाड़ा 8,337 करोड़ रुपये के एयूएम के साथ दूसरे स्थान पर रहा.

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश केवल एक शहर तक सीमित नहीं है और राज्य के प्रमुख शहरों में इसकी पहुंच बढ़ रही है.

एसआईपी के जरिए बढ़ रहा नियमित निवेश

दोनों राज्यों में एसआईपी के जरिए निवेश भी बढ़ रहा है. तेलंगाना में एसआईपी एयूएम 47,975 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल म्युचुअल फंड एयूएम का करीब 22 फीसदी है. राज्य में एसआईपी फोलियो की संख्या 26.09 लाख से ज्यादा रही.

आंध्र प्रदेश में एसआईपी एयूएम 26,820 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 32 फीसदी है. यहां एसआईपी फोलियो की संख्या 26.47 लाख रही.

महिलाओं की भागीदारी करीब 25 फीसदी

म्युचुअल फंड निवेश में महिलाओं की भागीदारी भी दोनों राज्यों में उल्लेखनीय है. तेलंगाना में 19.60 लाख से ज्यादा विशिष्ट निवेशक हैं, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 24.42 फीसदी है. आंध्र प्रदेश में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 20.94 लाख रही. इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 23.60 फीसदी है. देशभर में म्युचुअल फंड के विशिष्ट निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.74 फीसदी है.

आर्थिक आधार से भी निवेश को मिल रहा समर्थन

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश बढ़ने के पीछे दोनों राज्यों की आर्थिक गतिविधियों और आय के आधार का भी योगदान है. वित्त वर्ष 2025-26 में तेलंगाना की जीडीपी 17.82 लाख करोड़ रुपये रही, जो भारत की कुल जीडीपी का करीब 5 फीसदी है. वहीं, आंध्र प्रदेश की जीडीपी 17.62 लाख करोड़ रुपये रही, जो देश की कुल जीडीपी का करीब 4.9 फीसदी है.

एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट एन. चलसानी ने कहा कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ रही है. उनके मुताबिक, तेलंगाना में हैदराबाद की बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है, जबकि आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा समेत कई शहरों में निवेश का दायरा बढ़ रहा है.

उन्होंने एसआईपी के बढ़ते चलन को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, नियमित निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी निवेशकों के बीच अनुशासित निवेश की प्रवृत्ति को दर्शाती है. म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ने के साथ निवेशकों के लिए सही जानकारी के आधार पर फैसला लेना और लंबी अवधि का नजरिया बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है.
 


कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार में आएगी तेजी, 2030 तक ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार अगले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है. BCG और CII की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक यह बाजार 3-3.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इस बढ़ोतरी के साथ घरेलू स्तर पर पार्ट्स और मटीरियल के निर्माण में 40,000-50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वैल्यूएडिशन का अवसर पैदा हो सकता है.

भारत अगले पांच वर्षों में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के प्रमुख वैश्विक बाजारों में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती घरेलू आय, घरों में इन उत्पादों की पहुंच, सिंगल-फैमिली घरों की बढ़ती संख्या, आसान फाइनेंसिंग, व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग बाजार की वृद्धि के प्रमुख कारण होंगे.

2030 तक 8-10% सालाना बढ़ सकता है बाजार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.

हालांकि, रिपोर्ट ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है. यदि देश में पार्ट्स और मटीरियल के उत्पादन की क्षमता पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ी, तो बाजार की बढ़ती मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा हो सकता है.

पार्ट्स के लोकल उत्पादन में अभी बड़ा अंतर

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और मटीरियल का घरेलू उत्पादन अलग-अलग श्रेणियों में 25 फीसदी से 70 फीसदी के बीच है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीविजन और एयर कंडीशनर के मामले में लोकल प्रोडक्शन का स्तर अपेक्षाकृत कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन में यह अधिक है.

2030 तक विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में लोकल प्रोडक्शन 30-80 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट ने टीवी डिस्प्ले पैनल, रूम एयर-कंडीशनर कंप्रेसर, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर को उन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया है, जहां घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश है.

जिन क्षेत्रों में तकनीक कुछ चुनिंदा वैश्विक कंपनियों के पास है, वहां टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और जॉइंट वेंचर की जरूरत हो सकती है. वहीं, क्लस्टर आधारित मैन्युफैक्चरिंग से बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है.

ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 1% से कम

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक दुनिया का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट 900-950 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. फिलहाल ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है.

भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट बढ़ रहा है, लेकिन इसकी बड़ी हिस्सेदारी पड़ोसी देशों और यूएई जैसे बाजारों तक सीमित है. बड़े वैश्विक इंपोर्ट बाजारों में भारत की मौजूदगी अभी अपेक्षाकृत कम है.

रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख एक्सपोर्टर्स की तुलना में भारत को मटीरियल लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और टेक्नोलॉजी के मामले में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और कंप्लायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमित उपलब्धता भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में बाधा बनती है.

रिपोर्ट में थाईलैंड का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि ग्लोबल एयर-कंडीशनर एक्सपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी 2010 के 16 फीसदी से बढ़कर 2025 में 22 फीसदी हो गई. इससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एयर-कंडीशनर एक्सपोर्टर बन गया.

R&D पर खर्च बढ़ाने की जरूरत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रमुख लिस्टेड कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां अपने रेवेन्यू का 1 फीसदी से भी कम हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च करती हैं. इसके मुकाबले दुनियाभर की समान कंपनियां R&D पर करीब 1-4 फीसदी खर्च करती हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के बजाय टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी ध्यान देना होगा. इससे घरेलू कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति बनाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

AI से बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बिजनेस लीडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर वैश्विक कंपनियों के मुकाबले अधिक आशावादी हैं, हालांकि वर्कफोर्स की तैयारी अभी सीमित है.

जेनरेटिव AI और एजेंटिक AI का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में एक्सपोर्ट का विस्तार करने में मददगार हो सकता है.

 


बैंक हड़ताल टली, आज सामान्य रहेगा कामकाज; 5 दिन कामकाज पर बनेगी हाईलेवल कमेटी

बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
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बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल टल गई है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने भारतीय बैंक संघ (IBA) की ओर से मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया है. इसके चलते सोमवार से बैंक शाखाओं में सामान्य रूप से कामकाज होगा.

बैंक कर्मचारियों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल अब नहीं होगी. UFBU ने रविवार को हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की. यह हड़ताल सोमवार से शुरू होनी थी और बैंकों की छमाही क्लोजिंग के समय प्रस्तावित थी. हड़ताल टलने के बाद ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं के लिए किसी तरह की प्रस्तावित बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और सोमवार को बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.

5 दिन कामकाज के मुद्दे पर बनेगी समिति

हड़ताल स्थगित करने के साथ ही बैंक यूनियनों और IBA के बीच बातचीत का रास्ता खुला है. UFBU के अनुसार, सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए IBA और UFBU की एक उच्चस्तरीय समिति का तत्काल गठन किया जाएगा. समिति उपलब्ध विकल्पों पर विचार करने के साथ सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेगी और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेगी, जो ग्राहकों समेत सभी हितधारकों के लिए स्वीकार्य हो.

PLI योजना में बदलाव पर भी होगी चर्चा

बैंक यूनियनों की एक अन्य मांग प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी Performance Linked Incentive (PLI) से संबंधित है. UFBU ने कहा कि स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI योजना को लेकर IBA के साथ बातचीत शुरू की जा सकती है. यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों को दूर करने के लिए योजना में बदलाव का प्रस्ताव सरकार के सामने रखने पर भी चर्चा होगी.

आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित

UFBU ने कहा कि IBA की ओर से इन मुद्दों पर बातचीत और विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद उसने प्रस्तावित आंदोलन और तीन दिन की हड़ताल को स्थगित करने का फैसला किया. अब 5 दिन कामकाज और PLI योजना में बदलाव समेत अन्य मांगों पर आगे की बातचीत समिति के स्तर पर होगी.
 


गिफ्ट निफ्टी 80 अंक टूटा, क्रूड 106 डॉलर के करीब; आज शेयर बाजार में इन संकेतों पर रहेगी नजर

शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 73,895.74 पर पहुंच गया था. वहीं, निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में आज यानी सोमवार, 28 सितंबर को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 80 अंक फिसलकर 23,100 के आसपास आ गया है, जबकि अमेरिकी वायदा बाजारों में भी दबाव है. कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच बाजार की नजर आज ग्लोबल संकेतों, क्रूड और FII-DII गतिविधियों पर रहेगी.

शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ था. सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 73,895.74 पर पहुंच गया था. वहीं, निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 बढ़त और 10 गिरावट के साथ बंद हुए थे.

शुक्रवार को एक्सिस बैंक सबसे आगे

शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स पर एक्सिस बैंक 2.82 फीसदी की तेजी के साथ सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर रहा. महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.24 फीसदी, एशियन पेंट्स में 1.93 फीसदी, बजाज फाइनेंस में 1.21 फीसदी और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 1.17 फीसदी की बढ़त रही. दूसरी ओर, ट्रेंट 1.41 फीसदी, इन्फोसिस 0.81 फीसदी, कोटक महिंद्रा बैंक 0.47 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 0.41 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए. निफ्टी में एक्सिस बैंक 3.03 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. एशियन पेंट्स में 2.14 फीसदी और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.75 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.

अमेरिकी वायदा बाजारों में दबाव

आज के कारोबार से पहले अमेरिकी वायदा बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है. डाओ फ्यूचर्स करीब 190 अंक गिरकर 51,970 के आसपास, S&P फ्यूचर्स करीब 25 अंक टूटकर 7,780 और नैस्डैक फ्यूचर्स करीब आधे फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. हालांकि, एशियाई बाजारों में ज्यादातर प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में हैं.

क्रूड 106 डॉलर के करीब

कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी बाजार के लिए अहम संकेत है. ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि WTI क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है. होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के ईरान के प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा खारिज किए जाने के बाद तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है.

FII की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए एक अहम चिंता बनी हुई है. 25 सितंबर के प्रोविजनल आंकड़ों के अनुसार, FII ने 3,696 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने 2,838 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया.

गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को संभला बाजार

इससे पहले 24 सितंबर को बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी. सेंसेक्स 1,247 अंक यानी 1.67 फीसदी गिरकर 73,580.54 पर और निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 फीसदी टूटकर 23,063.10 पर बंद हुआ था. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, ब्याज दरों को लेकर चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये में कमजोरी जैसे कारकों के बीच बाजार पर दबाव बना था. शुक्रवार की रिकवरी के बाद अब सोमवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इन वैश्विक और घरेलू संकेतों पर रहेगी.

इन शेयरों पर रखें नजर

आज Unichem Laboratories, Aequs, Ceigall India, Zydus Lifesciences, Wheels India, SAIL, NMDC, Prestige Estates Projects और NTPC Green Energy के शेयरों पर नजर रहेगी. Unichem Laboratories की गोवा स्थित पिलरने फॉर्मुलेशन फैसिलिटी में USFDA का निरीक्षण पूरा हुआ, जिसमें पांच टिप्पणियां दर्ज की गईं. Aequs के बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Mellwood Trustee Services को करीब ₹650 करोड़ के 2.8 करोड़ तक वारंट जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. Ceigall India अपने Arm Ceigall Sahebganj टर्म लोन के लिए सिक्योरिटी तैयार करेगी और संबंधित SPV में अतिरिक्त ₹62 करोड़ का निवेश करेगी. Zydus Lifesciences के न्यू जर्सी ऑफिस में USFDA के फार्माकोविजिलेंस और पोस्ट-मार्केटिंग सर्विलांस सिस्टम के निरीक्षण में कोई ऑब्जर्वेशन नहीं मिला. Wheels India ने 25 सितंबर को QIP पूरा करते हुए ₹2,088 प्रति शेयर के भाव पर 11.97 लाख शेयर आवंटित किए. SAIL और Bharat Coking Coal ने पश्चिम बंगाल में कोयला ब्लॉक्स के संयुक्त विकास और संचालन के लिए MoU किया है. NMDC ने छत्तीसगढ़ के नगरनार में 2 MTPA क्षमता वाले पेलेट प्लांट का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया है. Prestige Estates Projects की सब्सिडियरी Prestige Hospitality Ventures ने रणनीतिक कारणों और मौजूदा बाजार परिस्थितियों में अनिश्चितता का हवाला देते हुए अपना DRHP वापस लेने का फैसला किया है. वहीं, NTPC Green Energy ने राजस्थान के बीकानेर में Kalasar Solar Energy Project की पहली 81.34 MW क्षमता का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


100 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट लक्ष्य की ओर भारतीय ज्वेलरी उद्योग, FTA से नए बाजारों पर नजर

भारत मंडपम में 26 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रहे तीन दिवसीय बी2बी एक्सपो में 650 से अधिक प्रदर्शक, 3,000 से ज्यादा ब्रांड और 1.5 लाख से अधिक अनूठे डिजाइन प्रदर्शित किए जा रहे हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
BWHindia

भारत का रत्न एवं आभूषण उद्योग आने वाले वर्षों में निर्यात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है. दिल्ली ज्वेलरी एंड जेम फेयर (DJGF) 2026 के 14वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान उद्योग से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों ने निर्यात बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA), वैल्यू एडिशन, कारीगरों के कौशल विकास और बदलती उपभोक्ता मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया.

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 26 से 28 सितंबर तक आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय बी2बी एक्सपो में 650 से अधिक प्रदर्शक, 3,000 से ज्यादा ब्रांड और 1.5 लाख से अधिक अनूठे डिजाइन प्रदर्शित किए जा रहे हैं. 

 

‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’

उद्घाटन के अवसर पर निर्यात क्षमता और कारीगरों के कौशल विकास पर बल देते हुए लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, भारत का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र लगभग 1.65 लाख करोड़ डॉलर के आयात के मुकाबले करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर के सामान का निर्यात करता है, जो इसके मजबूत निर्यात रुझान और देश के व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है. सरकार के 2030 के निर्यात लक्ष्यों की ओर बढ़ते हुए, उद्योग को निवेश, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन के जरिए 'वोकल फॉर लोकल' से 'लोकल टू ग्लोबल' के सफर को गति देनी होगी. इसके साथ ही हमारे कारीगरों को पहचानना और उनका कौशल संवर्धन करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि उनकी कारीगरी सीधे तौर पर उत्पाद की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को तय करती है. उनकी क्षमताओं को निखारने से भारतीय आभूषण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे.

100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य पर फोकस

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (भारत) के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ सोने और आभूषण उद्योग के लिए बढ़ते अवसरों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के 4.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. जैन ने ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि अगले 5 से 7 वर्षों में भारत की सोने की खपत का करीब 20 से 25 फीसदी हिस्सा घरेलू खदानों से आ सकता है. वहीं, आभूषण निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.

FTA से 55 अरब डॉलर के बाजार में अवसर

NJGCI के अध्यक्ष प्रमोद डेरावाला ने मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय ज्वेलरी उद्योग के लिए बाजार पहुंच बढ़ने की संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जिन देशों के साथ भारत ने FTA किए हैं, वे करीब 55 अरब डॉलर के आभूषणों का आयात करते हैं, जबकि इन बाजारों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8 अरब डॉलर है. डेरावाला के मुताबिक, यह अंतर भारतीय ज्वेलरी उद्योग के लिए निर्यात बढ़ाने की संभावित गुंजाइश को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि सरकारी पहलों और FTA के जरिए बेहतर बाजार पहुंच के साथ विनिर्माण और निर्यात दोनों में विस्तार की संभावना है.

सोने की ऊंची कीमतों से लाइटवेट ज्वेलरी की मांग

सोने की कीमतों में तेजी का असर उपभोक्ताओं की पसंद पर भी दिखाई दे रहा है. डेरावाला के अनुसार, ग्राहक अब हल्के वजन वाले आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, 90 फीसदी से अधिक हाई-वैल्यू ज्वेलरी खरीदारी अब भी फिजिकल रिटेल के माध्यम से होती है. इससे संकेत मिलता है कि ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बावजूद महंगे आभूषणों की खरीदारी में पारंपरिक ज्वेलर्स और फिजिकल स्टोर की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है.

ग्लोबल गोल्ड ज्वेलरी डिमांड में भारत की 27% हिस्सेदारी

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा कि भारतीय ज्वेलरी उद्योग वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उनके मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में वैश्विक स्वर्ण आभूषण मांग में भारत की हिस्सेदारी 27 फीसदी रही. सोने की ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ताओं और रिटेलरों के बीच हल्के वजन और कीमत के लिहाज से किफायती आभूषणों की मांग बढ़ी है. मुद्रास ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 27.72 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हाल ही में घोषित 2040 रोडमैप में इस निर्यात को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.

उद्घाटन में उद्योग जगत के प्रमुख लोग शामिल

DJGF 2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में inD के सीईओ डेविड लिन, द बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन दिल्ली (TBJA) के अध्यक्ष रामावतार वर्मा, TBJA के वरिष्ठ अध्यक्ष नवीन कुमार जिंदल और ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा, इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया की सीनियर ग्रुप डायरेक्टर पल्लवी मेहरा सहित ज्वेलरी और जेम्स सेक्टर से जुड़े अन्य उद्योग प्रतिनिधि भी मौजूद थे.


अक्टूबर में आएगी 100% इथेनॉल से चलने वाली कार, गडकरी ने बताया ₹25 वाला फॉर्मूला

गडकरी ने इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का बचाव करते हुए कहा कि भारत में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अक्टूबर में टोयोटा (Toyota) की ऐसी इनोवा (Innova) लॉन्च की जाएगी, जो 100 फीसदी इथेनॉल पर चल सकेगी. उनके मुताबिक, इस कार को चलाने की लागत करीब ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी के बराबर हो सकती है. गडकरी ने यह बात ऐसे समय कही है, जब पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की E20 नीति को लेकर वाहन के माइलेज और इंजन पर संभावित असर की चर्चा जारी है.

अक्टूबर में लॉन्च होगी 100% इथेनॉल वाली इनोवा

गडकरी के मुताबिक, उन्हें अक्टूबर में टोयोटा इनोवा फ्लेक्स-फ्यूल कार के लॉन्च के लिए आमंत्रित किया गया है. यह गाड़ी पेट्रोल के बजाय 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार की गई है. उन्होंने यह भी दावा किया कि वाहन चलते समय करीब 60 फीसदी बिजली पैदा कर सकेगा.

गडकरी ने इथेनॉल आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का बचाव करते हुए कहा कि भारत में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है.

क्या है गडकरी का ₹25 वाला फॉर्मूला?

गडकरी ने कहा कि 100 फीसदी इथेनॉल से चलने वाली इस कार को चलाने की लागत करीब ₹25 प्रति लीटर पेट्रोल से चलने वाली कार के बराबर होगी. यानी उनका दावा वाहन की अनुमानित रनिंग कॉस्ट से जुड़ा है. इसे सीधे तौर पर पेट्रोल की कीमत ₹25 प्रति लीटर होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

इथेनॉल की कीमत और वाहन की ईंधन दक्षता के अलावा वास्तविक रनिंग कॉस्ट कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगी. इसलिए कार के बाजार में आने के बाद इसकी वास्तविक ईंधन खपत और लागत की तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी.

E20 पेट्रोल को लेकर क्या है विवाद?

भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति के तहत E20 फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है. इस नीति को लेकर कुछ वाहन मालिकों और अन्य पक्षों ने माइलेज, इंजन की उम्र और रखरखाव लागत को लेकर सवाल उठाए हैं.

गडकरी ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर देश में वाहनों से कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है. सरकार की ओर से भी पहले कहा गया है कि वाहन कंपनियों, ऑटोमोबाइल संगठनों और उपभोक्ता समूहों से E20 के कारण माइलेज, इंजन की टिकाऊपन या रखरखाव लागत पर किसी बड़े प्रतिकूल प्रभाव की ठोस शिकायत नहीं मिली है.

सरकार ने अपने पक्ष में इंजन की ड्यूरेबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी और फील्ड ट्रायल से जुड़ी स्टडी का भी हवाला दिया है.

फ्लेक्स-फ्यूल कार क्या होती है?

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन से लैस होते हैं, जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चल सकते हैं. आम तौर पर इन वाहनों में E20 से लेकर ज्यादा इथेनॉल मिश्रण और कुछ मामलों में लगभग शुद्ध इथेनॉल तक इस्तेमाल किया जा सकता है.

भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में वाहन कंपनियां भी काम कर रही हैं. जून में मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार पेश की थी. इसका उद्देश्य पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात में इथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल को संभव बनाना है.

इथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे सरकार की क्या वजह है?

सरकार लंबे समय से पेट्रोलियम ईंधन के विकल्प के तौर पर इथेनॉल, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने की बात करती रही है. गडकरी का कहना है कि इथेनॉल के उत्पादन से किसानों के लिए आय के नए अवसर बन सकते हैं.

उन्होंने अलग-अलग मौकों पर मक्का समेत इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली फसलों की मांग बढ़ने का भी जिक्र किया है. सरकार की नीति का एक उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है.

बाइक टैक्सी को लेकर भी गडकरी ने कही बात

कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने बाइक टैक्सी सेवाओं को बढ़ावा देने की भी बात कही. उनके मुताबिक, ऐप आधारित प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकते हैं, जिनके पास पहले से दोपहिया वाहन हैं.

उन्होंने राज्यों के परिवहन मंत्रियों से ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह की सेवाओं के विकल्प पर विचार करने की अपील की. गडकरी का कहना है कि बाइक टैक्सी के विस्तार से बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं.
 


अगले हफ्ते 7 शेयर होंगे एक्स-डिविडेंड, R Systems देगी ₹8 प्रति शेयर

BSE के आंकड़ों के मुताबिक, 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. इस सूची में Steel Authority of India (SAIL), Indraprastha Gas (IGL) और R Systems International जैसी कंपनियां शामिल हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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शेयर बाजार में अगले सप्ताह सात कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने वाले हैं. BSE के आंकड़ों के मुताबिक, 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. इस सूची में Steel Authority of India (SAIL), Indraprastha Gas (IGL) और R Systems International जैसी कंपनियां शामिल हैं. इनमें R Systems International ने ₹8 प्रति शेयर का सबसे ज्यादा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है.

29 सितंबर को Leo Dryfruits का शेयर होगा एक्स-डिविडेंड

अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाले शेयरों में सबसे पहले Leo Dryfruits and Spices Trading Limited का नाम है. कंपनी का शेयर 29 सितंबर को एक्स-डिविडेंड होगा. कंपनी ने ₹0.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है. इसके लिए रिकॉर्ड डेट भी 29 सितंबर तय की गई है.

30 सितंबर को SAIL और Saraswati Saree Depot

इसके बाद 30 सितंबर को दो कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे. Steel Authority of India Limited (SAIL) ने ₹2.35 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है. कंपनी ने डिविडेंड के लिए 30 सितंबर को रिकॉर्ड डेट तय की है.

इसी दिन Saraswati Saree Depot Limited का शेयर भी एक्स-डिविडेंड होगा. कंपनी अपने शेयरधारकों को ₹3 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड देगी. इसके लिए रिकॉर्ड डेट 30 सितंबर रखी गई है.

1 अक्टूबर को चार कंपनियों के शेयर होंगे एक्स-डिविडेंड

1 अक्टूबर को सबसे ज्यादा चार कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होने वाले हैं. इनमें Goenka Business and Finance Limited, Indraprastha Gas Limited (IGL), R Systems International Limited और Sainik Finance and Industries Limited शामिल हैं. Goenka Business and Finance ने ₹0.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की घोषणा की है. कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट 1 अक्टूबर है, जबकि रिकॉर्ड डेट 2 अक्टूबर तय की गई है.

Indraprastha Gas Limited (IGL) के शेयर भी 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होंगे. कंपनी ने ₹1.50 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है. IGL के लिए रिकॉर्ड डेट भी 1 अक्टूबर है. R Systems International ने ₹8 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है. कंपनी के शेयर 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होंगे और रिकॉर्ड डेट भी इसी दिन है. प्रति शेयर घोषित रकम के आधार पर यह अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाली सात कंपनियों में सबसे बड़ा डिविडेंड है.

Sainik Finance and Industries Limited भी 1 अक्टूबर को एक्स-डिविडेंड होगी. कंपनी ने ₹0.50 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है और इसके लिए रिकॉर्ड डेट 1 अक्टूबर निर्धारित की गई है.

चार फाइनल और तीन अंतरिम डिविडेंड

अगले सप्ताह एक्स-डिविडेंड होने वाली सात कंपनियों में चार कंपनियों ने फाइनल डिविडेंड और तीन ने अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है. फाइनल डिविडेंड देने वाली कंपनियों में Leo Dryfruits and Spices Trading, SAIL, Goenka Business and Finance और IGL शामिल हैं. वहीं Saraswati Saree Depot, R Systems International और Sainik Finance and Industries ने अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है.

प्रति शेयर डिविडेंड की रकम देखें तो R Systems International ₹8 के साथ सबसे आगे है. इसके बाद Saraswati Saree Depot ₹3 और SAIL ₹2.35 प्रति शेयर का डिविडेंड देगी. IGL ने ₹1.50 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है, जबकि Leo Dryfruits and Spices Trading, Goenka Business and Finance और Sainik Finance and Industries की ओर से ₹0.50 प्रति शेयर का डिविडेंड दिया जाएगा.

एक्स-डिविडेंड डेट का क्या मतलब है?

एक्स-डिविडेंड डेट वह तारीख होती है जब शेयर खरीदने वाला निवेशक घोषित डिविडेंड का हकदार नहीं होता. डिविडेंड पाने के लिए निवेशक का कंपनी की तय रिकॉर्ड डेट के अनुसार पात्र होना जरूरी होता है. इसलिए डिविडेंड वाले शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए एक्स-डिविडेंड डेट के साथ रिकॉर्ड डेट को समझना भी जरूरी है.
 


शादी अब सिर्फ रस्म नहीं, पूरा एक्सपीरियंस है: VanVivaha 2026 में दिखी बदलती वेडिंग इंडस्ट्री की तस्वीर

फैशन से ज्वेलरी, डेस्टिनेशन वेडिंग से ट्रैवल और डेकोर से टेक्नोलॉजी तक, भारतीय शादियों का कारोबार तेजी से एक बड़े लाइफस्टाइल इकोसिस्टम में बदल रहा है. गुरुग्राम में आयोजित VanVivaha 2026 में इसी बदलती तस्वीर की झलक देखने को मिली

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
BWHindia

भारतीय शादी की तैयारी कभी परिवार और रिश्तेदारों की बैठकों से शुरू होती थी और धीरे-धीरे कपड़े, ज्वेलरी, वेन्यू और कैटरिंग तक पहुंचती थी. अब तस्वीर बदल रही है. शादी सिर्फ एक समारोह नहीं रह गई है, बल्कि यह फैशन, ब्यूटी, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल, डेकोर, एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी और पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस से जुड़ा एक बड़ा बाजार बनती जा रही है.

इसी बदलते वेडिंग इकोसिस्टम को एक मंच पर लाने की कोशिश गुरुग्राम में आयोजित VanVivaha 2026 में नजर आई. 24 और 25 सितंबर को गुरुग्राम में आयोजित इस दो दिवसीय आयोजन में आयोजकों के मुताबिक 6,000 से ज्यादा विजिटर्स पहुंचे. 100 से अधिक प्रदर्शकों ने फैशन, ज्वेलरी, हॉस्पिटैलिटी, डेस्टिनेशन वेडिंग, प्लानिंग, डेकोर, ब्यूटी, ट्रैवल, एंटरटेनमेंट, गिफ्टिंग और वेडिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े विकल्प पेश किए.

एक शादी, कई इंडस्ट्री और एक ही प्लेटफॉर्म

आज एक बड़ी शादी के पीछे सिर्फ दूल्हा-दुल्हन और परिवार नहीं होते. वहां वेडिंग प्लानर, डिजाइनर, ज्वेलर, होटल, डेकोर कंपनी, मेकअप आर्टिस्ट, ट्रैवल एजेंसी, फोटोग्राफर और एंटरटेनमेंट टीम जैसे कई पेशेवर एक साथ काम करते हैं. VanVivaha ने इसी कनेक्शन को एक जगह लाने की कोशिश की. करीब 1.40 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित इस प्रदर्शनी में 70,000 वर्ग फुट से ज्यादा का एग्जिबिशन स्पेस था.

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शादी का फैसला अब केवल कीमत और उपलब्धता पर निर्भर नहीं रहता. परिवारों और कपल्स के लिए थीम, डिजाइन, लोकेशन, सर्विस, सोशल मीडिया प्रेजेंस और पूरे समारोह का अनुभव भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

परंपरा के साथ ग्लोबल प्रभाव

भारतीय शादियों में ग्लोबल वेडिंग ट्रेंड्स की मौजूदगी भी बढ़ रही है. हालांकि, इन ट्रेंड्स को सीधे अपनाने के बजाय भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं के साथ मिलाकर पेश किया जा रहा है. Black Rock Hotels & Resorts के मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव मुडगल के मुताबिक, ग्लोबल प्रभाव भारतीय शादियों में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भारतीय परंपराओं, परिवारों और समारोहों के अनुरूप ढाला जा रहा है. उनके अनुसार, ग्लोबल इंस्पिरेशन और लोकल प्रासंगिकता का यह मेल भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री की दिशा तय करेगा. यानी शादी में विदेशी थीम या इंटरनेशनल स्टाइल अपनाना अब भारतीय पहचान से अलग होने का संकेत नहीं है. इसके बजाय दोनों को मिलाकर एक नया वेडिंग एक्सपीरियंस तैयार किया जा रहा है.

सेलिब्रेशन से आगे बढ़कर बड़ा बिजनेस इकोसिस्टम

VanVivaha में Redico Khaitan, Revlon, BlackRock Hotels & Resorts, Mulecha Jewellers, PNG Jewellers, Karan Moin, Piccadilly और Samharo Events जैसे स्थापित नामों के साथ कई विशेषज्ञ और उभरते कारोबारी भी शामिल हुए.

यह विविधता इस बात की ओर इशारा करती है कि भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री में कारोबार के लिए अवसर केवल पारंपरिक सेवाओं तक सीमित नहीं हैं. टेक्नोलॉजी, ट्रैवल, गिफ्टिंग, एंटरटेनमेंट और नए तरह के एक्सपीरियंस भी इसका हिस्सा बन रहे हैं. VanVivaha के फाउंडर तेजवंत सिंह लांबा के अनुसार, पहले दिन ही करीब 3,500 से ज्यादा विजिटर्स पहुंचे थे और 1,500 से अधिक प्री-रजिस्ट्रेशन हुए थे. आयोजकों का कहना है कि प्रदर्शकों की प्रतिक्रिया को देखते हुए अगले संस्करण में बड़े स्टॉल, बेहतर लोकेशन और अधिक भागीदारी की मांग सामने आई है.

वेडिंग इंडस्ट्री में बढ़ रहा नेटवर्किंग का महत्व

VanVivaha में सिर्फ उत्पादों और सेवाओं की प्रदर्शनी तक सीमित रहने के बजाय नेटवर्किंग पर भी जोर दिया गया. Make My Lagan और Sundowner Networking Party जैसी गतिविधियों के जरिए वेडिंग प्रोफेशनल्स, ब्रांड्स और संभावित ग्राहकों को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश की गई.

यह बदलाव बताता है कि वेडिंग इंडस्ट्री में बिजनेस अब सिर्फ स्टॉल पर उत्पाद दिखाने तक सीमित नहीं है. नए क्लाइंट, नए सहयोग और अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवरों के बीच नेटवर्क भी इस कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं. VanVivaha के को-फाउंडर सार्थक सैनी के मुताबिक, वेन्यू, डेकोर, फैशन, फूड और एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्र अब अलग-अलग खानों में काम नहीं कर रहे हैं. उनके अनुसार, एक शादी को बेहतर अनुभव बनाने के लिए डिजाइन, टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट और स्टोरीटेलिंग जैसे कई क्षेत्रों का एक साथ काम करना जरूरी है.

ब्यूटी से लेकर ज्वेलरी तक, बढ़ रहा अनुभव का दायरा

शादी के बदलते स्वरूप में ब्यूटी और पर्सनल स्टाइलिंग भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. VanVivaha में Revlon जैसे ब्यूटी ब्रांड की मौजूदगी ने इस सेगमेंट की भूमिका को सामने रखा. Revlon India की मैनेजिंग डायरेक्टर मेघना मोदी ने कहा कि कंपनी का VanVivaha के साथ जुड़ाव ब्राइडल और वेडिंग मेकअप के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में है. उन्होंने कहा, ज्वेलरी भी अब सिर्फ पारंपरिक आभूषणों तक सीमित नहीं है. आज दुल्हन और परिवार शादी के अलग-अलग समारोहों के लिए अलग लुक और ज्वेलरी की योजना बनाते हैं. ऐसे में डिजाइन, पर्सनलाइजेशन और पूरे लुक के साथ ज्वेलरी का तालमेल भी बाजार का हिस्सा बन गया है.

अगली मंजिल: 2-3 गुना विस्तार

पहले संस्करण के बाद आयोजकों ने अगले संस्करण को मौजूदा आकार से 2-3 गुना तक बढ़ाने की योजना बताई है. यह विस्तार केवल एक प्रदर्शनी के आकार में बढ़ोतरी नहीं होगा, बल्कि उस बाजार की बढ़ती विविधता को भी दर्शाएगा जिसमें शादी अब एक दिन का आयोजन न रहकर कई दिनों और कई अनुभवों में फैली गतिविधि बन चुकी है.

आज एक भारतीय शादी में मेहंदी, संगीत, कॉकटेल, शादी और रिसेप्शन जैसे कई समारोह हो सकते हैं. हर समारोह के लिए अलग ड्रेस, मेकअप, डेकोर, फूड और एंटरटेनमेंट की जरूरत हो सकती है. डेस्टिनेशन वेडिंग जुड़ने पर होटल, ट्रैवल और लॉजिस्टिक्स भी इसी इकोसिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं.

यही वजह है कि वेडिंग इंडस्ट्री को अब सिर्फ 'शादी का कारोबार' कहकर देखना पर्याप्त नहीं लगता. यह तेजी से एक ऐसे लाइफस्टाइल और एक्सपीरियंस इकोसिस्टम का रूप ले रहा है, जहां परिवार ग्राहक हैं, लेकिन उनके साथ काम करने वाले डिजाइनर, होटल, ज्वेलर, प्लानर, टेक्नोलॉजी कंपनियां और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स भी इस पूरी कहानी के अहम हिस्सेदार हैं.

VanVivaha 2026 इसी बदलाव का एक उदाहरण रहा, जहां शादी की तैयारी से जुड़े अलग-अलग हिस्से एक ही छत के नीचे दिखाई दिए. अब देखना यह होगा कि अगले संस्करण में यह प्लेटफॉर्म इस पूरे इकोसिस्टम को किस तरह और बड़े पैमाने पर जोड़ता है.

 


UPITS 2026: YEIDA में 469 करोड़ रुपये की 5 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित

शुक्रवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 के उद्घाटन के दौरान इन कंपनियों को जमीन आवंटन पत्र सौंपे गए. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पांचों कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदान किए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
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यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में परियोजनाओं के लिए पांच कंपनियों को 71,190 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. इन परियोजनाओं में कुल 469 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है और इनके जरिए 4,625 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. शुक्रवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 के उद्घाटन के दौरान इन कंपनियों को जमीन आवंटन पत्र सौंपे गए. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पांचों कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदान किए.

पांच कंपनियों को मिला जमीन आवंटन

C&R Textiles को 16,000 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने परियोजना में 104 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है, जिससे करीब 2,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी की ओर से प्रबंध निदेशक छत्रपति रंजीत राय ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

Perfectpack को 16,200 वर्ग मीटर जमीन मिली है. कंपनी 125 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और इससे करीब 700 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजय राजगढ़िया ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

SABS Exports International को 16,180 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने 87 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है और परियोजना से 475 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक चेतन सभरवाल ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

Simplast India को 12,000 वर्ग मीटर जमीन मिली है. कंपनी की प्रस्तावित परियोजना में 78 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इससे 300 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक गौरव चुग ने आवंटन पत्र प्राप्त किया.

Sahu Exports को 10,810 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है. कंपनी ने 75 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है. परियोजना से 1,150 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. कंपनी के निदेशक संजीव साहू ने जमीन आवंटन पत्र प्राप्त किया.

अमित शाह ने निवेशकों से की बातचीत

जमीन आवंटन पत्र सौंपने के साथ अमित शाह ने निवेशकों के साथ बातचीत भी की. इस दौरान उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विस्तार, निवेश के अवसरों और राज्य में कारोबारी गतिविधियों को तेज करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.

UPITS के जरिए हुए ये जमीन आवंटन निवेश प्रस्तावों को जमीनी स्तर पर वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में एक कदम हैं. पांचों परियोजनाओं से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

इन आवंटनों से YEIDA क्षेत्र की नई औद्योगिक परियोजनाओं को जगह देने में भूमिका भी सामने आती है. उत्तर प्रदेश सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने और राज्य के औद्योगिक आधार का विस्तार करने पर जोर दे रही है.