आखिर क्यों रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस का 49% बेच रहा है आदित्य बिरला ग्रुप?

कुमार मंगलम बिरला की कंपनी आदित्य बिरला ग्रुप अपने रिन्यूएबल बिजनेस का 49% स्टेक बेचने जा रही है जिसके लिए उन्होंने स्टैण्डर्ड चार्टर्ड को हायर किया है.

Last Modified:
Thursday, 16 February, 2023
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लगातार बढ़ते भारतीय क्लीन एनर्जी सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कुमार मंगलम बिरला की कंपनी आदित्य बिरला ग्रुप ने अपने रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस में से 49% स्टेक बेचने का फैसला किया है. इस फैसले से जुड़े लोगों ने बताया कि ग्रुप ने इस फैसले को अंजाम देने के लिए स्टैण्डर्ड चार्टर्ड बैंक को हीरे किया है. बिरला ग्रुप की कोशिश है कि वह इस फैसले के द्वारा लगभग 400 मिलियन डॉलर्स पैसा इकठ्ठा कर पाये और क्लीन एनर्जी सेक्टर में अपनी स्थिति को ज्यादा मजबूत कर सके.

आदित्य बिरला ग्रुप के लिए संभावित ग्रोथ इंजन है रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस

ग्रुप से जुड़े सूत्रों की मानें तो रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस आदित्य बिरला ग्रुप के लिए एक संभावित ग्रोथ इंजन है जिसे काफी बड़ा बनाने की जरूरत है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आदित्य बिरला रिन्यूएबल्स का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 तक यूटिलिटी एवं कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के माध्यम से 4.5 गीगावाट की इन्स्टॉल्ड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को हासिल करना है. फिलहाल कंपनी के प्रोजेक्ट्स पोर्टफोलियो 2 गीगावाट के हैं जिसमें अभी चल रहे और भविष्य में आने वाले दोनों ही तरह के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं.

आदित्य बिरला ग्रुप ने पहले भी की है कोशिश

अक्टूबर 2015 में आदित्य बिरला ग्रुप ने बड़े स्तर का रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म बनाने के लिए Abraaj Group के साथ हाथ मिलाया था. इस पार्टनरशिप का मकसद यूटिलिटी स्केल सोलर और हवाई पॉवर प्रोजेक्ट्स के विकास पर था. हालांकि साल 2018 में Abraaj Group पर आर्थिक मिस-मैनेजमेंट और फ्रॉड के आरोप लगने के बाद वह गिर गया जिसकी वजह से यह प्लान धराशायी हो गया था. साल 2019 में आदित्य बिरला ग्रुप ने घोषणा की कि वह आने वाले सालों में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में 2 बिलियन डॉलर्स इन्वेस्ट करेगा. कंपनी का लक्ष्य है कि साल 2025 तक वह 5 गीगावाट की कुल रिन्यूएबल क्षमता हासिल कर लेगा.

रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में कहां है भारत?

सबसे ज्यादा एनर्जी का इस्तेमाल करने वाले देशों में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है. ग्लोबल इकनोमिक की अस्थिरता के बावजूद भारत की ग्रीन इकॉनमी हमेशा से ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स को अपनी ओर आकर्षित करती रही है. इस क्षेत्र में हाल ही में जुड़ी कंपनियों में से एक अमेजन भी है जो रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल से भारतीय इलेक्ट्रिसिटी एक्स्चेंजेस में बेचने के लिए अपना एक पोर्टफोलियो बनाना चाहता है. भारत ने अपने रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की तरफ 78.1 बिलियन डॉलर्स की इन्वेस्टमेंट को आकर्षित किया है. जिसके साथ अब भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी वाला देश बन गया है जिसके पास 166 गीगावाट की रिन्यूएबल क्षमता उपलब्ध है. भारत ने साल 2070 तक नेट जीरो कार्बन एमिशन हासिल करने का लक्ष्य बनाया है जिसके साथ साथ  भारत 2005 के कार्बन इंटेंसिटी लेवल के मुकाबले कार्बन इंटेंसिटी को 45% तक कम करना चाहता है.  

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यस बैंक में जोरदार रैली, शेयर 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर; पांच दिन में 16% की तेजी

मजबूत तिमाही नतीजों, बेहतर एसेट क्वालिटी और रणनीतिक साझेदारी के दम पर चढ़ा बैंक का शेयर

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंकों में शामिल यस बैंक के शेयरों में हाल के दिनों में शानदार तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को बैंक का शेयर 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. बीएसई पर शेयर करीब 3 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25.77 रुपये तक पहुंच गया. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में शेयर करीब 16 प्रतिशत उछल चुका है, जिससे निवेशकों को मजबूत रिटर्न मिला है.

मार्केट कैप में 8,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा

शेयर में आई तेजी का असर बैंक के बाजार पूंजीकरण पर भी दिखाई दिया है. पिछले पांच सत्रों में यस बैंक का मार्केट कैप 8,662 करोड़ रुपये से अधिक बढ़कर 80,912 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पिछले कारोबारी सत्र में शेयर 25.11 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि गुरुवार को यह 25.27 रुपये पर खुला.

एक महीने में 17%, तीन महीने में 50% की छलांग

यस बैंक के शेयर ने हाल के महीनों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 15 प्रतिशत, एक महीने में 17 प्रतिशत और वर्ष 2026 में अब तक 19 प्रतिशत चढ़ चुका है. वहीं, पिछले तीन वर्षों में इसमें 56 प्रतिशत और पांच वर्षों में 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

मार्च 2026 में बैंक का शेयर 17.20 रुपये के 52-सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया था. इसके बाद तीन महीने से भी कम समय में इसमें करीब 50 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है.

नॉर्दर्न आर्क कैपिटल के साथ साझेदारी बनी ट्रिगर

विश्लेषकों का मानना है कि शेयर में तेजी का दौर बैंक द्वारा नॉर्दर्न आर्क कैपिटल के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के बाद शुरू हुआ. इस साझेदारी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और बैंक के विकास की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया.

मार्च तिमाही में दमदार प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में यस बैंक का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा. बैंक का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) सालाना आधार पर 45 प्रतिशत बढ़कर 1,068 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसी दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 16 प्रतिशत बढ़कर 2,638 करोड़ रुपये रही. बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 20 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 2.7 प्रतिशत हो गया, जो परिचालन प्रदर्शन में सुधार का संकेत देता है.

एसेट क्वालिटी में भी सुधार

बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है. ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) अनुपात घटकर 1.3 प्रतिशत रह गया, जबकि नेट एनपीए (NNPA) अनुपात घटकर 0.2 प्रतिशत पर आ गया. इससे बैंक की बैलेंस शीट और जोखिम प्रबंधन क्षमता मजबूत हुई है.

आगे क्या कहते हैं तकनीकी संकेत?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यस बैंक का तकनीकी ढांचा फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है. हालांकि शेयर अब 26 रुपये के आसपास एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन के करीब पहुंच गया है, जहां मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है.

विश्लेषकों के अनुसार 23-24 रुपये का दायरा अब शेयर के लिए प्रमुख सपोर्ट जोन है. जब तक स्टॉक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक इसकी निकट अवधि की चाल सकारात्मक मानी जा सकती है.

निवेशकों की नजर अगले ट्रिगर्स पर

मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, बेहतर एसेट क्वालिटी और रणनीतिक साझेदारियों के कारण यस बैंक एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ गया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों को आगे के कारोबारी प्रदर्शन और बैंक की विकास रणनीति पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


भारतीय फुटबॉल को बढ़ावा देगा Zee, Zee5 की फुटबॉल आय का 15% ग्रासरूट डेवलपमेंट पर खर्च

युवा प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और ग्रासरूट लीग्स को मिलेगा समर्थन, 2034 तक भारत को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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मीडिया एवं मनोरंजन कंपनी जी एंटरटेंमेंट एंटरप्राइसेज (ZEEL) ने भारतीय फुटबॉल के विकास को गति देने के लिए एक नई पहल की घोषणा की है. कंपनी ने कहा है कि Zee5 के फुटबॉल से जुड़े सब्सक्रिप्शन राजस्व का 15 प्रतिशत हिस्सा देशभर में प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण और ग्रासरूट फुटबॉल कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा.

कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से पहचानना और उन्हें पेशेवर अवसर उपलब्ध कराना है. इसके जरिए शहर, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक एक मजबूत फुटबॉल इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा.

युवा प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

ZEEL के अनुसार यह कार्यक्रम देशभर में फुटबॉल प्रतिभाओं की खोज और उनके विकास पर केंद्रित होगा. इसके तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और लीग प्रारूप विकसित किए जाएंगे ताकि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकें. कंपनी अपने Zee5 सब्सक्राइबर्स को भी इस मिशन का हिस्सा बनाएगी, जिससे दर्शकों की भागीदारी सीधे युवा खिलाड़ियों के विकास में योगदान दे सके.

FIFA साझेदारी से मिलेगा लाभ

यह पहल ZEEL और FIFA के बीच 2034 तक के लिए हुए साझेदारी समझौते के बाद शुरू की गई है. कंपनी का मानना है कि वैश्विक फुटबॉल संस्थाओं के अनुभव और मॉडल का उपयोग कर भारत में प्रतिभा खोज, कोचिंग, खिलाड़ी विकास और लीग संरचना को मजबूत किया जा सकता है.

देशभर में शुरू होंगी ग्रासरूट लीग्स

कार्यक्रम के तहत विभिन्न शहरों, जिलों और राज्यों में ग्रासरूट फुटबॉल लीग्स और विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इनका उद्देश्य उभरते खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल और पेशेवर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है. कंपनी फुटबॉल विशेषज्ञों, अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय फुटबॉल संघों के साथ मिलकर प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगी.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी

ZEEL का लक्ष्य ऐसा तंत्र विकसित करना है जो खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर प्रदान करे. कंपनी का मानना है कि मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार कर भारत फुटबॉल में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर सकता है.

2034 तक विश्व कप में भारत की मजबूत मौजूदगी का लक्ष्य

कंपनी ने कहा कि उसकी दीर्घकालिक योजना पुरुष और महिला दोनों वर्गों में विभिन्न आयु समूहों के FIFA विश्व कप में भारत की भागीदारी को मजबूत करने की है. इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है.

'भारत में फुटबॉल प्रतिभा की कोई कमी नहीं'

ZEEL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पुनीत गोयंका ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं का विशाल भंडार मौजूद है, जिसे सही अवसर और संसाधन मिलने पर वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह पहल केवल खेल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों के सपनों को साकार करने का प्रयास है. कंपनी का लक्ष्य दर्शकों की रुचि को वास्तविक सामाजिक प्रभाव में बदलना और भविष्य की पीढ़ियों के नेतृत्व में भारत को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करना है.

स्वामी विवेकानंद के संदेश से प्रेरित पहल

कंपनी ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद के उस संदेश से प्रेरित है जिसमें युवाओं को शक्ति, अनुशासन, आत्मविश्वास और कर्मशीलता विकसित करने के लिए फुटबॉल जैसे खेल अपनाने की प्रेरणा दी गई थी.

ZEEL का कहना है कि यह पहल भारत में फुटबॉल की बुनियाद को मजबूत करने और दीर्घकालिक प्रतिभा विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.

 


अल-नीनो की मार, देश में मानसून 40% कमजोर; खेती, उद्योग और अर्थव्यवस्था पर खतरा

बारिश की भारी कमी से धान और सोयाबीन की बुआई प्रभावित, सूखे की आशंका ने बढ़ाई सरकार और किसानों की चिंता

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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देश में मानसून की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत बेहद कमजोर रही है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 18 जून तक देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि विकसित हो रहा अल-नीनो प्रभाव मानसून को कमजोर कर रहा है, जिससे कृषि उत्पादन, जल आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

शुरुआती मानसून ने बढ़ाई चिंता

जून से सितंबर तक चलने वाला मानसून भारत की वार्षिक वर्षा का प्रमुख स्रोत है. लेकिन इस बार मानसून की कमजोर शुरुआत ने किसानों और नीति-निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है. धान, सोयाबीन और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है, जबकि निर्माण क्षेत्र समेत कई उद्योगों की गतिविधियों पर भी असर पड़ने लगा है.

सबसे शक्तिशाली अल-नीनो में से एक बनने के संकेत

अंतरराष्ट्रीय मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा अल-नीनो हाल के वर्षों के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक साबित हो सकता है. विभिन्न मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जुलाई और अगस्त में भी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहा है जिससे देशभर में वर्षा की कमी की भरपाई हो सके. अगले कुछ दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ सकती है, लेकिन इससे पूरे देश में मानसून की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद नहीं है.

कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराया खतरा

भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल, चीनी और कपास उत्पादक देशों में शामिल है. देश का कृषि क्षेत्र बड़े पैमाने पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है. यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर उत्पादन की स्थिति में सरकार को कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.

जल संकट के संकेत भी दिखने लगे

कमजोर मानसून का असर अब शहरी क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है. मुंबई की जलापूर्ति एजेंसी ने निर्माण स्थलों को पानी की आपूर्ति रोक दी है. पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार है जब ऐसा कदम उठाया गया है. इसके अलावा व्यवसायों, कारखानों और खेल क्लबों के लिए जल आपूर्ति में कटौती की गई है, जबकि स्विमिंग पूलों को पानी देना भी बंद कर दिया गया है.

अगले सप्ताह बारिश में सुधार की उम्मीद

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले सप्ताह कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. दक्षिण-पश्चिमी नम हवाएं मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और इसके जुलाई की शुरुआत तक उत्तर भारत तक पहुंचने की संभावना है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के समग्र प्रदर्शन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है और व्यापक मौसम परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं दिख रही हैं.

सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की चेतावनी

कृषि मौसम विशेषज्ञों ने देश के प्रमुख सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक इलाकों के लिए गंभीर सूखे की चेतावनी जारी की है. उनका मानना है कि यदि जुलाई तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन की बुआई में देरी हो सकती है और फसल की वृद्धि अवधि भी कम हो सकती है.

खरीफ सीजन के लिए निर्णायक साबित होंगे अगले कुछ सप्ताह

वर्तमान में किसान साल के सबसे बड़े बुआई सीजन के बीच हैं. ऐसे में अगले कुछ सप्ताह खरीफ फसलों के भविष्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. यदि जल्द बारिश में सुधार होता है तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन मौसम विभाग और वैश्विक एजेंसियों के पूर्वानुमान एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून की आशंका जता रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत होता अल-नीनो भारतीय मानसून को कमजोर और असमान बना सकता है, जिससे कृषि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ने का जोखिम बढ़ गया है.

 


ED का बड़ा एक्शन, विकास गर्ग परिवार और Eraaya-Ebix से जुड़ी संपत्तियां कुर्क

मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत आवासीय-व्यावसायिक संपत्तियों, निवेश और शेयरहोल्डिंग पर कार्रवाई, PMLA के तहत जारी हुआ अटैचमेंट ऑर्डर

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कारोबारी विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की विभिन्न संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया है. यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 5 जून 2026 को जारी किए गए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के आधार पर की गई है.

आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां जांच के दायरे में

ईडी के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक रियल एस्टेट, शेयरहोल्डिंग, वित्तीय निवेश और अन्य चल-अचल परिसंपत्तियां शामिल हैं. एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय से जुड़ी हो सकती हैं.

Eraaya-Ebix सौदे से जुड़े निवेश भी अटैच

जांच एजेंसी ने Eraaya Lifespaces और अमेरिकी सॉफ्टवेयर एवं ई-कॉमर्स कंपनी Ebix के अधिग्रहण से जुड़े निवेशों और प्रतिभूतियों को भी अटैच किया है. आदेश में कहा गया है कि समूह से जुड़े विभिन्न निवेश और वित्तीय लेनदेन जांच के दायरे में हैं.

परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम भी शामिल

अटैचमेंट ऑर्डर में विकास गर्ग के कई रिश्तेदारों और सहयोगियों का भी उल्लेख किया गया है. ईडी का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे कई परिसंपत्तियों की पहचान हुई है, जो परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर हैं. एजेंसी का आरोप है कि इन परिसंपत्तियों में निवेश के लिए संदिग्ध धन का इस्तेमाल किया गया हो सकता है.

फंड रूटिंग के नेटवर्क की जांच

ईडी के मुताबिक जांच में कंपनियों और निवेश संरचनाओं का एक ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसके जरिए धन को विभिन्न माध्यमों से रियल एस्टेट, इक्विटी निवेश और अन्य वित्तीय साधनों में लगाया गया. एजेंसी इन लेनदेन की वैधता और धन के स्रोत की जांच कर रही है.

संपत्तियों के हस्तांतरण को रोकने के लिए कार्रवाई

ईडी ने कहा कि जांच के दौरान संपत्तियों को बेचे जाने, हस्तांतरित किए जाने या ठिकाने लगाए जाने की आशंका को देखते हुए यह अटैचमेंट जरूरी था. PMLA के प्रावधानों के तहत इस तरह के अस्थायी अटैचमेंट ऑर्डर को बाद में निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) की मंजूरी की आवश्यकता होती है.

कारोबारी समूह पर बढ़ी नियामकीय निगरानी

यह कार्रवाई विकास गर्ग से जुड़े कारोबारी समूह पर बढ़ती नियामकीय निगरानी का संकेत मानी जा रही है. विकास गर्ग का नाम सूचीबद्ध कंपनियों Eraaya Lifespaces, Vikas Lifecare और समूह की अन्य कंपनियों से जुड़ा रहा है. इससे पहले भी ईडी समूह से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चला चुकी है.

जांच जारी, दोष तय होना बाकी

ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई चल रही जांच का हिस्सा है और अभी किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया गया है. कुर्क की गई संपत्तियां PMLA के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक ईडी के नियंत्रण में रहेंगी.

एजेंसी ने जांच पूरी होने की कोई समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की है. हालांकि अटैचमेंट ऑर्डर में कहा गया है कि जांचकर्ताओं को प्रथम दृष्टया ऐसे पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जो चिन्हित परिसंपत्तियों और जांच के दायरे में मौजूद कथित धन के बीच संबंध की ओर इशारा करते हैं.

 


रुपये को मजबूती देने की तैयारी, RBI ने FCNR और NRE डिपॉजिट पर ब्याज सीमा हटाई

30 सितंबर तक बैंकों को अधिक ब्याज दरें देने की छूट, एनआरआई निवेशकों के लिए बढ़ेंगे कमाई के अवसर

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और देश में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट्स पर लागू ब्याज दर की ऊपरी सीमा को 30 सितंबर 2026 तक अस्थायी रूप से हटा दिया है. इसके साथ ही तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि वाले नॉन-रेसिडेंट एक्सटर्नल (NRE) डिपॉजिट्स पर ब्याज दरों से जुड़ी पाबंदियों में भी राहत दी गई है. इस फैसले से भारतीय बैंकों को एनआरआई ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें देने का अवसर मिलेगा.

RBI ने जारी किया सर्कुलर

आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी कर कहा कि 17 जून 2026 से 30 सितंबर 2026 तक की अवधि के लिए नए FCNR(B) डिपॉजिट्स पर ब्याज दर की सीमा हटाई जा रही है. यह छूट उन डिपॉजिट्स पर भी लागू होगी जिन्हें मैच्योरिटी के बाद रिन्यू किया गया है. यह व्यवस्था तीन वर्ष से अधिक और पांच वर्ष तक की अवधि वाले जमा खातों के लिए लागू रहेगी.

क्या होते हैं FCNR(B) डिपॉजिट?

FCNR(B) डिपॉजिट विशेष रूप से गैर-निवासी भारतीयों (NRI) के लिए उपलब्ध एक टर्म डिपॉजिट अकाउंट है. इसके जरिए एनआरआई अपनी विदेशी कमाई को डॉलर, यूरो, पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भारत के बैंकों में जमा कर सकते हैं. इस खाते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं होता.

NRE डिपॉजिट्स को भी मिली राहत

केंद्रीय बैंक ने तीन वर्ष और उससे अधिक अवधि वाले NRE डिपॉजिट्स पर ब्याज दर संबंधी प्रतिबंधों को भी अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है. हालांकि आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि NRE और NRO डिपॉजिट्स पर दी जाने वाली ब्याज दरें संबंधित बैंक की समान अवधि वाली घरेलू रुपया टर्म डिपॉजिट दरों से अधिक नहीं होनी चाहिए.

रुपये को सहारा देने की रणनीति

आरबीआई का यह कदम ऐसे समय आया है जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना हुआ है. विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार उपाय कर रहा है. ब्याज दरों में यह छूट विदेशी निवेशकों और एनआरआई जमाकर्ताओं को भारतीय बैंकों की ओर आकर्षित करने में मदद कर सकती है.

महीने की शुरुआत में भी उठाए थे कदम

इस महीने की शुरुआत में भी आरबीआई ने विदेशी पूंजी जुटाने के लिए कई घोषणाएं की थीं. इनमें अधिकृत डीलर (AD) बैंकों को 3-5 वर्ष की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट्स जुटाने पर पूरी हेजिंग लागत वहन करने की स्थिति में रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला शामिल था. यह सुविधा भी 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी.

बैंकों को मिलेगा प्रतिस्पर्धी लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों की सीमा हटने से बैंक विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए बेहतर रिटर्न की पेशकश कर सकेंगे. इससे न केवल बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिलेगी.

 


IPO से पहले NSE का बड़ा कदम, पुराने विवाद निपटाने के लिए सेबी को 1,491 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव

को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटारे की तैयारी, MSEI ने भी 857 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा किया.

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) से पहले वर्षों पुराने कानूनी विवादों को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. एक्सचेंज ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) के साथ चल रहे को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटारे के लिए 1,491.21 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही प्रतिद्वंद्वी मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MSEI) की ओर से 856.99 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा भी एनएसई के सामने चुनौती बना हुआ है. हालांकि, एनएसई ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित राशि का पूरा बोझ उस पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह पहले ही विभिन्न आदेशों के तहत बड़ी रकम सेबी के पास जमा करा चुका है.

वास्तविक वित्तीय बोझ कितना होगा?
पहली नजर में 1,491 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव काफी बड़ा दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक वित्तीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है. एनएसई पहले ही विभिन्न मामलों में सेबी के पास करीब 1,107 करोड़ रुपये जमा करा चुका है. ऐसे में यदि सेबी संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो एक्सचेंज को केवल शेष राशि का भुगतान करना होगा. फिलहाल को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.

क्या है डार्क फाइबर विवाद?
डार्क फाइबर मामला ट्रेडिंग में कथित अनुचित लाभ से जुड़ा है. आरोप था कि कुछ चुनिंदा ट्रेडिंग सदस्यों को एक अनधिकृत इंटरनेट सेवा प्रदाता के माध्यम से तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें अन्य निवेशकों की तुलना में बाजार संबंधी जानकारी पहले प्राप्त हो जाती थी.

इस मामले में सेबी ने 2019 में एनएसई को ब्याज सहित 62.58 करोड़ रुपये लौटाने और 2022 में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया था. हालांकि, बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने दोनों आदेशों को रद्द कर दिया. इसके बाद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. विवाद के निपटारे के लिए एनएसई ने मार्च 2026 में 267.65 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव पेश किया.

को-लोकेशन मामला क्यों है अहम?
को-लोकेशन विवाद को एनएसई के इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है. आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के सर्वर के करीब अपने सिस्टम स्थापित करने की विशेष सुविधा दी गई थी, जिससे उन्हें बाजार का डेटा अन्य प्रतिभागियों से पहले मिल जाता था.

इस मामले में सेबी ने 2019 में एनएसई पर 624.89 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था. हालांकि, 2023 में SAT ने इस आदेश को रद्द करते हुए एनएसई को केवल निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (IEPF) में 100 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया.

सेबी ने इस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. मामले को समाप्त करने के लिए एनएसई ने मार्च 2026 में 1,223.56 करोड़ रुपये के भुगतान का संशोधित प्रस्ताव दिया.

MSEI का 857 करोड़ रुपये का दावा
एनएसई की कानूनी चुनौतियां केवल सेबी तक सीमित नहीं हैं. एक्सचेंज ने अपने आईपीओ दस्तावेजों में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MSEI) के साथ करीब 15 वर्ष पुराने विवाद का भी उल्लेख किया है.

MSEI का आरोप है कि एनएसई ने करेंसी डेरिवेटिव्स बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग करते हुए फीस को अत्यधिक कम रखा, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और अन्य एक्सचेंजों को नुकसान पहुंचा.

वर्ष 2011 में प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने एनएसई पर 55.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे 2014 में COMPAT ने भी बरकरार रखा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस जुर्माने की वसूली पर रोक लगा रखी है.

इसके अलावा MSEI ने कथित कारोबारी नुकसान के लिए 856.99 करोड़ रुपये के मुआवजे और उस पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग की है.

IPO से पहले पारदर्शिता पर जोर
एनएसई द्वारा दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में इन सभी लंबित विवादों का विस्तृत उल्लेख किया गया है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ से पहले कानूनी मामलों का खुलासा और उनके निपटारे की पहल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

एनएसई का यह प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब बाजार लंबे समय से देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित आईपीओ का इंतजार कर रहा है.

 

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Gameskraft के पूर्व CFO का बड़ा दावा, 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन की जानकारी संस्थापकों को थी

प्रभु ने ED को बताया कि डायवर्ट किए गए फंड को उनके Zerodha खाते के माध्यम से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में निवेश किया गया था.

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Thursday, 18 June, 2026
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ऑनलाइन गेमिंग यूनिकॉर्न Gameskraft से कथित 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन का मामला संभवतः किसी एक अधिकारी द्वारा की गई व्यक्तिगत गड़बड़ी नहीं था. यह बात पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) रमेश प्रभु से जुड़े एक बयान से सामने आती है, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश में उद्धृत किया गया है.

प्रभु, जिन पर पहले Gameskraft ने कंपनी के फंड को व्यक्तिगत फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में लगाने का आरोप लगाया था, ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बताया कि ये ट्रांसफर कंपनी के संस्थापकों के निर्देश पर किए गए थे और इन्हें आंतरिक रूप से ऐसे निवेश के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिन्हें बाद में व्यवसाय में वापस लाया जाना था.

ED द्वारा की गई गिरफ्तारियों की वैधता की जांच करने वाले 16 जून के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले में उद्धृत यह बयान, Gameskraft के प्रमोटरों के खिलाफ एजेंसी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का एक प्रमुख आधार बन गया है.

आदेश के अनुसार, प्रभु ने 18 नवंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत ED द्वारा भेजे गए समन का जवाब ईमेल के माध्यम से दिया था. उस संचार में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि फंड का डायवर्जन संस्थापकों विकास तनेजा, दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वीराज सिंह और दीपक कुमार झा के "निर्देशों के तहत" किया गया था.

'कंपनी का पैसा सुरक्षित रखने' की योजना

अदालत द्वारा उद्धृत बयान में प्रभु ने इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2019 से बताई है, जब RummyCircle संचालित करने वाली Games24x7 ने Gameskraft के कुछ संस्थापकों के खिलाफ सोर्स कोड और ग्राहक डेटाबेस की कथित चोरी को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी.

प्रभु का दावा है कि इस मुकदमेबाजी के कारण संस्थापकों को कंपनी में जमा हो रहे फंड को लेकर चिंता हुई. उनके बयान के अनुसार, उनसे कहा गया था कि धीरे-धीरे कंपनी से पैसा बाहर निकालकर उसे शेयर बाजार में निवेश किया जाए, ताकि बाद में उसे वापस लाया जा सके. अदालत में उद्धृत संचार के अनुसार प्रभु ने कथित रूप से कहा, "उन्होंने मुझसे कहा था कि जब हमें मुनाफा होगा, तो हम पैसा वापस कंपनी में ले आएंगे."

व्यक्तिगत खातों के जरिए F&O ट्रेडिंग

प्रभु ने ED को बताया कि डायवर्ट किए गए फंड को उनके Zerodha खाते के माध्यम से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग में निवेश किया गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी पत्नी की जानकारी के बिना उनके नाम पर एक और ट्रेडिंग खाता खोला था. बयान के अनुसार, Gameskraft से ट्रांसफर किया गया पूरा पैसा अंततः डेरिवेटिव ट्रेडिंग में डूब गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें इन लेन-देन से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं हुआ.

यह दावा Gameskraft की पहले की पुलिस शिकायत से बिल्कुल अलग है, जिसमें इस मामले को एक वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी द्वारा अकेले किए गए अनधिकृत फंड डायवर्जन के रूप में पेश किया गया था.

म्यूचुअल फंड एंट्री और कथित फर्जीवाड़ा

प्रभु के बयान का संभवतः सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन लेन-देन को कंपनी की पुस्तकों में किस प्रकार दर्ज किया गया. प्रभु ने दावा किया कि उनके खातों में ट्रांसफर की गई राशि को Gameskraft के वित्तीय विवरणों में म्यूचुअल फंड निवेश के रूप में दिखाया गया था. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि संस्थापकों ने उनसे ऑडिट के लिए फर्जी म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट तैयार करने को कहा था. आदेश में उद्धृत बयान के अनुसार, उन्होंने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान ऐसा करने से इनकार कर दिया.

यह आरोप Gameskraft की अपनी पुलिस शिकायत से मेल खाता है, जिसमें कहा गया था कि फंड डायवर्जन छिपाने के लिए फर्जी निवेश रिकॉर्ड और नकली म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट का इस्तेमाल किया गया.

'दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को अलर्ट मिलते थे'

पूर्व CFO ने इस संभावना को भी खारिज किया कि ये ट्रांसफर किसी की नजर से बच सकते थे. प्रभु ने ED को बताया कि जिस RBL बैंक खाते से फंड ट्रांसफर किया गया, उसके लिए दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की आवश्यकता थी, वह स्वयं और सह-संस्थापक पृथ्वीराज सिंह. उनका दावा है कि हर लेन-देन होने पर दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को ईमेल और SMS अलर्ट प्राप्त होते थे. यह दावा जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वे यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि फंड की आवाजाही की जानकारी किसे थी और कब थी.

IPO का दबाव

प्रभु के बयान में आगे आरोप लगाया गया है कि जब Gameskraft संभावित पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही थी, तब गायब हुए पैसे को वापस दिखाने का दबाव बढ़ गया. अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, उनका दावा है कि कंपनी दो वर्षों के भीतर IPO लाने की योजना बना रही थी और उसे अपने खातों में यह राशि दिखाने की आवश्यकता थी. चूंकि पैसा पहले ही F&O ट्रेडिंग में डूब चुका था, इसलिए उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थापकों ने नुकसान का दोष उन पर मढ़ दिया और बाद में उन्हें यह आश्वासन देते हुए देश छोड़ने के लिए कहा कि वे "स्थिति संभाल लेंगे." उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संस्थापक लिखित संचार से बचते थे और लेन-देन से संबंधित निर्देश मौखिक रूप से देते थे.

ED की मनी लॉन्ड्रिंग थ्योरी

ED ने अपना मामला तैयार करने में प्रभु के बयान पर काफी हद तक भरोसा किया है. हाईकोर्ट द्वारा उद्धृत गिरफ्तारी के आधारों में एजेंसी ने आरोप लगाया कि Gameskraft के संस्थापक और पूर्व CFO आपस में "मिलीभगत" से काम कर रहे थे और उन्होंने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस तथा म्यूचुअल फंड निवेश के नाम पर 250 करोड़ रुपये का डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग की. एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि अपराध से अर्जित आय का एक हिस्सा निवेश संरचनाओं और डिविडेंड भुगतान के माध्यम से धन शोधन कर परिवार-नियंत्रित संस्थाओं और संपत्तियों में पहुंचाया गया.

कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में इन आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. फैसले का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि क्या ED के पास PMLA के तहत गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी. हालांकि, प्रभु का बयान इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. जहां Gameskraft की मूल शिकायत में उन्हें वर्षों से चल रहे कथित धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड के रूप में पेश किया गया था, वहीं पूर्व CFO ने अब आरोप लगाया है कि यह निवेश योजना कंपनी के शीर्ष नेतृत्व की जानकारी और निर्देश पर चलाई गई थी. यही दावा ED की विस्तारित जांच के केंद्र में है.

संस्थापकों को जेल से रिहाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ा झटका देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को Gameskraft के संस्थापक दीपक सिंह, पृथ्वीराज सिंह और विकास तनेजा की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया और उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारी से जुड़े वैधानिक सुरक्षा प्रावधानों का पालन करने में विफल रही.

यह आदेश न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पारित किया. उन्होंने 7 और 8 मई को ED द्वारा की गई तलाशी के बाद संस्थापकों की गिरफ्तारी की वैधता पर दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.
 


आत्मनिर्भर भारत को मिली मजबूती, रक्षा उत्पादन 15.6% बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा

रक्षा क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ रही स्वदेशी क्षमता, उत्पादन और निर्यात दोनों ने बनाया नया रिकॉर्ड

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश का कुल रक्षा उत्पादन 15.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह उपलब्धि न केवल देश की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता को दर्शाती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है.

एक साल में 15.6% और पांच साल में 110% की बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन का आंकड़ा 1.54 लाख करोड़ रुपये था, जो FY26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, वर्ष 2020-21 के 84,643 करोड़ रुपये की तुलना में इसमें 110 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों और नीति समर्थन ने इस वृद्धि को गति दी है.

राजनाथ सिंह ने बताया सामूहिक प्रयासों का परिणाम

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन में हुई यह उल्लेखनीय वृद्धि रक्षा उत्पादन विभाग, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के तेजी से विकसित हो रहे रक्षा औद्योगिक आधार का स्पष्ट संकेत है. उनके अनुसार, सरकार की नीतिगत सहायता, नई पहल, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निर्यात क्षमताओं में विस्तार से आने वाले वर्षों में भी रक्षा क्षेत्र की विकास गति मजबूत बनी रहेगी.

12 वर्षों में लगभग चार गुना हुआ रक्षा उत्पादन

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा उत्पादन 43,746 करोड़ रुपये था. FY26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यानी पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ चुका है. यह वृद्धि भारत को रक्षा उपकरणों के आयातक से एक उभरते हुए रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

रक्षा क्षेत्र में बढ़ रही निजी कंपनियों की भूमिका

रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का अभी भी प्रमुख योगदान है. FY26 में कुल उत्पादन में डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही. हालांकि, निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है. FY26 में निजी कंपनियों का योगदान बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया, जो पिछले वर्ष 22 प्रतिशत था. मूल्य के लिहाज से निजी क्षेत्र का उत्पादन करीब 42,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निजी निवेश और तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है.

रक्षा निर्यात ने भी बनाया नया कीर्तिमान

रक्षा उत्पादन में वृद्धि का असर निर्यात पर भी दिखाई दिया है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. मंत्रालय का कहना है कि उत्पादन क्षमता में विस्तार और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास ने भारतीय रक्षा उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के प्रयासों को मजबूत करती है. विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन और निर्यात दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है.

 


भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, 99% भारतीय उत्पादों को मिलेगी ड्यूटी-फ्री एंट्री

CETA लागू होने के साथ भारतीय निर्यातकों, आईटी पेशेवरों और MSME क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद, ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीयों को 5 साल तक दोहरे सामाजिक सुरक्षा कर से राहत

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है. इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) भी प्रभाव में आ जाएगा. इस समझौते के लागू होने के बाद ब्रिटेन में जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा, जबकि वहां कार्यरत हजारों भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा योगदान से जुड़ी बड़ी राहत मिलेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत-यूके संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि, यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएगा. यह समझौता हमारे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा देगा. यह भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवप्रवर्तकों के लिए अनेक अवसर भी खोलेगा तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा. G7 शिखर सम्मेलन के लिए एवीयान में मौजूद प्रधानमंत्री स्टारमर और मैं, दोनों ही हमारे आर्थिक संबंधों में इस महत्वपूर्ण गति को लेकर स्वाभाविक रूप से बहुत प्रसन्न हैं.

भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेगा ब्रिटेन का बाजार

नए व्यापार समझौते के तहत अधिकांश भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा. इससे खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, चमड़ा एवं फुटवियर और वस्त्र उद्योग को विशेष लाभ मिलने की संभावना है.

अब तक प्रोसेस्ड फूड पर 70 प्रतिशत तक, समुद्री उत्पादों पर 21.5 प्रतिशत, इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स पर 18 प्रतिशत, चमड़ा एवं जूतों पर 16 प्रतिशत तथा कपड़ा उत्पादों पर 12 प्रतिशत तक लगने वाला शुल्क समाप्त हो जाएगा. इससे भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और निर्यात को नई गति मिलेगी. हालांकि, भारत ने डेयरी उत्पादों, अनाज और सेब जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखकर घरेलू किसानों के हितों की भी रक्षा की है.

सेवा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा अवसर

यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के सेवा क्षेत्र के लिए भी नए अवसर लेकर आया है. ब्रिटेन ने 137 सेवा क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को बेहतर बाजार पहुंच प्रदान की है. इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, दूरसंचार और पेशेवर सेवाएं शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय आईटी कंपनियों, कंसल्टिंग फर्मों और अन्य सेवा प्रदाताओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी.

भारतीय पेशेवरों को दोहरे टैक्स से राहत

समझौते का सबसे बड़ा लाभ ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को मिलेगा. नए सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत अस्थायी रूप से ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योगदान के दोहरे भुगतान से 5 वर्षों तक छूट मिलेगी. पहले यह छूट केवल 3 वर्षों के लिए उपलब्ध थी. इस बदलाव से करीब 75,000 भारतीय पेशेवरों और लगभग 900 भारतीय कंपनियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

इसके अलावा हर वर्ष 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षकों और शास्त्रीय संगीत कलाकारों को ब्रिटेन में विशेष कार्य अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे.

स्टील निर्यातकों के हितों की सुरक्षा

व्यापार समझौते में भारत के स्टील उद्योग के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है. ब्रिटेन द्वारा 1 जुलाई 2026 से लागू किए जा रहे नए स्टील आयात नियमों के बावजूद भारत के लगभग 85 प्रतिशत स्टील निर्यात को उनके प्रभाव से बाहर रखा गया है. शेष निर्यात को विशेष कोटा व्यवस्था के माध्यम से संरक्षण दिया जाएगा, जिससे भारतीय स्टील उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनी रहे.

MSME, स्टार्टअप और युवाओं को मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा. MSME, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और युवा कारोबारियों को भी ब्रिटेन जैसे बड़े और विकसित उपभोक्ता बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा. इससे रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

14 दौर की बातचीत के बाद मिली सफलता

भारत और ब्रिटेन के बीच इस व्यापार समझौते की प्रक्रिया मई 2021 में शुरू हुई थी. करीब 14 दौर की विस्तृत वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया. विशेषज्ञों के अनुसार, CETA भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे देश को वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी.
 


शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रहेगा या लगेगा ब्रेक? आज इन शेयरों पर रखें नजर

बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 347 अंक चढ़कर 77,155.62 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,085.70 के स्तर पर पहुंचकर बंद हुआ.

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Thursday, 18 June, 2026
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भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आईटी शेयरों में खरीदारी के दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 347 अंक चढ़कर 77,155.62 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,085.70 के स्तर पर पहुंच गया. अब गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या बाजार तेजी का यह सिलसिला जारी रख पाएगा या फिर मुनाफावसूली हावी होगी.

वैश्विक संकेतों पर रहेगी नजर

बाजार की दिशा तय करने में आज भी वैश्विक संकेत अहम भूमिका निभा सकते हैं. निवेशक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल बना रह सकता है.

आईटी और बैंकिंग शेयरों से उम्मीद

पिछले कारोबारी सत्र में आईटी और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को मजबूती दी थी. इन्फोसिस, टीसीएस और अन्य आईटी कंपनियों में खरीदारी देखने को मिली थी. ऐसे में आज भी इन शेयरों की चाल बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बने रह सकते हैं अवसर

हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियों में चुनिंदा खरीदारी जारी रह सकती है, हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली से इनकार नहीं किया जा सकता.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को ईस्ट कोस्ट रेलवे से 967.92 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. कंपनी भद्रक-विजयनगरम सेक्शन में तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए पुल निर्माण का काम करेगी. इस खबर का असर शेयर पर देखने को मिल सकता है. टेलीकॉम कंपनी HFCL को भारतनेट फेज-III परियोजना के तहत 2,666 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. 

फार्मा कंपनी Lupin ने अमेरिका में हाइपरटेंशन के इलाज के लिए Azilsartan Medoxomil टैबलेट लॉन्च की है. कंपनी को US FDA की मंजूरी भी मिल चुकी है, जिससे शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकता है. स्टेशनरी कंपनी DOMS Industries में विदेशी प्रमोटर FILA ने 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर करीब 935 करोड़ रुपये जुटाए हैं. वहीं Axis Mutual Fund और SBI Mutual Fund ने कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाई है.

Corona Remedies में बड़े पैमाने पर ब्लॉक डील हुई है. ChrysCapital से जुड़ी Sepia Investments ने 7.07 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है. इस सौदे में कई घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया. कंपनी के प्रमोटर Bosch Global Software Technologies ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं. इसका असर शेयर की चाल पर देखने को मिल सकता है. Lemon Tree Hotels ने राजस्थान के श्रीगंगानगर में नया होटल शुरू किया है. वहीं Balkrishna Industries ने सरोज कुमार खुंटिया को नया CFO नियुक्त किया है. दोनों कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी रह सकती है.

निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार फिलहाल सकारात्मक रुख में है, लेकिन लगातार चार दिन की तेजी के बाद ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है. ऐसे में निवेशकों को चुनिंदा शेयरों पर फोकस रखते हुए वैश्विक संकेतों और सेक्टर-विशेष खबरों पर नजर बनाए रखनी चाहिए. आज RVNL, HFCL, Lupin, DOMS Industries, Corona Remedies, Bosch Home Comfort, Lemon Tree Hotels और Balkrishna Industries जैसे शेयर बाजार में चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)