डेनमार्क स्थित यह लोकप्रिय कैफे ब्रांड ताजा जूस, शेक, कॉफी और ऑर्डर पर तैयार सैंडविच के लिए प्रसिद्ध है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
आदित्य बिड़ला ग्रुप की हॉस्पिटैलिटी शाखा, आदित्य बिड़ला न्यू एज हॉस्पिटैलिटी (ABNAH) ने आज अंतरराष्ट्रीय कैफ़े ब्रांड “JOE & THE JUICE” के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की. इस साझेदारी के तहत इस वैश्विक ब्रांड को भारत में लॉन्च और संचालित किया जाएगा.
यह कदम आदित्य बिड़ला ग्रुप के लिए स्केलेबल फूड सर्विसेज फॉर्मेट में प्रवेश का प्रतीक है, जो विभिन्न अवसरों और मूल्य श्रेणियों में ब्रांड्स का व्यापक पोर्टफोलियो तैयार करने की उसकी रणनीति का हिस्सा है.
फूड सर्विसेज पोर्टफोलियो में होगा विस्तार
डेनिश ब्रांड “JOE & THE JUICE” अब आदित्य बिड़ला ग्रुप के बढ़ते फूड सर्विसेज पोर्टफोलियो का हिस्सा बनेगा. ग्रुप के पोर्टफोलियो में पहले से ही अंतरराष्ट्रीय ब्रांड जैसे Yauatcha, Hakkasan और Nara Thai तथा घरेलू ब्रांड जैसे CinCin, Ode, Waarsa और Supa San शामिल हैं. JOE & THE JUICE का पहला फ्लैगशिप स्टोर 2026 की दूसरी छमाही में खोलने का लक्ष्य रखा गया है.
2002 में कोपेनहेगन से हुई शुरुआत
साल 2002 में कोपेनहेगन (डेनमार्क) में स्थापित JOE & THE JUICE ने आज यूरोप, अमेरिका, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और एशिया सहित दुनिया भर में 480 से अधिक लोकेशनों तक विस्तार कर लिया है. यह ब्रांड केवल ताजा और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी संस्कृति और कम्युनिटी-आधारित अनुभव के लिए भी जाना जाता है.
भारत उपभोग के नए दौर में
इस रणनीतिक साझेदारी की घोषणा करते हुए आदित्य बिड़ला मैनेजमेंट कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और ABNAH के संस्थापक आर्यमान विक्रम बिड़ला ने कहा, “भारत इस समय उपभोग के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जिसे बढ़ते विवेकाधीन खर्च, अनुकूल जनसांख्यिकी और प्रीमियमाइजेशन जैसे संरचनात्मक कारक गति दे रहे हैं. आदित्य बिड़ला समूह फैशन और लाइफस्टाइल, फूड सर्विसेज, ज्वेलरी, पेंट्स और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स जैसे विविध उपभोक्ता व्यवसायों में विस्तार कर रहा है. गहन उपभोक्ता समझ, श्रेणी विशेषज्ञता और परिचालन दक्षता के आधार पर हम भारत के उभरते उपभोक्ताओं के लिए विशिष्ट और स्केलेबल ब्रांड विकसित करने की मजबूत स्थिति में हैं. हमें विश्वास है कि JOE & THE JUICE स्वास्थ्य, सुविधा और अनुभव के संगम पर एक अनूठी स्थिति में है. यह हमारे हॉस्पिटैलिटी व्यवसाय की रणनीति में पूरी तरह फिट बैठता है और स्केलेबल फॉर्मेट्स के लिए मजबूत आधार तैयार करता है.”
भारत हमारे लिए एक अहम बाजार
इस अवसर पर JOE & THE JUICE के सीईओ थॉमस नोरोक्से ने कहा, “हम भारत को अपनी दीर्घकालिक विकास रणनीति में एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देखते हैं और इस यात्रा में आदित्य बिड़ला समूह के साथ साझेदारी पर गर्व महसूस करते हैं. यह एशिया में हमारी पहली वास्तविक रणनीतिक एंट्री है, ऐसे बाजार में जो तेज़ी से विकसित हो रहा है और जहां उपभोक्ता प्राथमिकताएं विशेष रूप से प्रीमियम और स्वास्थ्य-केंद्रित उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ रही हैं. आदित्य बिड़ला ग्रुप की मजबूत परिचालन क्षमताओं और प्रीमियम लाइफस्टाइल ब्रांड्स को सफलतापूर्वक विकसित एवं संचालित करने के अनुभव के साथ हमें JOE & THE JUICE को लॉन्च और स्केल करने के लिए एक आदर्श मंच मिला है. JOE & THE JUICE में हमारी मूल दर्शन हमेशा सीमाओं को आगे बढ़ाने और स्वास्थ्य, वेलनेस तथा कम्युनिटी के लाभों को फैलाने पर केंद्रित रही है.”
सलाहकार की भूमिका
इस सौदे में JOE & THE JUICE को AMBIT CAPITAL PRIVATE LIMITED ने सलाह दी. इस साझेदारी के साथ आदित्य बिड़ला ग्रुप भारतीय फूड और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में प्रीमियम और हेल्थ-केंद्रित कैफे सेगमेंट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है.
कंपनी की ग्रोथ में ऑटो सेक्टर, खासकर एसयूवी सेगमेंट, सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा. साल के दौरान एसयूवी की बिक्री 6.6 लाख यूनिट तक पहुंच गई और बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 25.3% हो गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मजबूत एसयूवी डिमांड, कृषि कारोबार में स्थिर प्रदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पहलों के सहारे महिंद्रैा (Mahindra & Mahindra) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का मुनाफा और राजस्व दोनों ही मजबूत वृद्धि के साथ नई ऊंचाई पर पहुंचे, जिससे इसके शेयरों में भी तेजी देखने को मिली.
चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा 42% बढ़कर 4,668 करोड़ रुपये हो गया. वहीं राजस्व 29% की वृद्धि के साथ 54,982 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. नतीजों के बाद बीएसई सेसेंक्स पर कंपनी के शेयर में तेजी दर्ज की गई और यह मंगलवार को 3.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,210.80 रुपये पर बंद हुआ था.
पूरे साल भी मजबूत ग्रोथ
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का कुल राजस्व 25% बढ़कर 1,98,639 करोड़ रुपये हो गया, जबकि कर बाद लाभ (PAT) 32% बढ़कर 17,099 करोड़ रुपये रहा. यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत बिजनेस रणनीति और विविध पोर्टफोलियो को दर्शाता है.
वाहन कारोबार बना ग्रोथ का इंजन
कंपनी की ग्रोथ में ऑटो सेक्टर, खासकर एसयूवी सेगमेंट, सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा. साल के दौरान एसयूवी की बिक्री 6.6 लाख यूनिट तक पहुंच गई और बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 25.3% हो गई. इससे कंपनी की लीडरशिप और मजबूत हुई.
कृषि कारोबार और मजबूत मार्जिन
कृषि उपकरण सेगमेंट ने घरेलू मांग के चलते अच्छा प्रदर्शन किया, हालांकि वैश्विक बाजारों में कुछ कमजोरी रही. ट्रैक्टर बिजनेस में मार्जिन 20.54% पर स्थिर रहा, जो इस सेगमेंट की मजबूती को दर्शाता है.
फाइनेंशियल और सर्विस बिजनेस का योगदान
कंपनी के फाइनेंशियल सर्विसेज और अन्य सेवा कारोबारों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया. चौथी तिमाही में इस सेगमेंट का राजस्व 23% बढ़कर 12,147 करोड़ रुपये रहा, जबकि मुनाफा 64% उछलकर 1,348 करोड़ रुपये हो गया.
AI से नए अवसर
कंपनी के मैनेजमेंट के अनुसार, AI अब बिजनेस का अहम हिस्सा बन चुका है. वाहन कारोबार में AI आधारित पहल से करीब 4,100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद है. इसके साथ ही ग्राहक संतुष्टि में सुधार और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का समय भी घटेगा.
क्षमता विस्तार पर फोकस
कंपनी ने बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता में भी इजाफा किया है. मासिक उत्पादन क्षमता को 59,000 यूनिट से बढ़ाकर करीब 64,500 यूनिट किया गया है, जिससे भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा.
कंपनी का मानना है कि मजबूत फंडामेंटल, अनुशासित निवेश और नए टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव्स के चलते वह अनिश्चित वैश्विक माहौल में भी ग्रोथ बनाए रखने की स्थिति में है. आने वाले समय में SUV, EV और AI आधारित इनोवेशन कंपनी की रणनीति के केंद्र में रहेंगे.
आरबीआई ने इस मसौदे पर सभी हितधारकों से 26 मई तक सुझाव आमंत्रित किए हैं. अंतिम नियम लागू होने से पहले इन सुझावों पर विचार किया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कर्ज वसूली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और एनबीएफसी के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है. इस प्रस्ताव के तहत, यदि कोई कर्ज नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन जाता है और वसूली के अन्य सभी विकल्प विफल हो जाते हैं, तो बैंक गिरवी रखी गई अचल संपत्ति जैसे जमीन या मकान पर कब्जा कर सकते हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल विशेष परिस्थितियों में ही उठाया जाएगा और इसके लिए सख्त शर्तें लागू होंगी.
क्या है नया प्रस्ताव?
आरबीआई के ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, बैंक और एनबीएफसी डूबे हुए कर्ज की वसूली के लिए सिक्योरिटी के तौर पर रखी गई प्रॉपर्टी को अपने कब्जे में ले सकेंगे. यह कदम तब उठाया जाएगा जब कर्ज की रिकवरी के अन्य सभी रास्ते बंद हो चुके हों या असरदार साबित न हुए हों.
7 साल के भीतर बेचना होगा एसेट
प्रस्ताव में यह भी साफ किया गया है कि वित्तीय संस्थान ऐसी संपत्तियों को हमेशा के लिए अपने पास नहीं रख सकते. उन्हें अधिकतम सात साल के भीतर इन प्रॉपर्टीज को बेचकर अपनी राशि की वसूली करनी होगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक रियल एस्टेट कारोबार में न उलझें और केवल कर्ज वसूली तक सीमित रहें.
क्या होगा फायदा?
आरबीआई के अनुसार, इस व्यवस्था से बैंकों को डूबे हुए कर्ज की बेहतर रिकवरी में मदद मिलेगी. समयबद्ध और पारदर्शी बिक्री प्रक्रिया से संस्थान अपने नुकसान को कम कर सकेंगे और वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनी रहेगी.
किन्हें नहीं बेच पाएंगे प्रॉपर्टी?
ड्राफ्ट में गड़बड़ी या हितों के टकराव को रोकने के लिए सख्त प्रावधान भी किए गए हैं. इसके तहत बैंक या एनबीएफसी ऐसी जब्त की गई प्रॉपर्टी को उसी डिफॉल्टर या उससे जुड़े किसी व्यक्ति को दोबारा नहीं बेच सकेंगे.
SNFA क्या है?
आरबीआई ने इन संपत्तियों को “स्पेसिफाइड नॉन फाइनेंशियल एसेट्स (SNFA)” की श्रेणी में रखा है. इसका मतलब उन अचल संपत्तियों से है जिन्हें कर्ज की वसूली के लिए उधारकर्ता से लेकर संस्थान अपने कब्जे में लेते हैं. इसमें अन्य गैर-वित्तीय एसेट्स भी शामिल हो सकते हैं.
26 मई तक मांगे गए सुझाव
आरबीआई ने इस मसौदे पर सभी हितधारकों से 26 मई तक सुझाव आमंत्रित किए हैं. अंतिम नियम लागू होने से पहले इन सुझावों पर विचार किया जाएगा.
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बैंकों के लिए NPA रिकवरी का एक मजबूत विकल्प तैयार होगा. वहीं, उधार लेने वालों के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि डिफॉल्ट की स्थिति में गिरवी रखी गई संपत्ति पर कब्जा संभव है, जिससे क्रेडिट अनुशासन को बढ़ावा मिल सकता है.
मंगलवार को सेंसेक्स 252 अंक यानी 0.33% गिरकर 77,017.79 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 86.50 अंक (0.36%) टूटकर 24,032.80 के स्तर पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर होते रुपये और सेक्टोरल दबाव के बीच कल भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है. एक ओर सेंसेक्स और निफ्टी 50 गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं दूसरी ओर ग्लोबल बाजारों की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आज के कारोबार के लिए राहत के संकेत दे रही है. ऐसे में आज निवेशकों के लिए बाजार की दिशा अब वैश्विक घटनाक्रम, क्रूड ऑयल की चाल और चुनिंदा शेयरों में आ रहे एक्शन पर निर्भर करेगी.
मंगलवार को कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Sensex) 252 अंक यानी 0.33% गिरकर 77,017.79 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (Nifty 50) 86.50 अंक (0.36%) टूटकर 24,032.80 के स्तर पर आ गया. दिन के दौरान सेंसेक्स में 600 अंकों से अधिक की गिरावट भी देखने को मिली.
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
कमजोर बाजार सेंटीमेंट के बीच भारतीय मुद्रा पर भी दबाव रहा. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.2% गिरकर 95.28 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है.
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
सेंसेक्स के 30 में से 20 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. प्रमुख गिरने वाले शेयरों में ICICI Bank सबसे ज्यादा 1.54% लुढ़का. इसके अलावा Tech Mahindra, Axis Bank, Maruti Suzuki, Adani Ports, State Bank of India और Tata Steel में भी गिरावट रही. दूसरी ओर कुछ शेयरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की, जिनमें Infosys, Reliance Industries, Hindustan Unilever और Titan Company शामिल रहे.
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टोरल स्तर पर दबाव साफ दिखा. बैंकिंग, रियल्टी और ऑयल एंड गैस शेयरों में गिरावट रही. वहीं ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में कुछ मजबूती देखने को मिली, जिसने गिरावट को सीमित रखने में मदद की. मुख्य सूचकांकों के विपरीत, ब्रॉडर मार्केट में सीमित तेजी रही. मिडकैप इंडेक्स में 0.17% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.28% की बढ़त दर्ज की गई, जो चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का संकेत है.
भू-राजनीतिक तनाव बना बड़ी चिंता
पश्चिम एशिया में तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. स्ट्रेट ऑफ हार्मुज के पास अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की खबरों ने बाजार पर दबाव बनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्गो जहाजों पर हमले और सैन्य गतिविधियों ने हालात को और गंभीर बना दिया है. इस बीच, अमेरिका के राषट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी जहाजों पर किसी भी हमले का सख्त जवाब दिया जाएगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और चुनिंदा सेक्टरों में ही निवेश की सलाह दी जा रही है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज यानी 6 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि वैश्विक बाजारों की तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है; GIFT Nifty करीब 204 अंकों की बढ़त के साथ 24,310 के आसपास कारोबार करता दिखा, जिससे Nifty 50 के हरे निशान में खुलने की उम्मीद है. इस बीच Brent Crude और WTI Crude में गिरावट से महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है. स्टॉक्स इन फोकस में Larsen & Toubro (मुनाफा हल्का घटा), Hero MotoCorp (मजबूत Q4), Biocon (लीडरशिप बदलाव), Grasim Industries (NCLAT से राहत), Poonawalla Fincorp (मुनाफा 4 गुना), Vedanta (विस्तार योजना), Emcure Pharmaceuticals, Zen Technologies, KEC International और Lemon Tree Hotels जैसे शेयर शामिल हैं, जबकि आज One 97 Communications, Bajaj Auto, Polycab India, Godrej Consumer Products और PB Fintech समेत कई कंपनियों के Q4 नतीजों पर भी बाजार की नजर रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 भारतीय इक्विटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. इस दौरान वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal Financial Services) की एक रिपोर्ट के अनुसार Nifty 500 कंपनियों में DII की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी घटकर 17.1 प्रतिशत रह गई है. यह बदलाव बाजार में बदलते निवेश रुझानों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.
वैश्विक तनावों के बीच उतार-चढ़ाव भरा साल
वित्त वर्ष 2026 भारतीय इक्विटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. इस दौरान वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई. इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने लगातार बाजार को सहारा दिया और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
DII की मजबूत खरीदारी से बाजार को मिला सहारा
2026 की पहली तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 27.2 अरब डॉलर का निवेश किया. इस दौरान सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश प्रवाह ने भी बाजार को मजबूती दी. घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित किया.
खरीदारी से भारी बिकवाली तक
विदेशी निवेशकों का रुख इस अवधि में काफी अस्थिर रहा. फरवरी 2026 में FII ने लगभग 1.7 अरब डॉलर की शुद्ध खरीदारी की, लेकिन मार्च में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण उन्होंने 14.2 अरब डॉलर की भारी बिकवाली कर दी. इस तरह पूरे तिमाही में कुल विदेशी निवेश आउटफ्लो 15.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसने बाजार पर दबाव बढ़ाया.
ओनरशिप पैटर्न में बड़ा बदलाव
मार्च 2026 तक Nifty 500 में FII और DII के बीच ओनरशिप रेशियो घटकर 0.8 गुना रह गया. फ्री फ्लोट में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 360 बेसिस पॉइंट घटकर 33.8 प्रतिशत पर आ गई, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 310 बेसिस पॉइंट बढ़कर 41.2 प्रतिशत तक पहुंच गई. इस अवधि में प्रमोटर होल्डिंग 49.4 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़कर 12.7 प्रतिशत हो गई.
सेक्टर वाइज निवेश में अलग-अलग रणनीति
सेक्टर स्तर पर निवेश रणनीतियों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला. घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 24 में से 21 सेक्टरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, जिसमें प्राइवेट बैंक, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और एनबीएफसी प्रमुख रहे. दूसरी ओर विदेशी निवेशकों ने बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 32.1 प्रतिशत कर दी, जबकि मेटल्स, हेल्थकेयर, यूटिलिटीज और ऑयल-गैस में निवेश बढ़ाया. खास बात यह रही कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में FII की हिस्सेदारी घटकर रिकॉर्ड 7.3 प्रतिशत पर पहुंच गई.
रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार घरेलू संस्थागत निवेशकों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है और वे भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम ताकत बनते जा रहे हैं. यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आती है तो बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है, जबकि लगातार विदेशी निवेश वापसी से बाजार में तेज तेजी देखने को मिल सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार, RBI की दर कटौती से कर्ज जरूर सस्ता हुआ, लेकिन इसका पूरा फायदा अभी तक ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाया है. बैंकिंग सिस्टम में असमान ट्रांसमिशन इस अंतर की बड़ी वजह बना हुआ है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में इसका पूरा लाभ उधारकर्ताओं तक नहीं पहुंच पाया. Bank of Baroda (BoB) की एक रिपोर्ट के अनुसार, लेंडिंग रेट्स में गिरावट रेपो रेट की तुलना में धीमी रही, जिससे कर्ज सस्ता होने की प्रक्रिया आंशिक ही रही.
125 बेसिस पॉइंट की कटौती, लेकिन असर सीमित
आरबीआई ने फरवरी 2025 से रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए इसे 6.50 प्रतिशत से घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था. इसका उद्देश्य कर्ज की लागत कम करना और निजी निवेश को बढ़ावा देना था. हालांकि, BoB की रिपोर्ट बताती है कि बैंकिंग सिस्टम में इस कटौती का असर समान रूप से नहीं दिखा.
लेंडिंग रेट्स में धीमी गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, नए कर्ज पर वेटेड एवरेज लेंडिंग रेट (WALR) में 93 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई. वहीं, MCLR (Marginal Cost of Funds-based Lending Rate) में केवल 45 बेसिस पॉइंट की कमी दर्ज की गई. यह संकेत देता है कि बैंकों ने पॉलिसी रेट कट का पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया.
डिपॉजिट रेट्स में कटौती का भी असर
इस दौरान बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट को संतुलित रखने के लिए डिपॉजिट रेट्स भी घटाए. इसका असर MCLR जैसे आंतरिक बेंचमार्क पर पड़ा, जिससे लेंडिंग रेट्स में गिरावट की रफ्तार सीमित रही.
अलग-अलग बैंकों में ट्रांसमिशन असमान
रिपोर्ट में पाया गया कि ब्याज दरों में कटौती का असर सभी बैंकों में एक जैसा नहीं था:
1. विदेशी बैंकों में सबसे तेज गिरावट देखी गई
2. निजी बैंकों ने इसके बाद स्थान लिया
3. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे धीमा असर रहा
इसका मुख्य कारण EBLR (External Benchmark Lending Rate) से जुड़े लोन का अनुपात है.
1.विदेशी बैंकों में ~94% लोन EBLR से जुड़े
2. निजी बैंकों में ~89%
3. सार्वजनिक बैंकों में ~51%
जहां यह अनुपात ज्यादा था, वहां दरों में कटौती का असर भी तेज दिखा.
सेक्टर के हिसाब से भी अलग तस्वीर
विभिन्न सेक्टरों में ब्याज दरों का स्तर अलग-अलग रहा, जैसे अनसिक्योर्ड रिटेल लोन 10.1% (सबसे ज्यादा), कृषि लोन 9.81%, रुपये में एक्सपोर्ट क्रेडिट 6.78% (सबसे कम) रहा.
रिटेल सेगमेंट में होम लोन 7.63% (तुलनात्मक रूप से सस्ते), वाहन और एजुकेशन लोन 9% से अधिक रहा.
किन सेक्टर्स को मिला ज्यादा फायदा?
रिपोर्ट के अनुसार एक्सपोर्ट क्रेडिट और एजुकेशन लोन में 160 बेसिस पॉइंट से ज्यादा गिरावट, MSME और अनसिक्योर्ड लोन में भी रेपो कट के अनुरूप कमी आई. वहीं, कृषि, प्रोफेशनल सर्विसेज और बड़े उद्योगों में गिरावट सीमित रही.
उधारकर्ताओं को ₹19,000 करोड़ की बचत
कुल मिलाकर, कम ब्याज दरों से उधारकर्ताओं को लगभग 19,000 करोड़ रुपये की बचत हुई. इसमें सबसे बड़ा योगदान हाउसिंग और MSME लोन का रहा.
रिपोर्ट के मुताबिक, अब ब्याज दर चक्र स्थिरता के करीब है. ऐसे में निकट भविष्य में लेंडिंग रेट्स में बहुत बड़े बदलाव की संभावना कम है, जब तक मौद्रिक नीति में कोई बड़ा संकेत नहीं मिलता.
मार्च तिमाही में पीएनबी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14.4 प्रतिशत बढ़कर 5,225 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में बैंक ने 4,567 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक ने इस तिमाही में मुनाफे में ठोस बढ़त दर्ज की है, जबकि बैड लोन की स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है. हालांकि, कुल आय में हल्की गिरावट रही. बैंक ने शेयरधारकों के लिए ₹3 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान भी किया है.
मुनाफे में 14% से ज्यादा की बढ़ोतरी
मार्च तिमाही में पीएनबी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14.4 प्रतिशत बढ़कर 5,225 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में बैंक ने 4,567 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. बैंक के मुताबिक, इस बढ़त की प्रमुख वजह ब्याज से होने वाली आय में इजाफा रहा, जिसने कमाई को सहारा दिया.
कुल आय में हल्की गिरावट
जहां मुनाफा बढ़ा, वहीं बैंक की कुल आय में मामूली गिरावट दर्ज की गई. मार्च तिमाही में कुल आय घटकर 36,319 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल 36,705 करोड़ रुपये थी. यह संकेत देता है कि बैंक को अन्य आय स्रोतों में कुछ दबाव का सामना करना पड़ा.
ब्याज आय ने दिया सहारा
पीएनबी की ब्याज से कमाई में वृद्धि देखने को मिली. तिमाही के दौरान ब्याज आय बढ़कर 32,157 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 31,989 करोड़ रुपये थी. यह वृद्धि बैंक के कोर ऑपरेशंस की मजबूती को दर्शाती है.
बैड लोन में सुधार, एसेट क्वालिटी मजबूत
बैंक की एसेट क्वालिटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.
1. ग्रॉस NPA घटकर 2.95 प्रतिशत रहा (पहले 3.95 प्रतिशत)
2. नेट NPA घटकर 0.29 प्रतिशत रहा (पहले 0.4 प्रतिशत)
यह दिखाता है कि बैंक ने अपने खराब कर्ज यानी बैड लोन को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया है.
निवेशकों के लिए डिविडेंड का तोहफा
पीएनबी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹3 प्रति शेयर डिविडेंड देने की सिफारिश की है. हालांकि, अंतिम मंजूरी बैंक की वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की स्वीकृति के बाद ही मिलेगी.
तिमाही नतीजे बताते हैं कि PNB ने मुनाफे और एसेट क्वालिटी दोनों मोर्चों पर सुधार किया है. हालांकि, कुल आय में गिरावट एक ऐसा पहलू है जिस पर आगे नजर रखनी होगी. कुल मिलाकर, बैंक की परफॉर्मेंस स्थिरता और सुधार का संकेत देती है, जो निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर सकती है.
एक ओर जहाँ फाइनेंस लीडरशिप और एंटरप्राइज लीडरशिप के बीच की सीमा पूरी तरह समाप्त हो रही है. वहीं, CFO की भूमिका के भविष्य को नए सिरे से परिभाषित करने के उद्देश्य से भारत के टॉप फाइनेंस लीडर्स 8 से 10 मई तक लखनऊ में एकत्र होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
BW बिजनेसवर्ल्ड को यह घोषणा करते हुए गर्व है कि 'The Future Finance Office' का दूसरा संस्करण 8 से 10 मई 2026 तक द सेंट्रम, लखनऊ में आयोजित किया जाएगा. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. जो इस आयोजन को न केवल राजनीतिक महत्व देगा बल्कि यह भी संकेत देगा कि राज्य भारत के वित्तीय नेतृत्व संवाद के केंद्र में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है.
2021 में BW बिजनेसवर्ल्ड ने एक प्रवृत्ति की भविष्यवाणी की थी कि CFO अपनी एंटरप्राइज-व्यापी दृश्यता और रणनीतिक नियंत्रण के कारण तेजी से शीर्ष नेतृत्व पदों तक पहुंचेंगे. यह भविष्यवाणी सही साबित हुई है. आज CFO केवल संख्याओं के संरक्षक नहीं हैं बल्कि CEO, बोर्ड सदस्य और संगठनात्मक दिशा तय करने वाले प्रमुख नेता बन चुके हैं. The Future Finance Office इसी विकसित भूमिका को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसका दूसरा संस्करण इसी मिशन को और अधिक सशक्त बनाता है.
सम्मेलन के बारे में
नवंबर 2025 में आयोजित पहले संस्करण में भारत की सबसे बड़ी कंपनियों के 70 वित्तीय नेताओं ने भाग लिया था. जिनका संयुक्त राजस्व 2,000 करोड़ रुपये से अधिक था. इस आयोजन को अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. उसी आधार पर और प्रतिभागियों से मिले प्रत्यक्ष फीडबैक के आधार पर दूसरा संस्करण अधिक परिष्कृत एजेंडा, व्यापक दायरा और एक महत्वपूर्ण प्रश्न के साथ लौट रहा है. आधुनिक वित्त विभाग खुद को संरचनात्मक, तकनीकी और रणनीतिक रूप से भविष्य के लिए कैसे तैयार करे.
सभी सत्र पूरी तरह इंटरैक्टिव होंगे और वित्तीय नेताओं द्वारा ही संचालित किए जाएंगे. हर प्रतिभागी योगदानकर्ता होगा केवल दर्शक नहीं. यह सम्मेलन केवल विचार नहीं देगा बल्कि ऐसे व्यावहारिक फ्रेमवर्क तैयार करेगा जिन्हें प्रतिभागी अपने संगठनों में लागू कर सकें.
एजेंडा और प्रमुख सत्र
दूसरा संस्करण एक समृद्ध और व्यावहारिक एजेंडा पर आधारित होगा. जिसमें मैक्रोइकोनॉमिक्स और भारत की भू-राजनीतिक स्थिति, वित्तीय कार्य में तकनीक और एआई, डिजिटल फाइनेंस ऑफिस, विनियमन और गवर्नेंस, फंडरेजिंग, और ESG एवं स्थिरता जैसे विषय शामिल होंगे. ये केवल पैनल चर्चा नहीं हैं बल्कि CFO और वित्तीय नेताओं द्वारा संचालित कार्य सत्र हैं. जो वास्तविक अनुभव पर आधारित हैं.
प्रतिष्ठित वक्ता
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन देंगे, जिसमें वह शासन, विकास और वित्तीय नेतृत्व के बीच संबंध पर नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे. विशेष रूप से उस समय जब उत्तर प्रदेश भारत के प्रमुख निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर विशेष संबोधन देंगी, जिसमें वह 2026 और उससे आगे की वित्तीय रणनीति को आकार देने वाले मैक्रोइकोनॉमिक परिदृश्य पर अपना विश्लेषण प्रस्तुत करेंगी.
अदफैक्टर्स PR के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक मदन बहल मुख्य भाषण देंगे, जिसमें वे यह विश्लेषण करेंगे कि तेजी से बदलते सूचना युग में वित्तीय नेताओं को संचार, प्रतिष्ठा और विश्वास की संरचना को कैसे संभालना चाहिए.
भाग लेने वाले संगठन
दूसरे संस्करण में भारत की प्रमुख कंपनियों के CFO और सीनियर फाइनेंस लीडर्स शामिल होंगे, जो विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, वित्तीय सेवाओं, नवीकरणीय ऊर्जा, तकनीक, एफएमसीजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगे. भाग लेने वाले संगठनों में गोदरेज एंड बॉयस, फीनिक्स मिल्स, टीवीएस सुंदरम इंडस्ट्रीज, आदित्य बिड़ला कैपिटल, आदित्य बिड़ला केमिकल, ऑलकार्गो, आनंद ग्रुप, एपीएल अपोलो ट्यूब्स, बायर क्रॉपसाइंस, बायर फार्मास्यूटिकल्स, बीपीटीपी, कैडिला फार्मास्यूटिकल्स, डॉ. लाल पैथलैब्स, ईकॉम एक्सप्रेस, इमामी, एप्सिलॉन कार्बन, अर्न्स्ट एंड यंग ग्लोबल डिलीवरी सर्विसेज, अर्न्स्ट एंड यंग सर्विसेज, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, जुबिलेंट फार्मोवा, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, मैनकाइंड फार्मा, प्राज इंडस्ट्रीज, रेमंड, रॉकमैन इंडस्ट्रीज (हीरो ग्रुप), सनसेरा इंजीनियरिंग, सीमेंस एनर्जी इंडिया, स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी, सायजीन इंटरनेशनल, टाटा मेडिकल एंड डायग्नॉस्टिक्स, उमेेश मोदी ग्रुप, अपोलो टायर्स, हीरो एंटरप्राइज, गोल्डीसोलर, मारुति सुजुकी इंडिया, स्पंदना सूर्ति फाइनेंस, प्रोसीमार्ट, बालाजी वेफर्स, क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज, वर्से इनोवेशन, वेल्सपुन कॉर्प, सेंचुरी प्लाईबोर्ड्स इंडिया, और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज शामिल हैं.
आयोजन विवरण
सम्मेलन: The Future Finance Office, द्वितीय संस्करण
दिन: 8–10 मई, 2026
स्थान: द सेंट्रम, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मुख्य अतिथि: बृजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
वेबसाइट: bwevents.co.in/bw/the-future-finance-office-2026/
साझेदारी संबंधी जानकारी
अर्पणा सेनगुप्ता: [aparna@businessworld.in](mailto:aparna@businessworld.in) | +91 9958000128
होशी गसवाला: [hoshie@businessworld.in](mailto:hoshie@businessworld.in) | +91 9811010037
पार्टनर्स
BW बिजनेसवर्ल्ड का The Future Finance Office, द्वितीय संस्करण BW CFO World के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसे Invest UP प्रस्तुत कर रहा है. इस सम्मेलन में SAP Concur डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पार्टनर, CCH Tagetik कॉर्पोरेट परफॉर्मेंस मैनेजमेंट पार्टनर, Adfactors PR कैपिटल मार्केट कम्युनिकेशन पार्टनर और SalarySe फाइनेंशियल वेलनेस पार्टनर के रूप में शामिल हैं.
रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें अब ऊर्जा उद्योग की कार्यक्षमता को तेजी से बदल रही हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक ऊर्जा उद्योग में 2026 के दौरान भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा कारक बनकर उभर सकता है. नई रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाएं ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता बना रही हैं, जबकि ऊर्जा संक्रमण और तकनीकी बदलाव जैसे विषय फिलहाल पीछे छूटते नजर आ रहे हैं.
भू-राजनीति बनेगी सबसे बड़ा प्रभावशाली कारक
कंसल्टेंसी कंपनी GlobalData की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में तेल और गैस उद्योग को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला फैक्टर भू-राजनीतिक तनाव होगा. विशेष रूप से मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष और प्रमुख समुद्री मार्गों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, में संभावित रुकावटें वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्थिर कर सकती हैं. इसके साथ ही अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी उद्योग पर दबाव बनाए रखेगी, हालांकि इसका प्रभाव पहले की तुलना में कुछ कम बताया गया है.
तेल की कीमतों पर बड़ा असर
GlobalData के तेल और गैस विश्लेषक रविंद्र पुराणिक के अनुसार मध्य पूर्व में नए सिरे से बढ़े संघर्ष ने समुद्री यातायात को प्रभावित किया है. इसके चलते मार्च 2026 तक कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तरों की तुलना में लगभग 44 प्रतिशत तक बढ़ गईं. इस स्थिति से निपटने के लिए कई देशों ने आपातकालीन वित्तीय उपाय, ईंधन राशनिंग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख किया है.
ईरान-अमेरिका तनाव के बावजूद अस्थिरता बरकरार
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम हुआ है, लेकिन रिपोर्ट चेतावनी देती है कि स्थायी समाधान न होने के कारण क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रहेगी. मध्य पूर्व में ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान का स्तर ही भविष्य में तेल और गैस निर्यात की रिकवरी की गति तय करेगा.
ऊर्जा संक्रमण और तकनीक भी बने रहेंगे अहम
भू-राजनीतिक जोखिमों के अलावा रिपोर्ट में ऊर्जा क्षेत्र के कई संरचनात्मक और तकनीकी बदलावों का भी उल्लेख किया गया है. इनमें नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज, जैव ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
साथ ही तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और शेल गैस जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोत भी निवेश योजनाओं में महत्वपूर्ण बने हुए हैं.
नई तकनीकें बदल रही हैं उद्योग की दिशा
रिपोर्ट के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें अब ऊर्जा उद्योग की कार्यक्षमता को तेजी से बदल रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जो कंपनियां सही तकनीकी और रणनीतिक बदलाव अपनाएंगी, वे आगे बढ़ेंगी, जबकि बदलाव से चूकने वाली कंपनियां पिछड़ सकती हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत फिर सामने
GlobalData ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधाओं ने फारस की खाड़ी से होने वाले ऊर्जा प्रवाह को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. यह स्थिति दिखाती है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला अभी भी क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति संवेदनशील है, भले ही दुनिया पहले की तुलना में मध्य पूर्वी ऊर्जा पर कम निर्भर हो गई हो.
कंपनियों के लिए रणनीति पर फोकस
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियों को अपने निवेश और रणनीति को प्रमुख वैश्विक रुझानों के अनुसार ढालना होगा. GlobalData की स्ट्रैटेजिक इंटेलिजेंस सॉल्यूशन जैसी रिसर्च प्लेटफॉर्म कंपनियों को भू-राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों को समझने में मदद कर रही हैं.
कुल मिलाकर रिपोर्ट यह संकेत देती है कि 2026 में ऊर्जा उद्योग का फोकस ऊर्जा संक्रमण से ज्यादा “सप्लाई सिक्योरिटी” और भू-राजनीतिक जोखिम प्रबंधन पर रहेगा. हालांकि डीकार्बोनाइजेशन और डिजिटल तकनीकें आगे भी विकसित होती रहेंगी, लेकिन तत्काल निर्णयों में भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा प्रभाव डालता रहेगा.
सोमवार को निफ्टी 122 अंकों की तेजी के साथ 24,119 पर और सेंसेक्स 356 अंकों की बढ़त के साथ 77,269 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
शेयर बाजार के लिए आज यानी मंगलवार का दिन मिश्रित लेकिन सतर्कता भरा रहने वाला है. जहां एक तरफ वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें दबाव बना रही हैं, तो दूसरी ओर हफ्ते की शुरुआत घरेलू बाजार में मजबूती के साथ हुई थी. ऐसे में आज का कारोबार इस बात की परीक्षा होगा कि बाजार सकारात्मक रुझान को बरकरार रख पाता है या वैश्विक दबाव के आगे झुकता है.
आज के कारोबार से पहले GIFT Nifty करीब 165 अंकों की गिरावट के साथ 24,041 के स्तर पर नजर आया. इससे संकेत मिलता है कि बाजार की ओपनिंग दबाव में रह सकती है और शुरुआती घंटों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
कल बाजार ने दिखाई थी मजबूती
हफ्ते की शुरुआत घरेलू बाजार के लिए उत्साहजनक रही. सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए. निफ्टी 122 अंकों की तेजी के साथ 24,119 पर और सेंसेक्स 356 अंकों की बढ़त के साथ 77,269 पर बंद हुआ. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की चौड़ाई मजबूत रही. हालांकि बैंक निफ्टी ऊपरी स्तरों से फिसलकर लगभग सपाट बंद हुआ.
कल के कारोबार में रियल्टी और मेटल सेक्टर में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. फार्मा, पीएसयू और ऑटो इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुए. वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा, जिसने बाजार की कुल तेजी को थोड़ा सीमित किया. यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल सेक्टर-विशेष रणनीति अपना रहे हैं.
रुपया गिरा, बढ़ी चिंता
एक महत्वपूर्ण संकेत करेंसी मार्केट से भी आया. रुपया डॉलर के मुकाबले 18 पैसे कमजोर होकर 95.09 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही ऊंची बनी हुई हैं. इससे महंगाई और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,167–24,209 का स्तर पहला रेजिस्टेंस हो सकता है. इसके ऊपर 24,261–24,333 का दायरा मजबूत बाधा के रूप में देखा जा रहा है. अगर बाजार इन स्तरों को पार करता है तो तेजी को और मजबूती मिल सकती है, वहीं नीचे की ओर दबाव बढ़ने पर गिरावट तेज हो सकती है.
ग्लोबल फैक्टर्स रखेंगे बाजार को प्रभावित
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ती अनिश्चितता निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है, जो अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. इसके अलावा, वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख भी घरेलू बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.
आज का बाजार दिशा के लिहाज से निर्णायक हो सकता है. एक तरफ घरेलू मजबूती के संकेत हैं, तो दूसरी ओर वैश्विक दबाव हावी है. ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर कदम उठाने चाहिए. खासतौर पर करेंसी मूवमेंट, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज बाजार में कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होने वाले हैं, जिन पर निवेशकों की खास नजर रहेगी. इनमें Aadhar Housing Finance, AAVAS Financiers, Ajanta Pharma, Coforge, Dalmia Bharat Sugar, Emcure Pharmaceuticals, Hero MotoCorp, Jammu & Kashmir Bank, Larsen & Toubro, Mahindra & Mahindra, Marico, Punjab National Bank, Raymond, SRF और United Breweries जैसी कंपनियां शामिल हैं. इसके साथ ही प्राइमरी मार्केट में भी हलचल बनी हुई है, जहां OnEMI Technology Solutions का IPO अंतिम दिन में प्रवेश कर चुका है और अब तक इसे सीमित सब्सक्रिप्शन मिला है, जबकि Bagmane Prime Office IPO और Recode Studios IPO दोनों अपने-अपने सब्सक्रिप्शन के दूसरे दिन में पहुंच चुके हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर की प्रमुख कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज लिमिटेड (Associated Alcohols & Breweries Limited) ने केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्लूनल (National Company Law Tribunal) की कोच्चि बेंच से SDF इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए मंजूरी मिल गई है. यह सौदा ₹30.85 करोड़ में पूरा किया जाएगा.
NCLT से मिली औपचारिक स्वीकृति
कंपनी के अनुसार 16 अप्रैल 2026 को पारित आदेश के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इस अधिग्रहण को मंजूरी दी है. अधिग्रहण पूरा होने के बाद SDF Industries Ltd, AABL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाएगी.
केरल बाजार में मजबूत होती पकड़
एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज़ लिमिटेड ने साल 2018 में केरल बाजार में एंट्री की थी और तब से यह कंपनी के लिए एक प्रमुख ग्रोथ मार्केट बन गया है. वर्तमान में कंपनी राज्य के शीर्ष 3 निजी खिलाड़ियों में शामिल है और हर महीने लगभग 1.5 लाख केस की बिक्री दर्ज करती है.
इन-हाउस बॉटलिंग से बढ़ेगी दक्षता
इस अधिग्रहण के जरिए कंपनी केरल में अपनी बॉटलिंग ऑपरेशंस को इन-हाउस लाने की योजना बना रही है. इससे उत्पादन पर बेहतर नियंत्रण, लागत में कमी और ऑपरेशनल दक्षता में सुधार की उम्मीद है.
कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रसन्न केडिया ने कहा कि केरल में कंपनी को खासकर White Brandy से शानदार सफलता मिली है. उन्होंने बताया कि यह अधिग्रहण ऑपरेशनल कंट्रोल बढ़ाने और नए प्रोडक्ट लॉन्च करने में मदद करेगा, साथ ही भविष्य में निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे.
ग्रोथ और नए अवसरों पर फोकस
कंपनी का मानना है कि इस अधिग्रहण से ऑपरेटिंग लीवरेज का फायदा मिलेगा, जिससे मार्जिन में सुधार होगा और लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, अतिरिक्त बॉटलिंग क्षमता का उपयोग कर कंपनी नए राजस्व स्रोत भी तलाशेगी.
सितंबर 2026 से शुरू हो सकती है नई यूनिट
अधिग्रहण के बाद कंपनी इस यूनिट को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करेगी, ताकि गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन किया जा सके. नई सुविधाओं के साथ संचालन सितंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है.
एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रेवरीज लिमिटेड का यह कदम केरल बाजार में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा. SDF इंडस्ट्रीज के अधिग्रहण से कंपनी को उत्पादन, गुणवत्ता और विस्तार योजनाओं में नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे वह देशभर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेगी.