दुहाई डिपो में तैयार सेंटर फॉर इनोवेशन, अपरिमित का निर्माण एडीबी के अर्बन क्लाइमेट चेंज रेजिलिएंस ट्रस्ट फंड के अनुदान से किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
नई दिल्ली: एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के वाइस प्रेसीडेंट शिक्सिन चेन ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के अधिकारियों के साथ दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (Regional Rapid Transport System) कॉरिडोर के दुहाई डिपो में स्थापित सेंटर ऑफ इनोवेशन 'अपरिमित' का उद्घाटन किया. उन्होंने एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह और एडीबी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 82.15 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस हॉल के विभिन्न विकास स्थलों का भी दौरा किया.
दुहाई डिपो में तैयार सेंटर फॉर इनोवेशन, अपरिमित का निर्माण एडीबी के अर्बन क्लाइमेट चेंज रेजिलिएंस ट्रस्ट फंड के अनुदान से किया गया है. एनसीआरटीसी के प्रवक्ता पुनीत वत्स ने बताया कि अपरिमित आरआरटीएस कॉरिडोर के डिजाइन, विकास और संचालन के लिए नवीनतम तकनीकें उपलब्ध कराएगा. नवीनतम तकनीकें जैसे वर्चुअल रिएलिटी, ऑग्मेंटेड रिएलिटी, बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग आदि के लिए अलग-अलग लैब आदि स्थापित किए गए हैं, जिसका उपयोग परिचालन दक्षता के साथ-साथ प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.
इस अवसर पर बोलते हुए, श्री विनय कुमार सिंह ने कहा, “एडीबी जैसे विश्वसनीय भागीदार के साथ, एनसीआरटीसी ने न केवल यात्री-केंद्रित परियोजनाओं की योजना बनाई है और उन्हें लागू कर रही है, बल्कि शहरी परिवहन के क्षेत्र में समग्र क्षमता विकास का निरंतर नेतृत्व कर रहा है. आरआरटीएस का आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव दीर्घकालिक है. एनसीआरटीसी द्वारा उन्नत तकनीकों को अपनाना इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.”
इन स्टेशनों का किया दौरा
चेन ने सराय काले खां और आनंद विहार स्टेशन का दौरा करते हुए मल्टी-मोडल-इंटीग्रेशन (एमएमआई) के लिए एनसीआरटीसी द्वारा किए जा रहे कई प्रयासों की सराहना की. एमएमआई के मूल सिद्धांत का पालन करते हुए, इन स्टेशनों को सार्वजनिक परिवहन के विभिन्न मौजूदा साधनों के साथ सहजता से जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है. ये इन अत्यधिक कैपिटल-इंटेन्सिव परियोजनाओं के लिए जरूरी बेहतर राइडरशिप और लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए नेटवर्कों का एक विशाल नेटवर्क तैयार करेगा.
देखा टनल बोरिंग मशीन का कार्य
वीपी, एडीबी ने आनंद विहार में 'सुदर्शन' (टनल बोरिंग मशीन) के कामकाज को भी देखा, जहां वर्तमान में तीन टीबीएम बोरिंग टनल हैं. यात्रियों की आवाजाही में आसानी के लिए यह स्टेशन रणनीतिक रूप से प्रचलित परिवहन साधनों के करीब स्थित है. गणमान्य व्यक्तियों ने नए युग के अनुप्रयुक्त विज्ञान, रणनीतिक योजना और आधुनिक रणनीतियों के उपयोग के माध्यम से सभी चुनौतियों पर काबू पाने के लिए एनसीआरटीसी के प्रयासों को स्वीकार किया।
चेन ने अत्याधुनिक सेंटर फॉर इनोवेशन, 'अपरिमिट' का उद्घाटन किया, जिसे एडीबी के सिटी लोकल वेदर चेंज रेजिलिएशन बिलीफ फंड से अनुदान द्वारा समर्थित किया गया है.
आधुनिक डिजिटल एप्लाइड साइंस का उपयोग करके एनसीआरटीसी का लक्ष्य परिचालन दक्षता को बढ़ाना, ग्राहकों के साथ जुड़ाव को सुव्यवस्थित करना और सुधारना है और संगठन को हमेशा बदलते व्यवसाय की गतिशीलता के प्रति अधिक चुस्त और जागरूक बनाना है. ये बेहतर अनुप्रयुक्त विज्ञान न केवल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में क्रांति लाने जा रहे हैं बल्कि यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्यबल तकनीकी रूप से विश्व स्तर पर बराबर है. एनसीआरटीसी और एडीबी के बीच साझेदारी समृद्ध, समावेशी, लचीला, और टिकाऊ एशिया और प्रशांत तक पहुंचने के लिए एडीबी के समर्पण के अनुरूप है.
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फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए 2026 के अंत तक 1,000 आउटलेट्स का लक्ष्य, 10 लाख वर्गफुट से ज्यादा वेयरहाउसिंग क्षमता उपलब्ध कराएगी कंपनी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
फ्लिपकार्ट (Flipkart Group) की सप्लाई चेन शाखा Ekart Logistics ने अपने पैन-इंडिया लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को देशभर के कारोबारियों के लिए खोलने का ऐलान किया है. अब MSME, D2C ब्रांड्स, FMCG कंपनियां और अन्य उद्यम Flipkart Group को सपोर्ट करने वाले Ekart के लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और डिलीवरी नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकेंगे. कंपनने बताया कि इस विस्तार के तहत नया फ्रेंचाइजी मॉडल और डेडिकेटेड वेयरहाउसिंग सुविधाएं शुरू की गई हैं. इसके जरिए छोटे-बड़े सभी कारोबारी Ekart की तकनीक, देशव्यापी पहुंच और फुलफिलमेंट नेटवर्क का इस्तेमाल कर अपने कारोबार को तेजी से बढ़ा सकेंगे.
MSME और छोटे कारोबारियों को मिलेगा राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
Ekart का फ्रेंचाइजी मॉडल MSME और छोटे कारोबारियों को बिना खुद का लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए देशभर में सामान पहुंचाने की सुविधा देगा. कंपनी ने बताया कि इस नेटवर्क की शुरुआत सूरत, मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु समेत प्रमुख शहरों में 300 से ज्यादा आउटलेट्स के साथ की गई है. Ekart का लक्ष्य 2026 के अंत तक इस संख्या को बढ़ाकर 1,000 आउटलेट्स तक पहुंचाना है. इस नेटवर्क के जरिए कारोबारियों को रियल-टाइम शिपमेंट ट्रैकिंग, AI आधारित एड्रेस रिजॉल्यूशन और Ekart की स्थापित डिलीवरी क्षमताओं का लाभ मिलेगा.
ब्रांड्स के लिए 10 लाख वर्गफुट से ज्यादा वेयरहाउसिंग सुविधा
Ekart ने बताया कि कंपनियां अब उसकी 10 लाख वर्गफुट से ज्यादा की डेडिकेटेड वेयरहाउसिंग क्षमता का इस्तेमाल कर सकेंगी. इन सुविधाओं को दिल्ली-NCR, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों में और बढ़ाया जा रहा है.
इन वेयरहाउसिंग सुविधाओं का उद्देश्य ग्राहकों के करीब इन्वेंट्री रखने के जरिए डिलीवरी समय को कम करना है. साथ ही AI आधारित डिमांड फोरकास्टिंग की मदद से कंपनियां अपने स्टॉक को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगी और अलग-अलग क्षेत्रों में सप्लाई प्लान कर पाएंगी.
B2B ग्राहकों के लिए भी विशेष सुविधाएं
Ekart ने B2B ग्राहकों के लिए देशभर में डेडिकेटेड हब नेटवर्क तैयार किया है, जो बल्क फ्रेट और कंसोलिडेटेड फ्रेट ऑपरेशन को सपोर्ट करता है. यह नेटवर्क ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, FMCG और रिटेल जैसे सेक्टरों को सेवाएं उपलब्ध कराता है. इसके अलावा कंपनी Open Box Delivery जैसी सुविधाएं भी दे रही है, जिसमें ग्राहक डिलीवरी के समय उत्पाद की जांच कर सकते हैं. वहीं Any Day Delivery सुविधा के जरिए ग्राहकों को डिलीवरी शेड्यूल चुनने की अधिक सुविधा मिलेगी.
Ekart के चीफ बिजनेस ऑफिसर मणि भूषण ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में हजारों रिटेल, MSME, D2C और ग्लोबल ब्रांड्स ने भारत में अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए Ekart के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और तकनीक पर भरोसा किया है. अब हम फ्रेंचाइजी मॉडल और एंड-टू-एंड फुलफिलमेंट क्षमताओं के जरिए अपने नेटवर्क को और अधिक व्यवसायों तक पहुंचा रहे हैं." उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य भारत के हर व्यवसाय को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है, ताकि वे तेजी से विस्तार कर सकें और प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें.
Ekart वर्तमान में देश के 95% से ज्यादा पिनकोड तक पहुंच रखता है और 80 से अधिक प्रोडक्ट कैटेगरी में सेवाएं उपलब्ध कराता है. इस विस्तार के बाद देशभर के कारोबारी Ekart के बड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल कर ग्राहकों तक ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से पहुंच बना सकेंगे.
सरकार ने फर्जी GST रजिस्ट्रेशन के मामलों की जानकारी भी साझा की. वित्त वर्ष 2025-26 में जाली PAN और आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों के जरिए बनाए गए 1,517 नकली GST रजिस्ट्रेशन पकड़े गए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्रीय वस्तु सेवा कर (GST) अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी के 30,162 मामलों का पता लगाया है. इन मामलों में करीब ₹74,782 करोड़ की टैक्स चोरी शामिल है. सरकार के मुताबिक, इस दौरान 358 लोगों को गिरफ्तार किया गया. ITC फ्रॉड के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र और गुजरात से सामने आए, जहां हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पकड़ी गई.केंद्रीय GST अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है.
राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इस अवधि में ITC धोखाधड़ी के 30,162 मामलों का पता लगाया गया, जिनमें कुल ₹74,782 करोड़ की हेराफेरी शामिल थी. इन मामलों में 358 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
महाराष्ट्र और गुजरात में सबसे ज्यादा मामले
ITC फ्रॉड के मामलों में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा. राज्य में ₹18,320 करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़े 9,629 मामले दर्ज किए गए. वहीं गुजरात में ₹12,633 करोड़ के 12,511 मामले सामने आए. वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि ये मामले कई क्षेत्रों में पाए गए हैं, जिनमें लोहा और स्टील, कपड़ा, प्लास्टिक, कागज उत्पाद, प्लाईवुड, सीमेंट, तांबा समेत कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर शामिल हैं. इसके अलावा वर्क कॉन्ट्रैक्ट सर्विस, मैनपावर सप्लाई, रियल एस्टेट और अन्य सर्विस सेक्टर में भी ITC धोखाधड़ी के मामले मिले हैं.
तीन साल में तेजी से बढ़े ITC फ्रॉड
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में ITC धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
1. वित्त वर्ष 2025 में ₹58,773 करोड़ के 15,283 मामलों का खुलासा हुआ और 178 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
2. वित्त वर्ष 2024 में ₹36,373 करोड़ से जुड़े 9,190 मामलों का पता चला और 182 गिरफ्तारियां हुईं.
फर्जी GST रजिस्ट्रेशन से ₹9,940 करोड़ की धोखाधड़ी
सरकार ने फर्जी GST रजिस्ट्रेशन के मामलों की जानकारी भी साझा की. वित्त वर्ष 2025-26 में जाली PAN और आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों के जरिए बनाए गए 1,517 नकली GST रजिस्ट्रेशन पकड़े गए. इनसे करीब ₹9,940 करोड़ के ITC फ्रॉड का पता चला. इन मामलों में 60 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि सात आरोपी अभी फरार हैं.
इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 में 3,977 फर्जी GST रजिस्ट्रेशन पकड़े गए थे, जिनमें ₹13,109 करोड़ की ITC धोखाधड़ी शामिल थी. वहीं वित्त वर्ष 2023-24 में 5,699 फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिए ₹15,085 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा हुआ था. सरकार ने कहा कि ITC धोखाधड़ी सिर्फ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सर्विस इंडस्ट्री तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है.
भारत के FTA साझेदार देशों में ASEAN क्षेत्र को सबसे ज्यादा निर्यात किया गया. वित्त वर्ष 2025-26 में ASEAN देशों को भारत का निर्यात 38.42 अरब डॉलर रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के निर्यात क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में देश का कुल निर्यात पहली बार 863.1 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया. इसमें वस्तुओं (Merchandise) का निर्यात 441.8 अरब डॉलर और सेवाओं (Services) का निर्यात 421.3 अरब डॉलर रहा. सरकार के अनुसार, बढ़ते मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के जरिए भारत को नए बाजारों तक पहुंच मिली है, जिससे UAE, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश प्रमुख निर्यात साझेदार बनकर उभरे हैं और देश के वैश्विक व्यापार को मजबूती मिली है.
ASEAN, UAE और UK बने प्रमुख बाजार
भारत के FTA साझेदार देशों में ASEAN क्षेत्र को सबसे ज्यादा निर्यात किया गया. वित्त वर्ष 2025-26 में ASEAN देशों को भारत का निर्यात 38.42 अरब डॉलर रहा. इसके बाद UAE के साथ भारत के व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत निर्यात 37.36 अरब डॉलर तक पहुंच गया.
SAFTA देशों को भारत का निर्यात 25.77 अरब डॉलर रहा. वहीं, भारत और ब्रिटेन के बीच 15 जुलाई 2026 से लागू हुए Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 13.44 अरब डॉलर का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट दर्ज किया गया.
इसके अलावा सिंगापुर को 11.86 अरब डॉलर, जबकि नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों को भी भारत के निर्यात में मजबूत वृद्धि देखने को मिली.
FTA से बढ़ा निर्यात विविधीकरण
सरकार के अनुसार, हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली टैरिफ छूट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. इससे निर्यातकों की भागीदारी बढ़ी है और भारतीय उत्पादों की पहुंच नए बाजारों तक बनी है.
भारत-UAE CEPA, जो मई 2022 से लागू है, के तहत अब तक 4.45 लाख से ज्यादा Certificate of Origin जारी किए जा चुके हैं. UAE को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की टैरिफ लाइनों की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 8,053 हो गई है. इस दौरान UAE को भारत का निर्यात 37.3 अरब डॉलर रहा.
इसी तरह भारत-ऑस्ट्रेलिया Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) के तहत दिसंबर 2022 से अब तक 2.73 लाख Certificate of Origin जारी किए गए हैं. ऑस्ट्रेलिया को निर्यात की जाने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या 5,396 से बढ़कर 5,668 हो गई है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात 7.28 अरब डॉलर रहा.
ओमान और EFTA समझौते से भी उम्मीदें
भारत-मॉरीशस CECPA के तहत भी भारतीय निर्यात उत्पादों की संख्या में विस्तार हुआ है. वहीं, हाल में लागू हुए भारत-ओमान CEPA का शुरुआती असर भी दिखाई देने लगा है. जून 2026 में ओमान को भारत का निर्यात महीने-दर-महीने आधार पर 54.7% और सालाना आधार पर 189.6% बढ़ा है.
इसके अलावा भारत-EFTA Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) के तहत अक्टूबर 2025 में समझौता लागू होने के बाद अब तक 7,885 Certificate of Origin जारी किए जा चुके हैं.
श्रम आधारित उद्योगों को मिलेगा फायदा
सरकार ने कहा कि भारत के हालिया व्यापार समझौतों का उद्देश्य घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है. UAE, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और EFTA के साथ हुए समझौते से टेक्सटाइल और परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, कालीन, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद जैसे रोजगार आधारित क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
सरकार के मुताबिक, इन समझौतों से रोजगार आधारित निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत होगी और भारतीय कंपनियां वैश्विक सप्लाई चेन से ज्यादा बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगी.
निर्यात निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म मजबूत
केंद्र सरकार ने कहा कि निर्यात प्रदर्शन की निगरानी के लिए वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), निर्यात संवर्धन परिषदों, कमोडिटी बोर्डों, राज्य सरकारों, जिलों और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है.
निर्यातकों की मदद के लिए सरकार ने Trade e-Connect और Trade Intelligence and Analytics (TIA) Portal जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत किया है. इन प्लेटफॉर्म के जरिए बाजार से जुड़ी जानकारी, टैरिफ डेटा, Rules of Origin, व्यापार विश्लेषण और खरीदार-विक्रेता से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है.
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने और भारत की निर्यात आधारित विकास रणनीति को आगे बढ़ाने पर है.
कोयले की ढुलाई और निकासी क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनी ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा खर्च किया है. पहली तिमाही में रेलवे साइडिंग और रेल कॉरिडोर के विकास पर ₹754 करोड़ खर्च किए गए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी Coal India Limited (CIL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पूंजीगत खर्च में मजबूत प्रदर्शन किया है. कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 के दौरान ₹3,399 करोड़ का कैपेक्स किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16% अधिक है. कंपनी के मुताबिक, यह खर्च उसके पूरे वित्त वर्ष के ₹16,500 करोड़ के कैपेक्स लक्ष्य का 20.6% है.
Coal India ने बताया कि पहली तिमाही में उसके कुल कैपेक्स का सबसे बड़ा हिस्सा जमीन अधिग्रहण और उससे जुड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) गतिविधियों पर खर्च हुआ. इस मद में कंपनी ने ₹804 करोड़ का निवेश किया, जो कुल तिमाही खर्च का करीब एक-चौथाई है.
जमीन अधिग्रहण पर सबसे ज्यादा जोर
कंपनी ने कहा कि खनन परियोजनाओं के लिए समय पर जमीन अधिग्रहण बेहद महत्वपूर्ण है. पर्याप्त कोयला भंडार उपलब्ध होने के बावजूद जमीन की उपलब्धता के बिना नई परियोजनाएं शुरू करना या मौजूदा परियोजनाओं का विस्तार करना संभव नहीं होता. वित्त वर्ष 2026-27 में Coal India ने जमीन अधिग्रहण और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ₹4,173 करोड़ का प्रावधान किया है, जो उसके सभी कैपेक्स मदों में सबसे अधिक है.
कोयला निकासी ढांचे पर बढ़ा निवेश
कोयले की ढुलाई और निकासी क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनी ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा खर्च किया है. पहली तिमाही में रेलवे साइडिंग और रेल कॉरिडोर के विकास पर ₹754 करोड़ खर्च किए गए.
इसके अलावा कोयला हैंडलिंग प्लांट (CHP), साइलो, वे-ब्रिज और सड़कों जैसी सुविधाओं पर ₹195 करोड़ का निवेश किया गया. इस तरह कोयला निकासी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल खर्च ₹949 करोड़ रहा.
मशीनरी और उपकरणों पर ₹819 करोड़ खर्च
Coal India ने प्लांट और मशीनरी से जुड़े कामों पर पहली तिमाही में ₹819 करोड़ खर्च किए. इसमें भारी अर्थ मूविंग मशीनरी (HEMM) की खरीद, वॉशरी के निर्माण और विस्तार तथा अन्य उपकरणों पर किया गया निवेश शामिल है.
कंपनी के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण, कोयला निकासी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लांट एवं मशीनरी पर किया गया खर्च उसके कुल पहली तिमाही कैपेक्स का करीब 75% हिस्सा है.
रिन्यूएबल एनर्जी में भी बढ़ा निवेश
कोयला कारोबार के साथ-साथ कंपनी अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने पर भी काम कर रही है. पहली तिमाही में Coal India ने सोलर प्रोजेक्ट्स पर ₹278 करोड़ खर्च किए, जबकि जॉइंट वेंचर्स में उसका निवेश ₹207 करोड़ रहा. वित्त वर्ष 2025-26 में Coal India ने ₹16,000 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹19,607 करोड़ का रिकॉर्ड कैपेक्स हासिल किया था.
पहली तिमाही में मुनाफा स्थिर
Coal India ने जून 2026 में समाप्त पहली तिमाही में ₹8,849 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग स्थिर रहा. वहीं, कंपनी की कुल आय 8% बढ़कर ₹48,295 करोड़ पहुंच गई.
अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित देशों में भी ‘मेड इन इंडिया’ खिलौनों की मांग बढ़ी है. यह बदलाव भारत के खिलौना निर्माण क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता सुधार को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का खिलौना उद्योग पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव से गुजर रहा है. कभी विदेशी खिलौनों से भरे रहने वाले भारतीय बाजार में अब घरेलू कंपनियों के बनाए खिलौनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है. लोकसभा में सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत के खिलौना निर्यात में 89.1% की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, इसी अवधि में खिलौनों के आयात में करीब 37.5% की कमी आई है.
आज भारत में बने खिलौने दुनियाभर के बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं. अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित देशों में भी ‘मेड इन इंडिया’ खिलौनों की मांग बढ़ी है. यह बदलाव भारत के खिलौना निर्माण क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता सुधार को दर्शाता है.
गुणवत्ता सुधार से बदली तस्वीर
कुछ साल पहले तक भारतीय बाजार में बड़ी संख्या में कम गुणवत्ता वाले विदेशी खिलौनों की बिक्री होती थी. वर्ष 2019 में सरकार की जांच में सामने आया था कि बाजार में उपलब्ध केवल करीब 33% खिलौने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतर रहे थे. इसके बाद सरकार ने खिलौनों के लिए सख्त गुणवत्ता नियम लागू किए.
इन कदमों का असर अब दिखाई दे रहा है. सरकार के अनुसार, देश में उपलब्ध करीब 95% खिलौने अब गुणवत्ता मानकों को पूरा कर रहे हैं. इससे न केवल घरेलू निर्माताओं को फायदा हुआ है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और बेहतर उत्पाद मिल रहे हैं.
भारत मंडपम में दिखी घरेलू उद्योग की ताकत
जुलाई 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित टॉय बिज इंटरनेशनल प्रदर्शनी में भारतीय खिलौना उद्योग की बढ़ती ताकत देखने को मिली. इस आयोजन में 400 से अधिक भारतीय कंपनियों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए. वहीं, 40 से ज्यादा देशों के खरीदारों और कारोबारियों ने इसमें हिस्सा लिया. इस तरह के आयोजनों से भारतीय खिलौना निर्माताओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है और निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है.
सरकारी नीतियों से मिला सहारा
भारत के खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं. विदेशी खिलौनों के आयात पर कड़े नियम और बढ़ी हुई कस्टम ड्यूटी से घरेलू कंपनियों को प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिला. इसके अलावा, स्थानीय निर्माताओं को प्रोत्साहन, गुणवत्ता प्रमाणन और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया. नई शिक्षा नीति में भी भारतीय खिलौनों और स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से भारत वैश्विक खिलौना बाजार में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है.
मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 69.86 अंक यानी 0.09% फिसलकर 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10.60 अंक यानी 0.04% की गिरावट के साथ 23,985.35 पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत आज मजबूती के संकेतों के साथ हो सकती है. GIFT Nifty करीब 130 अंक की बढ़त दिखा रहा है, जबकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा तेजी आई है. मंगलवार को घरेलू बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ था, लेकिन आज निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले, कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजों, नए IPO और चुनिंदा शेयरों से जुड़े कॉरपोरेट घटनाक्रम पर रहेगी, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार के बाद मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ. बीएसई सेंसेक्स 69.86 अंक यानी 0.09% फिसलकर 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 10.60 अंक यानी 0.04% की गिरावट के साथ 23,985.35 पर बंद हुआ. रुपये में हल्की मजबूती रही और यह डॉलर के मुकाबले 95.8450 पर बंद हुआ. कारोबार में आईटी शेयरों ने बाजार को सहारा दिया, जबकि FMCG शेयरों में बिकवाली हावी रही. हिंदुस्तान यूनिलीवर का शेयर करीब 7% टूट गया, जबकि TCS, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और HCL Tech जैसे आईटी शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में हल्की बढ़त रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ.
GIFT Nifty ने दिए मजबूत संकेत
आज बाजार खुलने से पहले GIFT Nifty करीब 132 अंक की बढ़त के साथ 24,231 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जिससे घरेलू बाजार में सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद बढ़ गई है. एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला. जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का Kospi कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि हांगकांग का Hang Seng बढ़त में रहा. मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में भी मिश्रित रुख रहा. Dow Jones बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि Nasdaq Composite में हल्की गिरावट दर्ज की गई.
तेल में उछाल, फेड के फैसले पर नजर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 4% से अधिक की तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड 87.72 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले से पहले निवेशक सतर्क हैं. CME FedWatch Tool के अनुसार, करीब 70% ट्रेडर्स को उम्मीद है कि इस बार फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. फेड के फैसले का असर वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है.
तिमाही नतीजे और IPO पर रहेगा फोकस
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज Adani Enterprises, Adani Ports, Asian Paints, Dabur India, Eicher Motors, KPIT Technologies, Piramal Pharma, Syngene International, Waaree Energies, Colgate-Palmolive India और Redington समेत कई बड़ी कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इसके अलावा Manipal Health Enterprises IPO और H.R. Hygiene Products IPO आज निवेश के लिए खुलेंगे. Poojaa Precision Engg IPO के सब्सक्रिप्शन का तीसरा दिन होगा, जबकि Propshop Events & Exhibitions IPO और Advance Technoforge IPO में निवेश का आज आखिरी मौका रहेगा.
इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे. रेल विकास निगम (RVNL) को ईस्ट सेंट्रल रेलवे से ₹358.97 करोड़ का ऑर्डर मिला है, जबकि RailTel को ओडिशा पुलिस से ₹43.90 करोड़ का वर्क ऑर्डर हासिल हुआ है. ONGC के बोर्ड ने MRPL के लिए सऊदी अरामको के पक्ष में 500 मिलियन डॉलर की पैरेंट कंपनी गारंटी को मंजूरी दी है. LIC ने शतमन्यु श्रीवास्तव को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) नियुक्त किया है, वहीं केंद्र सरकार ने NTPC के CMD गुरदीप सिंह के कार्यकाल को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. Graphite India पर अमेरिकी काउंटरवेलिंग ड्यूटी के फैसले का असर दिख सकता है, जबकि Raajmarg Infra InvIT और Gandhar Oil भी ब्लॉक डील्स के चलते निवेशकों की नजर में रहेंगे.
आज किन ट्रिगर्स से तय होगी बाजार की चाल
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज वैश्विक संकेतों के साथ पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेड का ब्याज दर फैसला, कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे, IPO गतिविधियां और चुनिंदा कंपनियों से जुड़े कॉरपोरेट अपडेट बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. ऐसे में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
मई के 5% के मुकाबले जून में औद्योगिक वृद्धि तेज, बाजार अनुमान 5.6% से भी बेहतर रहा आंकड़ा; इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और ऑटो सेक्टर ने दिया बड़ा योगदान
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की औद्योगिक गतिविधियों में जून 2026 में जोरदार तेजी देखने को मिली है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 7.3 फीसदी की दर से बढ़ा है. यह वृद्धि मई में दर्ज 5 फीसदी की ग्रोथ के मुकाबले काफी बेहतर है और बाजार के 5.6 फीसदी के अनुमान से भी ऊपर रही है.
औद्योगिक उत्पादन में इस तेज उछाल के पीछे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन और बिजली व गैस आपूर्ति क्षेत्र में आई तेजी प्रमुख कारण रहे. आंकड़े बताते हैं कि देश में घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियों में लगातार मजबूती बनी हुई है.
मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर ने संभाली कमान
NSO के आंकड़ों के अनुसार, जून में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही. वहीं, बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र ने 10.6 फीसदी की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की. इसके अलावा वाटर सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर में 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि खनन और उत्खनन (Mining & Quarrying) क्षेत्र में 1 फीसदी की मामूली वृद्धि दर्ज की गई.
23 में से 19 उद्योग समूहों में रही बढ़त
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो जून 2026 में 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 19 ने जून 2025 की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की. इस दौरान इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट निर्माण क्षेत्र ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया और इसमें 34 फीसदी की रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज की गई. इसके बाद मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर उद्योग में 17.5 फीसदी की वृद्धि रही. वहीं, फूड प्रोडक्ट सेक्टर में 10.8 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
मजबूत घरेलू मांग का संकेत
बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह ने कहा कि जून में 7.3 फीसदी की IIP ग्रोथ बाजार की उम्मीदों से बेहतर रही है. उनके मुताबिक, यह आंकड़ा दिखाता है कि देश में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी जारी है.
उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, कैपिटल गुड्स और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ोतरी देश में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश माहौल का संकेत देती है.
नई IIP सीरीज के आधार पर जारी हुए आंकड़े
जून के IIP आंकड़े सरकार की नई सीरीज पर आधारित हैं, जिसमें आधार वर्ष (Base Year) 2022-23 रखा गया है. नई व्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन की गणना के लिए पहले इस्तेमाल किए जाने वाले थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Output PPI) को शामिल किया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े पहले की तुलना में ज्यादा सटीक, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो गए हैं.
स्काईरूट के विक्रम-1 मिशन की सफलता के बाद स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंटीग्रेशन पर बढ़ा फोकस, भारत के निजी स्पेस सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत जल्द ही अपने अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों (Space Launch Vehicles) में देश में बने सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल करेगा. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को निजी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के प्रमुखों से मुलाकात के बाद इसकी जानकारी दी.
वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “‘मेड इन भारत’ चिप्स हमारे रॉकेट्स के लिए... जल्द ही!” यह घोषणा स्काईरूट के विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 की सफलता के बाद आई है, जिसने 18 जुलाई को सफलतापूर्वक कक्षा (Orbit) में प्रवेश किया था. यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट मिशन था.
भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
अश्विनी वैष्णव की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी ने इसके लिए सरकार के सुधारों, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन के प्रति प्रतिबद्धता को अहम बताया.
स्काईरूट ने कहा, "भारत से वैश्विक स्तर की स्पेस टेक्नोलॉजी तैयार करने में योगदान देना हमारे लिए गर्व की बात है. हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब भारत में बने चिप्स हमारे रॉकेट्स में उड़ान भरेंगे."
पीएम मोदी ने भी की स्काईरूट के संस्थापकों से मुलाकात
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों पवन चंदना और नागा भरत डाका से मुलाकात की थी. इस दौरान विक्रम-1 मिशन की सफलता और भारत के निजी स्पेस सेक्टर के भविष्य पर चर्चा हुई.
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट कर इस मुलाकात को "बेहतरीन बातचीत" बताया. उन्होंने कहा कि विक्रम-1 की सफलता चर्चा का प्रमुख विषय रही. उन्होंने स्काईरूट के संस्थापकों की यात्रा और अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य को लेकर उनके विचारों का भी जिक्र किया. मोदी ने कहा, "उनकी ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और सकारात्मक सोच भारत के निजी स्पेस इकोसिस्टम की जीवंतता को दर्शाती है. स्काईरूट की पूरी टीम को शुभकामनाएं."
विक्रम-1 ने रचा नया इतिहास
स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 मिशन 18 जुलाई को सफल रहा था. यह भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट की पहली उड़ान थी. मिशन के दौरान रॉकेट ने अपना अंतिम बर्न पूरा किया और पेलोड को करीब 450 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया.
इस सफलता के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास निजी कंपनियों द्वारा विकसित ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता मौजूद है. विक्रम-1 मिशन को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका
सरकार की अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की नीति के बाद स्काईरूट जैसी कंपनियां भारत के स्पेस इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा रही हैं. स्वदेशी चिप निर्माण और रॉकेट टेक्नोलॉजी के एकीकरण से भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
घरेलू खिलौना विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा. वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, रोजगार सृजन और 'मेड इन इंडिया' खिलौनों की पहुंच मजबूत करने पर रहेगा फोकस
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने भारत के खिलौना उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 2032 तक वैश्विक खिलौना बाजार में भारत की हिस्सेदारी 1.9 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने का लक्ष्य तय किया है. इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए केंद्र ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो घरेलू खिलौना विनिर्माण को मजबूत करने और उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर काम करेगी.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को खिलौना उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान इस पहल की घोषणा की. आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स उद्योग को आवश्यक सहयोग देने के साथ-साथ ऐसे उपायों की पहचान करेगी, जिनसे 2032 तक भारत वैश्विक खिलौना बाजार में 5 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर सके.
छह प्रमुख क्षेत्रों पर होगा फोकस
सरकार की ओर से गठित टास्क फोर्स छह रणनीतिक क्षेत्रों पर काम करेगी. इनमें भारतीय निर्माताओं को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ना, घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना, सप्लाई और वैल्यू चेन की बाधाओं को दूर करना, कुशल कार्यबल और रोजगार के अवसर बढ़ाना, डिजाइन एवं नवाचार को प्रोत्साहन देना तथा कारोबार करने में आसानी को बेहतर बनाना शामिल है.
उद्योग से मजबूत घरेलू इकोसिस्टम बनाने की अपील
पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से उन्नत तकनीक, वैश्विक गुणवत्ता मानकों, गहरे स्थानीयकरण और मजबूत ब्रांड निर्माण के आधार पर व्यापक घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारत के खिलौना उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा.
21,000 से अधिक MSMEs हैं सक्रिय
सरकार के अनुसार, भारत के खिलौना उद्योग में फिलहाल 21,000 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) कार्यरत हैं. इसके अलावा, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त 770 से अधिक स्टार्टअप, करीब 50 टॉय क्लस्टर और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणित 1,800 से अधिक लाइसेंस धारक इस क्षेत्र में सक्रिय हैं.
वैश्विक वैल्यू चेन में बढ़ेगी भारत की भागीदारी
सरकार का मानना है कि नई टास्क फोर्स के गठन से भारतीय खिलौना उद्योग का वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ाव तेज होगा. इससे घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत होगी, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और 'मेड इन इंडिया' खिलौनों की वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी.
Hugging Face साइबर हमले के बाद उठाया कदम. Adobe, Dell, CrowdStrike समेत कई कंपनियां हुईं शामिल, AI सुरक्षा के लिए ओपन-सोर्स टूल्स विकसित किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी चिप निर्माता एनवीडिया (Nvidia) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से 'Open Secure AI Alliance' की शुरुआत की है. यह उद्योग गठबंधन AI सुरक्षा और गवर्नेंस के लिए ओपन-सोर्स टूल्स विकसित और साझा करेगा. हाल ही में Hugging Face पर हुए साइबर हमले के बाद AI एजेंट्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इस पहल की घोषणा की गई है.
यह गठबंधन टेक्नोलॉजी कंपनियों, AI डेवलपर्स और साइबर सिक्योरिटी फर्मों को एक मंच पर लाता है, ताकि ऐसे टूल्स विकसित किए जा सकें जो संगठनों को AI सिस्टम की बेहतर निगरानी और सुरक्षा में मदद करें. यह घोषणा 24 जुलाई को Nvidia, OpenAI और अन्य प्रमुख टेक कंपनियों द्वारा ओपन-वेट AI मॉडल के समर्थन में जारी खुले पत्र के कुछ ही दिनों बाद की गई है.
Adobe, Dell और CrowdStrike समेत कई कंपनियां शामिल
Open Secure AI Alliance के संस्थापक सदस्यों में Adobe, CrowdStrike, Dell Technologies, Hugging Face, Nvidia और अन्य उद्योग भागीदार शामिल हैं. यह गठबंधन मिलकर ऐसे ओपन-सोर्स टूल्स तैयार करेगा, जिनसे पूरे AI उद्योग में सुरक्षा और गवर्नेंस को बेहतर बनाया जा सके.
एनवीडिया के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य AI एजेंट्स के परीक्षण, ट्रैकिंग, समीक्षा और गवर्नेंस की प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि तेजी से स्वायत्त (Autonomous) होते AI सिस्टम पर बेहतर नियंत्रण और निगरानी रखी जा सके.
Hugging Face हैक के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता
हाल ही में Hugging Face पर हुए साइबर हमले ने स्वायत्त AI एजेंट्स से जुड़े संभावित जोखिमों को उजागर किया. इस घटना ने यह संकेत दिया कि बड़े पैमाने पर AI एप्लिकेशन अपनाने वाले संगठनों के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय अपनाना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है.
ओपन-वेट AI मॉडल को मिलेगा बढ़ावा
यह गठबंधन 24 जुलाई को जारी उस खुले पत्र के बाद सामने आया है, जिसमें Nvidia, OpenAI और अन्य टेक कंपनियों ने ओपन-वेट AI मॉडल का समर्थन किया था. पत्र में कहा गया था कि ओपन फ्रंटियर AI सिस्टम पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाने से सुरक्षा क्षमताएं कमजोर हो सकती हैं और AI क्षेत्र की शक्ति कुछ बंद (Closed) AI प्रदाताओं तक सीमित हो सकती है.
ओपन-सोर्स रिसर्च में देगा योगदान Nvidia
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nvidia इस पहल के तहत अपने ओपन मॉडल, मॉडल वेट्स, डेटा और एजेंट हार्नेस रिसर्च उपलब्ध कराएगा. इसके अलावा कंपनी GitHub पर हाल ही में जारी अपने 'Nvidia Labs Object-Oriented Agent' ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को भी इस गठबंधन का हिस्सा बनाएगी.
कंपनी का कहना है कि Open Secure AI Alliance ऐसे ओपन-सोर्स AI सुरक्षा टूल्स विकसित करेगा, जिनकी मदद से AI एजेंट्स का परीक्षण, ट्रैकिंग, समीक्षा और गवर्नेंस पहले की तुलना में अधिक आसान और प्रभावी हो सकेगा.