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बिहार में अडानी का बड़ा निवेश: ₹53,000 करोड़ से बनेगा 2400 मेगावाट का पावर प्लांट
अडानी पावर लिमिटेड को बिहार में 2400 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट बनाने का बड़ा प्रोजेक्ट मिला है, जो राज्य के ऊर्जा ढांचे को मजबूत करेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनी अडानी पावर लिमिटेड को बिहार में बिजली सप्लाई करने का एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है. कंपनी राज्य के भागलपुर जिले के पीरपैंती गांव में 2400 मेगावाट का अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट लगाएगी. इस प्रोजेक्ट पर करीब 3 अरब डॉलर (लगभग ₹53,000 करोड़) का निवेश किया जाएगा.
अडानी को मिला LoI, जल्द होगा PSA साइन
बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) ने अडानी पावर को लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी किया है. इसके तहत कंपनी बिहार को 2274 मेगावाट बिजली सप्लाई करेगी. यह बिजली उत्तर और दक्षिण बिहार की वितरण कंपनियों NBPDCL और SBPDCL को दी जाएगी. अडानी पावर को अब लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.
सबसे कम बोली लगाकर मिला प्रोजेक्ट
अडानी पावर को यह कॉन्ट्रैक्ट एक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए मिला, जिसमें कंपनी ने सबसे कम दर ₹6.075 प्रति किलोवाट-ऑवर (kWh) की पेशकश की. प्रोजेक्ट DBFOO (डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट) मॉडल के तहत बनाया जाएगा, यानी इस प्लांट को अडानी पावर खुद डिजाइन करेगी, फंडिंग करेगी, उसका स्वामित्व और संचालन भी करेगी.
उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा: अडानी पावर
कंपनी के सीईओ एस. बी. ख्यालिया ने कहा, "हमें बिहार में 2400 मेगावाट का प्लांट बनाने और चलाने का अवसर मिला है, जिससे हम बेहद उत्साहित हैं. इस निवेश से न सिर्फ राज्य को भरोसेमंद और किफायती बिजली मिलेगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा."
आधुनिक तकनीक, कम प्रदूषण
ख्यालिया ने बताया कि यह प्लांट अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगा, जिससे कोयले के जलने पर कम प्रदूषण होगा और बिजली उत्पादन अधिक होगा. इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम रहेगा. कंपनी के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान 10,000 से 12,000 लोगों को रोजगार मिलेगा. वहीं, पावर प्लांट के चालू होने के बाद करीब 3,000 स्थायी नौकरियां मिलेंगी.
कब से चालू होगा प्लांट?
प्रोजेक्ट की पहली यूनिट अगले 48 महीनों के भीतर चालू होने की उम्मीद है, जबकि अंतिम यूनिट 60 महीनों में शुरू हो जाएगी. यानी यह प्लांट 4 से 5 साल के भीतर पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा. इस पावर प्रोजेक्ट के लिए कोयले की आपूर्ति केंद्र सरकार की SHAKTI योजना (Scheme for Harnessing and Allocating Koyala Transparently in India) के तहत की जाएगी, जो पारदर्शिता और सुचारू वितरण सुनिश्चित करती है.
यह प्रोजेक्ट बिहार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ रोजगार और औद्योगिक विकास की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है.
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