अपने एयरपोर्ट बिजनेस को बढ़ाने के लिए गौतम अडानी उठाने जा रहे हैं ये कदम

अडानी ग्रुप ने 60 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर की योजना तैयार की है. 5-10 साल में 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 7 एयरपोर्ट्स का विस्तार किया जाएगा.

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Monday, 11 March, 2024
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भारत के दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी के अडानी ग्रुप ने अगले 10 साल में एयरपोर्ट बिजनेस में 60 हजार करोड रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है. यह नवी मुंबई एयरपोर्ट के पहले चरण में निवेश किए जा रहे 18000 करोड़ रुपये से अलग है. इन पैसों को एयरपोर्ट्स में रनवे, टैक्‍सीवे, एयरक्राफ्ट पार्किंग स्‍टैंड्स और टर्मिनल बनाने में उपयोग किया जाएगा. इसके साथ एयरपोर्ट्स के करीब होटल और शॉपिंग मॉल भी डेवलप किए जाएंगे.

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के एमडी करण अडानी ने बताया है कि अडानी समूह अगले पांच से दस सालों में ₹60,000 करोड़ के साथ अपने पोर्टफोलियो में सात मौजूदा हवाई अड्डों का विस्तार करने की योजना बना रहा है. वहीं, अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स (AAHL) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण बंसल ने कहा कि अगले पांच सालों में एयरसाइड पर 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा. जबकि, उसके अलावा अगले पांच से दस सालों में मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, गुवाहाटी, जयपुर और तिरुवनंतपुरम के हवाई अड्डों पर ‘सिटीसाइड’ पर 30 हजार करोड़ खर्च करने की योजना बनायी गयी है.

अडाणी ग्रुप कर रहा है लखनऊ के नए टर्मिनल का विकास

करन अडानी ने बताया कि उनके द्वारा निर्मित हवाई अड्डों की वर्तमान क्षमता 10-11 करोड़ यात्री सालाना (सीपीए) है. कंपनी की कोशिश इसको तीन गुना बढ़ाने की है. उन्होंने बताया लखनऊ एयरपोर्ट के नये टर्मिनल का विकास भी वो करने वाले हैं. साथ ही, नवी मुंबई एयरपोर्ट अगले साल मार्च तक खुलेगी. फिर गुवाहाटी एयरपोर्ट को नया टर्मिनल होगा. हम अहमदाबाद और जयपुर के लिए भी नए टर्मिनल की योजना बना रहे हैं.

कंपनी की प्राथमिकता है नवी मुंबई एयरपोर्ट

अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स (AAHL) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण बंसल ने इसके साथ ही बताया कि हमारी कंपनी की प्राथमिकता नवी मुंबई हवाई अड्डे को चालू करना और हवाई अड्डों पर सिटी साइड विकास शुरू करना है. उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, हमारी रणनीति हवाई अड्डे के विकास के अवसरों में भाग लेने की है. जहां देश में बंदरगाहों, ट्रांसमिशन आदि में भाग लेने के बड़े अवसर हैं. समूह की कोशिश लगातार नये रिकॉर्ड के साथ आगे बढ़ने की है.

अडाणी समूह 6 हवाई अड्डों का करता है संचालन

बता दें कि अडानी समूह छह हवाई अड्डों- लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मैंगलोर का संचालन करता है. 2021 में, इसने GVK समूह से मुंबई और आगामी नवी मुंबई हवाई अड्डे का अधिग्रहण किया. बंसल ने कहा कि आठ हवाई अड्डों के साथ, समूह 2040 तक 250 से 300 मिलियन यात्रियों के लिए क्षमता बनाने की तैयारी कर रहा है. 

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गोल्ड लोन में तेज उछाल पर नजर रखना जरूरी, फिर भी NBFC सेक्टर मजबूत: RBI रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) के विश्लेषण में एलारा सिक्योरिटीज ने कहा है कि NBFC क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता, पूंजी स्थिति और ऋण वसूली मजबूत बनी हुई है.

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Thursday, 02 July, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report-FSR) के विश्लेषण में एलारा सिक्योरिटीज ने कहा है कि देश का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) क्षेत्र मजबूत स्थिति में है. परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, पर्याप्त पूंजी और प्रमुख ऋण श्रेणियों में घटते जोखिम के चलते सेक्टर की स्थिति बेहतर बनी हुई है. हालांकि, सोने की ऊंची कीमतों के कारण गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ोतरी ऐसे क्षेत्र के रूप में उभर रही है, जिस पर लगातार नजर रखने की जरूरत होगी.

सबसे तेजी से बढ़ा गोल्ड लोन सेगमेंट

एलारा सिक्योरिटीज के अनुसार, पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन की वृद्धि अन्य रिटेल लोन श्रेणियों की तुलना में कहीं अधिक रही है और इसमें NBFCs की सबसे बड़ी भूमिका रही है. वित्त वर्ष 2024 से 2026 के दौरान गोल्ड लोन की वृद्धि दर गैर-हाउसिंग रिटेल लोन की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से लगभग दोगुनी रही. वर्तमान में NBFC के कुल रिटेल लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

FY26 में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो लगभग दोगुना

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में NBFCs का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 96.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पूरे उद्योग की वृद्धि दर 54.5 प्रतिशत रही. देश में बकाया गोल्ड लोन अब कुल उपभोक्ता ऋण का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं. इसकी बड़ी वजह सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें हैं. रिपोर्ट के अनुसार, नए गोल्ड लोन का मूल्य बकाया गोल्ड लोन से करीब 13 लाख करोड़ रुपये अधिक रहा. इससे संकेत मिलता है कि कई ग्राहक पुराने लोन का नवीनीकरण (रोलओवर) कर अधिक मूल्य वाले सोने के बदले बड़ी राशि उधार ले रहे हैं.

जोखिम फिलहाल नियंत्रित, लेकिन सतर्कता जरूरी

एलारा का मानना है कि फिलहाल जोखिम नियंत्रित है क्योंकि अधिकतर ऋण मौजूदा ग्राहकों को ही दिए जा रहे हैं. नए ग्राहकों की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है, जबकि लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात 60 प्रतिशत से नीचे है. इसके बावजूद ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि यदि सोने की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव आता है तो जोखिम बढ़ सकता है.

NBFC सेक्टर की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार

रिपोर्ट में NBFC सेक्टर की समग्र स्थिति को सकारात्मक बताया गया है. विभिन्न श्रेणियों में स्लिपेज रेशियो में गिरावट दर्ज की गई है. मिडिल-लेयर NBFCs का स्लिपेज रेशियो घटकर 3 प्रतिशत रह गया है, जबकि अपर-लेयर NBFCs में यह 4.8 प्रतिशत है.

RBI का नॉन-बैंकिंग स्टेबिलिटी इंडिकेटर (NBSI) भी अपने दीर्घकालिक औसत से नीचे बना हुआ है, जो प्रणालीगत जोखिम में कमी का संकेत देता है. वहीं, सेक्टर का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) करीब 24.6 प्रतिशत है, जो नियामकीय आवश्यकता से काफी अधिक है.

MSME और माइक्रोफाइनेंस में भी स्थिति बेहतर

एलारा सिक्योरिटीज ने MSME और माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में भी सुधार की बात कही है. MSME पोर्टफोलियो में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (GNPA) घटकर 5.4 प्रतिशत रह गई हैं. सेवा क्षेत्र में यह अनुपात केवल 3.1 प्रतिशत है.

माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में भी शुरुआती स्तर का तनाव कम हुआ है. 31 से 180 दिन तक बकाया रहने वाले ऋण मार्च 2026 में घटकर 1.8 प्रतिशत रह गए, जबकि छह महीने पहले यह 4.4 प्रतिशत था. इससे उधारकर्ताओं की भुगतान क्षमता में सुधार का संकेत मिलता है.

उपभोक्ता ऋण बना विकास का प्रमुख आधार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घरेलू उधारी का सबसे बड़ा आधार उपभोक्ता ऋण बना हुआ है. गैर-हाउसिंग रिटेल लोन अब कुल घरेलू उधारी का 58.4 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो वित्त वर्ष 2025 में 54.9 प्रतिशत था. वहीं, उपभोग आधारित ऋण कुल घरेलू उधारी का लगभग आधा हिस्सा बनाते हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में NBFCs का उपभोक्ता ऋण पोर्टफोलियो 22.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो बैंकों की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है.

उपभोक्ता ऋण में NBFCs का GNPA अनुपात घटकर 1.1 प्रतिशत रह गया, जबकि बैंकों में यह 1.2 प्रतिशत है. हालांकि बिजनेस लोन श्रेणी में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है, लेकिन वहां भी GNPA घटकर 1.8 प्रतिशत पर आ गया है.

बैंकों का NBFC पर बढ़ा भरोसा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि NBFCs के वित्तपोषण में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ रही है. पिछले एक वर्ष में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 43.5 प्रतिशत हो गई है, जो इस क्षेत्र में उनके बढ़ते भरोसे को दर्शाती है. हालांकि, 50,000 रुपये से कम के छोटे व्यक्तिगत ऋण बाजार में NBFCs की हिस्सेदारी घटकर 30.7 प्रतिशत रह गई है. इस श्रेणी में फिनटेक कंपनियों का दबदबा बढ़कर 56.8 प्रतिशत हो गया है. हालांकि इस सेगमेंट में डिफॉल्ट का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत ऊंचा बना हुआ है.

FY27 में इन क्षेत्रों पर रहेगी नजर

एलारा सिक्योरिटीज का मानना है कि NBFC सेक्टर में प्रणालीगत जोखिम फिलहाल नियंत्रित हैं और मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता, पर्याप्त पूंजी तथा बेहतर उधारकर्ता प्रोफाइल इसके प्रमुख कारण हैं. हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान गोल्ड लोन और MSME ऋण ऐसे दो क्षेत्र होंगे, जिन पर सबसे अधिक नजर रहेगी. यदि सोने की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव आता है या आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं, तो नियामकीय निगरानी और सख्त हो सकती है.
 


5,000 करोड़ रुपये की ग्रीन स्टील योजना लाएगी केंद्र सरकार, कार्बन उत्सर्जन घटाने पर रहेगा जोर

इस योजना के तहत इस्पात उत्पादन में स्वच्छ तकनीकों और वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके.

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Thursday, 02 July, 2026
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भारत के इस्पात उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. सरकार अगले तीन महीनों में 5,000 करोड़ रुपये की ग्रीन स्टील योजना लॉन्च कर सकती है. इस योजना का उद्देश्य स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में इस्पात क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है.

कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा प्रस्ताव

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित योजना को फिलहाल 'नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर सस्टेनेबल सेकेंडरी स्टील' नाम दिया गया है. इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा. योजना का लाभ सभी इस्पात उत्पादकों को मिलेगा, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सेकेंडरी स्टील निर्माताओं के लिए निर्धारित किया जा सकता है, जिनका देश के कुल इस्पात उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है.

स्वच्छ तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा

इस योजना के तहत इस्पात उत्पादन में स्वच्छ तकनीकों और वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके. ऐसे समय में यह पहल सामने आई है, जब भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है और साथ ही पेरिस जलवायु समझौते के तहत अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति टन कच्चे इस्पात के उत्पादन पर लगभग 2.55 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जबकि वैश्विक औसत करीब 1.9 टन प्रति टन है. इससे स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में उत्सर्जन कम करने की बड़ी चुनौती मौजूद है.

सेकेंडरी स्टील उत्पादकों को मिलेगा अधिक लाभ

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ सेकेंडरी स्टील उत्पादकों को मिलने की संभावना है, क्योंकि उनके पास आधुनिक और कम-कार्बन तकनीकों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत सीमित पूंजी होती है. योजना के माध्यम से ऊर्जा दक्ष प्रक्रियाओं, स्वच्छ ईंधन और नई उत्पादन तकनीकों को अपनाने में सहायता दी जाएगी, जिससे उत्सर्जन घटाने के साथ उत्पादन क्षमता भी बेहतर होगी. यह पहल सरकार के ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग अभियान और टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा मानी जा रही है.

2030 के लक्ष्य और 2070 के नेट-जीरो मिशन पर फोकस

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक देश है और सरकार ने वर्ष 2030 तक देश की वार्षिक इस्पात उत्पादन क्षमता 300 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना भी सरकार और उद्योग दोनों के लिए बड़ी प्राथमिकता बन चुका है.

यदि इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो यह इस्पात क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन के लिए सरकार की अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय पहलों में से एक होगी और भारत में प्रतिस्पर्धी ग्रीन स्टील इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
 


OXMIQ Labs ने जुटाए 35 मिलियन डॉलर, AI चिप आर्किटेक्चर के विस्तार को मिलेगी रफ्तार

Samsung Catalyst Fund समेत कई वैश्विक निवेशकों ने किया निवेश, अब तक 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल

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Thursday, 02 July, 2026
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AI और GPU आर्किटेक्चर विकसित करने वाली कंपनी OXMIQ Labs Inc. ने 35 मिलियन डॉलर की सीरीज-A फंडिंग जुटाने का ऐलान किया है. इस निवेश के साथ कंपनी अब तक कुल 60 मिलियन डॉलर की पूंजी जुटा चुकी है. इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपने लाइसेंस योग्य GPU आर्किटेक्चर OxCore के विस्तार के लिए करेगी, जिससे सेमीकंडक्टर कंपनियां और AI सिस्टम निर्माता बिना पूरा चिप प्रोग्राम विकसित किए अपनी जरूरत के मुताबिक कस्टम AI सिलिकॉन तैयार कर सकेंगे.

इस निवेश दौर का नेतृत्व Fundomo और Samsung Catalyst Fund ने संयुक्त रूप से किया. इसके अलावा MediaTek, AM Intelligence Labs, Pegatron Venture Capital, CDIB-TEN, Darwin Ventures, Morgan Creek Digital समेत कई वित्तीय और रणनीतिक निवेशकों ने भी इसमें भागीदारी की.

AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को पूरा करने पर फोकस

कंपनी का कहना है कि AI आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण मौजूदा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ रहा है. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए OXMIQ ने Atoms to Agents अवधारणा पर आधारित नई GPU आर्किटेक्चर विकसित की है, जो सिलिकॉन IP, कॉन्फिगरेबल सिस्टम और सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म को एक साथ जोड़ती है.

OxCore में एक साथ तीन कंप्यूट इंजन

OXMIQ की प्रमुख तकनीक OxCore एक स्केलेबल और लाइसेंस योग्य GPU कोर है, जिसमें तीन अलग-अलग कंप्यूट इंजन एक साथ काम करते हैं.

1. CUDA®-कम्पैटिबल GPU इंजन
2. Tensor Processing Engine
3. Orchestration Engine (CPU)

कंपनी के अनुसार, यह डिजाइन डेटा ट्रांसफर को कम करता है, जिससे AI वर्कलोड के दौरान ऊर्जा दक्षता और कंप्यूटिंग प्रदर्शन बेहतर होता है. यह तकनीक छोटे AI सिस्टम से लेकर बड़े डेटा सेंटर तक आसानी से स्केल की जा सकती है. फिलहाल इसका लाइव डेमो FPGA प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है.

OxQuilt देगा कस्टम AI चिप बनाने की सुविधा

कंपनी ने OxQuilt नामक नई चिपलेट इंटीग्रेशन आर्किटेक्चर भी विकसित की है. इसकी मदद से विभिन्न प्रकार के कंप्यूट चिपलेट और मेमोरी को एक ही पैकेज में जोड़ा जा सकता है.

कंपनी का दावा है कि यह तकनीक किसी एक फाउंड्री या मेमोरी सिस्टम पर निर्भर नहीं है. ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रोसेस नोड, मेमोरी तकनीक, इंटरकनेक्ट स्टैंडर्ड और एडवांस पैकेजिंग विकल्प चुन सकते हैं. इससे कंपनियां कम लागत में कस्टम AI सिलिकॉन तैयार कर सकेंगी.

डेवलपर्स के लिए तैयार किया सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म

OXMIQ ने हार्डवेयर के साथ एक व्यापक सॉफ्टवेयर स्टैक भी विकसित किया है. OxPython के जरिए डेवलपर्स बिना किसी कोड में बदलाव किए मौजूदा CUDA® और PyTorch® एप्लिकेशन OxCore पर चला सकेंगे. कंपनी के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म नए AI मॉडल्स के लिए पहले दिन से ही सपोर्ट उपलब्ध कराता है.

पूंजी बचाने वाला बिजनेस मॉडल

कंपनी का कहना है कि उसका बिजनेस मॉडल पूरी चिप बनाने के बजाय आर्किटेक्चर IP लाइसेंसिंग पर आधारित है. इससे ग्राहक परियोजनाओं के जरिए राजस्व भी मिलता है और कंपनी को बड़े पैमाने पर पूंजी खर्च करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती.

Samsung Catalyst Fund ने जताया भरोसा

Samsung Catalyst Fund के एसवीपी एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड (डेडे) गोल्डश्मिट ने कहा कि OXMIQ का नया AI कोर और सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर AI वर्कलोड के लिए अधिक कुशल और कस्टम समाधान उपलब्ध कराता है. उन्होंने कहा कि कंपनी की तकनीक भविष्य के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती है.

वहीं Fundomo के पार्टनर राजीव सुरती ने कहा कि OXMIQ का मॉडल ग्राहकों को चिप, मेमोरी और पैकेजिंग को अपनी जरूरत के अनुसार डिजाइन करने की स्वतंत्रता देता है, जिससे AI कंप्यूटिंग की लागत में कमी आएगी.

बोर्ड में शामिल हुए जिम केलर

कंपनी ने अपने बोर्ड और सलाहकार समूह का भी विस्तार किया है. प्रसिद्ध चिप आर्किटेक्ट और Tenstorrent के CEO जिम केलर OXMIQ के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हो गए हैं. वहीं Intel के पूर्व प्रोसेस टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. वल्लुरी (बॉब) राव कंपनी के सलाहकार बने हैं.

OXMIQ के संस्थापक एवं CEO राजा कोडुरी ने कहा कि खुली और लाइसेंस योग्य GPU आर्किटेक्चर दुनिया भर की डिजाइन टीमों को अपनी जरूरत के अनुसार AI सिलिकॉन विकसित करने की आजादी देगी. उन्होंने कहा कि AI तभी वास्तव में सभी के लिए उपयोगी बन सकता है, जब इसकी कंप्यूटिंग लागत कम हो और अधिक से अधिक कंपनियां इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकें.

भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी होगा फोकस

AM Intelligence Labs के साथ मिलकर OXMIQ भारत में 5 गीगावॉट AI फैक्ट्री विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है. इसमें से 3 गीगावॉट क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा आधारित AI कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित की जाएगी. कंपनी ने बताया कि वह सेमीकंडक्टर कंपनियों, AI सिस्टम निर्माताओं, नियोक्लाउड कंपनियों और रोबोटिक्स क्षेत्र के संगठनों के साथ साझेदारी के लिए भी काम कर रही है.
 


SBI का बड़ा डिजिटल अपग्रेड! YONO ऐप में जुड़े AI फीचर्स, अब एक प्रक्रिया में खुलेंगे 3 अकाउंट

SBI ने YONO प्लेटफॉर्म पर 3-इन-1 डिजिटल ऑनबोर्डिंग सुविधा शुरू की है. इससे ग्राहक एक ही प्रक्रिया में सेविंग अकाउंट, डीमैट अकाउंट और SBI Cap Securities के साथ ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकेंगे.

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Thursday, 02 July, 2026
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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने 71वें बैंक दिवस पर डिजिटल बैंकिंग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. बैंक ने YONO ऐप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कई नए फीचर्स जोड़े हैं. अब ग्राहक एक ही डिजिटल प्रक्रिया के जरिए सेविंग अकाउंट, डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकेंगे. इसके अलावा फाइनेंशियल हेल्थ, ग्रीन स्कोर और 24x7 AI वर्चुअल असिस्टेंट जैसी कई सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.

एक प्रक्रिया में खुलेंगे तीन अकाउंट

SBI ने YONO प्लेटफॉर्म पर 3-इन-1 डिजिटल ऑनबोर्डिंग सुविधा शुरू की है. इसके तहत नए ग्राहक एक ही प्रक्रिया में सेविंग अकाउंट, डीमैट अकाउंट और SBI Cap Securities के साथ ट्रेडिंग अकाउंट खोल सकेंगे. इससे निवेश की शुरुआत पहले से कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी.

बिना शाखा जाए सैलरी अकाउंट होगा अपग्रेड

बैंक ने पात्र ग्राहकों के लिए ऑनलाइन सैलरी अकाउंट अपग्रेड की सुविधा भी शुरू की है. ग्राहक अब बिना बैंक शाखा जाए अपने बचत खाते को कॉरपोरेट सैलरी अकाउंट में बदल सकेंगे. वहीं, मौजूदा सैलरी अकाउंट को भी ऑनलाइन अपग्रेड किया जा सकेगा.

अब YONO बताएगा आपका ग्रीन स्कोर

SBI ने YONO पर उद्योग में पहली बार Sustainability Journey फीचर लॉन्च किया है. इसके जरिए ग्राहक डिजिटल बैंकिंग लेनदेन से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में बचत को ट्रैक कर सकेंगे. साथ ही हर महीने अपना ग्रीन स्कोर भी देख पाएंगे.

फाइनेंशियल फिटनेस स्कोर से मिलेगी पूरी वित्तीय तस्वीर

YONO में नया Financial Fitness Score फीचर भी जोड़ा गया है. यह ग्राहकों के बैंक खाते, लोन, निवेश, बीमा और खर्च के पैटर्न का एकीकृत विश्लेषण करेगा, जिससे वे अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और भविष्य की बेहतर वित्तीय योजना बना सकेंगे.

मोबाइल पर मिलेगी पूरी ट्रेड फाइनेंस सुविधा

SBI ने YONO Business प्लेटफॉर्म पर e-Trade सुविधा का विस्तार किया है. अब कॉरपोरेट और MSME ग्राहक मोबाइल के जरिए इनलैंड, इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ट्रेड फाइनेंस से जुड़े लेनदेन देख, ट्रैक और अधिकृत कर सकेंगे. इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और ट्रेड फाइनेंस संचालन अधिक प्रभावी बनेगा.

24x7 मदद करेगा AI वर्चुअल असिस्टेंट

बैंक ने YONO G नाम से नया एजेंटिक AI आधारित वर्चुअल असिस्टेंट भी लॉन्च किया है. यह वेब और मोबाइल दोनों प्लेटफॉर्म पर चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा. यह ग्राहकों के बैंकिंग उत्पादों, सेवाओं और प्लेटफॉर्म से जुड़े सवालों के तुरंत जवाब देकर तेज और व्यक्तिगत सहायता प्रदान करेगा.
 


सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनी को मिलेगा Zee में 20% तक हिस्सा, ₹3,143 करोड़ के वारंट इश्यू पर मुहर

कंपनी ने प्रत्येक ESOP का एक्सरसाइज प्राइस 126 रुपये तय किया है. ज़ी ने कहा कि यह योजना SEBI के शेयर-आधारित कर्मचारी लाभ संबंधी नियमों के अनुरूप लागू की जाएगी.

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के बोर्ड ने 3,143.51 करोड़ रुपये के प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव के तहत सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनी सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स (Sunbright Mauritius Investments) को पूरी तरह परिवर्तनीय वारंट जारी किए जाएंगे. सभी वारंट शेयरों में बदलने पर कंपनी में उसकी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. यह प्रस्ताव शेयरधारकों, नियामकीय संस्थाओं और अन्य आवश्यक वैधानिक मंजूरियों के अधीन रहेगा. कंपनी जल्द ही शेयरधारकों की बैठक बुलाएगी, जिसमें प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू और ESOP 2026 दोनों प्रस्तावों पर मंजूरी ली जाएगी.

3,143 करोड़ रुपये का होगा वारंट इश्यू

कंपनी अधिकतम 24,94,85,563 पूरी तरह परिवर्तनीय वारंट जारी करेगी. प्रत्येक वारंट को 1 रुपये अंकित मूल्य वाले जी एंटरटेनमेंट के एक पूर्ण चुकता इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा. वारंट का निर्गम मूल्य 126 रुपये प्रति वारंट तय किया गया है, जिसमें 125 रुपये का प्रीमियम शामिल है. इस इश्यू का कुल आकार 3,143.51 करोड़ रुपये होगा.

सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स को वारंट मूल्य का 25 प्रतिशत (31.50 रुपये प्रति वारंट) अग्रिम जमा करना होगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत (94.50 रुपये प्रति वारंट) राशि वारंट को शेयरों में बदलने के समय देनी होगी.

18 महीने के भीतर करना होगा कन्वर्जन

कंपनी के अनुसार, वारंट का एक या एक से अधिक चरणों में आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर इक्विटी शेयरों में रूपांतरण किया जा सकेगा. यदि निर्धारित अवधि में वारंट का उपयोग नहीं किया गया, तो वह स्वतः समाप्त हो जाएगा और पहले से जमा की गई राशि जब्त कर ली जाएगी.

20% तक पहुंच सकती है हिस्सेदारी

जी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, फिलहाल सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स की कंपनी में कोई हिस्सेदारी नहीं है. हालांकि, वारंट के पूर्ण रूपांतरण के बाद कंपनी में उसकी हिस्सेदारी पूरी तरह डाइल्यूटेड आधार पर 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.

यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे ज़ी एंटरटेनमेंट में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी बढ़ाने की एक नई कोशिश दिखाई देती है. इससे पहले भी विभिन्न रिपोर्टों में सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स को ज़ी के संस्थापक **सुभाष चंद्रा** और उनके परिवार से जुड़ा प्रमोटर समूह बताया गया है.

ESOP 2026 को भी मिली मंजूरी

वारंट इश्यू के साथ-साथ बोर्ड ने ESOP 2026 योजना को भी मंजूरी दी है, जिसे लागू करने के लिए शेयरधारकों की स्वीकृति आवश्यक होगी. इस योजना के तहत कर्मचारियों को अधिकतम 3,74,22,835 कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ESOPs) दिए जा सकेंगे. प्रत्येक विकल्प को 1 रुपये अंकित मूल्य वाले एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा.

कंपनी ने प्रत्येक ESOP का एक्सरसाइज प्राइस 126 रुपये तय किया है. ज़ी ने कहा कि यह योजना SEBI के शेयर-आधारित कर्मचारी लाभ संबंधी नियमों के अनुरूप लागू की जाएगी.

 


आज शेयर बाजार की कैसी होगी शुरुआत? GIFT Nifty से मिले मजबूत संकेत, इन शेयरों पर रखें नजर

बुधवार को BSE सेंसेक्स 443.97 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,922.64 पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी 140.10 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,005.85 के स्तर पर पहुंच गया.

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Thursday, 02 July, 2026
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लगातार दो दिन की बिकवाली के बाद बुधवार को बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स कारोबार के दौरान 600 अंक तक चढ़ा और अंत में 443.97 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,922.64 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 140.10 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,005.85 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, रुपये में कमजोरी जारी रही और यह डॉलर के मुकाबले 0.6 प्रतिशत गिरकर 95.24 पर बंद हुआ. पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.66 पर बंद हुआ था.

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 22 के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. इटरनल के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई. इसके अलावा एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अडानी पोर्ट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, टीसीएस, टाटा स्टील, इन्फोसिस, लार्सन एंड टुब्रो, एचडीएफसी बैंक और टाइटन के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए.

आज कैसी रह सकती है बाजार की शुरुआत?

गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ होने के संकेत हैं. GIFT Nifty करीब 102 अंक की बढ़त के साथ 24,195 पर कारोबार करता दिखा, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी के सकारात्मक शुरुआत करने की उम्मीद है. तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच दोहा में हुई वार्ता के बाद वैश्विक निवेशकों की धारणा कुछ बेहतर हुई है. हालांकि, एशियाई बाजारों में दबाव बना हुआ है. दक्षिण कोरिया का Kospi इंट्राडे कारोबार में करीब 7 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि जापान का Nikkei 225 और चीन का CSI 300 भी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए. अमेरिकी बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा. Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq Composite मामूली गिरावट के साथ बंद हुए. वहीं, डॉलर में मजबूती के कारण सोना-चांदी की कीमतों में नरमी रही और अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति के संकेत मिलने से कच्चे तेल की कीमतों पर भी दबाव देखने को मिला.

इन शेयरों पर रखें नजर

आज के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़े बड़े कॉर्पोरेट अपडेट निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं. भारती एयरटेल की सहायक कंपनी एयरटेल मनी ने एनबीएफसी के रूप में परिचालन शुरू कर दिया है. हीरो मोटोकॉर्प ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति में 750 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से दूसरा ग्लोबल पार्ट्स सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है. टाटा टेक्नोलॉजीज ने टेनेको एलएलसी के साथ अपनी वैश्विक साझेदारी को और मजबूत किया है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 100 मिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की संभावना है. ल्यूपिन को अमेरिका के US FDA से समरसेट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए ईआईआर मिला है, जबकि यूरोपीय मेडिसिन्स एजेंसी ने NaMuscla दवा की नई डोज़ को भी मंजूरी दे दी है. मारुति सुजुकी ने जून में वाहन उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है. कोल इंडिया को 2,831 करोड़ रुपये से अधिक के 600 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट का ऑर्डर मिला है. वहीं, वी-मार्ट रिटेल ने जून तिमाही में 23 प्रतिशत राजस्व वृद्धि दर्ज की है, जबकि फोर्स मोटर्स और एनएमडीसी ने भी जून महीने में मजबूत बिक्री और उत्पादन के आंकड़े पेश किए हैं. इन सभी घटनाक्रमों के चलते आज इन शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


CA Day 2026: "मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस का कोई शॉर्टकट नहीं है" : एस रवि

एस रवि ने कहा "आज चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का पेशा ऑडिट, फॉरेंसिक ऑडिट, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कराधान, एआई, जोखिम प्रबंधन, वैल्यूएशन और ड्यू डिलिजेंस समेत कई विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में अवसर प्रदान करता है."

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
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उर्वी श्रीवास्तव, BW रिपोर्टर्स

हाल के बोर्डरूम विवादों और नियामकीय घटनाक्रमों के बीच कॉर्पोरेट गवर्नेंस एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. ऐसे समय में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) की भूमिका केवल वित्तीय रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं रह गई है. सीए दिवस (CA DAY) के अवसर पर BW Businessworld से बातचीत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के पूर्व चेयरमैन और रवि राजन एंड कंपनी के संस्थापक एवं मैनेजिंग पार्टनर एस रवि ने भारतीय बोर्डरूम में मौजूद गवर्नेंस की चुनौतियों, पारदर्शिता और ऑडिट निगरानी के बढ़ते महत्व, पेशे पर एआई के प्रभाव तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए विशेषज्ञता और पेशेवर निर्णय क्षमता की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की.

हाल के कॉर्पोरेट विवादों ने एक बार फिर गवर्नेंस को केंद्र में ला दिया है. आज भारतीय बोर्डरूम में सबसे बड़ी गवर्नेंस कमियां आप कहां देखते हैं और चार्टर्ड अकाउंटेंट बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस में किस तरह योगदान दे सकते हैं?

बोर्डरूम में मतभेद हमेशा रहे हैं और आगे भी रहेंगे. महत्वपूर्ण यह है कि निदेशक, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सभी अपनी-अपनी भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से समझें और उनका पालन करें. उदाहरण के तौर पर, जहां मैनेजिंग डायरेक्टर पूर्णकालिक कार्यकारी पद होता है, वहीं विशेषकर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र में चेयरमैन का पद आमतौर पर अंशकालिक होता है और उनकी भूमिका बोर्ड के संचालन तक सीमित रहनी चाहिए.

मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन के बीच संबंध तथा प्रबंधन और बोर्ड के बीच सूचना के प्रवाह का भी विशेष महत्व है. ऑडिट समितियां और ऑडिटर वित्तीय विवरणों में अधिक पारदर्शिता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. तथ्यों पर आधारित और स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक है. साथ ही प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह ऑडिटरों को पूरी जानकारी उपलब्ध कराए. पारदर्शिता प्रबंधन और ऑडिटरों के बीच दोतरफा प्रक्रिया है.

जब चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जिम्मेदारियां वित्तीय रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर बोर्डरूम गवर्नेंस तक पहुंच रही हैं, तो उन्हें अपने कौशल को किस तरह विकसित करना चाहिए?

बोर्ड को ऑडिटरों के विचारों के प्रति खुला रुख अपनाना चाहिए और उन्हें अपनी चिंताएं व सुझाव रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. साथ ही उनकी टिप्पणियों को गंभीरता से लेना चाहिए. दूसरी ओर, ऑडिटरों की जिम्मेदारी है कि वे सभी महत्वपूर्ण मामलों को बोर्ड के सामने रखें. मजबूत सिस्टम और प्रक्रियाएं, पूर्ण पारदर्शिता और पर्याप्त खुलासे (डिस्क्लोजर) अच्छे गवर्नेंस की बुनियाद हैं. इसके साथ ही ऑडिटरों की सही सोच और पेशेवर ईमानदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि गवर्नेंस अंततः प्रक्रियाओं और नैतिकता दोनों से संचालित होती है.

वित्त और ऑडिट में एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग के बीच चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की कौन-सी भूमिका ऐसी है जिसे बदला नहीं जा सकता?

एआई एक ऐसा उपकरण है जो ऑडिट प्रक्रिया को काफी बेहतर बना सकता है. उदाहरण के लिए, सैंपलिंग पर निर्भर रहने के बजाय ऑडिटर 100 प्रतिशत जांच कर सकते हैं, जिससे ऑडिट अधिक तेज, व्यापक और प्रभावी हो सकता है. हालांकि, एआई केवल एक सहायक उपकरण होना चाहिए. पेशेवर निर्णय क्षमता, तथ्यों की व्याख्या करने की योग्यता और जटिल परिस्थितियों में ज्ञान का सही उपयोग करने की क्षमता चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सबसे बड़ी ताकत बनी रहेगी.

तेजी से बदलते इस पेशे में सफल करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवा और भावी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को आप क्या सलाह देंगे?

आज यह पेशा ऑडिट, फॉरेंसिक ऑडिट, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कराधान, एआई, जोखिम प्रबंधन, वैल्यूएशन और ड्यू डिलिजेंस जैसे कई विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में अवसर प्रदान करता है. युवाओं को अपनी रुचि का क्षेत्र चुनना चाहिए, उसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और लगातार अपने कौशल को बेहतर बनाना चाहिए. आज के जटिल कारोबारी माहौल में ज्ञान और विशेषज्ञता ही दीर्घकालिक सफलता की सबसे बड़ी पहचान है.

क्या समय के साथ यह पेशा अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है? आज चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर सबसे बड़ा दबाव क्या है और वे उससे कैसे निपट सकते हैं?

निश्चित रूप से यह पेशा पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि अब इस पर कहीं अधिक निगरानी और जांच होती है. कंपनी अधिनियम, 2013 लागू होने के बाद नियामकीय आवश्यकताएं काफी बढ़ गई हैं, जबकि विभिन्न नियामकों ने अनुपालन संबंधी अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी जोड़ दी हैं. इस बढ़ती जटिलता का सामना केवल सूक्ष्म कार्यप्रणाली, मजबूत सिस्टम और पेशेवर मानकों के सख्त पालन के जरिए ही किया जा सकता है. इसका कोई शॉर्टकट नहीं है.

(उर्वी श्रीवास्तव BW Businessworld में असिस्टेंट एडिटर हैं. वह शेयर बाजार, पब्लिक मार्केट्स, ऊर्जा, सौर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों पर लिखती हैं. उनकी रिपोर्टिंग भारत के आर्थिक और औद्योगिक परिवर्तन, पूंजी प्रवाह, नीतिगत बदलावों और सतत विकास से जुड़े रुझानों पर केंद्रित रहती है. जटिल वित्तीय घटनाक्रमों को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है. उनसे [urvi@businessworld.in] पर संपर्क किया जा सकता है.)


Fire-Boltt की स्मार्टफोन बाजार में एंट्री, Flipkart के साथ लॉन्च करेगा Made-in-India फोन

कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) के साथ साझेदारी में किफायती 4G और 5G स्मार्टफोन पेश करेगी, जिनकी बिक्री फ्लिपकार्ट और अन्य वितरण चैनलों के जरिए की जाएगी.

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
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वियरेबल्स सेगमेंट में अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद Fire-Boltt अब स्मार्टफोन कारोबार में उतर गया है. दरअसल, कंपनी ने 'boltt' नाम से नया स्मार्टफोन ब्रांड लॉन्च किया है, जिसके तहत मेड-इन-इंडिया स्मार्टफोन पेश किए जाएंगे. यह कदम कंपनी को वियरेबल्स ब्रांड से आगे बढ़ाकर एक व्यापक कंज्यूमर टेक्नोलॉजी कंपनी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. कंपनी के मुताबिक, उसके कनेक्टेड कंज्यूमर इकोसिस्टम से 4 करोड़ से अधिक यूजर्स जुड़े हुए हैं और अब वह इसी उपभोक्ता-केंद्रित रणनीति को स्मार्टफोन सेगमेंट में भी आगे बढ़ाएगी.

Evo और Ace सीरीज में आएंगे 4G और 5G फोन

कंपनी का आगामी स्मार्टफोन पोर्टफोलियो Evo और Ace सीरीज के तहत लॉन्च किया जाएगा. इसमें किफायती 4G और 5G स्मार्टफोन शामिल होंगे. कंपनी का कहना है कि इन डिवाइसों को भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन, परफॉर्मेंस और उपयोगी फीचर्स के साथ तैयार किया गया है.

Flipkart निभाएगा अहम भूमिका

Fire-Boltt ने स्मार्टफोन की बिक्री के लिए फ्लिपकार्ट के साथ साझेदारी की है. कंपनी के अनुसार, टियर-2 और टियर-3 शहरों तक Flipkart की मजबूत पहुंच और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क देशभर में नए स्मार्टफोन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. कंपनी ने कहा कि आने वाले हफ्तों में boltt स्मार्टफोन पोर्टफोलियो से जुड़ी अन्य जानकारियां साझा की जाएंगी.

क्या बोले कंपनी के CEO

Boltt के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अर्नव किशोर ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में लाखों उपभोक्ताओं ने Fire-Boltt पर भरोसा जताया है, जिससे भारत का सबसे बड़ा कनेक्टेड कंज्यूमर इकोसिस्टम बनाने में मदद मिली. Boltt हमारी इस यात्रा का अगला चरण है. आज स्मार्टफोन लोगों के जुड़ने, सीखने और अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है. हमारा मानना है कि भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों को समझने वाला एक स्वदेशी ब्रांड इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है."

Flipkart ने क्या कहा

फ्लिपकार्ट के सीनियर डायरेक्टर मुकुंद केडिया ने कहा, "Flipkart का उद्देश्य देशभर के उपभोक्ताओं तक प्रीमियम स्मार्टफोन अनुभव पहुंचाना है. Boltt के 4G और 5G स्मार्टफोन पोर्टफोलियो तथा फ्लिपकार्ट के व्यापक वितरण नेटवर्क के साथ उपभोक्ताओं को टिकाऊ, बेहतर परफॉर्मेंस वाले और इनोवेटिव स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जाएंगे."


GST कलेक्शन में जोरदार उछाल, जून में 14% बढ़कर ₹1.95 लाख करोड़ पहुंचा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून में ग्रॉस GST कलेक्शन बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये रहा. रिफंड समायोजित करने के बाद नेट GST कलेक्शन 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया.

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
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जून 2026 में सरकार का GST कलेक्शन मजबूत बढ़त के साथ 1.95 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इस दौरान कुल GST संग्रह में 13.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. आयात से मिलने वाले टैक्स राजस्व में 35 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी ने कलेक्शन को मजबूती दी, जबकि घरेलू कारोबार से GST संग्रह की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही.

आयात से मिला सबसे बड़ा सहारा

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जून में ग्रॉस GST कलेक्शन बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये रहा. रिफंड समायोजित करने के बाद नेट GST कलेक्शन 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया.

इस दौरान घरेलू कारोबार से ग्रॉस GST संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर 1.35 लाख करोड़ रुपये रहा. वहीं आयात से मिलने वाला GST राजस्व 34.6 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 60,038 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसने कुल कलेक्शन में सबसे बड़ा योगदान दिया.

घरेलू कारोबार की रफ्तार अब भी धीमी

रिफंड समायोजन के बाद घरेलू नेट GST संग्रह केवल 2.6 प्रतिशत बढ़कर 1.17 लाख करोड़ रुपये रहा. इससे संकेत मिलता है कि घरेलू लेनदेन और खपत की रफ्तार अभी भी सीमित बनी हुई है. दूसरी ओर, सीमा शुल्क से मिलने वाला नेट GST राजस्व 42.2 प्रतिशत बढ़कर 45,370 करोड़ रुपये हो गया, जो आयात आधारित टैक्स संग्रह में मजबूत वृद्धि को दर्शाता है.

GST रिफंड में भी तेज बढ़ोतरी

जून के दौरान GST रिफंड 29.1 प्रतिशत बढ़कर 32,436 करोड़ रुपये हो गया. इसमें घरेलू रिफंड 42.9 प्रतिशत बढ़कर 17,767 करोड़ रुपये और आयात पर चुकाए गए GST का रिफंड 15.6 प्रतिशत बढ़कर 14,669 करोड़ रुपये रहा.

पहली तिमाही में भी मजबूत प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में ग्रॉस GST कलेक्शन 8.4 प्रतिशत बढ़कर 6.32 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वहीं, नेट GST कलेक्शन 7.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.40 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इससे संकेत मिलता है कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में सरकार का अप्रत्यक्ष कर संग्रह मजबूत बना हुआ है, हालांकि इसकी बड़ी वजह आयात से बढ़ा टैक्स राजस्व रहा.
 


मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ को लगा झटका, जून में PMI घटकर 54.2 पर पहुंचा

HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के अनुसार जून 2026 में PMI घटकर 54.2 पर आ गया, जबकि मई में यह 55 था. यह आंकड़ा शुरुआती अनुमान 54.5 से भी कम रहा.

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Wednesday, 01 July, 2026
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भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की विकास रफ्तार जून में कुछ धीमी पड़ गई. HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI तीन महीने के निचले स्तर 54.2 पर आ गया. हालांकि सूचकांक लगातार 56वें महीने 50 के ऊपर बना रहा, लेकिन नए ऑर्डर, निर्यात मांग, उत्पादन और रोजगार में वृद्धि की गति कमजोर पड़ने से सेक्टर पर वैश्विक मांग में नरमी का असर साफ दिखाई दिया.

तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचा PMI

S&P Global द्वारा तैयार किए गए HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के अनुसार जून 2026 में PMI घटकर 54.2 पर आ गया, जबकि मई में यह 55 था. यह आंकड़ा शुरुआती अनुमान 54.5 से भी कम रहा. हालांकि 50 से ऊपर का स्तर यह दर्शाता है कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां अब भी विस्तार के दौर में हैं और भारतीय विनिर्माण क्षेत्र ने लगातार 56वें महीने वृद्धि दर्ज की है.

नए ऑर्डर और निर्यात की रफ्तार घटी

सर्वे के मुताबिक मार्च को छोड़ दें तो उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर रही. कई कंपनियों ने मांग में सुधार की बात कही, लेकिन ग्राहकों की कमजोर खरीदारी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कारोबार की गति को प्रभावित किया. अंतरराष्ट्रीय मांग भी 39 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई, जिसकी बड़ी वजह यूरोपीय बाजारों से ऑर्डर में कमी रही.

लागत का दबाव कुछ कम हुआ

जून में इनपुट कॉस्ट बढ़ने की रफ्तार फरवरी के बाद सबसे धीमी रही, जिससे कंपनियों को कुछ राहत मिली. हालांकि केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, गैस, धातु, पेट्रोलियम उत्पाद, प्लास्टिक, रबर और लकड़ी जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही.

क्या बोले HSBC के अर्थशास्त्री

HSBC की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान मांग में जो तेजी देखने को मिली थी, उसके बाद अब सामान्य स्थिति लौटने के साथ मांग की रफ्तार धीमी हुई है. इसका असर उत्पादन, नए ऑर्डर, निर्यात और रोजगार पर भी दिखाई दिया है. खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय बिक्री में मार्च 2023 के बाद सबसे कमजोर वृद्धि दर्ज की गई.