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अडानी पोर्ट्स के लिए 30,000 करोड़ का मेगा प्लान, 2030 तक 1 अरब टन कार्गो हैंडलिंग का लक्ष्य
गौतम अडानी क 30,000 करोड़ निवेश का यह प्लान भारत को एक वैश्विक समुद्री लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी एक बार फिर अपने पसंदीदा बिजनेस सेक्टर पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स में बड़ी पूंजी झोंकने जा रहे हैं. दरअसल, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने आने वाले दो वर्षों में 30,000 करोड़ रुपए के कैपेक्स प्लान की घोषणा की है. इस निवेश का उद्देश्य कंपनी के तीन प्रमुख बंदरगाहों मुंद्रा, धामरा और विझिंजम की क्षमता और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करना है.
2030 तक 1 अरब टन कार्गो हैंडलिंग का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार APSEZ का लक्ष्य साल 2030 तक सालाना 1 अरब टन कार्गो हैंडलिंग क्षमता हासिल करना है. इसमें से 850 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) भारत में स्थित बंदरगाहों से और 140-150 MMT अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों से आने की उम्मीद है. फिलहाल, कंपनी भारत में 15 बंदरगाहों और टर्मिनलों पर 633 MMT की स्थापित क्षमता रखती है, जिनमें से 2025 के अंत तक 450 MMT का संचालन किया गया था. इसका मतलब है कि कंपनी की भारतीय बंदरगाह बाजार में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
कहां खर्च होगा 30,000 करोड़ का निवेश?
सितंबर में जारी एक प्रेजेंटेशन के मुताबिक, APSEZ का निवेश चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:
- बंदरगाह विकास: 6,500–7,000 करोड़ रुपए
- लॉजिस्टिक्स: 2,300 करोड़ रुपए
- रिन्युएबल एनर्जी: 1,500 करोड़ रुपए
- समुद्री सेवाएं: 700–800 करोड़ रुपए
इसके अलावा अतिरिक्त पूंजी मुख्य रूप से मुंद्रा और धामरा में बर्थ और टर्मिनल विस्तार, और विझिंजम पोर्ट को ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करने में खर्च की जाएगी. खास बात यह है कि विझिंजम पोर्ट ने लॉन्च के केवल 9 महीनों में ही 10 लाख TEU (बीस-फुट समतुल्य यूनिट्स) का संचालन कर लिया है.
निवेश का कारण: बढ़ता एक्सपोर्ट और सी रूट लॉजिस्टिक्स की मांग
भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है. इसके चलते सी रूट लॉजिस्टिक्स की मांग में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है. अडानी ग्रुप का मानना है कि आने वाले वर्षों में समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार और लॉजिस्टिक नेटवर्क भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इसी को ध्यान में रखते हुए यह रणनीतिक निवेश किया जा रहा है, जिसका दीर्घकालिक फायदा समूह को मिल सकता है.
अडानी ग्रीन एनर्जी को भी मिली दोहरी रेटिंग
इसी बीच, अडानी ग्रुप की एक और प्रमुख कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) को दो रेटिंग एजेंसियों से AA/स्टेबल रेटिंग प्राप्त हुई है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने AGEL की रेटिंग को AA- से बढ़ाकर AA कर दिया है. वहीं, क्रिसिल रेटिंग्स ने भी कंपनी को AA/स्टेबल की रेटिंग दी है. यह रेटिंग अडानी ग्रुप के ग्रीन एनर्जी सेगमेंट में भरोसे को दर्शाती है. कंपनी ने इस सेक्टर में आने वाले दशक में बड़ा निवेश करने की योजना पहले ही साझा कर रखी है.
शेयरों पर दिख सकता है असर
इन निवेश योजनाओं और सकारात्मक रेटिंग्स का असर अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है. हालांकि, बुधवार को अडानी पोर्ट का शेयर मामूली गिरावट के साथ 1405.70 रुपए पर बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान यह 1396.05 रुपए तक गिरा था. दूसरी ओर, अडानी ग्रीन एनर्जी का शेयर 1.14 फीसदी गिरकर 826.40 रुपए पर बंद हुआ.
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