3 दिन, 3 एयरपोर्ट हादसे और सबसे बड़ा सवाल, करोड़ों के खर्च को कैसे बहा ले गई बारिश? 

देश के तीन हवाईअड्डों पर हुए हादसों के लिए बारिश को कुसूरवार ठहराया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर जिम्मेदार खामोश हैं.

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Saturday, 29 June, 2024
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जबलपुर, दिल्ली और अब राजकोट. इन तीन शहरों के हवाईअड्डों पर लगभग एक जैसे हादसे हुए हैं. इन हादसों के लिए कभी बारिश को कुसूरवार ठहराया जा रहा है, तो कभी नेता एक-दूसरे को दोषी साबित करने में लगे हैं. दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हादसे में एक शख्स की जान चली गई है. गनीमत इतनी है कि जबलपुर और राजकोट में कोई जनहानि नहीं हुई. कांग्रेस दिल्ली एयरपोर्ट दुर्घटना के लिए मोदी सरकार पर उंगली उठा रही है. जबकि भाजपा का कहना है कि हवाईअड्डे का जो हिस्सा गिरा वो कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के वक्त बना था. यदि इस दावे में सच्चाई है भी तो क्या मानसून से पहले एयरपोर्ट का सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित करवाना सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी?

450 करोड़ रुपए हुए थे खर्च
मध्य प्रदेश के जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर 27 जून को ड्रॉप एंड गो जोन के ऊपर लगा शेड गिर गया था. हादसे में नीचे खड़ी सरकारी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. गनीमत रही कि हादसे के समय कार में कोई नहीं था. इस घटना के बाद एयरपोर्ट में हुए करोड़ों के निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं. एक रिपोर्ट बताती है कि जबलपुर एयरपोर्ट को नया रूप देने पर करीब 450 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इस हादसे के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी बारिश को जिम्मेदार बता रही है. मध्य प्रदेश के इस हवाईअड्डे की कमान अभी सरकार के हाथों में है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AII) डुमना एयरपोर्ट का संचालन करती है. प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मार्च को वर्चुअली जबलपुर डुमना एयरपोर्ट का शिलान्यास और उद्घाटन किया था. 

यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे? 
जबलपुर के बाद देश की राजधानी दिल्ली में भी ऐसी ही दुर्घटना हुई. 28 जून को सुबह 5 बजे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) के टर्मिनल-1 पर पार्किंग की छत गिर गई. हादसे में कार में बैठे कैब ड्राइवर की मौत हो गई, जबकि 8 अन्य घायल. दरअसल, टर्मिनल-1 पर डोमेस्टिक फ्लाइट के लिए पार्किंग एरिया में सुबह गाड़ियों की लाइन थी. इसी दौरान पार्किंग की छत अचानक गिर गई. छत का भारी-भरकम हिस्सा और लोहे के तीन सपोर्ट बीम भी सीधे गाड़ियों पर आ गिरे, जिससे एक कैब ड्राइवर की मौत हो गई. दिल्ली एयरपोर्ट से हर दिन 1300 से ज्यादा फ्लाइट उड़ान भरती हैं. यात्रियों से सफर करने के चार्ज के अलावा एयरपोर्ट डेवलपमेंट फीस और यूजर डेवलपमेंट फीस वसूली जाती है. उसके बावजूद यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं किया जाता. 

कौन चलाता है दिल्ली एयरपोर्ट?
दिल्ली एयरपोर्ट को दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के ज्वाइंट वेंचर के तहत संचालित किया जाता है. GMR ग्रुप की अगुवाई वाले इस कंसोर्टियम में GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड की 64% हिस्सेदारी है. जबकि एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के पास 26% और Fraport AG Frankfurt Airport Services Worldwide के पास 10% हिस्सेदारी है. दिल्ली एयरपोर्ट देश का एकमात्र ऐसा एयरपोर्ट है, जहां 4 रनवे हैं. बताया जा रहा है कि जिस टर्मिनल पर हादसा हुआ है, उसे जीएमआर ने ही विकसित किया था. GMR ग्रुप दिल्ली के अलावा हैदराबाद, गोवा और कर्णाटक के बीदर एयरपोर्ट को भी ऑपरेट करता है. 

ब्लेम गेम, कंपनी ने नकारा दावा
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू का कहना है कि टर्मिनल-1 का हिस्सा UPA सरकार में बनाया गया था. PM मोदी ने 10 मार्च को टर्मिनल-1 में जिस बिल्डिंग का उद्घाटन किया वह दूसरी तरफ है. राज्यसभा सांसद और पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल का भी यही दावा है कि टर्मिनल-1 UPA के समय बना था. उन्होंने यह भी कहा कि टर्मिनल 1 की एक इमारत 15 साल पहले बनाई गई थी. लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने इसे बनाया था. हालांकि, L&T ने पटेल के दावे को नकार दिया है. कंपनी का कहना है कि उसने हादसे वाली बिल्डिंग का निर्माण नहीं किया था और न ही उसके रखरखाव के लिए जिम्मेदार है. बता दें कि प्रफुल्ल पटेल UPA सरकार में 2004 से 2011 तक सिविल एविएशन मिनिस्टर थे.

यहां 1400 करोड़ से ज्यादा खर्च 
अब गुजरात के राजकोट एयरपोर्ट से भी ऐसे ही हादसे की खबर सामने आई है. 29 जून यानी आज भारी बारिश के चलते राजकोट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल के बाहर पिकअप और ड्रॉप क्षेत्र में एक साइड की छत गिर गई. गनीमत रही कि जिस समय हादसा हुआ, वहां कोई नहीं था वरना जनहानि हो सकती थी. इस टर्मिनल के निर्माण पर भी पानी की तरह पैसा बहाया गया है. पिछले साल जुलाई में ही राजकोट एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण पीएम मोदी ने किया था. 1400 करोड़ से ज्यादा की लागत से इस एयरपोर्ट का विस्तार हुआ था. ऐसे में बारिश के चलते छत के गिर जाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. इस हवाईअड्डे का संचालन भी जबलपुर एयरपोर्ट की तरह AAI के पास है. पिछले तीन दिनों में हुए इन तीन एयरपोर्ट हादसों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की लागत से तैयार इन हवाईअड्डों का निर्माण क्या इतना घटिया है कि कुछ घंटों की बारिश उसे बहा ले गई?


NTPC की को-जेनरेशन परियोजनाओं में 26% हिस्सेदारी का मौका, औद्योगिक कंपनियों से मांगी रुचि

कंपनी इन परियोजनाओं में 26 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी की पेशकश कर रही है. इसका उद्देश्य उद्योगों को भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ अपने ऊर्जा समाधान कारोबार का विस्तार करना है.

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Monday, 12 October, 2026
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देश की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी NTPC लिमिटेड को-जेनरेशन परियोजनाओं के जरिए औद्योगिक ऊर्जा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इन परियोजनाओं में बिजली के साथ भाप जैसी तापीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा. कंपनी कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को मिलाकर एकीकृत बिजली आपूर्ति समाधान विकसित करने पर भी विचार कर रही है.

क्या है को-जेनरेशन तकनीक?

को-जेनरेशन को कंबाइंड हीट एंड पावर (CHP) भी कहा जाता है. इसमें एक ही ईंधन स्रोत से बिजली और तापीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है. पारंपरिक बिजली उत्पादन के दौरान निकलने वाली गर्मी का उपयोग करने से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है.

विनिर्माण क्षेत्र की कई इकाइयों को मशीनों के संचालन और उत्पादन प्रक्रिया के लिए बिजली के साथ भाप की भी जरूरत होती है. को-जेनरेशन प्रणाली इन दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा कर सकती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी और परिचालन लागत कम करने में मदद मिल सकती है.

दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति पर जोर

NTPC के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए उद्योगों को दीर्घकालिक व्यवस्था के तहत ऊर्जा उपलब्ध कराने की योजना है. इससे कंपनियों को अपनी ऊर्जा जरूरतों, लागत और आपूर्ति की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है.

कंपनी अपनी बिजली उत्पादन संबंधी विशेषज्ञता के आधार पर अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आपूर्ति मॉडल विकसित करना चाहती है. औद्योगिक साझेदारों की भागीदारी से NTPC को अपने ऊर्जा समाधान कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिलेगा.

2032 तक 149 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य

NTPC की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 91 गीगावाट से अधिक है, जबकि 35 गीगावाट से ज्यादा क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. कंपनी ने 2032 तक अपनी कुल क्षमता बढ़ाकर 149 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है. इसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से हासिल करने की योजना है.

कंपनी की विस्तार रणनीति में तापीय, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा के अलावा ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वेस्ट-टू-एनर्जी, परमाणु ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. को-जेनरेशन परियोजनाओं के लिए औद्योगिक साझेदारों को आमंत्रित करना इसी रणनीति का हिस्सा है.

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ट्रंप का दावा- रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को सहमत, जेलेंस्की ने मांगी स्पष्टता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने के लिए ‘एनर्जी सीजफायर’ पर सहमत हो गए हैं. हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि वह इन बातचीत में शामिल नहीं थे.

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Monday, 12 October, 2026
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को लेकर एक नए समझौते की घोषणा ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि दोनों देश ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने से रोकने पर सहमत हुए हैं. उन्होंने दोनों पक्षों से समझौते का उल्लंघन नहीं करने की अपील भी की. हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस घोषणा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें इस समझौते की जानकारी नहीं थी और वह इसके लागू होने की तारीख स्पष्ट करना चाहते हैं.

जेलेंस्की बोले- युद्धविराम शुरू होने की तारीख बताएं

जेलेंस्की ने समाचार वेबसाइट एक्सियोस (Axios) से बातचीत में कहा कि अगर ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस समझौते पर बातचीत की है, तो उन्हें बताया जाना चाहिए कि युद्धविराम कब से शुरू होगा. उन्होंने कहा कि यूक्रेन इसके लिए तैयार है और प्रस्ताव स्वीकार करेगा.

जेलेंस्की की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की घोषणा के बावजूद समझौते की शर्तों और समयसीमा को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि यह व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी और इसे जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा.

रूस के तेल ढांचे पर हमलों को लेकर बढ़ा दबाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका यूक्रेन पर रूस के तेल ढांचे पर हमले रोकने के लिए दबाव बना रहा है. ट्रंप ने इन हमलों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से जोड़ा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच ऊर्जा से जुड़ी एक संभावित व्यवस्था को लेकर भी तनाव बढ़ा है. इसके तहत अमेरिका घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रूस से लाखों टन डीजल आयात कर सकता है. नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें भी प्रशासन के लिए एक अहम मुद्दा हैं. हालांकि, ऊर्जा से जुड़े इस प्रस्ताव और घोषित युद्धविराम के बीच संबंधों को लेकर ट्रंप ने विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

यूक्रेन में चुनाव कराने की ट्रंप की मांग पर जेलेंस्की का जवाब

ट्रंप ने शनिवार को यूक्रेन में नए राष्ट्रपति के चुनाव की मांग भी की थी. उनका तर्क था कि युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करने को तैयार नेतृत्व की जरूरत है. इस पर जेलेंस्की ने रविवार को एबीसी न्यूज (ABC News) से बातचीत में कहा कि यूक्रेन का नेतृत्व कौन करेगा, इसका फैसला वहां के नागरिकों को करना है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के सम्मान के बावजूद देश के नेता को चुनने का अधिकार यूक्रेन की जनता के पास है.

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यदि रूस 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमत होता है, तो यूक्रेन राष्ट्रपति चुनाव कराने पर विचार करेगा. इस तरह उन्होंने चुनाव की संभावना को लंबे समय तक जारी रहने वाली शत्रुता पर रोक लगाने से जोड़ दिया.

अमेरिका के समर्थन को बताया अहम

ट्रंप के साथ मतभेदों के बावजूद जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों में अमेरिका की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि युद्ध रोकने और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन की जरूरत है.

जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों के सहयोग को भी अहम बताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा मतभेदों का असर अमेरिका और यूरोप के बीच सहयोग पर नहीं पड़ेगा. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस एकजुटता को बनाए रखना आसान नहीं है.

ईरान के साथ संघर्ष से ऊर्जा बाजारों पर दबाव

ऊर्जा युद्धविराम की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका पश्चिम एशिया में ईरान के साथ युद्ध में भी उलझा हुआ है. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है. ट्रंप ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ईरान के साथ संघर्ष का तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है और रूस-यूक्रेन के बीच घोषित ऊर्जा युद्धविराम को किस तरह लागू किया जाएगा. फिलहाल, समझौते की शुरुआत की तारीख और उसकी परिचालन शर्तें स्पष्ट नहीं हैं. जेलेंस्की की प्रतिक्रिया से भी पता चलता है कि यूक्रेन इस घोषणा के बारे में अधिक जानकारी का इंतजार कर रहा है.

 


वेदांता, TCS और आनंद राठी वेल्थ देंगे अंतरिम डिविडेंड, जानें रिकॉर्ड डेट और कितना मिलेगा पैसा

शेयर बाजार में इस हफ्ते तीन कंपनियों के निवेशकों को डिविडेंड से कमाई का मौका मिलेगा. वेदांता, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और आनंद राठी वेल्थ ने अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है.

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
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शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह सप्ताह अहम रहने वाला है. तीन कंपनियों ने अपने शेयरधारकों को अंतरिम डिविडेंड देने की घोषणा की है. इनमें माइनिंग सेक्टर की वेदांता, आईटी कंपनी TCS और वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी आनंद राठी वेल्थ शामिल हैं. हालांकि, डिविडेंड का लाभ पाने के लिए रिकॉर्ड डेट पर निवेशक की पात्रता और लागू नियमों को समझना जरूरी है.

वेदांता देगी 1,955 करोड़ रुपये का डिविडेंड

माइनिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी वेदांता ने अपने शेयरधारकों को हर शेयर पर 5 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है. कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है. इस घोषणा के तहत कंपनी कुल 1,955 करोड़ रुपये का डिविडेंड वितरित करेगी. इसके लिए 14 अक्टूबर 2026 की रिकॉर्ड डेट तय की गई है.

पिछले कारोबारी सत्र में वेदांता का शेयर 4.11 फीसदी की बढ़त के साथ 263.50 रुपये पर बंद हुआ था. शेयर ने पिछले तीन साल में 234 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं, एक साल में इसमें 51 फीसदी और दो साल में 47 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है.

TCS के हर शेयर पर 12 रुपये का डिविडेंड

टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने भी निवेशकों को अंतरिम डिविडेंड देने की घोषणा की है. कंपनी हर शेयर पर 12 रुपये का डिविडेंड देगी. इसके लिए 14 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है. कंपनी के मुताबिक, डिविडेंड की रकम 30 अक्टूबर 2026 को निवेशकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी.

पिछले कारोबारी सत्र में TCS का शेयर 4.23 फीसदी की तेजी के साथ 2,163 रुपये पर बंद हुआ था. कंपनी का मार्केट कैप 7.82 लाख करोड़ रुपये बताया गया है. हालांकि, लंबी अवधि में शेयर के प्रदर्शन पर दबाव रहा है. पिछले एक साल में इसमें 29 फीसदी, दो साल में 49 फीसदी और तीन साल में 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

आनंद राठी वेल्थ देगी 4 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड

वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी आनंद राठी वेल्थ ने अपने शेयरधारकों को हर शेयर पर 4 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देने का फैसला किया है. कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है. इस लिहाज से घोषित डिविडेंड फेस वैल्यू का 80 फीसदी है. कंपनी ने इसके लिए 15 अक्टूबर 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है. घोषणा के मुताबिक, डिविडेंड का भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाएगा.

इससे पहले कंपनी ने अप्रैल में 7 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था. पिछले कारोबारी सत्र में आनंद राठी वेल्थ का शेयर 4.68 फीसदी गिरकर 2,038.70 रुपये पर बंद हुआ था. इसके बावजूद शेयर ने पिछले तीन साल में 331.44 फीसदी का रिटर्न दिया है. एक साल में इसमें 38.14 फीसदी की बढ़त रही है, जबकि 2026 में अब तक यह 31.75 फीसदी चढ़ चुका है.

निवेशक इन बातों का रखें ध्यान

डिविडेंड पाने के लिए सिर्फ शेयर खरीदना ही पर्याप्त नहीं है. निवेशकों को कंपनी की रिकॉर्ड डेट और शेयरों के लिए लागू एक्स-डिविडेंड डेट का ध्यान रखना चाहिए. रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के पात्र शेयरधारकों की पहचान की जाती है. डिविडेंड की घोषणा का मतलब यह भी नहीं है कि शेयर की कीमत में आगे बढ़त तय है. निवेश का फैसला करते समय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर के मूल्यांकन और बाजार के जोखिमों को भी ध्यान में रखना चाहिए.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


दिवाली से पहले ऑनलाइन शॉपिंग में तेजी, दो दिन में 24,200 करोड़ रुपये की बिक्री; मोबाइल की सबसे ज्यादा मांग

रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दिनों में खरीदारी करने वालों में करीब एक-तिहाई हिस्सेदारी जेनरेशन जेड यानी युवा पीढ़ी की रही. यह आंकड़ा त्योहारी ऑनलाइन खरीदारी में युवाओं की भागीदारी को दिखाता है.

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Monday, 12 October, 2026
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दिवाली से पहले देश में ऑनलाइन खरीदारी का रुझान तेज हो गया है. त्योहारी सेल के शुरुआती दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 24,200 करोड़ रुपये का सामान बेचा. परामर्श कंपनी रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के अनुमान के मुताबिक, इस दौरान अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, अजियो और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कुल 8 से 9 करोड़ ऑर्डर दिए गए. बिक्री के मूल्य के लिहाज से मोबाइल फोन सबसे बड़ी श्रेणी रहे.

शुरुआती दो दिनों में 24,200 करोड़ रुपये की बिक्री

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के एसोसिएट पार्टनर निखिल दलाल के मुताबिक, त्योहारी सेल के शुरुआती आंकड़े भारत में ई-कॉमर्स बाजार के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं. इस दौरान करीब 6 से 6.5 करोड़ खरीदारों ने खरीदारी की. सकल व्यापारिक मूल्य (GMV) 2.5 अरब डॉलर यानी लगभग 24,200 करोड़ रुपये से अधिक रहा.

इस बढ़ोतरी में ऑर्डर की संख्या की अहम भूमिका रही. ग्राहक मोबाइल फोन के अलावा फैशन उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों पर भी खर्च कर रहे हैं. खास तौर पर किफायती फैशन उत्पादों की मांग देखने को मिली. टियर-2 शहरों और छोटे शहरों के ग्राहकों ने भी त्योहारी कपड़ों की खरीदारी की.

सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा कारोबार

रेडसीर के अनुसार, शुरुआती दो दिनों में ई-कॉमर्स का सकल व्यापारिक मूल्य सामान्य कारोबारी दिनों के औसत से करीब छह गुना अधिक रहा. अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म अपनी क्विक कॉमर्स सेवाओं का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. इन सेवाओं के जरिए रोजमर्रा के सामान की तेज डिलीवरी के साथ ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

अनुमानों के मुताबिक, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी सामान्य दिनों के मुकाबले कारोबार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, बड़े घरेलू उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री में वृद्धि बाजार की औसत रफ्तार से ज्यादा रही.

कुल बिक्री में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

शुरुआती दो दिनों की कुल बिक्री में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी करीब 38 से 40 फीसदी रहने का अनुमान है. इस श्रेणी में लगभग 9,100 से 9,600 करोड़ रुपये की बिक्री हुई.

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी करीब 25 से 27 फीसदी यानी 6,000 से 6,500 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. वहीं, फैशन उत्पादों का योगदान 15 से 18 फीसदी यानी लगभग 3,630 से 4,350 करोड़ रुपये रहा.

युवा खरीदारों की भी अहम भूमिका

रेडसीर के मुताबिक, शुरुआती दिनों में खरीदारी करने वालों में करीब एक-तिहाई हिस्सेदारी जेनरेशन जेड यानी युवा पीढ़ी की रही. यह आंकड़ा त्योहारी ऑनलाइन खरीदारी में युवाओं की भागीदारी को दिखाता है.

कुल मिलाकर, शुरुआती बिक्री में मोबाइल फोन की मजबूत मांग के साथ फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की खरीदारी ने भी योगदान दिया. छोटे शहरों और नए ग्राहकों की भागीदारी से त्योहारी ई-कॉमर्स बाजार का दायरा बढ़ता नजर आया.
 


अक्टूबर में खुलेंगे 12 कंपनियों के IPO, जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,000 करोड़ रुपये से बड़े इश्यू पर नजर

इन कंपनियों का संबंध टेक्नोलॉजी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और जल उपचार जैसे क्षेत्रों से है, जिनमें जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ सबसे बड़ा आकर्षण है.

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Monday, 12 October, 2026
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अक्टूबर में प्राइमरी मार्केट में हलचल बढ़ने वाली है. जियो प्लेटफॉर्म्स, जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग और अवाडा इलेक्ट्रो समेत करीब 12 कंपनियां आईपीओ के जरिए पूंजी जुटाने की तैयारी में हैं. इन कंपनियों का संबंध टेक्नोलॉजी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और जल उपचार जैसे क्षेत्रों से है, जिनमें जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ सबसे बड़ा आकर्षण है, जिसका आकार 30,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है. इस साल अब तक 96 आईपीओ के जरिए कंपनियां 1.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा चुकी हैं.

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ होगा सबसे बड़ा

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ इस महीने के सबसे चर्चित निर्गमों में शामिल है. सूत्रों के मुताबिक, इसका आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलने और 23 अक्टूबर को बंद होने की उम्मीद है. इसका आकार 30,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है. यदि यह योजना तय आकार के साथ आगे बढ़ती है, तो यह भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है.

जेटवर्क और अवाडा इलेक्ट्रो भी जुटाएंगी बड़ी रकम

टेक्नोलॉजी आधारित विनिर्माण प्लेटफॉर्म जेटवर्क करीब 5,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इसके प्रस्तावित आईपीओ में 2,600 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि बाकी राशि मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बिक्री के जरिए जुटाई जाएगी. कंपनी का निर्गम 15 अक्टूबर को खुलने और 19 अक्टूबर को बंद होने का प्रस्ताव है.

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी अवाडा इलेक्ट्रो आईपीओ के जरिए करीब 7,600 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. वहीं, पारस हेल्थकेयर का प्रस्तावित आईपीओ 1,800 करोड़ रुपये और एनडीआर इनविट ट्रस्ट का निर्गम करीब 750 करोड़ रुपये का हो सकता है.

अक्टूबर में इन आईपीओ पर भी रहेगी नजर

एचडी फायर प्रोटेक्ट ने 712 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए 258 से 271 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. कंपनी का निर्गम 13 अक्टूबर को खुलने और 15 अक्टूबर को बंद होने वाला है. इस आईपीओ में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी बिक्री के जरिए पूरी राशि जुटाने का प्रस्ताव है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ग्राहक अनुभव सेवाएं देने वाली फ्यूजन सीएक्स ने 702 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए 275 से 289 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. इसका निर्गम 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक खुला रहेगा.

रक्षा तकनीक क्षेत्र की कंपनी टोन्बो इमेजिंग, बोनफिग्लियोली समूह की भारतीय इकाई बोनफिग्लियोली ट्रांसमिशंस और चिकित्सा उपकरण बनाने वाली सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज के आईपीओ भी 15 से 19 अक्टूबर के बीच आने का प्रस्ताव है. टोन्बो इमेजिंग ने 1.22 करोड़ तक शेयरों और बोनफिग्लियोली ट्रांसमिशंस ने 4.32 करोड़ तक शेयरों की बिक्री पेशकश की योजना बनाई है. सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज के प्रस्तावित निर्गम में 1.38 करोड़ शेयरों की बिक्री शामिल है.

गुजरात विक्ट्री फोर्जिंग्स ने भी 1.97 करोड़ तक शेयरों के आईपीओ का प्रस्ताव रखा है. वहीं, जल एवं अपशिष्ट जल उपचार समाधान देने वाली एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज ने 150 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करने और 1.23 करोड़ शेयरों की बिक्री पेशकश वाला आईपीओ प्रस्तावित किया है.

इस साल आईपीओ से जुटाए गए 1.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा

प्राइमरी मार्केट में इस साल अब तक 96 आईपीओ आ चुके हैं. इनके जरिए कंपनियों ने 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाई है. सितंबर में ही 35 आईपीओ बाजार में आए थे. इससे कंपनियों की ओर से शेयर बाजार के जरिए पूंजी जुटाने की सक्रियता का पता चलता है.

हालांकि, आईपीओ बाजार की गतिविधियों पर शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर पड़ सकता है. ऐसे में कंपनियों के लिए निर्गम का सही समय चुनना महत्वपूर्ण रहेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, साल की दूसरी छमाही में भी भारतीय प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं. हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक घटनाक्रम कंपनियों के आईपीओ लाने के समय को प्रभावित कर सकते हैं.

उनके अनुसार, गुणवत्तापूर्ण कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है. घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास उपलब्ध पूंजी और विदेशी निवेशकों की चुनिंदा भागीदारी से भी सार्वजनिक निर्गम बाजार को समर्थन मिल रहा है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


सेंसेक्स-निफ्टी की तेजी बरकरार रहेगी या फिर बिकवाली का दबाव? आज इन संकेतों और शेयरों पर रहेगी नजर

शुक्रवार सेंसेक्स 879 अंक चढ़कर 72,472 पर और निफ्टी 289 अंक बढ़कर 22,520 पर बंद हुआ था. वहीं, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है.

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के बीच होने की उम्मीद है. शुरुआती कारोबार में गिफ्ट निफ्टी करीब 25 अंक चढ़कर 22,630 के पार पहुंच गया था. इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी घरेलू बाजार को राहत मिल सकती है. हालांकि, एशियाई बाजारों के मिले-जुले संकेत और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की तेजी को सीमित कर सकते हैं.

इससे पहले शुक्रवार को सेंसेक्स 879.09 अंक यानी 1.23 फीसदी की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ था. निफ्टी भी 288.65 अंक यानी 1.30 फीसदी चढ़कर 22,520.45 पर पहुंच गया था. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में गिरावट रही. गुरुवार की भारी बिकवाली के बाद आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ था.

कच्चे तेल और ग्लोबल संकेतों पर नजर

सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 1.5 फीसदी गिरकर 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 1.6 फीसदी फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है.

एशियाई बाजारों में कारोबार का रुख मिला-जुला रहा. जापान का निक्केई मामूली गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी करीब 2.4 फीसदी नीचे था. दूसरी ओर, हांगकांग का हैंगसेंग करीब 1 फीसदी की बढ़त पर था.

अमेरिकी बाजार शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे. डाउ जोंस 51,650 के ऊपर पहुंचा, जबकि नैस्डैक 173 अंक चढ़कर बंद हुआ. हालांकि, डॉलर इंडेक्स में मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर बाजार की नजर बनी रहेगी. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 9 अक्टूबर को लगातार 11वें कारोबारी सत्र में बिकवाली की थी. ऐसे में शुक्रवार की तेजी के बाद बाजार में खरीदारी का सिलसिला जारी रहना अहम होगा.

गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को रिकवरी

गुरुवार को सेंसेक्स 1,045 अंक यानी 1.44 फीसदी गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ था. निफ्टी भी 22,231.80 पर आ गया था और कारोबार के दौरान 22,179 तक फिसल गया था. उस दिन बाजार में भारी बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 11 लाख करोड़ रुपये की कमी आई थी.

इसके बाद शुक्रवार को आई तेजी से बाजार को कुछ राहत मिली. अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सेंसेक्स और निफ्टी अपनी बढ़त बरकरार रख पाते हैं या नहीं. कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों का रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे कारोबारी धारणा को प्रभावित कर सकते हैं.

इन शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को HCL टेक्नोलॉजीज, RBL बैंक, KEC इंटरनेशनल, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, डीमार्ट, पूनावाला फिनकॉर्प, आनंद राठी वेल्थ, केन फिन होम्स, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज, मीशो, इन्फोसिस और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के शेयरों में कारोबारी गतिविधियों के लिहाज से हलचल रह सकती है.

HCL टेक्नोलॉजीज और RBL बैंक आज वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेंगे. निवेशकों की नजर इन कंपनियों के मुनाफे, आय और प्रबंधन के कारोबारी अनुमान पर रहेगी. RBL बैंक के डिपॉजिट सालाना आधार पर 34 फीसदी बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये हो गए हैं.

KEC इंटरनेशनल को बिजली ट्रांसमिशन और अन्य कारोबार से जुड़े 1,030 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं. इनमें भूटान और सऊदी अरब में ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाएं शामिल हैं. वहीं, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में अल्फा वेव वेंचर्स की करीब 1.6 फीसदी हिस्सेदारी की संभावित बिक्री की खबर है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस सौदे का आकार करीब 1,691 करोड़ रुपये हो सकता है.

महिंद्रा एंड महिंद्रा का सितंबर में उत्पादन सालाना आधार पर 19.2 फीसदी बढ़कर 1.21 लाख गाड़ियों पर पहुंच गया. कंपनी की बिक्री 16.3 फीसदी बढ़कर 1.13 लाख गाड़ियां रही, जबकि निर्यात में 8.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

तिमाही नतीजों वाले शेयरों पर भी नजर

डीमार्ट की संचालक एवेन्यू सुपरमार्ट्स का सितंबर तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 8.5 फीसदी बढ़कर करीब 743 करोड़ रुपये रहा. कंपनी की परिचालन आय 17.8 फीसदी बढ़कर 19,644 करोड़ रुपये पहुंच गई.

पूनावाला फिनकॉर्प का मुनाफा पिछले साल की समान तिमाही के 74.2 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 375 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी की कुल आय 70 फीसदी बढ़कर 2,625 करोड़ रुपये रही. दूसरी ओर, आनंद राठी वेल्थ का कंसोलिडेटेड मुनाफा 10.4 फीसदी घटकर 88.96 करोड़ रुपये रह गया, हालांकि परिचालन आय करीब 16 फीसदी बढ़कर 356 करोड़ रुपये पहुंच गई.

केन फिन होम्स का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 9.2 फीसदी बढ़कर 274.61 करोड़ रुपये रहा. वहीं, कॉर्डेलिया क्रूज की संचालक वॉटरवेज लीजर टूरिज्म ने सितंबर तिमाही में 58.5 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में कंपनी को 8.9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. कंपनी की आय 30.4 फीसदी बढ़कर 133 करोड़ रुपये रही.

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, वारी रिन्यूएबल और पावर ग्रिड के अपडेट

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने जर्मनी की नागारो एसई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर करीब 94.04 फीसदी कर ली है. कंपनी ने अधिग्रहण प्रस्ताव की अतिरिक्त स्वीकृति अवधि के दौरान नागारो के 13.35 लाख शेयर हासिल किए.

वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज को 5 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के लिए एक सरकारी उपक्रम से स्वीकृति पत्र मिला है. परियोजना को 12 महीने में पूरा किया जाना है, जिसके बाद कंपनी 10 वर्षों तक इसका संचालन और रखरखाव भी करेगी.

पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने राजस्थान में 20 गीगावाट क्षमता वाले नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से बिजली निकासी के लिए ट्रांसमिशन परियोजना पूरी कर ली है. कंपनी के मुताबिक, यह परियोजना 22 सितंबर 2026 से चालू है और वाणिज्यिक परिचालन की सूचना 11 अक्टूबर को मिली.

मीशो और इन्फोसिस से जुड़े अपडेट

ई-कॉमर्स कंपनी मीशो की मेगा ब्लॉकबस्टर सेल 2026 के पहले दिन ऑर्डर में सालाना आधार पर करीब 75 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी के मुताबिक, सेल शुरू होने के 15 मिनट के भीतर एक समय ऑर्डर की रफ्तार 75,000 प्रति मिनट से अधिक पहुंच गई.

इन्फोसिस ने कहा है कि अमेरिका के स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) के तहत आवेदनों पर लगी रोक से उसके कारोबार पर बड़े असर की आशंका नहीं है. कंपनी ने कहा कि वह अमेरिका में लागू कानूनों और नियमों का पालन करती रहेगी.

कुल मिलाकर, सोमवार को बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के साथ कंपनियों से जुड़ी खबरों पर निर्भर करेगी. निवेशकों की नजर खास तौर पर HCL टेक्नोलॉजीज और RBL बैंक के नतीजों तथा KEC इंटरनेशनल और लेंसकार्ट से जुड़े घटनाक्रम पर रहेगी.

 


रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI की नई रणनीति, डॉलर से लेकर फॉरेक्स ट्रेडिंग तक बदले नियम

भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को सहारा देने और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव कम करने के लिए कई नियामकीय बदलाव किए हैं. इनका उद्देश्य डॉलर की मांग को व्यवस्थित करना, करेंसी डेरिवेटिव कारोबार में जोखिम सीमित करना और बाजार में नियमों का पालन सुनिश्चित करना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 10 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
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रुपये में लगातार गिरावट और विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई अहम कदम उठाए हैं. इसके तहत तीन सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना उनकी जरूरत के मुताबिक डॉलर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. साथ ही, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार में बिना वास्तविक जोखिम के सौदे करने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है.

तीन सरकारी तेल कंपनियों को विशेष व्यवस्था के तहत मिलेगा डॉलर

RBI ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था की है. इसके तहत केंद्रीय बैंक चुनिंदा बैंकों के माध्यम से इन कंपनियों को रोजाना उनकी जरूरत के मुताबिक डॉलर उपलब्ध कराएगा.

यह सुविधा 12 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी. इस व्यवस्था से इन सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी. तेल कंपनियों को कच्चे तेल के आयात के लिए बड़े पैमाने पर डॉलर की जरूरत होती है.

फॉरेक्स मार्केट में ट्रेडिंग के नियम सख्त

रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम सीमित करने के लिए RBI ने फॉरेक्स डेरिवेटिव से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है. नए नियमों के तहत अधिकृत डीलर अब ग्राहकों को रद्द किए जा चुके विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं देंगे. हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट की मैच्योरिटी पूरी होने पर उसे आगे बढ़ाने यानी रोलओवर की सुविधा जारी रहेगी.

इसके अलावा, बिना किसी वास्तविक लेन-देन या अंतर्निहित जोखिम के विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव में कारोबार करने की सीमा घटा दी गई है. पहले यह सीमा 100 मिलियन डॉलर थी, जिसे अब घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है.

यह बदलाव मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर रुपये से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट पर भी लागू होगा. यहां भी बिना वास्तविक लेन-देन या जोखिम के पोजीशन लेने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है.

विदेशी मुद्रा डीलरों के लिए नया रिजर्व नियम

RBI ने विदेशी मुद्रा डीलरों के लिए 'फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व' (FERR) नाम से एक नई व्यवस्था शुरू की है. इसके तहत डीलरों को रुपये से जुड़े प्रत्येक पात्र डेरिवेटिव सौदे की कुल रकम का 20 फीसदी हिस्सा रिजर्व के तौर पर रखना होगा.

यह नियम उन पात्र सौदों पर लागू होगा, जो चालू खाते से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए किए जाते हैं और जिनमें ग्राहक रुपये देकर विदेशी मुद्रा खरीदता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन को मजबूत करना है.

वैश्विक कारणों से रुपये पर दबाव

पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अन्य वैश्विक घटनाक्रमों के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है. पिछले एक साल में भारतीय मुद्रा करीब 8 फीसदी कमजोर हुई है. ऐसे में RBI विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और रुपये में तेज उतार-चढ़ाव को सीमित करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है.

हालांकि, देश का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद घटा है. RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था. इसके बाद 2 अक्टूबर को समाप्त चार सप्ताह की अवधि में इसमें करीब 51.1 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. रिजर्व बैंक के इन नए कदमों से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग के प्रबंधन और डेरिवेटिव कारोबार में जोखिम सीमित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

 


भारत में 3D प्रिंटिंग को बढ़ावा देने की तैयारी, NSAM 2.0 से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार

नई रणनीति में स्वदेशी तकनीकों को व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल के योग्य बनाने, बौद्धिक संपदा विकसित करने, डिजिटल तकनीकों को एकीकृत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले उत्पाद तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 10 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
BWHindia

भारत सरकार देश में 3D प्रिंटिंग तकनीक और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए नेशनल स्ट्रैटेजी फॉर एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (NSAM) के दूसरे चरण NSAM 2.0 की रूपरेखा तैयार कर रही है. इसके तहत स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण, उपकरणों और कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर बनाने और विभिन्न उद्योगों में इस तकनीक के इस्तेमाल का विस्तार करने पर जोर दिया जाएगा. फरवरी 2022 में शुरू की गई पहली रणनीति के तहत अब तक 1.54 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है, 56 स्टार्टअप को समर्थन मिला है और 65 स्वदेशी तकनीकों के विकास में मदद की गई है.

NSAM 2.0 में स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण पर जोर

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) NSAM 2.0 की रूपरेखा तैयार कर रहा है. इसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, उद्योगों में 3D प्रिंटिंग को अपनाने की गति तेज करना और वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना है.

नई रणनीति में स्वदेशी तकनीकों को व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल के योग्य बनाने, बौद्धिक संपदा विकसित करने, डिजिटल तकनीकों को एकीकृत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले उत्पाद तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा, क्लस्टर विकसित करके मशीनों और कच्चे माल की लागत कम करने की योजना भी प्रस्तावित है.

NSAM 2.0 अभी अवधारणा तैयार करने के चरण में है. इसमें स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, रक्षा क्षेत्र में 3D प्रिंटिंग के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट शुरू करना भी शामिल है.

पहली रणनीति के तहत 1.54 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

भारत की पहली नेशनल स्ट्रैटेजी फॉर एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग फरवरी 2022 में शुरू की गई थी. इसके तहत वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करने और भारत की जीडीपी में करीब 1 अरब डॉलर का योगदान देने का लक्ष्य रखा गया था.

रणनीति के अन्य लक्ष्यों में भारत की जरूरतों के अनुरूप 50 तकनीकों का विकास, 100 स्टार्टअप को समर्थन, 500 नए उत्पाद तैयार करना, एक लाख कुशल कामगारों को प्रशिक्षण देना और 10 विनिर्माण क्षेत्रों में क्षमताएं विकसित करना शामिल है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1.54 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो शुरुआती लक्ष्य से ज्यादा है. इसके अलावा, 56 स्टार्टअप को समर्थन मिला है और सामग्री, मशीनों, डिजाइन प्रक्रियाओं तथा तैयार उत्पादों से जुड़ी 65 स्वदेशी तकनीकों के विकास में मदद की गई है. सरकार ने अनुसंधान, तकनीक विकास, उद्योगों के साथ सहयोग और कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए सात विशेष विकास एवं तैनाती केंद्र भी स्थापित किए हैं.

क्या है 3D प्रिंटिंग तकनीक?

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग को आम तौर पर 3D प्रिंटिंग कहा जाता है. इसमें डिजिटल डिजाइन के आधार पर सामग्री की परत-दर-परत जमावट करके किसी वस्तु का निर्माण किया जाता है. इस प्रक्रिया में कंप्यूटर आधारित डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मटेरियल साइंस का इस्तेमाल होता है.

इस तकनीक के जरिए पॉलिमर, धातु, सिरेमिक, कंपोजिट और जैविक सामग्री से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. पारंपरिक विनिर्माण प्रक्रियाओं के मुकाबले यह जटिल डिजाइन वाले पुर्जे बनाने और जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड उत्पाद तैयार करने में उपयोगी हो सकती है. 3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल एयरोस्पेस, रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और फोटोनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ रहा है.

अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में बढ़ रहा इस्तेमाल

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास से जुड़े स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस ने मई 2024 में अपने अग्निबाण SOrTeD मिशन के तहत एक ही हिस्से में 3D प्रिंट किया गया सेमी-क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन इस्तेमाल किया था. इस मिशन ने स्वदेशी अंतरिक्ष उपकरणों के विकास में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को प्रदर्शित किया.

रक्षा क्षेत्र में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. भारतीय सेना ने अहमदाबाद में 12 सप्ताह में दो मंजिला आवासीय इकाई का निर्माण किया. इसके अलावा, लद्दाख जैसे परिचालन क्षेत्रों में रक्षा बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी 3D प्रिंटिंग का उपयोग बढ़ाया गया है.

सशस्त्र बल रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल यानी MRO गतिविधियों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहे हैं. इससे जरूरत के अनुसार पुर्जे तैयार करने और कुछ मामलों में आपूर्ति संबंधी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है.

स्वास्थ्य और इलेक्ट्रॉनिक्स में भी नई संभावनाएं

स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों और मरीजों की जरूरत के अनुरूप इम्प्लांट विकसित करने के लिए 3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. MeitY ने प्राकृतिक रेशम आधारित इम्प्लांट के विकास से जुड़े काम को समर्थन दिया है. वहीं, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड स्वदेशी बायोसिरेमिक सामग्री से 3D प्रिंटेड बोन ग्राफ्ट विकसित करने की परियोजना को सहयोग दे रहा है.

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी इस तकनीक के जरिए बैटरी, एंटीना, कैपेसिटर और वेरिस्टर जैसे कंपोनेंट तैयार करने के प्रदर्शन किए गए हैं. भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के जरिए फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट के ब्लॉक तैयार करने की क्षमता भी प्रदर्शित की है.

इन क्षेत्रों में तकनीक का विस्तार होने से स्वदेशी उत्पादों के विकास और आयात पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं बन सकती हैं. हालांकि, इसका वास्तविक असर उत्पादन लागत, गुणवत्ता, बड़े पैमाने पर विनिर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल पर निर्भर करेगा.

निर्माण क्षेत्र में लागत और उत्सर्जन घटाने की संभावना

निर्माण क्षेत्र में भी 3D प्रिंटिंग को घरों और अन्य संरचनाओं के निर्माण के वैकल्पिक तरीके के रूप में देखा जा रहा है. केल्विन 6K प्रो नामक ऑन-साइट निर्माण प्रिंटर ने कम कार्बन वाले जियोपॉलिमर पदार्थों का इस्तेमाल करके 2,500 वर्ग फुट के घर को 30 दिनों से कम समय में बनाने की क्षमता प्रदर्शित की है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती अनुप्रयोगों में पारंपरिक सीमेंट आधारित निर्माण की तुलना में सामग्री और लॉजिस्टिक्स लागत में 30% तक तथा उत्सर्जन में 90% तक की कमी की संभावना जताई गई है. हालांकि, ये संभावित लाभ हैं. वास्तविक बचत परियोजना की प्रकृति, इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण प्रक्रिया पर निर्भर करेगी.

सरकार और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की तैयारी

MeitY ने मार्च 2026 में दूसरे नेशनल एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सिम्पोजियम का आयोजन किया था. इसमें NSAM 2.0, रक्षा क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल, उद्योगों में इसे अपनाने और अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी पहलों पर चर्चा हुई.

सरकार स्कूल स्तर पर भी उभरती तकनीकों से परिचित कराने की कोशिश कर रही है. इसके लिए अटल टिंकरिंग लैब्स के माध्यम से कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों को 3D प्रिंटर, रोबोटिक्स किट और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों तक पहुंच दी जा रही है.

2035 तक 149 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है वैश्विक बाजार

सरकार की ओर से उद्धृत अनुमानों के मुताबिक, वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग मशीनों का बाजार 2035 तक 149 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. वहीं, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला का आकार 18 अरब डॉलर से बढ़कर 112 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. ये भविष्य से जुड़े बाजार अनुमान हैं, मौजूदा बाजार का आकार नहीं. भारत के लिए NSAM 2.0 इस बढ़ते बाजार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने का अवसर बन सकता है.

कुल मिलाकर, नई रणनीति के जरिए सरकार स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण, स्टार्टअप को समर्थन, उपकरणों की किफायती उपलब्धता और उद्योगों में 3D प्रिंटिंग के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहती है. हालांकि, इसके परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि प्रस्तावित योजनाओं को किस तरह लागू किया जाता है और उद्योग इन्हें कितनी तेजी से अपनाते हैं.

 


सेबी के नए सेटलमेंट नियम नोटिफाई, ₹10 लाख तक के मामलों का होगा फास्ट-ट्रैक निपटारा

नए नियमों के तहत कंपनी के खातों में गड़बड़ी या फंड के दुरुपयोग जैसे मामलों में भी सेटलमेंट का विकल्प उपलब्ध रहेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 10 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
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शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सेटलमेंट रेगुलेशंस, 2026 को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया है. नए नियमों का उद्देश्य नियामकीय उल्लंघनों से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आसान बनाना है. इसके तहत 10 लाख रुपये तक की सेटलमेंट राशि वाले मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शुरू की गई है. साथ ही, गलत तरीके से कमाए गए पैसे की वसूली और सेटलमेंट राशि की गणना से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं.

सेटलमेंट राशि तय करने का तरीका बदला

सेबी के नए नियमों के तहत सेटलमेंट राशि निर्धारित करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. अब इसमें तीन प्रमुख पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा. इनमें सेटलमेंट अमाउंट, गलत तरीके से कमाए गए पैसे की वापसी और सुधारात्मक व नियामकीय शर्तें शामिल हैं.

पहले कुछ मामलों में गलत तरीके से कमाई गई रकम या निवेशकों को हुए नुकसान को सेटलमेंट राशि की गणना में दो बार शामिल किए जाने की समस्या सामने आती थी. नए फ्रेमवर्क में इस दोहरी गणना यानी डबल काउंटिंग को खत्म करने का प्रावधान किया गया है.

अब सेटलमेंट की शुरुआती राशि तय करते समय गलत कमाई या नुकसान की रकम को शामिल नहीं किया जाएगा. इसकी गणना संबंधित उल्लंघन के लिए कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम जुर्माने के आधार पर होगी. इसके बाद मामले की गंभीरता, नियामकीय कार्रवाई किस चरण में है और राहत देने या सख्ती बढ़ाने वाले अन्य कारकों के आधार पर अंतिम राशि निर्धारित की जाएगी. गलत तरीके से कमाई गई रकम या निवेशकों को हुए नुकसान की राशि स्पष्ट होने पर उसकी वसूली अलग से की जाएगी.

₹10 लाख तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था

छोटे और कम गंभीर मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए सेबी ने फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शुरू की है. इसके तहत दो तरह के रास्ते बनाए गए हैं. पहले रास्ते में सेटलमेंट राशि के आधार पर मामलों का निपटारा किया जाएगा. जिन मामलों में सेटलमेंट राशि 10 लाख रुपये तक होगी, उन्हें सीधे इंटरनल कमेटी से पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजा जाएगा. इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में प्रक्रिया को सरल बनाना और निपटारे में लगने वाला समय कम करना है.

दूसरे रास्ते में उल्लंघन की प्रकृति को आधार बनाया जाएगा. इसके तहत डिस्क्लोजर यानी जरूरी जानकारी के खुलासे से जुड़ी कुछ गलतियों के मामलों में सेबी नोटिस भेजकर निर्धारित राशि का भुगतान करने पर मामला समाप्त करने का अवसर देगा.

गंभीर मामलों में भी सेटलमेंट का विकल्प

नए नियमों के तहत कंपनी के खातों में गड़बड़ी या फंड के दुरुपयोग जैसे मामलों में भी सेटलमेंट का विकल्प उपलब्ध रहेगा. हालांकि, इसके लिए संबंधित कंपनी को जरूरी जानकारी का पूरा खुलासा करना होगा. इसके अलावा, गलत तरीके से दूसरी जगह भेजी गई रकम को वापस लाने की शर्त भी पूरी करनी होगी.

इससे सेबी का उद्देश्य मामलों के निपटारे में तेजी लाने के साथ-साथ उल्लंघन करने वाली कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है. गंभीर मामलों में राहत देने से पहले जरूरी शर्तों का पालन भी सुनिश्चित किया जाएगा.

सेबी ने पिछले महीने दी थी मंजूरी

सेबी के बोर्ड ने पिछले महीने हुई बैठक में इन बदलावों को मंजूरी दी थी. अब सेटलमेंट रेगुलेशंस, 2026 को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया गया है. नए नियमों से नियामकीय उल्लंघनों से जुड़े मामलों में सेटलमेंट की गणना, रकम की वसूली और निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है.

 


ग्रामीण इलाकों में बढ़ी रोजगार की मांग, सितंबर में 25.2% का उछाल; 1.56 करोड़ परिवारों ने मांगा काम

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब मानसून के बाद कृषि गतिविधियों और रबी फसल की बुवाई के बीच ग्रामीण श्रम बाजार में रोजगार की मांग में बदलाव देखने को मिल रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 10 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
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ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना VB-G RAM-G के तहत सितंबर 2026 में काम की मांग में अगस्त के मुकाबले 25.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस दौरान करीब 1.56 करोड़ परिवारों ने रोजगार की मांग की, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 1.25 करोड़ था. वहीं, रोजगार मांगने वाले लोगों की संख्या भी बढ़कर 1.88 करोड़ हो गई. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब मानसून के बाद कृषि गतिविधियों और रबी फसल की बुवाई के बीच ग्रामीण श्रम बाजार में रोजगार की मांग में बदलाव देखने को मिल रहा है.

सितंबर में 1.56 करोड़ परिवारों ने मांगा काम

ग्रामीण विकास मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, VB-G RAM-G योजना के तहत सितंबर में काम मांगने वाले परिवारों की संख्या बढ़कर 1.56 करोड़ हो गई. अगस्त में यह संख्या 1.25 करोड़ थी. इस तरह एक महीने में रोजगार की मांग में 25.2% की बढ़ोतरी हुई. इससे पहले जुलाई में करीब 1.01 करोड़ परिवारों ने इस योजना के तहत काम की मांग की थी. जुलाई में ही VB-G RAM-G अधिनियम, 2025 के तहत यह योजना शुरू की गई थी.

रोजगार मांगने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी

योजना के तहत रोजगार की मांग करने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. अगस्त में करीब 1.54 करोड़ लोगों ने काम की मांग की थी, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा बढ़कर 1.88 करोड़ हो गया. परिवारों और व्यक्तियों, दोनों स्तरों पर रोजगार की मांग में हुई यह बढ़ोतरी ग्रामीण क्षेत्रों में काम की जरूरत को दर्शाती है. हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आर्थिक दबाव या बेरोजगारी की स्थिति का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.

साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी

VB-G RAM-G योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए सालाना गारंटीकृत रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान है. खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, न्यूनतम दैनिक मजदूरी 300 रुपये तय की गई है.

यह योजना ग्रामीण परिवारों को आय का एक वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाई गई है. कृषि कार्यों के बीच के समय में भी ग्रामीण परिवार इसके तहत रोजगार की मांग कर सकते हैं.

मानसून और रबी सीजन के बीच बढ़ी मांग पर नजर

सितंबर में रोजगार की मांग बढ़ने के पीछे मानसून के बाद कृषि गतिविधियों में बदलाव और रबी फसल की बुवाई से पहले का अंतर संभावित कारण हो सकते हैं. इस अवधि में ग्रामीण श्रमिकों की काम की उपलब्धता अलग-अलग क्षेत्रों में बदल सकती है.

आने वाले महीनों में रबी सीजन की शुरुआत और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के साथ इस योजना के तहत काम की मांग का रुझान अहम रहेगा. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रामीण परिवारों की रोजगार गारंटी योजना पर निर्भरता किस दिशा में बढ़ रही है.

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