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₹1 लाख करोड़ की मेगा डील! एयरफोर्स के लिए भारत में बनेंगे 60 नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट
रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये के मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 49 minutes ago
भारतीय वायुसेना के बेड़े को मजबूत करने और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भारत में ही 60 नए सैन्य परिवहन विमान बनाए जाने का प्रस्ताव है. अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और ब्राजील की एम्ब्रेयर के बीच इस प्रोजेक्ट के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है.
टाटा, अडानी, महिंद्रा और HAL को बुलावा
रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोग्राम के लिए टाटा समूह, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, महिंद्रा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL समेत प्रमुख भारतीय कंपनियों को शामिल किया है. ये कंपनियां किसी वैश्विक ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर के साथ साझेदारी कर भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए बोली लगाएंगी. चयन प्रक्रिया में तकनीकी मूल्यांकन, एयरक्राफ्ट ट्रायल और टेक्नो-कमर्शियल प्रस्तावों को आधार बनाया जाएगा. प्रोजेक्ट के बड़े आकार और तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए अंतिम चयन में दो साल से ज्यादा का समय लग सकता है.
C-130J और C-390 के बीच हो सकता है मुकाबला
भारतीय वायुसेना की तकनीकी जरूरतों को देखते हुए इस दौड़ में मुख्य मुकाबला लॉकहीड मार्टिन के C-130J और एम्ब्रेयर के C-390 मिलेनियम एयरक्राफ्ट के बीच होने की संभावना है. लॉकहीड मार्टिन ने भारत में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को अपना साझेदार बनाया है. टाटा समूह पहले से ही एयरबस के साथ मिलकर वडोदरा में C-295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का निर्माण कर रहा है.
दूसरी ओर, एम्ब्रेयर ने पहले इस प्रोग्राम के लिए महिंद्रा के साथ साझेदारी की घोषणा की थी. हालांकि, कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ भी संभावित साझेदारी पर विचार कर सकती है. एम्ब्रेयर और अडानी ने हाल ही में नागरिक यात्री विमानों के निर्माण से जुड़े सहयोग की भी घोषणा की है.
AN-32 और IL-76 बेड़े की लेंगे जगह
नए मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना के पुराने AN-32 और IL-76 विमानों के बेड़े को चरणबद्ध तरीके से बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे. इनका इस्तेमाल सैन्य बलों की रणनीतिक, सामरिक और ऑपरेशनल एयरलिफ्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा.
C-295 प्रोग्राम के बाद यह भारत में स्थापित होने वाली दूसरी बड़ी मिलिट्री एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग लाइन हो सकती है. करीब 1 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ भारतीय वायुसेना की परिवहन क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है, बल्कि देश में एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी बड़ा बढ़ावा मिल सकता है.
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