केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, उत्तराखंड और सिक्किम में राज्यपालों की नियुक्ति, ओम प्रकाश माथुर और राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का भी तबादला
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्तियों को मंजूरी दी है. इनमें केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, उत्तराखंड और सिक्किम शामिल हैं. राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इन नियुक्तियों में कुछ मौजूदा राज्यपालों का तबादला भी किया गया है, जबकि चार राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं.
किस राज्य में किसे बनाया गया राज्यपाल?
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सिक्किम के मौजूदा राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. वहीं, केरल के मौजूदा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया है.
इसके अलावा, ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल होंगी. धाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि दुष्यंत गौतम सिक्किम के नए राज्यपाल होंगे.
पदभार संभालने के बाद प्रभावी होंगी नियुक्तियां
राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति के मुताबिक, सभी नियुक्तियां संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी.
इस फेरबदल के तहत ओम प्रकाश माथुर और राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को नए राज्यों में जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, ओडिशा, कर्नाटक, उत्तराखंड और सिक्किम में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है. राष्ट्रपति भवन ने इन नियुक्तियों से संबंधित विज्ञप्ति 12 अक्टूबर को जारी की थी. राज्यवार नियुक्तियों की सूची स्पष्ट करेंदोहराव कम करके कॉपी कसेंअंतिम पैराग्राफ को हटाएं
लगभग चार दशक के अपने सैन्य करियर के दौरान एयर मार्शल दीक्षित कई महत्वपूर्ण अभियानों और गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं. इनमें ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायु सेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है. वर्तमान में वायु सेना के वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर तैनात दीक्षित 31 अक्टूबर को वायु सेना प्रमुख का पद संभालेंगे. वह मौजूदा एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की जगह लेंगे, जो इसी दिन सेवानिवृत्त होंगे. करीब चार दशक के सैन्य करियर में दीक्षित ने वायु सेना के कई महत्वपूर्ण परिचालन और कमान संबंधी पदों पर जिम्मेदारियां संभाली हैं.
दिसंबर 1986 में वायु सेना में शामिल हुए
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित दिसंबर 1986 में भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे. वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ का पद संभालने से पहले वह हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CISC) और सेंट्रल एयर कमांड में एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं.
उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज, बांग्लादेश और नेशनल डिफेंस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है. दीक्षित को विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों को उड़ाने का 3,500 घंटे से अधिक का अनुभव है. इनमें फ्रांस में बने मिराज-2000 और स्वदेशी तेजस शामिल हैं. वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं.
कई महत्वपूर्ण अभियानों में निभाई भूमिका
लगभग चार दशक के अपने सैन्य करियर के दौरान एयर मार्शल दीक्षित कई महत्वपूर्ण अभियानों और गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं. इनमें ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं.
उन्होंने परिचालन के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. वह पश्चिमी क्षेत्र में एक फ्रंटलाइन फाइटर एयर बेस और दक्षिणी क्षेत्र में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाल चुके हैं.
कई सैन्य सम्मानों से सम्मानित
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को उनकी सेवाओं के लिए कई सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है. उन्हें वर्ष 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया. 31 अक्टूबर को पदभार संभालने के बाद एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायु सेना के 29वें चीफ ऑफ एयर स्टाफ होंगे.
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब सरकार ₹23,731 करोड़ के गोबरधन (GOBARdhan) ढांचे को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिनर्जी डायनेमिक्स (REnergy Dynamics) के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वरुण कराड को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की 2026-27 की राष्ट्रीय जैव ऊर्जा समिति के तहत संपीड़ित बायोगैस (CBG) समिति का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब सरकार ₹23,731 करोड़ के गोबरधन (GOBARdhan) ढांचे को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. सीबीजी के उत्पादन और परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए इस महीने विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.
गोबरधन ढांचे का उद्देश्य सीबीजी परियोजनाओं के विस्तार से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को दूर करना है. इनमें मांग की स्पष्टता, कीमतों की स्थिरता, परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और पूंजीगत सहायता जैसे मुद्दे शामिल हैं. सरकार को उम्मीद है कि योजना की अवधि के दौरान देश में सीबीजी उत्पादन में करीब 10 गुना वृद्धि हो सकती है.
व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं पर जोर
नीतिगत ढांचे में मांग और राजस्व को लेकर अधिक स्पष्टता आने के साथ सीबीजी क्षेत्र के अगले चरण की वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि नीतिगत उपायों को कितनी तेजी से व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं में बदला जाता है. इसके लिए विश्वसनीय कच्चे माल की आपूर्ति, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य संयंत्र, परियोजनाओं के लिए वित्त और सीबीजी की सुनिश्चित खरीद जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होगा.
सीआईआई की राष्ट्रीय जैव ऊर्जा समिति के अध्यक्ष तरुण साव्हनी और संपीड़ित बायोगैस समिति के अध्यक्ष रोशन तामक के नेतृत्व में वरुण कराड सह-अध्यक्ष विवेक तनेजा के साथ काम करेंगे. समिति उद्योग से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने, सीबीजी से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और नीति निर्माताओं, संबंधित मंत्रालयों तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर काम करेगी.
‘सीबीजी क्षेत्र महत्वपूर्ण मोड़ पर’
वरुण कराड ने कहा कि भारत का सीबीजी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. उनके मुताबिक, नया नीतिगत ढांचा मांग और राजस्व को लेकर अधिक स्पष्टता देता है, लेकिन वास्तविक चुनौती इस स्पष्टता को ऐसी परियोजनाओं में बदलना है जो व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य, वित्तपोषण के योग्य और संचालन के लिहाज से मजबूत हों.
उन्होंने कहा कि अब उद्योग को संयंत्र के आसपास के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान देने की जरूरत है. इसमें कच्चे माल का भरोसेमंद संग्रह, दीर्घकालिक खरीद व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, वित्तपोषण और परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल है. उन्होंने कहा कि वह सीआईआई, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर ऐसे व्यावहारिक उपायों पर काम करने के लिए उत्सुक हैं, जो सीबीजी क्षेत्र के अगले चरण की वृद्धि को गति दे सकें.
नीति और उद्योग के बीच समन्वय पर फोकस
सीआईआई की संपीड़ित बायोगैस समिति नीति संबंधी सुझाव, उद्योग और सरकार के बीच संवाद तथा ऐसे व्यावहारिक उपायों की पहचान पर ध्यान देगी, जिनसे सीबीजी क्षेत्र अलग-अलग परियोजनाओं से आगे बढ़कर एकीकृत और बड़े स्तर के पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हो सके.
24 सितंबर को समिति की पहली बैठक हुई थी. इसमें उद्योग से जुड़े हितधारकों ने नए गोबरधन ढांचे, प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं और समिति की कार्ययोजना पर चर्चा की. बैठक में नए नीतिगत ढांचे के क्रियान्वयन के दौरान संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर भी चर्चा हुई.
सीबीजी की खरीद से लेकर पाइपलाइन तक कई उपाय
नए गोबरधन ढांचे में सीबीजी की सुनिश्चित खरीद, प्रशासित मूल्य व्यवस्था, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन बुनियादी ढांचा, ऋण सहायता और एक पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती कोष सहित कई उपाय शामिल किए गए हैं.
परिचालन दिशानिर्देशों के तहत पात्र उत्पादक तकनीकी और परिचालन व्यवहार्यता के आधार पर बिक्री के लिए उपलब्ध सीबीजी की 100 प्रतिशत तक मात्रा की सुनिश्चित खरीद का विकल्प चुन सकते हैं. वहीं, प्रशासित मूल्य व्यवस्था के तहत कम से कम 10 साल की अवधि के लिए कीमतों को लेकर अधिक स्पष्टता देने का प्रावधान किया गया है.
इस ढांचे से सीबीजी की पूरी मूल्य श्रृंखला में अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है. हालांकि, क्षेत्र के सतत विस्तार के लिए कच्चे माल के संग्रह, परियोजना वित्तपोषण, बुनियादी ढांचे, कराधान, सह-उत्पादों के व्यावसायीकरण और सीबीजी की विविध मांग विकसित करने जैसे क्षेत्रों पर लगातार ध्यान देने की जरूरत होगी.
भारत के ऊर्जा मिश्रण में सीबीजी की भूमिका बढ़ाने की कोशिशों के बीच सीआईआई की यह समिति परियोजना डेवलपर्स, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और अन्य हितधारकों को सीबीजी क्षेत्र के सतत विस्तार के लिए जरूरी व्यावसायिक, परिचालन और नीतिगत परिस्थितियों पर चर्चा का मंच उपलब्ध कराएगी.
अब बागची के नेतृत्व में एचडीएफसी बैंक की आगे की रणनीति और कारोबार की दिशा पर बाजार की नजर रहेगी. खासतौर पर बैंक के रिटेल कारोबार, जमा वृद्धि और मार्जिन से जुड़े प्रदर्शन को लेकर नए नेतृत्व की रणनीति महत्वपूर्ण होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एचडीएफसी बैंक (HDFC) के नए मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के नाम को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनूप बागची की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. बागची 27 अक्टूबर 2026 से बैंक के MD और CEO का पद संभालेंगे और मौजूदा प्रमुख शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे. बैंक ने 1 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी सूचना में इस नियुक्ति की जानकारी दी.
27 अक्टूबर से संभालेंगे पद
अनूप बागची फिलहाल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के MD और CEO हैं. वह 27 अक्टूबर से एचडीएफसी बैंक की जिम्मेदारी संभालेंगे. शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है. जगदीशन ने अगले कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं की थी.
RBI ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 35B के तहत बागची की नियुक्ति और उनके पारिश्रमिक को मंजूरी दी है. शेयरधारकों की मंजूरी मिलने तक उन्हें 2 अक्टूबर से बैंक के अतिरिक्त निदेशक के रूप में भी नियुक्त किया गया है.
तीन दशक से ज्यादा का बैंकिंग अनुभव
अनूप बागची के पास बैंकिंग, पूंजी बाजार, वेल्थ मैनेजमेंट और बीमा क्षेत्र में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है. वह 1992 से आईसीआईसीआई समूह से जुड़े रहे हैं. अपने करियर के दौरान उन्होंने ट्रेजरी, रिटेल बैंकिंग, होलसेल बैंकिंग, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं समेत कई क्षेत्रों में काम किया है.
बागची आईसीआईसीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के MD और CEO भी रह चुके हैं. 2017 से 2023 के बीच आईसीआईसीआई बैंक में कार्यकारी निदेशक रहते हुए उन्होंने रिटेल, बिजनेस और ग्रामीण बैंकिंग का काम संभाला. जून 2023 से वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के MD और CEO हैं.
टॉप पद के लिए दो नाम भेजे गए थे
एचडीएफसी बैंक के MD और CEO पद के लिए बैंक की ओर से RBI को दो नाम प्रस्तावित किए गए थे. इनमें अनूप बागची के अलावा बैंक के डिप्टी MD कायजाद भरूचा का नाम शामिल था. RBI की मंजूरी के बाद अब बागची की नियुक्ति तय हो गई है.
ऐलान से पहले HDFC बैंक के शेयर में तेजी
अनूप बागची की नियुक्ति के ऐलान वाले दिन एचडीएफसी बैंक के शेयर में तेजी देखने को मिली. 1 अक्टूबर को NSE पर बैंक का शेयर 1.76 फीसदी की बढ़त के साथ 721.20 रुपये पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 708.70 रुपये पर बंद हुआ था.
अब बागची के नेतृत्व में एचडीएफसी बैंक की आगे की रणनीति और कारोबार की दिशा पर बाजार की नजर रहेगी. खासतौर पर बैंक के रिटेल कारोबार, जमा वृद्धि और मार्जिन से जुड़े प्रदर्शन को लेकर नए नेतृत्व की रणनीति महत्वपूर्ण होगी.
पत्रकारिता, संचार और कला क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखने वाली सहर ज़मान 1 अक्टूबर 2026 से कंपनी के बोर्ड में शामिल हुईं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मीडिया और संचार क्षेत्र की पेशेवर सहर ज़मान को सीजे इंटरनेशनल होटल्स लिमिटेड के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है. कंपनी नई दिल्ली स्थित ले मेरिडियन होटल का स्वामित्व और संचालन करती है. उनकी नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई है.
सहर जमान के पास पत्रकारिता, संचार, कला और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है. वह हुनर टीवी की संस्थापक निदेशक हैं. उनके पेशेवर सफर में टेलीविजन पत्रकारिता, समाचार निर्माण, सांस्कृतिक कथाकथन और कला के क्षेत्र में काम शामिल रहा है.
उन्होंने प्रमुख समाचार और मीडिया संस्थानों में संपादकीय और नेतृत्व से जुड़ी भूमिकाएं निभाई हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह प्राइम-टाइम एंकर और संपादक के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर प्रदर्शनियों का क्यूरेशन किया और इससे जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए.
सहर जमान ने सांस्कृतिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों पर लेखन भी किया है. उन्होंने ‘तलत महमूद: द डेफिनिटिव बायोग्राफी’ नामक पुस्तक भी लिखी है.
हाल के वर्षों में उन्होंने अपने काम का विस्तार संचार रणनीति और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी किया है. इसके साथ ही वह पत्रकारिता, संस्कृति और जनहित से जुड़े विषयों से जुड़ी रही हैं. उनके पेशेवर अनुभव में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ा प्रशिक्षण भी शामिल है. उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के स्वतंत्र निदेशक प्रमाणन कार्यक्रम को पूरा किया है.
सीजे इंटरनेशनल होटल्स के बोर्ड में उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब आतिथ्य क्षेत्र में कंपनियां पारंपरिक कारोबारी पहलुओं के साथ ब्रांड पहचान, सांस्कृतिक जुड़ाव, हितधारकों के साथ संबंध और बदलती उपभोक्ता अपेक्षाओं पर भी ध्यान दे रही हैं.
मीडिया और सांस्कृतिक कथाकथन में सहर ज़मान का अनुभव बोर्ड स्तर की चर्चाओं में ब्रांड पहचान और आतिथ्य क्षेत्र के बदलते स्वरूप से जुड़े विषयों पर एक अलग दृष्टिकोण ला सकता है. विशेष रूप से होटल उद्योग और शहरी अनुभव के बीच बदलते संबंधों को लेकर उनका अनुभव उपयोगी हो सकता है.
रबर उद्योग से तीन दशक से अधिक समय से जुड़े अनय गुप्ता 2017 से AIRIA की प्रबंध समिति के सदस्य हैं. इससे पहले वह AIRIA (नेचुरल रबर) के चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑल इंडिया रबर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (AIRIA) ने 2026-27 कार्यकाल के लिए अनय गुप्ता को लगातार दूसरी बार अध्यक्ष चुना है. उनका चुनाव एसोसिएशन की वार्षिक आम बैठक के बाद नव निर्वाचित प्रबंध समिति की पहली बैठक में सर्वसम्मति से किया गया.
रबर उद्योग से तीन दशक से अधिक समय से जुड़े अनय गुप्ता 2017 से AIRIA की प्रबंध समिति के सदस्य हैं. इससे पहले वह AIRIA (नेचुरल रबर) के चेयरमैन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.
रबर उद्योग की चुनौतियों पर रहेगा फोकस
दूसरे कार्यकाल में गुप्ता भारतीय रबर उद्योग से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर हितधारकों के साथ काम जारी रखेंगे. इनमें कच्चे माल की उपलब्धता, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और बदलते व्यापारिक हालात प्रमुख हैं.
एसोसिएशन का फोकस MSME क्षेत्र के विकास के साथ-साथ टायर और गैर-टायर दोनों क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियों पर भी रहेगा. वैश्विक बाजार में हो रहे बदलावों के बीच घरेलू रबर उद्योग की आपूर्ति क्षमता मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उद्योग को तैयार करना भी प्रमुख मुद्दों में शामिल होगा.
30 साल से ज्यादा का अनुभव
अनय गुप्ता को रबर उद्योग में 30 वर्ष से अधिक का अनुभव है. वह कई वर्षों से AIRIA की उद्योग और नीतिगत पहलों से जुड़े रहे हैं. 2017 से प्रबंध समिति के सदस्य के रूप में वह उद्योग से जुड़े मुद्दों पर नीति-निर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ संवाद में सक्रिय रहे हैं.
उनका दूसरा कार्यकाल भी उद्योग के लिए नीति वकालत और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद पर केंद्रित रहेगा.
के गणेश बने वरिष्ठ उपाध्यक्ष
अनय गुप्ता के दोबारा अध्यक्ष चुने जाने के साथ के गणेश को AIRIA का वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया है. वहीं विनोद बंसल उपाध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे. इन नियुक्तियों का फैसला वार्षिक आम बैठक के बाद नव निर्वाचित प्रबंध समिति की पहली बैठक में किया गया. नई नेतृत्व टीम 2026-27 के दौरान उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर AIRIA की गतिविधियों और हितधारकों के साथ संवाद का नेतृत्व करेगी.
प्रतिस्पर्धा और नवाचार को मजबूत करने पर जोर
दूसरे कार्यकाल के लिए दोबारा भरोसा जताए जाने पर अनय गुप्ता ने AIRIA के सदस्यों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि भारतीय रबर उद्योग बदलती बाजार परिस्थितियों, वैश्विक व्यापार में बदलाव और विकास के नए अवसरों के दौर से गुजर रहा है.
गुप्ता ने कहा कि AIRIA हितधारकों के साथ मिलकर उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और टायर तथा गैर-टायर दोनों क्षेत्रों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए काम करेगी.
2026-27 कार्यकाल में कच्चे माल की उपलब्धता, व्यापार से जुड़े बदलाव, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और MSME क्षेत्र को समर्थन एसोसिएशन के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे.
विज्ञापन और मीडिया उद्योग में चार दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले डॉ. गोयल के कार्यकाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा टेक्नोलॉजी, एजेंसी रेवेन्यू और उद्योग से जुड़े नियामकीय मुद्दे प्रमुख विषय रहने की उम्मीद है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने रेडिफ्यूजन (Rediffusion) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) डॉ. संदीप गोयल को 2026-27 के लिए अपना अध्यक्ष चुना है. AAAI के मुताबिक, डॉ. गोयल का चयन सर्वसम्मति से हुआ है. विज्ञापन और मीडिया उद्योग में चार दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले डॉ. गोयल के कार्यकाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा टेक्नोलॉजी, एजेंसी रेवेन्यू और उद्योग से जुड़े नियामकीय मुद्दे प्रमुख विषय रहने की उम्मीद है.
AAAI देश की प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों और मीडिया बाइंग हाउस का शीर्ष उद्योग संगठन है. संगठन ने इस साल अपनी स्थापना के 80 वर्ष पूरे किए हैं. AAAI का BARC, INS, IBDF, ISA, ASCI, MRUCI, ACIL समेत कई अन्य उद्योग संगठनों के साथ कामकाजी संबंध है.
1984 से विज्ञापन और मीडिया उद्योग में सक्रिय
डॉ. संदीप गोयल ने 1984 में विज्ञापन और मीडिया क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया. शुरुआती दौर में उन्होंने एचटीए, जिसे अब वीएमएल के नाम से जाना जाता है, त्रिकाया ग्रे और मुद्रा जैसी विज्ञापन एजेंसियों के साथ काम किया. वह 1997 में रेडिफ्यूजन के अध्यक्ष बने और 2001 में जी के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली.
इसके बाद 2003 से 2011 के बीच उन्होंने डेंट्सु इंडिया एंड मिडिल ईस्ट में भारत के संयुक्त उद्यम साझेदार और अध्यक्ष के तौर पर काम किया. वह स्नैपचैट इंडिया के सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने पंजाब सरकार में तीन साल तक प्रमुख सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं. 2021 में डॉ. गोयल ने रेडिफ्यूजन और एवरेस्ट दोनों का अधिग्रहण किया.
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन संकाय से एमबीए और पीएचडी
डॉ. गोयल ने 1984 में दिल्ली के प्रबंधन अध्ययन संकाय से एमबीए किया. इसके बाद 2017 में उन्होंने इसी संस्थान से पीएचडी की. 2023 में लखनऊ विश्वविद्यालय ने उन्हें साहित्य विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि से सम्मानित किया.
डॉ. गोयल दस किताबों के लेखक भी हैं. इनमें द डम डम बुलेट और कोंजो – द फाइटिंग स्पिरिट शामिल हैं. वह नियमित रूप से द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड समेत कई प्रमुख मीडिया मंचों के लिए कॉलम भी लिखते हैं.
कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं से जुड़े रहे
डॉ. गोयल न्यूयॉर्क स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज के बोर्ड सदस्य रह चुके हैं. यह संस्था वैश्विक एमी पुरस्कार प्रदान करती है. वह लंदन स्थित एमआईपी के वैश्विक बोर्ड का भी हिस्सा रहे हैं. एमआईपी को दुनिया के सबसे बड़े टेलीविजन मीडिया और कंटेंट बाजारों में से एक माना जाता है.
इसके अलावा वह भारतीय विज्ञापन मानक परिषद की गवर्निंग काउंसिल, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन, जिसे अब इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन कहा जाता है, के उपाध्यक्ष और आईबीएफ-आईएनएस की संयुक्त समिति के समन्वयक समेत विभिन्न उद्योग संगठनों में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.
वह एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी समिति और मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं. दो साल पहले डॉ. गोयल को एसोचैम की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
AI को लेकर डर कम करना प्राथमिकता
AAAI के अध्यक्ष के तौर पर अपनी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए डॉ. गोयल ने AI को लेकर उद्योग में बनी आशंकाओं को दूर करने और मौजूदा कर्मचारियों को नई तकनीकों के लिए प्रशिक्षित करने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, "AI का डर दूर करना आज उद्योग की सबसे बड़ी जरूरत है. मौजूदा कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना इसका सबसे प्रभावी समाधान है, ताकि नौकरियों की सुरक्षा की जा सके. मैं खास तौर पर AAAI के उन सदस्यों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगा, जिनके पास बड़े स्तर के संसाधन नहीं हैं."
डॉ. गोयल के मुताबिक, AAAI के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा कि CCI की जांच का असर कई सदस्य एजेंसियों पर पड़ा है, जबकि कई एजेंसियां AI और डेटा टेक्नोलॉजी को अपने काम में किस तरह इस्तेमाल किया जाए, इसे लेकर संघर्ष कर रही हैं. एजेंसियों की आय पर भी दबाव है.
गोवा फेस्ट को नए रूप में पेश करने पर जोर
नए AAAI अध्यक्ष ने संगठन के प्रमुख आयोजन GoaFest को भी नए सिरे से तैयार करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि गोवा फेस्ट AAAI की प्रमुख पहचान है और इसमें लंबे समय से जरूरी बदलाव किया जाना बाकी है.
डॉ. गोयल के अनुसार, "AAAI के सामने कई चुनौतियां हैं. CCI की जांच का असर कई सदस्य एजेंसियों पर पड़ा है. अधिकांश एजेंसियां AI और डेटा टेक्नोलॉजी को अपनाने के तरीके को लेकर संघर्ष कर रही हैं. एजेंसी रेवेन्यू पर दबाव है. इसलिए कई मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है." उन्होंने कहा कि गोवा फेस्ट में भी नए सिरे से बदलाव और पुनर्गठन की जरूरत है और आने वाला साल काफी व्यस्त रहने वाला है.
शिवानंद निम्बार्गी को ऊर्जा, परिवहन और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. वह इससे पहले अयाना रिन्यूएबल पावर के प्रबंध निदेशक और सीईओ रह चुके हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नॉर्थ स्टार रिन्यूएबल एनर्जी ने शिवानंद निम्बार्गी को अपना प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है. वह 8 अक्टूबर 2026 से कंपनी की जिम्मेदारी संभालेंगे. नॉर्थ स्टार रिन्यूएबल एनर्जी, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII) और कोपेनहेगन इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (CIP) के ग्रोथ मार्केट्स फंड II के बीच संयुक्त उपक्रम है.
शिवानंद निम्बार्गी भारत में कंपनी के नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार के विकास और विस्तार का नेतृत्व करेंगे. उनकी जिम्मेदारी देश में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित करने और निजी पूंजी जुटाने से जुड़ी होगी.
ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 30 साल से ज्यादा का अनुभव
शिवानंद निम्बार्गी को ऊर्जा, परिवहन और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. वह इससे पहले अयाना रिन्यूएबल पावर के प्रबंध निदेशक और सीईओ रह चुके हैं. अयाना भारत की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है और इसे 2018 में बीआईआई ने स्थापित किया था.
अयाना में अपने कार्यकाल के दौरान निम्बार्गी ने कंपनी के कारोबार के विस्तार का नेतृत्व किया और संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाने में भूमिका निभाई. इससे पहले वह ऊर्जा क्षेत्र में कारोबार विकसित करने और उसका नेतृत्व करने से जुड़ी कई जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. उनका बीआईआई से भी लंबे समय से जुड़ाव रहा है. कंपनी के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार के निर्माण और विस्तार का उनका अनुभव नॉर्थ स्टार की भारत में गतिविधियों के लिए उपयोगी होगा.
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर होगा निवेश
नॉर्थ स्टार की स्थापना इसी वर्ष बीआईआई और सीआईपी ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और परियोजनाओं के विकास के लिए की थी. इस मंच के जरिए बीआईआई के उभरते बाजारों में दीर्घकालिक निवेश अनुभव और सीआईपी की नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे में विशेषज्ञता को जोड़ा गया है.
कंपनी के अनुसार, भारत को 2030 तक अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना से अधिक बढ़ाने की जरूरत है. ऐसे में परियोजनाओं के विकास और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने के लिए पूंजी और क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं. नॉर्थ स्टार का उद्देश्य इन चुनौतियों को दूर करने के लिए परियोजनाओं को विकास के चरण से आगे बढ़ाना और क्षेत्र में अतिरिक्त निवेश आकर्षित करना है.
सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर फोकस
नॉर्थ स्टार सौर, पवन और हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश करेगा. कंपनी के अनुसार, इन परियोजनाओं से सालाना 40 लाख मेगावाट घंटा से अधिक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन होने की उम्मीद है. साथ ही, हर साल करीब 40 लाख टन कार्बन उत्सर्जन से बचने का अनुमान है.
नियुक्ति पर निम्बार्गी ने कहा कि भारत के ऊर्जा बदलाव के महत्वपूर्ण दौर में नॉर्थ स्टार से जुड़ना उनके लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि बीआईआई समर्थित कारोबारों के साथ काम करने के दौरान उन्होंने दीर्घकालिक पूंजी और मजबूत साझेदारियों की भूमिका देखी है और वह बीआईआई तथा सीआईपी के साथ मिलकर नॉर्थ स्टार को विकसित करने की दिशा में काम करेंगे.
सीआईपी के ग्रोथ मार्केट्स फंड्स के पार्टनर पीटर जैनिक शॉन्तॉफ्ट और बीआईआई में एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर एंड क्लाइमेट डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट्स के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख रोहित आनंद ने कहा कि निम्बार्गी के पास नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार को शुरू से विकसित करने का अनुभव है. उनके अनुसार, उनकी नियुक्ति नॉर्थ स्टार के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
ब्रिटिश क्लाइमेट पार्टनर्स का भी हिस्सा है नॉर्थ स्टार
नॉर्थ स्टार, बीआईआई की 1.1 अरब पाउंड की जलवायु वित्त पहल ब्रिटिश क्लाइमेट पार्टनर्स का भी एक प्रमुख मंच है. इस पहल का उद्देश्य कोयले पर अधिक निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में उत्सर्जन कम करने के लिए निजी पूंजी जुटाना है. नॉर्थ स्टार के जरिए बीआईआई और सीआईपी भारत में बड़े स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु समाधान से जुड़े निवेश को बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे.
काकोन सेठी को मीडिया, मनोरंजन, खेल, सामग्री और विपणन क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक का नेतृत्व अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रमुख एजेंसियों के साथ मीडिया योजना और खरीद के क्षेत्र में की थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) ने काकोन सेठी को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है. वह 8 अक्टूबर 2026 से यह जिम्मेदारी संभालेंगी. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब संगठन करीब छह साल से स्थायी नेतृत्व के बिना था और भारतीय रीडरशिप सर्वे (IRS) को फिर से शुरू करने की तैयारी चल रही है.
काकोन सेठी को मीडिया, मनोरंजन, खेल, सामग्री और विपणन क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक का नेतृत्व अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रमुख एजेंसियों के साथ मीडिया योजना और खरीद के क्षेत्र में की थी.
सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन में निभाई अहम भूमिका
सेठी इसके बाद सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन से जुड़ीं, जहां उन्होंने सेट के विपणन और बिक्री विभाग का नेतृत्व किया. इसी दौरान उन्होंने सोनी मैक्स को बिजनेस हेड के रूप में शुरू किया और इसके लाभ-हानि की पूरी जिम्मेदारी संभाली.
उनके कार्यकारी नेतृत्व के अनुभव में के सेरा सेरा प्रोडक्शंस की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में भूमिका और लिंटास मीडिया ग्रुप में ब्रांडेड कंटेंट समाधान का नेतृत्व करना भी शामिल है. इसके बाद वह कांतर से जुड़ीं, जहां वह वर्तमान में वरिष्ठ निदेशक - व्यवसाय विकास के पद पर कार्यरत हैं.
भारतीय रीडरशिप सर्वे को फिर शुरू करने की तैयारी
एमआरयूसीआई में सेठी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब संगठन भारतीय रीडरशिप सर्वे को दोबारा शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है. प्रस्तावित सर्वे में अध्ययन के डिजाइन को बेहतर बनाने, पद्धति में बदलाव करने और मीडिया की गुणवत्ता तथा प्रभाव को मापने के लिए नया ढांचा तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.
एमआरयूसीआई के अध्यक्ष विक्रम सखूजा ने सेठी की नियुक्ति पर कहा कि ऐसे समय में जब दर्शक मापन के क्षेत्र में विश्वसनीयता के साथ नए दृष्टिकोण की भी जरूरत है, सेठी संगठन का नेतृत्व करेंगी. उन्होंने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं.
मीडिया खपत के बदलते व्यवहार को समझने पर जोर
काकोन सेठी ने कहा कि एमआरयूसीआई की यह जिम्मेदारी संभालकर वह उत्साहित हैं. उनके अनुसार, दर्शक मापन मीडिया उद्योग को बदलते मीडिया उपभोग व्यवहार को समझने और अधिक सूचित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
उन्होंने कहा कि वह इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रबंधन, बोर्ड और सभी हितधारकों के मार्गदर्शन और सहयोग की उम्मीद करती हैं.
जिंदल इंडिया में खन्ना स्टील और एल्युमीनियम कारोबार से जुड़े मानव संसाधन संबंधी मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जिंदल इंडिया ने डॉ. अमित खन्ना को स्टील बिजनेस का चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर (CHRO) नियुक्त किया है. इस नियुक्ति के साथ खन्ना ने करीब 14 साल तक बैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (BIAL) में काम करने के बाद औद्योगिक क्षेत्र में कदम रखा है.
जिंदल इंडिया में खन्ना स्टील और एल्युमीनियम कारोबार से जुड़े मानव संसाधन संबंधी मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगे. उनका फोकस कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार, वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन और कारोबार की जरूरतों के अनुरूप संगठनात्मक क्षमताएं विकसित करने पर रहेगा.
BIAL में संभालीं कई अहम जिम्मेदारियां
BIAL में खन्ना ने हाल में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, HR के पद पर काम किया. इस दौरान उन्होंने वर्कफोर्स प्लानिंग, ऑर्गनाइजेशन डिजाइन, लीडरशिप डेवलपमेंट, उत्तराधिकार योजना, संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव और HR टेक्नोलॉजी से जुड़े कई रणनीतिक कार्यक्रमों पर काम किया.
उनकी प्रमुख पहलों में एक संरचित लीडरशिप प्रोग्राम और टैलेंट रिव्यू प्रक्रिया विकसित करना शामिल था. इसका उद्देश्य उच्च क्षमता वाले नेतृत्वकर्ताओं की पहचान करना और कंपनी में भविष्य के नेतृत्व के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना था.
खन्ना ने क्लाउड आधारित HCM सिस्टम लागू करने में भी भूमिका निभाई. यह सिस्टम 20 से अधिक HR मॉड्यूल को कवर करता था. इसके अलावा, उन्होंने टर्मिनल-2 और एयरपोर्ट के दूसरे रनवे जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वर्कफोर्स की तैयारी में भी योगदान दिया.
महामारी के दौरान ऑर्गनाइजेशन एफिशिएंसी प्रोग्राम में भूमिका
कोरोना महामारी के दौरान खन्ना ने BIAL के संगठनात्मक दक्षता कार्यक्रम में भी भूमिका निभाई. इस कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए परिचालन क्षमता बढ़ाना और लागत पर नियंत्रण रखना था. इससे पहले वह NTPC और Bharti Airtel से जुड़े HR और संगठनात्मक बदलाव की भूमिकाओं में भी काम कर चुके हैं.
मैनेजमेंट में पूरी की डॉक्टरेट
खन्ना ने हाल में Dayalbagh Educational Institute से मैनेजमेंट में डॉक्टरेट पूरी की है. उनके शोध का विषय टिकाऊ प्रबंधन, संगठनात्मक क्षमता और इनोवेशन तथा लंबे समय में कारोबार के प्रदर्शन में रणनीतिक HR प्रथाओं की भूमिका से जुड़ा रहा.
जिंदल इंडिया में उनकी प्रतिभा प्रबंधन, वर्कफोर्स प्लानिंग, HR ट्रांसफॉर्मेशन और बिजनेस पार्टनरिंग से जुड़ा अनुभव कंपनी के स्टील और एल्युमीनियम कारोबार में मानव संसाधन क्षमताओं को मजबूत करने में उपयोगी हो सकता है.
सिद्धार्थ बुटालिया टाटा समूह के साथ दो दशक बिताने के बाद दुबई स्थित एयरलाइन में शामिल हुए हैं, जहां उन्होंने आखिरी बार एयर इंडिया एक्सप्रेस में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सिद्धार्थ बुटालिया फ्लाईदुबई में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (SVP) - कॉरपोरेट ब्रांड, मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशंस के रूप में शामिल हो गए हैं. वह टाटा समूह के साथ दो दशक बिताने के बाद दुबई स्थित एयरलाइन में शामिल हुए हैं, जहां उन्होंने 2019 से एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयरएशिया इंडिया में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया.
बुटालिया ने इस महीने फ्लाईदुबई में अपनी नई भूमिका शुरू की, जहां उन्हें मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस, इंटरनल कम्युनिकेशंस और ब्रांड मैनेजमेंट के सभी पहलुओं में रणनीतिक नेतृत्व और दिशा प्रदान करने की जिम्मेदारी होगी. लिंक्डइन पर एयरलाइन की पहले की एक पोस्ट के अनुसार, इस भूमिका में एयरलाइन की प्रतिष्ठा बढ़ाना, हितधारकों के साथ जुड़ाव मजबूत करना और व्यापक कॉरपोरेट विकास उद्देश्यों तथा भू-राजनीतिक विचारों के साथ कम्युनिकेशंस को जोड़ना शामिल है, ताकि रणनीतिक रूप से प्रतिष्ठा, नीतिगत प्रभाव और थॉट लीडरशिप का प्रबंधन किया जा सके.
वह टाटा समूह के साथ ब्रांड, मार्केटिंग, कम्युनिकेशंस और कॉरपोरेट अफेयर्स में व्यापक अनुभव के साथ फ्लाईदुबई में शामिल हुए हैं, जहां उन्होंने टीएएस ऑफिसर के रूप में यूरोप और भारत में टेटली, द ताज ग्रुप ऑफ होटल्स, एयरएशिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस सहित ब्रांड्स का नेतृत्व किया. अपने कार्यकाल के दौरान, वह एयरलाइन की लीडरशिप टीम का हिस्सा थे, जब टाटा समूह के निजीकरण और अपने विमानन कारोबारों के समेकन के बाद एयरलाइन में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ.
एयर इंडिया एक्सप्रेस में बुटालिया ने एयरलाइन के ब्रांड को नया रूप देने और लॉयल्टी तथा कम्युनिकेशंस को आगे बढ़ाने में मदद की, क्योंकि इसने अपने नेटवर्क का विस्तार किया और टाटा समूह के विमानन पोर्टफोलियो के भीतर अपनी स्थिति को और मजबूत किया.
अपनी नई भूमिका में, बुटालिया वैश्विक स्तर पर फ्लाईदुबई के कॉरपोरेट ब्रांड, मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस कार्यों की देखरेख करेंगे, क्योंकि एयरलाइन अफ्रीका, एशिया, जीसीसी और मध्य पूर्व तथा यूरोप के 56 देशों में 125 से अधिक गंतव्यों तक अपने नेटवर्क का विस्तार जारी रखे हुए है.
बुटालिया की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र की एयरलाइंस नेटवर्क विस्तार के साथ-साथ ब्रांड निर्माण और ग्राहक जुड़ाव में लगातार निवेश कर रही हैं, जिसमें कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस एयरलाइन की प्रतिष्ठा और अलग पहचान बनाने में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. फ्लाईदुबई ने अपनी विकास रणनीति के अगले चरण की जानकारी दी है, जिसके तहत अपने बेड़े को 100 से अधिक विमानों तक बढ़ाना और ले-फ्लैट बिजनेस क्लास सीटों के साथ एक नया केबिन रेट्रोफिट कार्यक्रम शुरू करना शामिल है. एयरलाइन को 2026 में 11 अतिरिक्त विमान मिलने हैं, जिसके बाद क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिसमें 30 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान और इसके बाद 2031 से 150 एयरबस ए321नियो विमान शामिल हैं.
सौम्या सहगल भुटानी, BW रिपोर्टर्स
(BW Marketing World में सीनियर एडिटोरियल लीड के रूप में सौम्या भारत के मीडिया, मार्केटिंग और विज्ञापन इकोसिस्टम की गहन कवरेज और जानकारियां प्रदान करती हैं.)