यह नियुक्ति कंपनी की नई योजना Impact the Future का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य दुनिया की टॉप 10 कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग कंपनियों में आना और 2029 तक अपनी कमाई को दोगुना करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
Egis एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी है जो आर्किटेक्चर, कंसल्टिंग, कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग, ऑपरेशंस और मेंटेनेंस जैसी सेवाएं देती है, कंपनी ने Frederico Justus को Middle East और South Asia (मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया) के लिए नया CEO (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त किया है. यह नियुक्ति कंपनी की नई योजना Impact the Future का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य दुनिया की टॉप 10 कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग कंपनियों में आना और 2029 तक अपनी कमाई को दोगुना करना है.
Frederico Justus के पास 25 साल से ज्यादा का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है, उन्होंने दुनिया के चार महाद्वीपों में बड़े प्रोजेक्ट्स को संभाला है और नए बाजारों में कंपनी का विस्तार किया है. वह पिछले 10 साल से Middle East में काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें इस क्षेत्र की गहरी समझ है. डिजिटलीकरण (Digitalisation), प्रदूषण कम करना (Decarbonisation) और बेहतर कामकाज (Performance Excellence) में उनकी खास पकड़ है. इस वजह से वे इस क्षेत्र में कंपनी की आगे की तरक्की और नए इनोवेशन व टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाने के लिए एकदम सही नेता माने जा रहे हैं.
लीडरशिप की विरासत और बदलाव
Egis के ग्रुप CEO Laurent Germain ने पुराने रीजनल CEO Alaa Abusiam की तारीफ की, जिन्होंने Middle East (मध्य पूर्व) में Egis के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया और कंपनी को इस क्षेत्र की टॉप 5 इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी कंपनियों में शामिल कर दिया. अब जब Abusiam अमेरिका क्षेत्र की लीडरशिप संभालने जा रहे हैं, तो Germain को भरोसा है कि Frederico Justus कंपनी को और आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने Justus की सोचने की रणनीतिक क्षमता, काम को बेहतरीन तरीके से करने का अनुभव, और ग्राहकों को एक साथ कई फायदे देने की लगन की तारीफ की.
सऊदी अरब के लिए नया मैनेजिंग डायरेक्टर
लीडरशिप में बदलाव यहीं नहीं रुका है, Mohamed Ben Messaoud, जो पहले Egypt (मिस्र) के कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर थे, अब सऊदी अरब के लिए नए मैनेजिंग डायरेक्टर बनाए गए हैं. सऊदी अरब Egis की क्षेत्रीय योजनाओं के लिए बहुत अहम बाजार है. Messaoud को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (यातायात ढांचा) में 16 साल का अनुभव है, जो उन्होंने सऊदी अरब, फ्रांस और दूसरे देशों में हासिल किया है. उनका यह अनुभव सऊदी अरब में चल रहे बदलावों के साथ कंपनी के काम को और बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद करेगा.
वहीं, Bob Hope, जो पहले सऊदी अरब में मैनेजिंग डायरेक्टर थे और Omrania कंपनी को Egis में मिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, अब Group Chief Development Officer बनेंगे. 2021 में कंपनी में शामिल होने के बाद से उन्होंने सऊदी अरब में Egis का कारोबार तीन गुना बढ़ा दिया. अब वह पूरी दुनिया में कंपनी की बिक्री, ब्रांडिंग और खास रणनीतियों की जिम्मेदारी संभालेंगे.
नई क्षेत्रीय संरचना
इन नई नियुक्तियों के साथ-साथ Egis ने अपनी वैश्विक (ग्लोबल) संरचना को भी फिर से तय किया है. पहले कंपनी के चार क्षेत्र थे, अब उन्हें बढ़ाकर पाँच कर दिया गया है. जिसमें फ्रांस, यूरोप और अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया (मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया), अमेरिका, एशिया-पैसिफिक शामिल है. यह बदलाव Egis के उस इरादे को दिखाता है जिसमें वह दुनिया भर में अपनी पहुँच को और मजबूत करना चाहता है और हर क्षेत्र के लिए तेज़ और स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार समाधान देना चाहता है.
अब जब Justus इस क्षेत्र की लीडरशिप संभाल रहे हैं और नई टीम तैयार है, Egis आने वाले समय में मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया में टिकाऊ (sustainable) और डिजिटल तकनीकों से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) बनाने में एक बड़ी ताकत बनकर उभरने की ओर बढ़ रहा है.
फ्राइडा हे के पास लगभग दो दशक का प्रोक्योरमेंट और सप्लाई चेन नेतृत्व का अनुभव है, जो ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिफिकेशन सेक्टर से जुड़ा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी वर्टिव (Vertiv) ने फ्राइडा हे को अपना नया चीफ प्रोक्योरमेंट ऑफिसर (CPO) नियुक्त किया है. यह कदम कंपनी द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधानों की बढ़ती मांग को देखते हुए वैश्विक संचालन को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है.
वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने की जिम्मेदारी
नई भूमिका में फ्राइडा हे वर्टिव के वैश्विक प्रोक्योरमेंट संगठन का नेतृत्व करेंगी. उनका मुख्य फोकस सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाना, लागत को अनुकूलित करना, सप्लायर क्वालिटी में सुधार करना और डेटा सेंटर, कम्युनिकेशन नेटवर्क और इंडस्ट्रियल एप्लिकेशंस के लिए पावर और थर्मल मैनेजमेंट पोर्टफोलियो में विकास को समर्थन देना होगा.
कंपनी नेतृत्व ने जताया भरोसा
वर्टिव के सीईओ जियो अल्बर्टाजी ने फ्राइडा हे को एक अनुभवी वैश्विक नेता बताया, जिनके पास मजबूत और स्केलेबल सप्लाई चेन बनाने का गहरा अनुभव है. उन्होंने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय प्रोक्योरमेंट सिस्टम को संभालने और संचालन अनुशासन को मजबूत करने का उनका अनुभव कंपनी के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा.
ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिफिकेशन में लंबा अनुभव
फ्राइडा हे के पास लगभग दो दशक का प्रोक्योरमेंट और सप्लाई चेन नेतृत्व का अनुभव है, जो ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिफिकेशन सेक्टर से जुड़ा है.
इससे पहले वे इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता पोलस्टार में चीफ प्रोक्योरमेंट ऑफिसर रह चुकी हैं, जहां उन्होंने सालाना 3 अरब डॉलर से अधिक के वैश्विक खर्च का प्रबंधन किया और बड़े स्तर पर ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया.
इसके पहले उन्होंने वोल्वो कार्स में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया, जहां वे ग्लोबल प्रोपल्शन और सस्टेनेबिलिटी प्रोक्योरमेंट की वाइस प्रेसिडेंट रहीं. इस दौरान उन्होंने 9 अरब डॉलर से अधिक के वार्षिक खर्च वाले प्रोक्योरमेंट सिस्टम को संभाला और इलेक्ट्रिफिकेशन ट्रांजिशन में अहम भूमिका निभाई.
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़ा अवसर
अपनी नियुक्ति पर फ्राइडा हे ने कहा कि वह ऐसे समय में वर्टिव से जुड़ रही हैं जब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर इकोसिस्टम में वर्टिव की महत्वपूर्ण भूमिका रणनीतिक साझेदारी, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए बड़ा मूल्य सृजन करने का अवसर देती है.
शिक्षा पृष्ठभूमि
फ्राइडा हे के पास चीन की नॉर्थईस्ट नॉर्मल यूनिवर्सिटी से जनरल स्टडीज और बिजनेस एंड कॉमर्स में बैचलर डिग्री है. साथ ही उनके पास यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से एक्जीक्यूटिव एमबीए भी है.
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वेम्पति ने हाल ही में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बोर्ड से इस्तीफा दिया है. वे 2024 से इस संस्था में प्रोफेशनल डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रसार भारती के पूर्ण सीईओ और पद्म श्री से सम्मानित शशि शेखर वेम्पति को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति देश की शीर्ष फिल्म प्रमाणन संस्था में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन मानी जा रही है.
वेम्पति ने यह जिम्मेदारी प्रसून जोशी से संभाली है, जिन्हें हाल ही में प्रसार भारती का चेयरमैन नियुक्त किया गया था.
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वेम्पति ने हाल ही में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बोर्ड से इस्तीफा दिया है. वे 2024 से इस संस्था में प्रोफेशनल डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे. अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए वेम्पति ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया.
विशेषज्ञों का मानना है कि CBFC में वेम्पति की नियुक्ति से प्रमाणन प्रक्रिया में नीति, तकनीक और मीडिया का अनुभव जुड़ जाएगा. यह उस समय खास अहमियत रखता है जब फिल्म और डिजिटल कंटेंट के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच कंटेंट मानकों को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं.
मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, BARC से CBFC तक वेम्पति का यह बदलाव दर्शक मापन से कंटेंट नियमन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है. जहां BARC टीवी दर्शकों के आंकड़ों के जरिए विज्ञापन और प्रोग्रामिंग रणनीतियों को प्रभावित करता है, वहीं CBFC भारत में फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित करने वाली प्रमुख वैधानिक संस्था है.
वेम्पति का पेशेवर सफर दो दशकों से अधिक का रहा है, जिसमें तकनीक, प्रशासन और मीडिया के क्षेत्र शामिल हैं. वे IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने इंफोसिस में 16 वर्षों से अधिक समय तक प्रोडक्ट रणनीति और डिजिटल इनोवेशन पर काम किया. इसके बाद 2013 में उन्होंने नीति-आधारित मीडिया प्लेटफॉर्म NitiCentral के CEO के रूप में कार्यभार संभाला. बाद में वे प्रसार भारती के CEO बने, जहां उन्होंने दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो जैसे पारंपरिक प्लेटफॉर्म्स के आधुनिकीकरण और डिजिटल विस्तार पर काम किया.
वेम्पति नीति और शैक्षणिक क्षेत्रों में भी सक्रिय रहे हैं. वे DeepTech for Bharat Foundation के सह-संस्थापक हैं और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) की सोसाइटी के सदस्य होने के साथ-साथ साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन भी हैं.
उनका नियामकीय अनुभव 2020 के टीवी रेटिंग विवाद के दौरान भी सामने आया, जब उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति का नेतृत्व किया था. इस समिति का उद्देश्य TRP में हेरफेर के आरोपों के बाद पारदर्शिता बढ़ाना और विश्वसनीयता बहाल करना था.
BARC से उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब यह संस्था टीवी इंडस्ट्री में विज्ञापन निवेश से जुड़े अहम डेटा प्रदान करती है. हालांकि उनका कार्यकाल छोटा रहा, लेकिन यह सुधार और समीक्षा के दौर के साथ जुड़ा रहा.
CBFC में वेम्पति को अब अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा. यह संस्था अक्सर रचनात्मक स्वतंत्रता, प्रमाणन मानकों और नियमन बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों के केंद्र में रहती है. OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और बदलती दर्शक पसंद के चलते CBFC की भूमिका पर और अधिक ध्यान दिया जा रहा है.
फिल्म और मीडिया उद्योग के सभी हितधारक इस बात पर नजर रखेंगे कि वेम्पति प्रमाणन मानकों को कैसे लागू करते हैं, खासकर ऐसे समय में जब नए कंटेंट फॉर्मेट, वितरण माध्यम और वैश्विक प्रभाव तेजी से बढ़ रहे हैं.
उनकी नियुक्ति यह भी दर्शाती है कि सरकार प्रमुख मीडिया संस्थानों में बहु-क्षेत्रीय अनुभव रखने वाले तकनीकी-प्रशासनिक विशेषज्ञों को प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि भारत का कंटेंट इकोसिस्टम लगातार विस्तार और जटिलता की ओर बढ़ रहा है.
यह नियुक्तियां लॉकटन की एशिया में बढ़ती उपस्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं को और मजबूती प्रदान करेंगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक बीमा ब्रोकिंग और जोखिम प्रबंधन कंपनी लॉकटन (Lockton) ने एशिया में अपने नेतृत्व को और सुदृढ़ करने के लिए मलेशिया और भारत में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) की नियुक्ति की घोषणा की है. इस कदम को कंपनी के क्षेत्रीय विस्तार और विकास रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
निकोलस ली (निक) को मलेशिया में लॉकटन साइम का सीईओ डिजिग्नेट नियुक्त किया गया है, जबकि जयदीप शर्मा को भारत का सीईओ बनाया गया है.
निकोलस ली दो दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव लेकर आए हैं, जिसमें बीमा ब्रोकिंग, जोखिम प्रबंधन, एनालिटिक्स, कैटास्ट्रॉफ मॉडलिंग, बैंकएश्योरेंस और रणनीतिक परामर्श शामिल हैं. उन्होंने मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे देशों में काम किया है, जिससे उन्हें क्षेत्रीय बाजार की गहरी समझ और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का मजबूत अनुभव मिला है.
लॉकटन में वापसी कर रहे ली ने APAC क्षेत्र में रणनीतिक बिक्री, क्लाइंट सलाहकार सेवाओं और बिज़नेस ग्रोथ में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. हाल ही में वे Moody’s Analytics में डायरेक्टर और हेड ऑफ क्लाइंट कवरेज (इंश्योरेंस सॉल्यूशंस, APAC) के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने बीमा कंपनियों और ब्रोकर्स को जोखिम मॉडलिंग, रीइंश्योरेंस ऑप्टिमाइजेशन, पोर्टफोलियो एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में मार्गदर्शन दिया.
कॉर्पोरेट भूमिकाओं के अलावा, उन्होंने अपनी कंसल्टेंसी भी स्थापित की, जो उभरते जोखिम, रणनीतिक विकास और बीमा क्षेत्र के परिवर्तन पर केंद्रित थी. वे पहले लॉकटन सिंगापुर से भी जुड़े रहे हैं और उन्होंने बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर काम किया है.
इस बदलाव के तहत मोहम्मद याह्या इब्राहिम को लॉकटन साइम में स्पेशल एडवाइज़र की भूमिका दी गई है. वे मलेशिया में कंपनी की तकाफुल क्षमताओं के विकास पर ध्यान देंगे. कंपनी ने पिछले 12 वर्षों में उनके नेतृत्व की सराहना की है.
भारत में, संदीप दादिया सीईओ पद से हटकर नॉन-एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की भूमिका में चले गए हैं. उन्होंने 2024 में लॉकटन इंडिया की स्थापना की थी और इसे देश के सबसे तेजी से बढ़ते ब्रोकर्स में शामिल किया. अब वे नए उद्यमों पर ध्यान केंद्रित करेंगे.
जयदीप (जे) शर्मा को भारत का नया सीईओ नियुक्त किया गया है, जो नियामकीय मंजूरी के अधीन है. वे लॉकटन एशिया में रीजनल हेड ऑफ स्पेशल्टीज़ की अपनी भूमिका भी जारी रखेंगे और मुंबई में स्थित रहेंगे.
जयदीप शर्मा के पास वैश्विक स्तर पर जटिल बहुराष्ट्रीय संचालन का व्यापक अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मार्श एविएशन से की और बाद में मार्श साउदी अरब के सीईओ बने, जहां उन्होंने कंपनी को देश का नंबर 1 ब्रोकर्स बनाया. Aon में उन्होंने कनेक्टिकट के मार्केट लीडर के रूप में 250 कर्मचारियों की टीम का नेतृत्व किया और 2018 में “ऑफिस ऑफ द ईयर” का खिताब हासिल किया.
लॉकटन एशिया के सीईओ टोनी हार्डी ने कहा, “निक और जय हमारे उद्योग के बेहतरीन नेताओं में से हैं. उनके पास गहरा अनुभव, वैश्विक दृष्टिकोण और ग्राहकों को प्राथमिकता देने की मजबूत प्रतिबद्धता है.” यह नियुक्तियां लॉकटन की एशिया में बढ़ती उपस्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं को और मजबूती प्रदान करेंगी.
जोरम अनिया न्यीशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की. साथ ही वह अरुणाचल प्रदेश की पहली विद्वान हैं जिन्होंने हिंदी विषय में डॉक्टरेट प्राप्त किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के शीर्ष नीति संस्थान नीति आयोग में एक ऐतिहासिक नियुक्ति के तहत अरुणाचल प्रदेश की शिक्षाविद् जोरम अनिया को पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है. यह कदम राष्ट्रीय नीति निर्माण में आदिवासी और पूर्वोत्तर भारत के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
आदिवासी समुदाय से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
जोरम अनिया अरुणाचल प्रदेश से आने वाली एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् हैं और डेरा नटुंग गवर्नमेंट कॉलेज में हिंदी विभाग की प्रमुख हैं. उनकी नियुक्ति न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि देश के नीति तंत्र में क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विविधता को शामिल करने की दिशा में बड़ा संकेत भी है.
पहली न्यीशी महिला PhD और हिंदी की विदुषी
जोरम अनिया न्यीशी समुदाय की पहली महिला हैं जिन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की. साथ ही वह अरुणाचल प्रदेश की पहली विद्वान हैं जिन्होंने हिंदी विषय में डॉक्टरेट प्राप्त किया. उनका अकादमिक कार्य साहित्य, संस्कृति और विशेष रूप से आदिवासी ज्ञान पर आधारित रहा है.
शोध, लेखन और नीति से जुड़ा लंबा अनुभव
18 वर्षों से अधिक के अपने करियर में अनिया ने शिक्षण, शोध और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है. वह अरुणाचल प्रदेश प्राइवेट एजुकेशनल रेगुलेटरी कमीशन की सदस्य भी हैं. उन्होंने न्यीशी साहित्य और संस्कृति पर कई किताबें लिखी और संपादित की हैं, साथ ही अनेक शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं.
नीति आयोग में बड़ा पुनर्गठन
यह नियुक्ति उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है, जिसकी घोषणा 24 अप्रैल को की गई थी. 2015 में प्लानिंग कमीशन की जगह बने नीति आयोग में यह पहला बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है. इस दौरान अशोक लाहिरी को उपाध्यक्ष बनाया गया, जिन्होंने सुमन बेरी की जगह ली. इसके अलावा अभय करमदिकर और एम श्रीनिवास को भी पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया.
रणनीतिक समय पर अहम नियुक्ति
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब चाइना लगातार अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिश करता रहा है. भारत ने इन दावों को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है. ऐसे में अनिया की नियुक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर पूर्वोत्तर की मजबूत भागीदारी के रूप में भी देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरम अनिया को बधाई देते हुए कहा कि उनका अनुभव और समझ नीति निर्माण को नई दिशा देगा. उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों के योगदान से विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलेगा.
राष्ट्रीय नीति में बढ़ेगा पूर्वोत्तर और आदिवासी प्रतिनिधित्व
जोरम अनिया की नियुक्ति को न केवल उनके अकादमिक और सांस्कृतिक योगदान की पहचान माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और आदिवासी समुदायों की आवाज को राष्ट्रीय नीति निर्माण में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है.
जोरम अनिया का नीति आयोग में शामिल होना देश के नीति ढांचे को और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है. इससे जमीनी और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को राष्ट्रीय रणनीतियों में शामिल करने की उम्मीद बढ़ी है.
पेशे से एक प्रशिक्षित डॉक्टर रहे बालासुब्रमण्यम ने अपने करियर में विकास और नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकार के प्रमुख नीति थिंक टैंक नीति आयोग में एक अहम बदलाव के तहत प्रख्यात पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ, लेखक और विकास कार्यकर्ता आर बालासुब्रमण्यम को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति नीति आयोग की कार्यप्रणाली को जमीनी अनुभव से और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
जमीनी विकास और नीति निर्माण का मजबूत अनुभव
पेशे से एक प्रशिक्षित डॉक्टर रहे बालासुब्रमण्यम ने अपने करियर में विकास और नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट और ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट जैसे संगठनों की स्थापना की, जिन्होंने जमीनी स्तर पर विकास और सार्वजनिक नीति के बीच सेतु का काम किया है. उनका अनुभव उन्हें नीति निर्माण और वास्तविक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम बनाता है.
वैश्विक शिक्षा और प्रशासनिक समझ
बालासुब्रमण्यम ने हावर्ड कैनेडी स्कूल से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की है. इससे उन्हें शासन और प्रशासन की गहरी समझ मिली है, जो उनके जमीनी अनुभव के साथ मिलकर उन्हें एक प्रभावशाली नीति विशेषज्ञ बनाती है.
नीति आयोग में बड़ा बदलाव
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब 2015 में प्लानिंग कमीशन की जगह बने नीति आयोग में पहली बड़ी पुनर्रचना की गई है. 24 अप्रैल को सरकार ने नए उपाध्यक्ष और कई पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति की. प्रख्यात अर्थशास्त्री अशोक लहीरी को उपाध्यक्ष बनाया गया है, जिन्होंने सुमन बेरी का स्थान लिया. इसके अलावा अभय करनदिकर और एम श्रीनिवासको भी सदस्य नियुक्त किया गया है.
प्रधानमंत्री ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर बालासुब्रमण्यम को बधाई देते हुए कहा कि उनका अनुभव और विभिन्न मुद्दों की समझ नीति निर्माण को मजबूत करेगी. उन्होंने विश्वास जताया कि उनका योगदान अलग-अलग क्षेत्रों में नवाचार और विकास को गति देगा.
जमीनी अनुभव से राष्ट्रीय नीति तक का सफर
डॉक्टर से विकास कार्यकर्ता और फिर नीति विशेषज्ञ बनने तक का बालासुब्रमण्यम का सफर अब देश के सर्वोच्च नीति संस्थान में औपचारिक भूमिका तक पहुंच गया है. माना जा रहा है कि उनका फील्ड-आधारित अनुभव राष्ट्रीय स्तर की नीतियों को और व्यावहारिक और प्रभावी बनाने में मदद करेगा.
आर बालासुब्रमण्यम की नियुक्ति से NITI Aayog को जमीनी हकीकतों से जुड़ी नई दृष्टि मिलने की उम्मीद है. इससे सरकार की नीतियों में व्यावहारिकता और प्रभावशीलता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
कंपनी के अनुसार, हर्ष दीप छाबड़ा SPNI की एंटरप्राइज प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, नए बिजनेस अवसर तलाशने और तेजी से बदलते मीडिया बाजार में ग्रोथ रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी संभालेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोनी पिक्चर नेटवर्क (SPNI) ने हर्ष दीप छाबड़ा को स्ट्रैटेजी एंड न्यू बिजनेस हेड नियुक्त किया है. कंपनी ने शनिवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की. इस भूमिका में वह कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ गौरव बनर्जी को रिपोर्ट करेंगे और नेतृत्व टीम के साथ मिलकर कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करेंगे.
ग्रोथ और नए अवसरों पर रहेगा फोकस
कंपनी के अनुसार, हर्ष दीप छाबड़ा SPNI की एंटरप्राइज प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, नए बिजनेस अवसर तलाशने और तेजी से बदलते मीडिया बाजार में ग्रोथ रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी संभालेंगे. साथ ही वह विभिन्न बिजनेस यूनिट्स के साथ मिलकर राजस्व बढ़ाने और लागत दक्षता सुधारने पर भी काम करेंगे.
इससे पहले गोदरेज कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स में रहे
हर्ष दीप छाबड़ा इससे पहले गोदरेज कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स में ग्लोबल मीडिया हेड के पद पर कार्यरत थे. वहां उन्होंने इंटीग्रेटेड मीडिया रणनीतियों और बड़े स्तर पर ब्रांड कम्युनिकेशन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
मीडिया और विज्ञापन क्षेत्र में दो दशक का अनुभव
हर्ष दीप के पास मीडिया, विज्ञापन और डिजिटल इकोसिस्टम में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने Mindshare, GroupM, Zee Entertainment, Turner International और Radio City जैसी कंपनियों में भी काम किया है. उनकी विशेषज्ञता मीडिया प्लानिंग, विज्ञापन बिक्री, मार्केटिंग, एनालिटिक्स, अकाउंट मैनेजमेंट और डिजिटल बिजनेस इनिशिएटिव्स में मानी जाती है.
गौरव बनर्जी ने कहा कि हर्ष दीप छाबड़ा रणनीतिक सोच और इंडस्ट्री अनुभव का मजबूत मिश्रण लेकर आए हैं. उनका नेतृत्व कंपनी के लिए नए अवसर पैदा करेगा और प्रतिस्पर्धी बढ़त मजबूत करेगा.
हर्ष दीप छाबड़ा ने कहा कि वह ऐसे समय SPNI से जुड़कर उत्साहित हैं जब मीडिया सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि कंपनी के नेतृत्व के साथ मिलकर वह भविष्य की क्षमताएं विकसित करने और नए ग्रोथ अवसरों पर काम करेंगे.
यह नियुक्ति भारत में उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने और कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल बिलिंग और भुगतान समाधान प्रदाता कंपनी इनवॉइसक्लाउड (InvoiceCloud) ने श्रीनिवास अलुरी को भारत में इंजीनियरिंग के उपाध्यक्ष (Vice President of Engineering) के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की है. यह नियुक्ति भारत को एक रणनीतिक इंजीनियरिंग और उत्पाद केंद्र के रूप में कंपनी के बढ़ते निवेश को दर्शाती है. साथ ही अगली पीढ़ी की डिजिटल भुगतान क्षमताओं को आगे बढ़ाने, एआई-आधारित रोडमैप को तेज करने और वैश्विक स्तर पर उत्पाद नवाचार में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
भारत में इंजीनियरिंग और उत्पाद नेतृत्व की नई भूमिका
अपने नए पद पर, श्रीनिवास अलुरी बिजु दविस के साथ मिलकर काम करेंगे, जो हैदराबाद स्थित कंपनी के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया साइट लीडर हैं. वे भारत केंद्र में उत्पाद इंजीनियरिंग का नेतृत्व करेंगे. उनका फोकस उत्पाद नवाचार को बढ़ावा देने, स्केलेबल आर्किटेक्चर तैयार करने और उच्च प्रभाव वाली डिलीवरी सुनिश्चित करने पर रहेगा.
एआई-आधारित नवाचार और प्लेटफॉर्म रणनीति पर फोकस
श्रीनिवास अलुरी एआई-आधारित उत्पाद रोडमैप को आगे बढ़ाने, प्लेटफॉर्म रणनीति को आकार देने, इंजीनियरिंग क्षमताओं का विस्तार करने और तकनीकी प्रतिभा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. भारत की इंजीनियरिंग टीम कंपनी के मुख्य उत्पाद विकास में अहम योगदान देती है, जिसमें आर्किटेक्चर तय करना, रोडमैप प्राथमिकताएं निर्धारित करना और दीर्घकालिक नवाचार रणनीति को आगे बढ़ाना शामिल है.
24 वर्षों का व्यापक अनुभव
श्रीनिवास अलुरी के पास 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है और उन्होंने उपभोक्ता बैंकिंग, कोर बैंकिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में उच्च प्रदर्शन करने वाली इंजीनियरिंग टीमों का नेतृत्व किया है. उनकी विशेषज्ञता एंटरप्राइज मॉडर्नाइजेशन, प्लेटफॉर्म स्केलेबिलिटी और इंजीनियरिंग रणनीति को व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ जोड़ने में है.
पूर्व कार्य अनुभव
इनवॉइसक्लाउड से पहले, वे कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) में टेक्नोलॉजी लीडर (सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग ट्रांसफॉर्मेशन) के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने कोर और कंज्यूमर बैंकिंग प्लेटफॉर्म्स के बड़े पैमाने पर परिवर्तन का नेतृत्व किया. इससे पहले वे अमेजन (Amazon) में सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मैनेजर रहे, जहां उन्होंने अमेज़न ट्रांसपोर्टेशन फाइनेंशियल सर्विसेज में इंजीनियरिंग डिलीवरी का नेतृत्व किया.
उन्होंने वेल्स फॉर्गो (Wells Fargo) में 14 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं. वहां उन्होंने अमेरिका और भारत में डिजिटल बैंकिंग और भुगतान पोर्टफोलियो का नेतृत्व किया. साथ ही मोबाइल नवाचार, एजाइल प्रक्रियाओं और एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म मॉडर्नाइजेशन को बढ़ावा दिया. उन्होंने पोलारिस सॉफ्टवेयर लैब (Polaris Software Lab) और सिटीबैंक (Citibank- बहरीन) के साथ भी काम किया है.
कंपनी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
बीजू डेविस, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया साइट लीडर ने कहा कि भारत को एक रणनीतिक इंजीनियरिंग हब के रूप में मजबूत करने के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है. उन्होंने कहा कि श्रीनिवास का अनुभव एआई-आधारित नवाचार और तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगा.
श्रीनिवास अलुरी का वक्तव्य
श्रीनिवास अलुरी ने कहा कि वे भारत में कंपनी की विकास यात्रा के इस महत्वपूर्ण चरण का हिस्सा बनकर उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि वे वैश्विक टीमों के साथ मिलकर स्केलेबल तकनीकी इकोसिस्टम बनाने और एआई-आधारित नवाचार को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे.
जेड मैकजूबा (Jed Maczuba) ने कहा कि एआई कंपनी के उत्पाद विकास का मुख्य आधार है और श्रीनिवास की नियुक्ति भारत टीम की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करती है. यह नियुक्ति भारत में उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं को मजबूत करने और कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहिड़ी और अन्य नए सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग भारत की नीति निर्माण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहकारी संघवाद, सुधारों और आम लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम करता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख नीति थिंक टैंक नीति आयोग का पुनर्गठन करते हुए वरिष्ठ अर्थशास्त्री और भाजपा विधायक अशोक कुमार लाहिड़ी को नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. इस फैसले को संस्थागत स्तर पर बड़े बदलाव और नई नीति दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
पीएम मोदी ने दी बधाई, बताया “नीति निर्माण का अहम स्तंभ”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहिड़ी और अन्य नए सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग भारत की नीति निर्माण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सहकारी संघवाद, सुधारों और आम लोगों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में काम करता है. उन्होंने एक मुलाकात के दौरान लाहिड़ी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका अनुभव भारत को “विकसित भारत” बनाने की दिशा में सुधारों को और मजबूती देगा.
नए पूर्णकालिक सदस्यों की भी नियुक्ति
सरकार ने आयोग में पांच नए पूर्णकालिक सदस्यों की भी नियुक्ति की है. इनमें राजीव गौबा, के. वी. राजू, गोवर्धन दास, अभय करंदीकर और एम. श्रीनिवास शामिल हैं.
कौन हैं अशोक कुमार लाहिड़ी
अशोक कुमार लाहिड़ी पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से भाजपा विधायक हैं और 2026 के चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वे अर्थशास्त्र, नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं. वे अक्टूबर 2002 से जून 2007 तक भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं. इस दौरान उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह दोनों सरकारों के साथ काम किया. इसके अलावा वे 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं.
अंतरराष्ट्रीय और शैक्षणिक अनुभव
लाहिड़ी का करियर अकादमिक और वैश्विक संस्थानों से भी जुड़ा रहा है. उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के निदेशक भी रह चुके हैं और बंधन बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन भी रहे हैं. इसके अलावा वे एशियन डेवलपमेंट बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से 2013 में रिटायर हुए.
आर्थिक मुद्दों पर स्पष्ट राय
लाहिड़ी वित्तीय अनुशासन और राज्यों की आर्थिक स्थिति पर अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं. अपनी किताब 'India in Search of Glory' में उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र ने देश निर्माण को मजबूत किया है, लेकिन स्वतंत्रता के बाद शुरुआती दशकों में सामाजिक-आर्थिक विकास अपेक्षाकृत धीमा रहा. उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, गरीबी घटेगी, शिक्षा में सुधार होगा और शहरीकरण बढ़ेगा, वैसे-वैसे आर्थिक विकास तेज होगा.
फ्रीबी योजनाओं पर जताई चिंता
लाहिड़ी ने चुनावों से पहले घोषित की जाने वाली लोकलुभावन योजनाओं की आलोचना भी की है. उनका मानना है कि अनियंत्रित सरकारी खर्च राज्यों को वित्तीय संकट की ओर धकेल सकता है. उन्होंने राज्यों द्वारा बुनियादी सेवाओं में कम निवेश को भी एक बड़ी चुनौती बताया है.
बदलाव के दौर में नई जिम्मेदारी
यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब नीति आयोग में कई अहम बदलाव हुए हैं. सुमन बेरी पिछले चार वर्षों से उपाध्यक्ष थे, जबकि हाल ही में CEO बीवीआर सुब्रह्मण्यम पद छोड़ चुके हैं. ऐसे में लाहिड़ी की एंट्री को नीति आयोग के लिए नए दिशा-निर्देशन और मजबूती के रूप में देखा जा रहा है.
अशोक कुमार लाहिड़ी के नेतृत्व में नीति आयोग से आर्थिक सुधार, वित्तीय नीति और संस्थागत सुधारों को नई गति मिलने की उम्मीद है. सरकार के “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने में उनका अनुभव अहम भूमिका निभा सकता है.
एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था संचालन में निरंतरता बनाए रखने के लिए की गई है. साथ ही, एयरपोर्ट के निर्माण और विकास से जुड़े सभी काम तय योजना के अनुसार जारी रहेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
नोइडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) ने अपने शीर्ष प्रबंधन में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) नीतू समरा को अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है. यह फैसला नियामकीय दिशा-निर्देशों के बाद लिया गया है.
नियमों के चलते हुआ नेतृत्व परिवर्तन
एयरपोर्ट की ओर से जारी बयान के मुताबिक, बयूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने स्पष्ट किया है कि भारत में किसी भी एयरपोर्ट का CEO भारतीय नागरिक होना जरूरी है. इसी कारण प्रबंधन में तत्काल बदलाव किया गया.
क्रिस्टोफ श्नेलमैन को नई जिम्मेदारी
स्विट्जरलैंड के नागरिक क्रिस्टोफ श्नेलमैन, जो अगस्त 2020 से सीईओ के पद पर थे, अब बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे. इस पद पर वे रणनीतिक योजना और परियोजना की निगरानी में योगदान देते रहेंगे.
तुरंत प्रभाव से संभाला पदभार
नीतू समरा ने तत्काल प्रभाव से अंतरिम CEO का पद संभाल लिया है. वह इस भूमिका में तब तक रहेंगी, जब तक बोर्ड स्थायी CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेता.
समरा अक्टूबर 2021 से एयरपोर्ट के CFO के रूप में जुड़ी हुई हैं.
परियोजना पर नहीं पड़ेगा असर
एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यवस्था संचालन में निरंतरता बनाए रखने के लिए की गई है. साथ ही, एयरपोर्ट के निर्माण और विकास से जुड़े सभी काम तय योजना के अनुसार जारी रहेंगे.
देश की अहम ग्रीनफील्ड परियोजना
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश में विकसित हो रही एक बड़ी ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना है. इसके अलावा, यह परियोजना कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी.
बड़ा एविएशन हब बनने की तैयारी
यह एयरपोर्ट चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है और इसे भारत के प्रमुख आगामी एविएशन हब्स में गिना जा रहा है. यह देश के एयरपोर्ट विस्तार कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
नियामकीय बदलावों के चलते किया गया यह नेतृत्व परिवर्तन अस्थायी है, लेकिन इससे परियोजना की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ने की उम्मीद है. आने वाले समय में स्थायी CEO की नियुक्ति के साथ एयरपोर्ट के विकास को और गति मिलने की संभावना है.
भल्ला के पास 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिसमें सेल्स, मार्केटिंग और जनरल मैनेजमेंट के विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर (Dabur) ने अपने इंडिया बिजनेस के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की है. कंपनी ने हरजीत एस भल्ला को इस अहम जिम्मेदारी के लिए चुना है. नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, हरजीत एस भल्ला को 23 अप्रैल 2026 से डाबर के इंडिया बिजनेस का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है. इस पद पर वह कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा को रिपोर्ट करेंगे.
ग्लोबल अनुभव के साथ मजबूत प्रोफाइल
भल्ला के पास 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिसमें सेल्स, मार्केटिंग और जनरल मैनेजमेंट के विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने कई देशों में काम करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. डाबर से पहले, भल्ला The Hershey Company में ग्लोबल एग्जीक्यूटिव के तौर पर कार्यरत थे. वहां उन्होंने कई अहम अंतरराष्ट्रीय भूमिकाएं निभाईं और कंपनी के विस्तार में योगदान दिया.
यूनिलीवर से की थी करियर की शुरुआत
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत Unilever के साथ की थी, जहां 2000 से 2016 तक विभिन्न सेल्स और मार्केटिंग भूमिकाओं में काम किया. इस दौरान 2009 से 2012 के बीच उन्होंने मॉस्को में मार्केटिंग डायरेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई.
मेट्रो कैश एंड कैरी में भी निभाई अहम भूमिका
इसके बाद 2016-17 में उन्होंने Metro Cash & Carry में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के रूप में काम किया और कंपनी के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य भी रहे.
डाबर के लिए नई दिशा की उम्मीद
हरजीत एस भल्ला की नियुक्ति को डाबर के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है. उनके व्यापक अनुभव और वैश्विक दृष्टिकोण से कंपनी को भारत में अपने बिजनेस को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.