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जस्टिस एन.वी. रमना की पुस्तक ‘Narratives off the Bench’ का विमोचन: न्यायपालिका के विचारों और मूल्यों की अनूठी झलक

यह पुस्तक जस्टिस एन.वी. रमना के जीवन अनुभवों, विचारों और न्याय व्यवस्था के प्रति उनके दृष्टिकोण को सामने लाकर न्याय के व्यापक मायनों पर पुनर्विचार का अवसर प्रदान करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के DIAC ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. रमना द्वारा लिखित चिंतनशील कृति Narratives off the Bench: A Judge Speaks का औपचारिक रूप से विमोचन किया गया. इस अवसर पर न्यायपालिका के कई प्रमुख सदस्य भी मौजूद रहे. यह कार्यक्रम ईस्टर्न बुक कंपनी (EBC) द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश नामित जस्टिस बी.आर. गवई और विशिष्ट अतिथि के रूप में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ भी शामिल हुए.

यह पुस्तक केवल भाषणों का संग्रह नहीं, बल्कि एक गहन अभिव्यक्ति भी है, जो जस्टिस रमना के छात्र नेता, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता, पत्रकार, वकील और न्यायाधीश के रूप में विविध अनुभवों से उत्पन्न विचारों को दशकों में समेटती है. इस खास मौके पर जस्टिस रमना ने कहा  “न्यायपालिका केवल विवादों का निपटारा करने वाला मंच नहीं है. यह संवैधानिक नैतिकता का प्रतीक है और आम आदमी के लिए आशा की अंतिम शेष जगहों में से एक है,” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक कोई कानूनी टीका नहीं है, बल्कि यह उनके अवलोकनों, चिंतन और आंतरिक संवादों की अभिव्यक्ति है.

जस्टिस बी.आर. गवई ने अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस रमना की सुलभता और मानवीय दृष्टिकोण की सराहना की. जस्टिस गवई ने कहा “वे लोगों के बीच जाने में, लोगों से मिलने में विश्वास रखते थे. मैं मानता हूं कि वे वास्तव में लोगों के मुख्य न्यायाधीश थे.”  उन्होंने न्याय के उस दृष्टिकोण की प्रशंसा की जिसमें पहुंच और समावेशन को प्राथमिकता दी गई थी.

जस्टिस सूर्यकांत ने कार्यक्रम में बोलते हुए, न्यायपालिका और समाज के बीच संवाद को गहरा करने में इस पुस्तक की भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कहा “न्याय केवल कानूनी टीकाओं या पाठ्यपुस्तकों में बंद नहीं है. यह एक सुप्त शक्ति है, जिसे न्यायाधीशों को जीवन देना और जागृत करना होता है.”  उन्होंने संवैधानिक संतुलन के मूल्यों का भी उल्लेख किया, और बी.आर. अंबेडकर के उन शब्दों की प्रतिध्वनि की कि एक अच्छा संविधान भी केवल उतना ही अच्छा होता है जितने अच्छे लोग उसे लागू करते हैं.

जस्टिस विक्रम नाथ ने न्यायिक अवसंरचना में सुधार की अत्यंत आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने जस्टिस रमना द्वारा डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण के समर्थन को रेखांकित करते हुए कहा कि रमना के एक महत्वपूर्ण प्रस्तावराष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना निगम की स्थापना की ओर ध्यान आकर्षित किया. “भले ही वे भवनों और प्रणालियों की बात करते हैं, लेकिन उनका ध्यान हमेशा न्याय की तलाश करने वाले व्यक्ति पर केंद्रित रहता है.”
बौद्धिक विमर्श के बीच, समकालीन भू-राजनीतिक तनावों का भी उल्लेख हुआ. जस्टिस रमना ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “यह अत्यंत चिंताजनक है... आतंकवाद फैलाने वालों को पहले ही एक सख्त संदेश दिया जा चुका हैय देश के नागरिकों की रक्षा के लिए हम सभी सरकार का समर्थन करेंगे.”

जस्टिस सूर्यकांत ने ऑपरेशन सिंदूर पर संक्षेप में बात करते हुए सीमाओं के पार राष्ट्रविरोधी खतरों को समाप्त करने में सशस्त्र बलों पर गर्व व्यक्त किया. उन्होंने कहा 'Narratives off the Bench’ का विमोचन केवल एक पुस्तक का अनावरण नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका की उस भूमिका की पुनः पुष्टि है, जिसमें वह जनता से संवाद करती है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करती है. इस संकलन के माध्यम से, जस्टिस रमना न्यायपालिका के अंतःकरण की एक झलक प्रस्तुत करते हैं, जो न्याय, संवैधानिक अखंडता और सार्वजनिक सेवा पर गहरा चिंतन करने के लिए प्रेरित करती है.


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