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भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा में पार किया 200 गीगावॉट का आंकड़ा, 500 GW लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है देश: S&P Global
नई रिपोर्ट में नीति समर्थन, तकनीकी नवाचार और ऊर्जा सुरक्षा को बताया प्रगति का प्रमुख आधार; 2050 तक 77% क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से आने का अनुमान
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है. S&P ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स की नई रिपोर्ट के अनुसार, देश की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 200 गीगावॉट के पार पहुंच गई है. यह उपलब्धि भारत के 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता (जिसमें हाइड्रो भी शामिल है) के संशोधित लक्ष्य की दिशा में जारी तेज़ प्रगति को दर्शाती है.
रिपोर्ट में इस सफलता का श्रेय नीति समर्थन, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में नवाचार और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को दिया गया है. भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा ऐसे समय में तेज़ हो रही है जब बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, वैश्विक बाज़ार में अस्थिरता है और व्यापार एवं आपूर्ति शृंखला में बदलाव हो रहे हैं.
भारत ने पहले 2022 तक 175 गीगावॉट की क्षमता का लक्ष्य रखा था, लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाने के बाद इसे 2030 तक 450 गीगावॉट और फिर संशोधित कर 500 गीगावॉट कर दिया गया. S&P ग्लोबल के अनुसार, यह लक्ष्य अभी भी हासिल किया जा सकता है, लेकिन अगर कार्यान्वयन की गति धीमी रही तो इसे 2032 तक बढ़ाया जा सकता है.
“भारत आज भी कोयले पर भारी निर्भर है, लेकिन ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है,” रिपोर्ट में S&P ग्लोबल के ऊर्जा संक्रमण प्रमुख एडुआर्ड साला डी वेद्रुना के हवाले से कहा गया. “सौर, पवन और जलविद्युत जैसे विकल्पों में निवेश और नीति ढांचे इस बदलाव को गति दे रहे हैं.”
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अंतराल (intermittency) को संभालने और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा भंडारण में और निवेश की ज़रूरत है. S&P ग्लोबल की पॉवर और रिन्यूएबल्स रिसर्च प्रमुख जेनी यैंग के अनुसार, 2050 तक वैश्विक बिजली की मांग में 80% से अधिक वृद्धि की उम्मीद है, और भारत इस बढ़ती मांग को नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से पूरा कर रहा है. “2024 में भारत की कुल स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 47% और उत्पादन में 24% थी. 2050 तक यह हिस्सेदारी क्रमशः 77% और 66% तक पहुंचने का अनुमान है,” यैंग ने कहा.
2050 तक वैश्विक स्तर पर 96% नेट क्षमता वृद्धि नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज के ज़रिए होने का अनुमान है, हालांकि रिपोर्ट के अनुसार ग्रिड स्थिरता के लिए थर्मल उत्पादन की भूमिका निकट भविष्य में बनी रहेगी.
रिपोर्ट में तेल बाज़ार की स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया है. भू-राजनीतिक घटनाओं जैसे शुल्क नीतियों, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्षों का कच्चे तेल की कीमतों और मांग पर प्रभाव पड़ रहा है.
S&P ग्लोबल के ऑयल मार्केट्स रिसर्च प्रमुख प्रेमाशीष दास ने कहा, “भारत वैश्विक तेल मांग वृद्धि में अग्रणी रहेगा, लेकिन यह इसकी आयात निर्भरता को भी बढ़ा देगा. भविष्य के जोखिमों को कम करने के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति को विविध बनाना आवश्यक होगा.”
S&P ग्लोबल में शिपिंग रिसर्च प्रमुख राहुल कपूर ने कहा, “भारत की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि निवेश की दिशा उभरते बाज़ारों की ओर मुड़ रही है. लेकिन वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता निवेश को प्रभावित कर सकती है और पूंजी प्रवाह में देरी कर सकती है.”
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