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अब चावल होगा सस्ता! जानिए सरकार ने बेतहाशा बढ़ती कीमतों के लिए क्या कर दिया इंतजाम
भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है. भारत ने 2021-22 में 150 से ज्यादा देशों को गैर-बासमती चावल एक्सपोर्ट किया है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: देश में चावल की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने अलग अलग ग्रेड्स के चावलों के एक्सपोर्ट पर 20 परसेंट एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दिया है. इस कदम से देश में चावल की सप्लाई बढ़ेगी और जिससे चावल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है.
किन चावलों के एक्सपोर्ट पर लगी ड्यूटी
रेवेन्यू डिपार्टमेंट की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक- सरकार ने मौजूदा खरीफ सीजन में धान की फसल के रकबे में गिरावट के चलते घरेलू सप्लाई को बढ़ावा देने के लिए आंशिक पके चावल (Parboiled rice) को छोड़कर गैर-बासमती चावल पर 20 परसेंट की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने का फैसला किया है. नोटिफिकेशन के मुताबिक 'सेमी मिल्ड या फुल मिल्ड चावल, चाहे पॉलिश हो या ग्लेज्ड (आंशिक पके चावल और बासमती चावल के अलावा)' के निर्यात पर भी 20 परसेंट की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है.
भारत चावल का बड़ा एक्सपोर्टर
वास्तव में देखा जाए तो चावल का उत्पादन करने वाले कई प्रमुख राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रेदश में औसत से कम बारिश हुई है, जिससे ये संभावना है कि चावल के उत्पादन पर इसका असर दिखे. हालांकि इसके पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि चावल के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाने का उसका कोई इरादा नहीं है. सरकार का कहना है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक है. भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है. वित्त वर्ष 2021-22 में भारत ने 21.2 मिलियन टन चावल का एक्सपोर्ट किया है. भारत ने 2021-22 में 150 से ज्यादा देशों को गैर-बासमती चावल एक्सपोर्ट किया है
लेकिन कम बारिश से उत्पादन घटने की आशंका
रेवेन्यू डिपार्टमेंट की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी 9 सितंबर से लागू है, कुछ राज्यों में खराब बारिश के कारण चालू खरीफ सीजन में धान की फसल का रकबा 6 परसेंट गिरकर 367.55 लाख हेक्टेयर रह गया है. चालू खरीफ सीजन के 26 अगस्त तक झारखंड (10.51 लाख हेक्टेयर), पश्चिम बंगाल (4.62 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (3.45 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (2.63 लाख हेक्टेयर), बिहार में भी धान का रकबा कम बताया गया है.
इससे पहले केंद्र सरकार ने गेहूं के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई थी. वहीं, चीनी के निर्यात को लेकर कुछ बड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं.
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