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जयप्रकाश एसोसिएट्स की दिवालिया बोली में अडानी समूह सबसे आगे, ₹16,000 करोड़ की पेशकश

सूत्रों के मुताबिक, Dalmia भारत दूसरे सबसे बड़े बोलीदाता के रूप में उभरा है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) की चल रही दिवालियापन समाधान प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है, जहां अडानी ग्रुप ने सबसे ऊंची बोली लगाकर इस कर्ज़ में डूबी कंपनी को अधिग्रहित करने की प्रक्रिया में अग्रणी स्थान हासिल कर लिया है, यह जानकारी बिजनेसवर्ल्ड को मामले से जुड़े सूत्रों ने दी. अडानी समूह ने जेएएल को खरीदने के लिए संभवतः 16,000 करोड़ रुपये की पेशकश की है, जो 57,000 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदारों के दावों से जूझ रही है. सूत्रों के मुताबिक, Dalmia भारत दूसरे सबसे बड़े बोलीदाता के रूप में उभरा है.

जयप्रकाश एसोसिएट्स एक बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जिसके पास रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में संपत्तियाँ हैं. कंपनी वर्तमान में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दिवालियापन प्रक्रिया से गुजर रही है. कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने 1 जुलाई, 2025 को बैठक की थी, जिसमें वेदांता, जिंदल पावर और पीएनसी इंफ्राटेक जैसे दिग्गज बोलीदाताओं द्वारा प्रस्तुत समाधान योजनाओं की समीक्षा की गई.

JAL के एक बयान के अनुसार, CoC बोली प्रस्तावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा कर रही है ताकि एक ऐसा समाधान योजना चुनी जा सके जो हितधारकों के लिए अधिकतम मूल्य सुनिश्चित करे और कंपनी के पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त करे. हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, अदाणी ग्रुप की ₹16,000 करोड़ की बोली ने उसे JAL की विविध परिसंपत्तियों के अधिग्रहण की दौड़ में सबसे आगे खड़ा कर दिया है.

अडानी ग्रुप, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में आक्रामक विस्तार के लिए जाना जाता है, JAL की सीमेंट और रियल एस्टेट परिसंपत्तियों को विशेष रूप से अपने इन क्षेत्रों में विस्तार के लिए रणनीतिक रूप से उपयुक्त मान रहा है. JAL का सीमेंट डिवीजन अदाणी के लिए खासा अहम है, जिसने अंबुजा सीमेंट्स और ACC जैसी कंपनियों के अधिग्रहण के माध्यम से अपने सीमेंट कारोबार का तेजी से विस्तार किया है.

JAL की दिवालियापन प्रक्रिया उसके लिए एक निर्णायक मोड़ है, क्योंकि कंपनी लंबे समय से भारी कर्ज़ और परिचालन संबंधी चुनौतियों से जूझ रही है. इस समाधान प्रक्रिया की सफलता से उसके कर्जदाताओं - जिनमें बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल हैं - को राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही इससे कंपनी को अपने संचालन को पुनर्गठित और पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी.

उद्योग विशेषज्ञ CoC की चर्चाओं के नतीजों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि विजेता बोली भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमेंट क्षेत्र के प्रतिस्पर्धी परिदृश्य को नया आकार दे सकती है. एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, “अगर अडानी  की बोली सफल होती है, तो यह सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में उसकी पकड़ को और मजबूत कर सकती है.”

CoC अगले कुछ दिनों में अपना अंतिम निर्णय ले सकती है, जिसके बाद समाधान योजना को लागू करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मंजूरी आवश्यक होगी. सभी हितधारक आशावादी हैं कि यह समाधान JAL के पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त करेगा और कर्जदाताओं के हितों की रक्षा करेगा. जैसे-जैसे बोली प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, अडानी समूह और उसके प्रतिस्पर्धियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, और इसका परिणाम भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और दिवालियापन परिदृश्य पर दूरगामी असर डाल सकता है.

अदाणी ग्रुप ने अब तक ₹6 लाख करोड़ से अधिक का निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर परिसंपत्तियों के विकास में किया है, जिसमें FY25 में अकेले ₹1.25 लाख करोड़ का निवेश शामिल है, जो उस वर्ष भारत के कुल इंफ्रास्ट्रक्चर व्यय का लगभग 11 प्रतिशत है. FY19 से अब तक समूह ने 60 से अधिक अधिग्रहण पूरे किए हैं, जिनमें कई संकटग्रस्त परिसंपत्तियाँ शामिल हैं — जैसे GVK के मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट्स, एस्सेल ग्रुप की वारोरा-कुरनूल ट्रांसमिशन लाइन, दीघी और कराईकल पोर्ट्स, एस्सार का 1200 मेगावॉट महान पावर प्लांट, अवंथा ग्रुप का 600 मेगावॉट कोरबा वेस्ट प्लांट, और रेडियस एस्टेट की टेन बीकेसी परियोजना — जिनके पुनरुद्धार से देश के रुके हुए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को जीवन मिला और कुल मिलाकर ₹1 लाख करोड़ के आर्थिक प्रभाव का अनुमान लगाया गया है.


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