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एक फैसले से बंदरगाहों पर फंसा 10 लाख टन चावल, खरीदार हटे पीछे, जानिए क्या है मामला
भारत हर महीने 20 लाख टन चावल बाहर भेजता है, इसमें ज्यादातर काकीनाडा और विशाखापत्तनम जैसे बंदरगाहों से एक्सपोर्ट होता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: भारतीय बंदरगाहों पर जहाजों पर चावल की लोडिंग बंद हो गई है, जिससे करीब 10 लाख टन अनाज वहां पर फंस गया है. Reuters के हवाले से छपी खबर के मुताबिक पांच एक्सपोर्टर्स ने बताया है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि खरीदारों ने कॉन्ट्रैक्ट प्राइस के ऊपर सरकार की ओर से लगाए गए 20 परसेंट एक्सपोर्ट ड्यूटी को देने से साफ इनकार कर दिया.
चावल एक्सपोर्ट पर सरकार की सख्ती
आपको बता दें कि भारत ने पिछले हफ्ते टूटे चावल के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया था साथ ही चावल के कई ग्रेड पर 20 परसेंट इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का भी ऐलान किया था. सरकार ने ये कदम घरेलू बाजार में चावल की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए उठाया था. ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (AIREA) के प्रेसिडेंट बी वी कृष्ण राव बताते हैं कि ड्यूटी आधी रात से ही लागू हो गई, खरीदारों ने ड्यूटी चुकाने से इनकार कर दिया तो हमने चावल की लोडिंग रोक दी.
बंदरगाहों पर फंसा चावल
आपको बता दें कि भारत हर महीने 20 लाख टन चावल बाहर भेजता है, इसमें ज्यादातर काकीनाडा और विशाखापत्तनम जैसे बंदरगाहों से एक्सपोर्ट होता है. ट्रेडर्स का अनुमान है कि करीब 7.5 लाख टन चावल बंदरगाहों पर पड़ा हुआ है, जिन पर शुक्रवार से 20 परसेंट ड्यूटी लगी है. जहां तक टूटे चावल पर बैन की बात है, भारत ने उन खेपों को लोड करने की इजाजत दी है, जिन्हें कस्टम को सौंप दिया गया है या जहां गुरुवार के नोटिफिकेशन से पहले जहाज लंगर डाला गया था. लेकिन लोडिंग 15 सितंबर से पहले पूरी करनी होगी.एक डीलर के मुताबिक कई बंदरगाहों पर पड़े कम से कम 3.5 लाख टन टूटे हुए चावल इन पैरामीटर्स को पूरा नहीं करते हैं और कार्गो को वापस भीतरी इलाकों में ले जाना संभव नहीं है.
नियमों में ढील की मांग
भारत 150 से ज्यादा देशों को चावल का निर्यात करता है और शिपमेंट में किसी भी कमी से खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ेगा, जो पहले से ही सूखे, गर्मी और यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के कारण बढ़ रहे हैं. एक्स्पोर्टर्स का कहना है कि बंदरगाहों पर फंसे हुए चावल के शिपमेंट चीन, सेनेगल, सेनेगल और जिबूती जा रहे थे, जबकि सफेद चावल के अन्य ग्रेड बेनिन, श्रीलंका, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात में खरीदारों द्वारा खरीदे गए थे. AIREA ने सरकार से 7.5 लाख टन सफेद चावल और 5 लाख टन टूटे चावल के ट्रांजीशनल कार्गो के लिए नए नियमों में ढील देने को कहा है.
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