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Zomato के इन दो बड़े अधिकारियों ने क्यों दिया इस्तीफा? पढ़ें Inside Story
जोमैटो के को-फाउंडर मोहित गुप्ता और न्यू इनीशिएटिव हेड एवं पूर्व फूड डिलीवरी चीफ राहुल गंजू कंपनी छोड़ चुके हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. एक-एक करके उसके तीन बड़े अधिकारी नौकरी छोड़ चुके हैं. इसमें कंपनी के को-फाउंडर मोहित गुप्ता, न्यू इनीशिएटिव हेड एवं पूर्व फूड डिलीवरी चीफ राहुल गंजू और Zomato के इंटरसिटी लीजेंड्स सर्विस के हेड सिद्धार्थ झावर शामिल हैं. हालांकि, गुप्ता का जाना सबसे ज्यादा चौंकाने वाला रहा, क्योंकि उनकी कंपनी के फाउंडर दीपिंदर गोयल के साथ काफी अच्छी ट्यूनिंग थी.
यहां से शुरू हुई नई कहानी
मोहित गुप्ता को कंपनी की रीढ़ कहा जाता था. को-फाउंडर पंकज चड्ढा के जाने के तुरंत बाद, 2018 में फूड डिलीवरी सेगमेंट के हेड के तौर पर Zomato के साथ जुड़े थे. 2021 में उन्हें कंपनी में को-फाउंडर का दर्जा मिला, इसके बाद वह कंपनी के ऑनलाइन ऑर्डरिंग बिज़नेस के अलावा डाइनिंग, मार्केटिंग, हाइपरप्योर सहित लगभग हर विभाग को देख रहे थे. बताया जा रहा है कि चूंकि गुप्ता और गंजू कंपनी के डे-टू-डे बिज़नेस को अच्छे से संभाल रहे थे, इस वजह से टॉप मैनेजमेंट को लगा कि दीपिंदर गोयल को अपना फोकस नए स्ट्रेटेजिक और लॉन्ग टर्म इनिशिएटिव पर करना चाहिए.
नहीं मिला बड़ा ग्रोथ आईडिया
हालांकि, गोयल अधिग्रहण जैसे कामों में व्यस्त हो गए और इस दौरान कंपनी किसी बड़े ग्रोथ आईडिया के साथ सामने नहीं आ सकी. सितंबर तिमाही के दौरान Zomato की सेल्स सिर्फ 22 फीसदी बढ़कर 6,631 करोड़ रुपए रही, जो इसके पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 5,410 करोड़ रुपए थी. पिछले साल सितंबर तिमाही में कंपनी की बिक्री में 158 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई थी. इंटर-सिटी जैसे कुछ कांसेप्ट के अलावा, जोमैटो में कुछ नया देखने को नहीं मिला. बता दें कि इंटर-सिटी फूड डिलीवरी बिजनेस का मतलब है खाने की एक शहर से दूसरे शहर में डिलीवरी. उदाहरण के तौर पर आगरा के मशहूर पेठे की दिल्ली में डिलीवरी को इंटर-सिटी डिलीवरी कहा जाएगा.
हाई रिस्क प्रोजेक्ट का एंगल
बताया जाता है कि Zomato को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उदाहरण के तौर पर अपने साथ जुड़े व्यापारियों की लिस्ट को बढ़ाना, रेस्टोरेंट्स को लंबे समय तक अपने साथ जोड़े रहना आदि. जब दीपिंदर गोयल को लगा कि सबकुछ उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं हो रहा था, तो उन्हें वापस अपने पुराने रोल में आना पड़ा. यह भी कहा जा रहा है कि Zomato किसी हाई रिस्क प्रोजेक्ट पर काम करना चाहता था, जो शायद गोयल को पसंद नहीं आया. इसके बाद से उन्होंने चीजों को अपने हाथों में लेना शुरू कर दिया. कर्मचारियों से सुबह 9 बजे ऑफिस आने को कहा गया, इसमें लीडरशिप ग्रुप भी शामिल था. इसके अलावा, उन्होंने गुप्ता की टीम से डायरेक्ट कनेक्ट होना शुरू कर दिया. यानी वो गुप्ता के बजाये सीधे उनकी टीम से सवाल जवाब करने लगे.
ऐसा होगा, इसकी उम्मीद नहीं थी
दीपिंदर गोयल के इस कदम से काफी हद तक साफ हो गया था कि दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी हैं. मामले पर करीब से नजर रखने वालों का मानना है कि कंपनी को कैसे चलाया जाए, इस पर गोयल और गुप्ता के बीच मतभेद होने लगे थे. मीटिंग में भी दोनों के बीच की दूरियां कर्मचारियों ने नोटिस की थीं. राहुल गंजू के मामले में भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी. उन्हें गुप्ता का करीबी माना जाता था. इस वजह से शायद दीपिंदर गोयल की नजरों में वह भी खटकने लगे थे. हालांकि, कई कर्मचारियों मानना है कि भले ही गोयल और गुप्ता में मतभेद सार्वजनिक होने लगे थे, लेकिन फिर भी किसी ने नहीं सोचा था कि गोयल उन्हें इस तरह कंपनी से जाने देंगे.
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